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पोषण अभियान की सफलता: आंगनबाड़ी की देखरेख में शिवांश हुआ स्वस्थ

समन्वित प्रयासों और संतुलित आहार से मिला कुपोषण पर विजय रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में चल रहे प्रयासों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिख रहा है। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के ग्राम चौनपुर के आंगनबाड़ी केन्द्र नवापारा से जुड़े बालक शिवांश ने आंगनबाड़ी सेवाओं और परिवार के समन्वित प्रयासों से कुपोषण पर विजय पाई। शिवांश का जन्म 12 जुलाई 2024 को हुआ था। जन्म के समय उसका वजन 2.700 किलोग्राम था। जन्म के बाद  पोषण की उचित देखभाल न होने से उसका वजन घटकर कुपोषण की श्रेणी में पहुँच गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ने नियमित वजन मापन के दौरान स्थिति की पहचान की और तत्काल गृहभेंट कर परिवार को उचित परामर्श दिया। श्रीमती लालसा कुमारी को समझाया गया कि वे अपने भोजन में अंकुरित अनाज, मौसमी फल, मुनगा भाजी, दूध, हरी सब्जियाँ और प्रोटीनयुक्त भोजन शामिल करें। बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी आहार जैसे दलिया, खिचड़ी, गाढ़ी दाल, पंजीरी, लपशी और हलुआ प्रतिदिन 4-5 बार हल्के रूप में देने की सलाह दी गई। आंगनबाड़ी केन्द्र से मिलने वाले रेडी टू ईट आहार का नियमित सेवन कराया गया। साथ ही परिवार को स्वच्छता, टीकाकरण और समय पर वजन मापन के लिए प्रेरित किया गया।               शिशु अवस्था के दौरान तेज़ी से विकास और वृद्धि के लिए उचित पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने के बाद, स्तनपान बंद करने वाले या पूरक आहार देना ज़रूरी है। ये आहार पोषक तत्वों से भरपूर होने चाहिए, जिनमें मसले हुए फल, सब्ज़ियाँ और अनाज शामिल हों, ताकि शिशु को पर्याप्त विटामिन और खनिज मिल सकें। लगातार देखरेख और पौष्टिक आहार के सेवन से शिवांश का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगा। कुछ ही महीनों में उसका वजन सामान्य श्रेणी में पहुँच गया। अब वह स्वस्थ और सक्रिय है।             यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि आंगनबाड़ी की सेवाओं, मितानिन और परिवार को संयुक्त प्रयास करने से कुपोषण जैसी चुनौती पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि शिवांश जैसी प्रेरक कहानियाँ बताती हैं कि जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और पोषण आहार के नियमित उपयोग से “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो रहा है।

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ ने विभागीय अधिकारी के साथ कार्यालय में घुसकर अभद्रता एवं तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की

मुख्यमंत्री से दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग रायपुर  छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ के अध्यक्ष श्री बालमुकुंद तंबोली ने छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय, नवा रायपुर में विभागीय अपर संचालक श्री संजीव तिवारी के साथ हुई अभद्रता, झूमा-झटकी, गाली-गलौज, तोड़फोड़ और धमकी की घटना की कटु शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक जनसंपर्क अधिकारी पर हमला और शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने का ही मामला नहीं हैं, बल्कि पूरे जनसंपर्क विभाग की संस्थागत गरिमा पर सीधा आघात है। छत्तीसगढ़ जनसम्पर्क अधिकारी संघ के अध्यक्ष श्री तंबोली ने इस घटना को योजनाबद्ध और सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि हमलावरों का एक साथ शासकीय कार्यालय में घुसना, वरिष्ठ अधिकारी के साथ अभद्रता करना, सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त करना और खुलेआम धमकियां देना इस बात का प्रमाण है कि कुछ असामाजिक तत्व पत्रकारिता की आड़ में गुंडागर्दी कर रहे हैं।   श्री तंबोली ने कहा कि जनसंपर्क विभाग शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य करता है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ न सिर्फ शासन और समाज के लिए कार्य करते हैं बल्कि पत्रकारों के हित में सदैव तत्पर रहते हैं, ऐसी स्थिति में पत्रकारिता के नाम पर कानून को हाथ में लेने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की घटनाएँ केवल किसी अधिकारी की व्यक्तिगत गरिमा पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर हमला हैं। संघ ने मांग की है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। घटना में शामिल व्यक्तियों पर भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। छत्तीसगढ़ जनसम्पर्क अधिकारी संघ के अध्यक्ष श्री तंबोली ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी जनसंपर्क विभाग के भी भारसाधक मंत्री हैं, उनके नेतृत्व में जनसंपर्क विभाग के प्रत्येक अधिकारी कर्मचारी पूरी निष्ठा से कार्य करते हैं, ऐसे में माननीय मुख्यमत्री जी से आग्रह है कि वह इस विषय में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की कृपा करें, साथ ही विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुरक्षा एवं अपना संरक्षण प्रदान करें। संघ ने यह भी निर्णय लिया है कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से प्रतिनिधिमंडल भेंट करेगा। संघ के अध्यक्ष श्री तंबोली ने कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनसंपर्क विभाग का प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी राज्यव्यापी विरोध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

नक्सलवाद पर बहस: मंत्री श्यामबिहारी और पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज के बयान

रायपुर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर सियासत गरमाने लगा है. माड़ डिवीजन के 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. इस मामले में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, यह डबल इंजन सरकार की इच्छाशक्ति का परिणाम है. पिछली सरकार में नक्सलवाद फला, फूला और बढ़ता गया. कांग्रेस की सरकार में इच्छाशक्ति की कमी थी. इच्छाशक्ति होती तो नक्सलवाद का सफाया हो जाता. वहीं नक्सलवाद को लेकर पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि 5 साल तक नक्सलवाद को सिमटते हुए एक पिनपॉइंट पर हमने ला दिया था. अगर हमारी सरकार बनती तो उस पिनपॉइंट को खत्म कर देते. डबल इंजन सरकार नहीं होते हुए भी नक्सलवाद खत्म हो जाता. नक्सलवाद खात्मे पर पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, 15 साल रमन सरकार ने नक्सल उन्मूलन का काम नहीं किया. भूपेश सरकार में नक्सल उन्मूलन और विकास हुआ. नक्सल क्षेत्रों में 70 कैंप भूपेश सरकार में खुले. विश्वास और विकास का नारा भूपेश सरकार ने दिया. अगर हमारी सरकार बनती तो डबल इंजन सरकार नहीं होते हुए भी नक्सलवाद खत्म हो जाता. प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गोमाता को राजमाता का दर्जा देने की मांग की है. इस पर मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, गाय की पूजा सदियों से माता के रूप में की जा रही है. गोमाता को राजमाता का दर्जा दिया जाए तो खुशी की बात है. मुझे लगता है कि इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होगी. सनातन संस्कृति में हमेशा गोमाता की जय का नारा लगता है. पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, बोलने और दुष्प्रचार करने में भाजपा माहिर है. जब से सृष्टि बनी है तब से गौ माता को गौ माता ही कहते हैं. यह तो सामान्य प्रक्रिया शुरू से चल रही है. मंत्री ने मुगलों से की कांग्रेस की तुलना कांग्रेस के घोटालों को लेकर हर दिन हो रहे खुलासे पर मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस की तुलना मुगलों से की. घोटालों को लेकर उन्होंने कहा, रहीम ने कहा है – खैर, खून, खांसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान, रहीमन दाबे न दबे, जानत सकल जहान. आपराधिक चीजों, भ्रष्टाचार को तत्काल कोई नहीं कहता, लेकिन एक न एक दिन ये बातें खुलकर सामने आती है. कभी मुगलों और टीपू सुल्तान को महान बताया जाता था. आज सबको पता चल रहा है ये लूटेरे थे, लूटने आए थे. इसी तरह से कांग्रेस के घोटाले भी खुलकर सामने आ रहे हैं. पूर्व गृह मंत्री ने कहा – मंत्री को इतिहास की जानकारी नहीं मंत्री ने कांग्रेस की तुलना मुगलों से की. इस पर पलटवार करते हुए पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, श्यामबिहारी जायसवाल को भारत वर्ष के इतिहास की जानकारी नहीं है. पहले जानकारी लें, इतिहास पढ़ें कि आजादी के पहले क्या था. अंग्रेजों के शासन के पहले क्या था. उसके बाद मुगलों की तुलना कांग्रेस से करे. कांग्रेस को भाजपा के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है. कांग्रेस सरकार में हर क्षेत्र में अंधाधुन भ्रष्टाचार हुआ : श्यामबिहारी कांग्रेस का कहना है कि सरकार 32 लाख राशनकार्ड धारियों के राशन कार्ड निरस्त करना चाहती है. इस मामले में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, कांग्रेस चाहती है कि जंगलराज वापस आए. Kyc की वजह से डायरेक्ट पैसा जा रहा है. ये फिर से चाहते हैं कि 100 रुपए भेजे और 15 पैसे जाए. कांग्रेस के समय में हर क्षेत्र में अंधाधुन भ्रष्टाचार हुआ है. सरकार जब भी उसे दुरुस्त करना चाहती है उनको पीड़ा होती है.

कलेक्टर ने किया जिला कोषालय का निरीक्षण

बिलासपुर, कलेक्टर संजय अग्रवाल ने  कलेक्टोरेट परिसर स्थित जिला कोषालय का अर्धवार्षिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कोषालय की समस्त व्यवस्थाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन करते हुए डबल लॉक का भौतिक सत्यापन, संबंधित पंजियों का परीक्षण तथा स्टाम्प, टिकट, बिल पासिंग,पेंशन भुगतान एवं लेखा कार्यों की समीक्षा की। कलेक्टर ने कोषालय में अभिलेखों के सुरक्षित रखरखाव, दस्तावेजों के अद्यतन एवं वित्तीय अनुशासन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कार्य की पारदर्शिता, सटीकता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस अवसर पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी बसंत गुलेरी , डिप्टी कलेक्टर रजनी भगत, सहायक कोषालय अधिकारी सुजीत कुमार पात्रे, खजांची  ज्ञानू भारद्वाज,  सुरेंद्र देवांगन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

मनोविकास केंद्र के विद्यार्थियों की पर्पल फेस्ट 2025 में एंट्री, कलेक्टर ने दी शुभकामनाएँ

9 से 12 अक्टूबर  तक गोवा में आयोजित पर्पल फेस्ट में करेंगे योगा प्रदर्शन रायपुर, मनोविकास केन्द्र बलौदाबाजार के 5 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित पर्पल फेस्ट 2025 में भाग लेने के लिए हुआ है। यह आयोजन  9 से 12 अक्टूबर 2025 तक गोवा मे  किया जा रहा है।  फेस्ट में हिस्सा लेने  गोवा रवाना होने से पहले गुरुवार को कलेक्टर दीपक सोनी से चयनित बच्चों ने मुलाक़ात की। कलेक्टर श्री सोनी ने मनोविकास केंद्र के बच्चों का फेस्ट के लिए चयन होने पर जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्हें शुभकामनायें दी। मनोविकास केन्द्र  के नोडल अधिकारी आशा शुक्ला ने बताया कि केंद्र के छात्र  कुलदीप निर्मलकर, तुषार सेन पुष्कर कुमार साहू,लोकेश कुमार वर्मा एवं किशन यादव का चयन पर्पल फेस्ट 2025 में भाग लेने के लिए हुआ है। इनके साथ  योग शिक्षक श्री ललित कुमार साहू तथा केन्द्र प्रमुख श्री दुर्गा शंकर पटनायक भी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।चयनित विद्यार्थी मनोविकास केन्द्र एवं बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए 15 मिनट का योग प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगे जो दिव्यांगजनों की क्षमताओं और समावेशन की भावना को उजागर करेगा। यह भागीदारी मनोविकास पहल और  जिला प्रशासन के लिए गर्व का क्षण होग़ा तथा इन विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय  स्तर पर पहचान और अनुभव प्रदान करेगी। पर्पल फेस्ट 2025 को दिव्यांगजनों की रचनात्मकता, प्रतिभा और सशक्तिकरण के एक जीवंत उत्सव के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग,गोवा सरकार के राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन कार्यालय, तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय एवं संयुक्त राष्ट्र भारत के सहयोग से किया जा रहा है।पर्पल फेस्ट का उद्देश्य दिव्यांगजनों के समावेशन, पहुंच और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। यह महोत्सव समाज में जागरूकता फैलाने, उनकी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने और एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करता है जहां प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और समान अवसरों के साथ जीवन जीने का अधिकार हो। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर दीपक सोनी के मार्गदर्शन में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विकास और पुनर्वास हेतु जिला प्रशासन द्वारा बलौदाबाजार में  सीएसआर मद  से मनोविकास केंद्र संचालित किया जा रहा  है। इस केंद्र में 45 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षा, चिकित्सा सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और समग्र विकास की सुविधाएं प्रदान किया जा रहा है। यह केंद्र जनवरी 2025 से शुरू हुआ है और अल्प समय मे ही बेहतर परिणाम सामने आने लगा है। विशेष शिक्षा, थेरेपी सेवाएं व्यावसायिक प्रशिक्षण,मनोवैज्ञानिक परामर्श और खेल व सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित की जा राही हैं। साथ ही बच्चों को आत्मनिर्भर बनने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाता है।

युवक की हिरासत में मौत: हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर लगाई चेतावनी, परिवार को मुआवजा देने का आदेश

बिलासपुर पुलिस हिरासत में युवक की संदिग्ध मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, जहां किसी व्यक्ति की मौत पुलिस हिरासत में होती है, वहां मृत्यु का कारण स्पष्ट करना राज्य की जिम्मेदारी है। ऐसा न करना जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। मौत के हालात यह दिखाते हैं कि मृतक को अमानवीय यातना दी गई थी और यह मामला कस्टोडियल बर्बरता का उदाहरण है। पूरा मामला धमतरी जिले के अर्जुनी थाना का है। याचिकाकर्ता दुर्गा देवी कैठोलिया ने बताया कि उनके पति दुर्गेंद्र कैठोलिया को 29 मार्च 2025 को धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 31 मार्च को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां वे पूरी तरह स्वस्थ थे। शाम 5 बजे उन्हें फिर से थाने में रखा गया, जहां कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में थर्ड डिग्री टार्चर दिया, जिससे दुर्गेंद्र की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 24 चोटों का है जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 24 पूर्व-मृत्यु चोटों का जिक्र है। मौत का कारण दम घुटने से सांस न ले पाने को बताया गया। दूसरे दिन पुलिस ने परिवार को बताया कि दुर्गेंद्र बीमार पड़ गए थे और अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन बाद में पता चला कि उनकी पहले ही मौत हो चुकी थी। शव मिलने पर परिवार ने शरीर पर चोट के निशान देखकर हंगामा किया और उच्चाधिकारियों से शिकायत की। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सभी साक्ष्य साफ बताते हैं कि यह मौत पुलिस की यातना से हुई है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सम्मान के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मौत के हालात यह दिखाते हैं कि मृतक को अमानवीय यातना दी गई थी। मृतक की पत्नी और माता-पिता को मुआवजा देने के निर्देश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक की पत्नी दुर्गा देवी को तीन लाख की राशि दी जाए, ताकि वह और उनके दो नाबालिग बच्चों की देखभाल कर सकें। मृतक के माता-पिता को प्रत्येक एक लाख दिए जाएं। यह भुगतान 8 हफ्ते के भीतर किया जाए अन्यथा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।

CM साय शामिल हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यशाला में, भूजल संकट पर किया विचार

रायपुर राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में गुरुवार को आयोजित जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जल संरक्षण आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सुजलाम भारत अभियान के माध्यम से जल संसाधन, संरक्षण और एकत्रीकरण की दिशा में सार्थक कार्य हो रहे हैं। यह अभियान केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बनना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस कार्यशाला से जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए विचार और अनुभव साझा होंगे, जिससे यह कार्यक्रम आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भी जल संरक्षण और पुनर्भरण (रीचार्ज) के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। पिछले वर्ष जब प्रदेश के कई डैम और जलाशयों का स्तर चिंताजनक रूप से घट गया था, तब सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए टैंकरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित की थी। CM साय ने आगे बताया कि इस वर्ष भगवान की कृपा से समय पर और पर्याप्त बारिश हुई, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर सुधरा है। उन्होंने कहा कि जल का दोहन लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में अब यह समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वह जल संरक्षण को केवल नारा नहीं, बल्कि आंदोलन का स्वरूप दे। मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हमें गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।” कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, जल संरक्षण कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने जल संरक्षण के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे जल संरक्षण अभियानों की प्रगति की समीक्षा भी की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाए। जल संरक्षण के मुद्दे पर बोलने के साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सल गतिविधियों पर लगातार नियंत्रण पाया जा रहा है। हाल ही में 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संकल्प है कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण अंत किया जाए। इस दिशा में राज्य और केंद्र मिलकर ठोस कदम उठा रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

राज्यपाल डेका को ‘प्रारंभ‘ पत्रिका का विशेषांक भेंट

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका को आज राजभवन में ‘‘सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट‘‘ द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘‘प्रारंभ‘‘ की प्रति भेंट की गई। विशेष पिछड़ी जनजातियों पर केंद्रित इस विशेषांक का संपादन मानवविज्ञानी एवं राज्यपाल के उप सचिव डॉ. रूपेन्द्र कवि द्वारा किया गया है।           इस विशेषांक में विशेष पिछड़ी जनजातियों समुदायों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक स्थिति पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है, तथा इससे नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को उपयोगी जानकारी मिलेगी।         राज्यपाल डेका ने पत्रिका की विषयवस्तु की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं।  उन्होंने इस पहल को जनजातीय समुदायों की जागरूकता एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

लव ट्रायंगल में जानलेवा अंजाम: रायपुर में नर्स की हत्या, जांच में जुटी पुलिस

रायपुर राजधानी रायपुर में नर्स की हत्या होने से शहर में सनसनी फैल गई है. खून से लथपथ युवती की लाश घर के कमरे में मिली है. यह घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र के लालपुर पटेल चौक की है. लव ट्रायंगल में हत्या होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. जानकारी के मुताबिक, युवती की दोस्ती दुर्गेश नामक युवक से थी. चिरमिरी के सन्नी नामक युवक से भी पिछले 7 साल से फ्रेंडशिप थी. युवती का बॉयफ्रेंड से विवाद चल रहा था. युवती के सीने में चाकू मारकर मौत के घाट उतारा गया है. मृतका के हाथ में भी चाकू मिला है. कमरे में संघर्ष होने के बाद वारदात को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है. चिरमिरी जिले की रहने वाली थी युवती मृतका की पहचान प्रियंका दास (23) के रूप में हुई है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जानकारी के मुताबिक, प्रियंका दास पिछले एक माह से पचपेड़ी नाका स्थित किराए के रूम में रह रही थी. वह एमएमआई अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर काम कर रही थी. प्रियंका दास मूलतः चिरमिरी जिले की रहने वाली है. हत्या की वारदात देर रात्रि होने की आशंका जताई जा रही है. मृतका के सीने पर चाकू के वार के निशान आज सुबह जब प्रियंका की रूम मेट उनसे मिलने उसके कमरे पहुंची तो प्रियंका के हत्या की जानकारी सामने आई. मृतका के सीने पर चाकू के तीन वार पाए गए हैं. टिकरापारा पुलिस और फॉरेंसिक की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी है.

हसदेव अरण्य में कोयला खनन को हाईकोर्ट की मंजूरी, सामुदायिक अधिकारों का उल्लंघन साबित नहीं

बिलासपुर हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ग्राम घठबार्रा के निवासियों की दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सामुदायिक वन अधिकार का कोई ठोस दावा साबित नहीं हुआ है। सरगुजा के उदयपुर तहसील के घठबार्रा ग्रामसभा की बैठकों में सामुदायिक अधिकारों को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। वर्ष 2008 और 2011 की ग्रामसभा बैठकों में केवल व्यक्तिगत पट्टों और भूमि अधिकारों की चर्चा हुई थी। ऐसे में यह दावा निराधार है कि ग्रामीणों के सामुदायिक वन अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने की। दरअसल, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और जयनंदन सिंह पोर्ते ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें कहा गया था कि घठबार्रा गांव के लोगों को वन अधिकार कानून 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार मिले थे, जिन्हें 2016 में जिला समिति ने रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने 2022 में फेज-2 कोल ब्लाक खनन की मंजूरी को भी चुनौती दी थी, यह कहते हुए कि ग्रामसभा की सहमति लिए बिना यह निर्णय अवैध है। ‘हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति कोई वैधानिक संस्था नहीं’ राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति कोई वैधानिक संस्था नहीं है, इसलिए वह ग्रामसभा या गांववालों की ओर से सामुदायिक अधिकार का दावा नहीं कर सकती। वहीं राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डाॅ. निर्मल शुक्ला ने तर्क दिया कि कोल ब्लाक का आवंटन संसद द्वारा पारित कोल माइंस (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट, 2015 के तहत हुआ है। यह अधिनियम अन्य सभी कानूनों पर प्राथमिकता रखता है, इसलिए वन अधिकार कानून की धाराएं इसमें बाधक नहीं है। हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों को सही ठहराया हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के वर्ष 2012 और 2022 के आदेशों को सही ठहराया, जिनके तहत पारसा ईस्ट एवं केते बासन (पीईकेबी) कोल ब्लाक के फेज-1 और फेज-2 में खनन की मंजूरी दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि खनन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। ग्रामसभा की बैठकों और अभिलेखों में सामुदायिक वन अधिकारों से जुड़ा कोई दावा या प्रमाण नहीं मिला। ऐसे में जिला समिति द्वारा 2016 में सामुदायिक अधिकारों को रद्द करने का आदेश उचित है। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सामुदायिक अधिकारों का कोई वैधानिक दावा सिद्ध नहीं हुआ और न ही याचिकाकर्ता ग्रामसभा की ओर से अधिकृत थे। अदालत ने खनन परियोजना को वैध बताते हुए केंद्र व राज्य सरकार के आदेशों को बरकरार रखा है।