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करूर हादसा और राजनीति: HC ने CBI जांच को नकारा, रैलियों में सुरक्षा नियमों को किया जोर

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चेन्नई  मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राजनीतिक रैलियों के लिए सख्त एसओपी का सुझाव दिया। साथ ही, कोर्ट ने अभिनेता-राजनेता विजय की करूर रैली में पिछले महीने हुई भगदड़ की सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया। करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। एम धंदापानी और एम जोतिरमन की पीठ ने भाजपा नेता उमा आनंदन की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर कार्यवाही करने से इनकार कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि यदि जांच ठीक से नहीं की जाती है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस अदालत को राजनीतिक अखाड़े की तरह न समझें। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़ित व्यक्ति इस अदालत में आते हैं, तो हम उन्हें बचाएंगे। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले वह करूर में 27 सितंबर की घटना की जांच को उसके वर्तमान प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ने दें। भाजपा नेता ने घटना की सीबीआई से जांच कराने के लिए हाई कोर्ट से निर्देश मांगा था और दावा किया था कि ये मौतें कथित सरकारी उदासीनता के कारण हुई हैं। हाई कोर्ट ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कुछ याचिकाओं में पीड़ितों के लिए घोषित मुआवजे में वृद्धि की मांग की गई थी। पीठ ने रैलियों या बैठकों के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने और राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट आयोजनों की अनुमति न देने के तमिलनाडु सरकार के सुझाव पर गौर किया। अदालत ने सुझाव दिया कि भविष्य में जब ऐसी राजनीतिक रैलियां या बैठकें निर्धारित स्थानों पर आयोजित की जाएं तो सरकार और राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां पेयजल और स्वच्छता की उचित व्यवस्था हो। पीठ ने यह भी कहा कि भगदड़ की संभावना को कम करने के लिए निकास मार्ग और पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। टीवीके पार्टी की रैली में हुई भगदड़ ने राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना को लेकर पुलिस ने पार्टी के राज्य महासचिव बूसी आनंद पर मामला दर्ज किया है। विजय ने इस दुखद घटना के पीछे साजिश का आरोप लगाया, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विरोधी दलों पर त्रासदियों का फायदा उठाकर चुनावी लाभ लेने का आरोप लगाया।

मौसम अलर्ट: यूपी में होगी जोरदार बारिश, जानें कौन-कौन से राज्य भी प्रभावित होंगे

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नई दिल्ली  देशभर में मॉनसून लगभग वापस जा चुका है, लेकिन विभिन्न वजहों से बारिश का दौर जारी है। इस बीच, उत्तर भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दस्तक देने जा रहा है, जिसकी वजह से पांच से सात अक्टूबर के बीच कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके तहत यूपी, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा समेत कई राज्यों में भारी बारिश होगी। इसके अलावा, आंतरिक ओडिशा पर दबाव का प्रभाव पड़ने के कारण तीन और चार अक्टूबर को पूर्वी भारत और पूर्वी मध्य भारत भारी बारिश का अलर्ट है। पूर्वी और मध्य भारत की बात करें तो चार अक्टूबर को उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होगी। पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में तीन और चार अक्टूबर को, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम तथा बिहार में तीन से छह अक्टूबर तक, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल में तीन और चार अक्टूबर को, झारखंड में तीन से पांच अक्टूबर तक अधिकांश जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गंगा तटीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में तीन अक्टूबर, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार में तीन से पांच अक्टूबर तक अलग अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा, दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु में तीन से पांच अक्टूबर कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। अगले पांच दिनों तक तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में तेज सतही हवाएं चलेंगी। उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो चार अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग अलग जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होगी। उत्तर पश्चिम भारत में तीन और चार अक्टूबर को अलग अलग जगहों पर बिखरी हुई बारिश के बाद पांच और सात अक्टूबर तक तूफान, बिजली के साथ व्यापाक स्तर पर बारिश होने की संभावना है। वहीं, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में पांच से सात अक्टूबर तक, उत्तराखंड में छह और सात अक्टूबर, पंजाब में पांच और छह अक्टूबर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में छह और सात अक्टूबर को, पूर्वी उत्तर प्रदेश में तीन से पांच अक्टूबर तक, पूर्वी राजस्थान में छह अक्टॅबर को अलग अलग जगहों पर भारी बारिश होगी। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली में छह अक्टूबर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में तीन अक्टूबर को बहुत भारी बरसात की चेतावनी जारी की गई है।  

भारत ने पाकिस्तान को लगाई क्लास: PoK में हालात पर कड़ी चेतावनी

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नई दिल्ली  पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शहबाज शरीफ सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। आवामी ऐक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। पीओके में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर भारत ने शहबाज सरकार पर जमकर निशाना साधा है। भारत ने साफ किया है कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान के दमनकारी रवैये का नतीजा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि हमने पीओके में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्ट देखी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सेना द्वारा नागरिकों पर की गई बर्बरता भी शामिल है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''पीओके में पाकिस्तान की कार्रवाई उसके दमनकारी रवैये और इन क्षेत्रों से संसाधनों की व्यवस्थित लूट का स्वाभाविक परिणाम है।'' वहीं, प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को उसके भयानक मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।  

सीमा पर अल्टीमेटम — सेना प्रमुख की पाकिस्तान के लिए दो टूक वार्ता

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अनूपगढ़ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने की सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि अगर पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर बना रहना चाहता है तो उसे हर हाल में आतंकवाद रोकना होगा, वरना हम संयम भूल जाएंगे और पाकिस्तान का नक्शे पर से नामोनिशां मिटा देंगे। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि यह सोचना और तय करना अब पाकिस्तान का काम है कि उसे भूगोल और इतिहास में रहना है या नहीं? उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पश्चिमी पड़ोसी को हर हाल में राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना ही होगा। राजस्थान के अनूपगढ़ में एक सैन्य चौकी पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना इस बार कोई संयम नहीं दिखाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अगर इस्लामाबाद आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता है और आतंकियों की सप्लाई बंद नहीं करता है, तो 'ऑपरेशन सिंदूर-2.0' दूर नहीं होगा और उस दौरान हम संयम भूल जाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर-2.0 के लिए तैयार रहें जवान: सेना प्रमुख सेना प्रमुख ने कहा, "इस बार हम ऑपरेशन सिंदूर 1.0 जैसा संयम नहीं बरतेंगे। इस बार हम कुछ ऐसा करेंगे जिससे पाकिस्तान को सोचना पड़ेगा कि वह भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है या नहीं। अगर पाकिस्तान भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है, तो उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना होगा।" इसके साथ ही उन्होंने जवानों से भी तैयार रहने को कहा। सेना प्रमुख ने कहा, “अगर ईश्वर ने चाहा, तो आपको जल्द ही मौका मिलेगा। शुभकामनाएँ।” 5 पाक लड़ाकू विमानों को मार गिराने का एयर चीफ का दावा सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी की यह चेतावनी एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें सिंह ने कहा था कि भारतीय सेना ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन के जेएफ-17 सहित चार से पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान में अपने ठिकाने भले ही कितनी दूर और कहीं भी बना लें भारतीय वायु सेना के पास उन्हें नष्ट करने की क्षमता है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायु सेना दिवस से पहले शुक्रवार को अपने सालाना संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह बात कही।  

चुनावी हार ने मोड़ा रास्ता: कमांडो जिसने आतंकियों को 26/11 में चुनौती दी, अब बन गया गैंग का सरगना

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मुंबई  मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के दौरान जवाबी कार्रवाई में शामिल NSG कमांडो को गांजा तस्करी के आरोप में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी बजरंग सिंह गांजा तस्करी का छोटा-मोटा धंधा नहीं करता था, बल्कि क्विंटल में नशे का सामान राज्य की सीमा तक सप्लाई करवाता था। अब सवाल है कि आखिर एनएसजी कमांडो के रूप में देश की सेवा करने वाला एक हट्टा-कट्टा नौजवान इस काले कारोबार में कैसे उतर गया। बजरंग सिंह को बुधवार को चुरू से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि सिंह तेलंगाना और ओडिशा से गांजा मंगवाकर राजस्थान में सप्लाई करवाता था। वह सीकर जिले का रहने वाला है और इस तरह की गतिविधियों के चलते उसपर 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था। राजस्थान का आतंक रोधी दस्ता और एंटी नारकोटिक्स फोर्स दो महीने से उसके पीछे पड़ी थी। कैसे एनएसजी तक पहुंचा था बजरंग बजरंग सिंह ने 10वीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। हालांकि खेल-कूद में उसकी रुचि थी और अच्छा खासा कद भी था। ऐसे में वह बीएसएफ में चला गया। कॉन्स्टेबल के तौर पर वह पंजाब, असम, राजस्थान, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में रहा। उसकी लगन और बहादुरी को देखते हुए उसे एनएसजी कमांडो बना दिया गया। सात साल तक उसने कमांडो के तौर पर सेवा दी। मुंबई में आतंकी हमले के दौरान भी वह सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में शामिल था। राजनीति की तरफ रुख और फिर आपराधिक गतिविधियां राजनीति की तरफ रुख करने के बाद ही उसने अपराध की दुनिया में भी कदम रख दिया। राजनीति करने के लिए ही उसने नौकरी छोड़ी और अपने गांव आ गया। उसने अपनी पत्नी को मुखिया का चुनाव भी लड़ाया लेकिन वह हार गई। इसी बीच वह कुछ अपराधियों की भी संगत में आ गया। नौकरी वह पहले ही छोड़ चुका था, ऐसे में पैसे की उसे जरूरत थी। ऊपर से राजनीतिक महत्वाकांक्षा। बजरंग को अलग-अलग राज्यों के बारे में भी जानकारी थी और उसके संपर्क भी लोगों से बन गए थे। इसी का फायदा उठाकर उसने गांजे के तस्करी शुरू की। एक साल के अंदर ही वह गांजा तस्करी का सरगना बन गया। सिंह छोटी-मोटी तस्करी नहीं करता था बल्कि राज्य की सीमा से क्विंटलों गांजा की तस्करी करवाता था। उसके खिलाफ कई केस दर्ज हुए। 2023 में उसे गांजा तस्करी के ही आरोप में हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। बजरंग सिंह ज्यादातर समय किसी सुदूर गांव में ही रहता था। पुलिस ने उसके बारे में उसके ही रसोइए से पता लगाया। रसोइया इस काले कारोबार में शामिल नहीं था। उसे विश्वास में लेने के बाद पुलिस की टीम बजरंग के ठिकाने तक पहुंच गई। पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार भी नहीं किया। लंबे समय तक पीछा करने के बाद मौका देखकर उसे दबोचा गया।  

देश की टैक्स कमाई में जैन समाज का कमाल – केवल 0.5% आबादी, 24% योगदान!

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नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में जैन समुदाय की आबादी महज 0.5 फीसदी है, लेकिन कुल टैक्स कलेक्शन में उनका योगदान 24 फीसदी के बराबर है। उन्होंने यहां तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘जीतो (जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन) कनेक्ट 2025’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जैन समुदाय को दुनिया में एक मेहनती और समृद्ध समाज माना जाता है। उन्होंने कहा कि जैन समुदाय का दर्शन भारतीय संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है तथा इसका इतिहास भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा में एक अनमोल अध्याय है। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था में जैन समुदाय का योगदान उल्लेखनीय है। उनकी जनसंख्या 0.5 प्रतिशत है, लेकिन कुल कर संग्रह का लगभग 24 प्रतिशत उनसे आता है।’ उन्होंने कहा कि चाहे औषधि क्षेत्र हो, विमानन हो या शिक्षा क्षेत्र हो, जैन समुदाय सभी में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि खिलौनों से लेकर टैंकों तक भारत सब कुछ बना रहा है और वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया के कारखाने के रूप में उभरेगा। ‘जीतो कनेक्ट’ दुनिया भर के जैन समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाता है ताकि नेटवर्किंग, ज्ञान साझा करने और व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। इससे पहले गुरुवार को डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज मिलिट्री स्टेशन में शस्त्र पूजा की थी। उन्होंने कहा था कि अपनी सभ्यता को अजेय और अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए शस्त्र के अलावा शास्त्र की भी जरूरत होगी। उन्होंने डिफेंस फोर्सेज की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से ऑपरेशन सिंदूर में शानदार काम किया गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ हमने हमला किया तो वहीं पाकिस्तानी अटैक्स को आसमान में ही रोक लिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लेह से सर क्रीक सेक्टर तक हमले करने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय बलों के तत्काल ऐक्शन लेने से मजबूती से काउंटर किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने दुनिया को संदेश दिया है कि कैसे दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।  

नॉर्वे से नोबेल पुरस्कार की घोषणा की तैयारी: ट्रंप के लिए क्या है भविष्य?

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ओस्लो  दुनिया के सबसे प्रतिष्ठा प्राप्त सम्मानों में से एक नोबेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी। इसके तहत चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए सम्मान दिए जाते हैं। लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि आखिर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान दिया जाता है या नहीं। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2018 से अमेरिका के लोगों के साथ-साथ विदेशों में नेताओं द्वारा कई बार नामित किया गया है। उन्होंने अपने नए कार्यकाल के तहत इसी साल 19 जनवरी को कमान संभाली थी। उसके बाद से वह 7 युद्धों को रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं नोबेल समिति के एक सदस्य ने पिछले दिनों कहा था कि इस बार डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर विचार होना मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन उपलब्धियों के नाम पर उनके लिए दावा किया जा रहा है, वे नोबेल नॉमिनेशन की आखिरी तारीख के बाद की हैं। दिसंबर में एक रिपब्लिकन सांसद ने अब्राहम समझौते की मध्यस्थता के लिए भी ट्रंप के नाम का प्रस्ताव दिया था। इस समझौते ने इजराइल और कुछ अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बना दिया था। अब देखना होगा कि दिसंबर की उस उपलब्धि के नाम पर डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान मिलता है या नहीं। नोबेल पुरस्कारों का ऐलान 10 अक्तूबर तक होना है। इसके अलावा ओस्लो से कुछ सूत्रों ने कहा कि जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीति पर काम कर रहे हैं और बाहरी लोगों के लिए वैमनस्यता का भाव दिखा रहे हैं, उसके चलते भी उन्हें पुरस्कार मिलना मुश्किल है। नोबेल पुरस्कारों का क्या है इतिहास नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 19वीं सदी के स्वीडन के व्यवसायी और वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने की थी। उनके पास 300 से ज़्यादा पेटेंट थे, लेकिन पुरस्कारों से पहले उनकी प्रसिद्धि का कारण नाइट्रोग्लिसरीन को एक ऐसे यौगिक के साथ मिलाकर डायनामाइट का आविष्कार करना था। इसके चलते बड़े-बड़े धमाके करना आसान हो गया। डायनामाइट निर्माण, खनन और हथियार उद्योग में बेहद लोकप्रिय हो गया और इसने नोबेल को बहुत अमीर बना दिया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति का इस्तेमाल वार्षिक पुरस्कारों के लिए धन जुटाने में करने का निर्णय लिया। चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल के निधन के पांच साल बाद 1901 में प्रदान किया गया था। वर्ष 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अर्थशास्त्र के लिए छठा पुरस्कार शुरू किया। हालांकि नोबेल पुरस्कार के शुद्धतावादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल नहीं है। फिर भी इसे हमेशा अन्य पुरस्कारों के साथ ही प्रदान किया जाता है। नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया पुरस्कारों की संबंधित समितियों द्वारा किसी भी नामांकन की घोषणा नहीं की जाती है।

अमेरिका और चीन दोनों के फाइटर जेट गिराए, भारतीय वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किया बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली   भारतीय वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने शुक्रवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान के लगभग 12 विमानों को नुकसान पहुंचाया। इसमें अमेरिका और चीन के फाइटर जेट्स भी शामिल हैं। वायुसेना प्रमुख सिंह ने कहा कि भारत ने अमेरिका के एफ-16 और चीन के जेएफ-17 क्लास के पांच फाइटर जेट्स को मार गिराया। मालूम हो कि पाकिस्तान के पास बड़ी संख्या में चीन और अमेरिका के फाइटर जेट्स मौजूद हैं, जिसका उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया था। अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सात मई को पाकिस्तान और पीओके में ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। पहली रात लश्कर और जैश के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने चीन, अमेरिका और तुर्की के हथियारों की मदद से भारत पर हमले की नाकाम कोशिशें कीं। इसके बाद भारत ने पाक के कई एयरबेस को भी तबाह कर दिया। भारतीय वायु सेना के वार्षिक दिवस पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "जहां तक वायु रक्षा का सवाल है, हमारे पास एक लंबी दूरी के हमले के सबूत हैं। साथ ही, पांच फाइटर जेट्स, जो एफ-16 और जेएफ-17 कैटेगरी के बीच के उच्च तकनीक वाले हैं, ऐसा हमारी प्रणाली बताती है।" एफ-16 अमेरिका में निर्मित फाइटर जेट है, जबकि जेएफ-17 चीन में निर्मित है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा, "…जहां तक ​​पाकिस्तान के नुकसान का सवाल है…हमने बड़ी संख्या में उनके एयरफील्ड्स पर हमला किया है और हमने बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों पर हमला किया है। इन हमलों के कारण, कम से कम चार स्थानों पर रडार, दो स्थानों पर कमांड और नियंत्रण केंद्र, दो स्थानों पर रनवे क्षतिग्रस्त हो गए, फिर तीन अलग-अलग स्टेशनों में उनके तीन हैंगर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हमारे पास एक सी-130 श्रेणी के विमान के संकेत हैं और कम से कम 4 से 5 फाइटर जेट्स। सबसे अधिक संभावना एफ-16 की हैं, क्योंकि वह स्थान एफ-16 था और उस समय जो कुछ भी रखरखाव में था।" एफ-16 फाइटर जेट्स की क्या हैं खूबियां अमेरिका का एफ-16 फाइटर जेट एक सिंगल इंजन वाला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है, जिसे अब लॉकहीड मार्टिन नामक कंपनी बनाती है। 1976 से अब तक 4600 से ज्यादा लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जा चुका है। यह सभी मौसम में काम करता है और दुश्मन देश के ठिकाने पर सटीक हमले करने के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान ने अब तक अमेरिका से कुल 85 एफ-16 फाइटर जेट्स खरीदे हैं, जिसमें से 75 काम कर रहे हैं। हवा से सतह पर मार करने की क्षमता के साथ, एफ-16 500 मील (860 किलोमीटर) से अधिक की उड़ान भर सकता है। अपने हथियारों को बेहतर सटीकता के साथ गिरा सकता है और दुश्मन के विमानों से अपनी रक्षा कर सकता है। इसके बाद अपने प्रारंभिक प्वाइंट पर वापस लौट सकता है। चीन से खरीदे गए जेएफ-17 फाइटर जेट्स के फीचर्स चीन द्वारा निर्मित किए गए जेएफ-17 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल पाकिस्तान, म्यांमार, अजरबैजान समेत कई अन्य देश करते हैं। इसमें जेएफ का मतलब ज्वाइंट फाइटर है। यह एक चौथी पीढ़ी का हल्का सिंगल इंजन वाला, बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसे चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (सीएसी) और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (पीएसी) ने संयुक्त रूप से बनाया है। जेएफ-17 का इस्तेमाल कई भूमिकाओं के लिए किया जा सकता है, जिसमें दूसरे फाइटर जेट्स को इंटरसेप्ट करना, जमीनी हमला करना, एंटी शिप और हवाई टोही शामिल है।  

गोपनीय दस्तावेज़ में सामने आया ट्रंप का ऐतिहासिक निर्णय, अमेरिका ने दुश्मन पर किया सशस्त्र युद्ध का ऐलान

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वाशिंगटन  अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन -ड्रग कार्टेल- के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सशस्त्र युद्ध का ऐलान कर दिया है। एक गोपनीय दस्तावेज़ में खुलासा हुआ है कि ट्रंप ने ड्रग तस्करों को ‘गैरकानूनी योद्धा’ बताते हुए पेंटागन को निर्देश दिए हैं कि वे इन कार्टेल्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इस रणनीति के तहत कैरेबियन सागर में पहले ही तीन ड्रग तस्करों वाली नावों पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक और कानूनी विवाद भी छिड़ गए हैं। वाशिंगटन से आई खबर के मुताबिक, यह घोषणा कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना के हाल के हमलों के बाद आई है, जहां ड्रग तस्करों के तीन नावों को निशाना बनाया गया। इनमें से दो नावें वेनेजुएला से थीं, जिन पर अमेरिकी सेना ने गोलियां चलाईं और कई लोगों की मौत हुई। ट्रंप ने इन हमलों को आत्मरक्षा का एक जरूरी कदम बताया और कहा कि यह ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए किया गया सैन्य अभियान है। हालांकि, इस ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ ने अमेरिका के अंदर कानूनी और राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। कई सांसदों का कहना है कि ऐसी सशस्त्र कार्रवाई के लिए पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना जरूरी था। वहीं, पेंटागन ने सीनेट को हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन-कौन से कार्टेल निशाने पर हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में नाराजगी फैल गई है। ट्रंप ने मैक्सिकन गैंग्स और वेनेजुएला के ट्रेन डे अरागुआ जैसे कार्टेल्स को आतंकी संगठन घोषित किया है और कहा है कि ये गैंग पश्चिमी गोलार्ध में ड्रग तस्करी कर अमेरिका को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं। राष्ट्रपति की इस नई रणनीति से स्पष्ट है कि ड्रग्स के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई अब सिर्फ कानून या पुलिस की कार्रवाई नहीं बल्कि सैन्य और सशस्त्र संघर्ष का रूप लेने जा रही है।   ट्रंप का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे के तहत विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाने के बावजूद अब एक नए युद्ध की शुरुआत की तरह दिखता है, जिसने देश में राजनीतिक बहस और कानूनी सवालों को जन्म दिया है। अमेरिकी प्रशासन की यह रणनीति ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़े कदम उठाने के उद्देश्य से है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और कानूनी वैधता अभी विवादों में है।  

ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा खुलासा: भारत ने गिराए पाकिस्तान के 5 फाइटर जेट

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नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (आईएएफ) अपने 93वें वायुसेना दिवस पर जोरदार उत्सव की तैयारी कर रही है. इस मौके पर एयर चीफ एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने पांच पाकिस्तानी F-16, JF-17 को मार गिराया था. विंग कमांडर जयदीप सिंह, जो वायुसेना के पीआरओ हैं ने प्रेस ब्रीफिंग में इसकी पूरी जानकारी दी.  उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को हिंडन एयर फोर्स बेस पर एक भव्य परेड होगी. 6 अक्टूबर को फुल ड्रेस रिहर्सल होगी. इस समारोह में वायुसेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और थलसेना प्रमुख भी शामिल होंगे. यह दिवस वायुसेना की ताकत, आत्मनिर्भरता और देश सेवा को दर्शाएगा. ऑपरेशन सिंदूर में पाक का नुकसान      जमीन पर: चार जगहों पर रडार, दो जगहों पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, दो जगहों पर रनवे, तीन जगहों पर हैंगर और 4-5 एफ-16 (क्योंकि हैंगर एफ-16 का था) तथा एक एसएएम सिस्टम नष्ट.     हवा में: एक लंबी दूरी के स्ट्राइक के सबूत हैं. एडब्ल्यूएसीएस या सिगइंट एयरक्राफ्ट के और 4-5 फाइटर एफ-16 या जे-10 क्लास के. इससे पाकिस्तान को जमीन और हवा में कुल फाइटर विमानों का नुकसान करीब 9-10 हो गया. परेड और आकर्षण: ध्वज फ्लाइपास्ट और स्टेटिक डिस्प्ले विंग कमांडर सिंह ने कहा कि परेड में कई रोमांचक चीजें होंगी. सबसे खास होगा ध्वज फ्लाइपास्ट. इसमें एमआई-17 हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर उड़ेगा. यह ऑपरेशन इस साल का सबसे बड़ा अभियान था. स्टेटिक डिस्प्ले में राफेल, Su-30MKI, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल दिखाए जाएंगे. रडार और हथियार भी प्रदर्शित होंगे. वायुसेना ने कुल 18 नई इनोवेशन भी पेश की हैं. ये इनोवेशन वायुसेना की आत्मनिर्भरता, समस्या समाधान क्षमता और भविष्य की सोच को दिखाते हैं. विंग कमांडर ने कहा कि ये दिखाते हैं कि हम खुद पर भरोसा करते हैं. नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं. ऑपरेशन सिंदूर: इतिहास का नया अध्याय ब्रीफिंग का मुख्य फोकस था ऑपरेशन सिंदूर. यह पहलगाम हमले के बाद का सबसे महत्वपूर्ण अभियान था. विंग कमांडर ने बताया कि सरकार ने सेनाओं को पूरी आजादी दी थी. यह युद्ध इतिहास में दर्ज होगा, क्योंकि यह एक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ और राष्ट्र ने सीजफायर का फैसला लिया. हमारी मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने खेल पलट दिया. लॉन्ग रेंज एसएएम मिसाइलों ने दुश्मन को पीछे धकेल दिया. सबसे लंबा टारगेट किल 300 किलोमीटर से ज्यादा का था. विंग कमांडर ने गर्व से कहा कि यह इतिहास में दर्ज होगा. हमने सटीक हमले किए, न्यूनतम नुकसान के साथ. सिर्फ एक रात में दुश्मन को घुटनों पर ला दिया. 1971 के बाद पहली बार इतना विनाशकारी अभियान ऑपरेशन सिंदूर में दिखा. वायुसेना ने साबित किया कि वह अचूक, अभेद्य और सटीक है. सभी सेनाओं – वायु, थल और नौ – ने मिलकर योजना बनाई और अमल किया. विंग कमांडर ने कहा कि गलत सूचनाओं की भरमार थी, लेकिन हमारे मीडिया ने सेनाओं की बहुत मदद की. जनता का मनोबल न गिरे, इसके लिए चैनलों ने योगदान दिया. वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के हमलों का वीडियो भी जारी किया है. जरूरत पड़ने पर कैमरा फीड से और जानकारी ली जा सकती है. मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के अलावा, वायुसेना ने कई मानवीय सहायता मिशन चलाए. असम, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और अन्य जगहों पर मदद पहुंचाई. विंग कमांडर ने कहा कि हमने लोगों की जिंदगी बचाई और राहत दी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रियता रही. यूएई, मिस्र, फ्रांस, सिंगापुर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास किए. इन देशों के कमांडरों ने तारीफ की और कहा कि वे अभ्यास जारी रखना चाहते हैं. ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला ने अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया. विंग कमांडर ने कहा कि यह साल अच्छा रहा, लेकिन आगे के समय के बारे में सोचना होगा. भविष्य की चुनौतियां और आत्मनिर्भरता विंग कमांडर ने चेतावनी दी कि अगला युद्ध पिछले जैसा नहीं होगा. हमें वर्तमान और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहना होगा. दुनिया भर की घटनाओं पर नजर रखनी है. 2047 तक का रोडमैप तैयार है, जिसमें आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) मुख्य है. एलसीए मार्क-1ए के ऑर्डर दिए जा चुके हैं. एलसीए मार्क-2 और आईएमआरएच भी पाइपलाइन में हैं. कई रडार और सिस्टम विकसित हो रहे हैं. विंग कमांडर ने कहा कि हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो रणनीतिक तकनीक ले सकते हैं. गैप भरने के लिए काम चल रहा है. भविष्य का युद्ध हमेशा एकीकृत होगा – सभी सेनाओं और एजेंसियों के साथ. ऑपरेशन सिंदूर से हमने सबक सीखे. इससे वायु शक्ति की अहमियत फिर साबित हुई.  क्या आएगा Su-57 फाइटर जेट?  एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) और रूसी सुखोई-57 पर पूछा गया. एयर चीफ एपी सिंह ने कहा कि यह एडीए और डीआरडीओ के क्षेत्र में है. मुझे लगता है कि यह दशक में उड़ान भरेगा. तेजस मार्क-1ए जैसा कठिन काम है. सुखोई-57 पर सभी विकल्प तौलेंगे. रक्षा में प्रक्रिया है, जो भी फैसला होगा, सबसे अच्छा होगा. ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने पांच पाकिस्तानी F-16, JF-17 को मार गिराया था.