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इजराइल बोला- भारत हमारा सच्चा मित्र, PM मोदी के समर्थन से मिला हौसला

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इजराइल  इजराइल के भारत में नए कांसुल जनरल, यानिव रेवाच ने आतंकवाद के खिलाफ भारत और इज़राइल के साझा अनुभवों पर प्रकाश डाला।   उन्होंने इजराइल में बंधक मुक्ति प्रयासों में भारत के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। रेवाच ने व्यक्तिगत अनुभव साझा किया कि 7 अक्टूबर को उनके एक परिवार के सदस्य को आतंकवादियों ने अगवा कर हत्या कर दी थी, जिससे यह मामला उनके लिए और भी संवेदनशील है।    रेवाच ने कहा कि भारत और  इजराइल  अलग-अलग रूपों में आतंकवाद का सामना कर रहे हैं, लेकिन दोनों देश आतंकवाद को अस्वीकार करने और शांति स्थापित करने के समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद किया कि उन्होंने कठिन समय में इज़राइल का समर्थन किया।"हम जानते हैं कि हमारे दोनों देशों को अलग-अलग रूपों में आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है। हम आभारी हैं कि भारत ने पिछले दो वर्षों और उससे पहले भी इजराइल  का समर्थन किया, खासकर हमारे बंधकों को वापस लाने में। मेरा एक परिवार सदस्य वास्तव में अगवा और मारा गया था। इसलिए यह मेरे दिल के बहुत करीब है।" रेवाच ने भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, स्थानीय भोजन, बाजार और पर्यटन स्थलों में गहरी रुचि जताई। वे मसाला चाय के लंबे समय से प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा, "इजराइल  और भारत दोनों नवाचार और प्रौद्योगिकी के केंद्र हैं। मैं स्थानीय तकनीक और ऐप्स को सीखना और उपयोग करना चाहता हूँ। भारत एक विशाल बाज़ार है और इज़राइल एक छोटा देश। यह अनुभव सीखने और साझा करने के लिए उत्तम अवसर है।"रेवाच ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 29 सितंबर को घोषित गाजा शांति योजना का स्वागत किया, जिसमें सभी  इजराइली बंधकों की रिहाई और हमास के निरस्त्रीकरण को मुख्य शर्त बनाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यस्थ अरब देश हमास पर इस योजना को स्वीकार करने के लिए दबाव डालेंगे।    योजना के मुख्य बिंदु:     हमास द्वारा सभी बंधकों की 72 घंटे में रिहाई।     इज़राइल द्वारा 250 जीवन कैदियों और 1,700 अन्य गाजा बंदियों की रिहाई।     गाजा का असैन्यीकरण और हमास का शासन से बहिष्कार।     अस्थायी अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती।     हमास की सुरंगों, हथियारों और सैन्य ढांचे को नष्ट करना। योजना का उद्देश्य युद्ध समाप्त करना, विस्थापन रोकना और गाजा का पुनर्निर्माण करना है। कई देशों ने इस योजना का स्वागत किया है, जिनमें अमेरिका, इज़राइल और कुछ अरब देश शामिल हैं।    

केंद्र सरकार का सख्त कदम: 34 दवाओं पर पाबंदी और 3 साल की जेल

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 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने अंडे देने वाले पक्षियों, डेयरी जानवरों, गाय, भेड़, बकरी, सुअर और मधुमक्खियों में इस्तेमाल होने वाली 34 दवाओं के निर्माण, आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसमें 15 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल और 1 एंटीप्रोटोजोल्स दवा शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले पर 3 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। पाबंदी का उद्देश्य मनुष्यों तक दवाओं के प्रभाव और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से होने वाले खतरे को रोकना है। केंद्र ने राज्यों के अधिकारियों को दवा दुकानों और निर्माताओं को निर्देश जारी करने को कहा है। सरकार ने कहा कि अब पशुपालकों के लिए सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं और यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए लिया गया है।  

ग्लोबल इकोनॉमी की नजरें टिकीं: मोदी-ट्रंप की मुलाकात तय, जानिए क्या होगा एजेंडा

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नई दिल्ली  टैरिफ वॉर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जल्द ही मुलाकात हो सकती है। दोनों नेता मलेशिया में इसी महीने आयोजित ASEAN शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं, जहां पीएम मोदी और ट्रंप के बीच एक बैठक संभव है। 47वां आसियान शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर तक मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित होगा। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी 26-27 अक्टूबर को आसियान समिट में हिस्सा लेने के लिए मलेशिया की यात्रा पर करने वाले हैं। वहीं मलेशिया ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्यौता भेजा दिया है। अगर ट्रंप इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हरी झंडी दिखाते हैं, तो यहां उनकी PM के साथ मुलाकात संभव हो सकती है। इससे पहले अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा टैरिफ लगा दिया है, जिस कारण दोनों रिश्ते प्रभावित भी प्रभावित हुए। ऐसे में यह मुलाकात बेहद अहम साबित हो सकती है। भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने के बाद यह पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप पहली बार आमने-सामने होंगे। ASEAN की अध्यक्षता मलेशिया के पास गौरतलब है कि आसियान (ASEAN) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8 अगस्त 1967 को हुई थी। इसमें कुल 10 देश शामिल हैं, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, और कंबोडिया का नाम शामिल है। मलेशिया 2025 में समूह की अध्यक्षता कर रहा है। वहीं इस शिखर सम्मेलन में इन देशों के अलावा कई अन्य वैश्विक नेता भी शामिल होंगे।  

सरकारी खजाना हुआ मालामाल! GST से 1.89 लाख करोड़ की वसूली, जानिए कैसे बढ़ा रेवेन्यू

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नई दिल्ली  वस्तु एवं सेवा कर या जीएसटी (GST) कलेक्शन के आंकड़े आ गए हैं। बीते महीने यानी सितंबर 2025 में जीएसटी कलेक्शन एक महीने पहले यानी अगस्त 2025 से भी ज्यादा रहा है। जबकि इस महीने जीएसटी की दरों में काफी कमी की गई। यदि इसकी तुलना एक साल पहले यानी सितंबर 2024 के कलेक्शन से करें तो यह 9.1 फीसदी ज्यादा है। कितना रहा कलेक्शन केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2025 में कुल जीएसटी राजस्व 1.89 लाख करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी महीने में यह 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा था। एक महीने पहले यानी कि अगस्त 2025 में यह 1.86 लाख करोड़ रुपये रहा था। टैक्स घटाने का फायदा मिला जीएसटी काउंसिल ने पिछले महीने ही जीएसटी की दरों में भारी कटौती का फैसला किया है। यह निर्णय बीते 22 सितंबर से लागू हुआ है। इस दौरान लोगों ने इतनी खरीदारी की कि सितंबर में सकल घरेलू राजस्व 6.8% बढ़कर ₹1.36 लाख करोड़ रहा, जबकि आयात पर लगने वाले टैक्स कलेक्शन में भी 15.6% की बढ़ोतरी देखी गई। इस मद में ₹52,492 करोड़ रहा। मंत्रालय ने कहा कि लगातार बेहतर कलेक्शन से न सिर्फ सरकारी खजाने को मजबूती मिल रही है बल्कि यह अर्थव्यवस्था में खपत और कारोबारी गतिविधियों की मजबूती को भी दिखाता है।  IGST कलेक्शन ने बनाया रिकॉर्ड एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) का कलेक्शन इस साल पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए के पार गया। सितंबर में IGST की कमाई 1,01,883 करोड़ रुपए रही, जो जनवरी 2025 के रिकॉर्ड 1,01,075 करोड़ रुपए से अधिक है। इससे देश के भीतर व्यापार और वस्तुओं के आदान-प्रदान में तेजी का संकेत मिलता है। हालांकि, सेस कलेक्शन में गिरावट आई है। अप्रैल में यह 13,451 करोड़ रुपए था, जो सितंबर में घटकर 11,652 करोड़ रुपए रह गया। बावजूद इसके, कुल GST संग्रह पर इसका खास असर नहीं पड़ा। अगस्त और सितंबर के त्योहारों के दौरान GST संग्रह 3.8 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से 7.8% अधिक है। त्योहारों के कारण बाजार में खरीदारी बढ़ने से सरकार को अधिक टैक्स प्राप्त हुआ। GST परिषद ने सितंबर की शुरुआत में कर प्रणाली में बड़े सुधार किए। चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर अब केवल दो मुख्य स्लैब 5% और 18% रह गए हैं। इसके अलावा, सिन और लग्जरी वस्तुओं पर 40% टैक्स लगाया गया। ये बदलाव 22 सितंबर से लागू हैं और इनका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, कारोबारियों के लिए आसान बनाना और आम उपभोक्ताओं को राहत देना है। जीएसटी रिफंड में 40 फीसदी की बढ़ोतरी इस दौरान GST रिफंड में 40.1% की तगड़ी बढ़ोतरी देखने की मिली है। बीते सितंबर में यह ₹28,657 करोड़ रुपये रहा है जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 20,453 करोड़ रुपये रहा था। नेट जीएसटी राजस्व में वृद्धि सितंबर 2025 में नेट जीएसटी राजस्व ₹1.60 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 5.0% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

अब नजरें गिनती पर: PM मोदी ने आबादी में बदलाव को बताया देश के लिए बड़ा खतरा

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नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशहरा से पहले देशवासियों को चेतावनी दी है कि घुसपैठ और बाहरी ताकतों से भी बड़ा खतरा आबादी में बदलाव यानी जनसांख्यिकी परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि हालांकि, अवैध घुसपैठिए और बाहरी खतरे लंबे समय से देश की एकता के लिए चुनौती रहे हैं लेकिन आज बड़ी चुनौतियां आबादी में बदलाव से आ रही हैं क्योंकि ये सामाजिक बराबरी को कमजोर कर रहे हैं। बुधवार (01 अक्टूबर) को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 'विविधता में एकता' भारत की आत्मा है, लेकिन जाति, भाषा, क्षेत्रवाद और अतिवादी सोच से प्रेरित विभाजन का अगर सामना नहीं किया गया तो यह राष्ट्र को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा, "सामाजिक बराबरी का अर्थ है वंचितों को प्राथमिकता देकर सामाजिक न्याय की स्थापना करना और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना। आज, ऐसे संकट उभर रहे हैं जो हमारी एकता, संस्कृति और सुरक्षा पर सीधा प्रहार करते हैं। अतिवादी सोच, क्षेत्रवाद, जाति-भाषा पर विवाद और बाहरी ताकतों द्वारा भड़काए गए विभाजन। ये सभी अनगिनत चुनौतियाँ हमारे सामने खड़ी हैं।" उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा सदैव विविधता में एकता रही है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिद्धांत टूट गया तो राष्ट्र की ताकत भी कमजोर हो जाएगी। PM ने RSS पर डाक टिकट भी जारी किया प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी अंतर्विरोध नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं। आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र की सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं। राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत उन्होंने कहा, ‘‘आज जारी किया गया स्मारक डाक टिकट एक श्रद्धांजलि है, जो 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में गर्व से मार्च करने वाले आरएसएस स्वयंसेवकों की याद दिलाता है। अपनी स्थापना के बाद से आरएसएस ने राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। आरएसएस समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी कोई अंतर्विरोध नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं।’’ RSS का विचार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ मोदी ने कहा कि आरएसएस ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार में विश्वास करता है, हालांकि आजादी के बाद इसे राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने से रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा, ‘‘विविधता में एकता हमेशा से भारत की आत्मा रही है, अगर यह सिद्धांत टूटा तो भारत कमजोर हो जाएगा। चुनौतियों के बावजूद आरएसएस मजबूती से खड़ा है और निरंतर राष्ट्र की अथक सेवा कर रहा है।’’ 1925 में संघ की हुई थी स्थापना बता दें कि केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में की थी जिसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था। मोदी खुद संघ प्रचारक थे और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पहले एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। भाजपा की वैचारिक प्रेरणा हिंदुत्ववादी संगठन से मिलती है।

हम तो खुद हो जाते थे, पर अब बंदूक की नोक पर? महबूबा का बयान वायरल

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श्रीनगर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर के टीआरसी ग्राउंड में हुई घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्रगान के दौरान खड़े न होने के आरोप में हिरासत में लिए जाने की निंदा की और कहा कि "बंदूक की नोक पर देशभक्ति नहीं सिखाई जा सकती।" बता दें कि मंगलवार शाम को श्रीनगर में पुलिस शहीद फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान करीब 15 दर्शकों को हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि वे कथित तौर पर राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हुए थे। टूर्नामेंट के फाइनल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी गए हुए थे। महबूबा मुफ्ती ने कहा, "आजकल लोगों को बंदूक की नोक पर राष्ट्रगान के लिए खड़ा किया जाता है। लेकिन जब मैं स्कूल में थी, तब हम बच्चे खुद ही राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हो जाते थे। किसी ने हमें बंदूक के दम पर ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया था। आज बंदूक की नोक पर खड़ा किया जा रहा है… ये इनकी नाकामी है।" उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र और स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ बताते हुए प्रशासन से तत्काल हिरासत रद्द करने की मांग की। पूरा मामला क्या है? सोमवार को श्रीनगर के टीआरसी (टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर) ग्राउंड में मुष्ताक मेमोरियल कप के फाइनल मैच का आयोजन किया गया था। यह टूर्नामेंट पुलिस शहीदों की स्मृति में खेला जाता है, जिसमें स्थानीय युवा और खेल प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए थे। मैच के दौरान राष्ट्रगान बजाया गया, जब लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, कुछ दर्शक राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हुए, जिसे आयोजकों ने "अनादर" माना। परिवारों का दावा है कि हिरासत में लिए गए युवक अनजाने में ऐसा हुआ, क्योंकि बैंड की ध्वनि कम और अस्पष्ट थी, जिससे उन्हें पता ही नहीं चला कि राष्ट्रगान शुरू हो गया है। हिरासत के बाद इन युवकों को स्थानीय पुलिस थाने ले जाया गया, जहां से उनके परिवारों को सूचना दी गई।  

केंद्रीय विद्यालयों का होगा विस्तार, कैबिनेट ने 57 नए स्कूल खोलने की दी हरी झंडी

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नई दिल्ली  बुधावार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूरी दी है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साझा की है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूरी दे दी। सात विद्यालय केंद्र और बाकी राज्यों द्वारा प्रायोजित होंगे। राशि में से 2,585 करोड़ रुपये निर्माण और बुनियादी ढाँचे पर खर्च किए जाएँगे, जबकि 3,277 करोड़ रुपये स्कूलों के संचालन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, दालों के लिए आत्मनिर्भरता मिशन को 11,440 करोड़ रुपये के बजट से मंज़ूरी दी गई है, जो छह वर्षों में चलेगा।  इन 57 नए केंद्रीय विद्यालयों में से सात केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा और बाकी राज्य सरकारों द्वारा प्रायोजित होंगे। वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों पर एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि वर्तमान में 1,288 केंद्रीय विद्यालय हैं। केंद्र ने गेहूँ का एमएसपी बढ़ाया अन्य प्रमुख निर्णयों में, कैबिनेट ने गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जिससे यह 2,585 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रबी सीजन 2026-27 के दौरान अनुमानित खरीद 297 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है, और प्रस्तावित एमएसपी के तहत किसानों को भुगतान की जाने वाली राशि 84,263 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि रबी सीजन 2026-27 के दौरान अनुमानित खरीद 297 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है और प्रस्तावित एमएसपी पर किसानों को भुगतान की जाने वाली राशि 84,263 करोड़ रुपये है। सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की इसके अलावा, 1 जुलाई से प्रभावी, महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से प्रभावी, महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लगभग 1.15 करोड़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर पूरे देश में भव्य उत्सव आयोजित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय स्वतंत्रता आंदोलन में इस प्रेरणादायी गीत की ऐतिहासिक भूमिका को स्मरण करने तथा नई पीढ़ी को देशभक्ति की भावना से प्रेरित करने के लक्ष्य से अपनाया गया है। यह समारोह देश के कोने-कोने में सांस्कृतिक प्रदर्शनों, शैक्षिक सत्रों और अन्य आकर्षक कार्यक्रमों के जरिए संपन्न होगा, जो महान लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस अमर गीत की सांस्कृतिक धरोहर को नई जान फूंक देगा।

चीन का स्पष्ट संदेश: ताइवान के मामले में कोई समझौता नहीं – जिनपिंग ने साधा निशाना

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चीन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कहना है कि चीन ‘‘ताइवान की स्वतंत्रता'' को लेकर अलगाववादी गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करेगा और राष्ट्रीय संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेगा। शी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की केंद्रीय समिति के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 76वीं वर्षगांठ मनाने के लिए बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में मंगलवार को आयोजित एक स्वागत समारोह में यह टिप्पणी की। शी ने कहा, ‘‘ताइवान जलडमरूमध्य में आदान-प्रदान और सहयोग को गहरा करने, 'ताइवान की स्वतंत्रता' की अलगाववादी गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करने और राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करने के पुरजोर प्रयास किए जाने चाहिए।'' इससे पहले, शी, सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और राज्य के अन्य नेताओं के साथ, मध्य बीजिंग के तियानमेन चौक पर एक समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय दिवस से एक दिन पहले, शहीद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। बुधवार से, चीन आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय दिवस मनाने के लिए एक सप्ताह का अवकाश मनाएगा। इस वर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ भी है।   अपने संबोधन में, शी ने राष्ट्र के लोगों से कड़ी मेहनत करते रहने और आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। शी ने कहा, ‘‘चीनी राष्ट्र का महान कायाकल्प एक अभूतपूर्व कार्य है। आकांक्षाएँ और चुनौतियां, दोनों ही हमें हर पल का लाभ उठाने और अटूट उत्साह के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।'' उन्होंने कहा कि नए चीन की स्थापना के बाद से 76 वर्षों में, सीपीसी ने आत्मनिर्भरता और निरंतर प्रयासों की भावना के माध्यम से लोगों को शानदार उपलब्धियं हासिल करने के लिए प्रेरित किया है।    

सरकारी तंत्र हुआ ठप, कर्मचारियों की तनख्वाह रुकी, टूरिस्ट स्पॉट भी बंद — पूरी कहानी यहाँ

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वाशिंगटन  दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में संघीय सरकार का कामकाज ठप हो गया है। इसे तकनीकी भाषा में 'गवर्नमेंट शटडाउन' कहा जाता है। यह संकट इसलिए पैदा हुआ क्योंकि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष के लिए सरकार को फंड देने वाला खर्च विधेयक (फंडिंग बिल) पास नहीं कर पाई। दरअसल रिपब्लिकन सांसदों ने एक ऐसा विधेयक पेश किया था जो सरकार को 21 नवंबर तक अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म) फंडिंग दे सकता था ताकि शटडाउन को टाला जा सके लेकिन मंगलवार शाम को हुए महत्वपूर्ण मतदान में यह बिल 55-45 के अंतर से पारित नहीं हो सका। सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी को इसे पास कराने के लिए कम से कम 60 वोटों की जरूरत थी। विपक्ष में बैठी डेमोक्रेट पार्टी ने इस बिल का विरोध किया जिसके कारण राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहली बार सरकारी खजाना खाली हो गया और शटडाउन शुरू हो गया। क्या होता है 'शटडाउन'? शटडाउन का सीधा मतलब है कि संघीय सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं है। अमेरिका में हर साल 1 अक्टूबर को नया वित्तीय वर्ष शुरू होता है। इससे पहले सरकार को अपना वार्षिक बजट और खर्च की योजना संसद से पास करानी होती है। जब डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद किसी कारण से इस खर्च विधेयक पर सहमत नहीं हो पाते और बिल पास नहीं होता तो कानूनन सरकार को गैर-जरूरी (Non-Essential) कामकाज बंद करना पड़ता है। यह कोई नई बात नहीं है। अमेरिकी राजनीति में बजट पर इस तरह का राजनीतिक गतिरोध सामान्य है। पिछले 50 सालों में अमेरिका में 20 बार सरकारी कामकाज फंडिंग की कमी के कारण अटक चुका है। विवाद की जड़ क्या है? राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार लंबे समय से संघीय सरकार के खर्चों में कटौती करना चाहती है। हालाँकि विपक्षी डेमोक्रेट सांसद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू किए गए 'ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी' कार्यक्रम को जारी रखने और बढ़ाने पर अड़े हैं। वहीं रिपब्लिकन पार्टी खर्चों में कटौती करने के अपने एजेंडे पर कायम है और इस सब्सिडी को बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है। दोनों प्रमुख पार्टियों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण फंडिंग बिल पर सहमति नहीं बन पाई और बातचीत विफल होने के बाद शटडाउन की स्थिति आ गई।   बंद होने वाली सेवाएं: नेशनल पार्क और कई संघीय म्यूजियम बंद हो जाएंगे। सरकारी खाद्य मदद संबंधी कार्यक्रम रुक सकते हैं। संघीय मदद से चलने वाले स्कूल और छात्र ऋण से जुड़े काम भी बाधित होंगे। कई सरकारी दफ्तरों में काम रुकने से वीजा, पासपोर्ट जैसे जरूरी काम में देरी हो सकती है। जारी रहने वाली आपात सेवाएं: कुछ सेवाएं शटडाउन के बावजूद चलती रहती हैं क्योंकि वे जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए अति आवश्यक मानी जाती हैं: मेडिकल आपात सेवाएं। सीमा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था। हवाई सेवाएं (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) और सेना (Military)। हालांकि इन सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को भी शटडाउन खत्म होने तक सैलरी नहीं मिलती। आर्थिक नुकसान जानकारों का मानना है कि इस सरकारी बंदी का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार शटडाउन के चलते देश की आर्थिक विकास दर (GDP) में हर हफ्ते 0.1 से लेकर 0.2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। पिछला सबसे लंबा शटडाउन साल 2018 में हुआ था जो 35 दिनों तक चला था और उसने अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचाया था।  

ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार को लेकर दी चेतावनी, कहा: मुझे नहीं दिया तो देश का होगा अपमान

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वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने सात वैश्विक संघर्षों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है, इसके बावजूद अगर नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं दिया जाता है तो यह अमेरिका के लिए ‘‘बड़े अपमान की बात'' होगी। गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की योजना का जिक्र करते हुए ट्रंप ने मंगलवार को क्वांटिको में सैन्य अधिकारियों को अपने संबोधन में कहा, ‘‘मुझे लगता है, हमने इसे सुलझा लिया है। अब, हमास को सहमत होना होगा और अगर वे नहीं मानते, तो उनके लिए बहुत मुश्किल होगा। सभी अरब, मुस्लिम राष्ट्र इससे सहमत हैं। इजराइल सहमत है। यह एक अद्भुत बात है कि सभी साथ आ गए हैं।'' ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?' बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है… जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा।   लेकिन देखते हैं क्या होता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।''