Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

\’मनोहर कहानियों\’ से नहीं जीती जाती जंग! वायुसेना चीफ के बयान से पाक की पोल खुली

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हर युद्ध में झूठी और आकर्षक कहानियां गढ़ता है, ताकि अपनी हार छिपा सके. ऑपरेशन सिंदूर जैसे हाल के संघर्ष में भी पाक ने झूठ फैलाए. वायुसेना प्रमुख का यह बयान पाक की प्रोपेगैंडा मशीनरी पर सटीक है. 6 ऐतिहासिक फैक्ट्स से समझते हैं कि पाकिस्तान कैसे युद्धों में झूठ बुनता रहा है. 1. 1947-48 कश्मीर युद्ध: 'आजादी की लड़ाई' का झूठ पाकिस्तान ने कबायली हमले को 'आजादी की लड़ाई' बताया, लेकिन यह पाक आर्मी समर्थित आक्रमण था. पाक ने दावा किया कि स्थानीय विद्रोह है, लेकिन दस्तावेजों से साबित हुआ कि पाक ने हजारों सैनिक भेजे. भारत ने श्रीनगर बचाया, लेकिन पाक ने अपनी हार को 'नैतिक जीत' कहा. 2. 1965 युद्ध: 'ग्रैंड स्लैम' की काल्पनिक जीत पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम' को सफल बताया, दावा किया कि जम्मू पर कब्जा कर लिया. लेकिन भारत ने पलटवार से लाहौर पर हमला किया. पाक ने प्रोपेगैंडा में कहा कि भारत हार गया, जबकि ताशकंद समझौते में पाक ने कब्जे वाले इलाके छोड़े. 'जीत की कहानी' पाक मीडिया ने फैलाई. 3. 1971 युद्ध: सैन्य हार को 'भारतीय आक्रमण' का नाम पाकिस्तान ने पूर्वी पाक (अब बांग्लादेश) में हार को 'भारतीय साजिश' कहा. 93,000 सैनिकों की सरेंडर को नकारा. पाक ने दावा किया कि युद्ध 'नैतिक जीत' था, लेकिन शिमला समझौते में हार स्वीकार की. प्रोपेगैंडा ने कहा कि पाक ने 'इस्लामी एकता' बचाई. 4. 1999 कारगिल युद्ध: 'मुजाहिदीन' का झूठा नाम पाकिस्तान ने कारगिल घुसपैठ को 'कश्मीरी मुजाहिदीन' की लड़ाई बताया, सेना की संलिप्तता नकारा. लेकिन पकड़े और मारे गए पाक सैनिकों के दस्तावेजों से साबित हुआ कि पाक आर्मी ने घुसपैठ की. नवाज शरीफ ने बाद में माना, लेकिन प्रोपेगैंडा ने 'जीत' का दावा किया. 5. 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक: 'दो जेट गिराए' का झूठ बालाकोट हमले के बाद पाक ने दावा किया कि दो भारतीय जेट गिराए. लेकिन केवल एक मिग-21 गिरा. पाक का एफ-16 भी नष्ट हुआ. पाक ने विंग कमांडर अभिनंदन की गिरफ्तारी को 'बड़ी जीत' बताया, लेकिन सच्चाई सामने आई. 6. 2025 ऑपरेशन सिंदूर: 'राफेल गिराया' की फर्जी वीडियो हाल के ऑपरेशन सिंदूर में पाक ने दावा किया कि भारतीय राफेल जेट गिराए, अमृतसर पर हमला किया. लेकिन पीआईबी ने साबित किया कि ये फर्जी वीडियो और एआई-जनरेटेड कहानियां हैं. पाक मीडिया ने 'सिविलियन मौतों' का प्रोपेगैंडा फैलाया, लेकिन सच्चाई उलट थी.

पाक में जाफर एक्सप्रेस पर फिर हमला, बलूच विद्रोहियों ने कहा- हमले थमेंगे नहीं

बलूचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाकर एक बार फिर विस्फोट किया गया। इसमें कई लोग घायल हो गए। क्वेटा की ओर जा रही इस ट्रेन पर सिंध-बलूचिस्तान सीमा के पास सुल्तानकोट क्षेत्र में एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (IED) से हमला किया गया। इसके कारण कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए। यह इस साल मार्च के बाद से जाफर एक्सप्रेस पर हुआ ताजा हमला है। बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने दावा किया गया कि ट्रेन में पाकिस्तानी सेना के जवान यात्रा कर रहे थे। समूह ने अपने बयान में कहा, "यह हमला तब किया गया जब पाकिस्तानी सेना के जवान ट्रेन में सवार थे। विस्फोट के परिणामस्वरूप कई सैनिक मारे गए और घायल हुए साथ ही ट्रेन के छह डिब्बे पटरी से उतर गए।" हालांकि, अभी तक किसी की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बलूच विद्रोहियों का दावा बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने अपने बयान में यह भी कहा कि "ऐसे हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक बलूचिस्तान की आजादी नहीं मिल जाती।" घटनास्थल पर बचाव दल और सुरक्षा बल पहुंच चुके हैं, और राहत कार्य चल रहा है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में घायल लोगों को दिखाया गया है, जो इस हमले की गंभीरता को दर्शाता है। जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर तक चलती है। इस साल कई बार निशाना बन चुकी है। मार्च में सबसे घातक हमला हुआ था, जब बोलन क्षेत्र में ट्रेन को हाइजैक कर लिया गया था, जिसमें 21 यात्रियों और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने 33 आतंकवादियों को मार गिराया था।

नोबेल पुरस्कार 2025: फिजिक्स में क्वांटम रिसर्च के लिए जॉन क्लार्क, डेवोरेट और मार्टिनिस को मिला सम्मान

स्टॉकहोम  भौतिकी में एक प्रमुख प्रश्न किसी ऐसे तंत्र का अधिकतम आकार है जो क्वांटम यांत्रिक प्रभावों को प्रदर्शित कर सके। इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने एक विद्युत परिपथ के साथ प्रयोग किए, जिसमें उन्होंने क्वांटम यांत्रिक सुरंग निर्माण और क्वांटाइज्ड ऊर्जा स्तरों को एक ऐसे तंत्र में प्रदर्शित किया जो हाथ में पकड़ने लायक बड़ा था। इस साल का भौतिकी में नोबेल पुरस्‍कार जॉन क्लार्क कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, अमेरिका, मिशेल एच. डेवोरेट येल विश्वविद्यालय, न्यू हेवन, कनेक्टिकट और कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा, अमेरिका जॉन एम. मार्टिनिसए कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा को दिया गया है। वर्ष 2025 के नोबेल पुरस्कार की घोषणा सोमवार से शुरू हो गई है। इसकी शुरुआत स्टॉकहोम के कारोलिंस्का संस्थान में एक समिति द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में पुरस्कार की घोषणा के साथ हुई है। मंगलवार को भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार का ऐलान हुआ है। भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 3 वैज्ञानिकों जॉन क्लार्क, मिशेल एच डेवोरेट, जॉन एम मार्टिनिस दिया गया है। नोबेल समिति के अध्यक्ष ओले एरिक्सन ने कहा, “यह सचमुच अद्भुत है कि क्वांटम यांत्रिकी, जो सदियों पुरानी अवधारणा है, आज भी हमें नई खोजों से चकित कर रही है। यह न केवल रोचक है, बल्कि बेहद उपयोगी भी है, क्योंकि यही विज्ञान आधुनिक डिजिटल तकनीक की नींव है।”  स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को कहा कि, कंप्यूटर चिप्स में इस्तेमाल होने वाले ट्रांजिस्टर हमारे आसपास मौजूद क्वांटम तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण हैं। समिति की ओर से जारी बयान में बताया गया कि इस साल का फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार उन खोजों को सम्मानित करता है, जिन्होंने क्वांटम तकनीक की नई पीढ़ी का रास्ता खोला है। इसमें क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम सेंसर जैसे उन्नत क्षेत्रों के विकास की अपार संभावनाएं शामिल हैं। 226 वैज्ञानिकों को मिला है भौतिकी का नोबेल पुरस्कार एक दिन पहले ही तीन वैज्ञानिकों मैरी ई.ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल और डॉ शिमोन साकागुची को चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गई थी। साल 1901 से 2024 के बीच 118 बार भौतिकी के क्षेत्र में यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है। अब तक 226 वैज्ञानिकों को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। पिछले साल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अग्रदूत जॉन हॉपफील्ड और जेफ्री हिंटन को मशीन लर्निंग के आधार स्तंभ बनाने में मदद के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।  कब होगा नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान? नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की कड़ी में बुधवार को रसायन विज्ञान और बृहस्पतिवार को साहित्य के क्षेत्र के विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार की घोषणा 13 अक्टूबर को की जाएगी। पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा, जो इसके संस्थापक स्वीडिश उद्योगपति और डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है। नोबेल की 1896 में इसी दिन मृत्यु हुई थी। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों में 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि प्रदान की जाती है।

बिहार एसआईआर मामला: कांग्रेस का चुनाव आयोग पर तीखा हमला

 नई दिल्ली कांग्रेस ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर फिर से हमला बोलते हुए कहा कि मतदाता सूची से गैर नागरिकों को हटाने के लिए मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण की जरूरत पर बल दिया गया, लेकिन चुनाव आयोग में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह देशवासियों को बता सके कि बिहार में कितने गैर नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता की कमी है। जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी होती कि बिहार में कितने गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, तो उसकी पोल और भी ज्यादा खुल जाती। जयराम रमेश ने बताया कि बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार से फिर शुरू हो रही है। उन्होंने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख की तस्वीर भी सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया है। विश्लेषण में दावा किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप ने बड़े पैमाने पर लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंकाओं को कम किया है, लेकिन एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में सटीकता, समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। बिहार चुनाव की तारीखों का एलान विपक्ष बिहार में एसआईआर प्रक्रिया का तीखा विरोध कर रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ किया कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा और किसी भी अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। इस एलान के तहत 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और 14 नवंबर को मतगणना होगी।

10 साल बाद केंद्र की स्वास्थ्य योजना में बड़ा बदलाव, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 10 साल बाद केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों में बड़ा संशोधन किया है, जो 13 अक्टूबर से लागू होगा। इससे करीब 46 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को राहत मिलेगी। नई दरें अब अस्पताल कैटेगरी, शहर कैटेगरी और वार्ड टाइप के आधार पर तय होंगी। इससे निजी अस्पतालों को भी लाभ होगा, क्योंकि दरें औसतन 25–30% तक बढ़ाई गई हैं। सरकार ने सभी अस्पतालों को नई दरें स्वीकार करने का निर्देश दिया है, वरना उन्हें सूची से हटाया जाएगा। इस कदम से कैशलेस इलाज की सुविधा में सुधार और अस्पतालों की आय दोनों बढ़ने की उम्मीद है। क्यों जरूरी था बदलाव पिछले कई सालों से सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स शिकायत कर रहे थे कि CGHS से जुड़े अस्पताल कैशलेस इलाज देने से इनकार करते हैं। मरीजों को पहले इलाज के पैसे खुद देने पड़ते थे और फिर महीनों बाद रिफंड मिलता था। दूसरी ओर, निजी अस्पतालों का कहना था कि पुरानी दरें बहुत कम थीं और मौजूदा मेडिकल खर्चों के अनुसार नहीं थीं। बता दें कि आखिरी बार CGHS की दरों में बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था। तब से अब तक सिर्फ छोटे सुधार हुए थे, कोई व्यापक संशोधन नहीं हुआ था। कर्मचारी यूनियनों की मांग का असर इस साल अगस्त में नेशनल फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज यूनियन्स ने सरकार को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कहा था कि कैशलेस सुविधा न मिलने से कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक कठिनाई हो रही है। इसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया। नई CGHS दरें कैसे तय होंगी नई दरें अब चार मुख्य बातों पर आधारित होंगी: 1. अस्पताल का एक्रेडिटेशन (NABH/NABL) 2. अस्पताल का प्रकार (जनरल या सुपर स्पेशियलिटी) 3. शहर की श्रेणी (X, Y, Z) 4. मरीज का वार्ड प्रकार (जनरल, सेमी-प्राइवेट, प्राइवेट) नए नियमों के अनुसार, जो अस्पताल NABH/NABL प्रमाणित नहीं हैं, उन्हें 15% कम दरें मिलेंगी। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को 15% अधिक दरें मिलेंगी। शहरों की श्रेणी के अनुसार दरें-     Y (टियर-II) शहर: X शहरों से 10% कम     Z (टियर-III) शहर: X शहरों से 20% कम     पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – Y श्रेणी के अंतर्गत रखे गए हैं। वार्ड के हिसाब से दरें- • जनरल वार्ड: 5% कम • प्राइवेट वार्ड: 5% ज्यादा • ओपीडी, रेडियोथैरेपी, डेकेयर और छोटी प्रक्रियाओं की दरें पहले जैसी रहेंगी। • कैंसर सर्जरी की दरें भी समान रहेंगी, लेकिन कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी की दरें संशोधित की गई हैं। अस्पतालों के लिए अनिवार्यता स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे 13 अक्टूबर तक नई दरों को स्वीकार करें। जो अस्पताल ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें डि-एम्पैनल (CGHS सूची से हटाया) जा सकता है। कैशलेस इलाज में सुधार की उम्मीद नई दरों के बाद उम्मीद है कि अस्पताल अब CGHS मरीजों को आसानी से कैशलेस इलाज देंगे। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को जेब से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और रिफंड की झंझट खत्म होगी। CGHS पैकेज में क्या-क्या शामिल है CGHS पैकेज में इलाज से जुड़ी लगभग सारी सुविधाएं शामिल हैं-     कमरे और बेड का खर्च     भर्ती शुल्क     एनेस्थीसिया, दवाइयां और मेडिकल सामान     डॉक्टर और विशेषज्ञ की फीस     ICU/ICCU खर्च     ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, ऑपरेशन थिएटर शुल्क     फिजियोथेरेपी, टेस्ट, ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि 90 दिन में नई MoA पर साइन जरूरी अस्पतालों को अब 90 दिनों के भीतर नया समझौता (MoA) साइन करना होगा। पुरानी MoA की वैधता 13 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी। कुल मिलाकर क्या फायदा होगा यह संशोधन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहतर और कैशलेस इलाज सुनिश्चित करेगा, जबकि अस्पतालों को उचित दरों पर भुगतान मिलेगा। लगभग एक दशक बाद हुआ यह सुधार CGHS सिस्टम को अधिक व्यवहारिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

शांतिपूर्ण मतदान की तैयारी: बिहार में पहुंचीं CRPF की 71 टुकड़ियाँ

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बिहार में विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। इस बार के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की फिलहाल 500 कंपनियों को तैनात किया गया है। केंद्रीय बलों की अधिकांश कंपनियां, रविवार को बिहार में पहुंच चुकी हैं। अब इन्हें लोकल पुलिस प्रशासन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। निष्पक्ष चुनाव की गारंटी देने के लिए केंद्रीय बलों के जो 50,000 जवान बिहार पहुंचे हैं, उनमें सीआरपीएफ की वे 71 कंपनियां भी शामिल हैं, जिन्हें विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर से बुलाया गया है। चुनावी ड्यूटी पर मोर्चा संभालने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी भी शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बिहार में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव को संपन्न कराने के लिए सीआरपीएफ की 118 कंपनियों को तैनात किया गया है। इनमें से 71 कंपनियां, जम्मू-कश्मीर से बुलाई गई हैं। चुनाव में किसी तरह की कोई हिंसा न हो, इसके लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव के संवेदनशील बूथों पर कोई अप्रिय घटना न हो और बिना किसी भय के लोग चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें, इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में बिहार के लिए रवाना किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार में निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। विधानसभा चुनाव में कोई भी आपराधिक या असामाजिक तत्व, किसी तरह की बाधा न पहुंचा सकें, इसके सीएपीएफ की 500 कंपनियों को तैनात किया गया है। आने वाले दिनों में केंद्रीय बलों की संख्या बढ़ भी सकती है। अग्रिम तैनाती के दौरान केंद्रीय बल, बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में एरिया डोमिनेशन, विश्वास निर्माण के उपाय, फ्लैग मार्च और सर्विलांस का काम करेंगे। हालांकि प्रशासन द्वारा डिटेल डेपलॉयमेंट प्लान को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। बिहार सरकार से आग्रह किया गया है कि वह केंद्रीय बलों के लोकल ट्रांसर्पोटेशन, लॉजिस्टिक, रहने की जगह और दूसरी आवश्यकताओं बाबत त्वरित निर्णय लें। चुनाव के दौरान सीएपीएफ की कंपनियों द्वारा किए गए सभी तरह के मूवमेंट की जानकारी प्रतिदिन, केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी जाएगी।  

नमो भारत ट्रेन के लिए बनेगा नया स्टेशन, 5 एकड़ में तैयार होगी अत्याधुनिक सुविधा!

नई दिल्ली नमो भारत का नया स्टेशन धारूहेड़ा में लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा। इस संबंध में एनसीआरटीसी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। यह स्टेशन निर्माण परियोजना क्षेत्र की परिवहन क्षमता और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। एनसीआरटीसी की योजना के तहत, दिल्ली-जयपुर हाईवे पर दोनों तरफ स्टेशन तक पहुंचने के लिए प्रवेश और निकासी की व्यवस्था बनाई जाएगी। जयपुर से दिल्ली की तरफ, अरावली के समीप नमो भारत का स्टेशन स्थित होगा। जहां स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है, उस क्षेत्र की भूमि विवरण इस प्रकार है. तीन एकड़ जमीन: औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के अधीन दो एकड़ जमीन: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधीन स्टेशन के पूर्व प्लान के मुताबिक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की आधा एकड़ जमीन की जरूरत थी, लेकिन नए प्लान के अनुसार अधिक जमीन की आवश्यकता पड़ी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) की योजना के तहत, गुरुग्राम से फरीदाबाद होते हुए ग्रेटर नोएडा तक प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन के लिए भू-तकनीकी सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इस कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के लिए एक कंपनी का चयन किया गया है और उसे कार्य सौंपा जा चुका है। प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई: लगभग 65 किलोमीटर मुख्य स्टेशन: पहला स्टेशन: दिल्ली-जयपुर हाईवे के पास, इफ्को चौक के समीप दूसरा स्टेशन: गुरुग्राम, गोल्फ कोर्स रोड, सेक्टर-54 (मेट्रो स्टेशन के पास) इस योजना से दिल्ली-एनसीआर में यात्री परिवहन और कनेक्टिविटी में सुधार होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। स्टेशन के समीप दमकल केंद्र भी बनाया जाएगा नमो भारत स्टेशन के समीप एक दमकल केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए स्टेशन और दमकल केंद्र के बीच नौ मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। पहले इस स्टेशन के लिए एनसीआरटीसी को लगभग चार एकड़ जमीन की जरूरत थी। अब, स्टेशन को मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए एक एकड़ अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता पड़ी है। स्टेशन की योजना को दोबारा तैयार करके, दोनों विभागों से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि परियोजना को समय पर और सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। नमो भारत ट्रेन के लिए विभिन्न स्टेशनों और सुविधाओं के निर्माण हेतु NCRTC को जमीन की आवश्यकता इस प्रकार है: इफ्को चौक स्टेशन: लगभग 8 एकड़ जमीन मुख्य स्टेशन: 7 एकड़ जमीन प्रवेश और निकासी मार्ग (दूसरी तरफ): 1 एकड़ जमीन झाड़सा: 1.5 एकड़ जमीन सेक्टर-33: 0.5 एकड़ जमीन हीरो होंडा चौक के समीप: लगभग 2 एकड़ जमीन धारूहेड़ा: डिपो निर्माण के लिए अतिरिक्त जमीन का आग्रह इस विस्तृत भूमि आवंटन से नमो भारत परियोजना का निर्माण सुचारू और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। दमकल सेंटर बनेगा नमो भारत स्टेशन के पास एक दमकल सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए स्टेशन और दमकल सेंटर के बीच 9 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। पहले इस स्टेशन के लिए NCRTC को लगभग 4 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। अब स्टेशन को मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन के आधार पर तैयार किया जाएगा। स्टेशन की योजना को दोबारा तैयार किया गया है और दोनों संबंधित विभागों से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि परियोजना सुचारू रूप से और समय पर पूरी की जा सके।

ईरान में करेंसी सुधार, 0000 हटाने वाला ऐतिहासिक कदम, जानिए सरकार की मंशा

तेहरान ईरान की संसद ने एक ऐत‍िहास‍िक बिल पास क‍िया है. और अब उनकी करेंसी रियाल में चार शून्य हट जाएंगे. मतलब, 10,000 पुराने रियाल बराबर अब एक नया रियाल होगा. ये सिर्फ नंबरों का खेल लगता है, लेकिन इसके पीछे महंगाई, पाबंद‍ियां, और इकॉनमी की बदहाली की कहानी है. तो ईरान ऐसा कर क्‍यों रहा है? इससे क्‍या फायदा होगा? और क्‍या इससे पहले क‍िसी और देश ने ऐसा क‍िया है? अगर क‍िया है तो क्‍या उसकी अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार आया? सबसे पहले, समझें कि ईरान की करेंसी की हालत इन द‍िनों खराब है. रियाल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही जूझ रहा है, यह अब कागज से भी सस्ता हो गया. आप इसे ऐसे समझ‍िए क‍ि एक अमेरिकी डॉलर अगर आपको खरीदना तो 11,50,000 रियाल चाहिए. मतलब, एक रोटी खरीदने के लिए लाखों के नोट गिनने पड़ते हैं. दूसरी बात, महंगाई पिछले कई सालों से 35% से ऊपर है. कभी यह 40%, कभी 50% तक भी पहुंच जाती है. 2022 में इंटरनेशनल मॉन‍िटरी फंड की एक रिपोर्ट आई, जिससे ईरान की खस्‍ता हालत को बयां क‍िया. ईरान तेल निर्यात पर निर्भर है, लेकिन अमेरिका की पाबंदियों की वजह से चीन को छोड़कर कोई उससे तेल नहीं खरीदता. वर्ल्‍ड बैंक कहता है क‍ि तेल एक्‍सपोर्ट न होने से उसके खजाने पर भारी असर पड़ा. नतीजा महंगाई चार साल तक 40% से ऊपर रही. महंगाई चरम पर पीछे मुड़कर देखें तो ये नई बात नहीं. 1979 के बाद से ईरान में महंगाई दर 10 फीसदी से ज्‍यादा ही रही है. इस्‍लामिक क्रांत‍ि के बाद बाहर से मंगाई गई चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं. इंपोर्ट ज्‍यादा है और एक्‍सपोर्ट कम है, इसकी वजह से करेंसी का मूल्‍य ग‍िरता जा रहा है. 2023 में तो रियाल का पतन इस कदर हुआ क‍ि महंगाई ने इतना बुरा था कि मुद्रास्फीति ने मुद्रा अवमूल्यन को पछाड़ दिया. पाबंद‍ियों की वजह से विदेशी मुद्रा आई नहीं, दुन‍िया से संबंध तनावपूर्ण हो गए. राजनीत‍िक अलगाव ने अर्थव्‍यवस्‍था का दम घोट द‍िया. जीरो घटाने से होगा क्‍या? अब सवाल ये कि शून्य हटाने से क्या होगा? ईरान की सरकारी मीडिया IRNA ने बताया क‍ि रियाल वही रहेगा, सिर्फ करेंसी से चार शून्य हटाए जाएंगे. केंद्रीय बैंक को तैयारी के ल‍िए दो साल मिलेंगे. फिर तीन साल का बदलाव दौर होगा, जहां पुराने और नए दोनों नोट चलेंगे. 10,000 पुराना रियाल अब 1 नया रियाल बन जाएगा. इससे लेनदेन आसान हो जाएगा. बिल जमा करने में ग‍िनती में मुश्क‍िल होती थी, वो द‍िक्‍कत खत्‍म हो जाएगी. इसे ऐसे समझें क‍ि पहले रोटी के ल‍िए जहां 10000 रियाल देने पड़ते थे, अब एक रियाल देना होगा. लाखों की बजाय अब सैकड़ों ग‍िनना होगा. दूसरे देशों ने क्या किया     वेनेजुएला: महंगाई चरम पर हुई तो 2018 में 5 शून्य हटाए, फ‍िर 2021 में भी ऐसा क‍िया. लेकिन महंगाई अभी भी ऊंची.     जिम्बाब्वे: 2000 के दशक में ऐसा क‍िया. 10 खरब डॉलर के नोट से जीरो हटाए. लेकिन व्‍यवस्‍था नहीं सुधरी.     तुर्की: सफल कहानी. 2005 में तुर्की ने 6 शून्य हटाए, नया लिरा लाया. विश्वसनीयता लौटी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में आई.     ब्राजील: 1994 में रियाल योजना से महंगाई रोकी. नतीजा काफी बदलाव हुआ और ब्राजील कंपटीशन कर रहा है.     घाना: 2007 में सिस्टी हटाई, लेकिन विदेशी निवेश पर मिला-जुला असर रहा. सोशल मीडिया में उड़ा मजाक सोशल मीडिया में लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं. एक शख्‍स ने लिखा, ईरानी रियाल कागज से भी सस्ता है. 1 मिलियन रियाल प्रति डॉलर. सेंट्रल बैंक जीरो हटाने की योजना बना रहा. दूसरे ने तंज कसा, रियाल को बदल दो ‘ईरानी धुंध’ से. जनता का मूड कैसे बदलोगे? यह हताशा है, क्योंकि 80% लोग अब जरूरी चीजों पर ज्‍यादा खर्च कर रहे हैं. उनकी खरीदने की क्षमता कम हो गई है.

F-35 की बादशाहत को टक्कर, तुर्की के KAAN जेट पर फिदा हुआ स्पेन, अमेरिका के लिए चेतावनी

मैड्रिड अमेरिका के सुपर एडवांस्ड F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर यूरोप का भरोसा अब डगमगा गया है. बढ़ती लागत, सॉफ्टवेयर देरी और लगातार हो रही तकनीकी गड़बड़ियों के बीच स्पेन ने अमेरिकी F-35 को ठुकरा दिया है. अब खबर है कि यूरोप का यह अहम देश तुर्की के KAAN फाइटर जेट को खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम न केवल यूरोप की रक्षा रणनीति को नया मोड़ देगा बल्कि अमेरिका के वर्चस्व पर भी सीधा झटका माना जा रहा है. स्पेन का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब कई अन्य देश कनाडा, पुर्तगाल और स्विट्ज़रलैंड भी F-35 प्रोग्राम से दूरी बना रहे हैं. वजह वही: बढ़ते खर्चे, लगातार सॉफ्टवेयर फेलियर और अमेरिकी नियंत्रण को लेकर उठे सवाल. दरअसल, अमेरिका पर आरोप है कि F-35 का सोर्स कोड वह खुद तक सीमित रखता है. इससे यह जेट इस्तेमाल करने वाले देशों की डिजिटल निर्भरता उसी पर बनी रहती है. अब यूरोप ने “Rearm Europe Program” के तहत अमेरिका पर अपनी रक्षा निर्भरता घटाने का फैसला किया है. F-35 छोड़ अब स्पेन की नजर तुर्की के KAAN पर स्पेन ने अपने 2023 के रक्षा बजट में 6.25 बिलियन यूरो (करीब 7.24 अरब डॉलर) नए फाइटर जेट्स के लिए रखे थे. शुरुआत में माना जा रहा था कि स्पेन Eurofighter Typhoon या फिर Future Combat Air System (FCAS) में से किसी एक को चुनेगा. लेकिन अब स्पेनिश बिज़नेस डेली “El Economista” के मुताबिक मैड्रिड सरकार तुर्की के KAAN फाइटर जेट को खरीदने पर विचार कर रही है. जो फिलहाल विकास के दौर में है और 2030 के शुरुआती दशक में सेवा में आने की उम्मीद है. क्यों डगमगा रहा है यूरोप का FCAS प्रोजेक्ट? यूरोप का महत्वाकांक्षी Future Combat Air System (FCAS) प्रोजेक्ट अब गंभीर संकट में है. फ्रांस की Dassault Aviation और जर्मनी की Airbus Defence के बीच नियंत्रण को लेकर खींचतान ने इस कार्यक्रम की रफ्तार लगभग रोक दी है. पहले इसका परीक्षण उड़ान 2027-29 के बीच होने की उम्मीद थी, लेकिन अब यह टाइमलाइन पूरी तरह बिगड़ चुकी है. ब्रिटिश मीडिया द इकोनॉमिक टाइम्स और फाइनेंशियल टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि FCAS “पूरी तरह ध्वस्त” भी हो सकता है. इस बीच स्पेन को अगले दशक में अपने पुराने F-18 और F-5 विमानों को बदलने की जरूरत है. ऐसे में तुर्की का KAAN एक व्यावहारिक और तेजी से उपलब्ध विकल्प बन रहा है. स्पेन-तुर्की रक्षा साझेदारी गहराती दिख रही है स्पेन और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है. दिसंबर 2024 में दोनों देशों ने 24 Hürjet एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमानों के लिए समझौता किया था. सितंबर 2025 में स्पेन के मंत्रिमंडल ने 45 Hürjet विमान खरीदने को मंजूरी दे दी. जिनकी कीमत 3.68 अरब यूरो बताई जा रही है. अब KAAN की संभावित डील इस रिश्ते को और आगे बढ़ाएगी. KAAN की ताकत- F-35 को टक्कर देने वाला जेट तुर्की का KAAN फाइटर जेट फरवरी 2024 में अपनी पहली उड़ान भर चुका है. इसे Turkish Aerospace Industries (TUSAŞ) ने तैयार किया है. तुर्की ने घोषणा की है कि 2028 तक 20 ऐसे विमान उसकी वायुसेना में शामिल हो जाएंगे. KAAN को “पांचवीं पीढ़ी” का जेट माना जाता है, जिसमें स्टील्थ डिजाइन, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड कॉम्बैट क्षमता, और हाई-स्पीड एवियोनिक्स सिस्टम शामिल हैं. TUSAŞ के सीईओ Temel Kotil ने मई 2024 में दावा किया था, “KAAN, F-35 से बेहतर विमान है.” इंडोनेशिया बना पहला ग्राहक, स्पेन हो सकता है दूसरा इंडोनेशिया पहले ही 48 KAAN जेट्स खरीदने का करार कर चुका है, जिसकी डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी. वहीं, अज़रबैजान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई भी इसमें दिलचस्पी दिखा चुके हैं. अगर स्पेन यह डील साइन करता है, तो वह KAAN का दूसरा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन जाएगा जो तुर्की की रक्षा क्षमता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी.  

मच्छरों का भी है टेस्ट! बियर पीने वालों को बनाते हैं निशाना—रिसर्च में दिलचस्प खुलासा

नई दिल्ली नीदरलैंड के साइंटिस्ट ने एक रिसर्च किया जिसमें सामने आया कि जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें मच्छर सबसे ज्यादा काटते हैं. इस रिसर्च को  म्यूजिक फेस्टिवल में शामिल होने वाले 500 लोगों में किया गया. इस दौरान 500 लोगों के हाथ मच्छर से भरे डब्बे में डलवाया और इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया. इस रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों ने शराब पी रखी थी, उन्हें 34 फीसदी ज्यादा मच्छर काट रहे थे. वहीं, जिन लोनों ने नहाया नहीं था, या सनस्क्रीन लगा कर नहीं गए थे या पिछले रात किसी के साथ सोए थे. उनलोगों को भी मच्छर ने ज्यादा काटा. इस रिसर्च में पता लगा कि शराब पीने वाले इंसान को मच्छर सबसे ज्यादा काटते हैं.  म्यूजिक फेस्टिवल में किया अनोखा रिसर्च नीदरलैंड के सबसे मशहूर म्यूजिक फेस्टिवल लोलैंड्स (Lowlands) में सिर्फ म्यूजिक ही नहीं, बल्कि मच्छरों का भी धमाल देखने को मिला. साल 2023 में जब बिली इलिश और फ्लोरेंस + द मशीन ( Billie Eilish and Florence + The Machine) जैसे बड़े कलाकार स्टेज पर परफॉर्म कर रहे थे, उसी फेस्टिवल में रैडबाउड यूनिवर्सिटी, निजमेगेन के कुछ साइंटिस्ट भी पहुंचे थे, लेकिन वे गाने सुनने नहीं, बल्कि मच्छरों के रहस्य जानने आए थे.   इस रिसर्च टीम को फेलिक्स होल नाम की साइंटिस्ट लीड कर रही थीं, यह पता लगाना चाहती थी कि कुछ लोगों को मच्छर ज्यादा क्यों काटते हैं और कुछ को कम. इसके लिए उन्होंने फेस्टिवल में आए लोगों को एक खास एक्सपेरिमेंट में शामिल किया. वहां आए लोगों से कहा गया कि वे अपना हाथ मच्छरों से भरे एक डिब्बे में डालें,  लेकिन घबराइए नहीं. उनके हाथ एक सुरक्षित कपड़ों से ढके थे, जिससे मच्छर सूंघ तो सकते थे, पर काट नहीं सकते थे. तीन दिन तक चले इस फेस्टिवल में करीब 60,000 लोग शामिल हुए.  मच्छरों को बियर पसंद है, लेकिन नहाने से नफरत लोलैंड्स म्यूजिक फेस्टिवल में किए गए इस मजेदार रिसर्च से वैज्ञानिकों को कुछ दिलचस्प नतीजे मिले. फेस्टिवल के दौरान करीब 500 लोगों ने अपने हाथ मच्छरों से भरे जाल में डाली. हर एक्सपेरिमेंट को वीडियो में रिकॉर्ड किया गया ताकि बाद में देखा जा सके कि किसके हाथ पर कितने मच्छर बैठे और कितनी देर तक रहे. इसके साथ ही, सभी लोगों से एक प्रश्नावली (Questionnaire) भी भरवाई गई, जिसमें पूछा गया कि उन्होंने क्या खाया, क्या पिया या कैसे रहे. मच्छरों को पसंद आए ये लोग जब वैज्ञानिकों ने इन जवाबों को वीडियो से जोड़ा, तो सामने आया कि बीयर पीने वाले, मारिजुआना (गांजा) इस्तेमाल करने वाले, और दूसरों के साथ बिस्तर शेयर करने वाले लोग मच्छरों को सबसे ज्यादा पसंद आए! रिसर्ट टीम ने मजाकिया अंदाज में लिखा- मच्छरों को हमारे बीच के मौज-मस्ती करने वालों का स्वाद ज्यादा पसंद आता है. वहीं, जो लोग सनस्क्रीन लगाते थे या हाल ही में नहाए थे, उन्हें मच्छरों ने कम तवज्जो दी यानी की मच्छरों ने उन्हें ज्यादा नहीं काटा.  मच्छर ऐसे तय करते हैं अपना शिकार जब मच्छरों को लोगों का एक ग्रूप मिलता है, तो वे यह तय करने के लिए सबसे पहले लोगों को सूंघते हैं कि किसे काटना है और किसे नहीं. लेकिन अभी तक यह पूरी तरह पता नहीं चला कि उन्हें कौन-सी गंध सबसे ज्यादा पसंद आती है. हालांकि, रिसर्च में ये सामने आया कि मच्छरों को बीयर पीने वाले लोग ज्यादा पसंद आते हैं, लेकिन साइंटिस्ट फेलिक्स होल का कहना है कि शायद ऐसा शराब की वजह से नहीं,  बल्कि उनके व्यवहार में आने वाले बदलाव की वजह से होता है. उन्होंने बताया कि, “जो लोग शराब पीते हैं, वे ज्यादा जोश से नाचते हैं, जिससे उनके शरीर का तापमान और पसीने की गंध बदल जाती है और यही बात मच्छरों को आकर्षित कर सकती है.  हालांकि, म्यूजिक फेस्टिवल बीयर पीने वाले लोगों को ढूंढने की एक अच्छी जगह है. जो खुशी-खुशी अपने हाथ मच्छरों वाले डिब्बे में डालने को तैयार हो जाते हैं.  लेकिन ऐसी जगह पर रिसर्च करने के कुछ नुकसान भी होते हैं. सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि फेस्टिवल में आने वाले लोग ज्यादातर युवा और सेहतमंद होते हैं, जबकि आम आबादी में हर उम्र और स्वास्थ्य वाले लोग शामिल होते हैं. इसलिए यह समझने के लिए कि मच्छर असल में किन लोगों को ज्यादा काटते हैं, साइंटिस्ट को फेस्टिवल के बाहर भी ऐसे स्टडी करने होंगे.