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देश के सबसे बड़े बैंक HDFC ने घटाई ब्याज दरें, दिवाली पर EMI होगी कम!

मुंबई  देश में मार्केट वैल्यू के हिसाब से सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने दिवाली से पहले ही लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ा तोहफा दे दिया है. दरअसल, बैंक की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है, जिसके तहत कर्ज की ब्याज दरों में कटौती की गई है. इसका सीधा असर लोन लेने वालों की मासिक ईएमआई (Loan EMI) पर देखने को मिल सकता है और ये कम हो सकती है. MCLR घटाने से कर्जदारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं.  कर्ज लेने वालों को मिलेगी राहत प्राइवेट सेक्टर का एचडीएफसी बैंक करीब 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मार्केट वैल्यू के साथ जहां सबसे बड़ा बैंक है, तो वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद टॉप-10 वैल्यूएबल कंपनियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है. बैंक की ओर से अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर में कटौती की घोषणा की गई है, इससे कई लोग लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई कम हो सकती है और कर्ज की इस दर से जुड़े अलग-अलग टेन्योर के लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है. कटौती के बाद ये हैं नई ब्याज दरें  बैंक ने चुनिंदा टेन्योर पर अपने एमसीएलआर में 15 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की है. इस बदलाव के बाद अब HDFC Bank MCLR कर्ज की अवधि के आधार पर 8.40% से 8.65% के बीच होगा. इससे पहले ये8.55% से 8.75% के बीच था. रेट चेंज की बात करें, तो बैंक की ओर से ओवरनाइट एमसीएलआर 8.55% से घटाकर 8.45% कर दिया गया है, जबकि एक महीने की दर अब घटकर 8.40% हो गई है. अन्य टेन्योर के लोन के लिए एमसीएलआर में कटौती करते हुए तीन महीने की दर 15 बेसिस पॉइंटकम करके 8.45% की गई है. छह महीने और एक साल दोनों अवधि के लिए एमसीएलआर दरें अब 10 बीपीएस कम होकर 8.55% पर आ गई हैं. वहीं लॉन्ग टर्म की बात करें, तो दो साल की दर 8.60% और तीन साल की दर 8.65% रखी गई है.  क्या होता है एमसीएलआर?  यहां पर समझ लेना जरूरी है कि आखिर ये एमसीएलआर होता क्या है? तो बता दें कि ये वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जो कोई बैंक किसी कर्ज पर ले सकता है. ज्यादातर ये दर होम लोन, पर्सनल लोन और कॉमर्शियल ऋणों के लिए आधार के रूप में कार्य करती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा साल 2016 में शुरू की गई MCLR यह सुनिश्चित करतने का काम करती है कि उधारकर्ताओं से इससे कम ब्याज न लिया जाए. लोन लेने वालों पर कैसे असर?  एमसीएलआर सीधे लोन की ब्याज दर होती है और इससे जुड़े होम लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को इस संशोधन का सीधा असर होता है. इसमें की जाने वाली कटौती सीधे उनकी हर महीने कटने वाली ईएमआई में कमी ला सकती है. एचडीएफसी बैंक की होम लोन दरें फिलहाल 7.90% से लेकर 13.20% के बीच हैं, जो कर्ज लेने वालों की प्रोफाइल और लोन के प्रकार पर निर्भर करती हैं. MCLR Cut से एचडीएफसी बैंक ने खासतौर पर फ्लोटिंग लोन लेने वाले अपने ग्राहकों पर ईएमआई का बोझ कम करने के लिए कदम उठाया है. इससे होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई कम हो सकती है. इस लेंडिंग रेट को तय करने के लिए कई अहम फैक्टर्स पर फोकस दिया जाता है. इसमें बैंक की डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट और कैश रिजर्व रेशो को बनाए रखने का खर्च शामिल होता है. रेपो रेट और रिजर्व रेपो रेट में बदलाव का भी इसपर असर होता है. 

शेयर बाजार में लगातार तेजी, Titan और TCS ने बढ़ाया जोश

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है और बुधवार को लगातार पांचवें कारोबारी दिन सेंसेक्स-निफ्टी ग्रीन जोन में ओपन हुए. ओपनिंग के साथ ही जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा चढ़कर 82,200 के पार निकल गया, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद की तुलना में बढ़त के साथ खुला. शुरुआती कारोबार में टाटा ग्रुप की Titan कंपनी का शेयर रॉकेट की रफ्तार से भागता हुआ नजर आया, तो वहीं TCS, Infosys से लेकर HCL Tech तक के स्टॉक्स में भी शानदार तेजी दिखी.  82200 के पार निकला सेंसेक्स शेयर मार्केट में ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स 81,899.51 पर ओपन हुआ औऱ कुछ ही देर में ये 300 अकों से ज्यादा की उछाल के साथ 82,257.74 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा. कुछ ऐसी ही चाल एनएसई के निफ्टी की भी रही. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले मामूली सुस्ती लेकर 25,079.75 पर खुला और फिर सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर 25,192.50 के स्तर तक चढ़ गया. 1307 शेयरों ने की तेज शुरुआत बाजार में तेजी के बीच बुधवार को करीब 1307 कंपनियों के स्टॉक्स ने अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी लेकर कारोबार की शुरुआत की. इसके साथ ही बाजार में मौजूद 1073 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जिनकी ओपनिंग गिरावट के साथ रेड जोन में हुई. वहीं करीब 140 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. शुरुआती कारोबारी में Titan Company, Asian Paints, Bajaj Finance, Tata Steel और Max Healthcare के शेयर सबसे ज्यादा भागने वाले स्टॉक्स की लिस्ट में आगे रहे. कल आई थी जोरदार तेजी इससे पहले बीते कारोबारी दिन मंगलवार को भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन मार्केट क्लोज होने पर इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ी थी. हालांकि, इसके बावजूद दोनों इंडेक्स ग्रीन जोन में बंद हुए थे. सेंसेक्स कारोबार के दौरान 400 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेने के बाद अंत में 136.63 अंक चढ़कर 81,926.75 पर क्लोज हुआ था. तो वहीं निफ्टी ने महज 30 अंकों की बढ़त के साथ 25,108.30 पर क्लोजिंग की थी.  टाइटन का धमाल, ये शेयर भी कमाल सबसे तेज भागने वाले शेयरों की टॉप-10 लिस्ट पर नजर डालें, तो टाटा ग्रुप की कंपनी Titan का शेयर अव्वल रहा और ये 4.20% की तेजी लेकर 3559.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसके बाद लार्जकैप में शामिल अन्य स्टॉक्स में Infosys (2.50%), Tech Mahindra (2.10%), TCS (2.10%) और HCL Tech Share (1.60%) की तेजी लेकर कारोबार करता नजर आया.  इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों में Escorts Share (4.68%), Relaxo Share (2.84%) और Tata Elxsi (2.70%) की बढ़त लेकर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कंपनियों में सबसे तेज उछाल ITI Share में आया और ये 11 फीसदी से ज्यादा की बढ़त लेकर ट्रेड कर रहा था.

सोने में निवेश करें आज, 2050 तक होगा कितना मुनाफा? जानिए विस्तार से

मुंबई  आज के रेट्स के हिसाब से देखें तो भारत में 24 कैरेट सोना करीब 1,23,100 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है. अलग-अलग शहरों में मामूली फर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल यही बाजार की औसत दर है.सोने की कीमतों में लगातार उछाल की कई वजहें हैं. सबसे पहले तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और यूरोप की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है. दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का समीकरण. जब डॉलर महंगा होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमत अपने आप ऊपर चली जाती है क्योंकि भारत ज्यादातर सोना आयात करता है.त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसके दाम और उछलते हैं. साथ ही, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं ताकि अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रख सकें. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमतों में इजाफा हो रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आप आज 1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो 2050 तक उसकी कीमत कितनी होगी? इसका सीधा जवाब तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पिछले 25 सालों के आंकड़ों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है.साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4,400 रुपये के आसपास था, जबकि आज वही लगभग 1,23,100 के आसपास पहुंच गया है. यानी 25 साल में करीब 25 गुना बढ़ोतरी हुई.अगर आने वाले 25 सालों तक सोना औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहा, तो 1,00,000 का सोना 2050 तक लगभग 11-12 लाख के आसपास हो सकता है. अगर वृद्धि दर 8% रही तो ये मूल्य करीब 7 लाख और अगर 12% रही तो 15 लाख से ऊपर पहुंच सकता है. एक किलो सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें नफा-नुकसान  सोना हमेशा से इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन माना गया है. इसका आकर्षण केवल इसकी कीमत में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं के समय यह एक भरोसेमंद साथी भी होता है. ऐसे में अगर आप आज एक किलो सोना खरीदते हैं, तो सवाल उठता है कि 2050 तक इसकी कीमत कितनी हो सकती है और निवेश से कितना लाभ या नुकसान हो सकता है. आइए, वर्तमान रेट और ऐतिहासिक ट्रेंड के आधार पर इसकी कीमतों का आंकलन करते हैं. वर्तमान सोने की कीमत  अक्टूबर 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 11,942 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. इसका मतलब है कि एक किलो यानि 1000 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,19,42,000 रुपये तक हो सकती है. यह दाम अलग-अलग शहरों और बाजारों में थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन तकरीबन यही मूल्य देखा गया है. 2050 तक सोने की कीमत एक साधारण गणना के आधार पर देखा जाए तो यदि सोने की कीमतों में वर्तमान दर से औसतन 8% वार्षिक बढ़ोतरी होती है, तो 2050 तक सोने की कीमत में लगभग 25 गुना वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि 2050 में एक किलो सोने की कीमत लगभग 30-35 करोड़ तक पहुंच सकती है. लेकिन अगर सोने की कीमतें 10% वार्षिक दर से बढ़े तो यह 45-50 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल ट्रेंड और औसत वृद्धि दर पर आधारित है. भविष्य में इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. नफा-नुकसान का आंकलन पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है. सोना इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में सुरक्षित होता है. सोने की कीमतें आमतौर पर इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती हैं, जिससे यह इन्फ्लेशन से सुरक्षा देता है. क्या हो सकता है नुकसान? एक किलो सोने को सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टोरेज और सुरक्षा की जरूरत होती है, जो इसके लिए एक्स्ट्रा खर्च का कारण बन सकता है. सोने को तुरंत नकदी में परिवर्तित करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, खासकर बड़े दाम में. ऐसे में इसके फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. 

पिन का जमाना हुआ पुराना! 8 अक्टूबर से UPI में फेस और फिंगरप्रिंट से करें भुगतान

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करोड़ों भारतीयों द्वारा हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से भुगतान करने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला है. अब आपको पेमेंट करते समय 4 या 6 अंकों का पिन याद रखने और उसे डालने की जरूरत नहीं होगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर से उपयोगकर्ता अपने चेहरे (फेशियल रिकग्निशन) और फिंगरप्रिंट के जरिए UPI पेमेंट को मंजूरी दे सकेंगे. यह कदम न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित भी बना सकता है. जानकारों का कहना है कि यह भारत के डिजिटल सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां आपकी पहचान ही आपका पासवर्ड बन जाएगी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), जो UPI नेटवर्क का संचालन करता है, इस अत्याधुनिक सुविधा को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. हालांकि, NPCI ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस नई तकनीक को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. क्या है डिटेल NPCI (जो UPI का संचालन करती है) इस फीचर को ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल, मुंबई में प्रदर्शित करने जा रही है। इससे डिजिटल पेमेंट्स और तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई सुविधा में पेमेंट की ऑथेंटिकेशन (वेरिफिकेशन) भारत सरकार की आधार प्रणाली में दर्ज बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से की जाएगी। यानी, यूजर्स का चेहरा या फिंगरप्रिंट उनके आधार डेटा से मैच किया जाएगा, जिससे पेमेंट की अनुमति मिल जाएगी। RBI के नए दिशानिर्देशों बता दें कि यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डिजिटल ट्रांजैक्शनों के लिए वैकल्पिक ऑथेंटिकेशन तरीकों की अनुमति दी गई थी। इससे डिजिटल पेमेंट्स में सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव — दोनों को बेहतर बनाने की उम्मीद है। UPI अनुभव होगा और आसान वर्तमान में, हर UPI ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को 4 या 6 अंकों का PIN दर्ज करना होता है। नई सुविधा लागू होने के बाद, फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट सेंसर के जरिए पेमेंट तुरंत ऑथेंटिकेट हो जाएगा। इससे ट्रांजैक्शन समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, और यूजर अनुभव और सहज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी, क्योंकि चेहरा या फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कॉपी करना मुश्किल है। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए NPCI और UIDAI के बीच मजबूत तकनीकी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। कैसे काम करेगी यह नई तकनीक? यह नई बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली पूरी तरह से भारत सरकार की विशिष्ट पहचान प्रणाली ‘आधार’ पर आधारित होगी. सूत्रों में से एक ने स्पष्ट किया कि जब कोई उपयोगकर्ता भुगतान के लिए अपने चेहरे या फिंगरप्रिंट का उपयोग करेगा, तो उसका सत्यापन आधार के साथ संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा से किया जाएगा. इसका मतलब है कि केवल वही व्यक्ति भुगतान को मंजूरी दे पाएगा, जिसका बैंक खाता और UPI आईडी उसके आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है. यह प्रक्रिया बेहद सरल होगी. भुगतान करते समय, उपयोगकर्ता को पिन डालने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट स्कैनर सक्रिय हो जाएगा. एक सफल स्कैन के बाद, डेटा को सुरक्षित रूप से आधार सर्वर से मिलान के लिए भेजा जाएगा और मिलान होते ही भुगतान तुरंत सफल हो जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे भुगतान का अनुभव सहज और बाधा रहित हो जाएगा. यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिन्हें अपना पिन याद रखने में कठिनाई होती है या जो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं. क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? UPI में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को शामिल करने का यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा परिणाम है. RBI ने भुगतान प्रणालियों में सुरक्षा और नवीनता को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी थी. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपना सकें. मौजूदा पिन-आधारित प्रणाली, हालांकि काफी हद तक सुरक्षित है, फिर भी इसमें कुछ कमजोरियां हैं, जैसे कि कोई आपका पिन देख सकता है या फिशिंग के जरिए उसे चुरा सकता है. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इन जोखिमों को लगभग समाप्त कर देता है, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट और चेहरा अलग होता है.  

रुपये की गिरती चाल पर RBI का एक्शन, स्थिरता के लिए बनाया मास्टर प्लान

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप (Buy/Sell Swap) के जरिए विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) में दखल दिया. इस कार्रवाई के बाद रुपये की कीमत 88.77 प्रति डॉलर पर टिकी रही, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर 88.80 के बेहद करीब थी. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI ने एक साथ स्पॉट मार्केट और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर डॉलर की उपलब्धता और रुपये की स्थिरता दोनों को नियंत्रित करने की कोशिश की. जानिए आखिर ये ‘बाय/सेल स्वैप’ होता क्या है और इससे कैसे रुकती है रुपये की गिरावट. क्या होता है RBI का ‘डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप’ ‘बाय/सेल स्वैप’ एक ऐसा सौदा होता है जिसमें RBI अभी के समय में (स्पॉट मार्केट में) डॉलर खरीदता है, लेकिन साथ ही यह तय कर लेता है कि भविष्य की किसी तारीख पर (फॉरवर्ड मार्केट में) वही डॉलर वापस बेच देगा. सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह का टेंपरेरी ट्रांजेक्शन होता है, जिसका मकसद बाजार में अचानक आई डॉलर की मांग को पूरा करना और रुपये पर दबाव को कम करना होता है. इस प्रक्रिया में RBI न तो स्थायी रूप से डॉलर जमा करता है और न ही अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव लाता है. बस इतना सुनिश्चित करता है कि डॉलर की कमी से रुपया कमजोर न पड़े. इससे रुपये की गिरावट कैसे रुकती है जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल कंपनियां, इंपोर्टर्स या फॉरेन इन्वेस्टर्स एक साथ डॉलर खरीदने लगते हैं, तो डॉलर की कीमत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. ऐसे समय में RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर डॉलर की कीमत को स्थिर रखता है. अगर RBI डॉलर बेचता है तो बाजार में डॉलर की भरमार हो जाती है और रुपया संभल जाता है. अगर RBI ‘बाय/सेल स्वैप’ करता है, तो वह अस्थायी तौर पर डॉलर खरीदता है लेकिन भविष्य में बेचने का वादा करता है. इससे बाजार में भरोसा बनता है कि RBI रुपया कमजोर नहीं होने देगा, जिससे ट्रेडर्स रुपये पर सट्टा लगाना कम कर देते हैं. फॉरवर्ड प्रीमियम क्यों घटा RBI की इस स्वैप कार्रवाई के बाद डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम यानी भविष्य के सौदों पर ब्याज दरें कम हो गईं. 1-वर्षीय इम्प्लाइड यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 2.23% पर आ गई, जो एक महीने में सबसे निचला स्तर है. यह संकेत देता है कि बाजार को भरोसा है कि RBI स्थिति पर नियंत्रण रखेगा और आने वाले समय में रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. क्यों जरूरी है RBI की ये दखलअंदाजी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और डॉलर पर निर्भरता काफी ज्यादा है. ऐसे में डॉलर का महंगा होना सीधा असर महंगाई और आयात लागत पर डालता है. RBI के समय रहते कदम उठाने से एक ओर रुपये की स्थिरता बनी रहती है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों को भी भरोसा मिलता है कि भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी सीमित रहेगी.

रियल एस्टेट सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश, भारतीय निवेशकों ने ₹35,000 करोड़ लगाकर बनाए नए मुकाम

मुंबई घरेलू पूंजी के सहारे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के दौरान इस सेक्टर में 4.3 बिलियन डॉलर (₹35,000 करोड़) का बड़ा निवेश हुआ है. यह आंकड़ा पिछले पांच सालों के औसत निवेश को पार कर गया है.  यह निवेश पिछले पांच वर्षों के जनवरी से सितंबर की अवधि के औसत 4 बिलियन डॉलर के प्रवाह से अधिक रहा है, जैसा कि कोलियर्स इंडिया (Colliers India) की एक रिपोर्ट में बताया गया है. यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों के लगातार विश्वास को दर्शाती है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश Q3 2025 (जुलाई-सितंबर तिमाही) में $1.3 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि है'.  घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत पूंजी में साल-दर-साल (YoY) 52 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो $2.2 बिलियन तक पहुंच गई है. यह भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती गहराई और रुचि को दर्शाता है. घरेलू निवेशकों की सबसे अधिक रुचि ऑफिस और आवासीय (Residential) सेगमेंट में दिखी. तिमाही के दौरान घरेलू निवेश में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा अकेले ऑफिस संपत्तियों का रहा, जो तैयार और निर्माणाधीन दोनों तरह की वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए लगातार भूख को दर्शाता है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "मुख्य एसेट क्लास में निरंतर मांग और घरेलू पूंजी की बढ़ती गहराई के साथ, निवेश की गति स्थिर रहने की संभावना है, भले ही वैश्विक चुनौतियों के कारण विदेशी निवेशक निकट भविष्य में सतर्क बने रहें." ऑफिस सेगमेंट और प्रमुख शहर ऑफिस सेगमेंट में निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जो वर्ष 2024 के स्तर के लगभग बराबर है, 2025 के पहले नौ महीनों में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश $1.5 बिलियन तक पहुंच गया, जो इस अवधि के कुल निवेश का 35 प्रतिशत है. पिछली छमाही की तुलना में Q3 2025 में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश में जबरदस्त उछाल आया, जो साल-दर-साल 27 प्रतिशत बढ़कर $0.8 बिलियन हो गया.  कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नाडार ने बताया, "ऑफिस संपत्तियों ने कुल तिमाही प्रवाह का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाया, जिसका नेतृत्व तैयार वाणिज्यिक संपत्तियों के उल्लेखनीय अधिग्रहणों ने किया, खासकर चेन्नई और पुणे में." प्रमुख शहर और भविष्य की रणनीति मुंबई इस साल निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा, करीब $0.8 बिलियन के प्रवाह के साथ, मुंबई ने 2025 में कुल संस्थागत निवेश का 19 प्रतिशत आकर्षित किया, जिसका मुख्य कारण ऑफिस और आवासीय संपत्तियों में बड़ी डील्स थीं. इसके बाद बेंगलुरु का स्थान रहा, रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि घरेलू संस्थान निरंतर पूंजी का स्थिर स्रोत बने रहने की उम्मीद है.

करवा चौथ से पहले सोने-चांदी के दामों में आग, जानिए आज का गोल्ड और सिल्वर रेट

मुंबई  करवा चौथ (Karwa Chauth) के महापर्व से पहले सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है. 7 अक्टूबर (मंगलवार) को यूपी की राजधानी लखनऊ से लेकर मेरठ तक सोने की चमक बढ़ी है. लखनऊ में आज सोना 1045 रुपए प्रति 10 ग्राम तक महंगा हुआ है. वहीं, वाराणसी और मेरठ में भी सोने के भाव जबरदस्त बढ़े हैं. चांदी की कीमत में भी आज 1000 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी देखी गई है. वाराणसी (Varanasi) के सर्राफा बाजार में 7 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1150 रुपए प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,22,070 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. वहीं, 6 अक्टूबर को इसका भाव 1,20,920 रुपए प्रति 10 ग्राम था. इसके अलावा आज लखनऊ में सोना 1045 रुपए के उछाल के बाद 1,23,670 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया. मेरठ में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,23,680 रुपए प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट गोल्ड का भाव भी बढ़ा मंगलवार को वाराणसी के सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने की कीमत 1150 रुपए प्रति 10 ग्राम की बड़ी तेजी आई, जिसके बाद इसकी कीमत 1,12,000 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. इसके पहले 6 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,10,850 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत आज 940 रुपए उछलकर 91,670 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. चांदी ने फिर बनाया रिकॉर्ड 7 अक्टूबर को चांदी की कीमत ने फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया. सर्राफा बाजार खुलते ही मंगलवार को चांदी की कीमत में 1000 रुपए प्रति किलो की तेजी आई, जिसके बाद उसका भाव 1,57,000 रुपए प्रति किलो हो गया. इसके पहले 6 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,56,000 रुपए प्रति किलो थी.  अभी जारी रहेगी तेजी वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री रवि सर्राफ ने बताया कि बीते कुछ दिनों से सोने-चांदी की कीमत लगातार बढ़ रही है. बाजार के ट्रेंड को देखकर उम्मीद है कि आगे भी इसकी कीमतों में तेजी का दौर बना रहेगा.  

Galaxy M17 5G जल्द होगा लॉन्च, Samsung ला रहा है सस्ता 5G फोन दमदार फीचर्स के साथ

मुंबई  Samsung Galaxy M17 5G भारत में लॉन्च होने वाला है. ये कंपनी का लेटेस्ट फोन होगा, जो M-सीरीज में लॉन्च होगा. कंपनी ने इसका आधिकारिक पोस्टर शेयर कर दिया है, जिसमें इसके डिजाइन और कलर ऑप्शन को रिवील किया गया है. हैंडसेट ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon पर उपलब्ध होगा.  स्मार्टफोन में AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें 50MP के मेन लेंस वाला ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा. कंपनी इस फोन को Samsung Galaxy M16 5G के सक्सेसर के तौर पर लॉन्च कर रही है. आइए जानते हैं इस हैंडसेट की डिटेल्स.  कब लॉन्च होगा स्मार्टफोन?  Samsung Galaxy M17 5G को कंपनी 10 अक्टूबर को लॉन्च करने वाली है. ये फोन ऐमेजॉन पर उपलब्ध होगा. कंपनी ने इसका टीजर भी ऐमेजॉन पर जारी किया है. स्मार्टफोन दो कलर ऑप्शन मूनलाइट सिल्वर और सफायर ब्लैक में मिलेगा. सैमसंग ने इसका अलग से पेज भी लाइव किया है, जिस पर जरूरी स्पेसिफिकेशन्स दिए गए हैं.  क्या होंगे स्पेसिफिकेशन्स?  Samsung Galaxy M17 5G में 6.7-inch का Super AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जिसकी प्रोटेक्शन के लिए गोरिल्ला ग्लास विक्टस का इस्तेमाल किया गया है. स्मार्टफोन IP54 रेटिंग के साथ आएगा. इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा, जिसका प्राइमरी सेंसर 50MP का होगा.  इसके अलावा 5MP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस और 2MP का मैक्रो सेंसर मिलेगा. कैमरा OIS सपोर्ट के साथ आएगा. फ्रंट में 13MP का कैमरा मिलेगा. हैंडसेट में AI पावर्ड फीचर्स भी होंगे. इसमें सर्किल टू सर्च और Gemini Live जैसे फीचर्स मिलेंगे. फोन की मोटाई 7.5mm होगी.  ये फोन Galaxy M16 5G का अपग्रेड होगा. ये स्मार्टफोन 11,499 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था. संभव है कि M17 5G की कीमत भी 15 हजार रुपये से कम होगी. हालांकि, फोन की आधिकारिक कीमत का खुलासा 10 अक्टूबर को होगा.

कतर में भी चलेगा भारत का UPI, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बोले- \’द्विपक्षीय संबंधों की नई ऊंचाई\’

नई दिल्ली भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) का डंका दुनिया में बज रहा है. अब इसका इस्तेमाल करने वाले देशों की लिस्ट में कतर भी शामिल हो गया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने राजधानी दोहा के लुलु मॉल में यूपीआई सिस्टम लॉन्च किया. मतलब अब वहां आसानी से क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट किया जा सकता है. इस लॉन्च के मौके पर उन्होंने कहा कि यूपीआई न सिर्फ डिजिटल पेमेंट का एक तरीका है, बल्कि ये भारतीय इनोवेशन और तकनीक की ताकत का प्रतीक भी है.  भारत-कतर की बढ़ती साझेदारी का प्रतीक दो दिवसीय कतर दौरे के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वहां यूपीआई सिस्टम लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि कतर में UPI से पेमेंट भारत की टेक्नोलॉजी और दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी का उदाहरण है. इसके साथ ही ये दोनों देशों के बीच भरोसे को भी दर्शाता है. उन्होंने यूपीआई के बढ़ते दायरे के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भारत में जहां 85% डिजिटल पेमेंट इस सिस्टम के जरिए होते हैं, तो दुनियाभर में करीब 50% डिजिटल पेमेंट भी यूपीआई से हो रहे हैं.  कतर नेशनल बैंक (QNB) ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई के साथ साझेदारी में अपने मर्चेंट क्लाइंट्स के लिए पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनलों पर QR कोड-आधारित यूपीआई पेमेंट की सर्विस शुरू की है. कतर में LuLu आउटलेट्स पर अब भारतीय पेमेंट सिस्टम के जरिए लेन-देन स्वीकार किए जाने के साथ, भारत से आने वाले पर्यटक आसान और अधिक सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का आनंद कतर में भी ले सकते हैं, जिससे नकदी ले जाने या मुद्रा विनिमय का प्रबंधन करने की आवश्यकता कम हो जाती है. भारत दुनिया में सबसे तेज अर्थव्यवस्था लुलु रिटेल के ग्रुप डायरेक्टर मोहम्मद अल्ताफ ने कहा कि दुनिया की वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए, कतर और भारत के बीच संबंध बहुत खास हैं. कतर ने विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, इसके पास एक विश्व स्तरीय हवाई अड्डा और एक ओपन मार्केट भी है, जिसमें भारतीय कंपनियों का भी स्वागत है. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और भारत-कतर के बीच बहुत अच्छा तालमेल है. यह एक पारंपरिक, लेन-देन वाला व्यावसायिक संबंध है, और दोनों देश इसे आगे ले जाना चाहते हैं. द्विपक्षीय व्यापार संबंध बढ़ाने पर जोर एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोहा में यूपीआई लॉन्च करने के साथ ही केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कतर के वाणिज्य-उद्योग मंत्री महामहिम शेख फैसल बिन थानी बिन फैसल अल थानी के साथ एक बैठक भी की. इसमें आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग पर बातचीत की गई. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इससे जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए पीयूष गोयल ने बताया, 'दोनों पक्षों ने मजबूत द्विपक्षीय व्यापार के आधार पर भारत-कतर साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.' 

Flipkart विवाद: प्री-बुकिंग में 5000 लिए, यूजर्स बोले—फोन भी नहीं मिला, पैसे भी गए

मुंबई  अमेरिकी कंपनी Wallmart की स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart पर यूजर्स आरोप लगा रहे हैं. कंपनी पर आरोप है कि सेल के दौरान Pre Researve पास 5,000 रुपये में बेचा गया. कंपनी ने दावा किया कि 5000 रुपये का पास खरीदने वाले को iPhone 16 Pro सस्ते में मिलेगा.  दरअसल Big Billion Days सेल से कुछ ही दिन पहले Flipkart ने iPhone 16 Pro के लिए Pre Pass बेचना शुरू कर दिया था. अच्छी बात ये है कि कई लोगों ने ये पास खरीदा और उन्हें लगभग 70 हजार रुपये में iPhone 16 Pro मिला भी. लेकिन जिन्हें iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया उन्हें कंपनी पैसे वापस नहीं कर रही है.  जाहिर है कंपनी ने iPhone 16 Pro के लिमिटेड युनिट्स ही कम क़ीमत पर बेचे हैं. इसलिए उन सभी लोगों को iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया जिन्होंने 5000 रुपये का पास खरीदा था.  इतना ही नहीं, कुछ यूजर्स ने iPhone 16 Pro बुक भी कर लिया था, लेकिन बाद में फ्लिपकार्ट ने ख़ुद ही उसे कैंसिल कर दिया. यहां तक कि कुछ यूजर्स ने फ्लिपकार्ट पर ये भी आरोप लगाए हैं कि उनका ऑर्डर उनके नजदीकी हब तक पहुंचने के बाद कंपनी ने उसे कैंसिल कर दिया है.  अभिषेक यादव नाम के एक X यूजर ने एक पोस्ट में लिखा है कि जिन लोगों को iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया उनका 5000 रुपये का नुक़सान हो गया. क्योंकि कंपनी के टर्म्स में साफ़ लिखा है कि ये 5000 रुपये का प्री पास नॉन रिफंडेबल है.  चूंकि Flipkart ने अपने टर्म्स एंड कंडीशन में पहले ही साफ़ कर दिया था कि 5000 रुपये का ये पास नॉन कैंसिलेबल और नॉन रिफंडेबल है. अगर पहले 48 घंटों के अंदर कस्टम iPhone 16 Pro (128GB) खरीदने में असमर्थ रहता है तो पास कैंसिल हो जाएगा और पैसे वापस नहीं मिलेंगे.  अब सोचिए, लाखों यूजर्स ने 5000 रुपये का पास लिया होगा, लेकिन iPhone 16 Pro कितने यूजर्स को मिला ये साफ़ नहीं है. हालांकि X पर ज़्यादातर पोस्ट ऐसे ही मिलेंगे जिनमे ये दावा किया जा रहा है कि 5000 रुपये का पास खरीदने के बावजूद उन्हें iPhone 16 Pro डिस्काउंटेड रेट में नहीं मिला. ऐसे में कंपनी ने यूजर्स के 5000-5000 रुपये ले कर काफी पैसा बनाया.  बेहतर प्रैक्टिस ये होता कि 5,000 में प्री पास अगर कंपनी बेच रही है और iPhone 16 Pro डिस्काउंटेड रेट में यूजर को नहीं मिला. ऐसे में  कस्टमर्स को 5000 रुपये या तो रिफंड कर दिए जाने चाहिए थे या किसी दूसरे प्रोडक्ट को खरीदने पर एडजस्ट हो जाने चाहिए था. लेकिन कंपनी ने दूसरा रूख अपनाना बेहतर समझा. कुल मिला कर ये कि जिन्हें किसी भी रीजन से iPhone 16 Pro 128GB नहीं मिल पाया उनके 5,000 रुपये डूब गए.  X पर कई यूजर्स Flipkart के ख़िलाफ़ कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा करने की भी बात कह रहे हैं. उनका दावा है कि ऐसे हजारों यूजर्स हैं जिनके 5,000 रुपये डूबे हैं और इससे Flipkart ने अनफेयर तरीके से पैसे बना रही है.