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सस्ता Vision Pro अब नहीं मिलेगा! एप्पल का AI ग्लास पर बड़ा फोकस

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नई दिल्ली  टेक दिग्गज Apple ने अपने बजट Vision Pro हेडसेट की योजना को रोकते हुए अब पूरी ताकत AI-संचालित स्मार्ट ग्लासेस के विकास पर लगा दी है। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार टीमें अब तक सस्ते Vision Pro वेरिएंट पर काम कर रही थीं। उन्हें नए ग्लासेस प्रोजेक्ट पर तेजी लाने के लिए आदेश दिए गए थे। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब Meta ने हाल ही में अपने नए Ray-Ban AI ग्लासेस पेश किए हैं। अब स्मार्ट आईवियर बाजार में कंपटीशन बढ़ रही है। Vision Air फिलहाल टला काफी समय से "Vision Air" नामक हल्के और सस्ते Vision Pro हेडसेट को लेकर चर्चाएं थीं, जिसके 2027 में लॉन्च होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब यह रोडमैप फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। Apple का स्मार्ट ग्लासेस प्लान Apple के नए स्मार्ट ग्लासेस में कैमरे, माइक्रोफोन और AI सॉफ्टवेयर होंगे। शुरुआती मॉडल iPhone से कनेक्ट होकर काम करेंगे। कंपनी इन्हें 2026 में पेश कर सकती है और 2027 तक बड़ा लॉन्च संभव है। स्टाइल और टेक का संगम Apple अपने ग्लासेस को फैशन एक्सेसरी के रूप में भी पेश करने जा रहा है। ये अलग-अलग फ्रेम, रंग और प्रीमियम मटेरियल में उपलब्ध हो सकते हैं। भविष्य के वर्जन में हेल्थ सेंसर जोड़ने की भी योजना है। डिस्प्ले वर्जन पाइपलाइन में पहले मॉडल में इनबिल्ट डिस्प्ले नहीं होगा। हालांकि, Apple ने डिस्प्ले-इक्विप्ड वर्जन का टाइमलाइन 2028 से घटाकर तेज कर दिया है, जिससे Meta के Ray-Ban Display ग्लासेस से मुकाबला किया जा सके। कीमत और लॉन्च टाइमलाइन कीमत का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन Apple का इतिहास बताता है कि ये सस्ते नहीं होंगे। शुरुआती लॉन्च 2026 में और बड़े पैमाने पर रोलआउट 2027 में संभव है। Vision Pro रहेगा जारी सस्ता Vision Pro फिलहाल टल गया है, लेकिन Apple अपना हेडसेट लाइनअप बंद नहीं कर रहा। नया Vision Pro, M5 चिप के साथ, इसी साल आने की उम्मीद है।

छठ और दिवाली पर आपकी जेब होगी भारी, RBI की रिपोर्ट में महंगाई पर नियंत्रण का दावा

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नई दिल्ली  केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के घरों में खाने-पीने और दूसरी चीजों की कीमतों पर दबाव कम हो रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नए सर्वे से ये बात सामने आई है. आरबीआई का ये बाय-मंथली इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशंस सर्वे ऑफ हाउसहोल्ड्स (IESH) सितंबर 2025 का राउंड था. इसमें घरवालों ने बताया कि मुख्य उत्पादों की कीमतों और महंगाई का दबाव घट रहा है. हालांकि, अभी की महंगाई की धारणा थोड़ी बढ़ी हुई लगी. एनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में कहा गया कि घरों ने फूड प्रोडक्ट्स, नॉन-फूड प्रोडक्ट्स, हाउसिंग और सर्विसेज की लागत में राहत महसूस की है. ये सर्वे 28 अगस्त से 6 सितंबर के बीच 19 बड़े शहरों में किया गया. कुल 6,082 लोगों ने जवाब दिए. तीन महीनों में महंगाई की उम्मीद घटी सर्वे के नतीजों के अनुसार, घरों की मौजूदा मीडियन महंगाई की धारणा पहले राउंड से 20 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 7.4 फीसदी हो गई. लेकिन आने वाले समय के लिए उम्मीदें कम हुईं. अगले तीन महीनों की महंगाई की उम्मीद 20 बेसिस पॉइंट्स घटकर 8.1 फीसदी रह गई. एक साल आगे की उम्मीद 30 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 8.7 फीसदी हो गई. एक साल में इतने फीसदी कीमतें बढ़ेंगी छोटे समय और एक साल के लिए, जिन लोगों को लगता है कि सामान्य कीमतें और महंगाई बढ़ेगी, उनका प्रतिशत पिछले सर्वे से कम हुआ. उत्पादों के हिसाब से, अगले तीन महीनों में 77.8 फीसदी लोगों को कीमतें बढ़ने की आशंका है, जो पहले 79.5 फीसदी था. एक साल में 86.8 फीसदी कीमतें बढ़ने का अंदेशा है, पहले ये 88.1 फीसदी था. उम्र के हिसाब से, 25 साल से कम उम्र के युवाओं ने सबसे कम मौजूदा महंगाई 7.0 फीसदी बताई. वहीं, 60 साल से ऊपर के घरों में ये 7.9 फीसदी रही. शहरों में कोलकाता में सबसे ज्यादा 10.5 फीसदी की धारणा थी, उसके बाद मुंबई 8.5 फीसदी और दिल्ली 8.0 फीसदी. आरबीआई ने साफ किया कि ये सर्वे घरों की महंगाई पर नजर डालता है, जो उनके खरीदारी के पैटर्न से प्रभावित होता है. लेकिन ये नतीजे बैंक की अपनी महंगाई की राय को जरूरी नहीं दर्शाते. ये जानकारी घरवालों को राहत देती है कि कीमतें धीरे-धीरे काबू में आ रही हैं, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है.

बिक्री में गिरावट के बीच एक चमकता सितारा, मारुति और महिंद्रा को भी पीछे छोड़ा

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मुंबई  सितंबर में जिन ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सबसे ज्यादा कार बेचीं उसका डेटा सामने आ गया है। हर बार की तरह एक बार फिर पिछले महीने मारुति सुजुकी देश की नंबर-1 कार कंपनी रही। हालांकि, उसे अगस्त की तुलना में गिरावट का सामना करना पड़ा। चौंकाने वाली बात ये है कि GST 2.0 से छोटी कारों की कीमतें घटने के बाद भी कंपनी की गिरावट देखनी पड़ी। दूसरी तरफ, टाटा मोटर्स ने कमाल के सेल्स आंकड़ों के साथ दूसरी पोजीशन पर वापसी की। कंपनी ने महिंद्रा और हुंडई को काफी पीछे छोड़ दिया। खास बात ये है कि टॉप-6 की लिस्ट में टाटा एकमात्र ऐसी कंपनी रही जिस मंथली बेसिस पर ग्रोथ मिली। टॉप कार सेल्स कंपनी सितंबर 2025 कंपनी अगस्त 2025 सितंबर 2025 चेंज % MoM मारुति सुजुकी 1,30,242 1,22,785 -5.77 टाटा मोटर्स 37,988 40,068 5.44 महिंद्रा 42,253 37,451 -11.37 हुंडई 45,686 35,470 -22.34 टोयोटा 26,453 20,051 -24.23 किआ 18,793 16,540 -12 सितंबर में टॉप कंपनियों की सेल्स की बात करें तो मारुति सुजुकी ने अगस्त में 1,30,242 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 1,22,785 कारों पर आ गया। यानी इसे 5.77% की मंथली डिग्रोथ मिली। टाटा मोटर्स ने अगस्त में 37,988 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा बढ़कर 40,068 कारों पर आ गया। यानी इसे 5.44% की मंथली ग्रोथ मिली। महिंद्रा ने अगस्त में 42,253 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 37,451 कारों पर आ गया। यानी इसे 11.37% की मंथली डिग्रोथ मिली। हुंडई ने अगस्त में 45,686 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 35,470 कारों पर आ गया। यानी इसे 22.34% की मंथली डिग्रोथ मिली। टोयोटा ने अगस्त में 26,453 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 20,051 कारों पर आ गया। यानी इसे 24.23% की मंथली डिग्रोथ मिली। किआ ने अगस्त में 18,793 का बेची थीं, जबकि सितंबर में ये आंकड़ा घटकर 16,540 कारों पर आ गया। यानी इसे 12% की मंथली डिग्रोथ मिली। यानी टाटा एकमात्र ऐसी कार रही जिसे मासिक आधार पर ग्रोथ मिली।

विश्व रिकॉर्ड तोड़ा एलन मस्क ने, अब हैं सबसे अमीर इंसान $500 अरब के साथ

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मुंबई  टेस्ला सीईओ एलन मस्क ने बुधवार को इतिहास रच दिया, जब उनकी कुल संपत्ति 500 अरब डॉलर के पार पहुंच गई। वे दुनिया के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से टेस्ला के शेयरों की रिकवरी और उनकी अन्य टेक स्टार्टअप्स की तेजी से बढ़ती वैल्यूएशन के चलते हुई है। फोर्ब्स बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक शाम 4:15 ईटी तक उनकी नेटवर्थ 500.1 अरब डॉलर दर्ज की गई। टेस्ला के शेयरों से बढ़ी संपत्ति मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा टेस्ला से जुड़ा है। सितंबर तक कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 12.4% थी। इस साल टेस्ला के शेयरों में अब तक 14% की बढ़ोतरी हुई है। बुधवार को ही स्टॉक 3.3% उछला, जिससे मस्क की नेटवर्थ में 6 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। निवेशकों का मस्क पर बना भरोसा साल की शुरुआत में गिरावट झेलने के बाद टेस्ला शेयरों में अब तेजी देखी जा रही है। निवेशकों का भरोसा तब बढ़ा जब मस्क ने अपने बिज़नेस पर पूरा ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। टेस्ला बोर्ड चेयर रॉबिन डेनहॉम ने हाल ही में कहा कि मस्क फिर से कंपनी में "फ्रंट एंड सेंटर" हैं। साथ ही, मस्क ने खुद 1 अरब डॉलर के टेस्ला शेयर खरीदकर कंपनी के भविष्य पर भरोसा जताया। AI और स्पेस एक्सप्लोरेशन से भी बढ़ी वैल्यूएशन टेस्ला के अलावा मस्क के अन्य उपक्रम भी उनकी दौलत का अहम आधार बने हैं। उनकी AI कंपनी xAI की वैल्यूएशन जुलाई तक 75 अरब डॉलर आंकी गई थी और भविष्य में यह 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, SpaceX की वैल्यूएशन 400 अरब डॉलर के आसपास बताई जा रही है। 1 ट्रिलियन डॉलर का कम्पेंसेशन प्लान टेस्ला बोर्ड ने मस्क के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर का कम्पेंसेशन प्लान प्रस्तावित किया है, जिसमें कंपनी के वित्तीय और संचालन संबंधी ऊंचे लक्ष्य तय किए गए हैं। यह मस्क की हिस्सेदारी को और मजबूत करेगा। सबसे अमीरों की सूची में नंबर वन फोर्ब्स के मुताबिक मस्क अब दुनिया के सबसे अमीर इंसान हैं। उनके बाद दूसरे स्थान पर ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन हैं, जिनकी संपत्ति 350.7 अरब डॉलर आंकी गई है।

जीएसटी रेट घटा, कारों के दाम कम हुए: जानें ₹5 लाख से कम की टॉप 5 गाड़ियां

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नई दिल्ली सरकार के हाल ही में लागू किए गए जीएसटी 2.0 रिफॉर्म ने छोटे और आम लोगों के लिए बनी कारों को काफी सस्ता कर दिया है। पहले इन कारों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जिसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका फायदा तुरंत ग्राहकों तक पहुंचाया गया है। अब कई लोकप्रिय हैचबैक और एंट्री-लेवल कारें 5 लाख रुपये से कम कीमत में मिल रही हैं। यह सेगमेंट खासकर पहली बार कार खरीदने वालों, छात्रों और उन परिवारों के लिए फायदेमंद है जो दूसरी गाड़ी लेना चाहते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं, जीएसटी कटौती के बाद कौन-सी 5 कारें 5 लाख रुपये से कम में मिल रही हैं। मारुति सुजुकी ऑल्टो K10 हमेशा से लोगों की पसंद रही Maruti Suzuki Alto K10 (मारुति सुजुकी ऑल्टो K10) अब और भी किफायती हो गई है। जीएसटी कटौती से पहले इसकी शुरुआती कीमत करीब 3.70 लाख रुपये थी, जो अब और कम हो गई है। यह कॉम्पैक्ट, माइलेज देने वाली और कम मेंटेनेंस वाली कार है, जो पहली बार कार खरीदने वालों और शहर में चलाने के लिए परफेक्ट है। इसमें सिर्फ पेट्रोल और सीएनजी ऑप्शन मिलते हैं। मारुति सुजुकी एस-प्रेसो मिनी एसयूवी के नाम से प्रचारित Maruti Suzuki S-Presso (मारुति सुजुकी एस-प्रेसो) अपनी बोल्ड डिजाइन और ऊंचे स्टांस की वजह से जानी जाती है। जीएसटी की नई दरों के बाद इसकी शुरुआती कीमत करीब 3.50 लाख रुपये रह गई है। अब यह और भी किफायती हो गई है और भारत की सबसे सस्ती नई कारों में शामिल हो गई है। इसकी ऊंची सीटिंग पोजिशन ड्राइवर को आगे का अच्छा व्यू देती है। इसमें पेट्रोल और सीएनजी दोनों ऑप्शन मौजूद हैं। मारुति सुजुकी वैगनआर फैमिली कारों में भरोसेमंद नाम Maruti Suzuki Wagon R (मारुति सुजुकी वैगनआर) अब सिर्फ 5 लाख रुपये एक्स-शोरूम कीमत से शुरू हो रही है। इसका टॉल-बॉय डिजाइन, ज्यादा स्पेस वाला केबिन और मारुति का सर्विस नेटवर्क इसे फैमिली खरीदारों के लिए बेस्ट डील बनाते हैं। इसमें सीएनजी और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स समेत कई ऑप्शन मिलते हैं। टाटा टियागो Tata Tiago (टाटा टियागो) अपनी मजबूत बिल्ड क्वालिटी, सेफ्टी फीचर्स और मॉडर्न डिजाइन के लिए हमेशा तारीफ पाती रही है। अब इसकी शुरुआती कीमत 4.57 लाख रुपये से शुरू होती है। जो लोग बजट में रहते हुए भी स्टाइल और सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए टियागो एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें कई पावरट्रेन और गियरबॉक्स मिलते हैं। खास बात यह है कि यह सीएनजी के साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाला देश का पहला मॉडल है। रेनो क्विड एसयूवी जैसा लुक और बजट-फ्रेंडली कीमत वाली Renault Kwid (रेनो क्विड) अब करीब 4.30 लाख रुपये से शुरू हो रही है। इसके एसयूवी-प्रेरित डिजाइन, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट और आसान ड्राइविंग फीचर्स ने इसे शहरी ग्राहकों की पसंद बना दिया है। इसमें 1.0-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल और AMT दोनों ऑप्शन मिलते हैं। 

अब नहीं होगी विदेशी विशेषज्ञों की ज़रूरत, भारत में ही तैयार होंगे लेदर इंडस्ट्री के एक्सपर्ट

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कानपुर  देश की लेदर और फुटवियर इंडस्ट्री अब विदेशी स्किलफुल लोगों पर निर्भर नहीं रहेगी. अभी लेदर इंडस्ट्री में स्किलफुल तकनीक और लोगों के लिए विदेश के एक्सपर्ट का रुख करना पड़ता है, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा अब देश में ही स्किलफुल लोग तैयार किया जा सकेंगे, जो लेदर इंडस्ट्री को प्रोफेशनल तरीके से संभाल सकेंगे. एचबीटीयू और लेदर सेक्टर स्किल काउंसिल (एलएसएससी) के बीच हुआ करार उद्योग जगत के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा. इस समझौते से छात्रों को जहां रोजगार और रिसर्च का सीधा अवसर मिलेगा, वहीं इंडस्ट्री को अपनी जरूरतों के हिसाब से तैयार कुशल मैनपावर. इंडस्ट्री के लिए तैयार होंगे स्किलफुल प्रोफेशनल्स एचबीटीयू के कुलपति प्रो. समशेर ने बताया कि लेदर टेक्नोलॉजी से जुड़े बीटेक छात्र अब अपने हुनर और रिसर्च को सीधे इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक ढाल सकेंगे.छात्रों को इस साझेदारी के तहत न केवल रिसर्च और प्रोजेक्ट में सहयोग मिलेगा, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री की असल चुनौतियों को समझने और उनके समाधान निकालने का अवसर भी मिलेगा.इससे रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे और देश की इंडस्ट्री को वही स्किल्ड युवा मिलेंगे, जिनकी कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी. ब्लू कॉलर और व्हाइट कॉलर दोनों तरह का मैनपावर सीएलई के चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने कहा कि इस करार से हमें सिर्फ ब्लू कॉलर वर्कफोर्स ही नहीं बल्कि व्हाइट कॉलर स्किल्ड प्रोफेशनल्स भी मिलेंगे. आज इंडस्ट्री को ऐसे युवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है. मैनपावर की कमी ने लेदर सेक्टर की ग्रोथ को रोक रखा था, लेकिन अब एचबीटीयू जैसे संस्थान के सहयोग से यह बाधा खत्म होगी. रिसर्च और ट्रेनिंग से खुलेगा वैश्विक बाजार एलएसएससी के अधिकारियों के अनुसार, छात्रों को एडवांस टेक्नोलॉजी, प्रोडक्शन प्रोसेस, डिजाइनिंग और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी. स्किल डेवलपमेंट के लिए नए मॉड्यूल तैयार होंगे और इंडस्ट्री इंटर्नशिप के जरिए छात्र सीधे कामकाजी माहौल का अनुभव हासिल करेंगे. इससे वे न सिर्फ देश बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनेंगे. आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि इस करार से भारत की लेदर इंडस्ट्री को विदेशी स्किलफुल लोगों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घरेलू स्तर पर ही ऐसा मैनपावर तैयार होगा, जो न केवल तकनीकी रूप से सक्षम होगा बल्कि रिसर्च और इनोवेशन से भी इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाएगा.

SAHARA REFUND की दिशा में बड़ा कदम: देशभर की 88 संपत्तियां बिकने को तैयार, आपका पैसा लौटने की उम्मीद

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नई दिल्ली सहारा ग्रुप (Sahara Group) एक बार फिर चर्चा में है, रिफंड (Refund) को लेकर निवेशकों में एक उम्मीद जगी है. सहारा इंडिया में सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से निवेशक हैं. कुछ लोगों ने अपनी सारी गाढ़ी कमाई सहारा इंडिया में जमा कर दी थी. लेकिन अब सहारा ग्रुप की संपत्तियां बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाने की बात कही जा रही है. दरअसल, Sahara India Commercial Corporation Ltd. (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी लगाई है, जिसमें वह अपनी कुछ प्रमुख अचल संपत्तियों को Adani Properties Pvt. Ltd. को एकमुश्त (Single Block) बेचने की अनुमति मांगी है. रिपोर्ट के मुताबिक सहारा इंडिया ग्रुप की 88 से अधिक संपत्तियां इस सौदे के तहत बेचने की तैयारी चल रही है. यानी इन संपत्तियों को बेचकर, निवेशकों के पैसे लौटाए जाएंगे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं. बता दें, सहारा इंडिया का मामला साल 2012 से चल रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक SEBI-सहारा एस्क्रो अकाउंट में करीब 26.25 हजार करोड़ रुपये जमा है. पिछले दो वर्षों में सुप्रीम कोर्ट (SC) के आदेश पर सेबी ने Sahara निवेशकों को करीब ₹5053 करोड़ लौटा दिए हैं. जिन निवेशकों ने Cooperative Societies of Sahara Group में पैसे जमा किए थे, उन्हें वापस किए गए हैं. बिकने वाली सहारा की ये संपत्तियां: सहारा ग्रुप के पास बड़ी संपत्ति के तौर पर Aamby Valley City है, जो महाराष्ट्र के पुणे में है, ये टाउनशिप लगभग 8,810 एकड़ में फैला हुआ है. सहारा के मुंबई एयरपोर्ट के पास Hotel Sahara Star है, लखनऊ में सहारा शहर और Sahara Ganj Mall है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों कई संपत्तियां फैली हुई हैं. हालांकि कितने में सभी संपत्तियों का सौदा हुआ है, इसका खुलासा नहीं हुआ है. इसपर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी. अगर अदालत संपत्ति सौदे पर अपनी मुहर लगाती है तो फिर सहारा ग्रुप की तमाम संपत्तियों की ब्रिकी का रास्ता साफ हो जाएगा. सहारा ग्रुप का बिजनेस रियल-एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी (होटल), मीडिया-चैनल, फाइनेंस/इंश्योरेंस और रिटेल में फैला हुआ था. सहारा समूह ने उत्तर भारत (UP, Bihar, Jharkhand, Rajasthan) में बड़े-बड़े आवासीय/प्लॉट और कृषि/विकास योग्य जमीन खरीदी थी. वहीं हाल के वर्षों में कई जमीनों को ED समेत तमाम जांच एजेंसियों ने अटैच कर रखा है. सहारा समूह ने न्यूयॉर्क के The Plaza Hotel में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी. बाद में यह संपत्ति साल 2018 में कतरी फंड (Qatar fund) को बेची दी गई. वहीं सहारा ग्रुप (Sahara Group) के पास मौजूद करीब 19 संपत्तियों की लीज़ समीक्षा हो रही है, क्योंकि इनमें से कुछ लीज समाप्त हो चुकी है, कुछ पर कब्जा है, और कुछ को सील कर दिया गया है. लखनऊ स्थित 'सहारा बाजार' की जमीन की कीमत लगभग ₹200 करोड़ आंकी गई है. रिफंड के लिए कहां करें अप्लाई बता दें, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहारा रिफंड पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in) ल़ॉन्च किया था, जिसके माध्यम से निवेशकों के पैसे लौटाए जा रहे हैं. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि करीब 26 लाख निवेशकों को अब तक 5,053 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं. वहीं, 13.34 लाख नए निवेशकों ने भी क्लेम किया है, जिसकी कुल राशि 27,849 करोड़ रुपये बैठती है. अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक करीब 32 लाख और निवेशक अपना दावा दर्ज कर सकते हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को पैसे लौटाने की डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है. इससे लाखों निवेशकों को राहत मिलेगी.

167 लाख करोड़ की रिच लिस्ट जारी, शाहरुख खान बने नए अरबपति, अंबानी की बादशाहत कायम

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मुंबई  भारत अब अरबपतियों का नया हब बनता जा रहा और देश में अमीरों की तादाद में साल-दर-साल जोरदार इजाफा हो रहा है. एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 जारी कर दी गई है और इसके मुताबिक, भारतीय अरबपतियों की संख्या बढ़कर 350 से ज्यादा हो गई है. वहीं सबसे रईसों की रैंकिंग में एक बार फिर मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) का दबदबा दिखा है और इस बार भी वे नंबर-1 की कुर्सी पर काबिज रहे हैं. खास बात ये है कि बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान पहली बार बिलेनियर्स क्लब में शामिल हुए हैं.  13 साल में छह गुना हुए अरबपति भारत में नए अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और ये इजाफा लगातार जारी है. अब भारत में 350 से ज्यादा अरबपति हो चुके हैं और ये आंकड़ा बीते 13 साल में छह गुना से ज्यादा बढ़ गया है. बता दें कि M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में शामिल किए गए अरबपतियों की कुल संपत्ति 167 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग आधा है. ये हैं देश के टॉप-3 अरबपति हुरुन इंडिया रिच लिस्ट-2025 के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ 9.55 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है और संपत्ति के इस आंकड़े के साथ उन्हें फिर से भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब हासिल हुआ है. वहीं दौलत के मामले में गौतम अडानी एंड फैमिली 8.15 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर है. लिस्ट में तीसरे नंबर पर रोशनी नादर मल्होत्रा को रखा गया है, जिनकी संपत्ति 2.84 लाख करोड़ रुपये है. बता दें कि वे इस सूची में अब तक की सर्वोच्च रैंकिंग वाली महिला अरबपति बन गई हैं और पहली बार टॉप-3 में एंट्री लेते हुए भारत की सबसे अमीर महिला के रूप में इतिहास रच दिया है. अमीरों की इस लिस्ट में शाहरुख खान की एंट्री  अमीरों की 2025 लिस्ट में पेरप्लेक्सिटी के फाउंडर 31 साल के अरविंद श्रीनिवास 21,190 करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ भारत के सबसे युवा अरबपति बन गए हैं. वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान भी पहली बार इस लिस्ट में आए हैं और 12,490 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ भारत के टॉप अरबपतियों के क्लब में शामिल हो गए हैं.  इसके अलावा जिस अरबपति की दौलत में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है, वो नीरज बजाज एंड फैमिली है, 69,875 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ इनकी नेटवर्थ अब 2.33 लाख करोड़ रुपये हो गई है. अमीरों का सेंटर रहा मुंबई  भारत के सबसे अमीरों की लिस्ट में इस बार भी मुंबई ही टॉप पर है, जहां पर देश के 451 सबसे धनी व्यक्ति रहते हैं. इसके बाद नई दिल्ली में 223 और बेंगलुरु 116 अमीरों के साथ लिस्ट में है. अगर बिजनेस सेक्टर्स की बात करें, तो हुरुन के मुताबिक, फार्मास्यूटिकल्स 137 अमीरों के साथ पहले पायदान पर है, जबकि इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और केमिकल सेक्टर से जुड़े अमीरों की तादाद क्रमश: 132 और 125 रही है.  महिला अरबपतियों ने दिखाया दम  Hurun Rich List में एक बार फिर से महिलाओं और सेल्फ मेड उद्यमियों ने अपना दम-खम दिखाया है. यह लिस्ट महिला उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति को भी दर्शाती है, जिसमें 2025 तक 101 महिलाएं शामिल हैं और इनमें 26 अरबपति हैं. वहीं इसमें शामिल 74% नए अमीरों ने जीरो से शुरू करने के बाद सबसे अमीरों में जगह हासिल की है. सेल्फ मेड अमीरों की तादाद इस बार 66% रहे हैं. 

सोने के दाम 1 अक्टूबर को भी बढ़े, त्योहारी खरीदारी में ग्राहकों को राहत नहीं मिली

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नई दिल्ली सोने में गिरावट का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए आज भी राहत की खबर नहीं आई है। फेस्टिव सीजन में सोना नया रिकॉर्ड बना रहे है और यह आम लोगों के पहुंच से दूर होता जा रहै हे। अक्टूबर माह की शुरुआत में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। MCX पर सोना 1,17,500 रुपए प्रति 10 ग्राम जबकि चांदी की कीमत 1,43,640 रुपए प्रति किग्रा के आसपास है।  दिल्ली में सोना, चांदी के भाव नए शिखर पर राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोना 500 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1.20 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने का भाव सोमवार को 1,500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,500 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा था।  स्थानीय सर्राफा बाजार में 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही और यह 500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,400 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले बाजार सत्र में इसकी कीमत 1,18,900 रुपए प्रति 10 ग्राम रही थी। इसके अलावा मंगलवार को चांदी की कीमत 500 रुपए बढ़कर 1,50,500 रुपए प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के नए शिखर पर पहुंच गई। सोमवार को यह 7,000 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1,50,000 रुपए प्रति किलोग्राम रही थी।    

दशहरा से पहले राहत, RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, EMI बनी सुरक्षित

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नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजे आ चुके हैं. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 29 सितंबर से शुरू हुई बैठक के फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा. अगस्त के बाद अक्टूबर में भी ब्याज दर 5.5% पर यथावत रखी गई है. इस साल अब तक रेपो रेट में तीन बार कटौती की गई है और इसे कुल 100 बेसिस पॉइंट तक घटाया जा चुका है. रेपो रेट को लेकर लोगों को थी उम्मीद दशहरा के पहले लोग उम्मीद लगाकर बैठे थे कि जिस तरह से जीएसटी में सरकार की ओर से राहत दी गई है. उसी प्रकार से रेपो रेट को लेकर फैसला किया जा सकता है जिससे आम जनता को राहत मिलेगी. जानकारों ने भी कुछ इसी तरह की उम्मीद की बात की थी लेकिन एमपीसी की बैठक के बाद आम जनता को कोई राहत नहीं दी गई.  मौद्रिक नीति पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी ने एकमत से फैसला किया कि रेपो रेट 5.5% पर यथावत रहे. इसी के साथ STF रेट 5.25%, MSF रेट और बैंक रेट 5.75% पर बने रहेंगे. एमपीसी ने नीति के न्यूट्रल रुख को भी जारी रखने का निर्णय लिया. औसत मुद्रास्फीति को घटाकर 2.6% कर दिया गया इस साल की औसत मुद्रास्फीति को घटाकर 2.6% कर दिया गया है, जबकि जून में यह 3.7% और अगस्त में 3.1% अनुमानित थी. चौथी तिमाही और अगले साल की पहली तिमाही की मुद्रास्फीति भी कम हुई है और लक्ष्य के करीब बनी हुई है. वैश्विक अनिश्चितताएं और व्यापार संबंधी मुद्दे इस साल के दूसरे हिस्से में आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं. वर्तमान आर्थिक स्थिति विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है. जीडीपी अनुमान बढ़ाया आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है. FY26 के दूसरे तिमाही (Q2) में वृद्धि का अनुमान अब 7.0% किया गया है जो पहले यह 6.7% था. तीसरी तिमाही (Q3) में वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से घटाकर 6.4% किया गया है. चौथी तिमाही (Q4) में जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.2% रखा गया है, जो पहले 6.3% था. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में वृद्धि का अनुमान 6.4% लगाया गया है, जबकि पहले इसे 6.6% रखा गया था. महंगाई होगी कम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में महंगाई (CPI Inflation) के नए अनुमान जारी किए हैं. ताजा अनुमान के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में औसत खुदरा महंगाई दर घटकर 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसे 3.1% आंका गया था. आरबीआई का कहना है कि हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई तेज गिरावट ने महंगाई को काबू में करने में बड़ी भूमिका निभाई है. तिमाहीवार महंगाई अनुमान इस प्रकार हैं:     Q2 FY26: 1.8% (पहले 2.1%)     Q3 FY26: 1.8% (पहले 3.1%)     Q4 FY26: 4.0% (पहले 4.4%)     Q1 FY27: 4.5% (पहले 4.9%)