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MP में कफ सिरप कांड: मौतों का आंकड़ा 21 पहुंचा, डिप्टी सीएम बोले – जांच जारी

छिंदवाड़ा  जहरीले कफ सिरप और दवाइयों ने मध्यप्रदेश के चार और मासूमों की जान ले ली। इन सभी की जान 24 घंटे के भीतर गई। इनमें छिंदवाड़ा जिले की दो साल की जायूशा यदुवंशी, डेढ़ साल की धानी डेहरिया, ढाई साल का वेदांत पंवार और वेदांश काकोडिय़ा शामिल हैं। दावा है कि इनमें से तीन बच्चों का इलाज परासिया के आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी ने किया था। जहरीली कोल्ड्रिफ सिरप लिखी गई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद ये बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती थे। काकोड़िया के मामले की जांच की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश अब तक 21 मासूमों को खो चुका है। इनमें 19 छिंदवाड़ा के हैं और दो बैतूल के हैं। इसमें से काकोड़िया की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।  बैतूल जिले के अधिकारी कफ सिरप को नहीं मान रहे मौतों का कारण बैतूल जिले के अधिकारी बच्चों की मौत जहरीली कफ सिरप से होना नहीं मान रहे, जबकि दोनों का इलाज परासिया के डॉ. सोनी ने ही किया था। इनके पास दवा के पर्चे भी मिल चुके हैं। अभी जहरीली सिरप व दवाओं का खतरा टला नहीं है। नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती पांच बच्चों की हालत नाजुक है। कुछ तो कोमा जैसी स्थिति में हैं। कुछ को लगातार डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। इस बीच बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। पांच बच्चों का इलाज नागपुर के अस्पतालों में चल रहा है. दो बच्चे सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH), दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और एक बच्चा एक निजी अस्पताल में भर्ती है. कई दिन से वेंटिलेटर पर थी धानी डहरिया तामिया के वार्ड 15 की डेढ़ वर्षीय धानी पुत्री नवीन डेहरिया कई दिन से वेंटिलेटर पर थी। सोमवार रात 11 बजे दम तोड़ दिया। किडनी फेल होने के बाद ब्रेन में गंभीर संक्रमण से जूझ रही थी। 10 लाख खर्च के बाद भी नहीं बचा वेदांत परासिया के रिधोरा के वेदांत की जान मंगलवार दोपहर गई। उसे सितंबर के पहले सप्ताह में डॉ. सोनी ने देखा था। 11 सितं. को रेफर किया था। उसे बचाने परिजन ने 10 लाख खर्च किए। दो साल की जायूशा ने भी तोड़ा दम जुन्नारदेव की दो वर्षीय जायूशा ने भी मंगलवार को एम्स नागपुर में दम तोड़ दिया। पिता राजेश ने बताया कि डॉ. सोनी ने कोल्ड्रिफ सिरप दी थी। इलाज में करीब 5 लाख रुपये खर्च किए। 3 साल के वेदांश की भी मौत लहगडुआ के 3 साल के वेदांश की तबीयत रविवार शाम बिगड़ी। टेस्ट में किडनीलिवर को नुकसान का पता चला। नागपुर में मंगलवार सुबह मौत हो गई। कौन सा सिरप दिया गया था, इसकी जांच की जा रही है। दवाओं की जांच हो, दो सप्ताह में जवाब मांगा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिवों को कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत को लेकर नोटिस जारी किया है। दवाओं की व्यापक जांच की जरूरत बताई। आयोग ने स्वत: संज्ञान भी लिया। दोनों किडनी फेल, बच्चा वेंटिलेटर पर बैतूल. आमला ब्लॉक में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से दो बच्चों की मौत के बाद अब टीकाबर्री गांव के साढ़े तीन साल के हर्ष यदुवंशी की हालत गंभीर है। किडनी फेल हो चुकी हैं। नागपुर के निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। परिजन के अनुसार एक माह पहले डॉ. सोनी से इलाज कराया था। सर्दी-खांसी के लिए दी गई दवा के बाद तबीयत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर नागपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने किडनी फेल होने की पुष्टि की। दिल्ली से जाएगी टीम दिल्ली से जाएगी टीम स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कफ सिरप की प्रयोगशाला जांच में डायथिलीन ग्लाइकॉल का खतरनाक रूप से उच्च स्तर पाया गया है, जो अत्यधिक जहरीला होता है। जांच के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली से एक विशेष टीम जल्द नागपुर जा सकती है। जिम्मेदारों पर एक्शन और जांच डिप्टी CM शुक्ला ने बताया कि मौतों के लिए जिम्मेदार सिरप तमिलनाडु स्थित एक कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी के मालिक, दवा देने वाले डॉक्टर और संबंधित खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई की गई है. सोमवार को, राज्य सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और FDA के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया और जांच के बीच राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला कर दिया. छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को कथित लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है और कोल्ड्रिफ के तमिलनाडु स्थित निर्माता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. घर-घर जाकर कोल्ड्रिफ बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश छिंदवाड़ा में लगभग 600 कफ सिरप की बोतलें मिली हैं, जिनमें से 443 बोतलें पहले ही बरामद की जा चुकी हैं. उन्होंने बताया कि मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर बची हुई बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें से कोई भी इस्तेमाल में न रहे. उनके अनुसार, सरकार इस घटना की गहन जांच कर रही है. नए ड्रग कंट्रोलर ने शुरू करवाई दवा की जांच औषधि प्रशासन कार्यालय ने प्रदेश में कफ सिरप की जांच शुरू कराई है। नवनियुत नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव ने बताया, मंगलवार को पदभार संभालने के बाद प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप और प्रतिबंधित कॉिबनेशन वाली दवाओं की जांच शुरू करा दी है। बिकते हुए पाए जाने पर तत्काल जत किए जाएंगे। विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसाफ स्मॉल बैंक डकैती में नया खुलासा: जंगल के रास्ते डकैतों को पहुंचाने वाला आरोपी दबोचा

जबलपुर  जबलपुर के खितौला बैंक डकैती के मामले में पुलिस ने बिहार गिरोह से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी सागर जिले के देवरी क्षेत्र से पकड़े गए। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी ने बैंक डकैती के पहले और बाद में गिरोह को मोटरसाइकिल और भागने में मदद की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र सिंह ने बताया कि 11 अगस्त की सुबह करीब 8:50 बजे खितौला थाना क्षेत्र स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में तीन युवक हेलमेट पहनकर दाखिल हुए और पिस्टल की नोक पर 20 मिनट में डकैती को अंजाम दिया। बैंक के बाहर उनके दो साथी मोटरसाइकिल पर इंतजार कर रहे थे। वारदात के बाद आरोपी बैंक से 15 किलो सोना और 5 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। जांच में पता चला कि पाटन निवासी रईस सिंह लोधी पहले छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जेल में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के मामले में बंद था। वहीं उसकी मुलाकात बिहार गिरोह के सदस्यों से हुई। जेल में ही दोनों ने बैंक डकैती की योजना बनाई। गिरोह का मास्टरमाइंड राजेश दास उर्फ आकाश दास (38 वर्ष) 18 जून को रायगढ़ जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। योजना के तहत वह अपने पांच साथियों के साथ जबलपुर आया और डकैती को अंजाम दिया।  बबलू ने ही पार कराया था जंगल का रास्ता 11 अगस्त की सुबह बैंक से साढ़े 14 करोड़ रुपए के जेवरात और करीब साढ़े पांच लाख रुपए लूटकर फरार होने के बाद 2 बाइक में सवार होकर पांचों डकैतों इंद्राना के पास स्थित मुरैथ-लमकना रोड पहुंचे थे। वहां बबलू इंतजार कर रहा था। सभी लोग मेन रोड से करीब 10 किलोमीटर दूर घने जंगल में गए, जहां लूट का सोना और रुपए आपस में बांट लिए। बैंक के बैग को वही पर जला दिया। गैंग के सरगना राजेश दास ने प्लान के मुताबिक बबलू को मदद करने के लिए 50 हजार रुपए नकद दिए। इसके बाद 2 डकैत बस में बैठकर दमोह के लिए रवाना हो गए। मदद के लिए बबलू बाइक में जंगल के रास्ते आगे-आगे चल रहा था। बबलू का काम था कि अगर पुलिस कहीं भी नजर आती तो फौरन वह बस में बैठे डकैतों को सूचना देता। 11 अगस्त की रात को बबलू 2 डकैतों को दमोह रेलवे स्टेशन में छोड़कर वापस अपने घर आ गया। अब तक पुलिस ने रईस सिंह लोधी, हेमराज, सोनू वर्मन और दमोह निवासी विकास चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मास्टरमाइंड राजेश दास, उसके सहयोगी इंद्रजीत दास उर्फ सागर दास (जिला गया), जहांगीर आलम अंसारी (48 वर्ष, गया), गोलू उर्फ रविकांत पासवान (24 वर्ष, बेलखेड़ा, गया), उमेश पासवान (31 वर्ष, पांडेयपुरा, चतरा, झारखंड) और हरिओम ज्वेलर्स के संचालक हरि प्रसाद सोनी (बिहार) को भी गिरफ्तार किया गया है। डकैती से पहले और बाद में मोटरसाइकिल की व्यवस्था करने तथा फरार होने में मदद करने वाला आरोपी बबलू उर्फ बाबू सिंह लोधी, पिता शिवराज सिंह लोधी, निवासी उडना करैया, पाटन, को सागर जिले के देवरी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके पास से 40 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। अब तक पुलिस केवल 3 किलो 400 ग्राम सोना ही बरामद कर पाई है। बाकी सोने की तलाश जारी है। जंगल के रास्ते का किया उपयोग 12 अगस्त की सुबह बबलू ने अपनी बाइक में सुनील पासवान को बैठाया, जबकि उसके साथी रईस लोधी ने दो डकैतों को बाइक में बैठाकर जंगल के रास्ते निकल गया। 10वीं तक पढ़ा बबलू बहुत ही शातिर था, उसे पता चल गया था, बैंक डकैती के बाद पुलिस एक्टिव हो गई है। ऐसे में उसने सभी के मोबाइल फोन बंद किए और फिर जंगल का रास्ता अपनाया। इंद्राना, मुरैठ से लमखैरी, उमरिया, लमकना के जंगल से होते हुए करीब 70 किलोमीटर के जंगल को डकैतों ने डेढ़ से दो घंटे में पार कर लिया। इसके बाद सभी लोग दमोह रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से तीनों डकैत बिहार के लिए रवाना हो गए, जबकि बबलू और रईस वापस इंद्राना आ गए। घर दिलाया-बाइक दिलवाई बैंक में डकैती डालने के दौरान क्या-क्या समान की जरूरत पड़ेगी, इसका पूरा प्लान बन चुका था। बबलू ने डकैती में शामिल अपने साथी रईस लोधी के साथ मिलकर सबसे पहले डकैतों को रहने के लिए इंद्राना में किराए का मकान दिलवाया। डकैती के बाद भागने के लिए बाइक की भी जरूरत थी, लिहाजा बबलू ने एक बाइक पाटन से फाइनेंस करवाई। जिसके लिए उसने अपने एक साथी हेमराज के फर्जी दस्तावेज लगाए थे। बाइक खरीदने के बाद बबलू ने डकैतों को उसे दे दी थी। बैंक में डकैती डालने के पहले डकैतों ने आसपास रेकी की थी, जिसमें बबलू भी शामिल था।  

औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का अध्ययन कर बनायें कार्ययोजना: मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा से रोजगार सृजन की दिशा में करें प्रयास जिलों की बंद औद्योगिक इकाइयों के प्रकरणों का हो शीघ्र निराकरण स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन सत्र को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना बनायें। ऐसे प्रयास हों कि जिले में उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर सृजित हों, जिससे जिले आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करें और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी रोजगार से जोड़ने की बात कही जिससे युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हों। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में "रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन" सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की जेसी मिल, रतलाम की सज्जन मिल और उज्जैन की विनोद मिल से संबंधित समस्याओं का समाधान जिस तत्परता से किया गया है उसी तरह अन्य जिलों में बंद औद्योगिक इकाइयों का भी शीघ्र निराकरण किया जाए। मुरैना जिले की कैलारस स्थित शुगर मिल से जुड़े मामले का समाधान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में कलेक्टर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलों की सक्रियता और विभागों के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का उपयोग कर लैंड बैंक विकसित किए जाएं। जिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए जिससे स्थानीय उत्पादन और विपणन गतिविधियों में वृद्धि हो। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहन  राघवेंद्र कुमार सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा एमएसएमई विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन दिया गया। राज्य सरकार के वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित, औद्योगिक और रोजगार-समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि जिला निवेश सुविधा केंद्र (IFC) को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाया जाए। औद्योगिक भूमि की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा विभिन्न विभागों द्वारा समयबद्ध अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कौशल समिति को सक्रिय कर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वैकल्पिक रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए। उद्योगों को पीएम विश्वकर्मा और अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाए। कलेक्टर्स से यह भी कहा गया कि एक जिला-एक उत्पाद के तहत उत्पादों की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन पर प्रभावी कार्य किया जाए। टैग किए गए उत्पादों को योजनाओं जैसे PMFME और DEH-OSOP से जोड़ा जाए और एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा ई-कॉमर्स माध्यमों से जोड़ा जाए। बंद रेशम केंद्रों का पुनर्जीवन कर खादी, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपकरण स्वीकृति और वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सहयोग के क्षेत्र में DLCC एवं DLRC बैठकों का समय पर आयोजन करने, जन धन, मुद्रा और अटल पेंशन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा वार्षिक लक्ष्य पूर्ति हेतु बैंकों की सक्रिय भूमिका तय करने के निर्देश भी दिए गए।  

सुनियोजित नगरीय विकास के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना आवश्यक : मुख्यमंत्री का निर्देश

नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बनाएं कार्ययोजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कमजोर वर्ग की आवास योजनाओं पर दें विशेष ध्यान मेट्रोपालिटन सिटी के विकास पर संबंधित कलेक्टर्स दें अपने सुझाव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में नगरीय क्षेत्र के मुद्दों पर हुई चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने विजन-2047 में आबादी के हिसाब से नगरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। उनकी मंशा के अनुरूप प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का विकास भी सुनियोजित तरीके से हो सके इसके लिये जिलों में भी वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर की पीएम स्वनिधि योजना और स्वच्छ वायु इन्डेक्स में उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी डेवलपमेंट के समय तैयार किये गये ईडब्ल्यूएस आवास आवंटन में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिये कि कलेक्टर्स इस पर शीघ्र निर्णय लेकर इनका शत-प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित कराएं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बने गीता भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन तैयार करने का निर्णय लिया है। यह भवन धार्मिक रूप से तैयार नहीं किये जा रहे हैं बल्कि इनका निर्माण आधुनिक टाउन हॉल के तौर पर किया जा रहा है। यह टाउन हॉल शहर की सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करें, साथ ही इनमें डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी हो। भवनों का निर्माण एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाये। धार्मिक स्थलों का तैयार हो मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सतना जिले में चित्रकूट के समग्र विकास के लिये कार्ययोजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर साडा (स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के साथ मिलकर चित्रकूट का विकास करें। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर समेत अनेक धार्मिक स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ नर्मदा परिक्रमा मार्ग का भी विकास किया जा रहा है। इन धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसलिये आवश्यक है कि इनका समग्र विकास निर्धारित समय में पूरा हो। टीडीआर में मुआवजा राशि का भुगतान जल्द हो शहरी क्षेत्रों में टीडीआर के तहत अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा दिया जा रहा है। इनमें शहरी क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि टीडीआर में अधिग्रहित भूमि के बदले संबंधित को मुआवजा राशि का भुगतान समय पर किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किये जाने पर जोर दिया। मेट्रोपालिटन सिटी का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में भोपाल इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र तैयार करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर्स प्लान तैयार करें कि कैसे रोजगार, औद्योगिकीकरण, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में मेट्रोपालिटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार बिजली,पानी और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिये हैं। मध्यप्रदेश विजन@2047 नगरीय विकास एवं आवास के अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे ने बताया‍कि वर्ष 2047 तक प्रत्येक नागरिक को सर्वसुविधा युक्त पक्का आवास और शहरों को मलिन बस्ती मुक्त किया जाना है। स्वच्छता के मामले में अपशिष्ट प्रबंधन, नवकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी का समावेश किया जाना है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन द्वारा सुरक्षित एवं सतत जल आपूर्ति और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 में 8 लाख 69 हजार 531 आवास तैयार किये जा चुके हैं। योजना में 76 हजार 300 से अधिक आवास पूर्ण किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स अधूरे पड़े आवासों को जल्द पूरा करें। प्रदेश में पीएमएवाय 2.0 में 10 लाख आवास तैयार किये जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेश के 100 प्रतिशत आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। निकायों को 7115 कचरा संग्रहण वाहन दिये गये हैं। क्लीन एयर प्रोग्राम में अच्छे काम के लिये इंदौर, जबलपुर और देवास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना में वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। कॉन्फ्रेंस में एयर क्वालिटी सुधार कार्यक्रम पर इंदौर कलेक्टर, पीएमएवाय पर ग्वालियर कलेक्टर और जल संवर्धन में श्रेष्ठ कार्य पर कलेक्टर खंडवा ने अपने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतियां दी।  

प्रशासनिक अफसरों के साथ जन हित पर मंथन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए अहम निर्देश

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

गोवंश संरक्षण के लिए सरकार संकल्पित, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा बयान

घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए जारी है अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कंप्यूटर बाबा ने की सौजन्य भेंट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से  नामदेव दास त्यागी कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए गौशालाएं स्थापित करने का अभियान चल रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में 5 हजार संख्या तक संख्या में गौ माताएं रखी जा सकें, इस प्रकार की गौशालाऐं स्थापित की जा रही हैं। राज्य शासन ने गौ माता के लिए अनुदान की राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए किया है। दस हजार गौ माताएं रखने की क्षमता वाली गौशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य हो रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। हमारा प्रयास है कि मध्य प्रदेश, दुग्ध उत्पादन में देश में प्रथम हो। इस उद्देश्य से घर-घर में गौ-पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गोपालन की इस प्रकार की कई योजनाओं पर राज्य सरकार कार्य कर रही है। कंप्यूटर बाबा का भी इस दिशा में सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में भगवान राम वन गमन पथ पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही जहां-जहां भगवान कृष्ण की लीलाएं हुईं, उन क्षेत्रों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सब गतिविधियों में भी कंप्यूटर बाबा का सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के बाद कंप्यूटर बाबा ने बताया कि उन्होंने गौ माता को राजमाता का दर्जा देने और प्रदेश में गौ अभयारण्य स्थापित करने का सुझाव राज्य शासन के सम्मुख विचार के लिए रखा है। कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की गौ माता के प्रति आस्था तथा राज्य सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज गौ संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ है।  

डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रणाली की ओर बढ़ते कदम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस पहला दिन नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल  कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।  

एम.पी. ट्रांसको के रियल हीरो बने आउटसोर्स कर्मी संजय यादव

जलते ट्रांसफार्मर की आग बुझा कर दिखाया अदम्य साहस भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के जबलपुर में गोरा बाजार स्थित 220 के.वी. सबस्टेशन में बीती रात हुई आग की घटना में आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव ने अदम्य साहस और जांबाजी का परिचय देते हुए एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से न केवल 160 एम व्ही ए. पावर ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा, बल्कि पूरे यार्ड और शहर की बिजली आपूर्ति को भी खतरे से बचा लिया गया। दरअसल लगभग 10 करोड की लागत से स्थापित 160 एमव्हीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर के टेप चेंजर में तकनीकी खराबी आने से अचानक आग लग गई। इसके पहले की लपटें तेज़ी से उठती और स्थिति गंभीर हो जाती, आउटसोर्स आपरेटर श्री संजय यादव ने सहायक अभियंता श्री चेतन यादव, श्री आर.एस. बैस और हेल्पर श्री अय्यूब खान के मार्गदर्शन मे अग्निशमन यंत्रों की मदद से जलते ट्रांसफार्मर के ऊपर चढ़कर आग पर नियंत्रण पा लिया। उनकी सूझबूझ, साहस और समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी आपदा टल गई। यदि यह हादसा हो जाता तो शहर की विद्युत व्यवस्था के साथ औद्योगिक क्षेत्र मनेरी प्रभावित तो होता ही अमरकंटक पावर हाउस से आने वाले पावर का प्रबंधन करने की विकट चुनौती खडी हो जाती। एमडी सुनील तिवारी ने किया सम्मानित और पुरस्कृत एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने सब स्टेशन पहुंचकर आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव का अभिनन्दन करते हुए उन्हें नगद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया। विषम परिस्थिति में श्री यादव को मार्गदर्शन देने वाले वरिष्ठ हेल्पर श्री अयूब खान को भी सम्मानित किया तथा टीम के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री यादव और टीम ने जिस असाधारण साहस, तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह एम.पी. ट्रांसको परिवार के लिए गर्व की बात है। समय-समय पर दिए प्रशिक्षण से मिला लाभ एम.पी. ट्रांसको द्वारा समय-समय पर अग्निशमन एवं सुरक्षा प्रशिक्षणों के परिणामस्वरूप ही कर्मचारी आपात स्थितियों में इस तरह की प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम हो सके।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन सत्र को किया संबोधित

औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा धार्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा से रोजगार सृजन की दिशा में करें प्रयास जिलों की बंद औद्योगिक इकाइयों के प्रकरणों का हो शीघ्र निराकरण स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना बनायें। ऐसे प्रयास हों कि जिले में उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर सृजित हों, जिससे जिले आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करें और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी रोजगार से जोड़ने की बात कही जिससे युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हों। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में "रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन" सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की जेसी मिल, रतलाम की सज्जन मिल और उज्जैन की विनोद मिल से संबंधित समस्याओं का समाधान जिस तत्परता से किया गया है उसी तरह अन्य जिलों में बंद औद्योगिक इकाइयों का भी शीघ्र निराकरण किया जाए। मुरैना जिले की कैलारस स्थित शुगर मिल से जुड़े मामले का समाधान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में कलेक्टर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलों की सक्रियता और विभागों के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का उपयोग कर लैंड बैंक विकसित किए जाएं। जिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए जिससे स्थानीय उत्पादन और विपणन गतिविधियों में वृद्धि हो। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र कुमार सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा एमएसएमई विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन दिया गया। राज्य सरकार के वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित, औद्योगिक और रोजगार-समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि जिला निवेश सुविधा केंद्र (IFC) को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाया जाए। औद्योगिक भूमि की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा विभिन्न विभागों द्वारा समयबद्ध अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कौशल समिति को सक्रिय कर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वैकल्पिक रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए। उद्योगों को पीएम विश्वकर्मा और अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाए। कलेक्टर्स से यह भी कहा गया कि एक जिला-एक उत्पाद के तहत उत्पादों की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन पर प्रभावी कार्य किया जाए। टैग किए गए उत्पादों को योजनाओं जैसे PMFME और DEH-OSOP से जोड़ा जाए और एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा ई-कॉमर्स माध्यमों से जोड़ा जाए। बंद रेशम केंद्रों का पुनर्जीवन कर खादी, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपकरण स्वीकृति और वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सहयोग के क्षेत्र में DLCC एवं DLRC बैठकों का समय पर आयोजन करने, जन धन, मुद्रा और अटल पेंशन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा वार्षिक लक्ष्य पूर्ति हेतु बैंकों की सक्रिय भूमिका तय करने के निर्देश भी दिए गए।

नर्मदा यात्रियों और गौ माता की सेवा करने वालों की भूमिका प्रशंसनीय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शरद पूर्णिमा कार्यक्रम को वर्चुअली किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां बिजयासन की छत्रछाया में सलकनपुर क्षेत्र में नर्मदा यात्रियों की सेवा और गौ माता की सेवा के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्र सेवी स्व. भगवत शरण माथुर और स्व. प्रभाकार राव केलकर की स्मृति में सेवाभावियों को सम्मानित करने का कार्य प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा सलकनपुर जिला सीहोर में शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन से जुड़े पदाधिकारी गण को शरद पूर्णिमा पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। समर्पण सेवा समिति, सलकनपुर ने शरद पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर स्व. प्रभाकर राव केलकर की स्मृति तथा स्व. भगवत शरण माथुर की स्मृति में गोवंश आधारित जैविक कृषि पुरस्कार और उत्कृष्ट नर्मदा सेवा पुरस्कार प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि समिति द्वारा उत्तम स्वामी जी के निर्देशन में नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्रीमती माया नारोलिया, उत्तम स्वामी महाराज तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।