Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

मध्यप्रदेश में सिरप से हुईं मासूमों की मौतें, अब सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका के जरिए CBI जांच की मांग

भोपाल  मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले एसआईटी जांच के बाद अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और पूछताछ की मांग की गई है। अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि प्रवीण ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार विषैले सिरप बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं, उन्हें बंद किया जाए और उनके उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का इंतजाम किया जाए. साथ ही, देश में एक सख्त 'ड्रग रिकॉल पॉलिसी' बनाई जाए. दवाओं में प्रयुक्त खतरनाक रसायन डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं.बच्चों की मौत के मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर करके जांच कराई जाए, ताकि जांच में समन्वय बना रहे.याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की गलती का नहीं, बल्कि देश की ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की विफलता का है, जिसकी वजह से कई राज्यों में मासूमों की जान गई है. औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा प्रकरण के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   जब्त किए जाए मौजूदा कफ सिरफ का स्टॉक वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग/विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की गई है। जगह-जगह बैन किए गए मौजूदा कोल्ड्रिफ कफ सिरफ के सभी स्टॉक को जब्त करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि सभी FIR की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कफ सिरप के निर्माण, रेगुलेशन, टेस्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जांच और पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जाए। सबसे ज्यादा एमपी के छिंदवाड़ा में बच्चों की गई जान बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक दोनों राज्यों में कुल 18 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें से 16 मौतें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में और 2 राजस्थान के भरतपुर व सीकर में दर्ज की गई हैं।  जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बन रहा है।  जानिए अब तक क्या हुआ एक्शन? केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर तत्काल जांच और नकली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

खगोलशास्त्री महर्षि वाल्मीकि, जब ‘शोक’ से ‘श्लोक’ जन्मा और विज्ञान झुका श्रद्धा से

भोपाल भारतभूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ अध्यात्म और विज्ञान कभी परस्पर विरोधी नहीं रहे, ज्ञान के हर रूप का उद्गम ऋषियों के चिंतन से हुआ। इसी परंपरा में एक ऐसा नाम अमर है, महर्षि वाल्मीकि। वे केवल आदि कवि नहीं थे, बल्कि भारत के प्रथम खगोलशास्त्री भी थे, जिन्होंने आकाश की नक्षत्रीय गतियों को साहित्य के छंदों में पिरो दिया। वाल्मीकि जयंती के इस पावन अवसर पर यह जानना रोमांचक है कि ‘रामायण’ केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि खगोलीय दस्तावेज़ भी है, एक ऐसा दस्तावेज़ जिसमें हर ग्रह, नक्षत्र और तिथि वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आज भी सत्य सिद्ध होती है। महर्षि वाल्मीकि का खगोलबोध, जब कविता बनी विज्ञान की भाषा ‘रामायण’ में श्रीराम के जन्म का वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने जिस सटीकता से किया है, वह आधुनिक खगोलशास्त्र की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। जब कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया, उस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति और शुक्र, ये पाँचों ग्रह अपने-अपने उच्च स्थानों में थे, और लग्न में चंद्रमा बृहस्पति के साथ स्थित थे। भारतीय वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की पूर्व निदेशक सुश्री सरोज बाला ने प्लैनेटेरियम गोल्ड सॉफ्टवेयर 4.1 के माध्यम से इस गणना की पुष्टि की। उन्होंने पाया कि यदि यह आकाशीय स्थिति 27° उत्तर और 82° पूर्व (अयोध्या के अक्षांश, रेखांश) पर डाली जाए, तो यह 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व, दोपहर 12 से 2 बजे के बीच का समय बताती है, अर्थात श्रीराम का जन्मकाल! विज्ञान ने दी वाल्मीकि को पुष्टता की मुहर सरोज बाला और उनके दल ने ‘रामायण की कहानी, विज्ञान की जुबानी’ शीर्षक से 16 वर्षों के गहन शोध में यह सिद्ध किया कि वाल्मीकि के खगोलीय संदर्भ पूर्णतः प्रामाणिक हैं। उन्होंने Stellarium, Sky Guide, और Planetarium Simulation जैसे सॉफ्टवेयरों से तुलना की, परिणाम अद्भुत रहे। हर ग्रह की गति, हर नक्षत्र की स्थिति और हर खगोलीय घटना, रामायण में बताए क्रम के अनुरूप मिली। इन सॉफ्टवेयर परीक्षणों के साथ-साथ पुरातत्व, भूविज्ञान, समुद्रविज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और उपग्रह चित्रों ने भी वाल्मीकि के वर्णनों की पुष्टि की। यह अपने आप में एक अनूठा संगम है, जहाँ श्रद्धा और विज्ञान एक दूसरे को प्रमाणित करते हैं। सत्य का साक्ष्य, रामायण की कालगणना और भू-साक्ष्य महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के वनवास के दौरान सूर्यग्रहण, चंद्रमा की कलाएँ, और ऋतुओं का सूक्ष्म वर्णन किया है। डॉ. राम अवतार शर्मा ने इन स्थलों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम् तक। उन्होंने पाया कि हर स्थान, हर आकाशीय स्थिति, और हर ऋतु-वर्णन वास्तविक भू-परिस्थितियों से मेल खाता है। नासा द्वारा प्रकाशित पाक जलडमरूमध्य में डूबे मानव-निर्मित पुल के उपग्रह चित्र भी इस बात का समर्थन करते हैं कि रामसेतु एक वास्तविक संरचना थी, वही पुल जिसे रामायण में ‘सेतुबंध’ कहा गया है। वाल्मीकि, साहित्य से विज्ञान तक का सेतु वाल्मीकि केवल ‘रामायण’ के रचयिता नहीं थे, वे ज्ञान और सृजन के अद्वितीय संयोग थे। उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के शोक से ‘श्लोक’ की रचना कर दी, और वहीं से काव्य का जन्म हुआ। यह वही संवेदना थी जो आकाश की गति और जीवन की गति को एक सूत्र में बाँध देती है। माता सीता उनके आश्रम में रही, लव-कुश उनके शिष्य बनकर बड़े हुए, यह दिखाता है कि समाज-व्यवस्था से परे ज्ञान का कोई जातिगत बंधन नहीं होता। शूद्र वर्ण से आने वाले इस महर्षि ने दिखा दिया कि महानता कर्म से होती है, जन्म से नहीं।  ऋषि का विज्ञान आज भी प्रासंगिक है आज जब आधुनिक विज्ञान जेम्स वेब टेलिस्कोप से ब्रह्मांड के रहस्य खोज रहा है, तब भी महर्षि वाल्मीकि का ज्ञान एक ज्योति-स्तंभ की तरह सामने आता है। वे हमें बताते हैं कि कविता केवल भावना नहीं, ब्रह्मांड की गति का अनुभव भी हो सकती है। ‘रामायण’ केवल कथा नहीं, बल्कि खगोलशास्त्र का काव्य है, जहाँ हर श्लोक में आकाश का सत्य निहित है। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि को उनके प्राकट्य पर्व पर शत-शत नमन, जिन्होंने “शोक” को “श्लोक” में बदलकर यह दिखाया कि जब हृदय में वेदना हो और दृष्टि में ब्रह्मांड, तब कविता विज्ञान बन जाती है। आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की सादर आत्मीय शुभकामनाएं   – *डॉ विश्वास चौहान ( प्राध्यापक विधि  , शासकीय स्टेट लॉ कॉलेज भोपाल )

मध्यप्रदेश में बारिश थमने को, 10 अक्टूबर तक मानसून लौटने की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बारिशों का दौर अब थमने जा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं अब मौसम साफ होने की ओर है। मौसम विभाग की मानें तो 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, और इसके बाद राज्य में सुहावना और साफ मौसम लौटेगा। अगले दो दिनों तक हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का खतरा नहीं है। यानी अब लोगों को न जलभराव की चिंता होगी, न ही अचानक आने वाली तेज बारिश की। इन जिलों में हुई बारिश सोमवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, रतलाम, मंदसौर, धार, बड़वानी, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, भोपाल, राजगढ़ और विदिशा जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई थी। इनमें से भोपाल, रायसेन, गुना और हरदा भारी बारिश दर्ज की गई थी।   आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट     भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सागर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, डिंडोरी, मैहर, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर     सीहोर, राजगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर कलां में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     अगले 3-4 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। चक्रवातीय तूफान “शक्ति” वर्तमान में 19.6° उत्तरी अक्षांश और 60.5° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित है। यह मसीरा (ओमान) से लगभग 210 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 310 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम, द्वारका से 940 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 960 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।     इसके पूर्व- दक्षिण-पूर्व की ओर पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर बढ़ने और 7अक्टूबर की सुबह तक एक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उत्तरी अफगानिस्तान के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर स्थित है, और ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ 7.6 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर देशांतर 69° पूर्व से अक्षांश 23° उत्तर तक फैली हुई है।     एक चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित है, जो समुद्र     तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर भी स्थित है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नया वेदर सिस्टम बनने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। 1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

विश्वविद्यालय के 69वें आधारशिला दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे भव्य कार्यक्रम में नामकरण पट्टिका का अनावरण

उज्जैन  सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अपने 69वें आधारशिला दिवस की तैयारी कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय की नामकरण पट्टिका का अनावरण भी करेंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कार्यपरिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। विश्वविद्यालय का नामकरण हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल की उपस्थिति में यह घोषणा की थी। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के राजपत्र में भी इस नामकरण का प्रकाशन हो चुका है। विश्वविद्यालय की आधारशिला 23 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने रखी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी।  

संगठनों का समर्थन सरकार के सुधार प्रयासों को मिल रहा बल

स्थितियों के सुधार के लिये किये जा रहे प्रयासों में सभी संगठन सरकार के साथ वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के सदस्यों-पदाधिकारियों के साथ औषधियों के उपयोग पर हुआ विमर्श केंद्र व राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें भोपाल  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राज्य कार्यालय में आहूत बैठक में वर्तमान परिस्थियों के परिपेक्ष्य में शिशुओ व बच्चों को चिकित्सकों द्वारा लिखे जा रहे तथा बाजार में उपलब्ध विभिन्न औषधियों विशेषकर संयोजन औषधियों (काम्बिनेशन मेडिसिन्स) के उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियों केंद्र व राज्य सरकार तथा विभिन्न चिकित्सा संगठनो यथा इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों तथा शिशु रोग विशेषज्ञों ने प्रदेश में हुई बच्चों की दुखद मृत्यु पर दुख व्यक्त किया। शिशु रोग विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार द्वारा स्थितियों के सुधार के किये जा रहे प्रयासो में सभी संगठन सरकार के साथ हैं। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने सभी सुझावो को ध्यान से सुनते हुए शासकीय दिशा निर्देशो में आवश्यकतानुसार उन्हे शामिल किये जाने की बात कही। उन्होने छिंदवाडा की घटना पर दुख व्यक्त करते हुये तथा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इस घटना के सभी पहलुओ की जांच करवाई जा रही हैं और सभी दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी। साथ ही उन्होने यह भी कहा कि केंद्रीय व राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशो का पालन करवाने में इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ की मदद से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता हैं। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ में शामिल तकनीकी विशेषज्ञ सुदूर इलाकों में मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं। प्रमुख सचिव  संदीप यादव ने बताया कि छिदवाडा में बच्चों की दुखद मृत्यु के सभी कारणों का गहन परीक्षण करवाया गया है। इसमें भोज्य पदार्थो, पेय जल के साथ साथ विभिन्न औषधियों की जांचे शामिल हैं। जैसा कि बच्चो के रीनल बायोप्सी रिर्पोट से ज्ञात हुआ है कि बच्चो की मृत्यु एक्यूट टयूबुलर नेक्रोसिस के कारण हुये एक्यूट रीनल फेल्योर के कारण हुई है जो किसी रासायनिक टाक्सीसिटी की ओर इशारा करती हैं। इसके बावजूद बच्चों में किसी बैक्टीरियल-वायरल-अन्य संक्रमणों के कारण एक्यूट रीनल फेल्योर की आशंकाओ की भी विस्तृत जांच करवाई गई। घटना में यह पाया गया कि विषाक्त रसायन कफ सीरप में उपस्थित था जिसका विक्रय अपना मेडिकल स्टोर, स्टेशन रोड, परासिया द्वारा किया जा रहा था। यह मेडिकल स्टोर मती ज्योति सोनी के नाम पर पंजीकृत था। यह भी पाया गया कि मेडिकल स्टोर में औषधियों के विक्रय हेतु कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट भी उपलब्ध नहीं था इससे स्पष्ट हैं कि बिना किसी औषधि भण्डारण व वितरण के जानकारी वाले तकनीकी व्यक्ति के स्थान पर अनाधिकृत व तकनीकी तौर पर इसके लिये अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा औषधियों का भण्डारण व वितरण किया जा रहा था। दोषी पाये जाने से इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर इसे सील कर दिया गया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि यह पूरा परिसर डा प्रवीण सोनी के आधिपत्य में था तथा उनकी सहमति से यह अवैधानिक कार्य जारी था अत: उनके विरूद्ध भी विधिसम्मत कार्यवाही की जा रही हैं। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षो में जारी निर्देशो की वृहद जानकारी दी गयी। बताया गया कि भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा दिसम्बर 2023 में क्लोरफेनरामीन मैलिएट 2 एमजी + फेनिलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड 5 एमजी के संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) को वर्ष 2023 में ही 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त्त भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा अक्टूबर 2025 में पत्र जारी कर बच्चों में कफ सीरप के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक द्वारा चिंता व्यक्त करते हुये कहा गया कि औषधियों के काउंटर विक्रय को नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता हैं। शिडयूल एच ड्रग केवल चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी भी फार्मेसी में बनने वाली औषधियों के प्रत्येक बैच की जांच होनी आवश्यक है। डॉ. राकेश मिश्रा द्वारा 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चो में संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) के प्रतिबंध को पूर्ण तौर पर पालन करवाने पर बल दिया गया। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. महेश माहेश्वरी द्वारा जानकारी दी गई कि संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) और अन्य औषधियों के तर्कसंगत प्रयोग हेतु इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स की राष्ट्रीय एवं राज्य शाखा द्वारा पूर्व से ही निर्देश जारी किये जा चुके हैं। समय-समय पर आवश्यकतानुसार इनमें संशोधन किया जाता रहा हैं। इन्होने भरोसा दिलाया कि यदि शासन अपने दिशा निर्देशो में संशोधन हेतु तकनीकी सहायता चाहेगा तो इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स इसके लिये सहर्ष तैयार हैं। उन्होने इस हेतु केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा जारी सर्कुलर्स का समर्धन किया तथा इसके क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन भी दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। शिशु रोग विशेषज्ञो में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से डॉ. शिखा मलिक, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डा महेश माहेश्वरी, सचिव डॉ. दिनेश मेकले, डॉ. अम्बर कुमार, डॉ. भुपेश्वरी पटेल, गांधी चिकित्सा महाविद्वलय के डॉ. मंजूशा गुप्ता, डॉ. राकेश टिक्कस और निजी चिकित्सक डॉ. राकेश मिश्रा, राकेश सुखेजा, डॉ. श्रुति सरकार, डॉ. गुफरान अहमद, डॉ. राहुल खरे समेत बड़ी संख्या में शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प – उद्योगों के सहयोग से मध्यप्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे

उद्योगों की साझेदारी से मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प – उद्योगों के सहयोग से मध्यप्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे "कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री" कार्यक्रम में प्रदेश के 52 उद्यमी हुए सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को विकास की दृष्टि से सबसे अव्वल राज्य बनाने में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार और प्रदेश के नागरिकों के साथ उद्योग जगत के प्रयास आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण में सहयोगी होंगे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए वर्ष 2014 के बाद दृश्य बदल दिया है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने के लिए ऐसी नीतियों का निर्माण किया गया है जो विकास के द्वार खोलती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम होटल कोर्टयार्ड मैरियट में "कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री" कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के 52 उद्यमियों को सम्मानित कर रहे थे। कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार, रियल स्टेट और सेवा क्षेत्र में कार्य करने वाले उत्कृष्ट लीडर सम्मानित किए गए। यह कार्यक्रम नवदुनिया-नईदुनिया (दैनिक जागरण समूह) ने आयोजित किया, जो संस्थान के आयोजन का 13वां संस्करण था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित उद्यमियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूरे विश्व के समक्ष यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री  मोदी की कार्य दक्षता, सजगता, नवाचार और कदम से कदम मिलाकर चलने की विशेषताओं से भारत की नई पहचान बन रही है। प्रधानमंत्री जी के चिंतन का दायरा व्यापक है। उन्होंने जीएसटी में कमी करने के साथ ही कर व्यवस्थाओं को सरल बनाने का ठोस कार्य किया है। यही कारण है कि आयकर का विवरण देने में उद्यामियों से लेकर आम नागरिकों तक सभी को बेहतर नीतियों का लाभ मिल रहा है। तकनीक का आवश्यक उपयोग भी हो रहा है। उद्यमशील लोगों को प्रोत्साहन मिल रहा है। उद्योगों को कर्म आधारित कार्य पद्धति अपनाने और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दिलवाने के लिए समर्थ बनाया जा रहा है। पूर्व के वर्षों में जो अव्यवस्थाएं थीं, वे सुव्यवस्था में बदल चुकी हैं। उद्योग जगत के बिना विकास की कल्पना नहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग जगत के बिना राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उद्यमी अलग-अलग सेक्टर्स में नया और बेहतर कार्य कर रहे हैं। उनके नई दुनिया बनाने के प्रयत्नों में नई दुनिया जैसे समाचार पत्रों से मिलने वाला प्रोत्साहन भी मायने रखता है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग स्थानों के उद्यमियों को कैप्टन्स ऑफ इंडस्ट्री कार्यक्रम के अंतर्गत सम्मानित किए जाने का कार्य महत्वपूर्ण और सराहनीय है। ऐसे विजनरी लीडर जो समर्पण, नवाचार और नेतृत्व से समाज के साथ ही अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। जीवन में अच्छा और सच्चा कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ाना हम सभी का दायित्व है। प्रारंभ में जागरण समूह के कार्यकारी अध्यक्ष  देवेश गुप्त और सीईओ  संजय शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ.यादव का स्वागत किया। राज्य संपादक  सद्गुरु शरण अवस्थी ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर नाद युग गुरूकुल इंदौर के कलाकारों ने नृत्य गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में  आशीष अग्रवाल, जनसम्पर्क आयुक्त  दीपक सक्सेना भी उपस्थित थे।  

जिला दण्डाधिकारी छतरपुर ने 8 जिला बदर के प्रकरणों में की बड़ी कार्यवाही

जिला दण्डाधिकारी छतरपुर ने 8 जिला बदर के प्रकरणों में की बड़ी कार्यवाही 1 अनावेदक को छः माह के लिए जिला बदर एवं 7 के विरूद्ध थाना हाजिरी देने की कार्यवाही हुई     छतरपुर जिला दण्डाधिकारी पार्थ जैसवाल ने पुलिस अधीक्षक से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर 6 अक्टूबर 2025 को 8 जिला बदर के प्रकरणों में एक अनावेदक के विरूद्ध जिला बदर एवं सात के विरूद्ध थाना हाजिरी देने की कार्यवाही की है। जिला दण्डाधिकारी श्री जैसवाल ने अनावेदक मोनू खान उर्फ पायलेट पिता जफर खान उम्र 25 वर्ष नजरबाग छतरपुर थाना कोतवाली की आपराधिक गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण करने के उद्देश्य से म.प्र. राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3(2) एवं 5 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अनावेदक को छः माह के लिए जिले एवं समीपवर्ती सीमा पर लगे हुए जिलों की भौगोलिक सीमाओं से निष्काषित किया है।      इसके अलावा गौरव प्रताप सिंह उर्फ वाणीराजा दलीपुर थाना बमनौरा, दद्दू उर्फ देवेन्द्र रैकवार परा चौकी थाना मातगुवां, बल्लू उर्फ बलवंत सिंह ठाकुर बारीगढ़ थाना जुझारनगर, अवधेश प्रताप सिंह उर्फ रासू राजा चैतगिरी कॉलोनी थाना कोतवाली छतरपुर, मुकेश उर्फ मुक्के कुशवाहा हनुमान टौरिया के पीछे थाना कोतवाली छतरपुर, सुकसाब उर्फ भज्जू यादव भर्षखेरा थाना बमनौरा एवं हल्के यादव भर्षखेरा थाना बमनौरा को आगामी 1 वर्ष तक सप्ताह में 2 दिन थाना हाजरी देने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री विजयवर्गीय की समीक्षा बैठक, नगरीय योजनाओं में गति लाने के लिए अधिकारियों को निर्देश

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार को मंत्रालय में नगरीय निकायों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री  विजयवर्गीय ने सभी महापौर से वन-टू-वन चर्चा भी की। साथ ही उनके द्वारा बतायी गयी क्षेत्रीय समस्याओं को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि स्थानीय जन-प्रतिनिधियों के अनुभव और सुझाव नगरीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उनकी बातों को प्राथमिकता दी जाए। मंत्री  विजयवर्गीय ने अधिकारियों को लक्ष्य प्राप्ति में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही स्वच्छता पखवाड़ा और लिगेसी वेस्ट प्रबंधन परियोजनाओं की भी समीक्षा की। इसमें शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट निपटान और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की प्रगति, आवास निर्माण की स्थिति और आगामी पांच वर्षों के लिए अधोसंरचना कार्यों की कार्य-योजना पर भी चर्चा की गई। अमृत योजना और नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत शहरी जल आपूर्ति, सीवेज प्रणाली और गंगा स्वच्छता से संबंधित कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहरी परिवहन में ई-बसों की उपलब्धता, संचालन और भविष्य की योजना पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मंत्री  विजयवर्गीय ने आत्मनिर्भर निकायों की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए सभी नगर निकायों को कर वसूली, आय वृद्धि, जीआईएस असेसमेंट और ऊर्जा ऑडिट जैसे विषयों में सक्रियता लाने के निर्देश दिए। साथ ही वाहन प्रबंधन प्रणाली को सुधारने, ईंधन दक्षता बढ़ाने को कहा। मंत्री  विजयवर्गीय ने आदर्श 30 मीटर चौड़ी और 5 किलोमीटर लंबी मॉडल सड़क के निर्माण कार्य की समीक्षा की तथा गीता भवन कार्य-योजना सहित सभी नगरीय निकायों से इस पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। पीएम स्वनिधि योजना के पहले और दूसरे चरण की प्रगति की जानकारी ली गई और इसमें बकाया भुगतान की स्थिति पर भी चर्चा की गई। मंत्री  विजयवर्गीय ने अमृत हरित अभियान, फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम की स्थिति, फायर मैनेजमेंट सिस्टम, IGOT कर्मयोगी प्रशिक्षण, ग्रेडेशन सूची की अंतिम प्रक्रिया तथा डीपीसी की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने मुख्यमंत्री की घोषणाओं, सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण तथा दीनदयाल रसोई योजना की स्थिति, इलेक्ट्रिक वाहन नीति, टाउनशिप नीति और आदर्श किरायेदारी अधिनियम पर भी विस्तार से चर्चा की। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का त्वरित समाधान किया जाए तथा शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रत्येक कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से जनता की सुविधाओं को प्राथमिकता देने और योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने की अपील की। बैठक में सभी नगर निगमों के महापौर, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, नगरीय प्रशासन आयुक्त  संकेत भोंडवे, नगर निगमों के आयुक्त, संभागीय संयुक्त संचालक तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 सहित प्रमुख आयोजनों की तैयारियों पर मंत्री सारंग ने ली बैठक

मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने की विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026, खेलो एमपी यूथ गेम्स और यूनिटी मार्च की तैयारियों की समीक्षा भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने  मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर आगामी कार्यक्रमों ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026, खेलो एमपी यूथ गेम्स तथा यूनिटी मार्च’ की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को सभी आयोजनों की समयबद्ध एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ‘खेलो एमपी यूथ गेम्स’ का आयोजन आगामी दिसंबर से जनवरी तक किया जाएगा। प्रतियोगिताएं 27 खेलों में होंगी, जो ब्लॉक, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी। खेल संघों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी खेलों का सफल संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। संभाग मुख्यालयों पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। एमपी गेम्स के विजेता खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंत्री  सारंग ने कहा कि इन खेलों का उद्देश्य प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना, युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है। ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ की समीक्षा के दौरान बताया गया कि इस वर्ष भी कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना और ‘विकसित भारत’ के विचार को व्यवहारिक रूप देना है। प्रथम चरण के अंतर्गत (डिजिटल) विकसित भारत क्विज़ का आयोजन 1 सितम्बर से 15 अक्टूबर 2025 तक किया जा रहा है, जिसमें 15 से 29 वर्ष की आयु के युवा भाग ले रहे हैं। अभी तक कुल 64,590 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है। इसके पश्चात 16 से 21 अक्टूबर के बीच मूल्यांकन एवं चयन की प्रक्रिया होगी। चयनित कुल प्रतिभागियों के 10 प्रतिशत (अधिकतम 3 लाख प्रतिभागी) द्वितीय चरण में प्रवेश करेंगे, जिसमें 23 अक्टूबर से 5 नवम्बर 2025 के बीच (डिजिटल) निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस चरण में प्रतिभागियों को 500 शब्दों का निबंध MY Bharat पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अंतिम चरण में चयनित प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के समक्ष विकसित भारत विषय पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। बैठक में ‘यूनिटी मार्च’ और सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर सभी जिलों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं के माध्यम से युवाओं में ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘स्वदेशी’ के संदेश का प्रसार किया जाएगा। इस अवसर पर सरदार पटेल के जीवन, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया गया। मंत्री  सारंग ने कहा कि ये सभी कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि वाल्मीकि को बताया भारतीय संस्कृति का आलोक स्तंभ

महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के दिव्य ऋषि हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि वाल्मीकि को बताया भारतीय संस्कृति का आलोक स्तंभ प्रदेशवासियों को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर श्रद्धालु नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति और मानवता की क्रूरता पर विजय का प्रतीक है। वे अद्वितीय विद्वान ऋषि एवं सहृदय कवि थे, जिन्होंने भारतीय समाज में पूजनीय स्थान अर्जित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभ्यता, धर्म एवं आध्यात्म का अद्वितीय समन्वय भारत के अतिरिक्त और कहीं नहीं मिलता। यही कारण है कि 'विश्व गुरु' की उपाधि से सम्मानित भारत, सनातन धर्म की महानता का दिव्य प्रतीक है। महर्षि वाल्मीकि महिमामयी भारतीय सनातन परंपरा के प्रणेता, प्रहरी, प्रचारक ऋषि भारतीय संस्कृति के गौरव हैं। महर्षि वाल्मीकि के जीवन में परिवर्तन की शुरुआत तब हुई, जब उनकी भेंट महान ऋषि नारद से हुई। नारद जी ने उन्हें 'राम' नाम का जप करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि के महान कार्यों में से एक है। इसमें उन्होंने भगवान राम के जीवन से जुड़े आदर्शों को विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया है। उनके रचित 23 हजार से अधिक श्लोकों से युक्त रामायण, भारतीय संस्कृति और आत्म संयम की शिक्षा प्रदान करता है। महर्षि वाल्मीकि ने न केवल रामायण की रचना की, बल्कि माता सीता को अपने आश्रम में शरण दी और उनके पुत्रों लव-कुश को ज्ञान प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने बोध कराया कि जीवन को समझने की सबसे सुंदर यात्रा है रामायण का श्रवण करना। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से यह दिखाया कि सच्चा धर्म सबको साथ लेकर चलता है क्योंकि इसमें करुणा, न्याय और समर्पण शामिल होता है। उन्होंने भगवान राम के जीवन के माध्यम से मानव समाज को मर्यादा, परिवार, समाज और कर्तव्य के महत्व का बोध कराया। महर्षि वाल्मीकि ने यह संदेश दिया कि यदि मनुष्य सच्चे मन से प्रयत्न करे, तो अंधकार से भी प्रकाश की राह बनाई जा सकती है। यही कारण है कि उन्हें आदिकवि कहा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का दर्शन बहुत सरल है — किसी के साथ अन्याय मत करो, और यदि किसी के जीवन में प्रकाश लाने का अवसर मिले तो पीछे मत हटो। यही भाव एक बेहतर समाज की नींव है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को यह सिखाया कि सम्मान किसी जाति या स्थिति से नहीं, बल्कि कर्म और आचरण से मिलता है। यह शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने यह सिखाया कि हर व्यक्ति के भीतर अच्छाई का दीप जल सकता है। यही कारण है कि उनका जीवन हर युग में मार्गदर्शक बना रहेगा। वाल्मीकि जी के आदर्शों से प्रेरित होकर हमें भी यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में किसी के साथ भेदभाव न होने दें। हर घर में शिक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का दीप जले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि हमारे लिए केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व ही नहीं, वे उस चेतना के प्रतीक हैं जो हर मनुष्य के भीतर मौजूद है। जब तक हम उनके आदर्शों को जीवन में उतारते रहेंगे, समाज आगे बढ़ता रहेगा और मानवता की यह ज्योति जलती रहेगी।