इतिहास की किताबों में बदलाव: अकबर-टीपू के आगे ‘महान’ हटाया, RSS नेता का दावा
महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आयोजित ऑरेंज सिटी लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इतिहास की किताबों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि NCERT ने इतिहास को अधिक संतुलित और तथ्याधारित स्वरूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। उनके अनुसार, अब नई इतिहास पुस्तकों में अकबर और टीपू सुल्तान के आगे ‘महान’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इतिहास का मूल्यांकन अब घटनाओं और प्रमाणों के आधार पर किया जा रहा है। NCERT ने किए 11वीं तक के सिलेबस में चेंज अपने संबोधन में आंबेकर ने बताया कि NCERT ने कुल 15 किताबों में से 11 कक्षाओं की किताबों में इम्पोर्टेन्ट अमेंडमेंटस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में भी बदलाव अगले साल लागू किए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि किताबों से किसी का नाम हटाया नहीं गया है। “हमारे इतिहास के कठोर सच भी बच्चों को जानने चाहिए” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि इतिहास में कौन-सी घटनाएं लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनीं, और किन कारणों से समाज को संघर्ष करना पड़ा। इसलिए किसी चरित्र को हटाने के बजाय उनके कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण जरूरी है। ये खबर भी पढ़े…भारत के ‘आधार’ की तर्ज पर ब्रिटेन लाएगा नया ID कार्ड सिस्टम, क्या है पीएम स्टारमर का प्लान? क्यों हटाया गया ‘महान’ शब्द? आंबेकर का कहना था कि ‘महान’ शब्द किसी ऐतिहासिक चरित्र को एकतरफा रूप से महिमामंडित कर देता है, जबकि इतिहास का उद्देश्य संतुलित दृष्टिकोण देना है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास बहुत बड़ा है और इसे दुनिया को देने से पहले हमें स्वयं उस ज्ञान को समझने की आवश्यकता है।पुरानी किताबों की भाषा पर उठे थे सवाल कई इतिहासकार और शिक्षाविद लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि इतिहास पुस्तकों में इस्तेमाल शब्दों को तटस्थ बनाया जाए। इसी कारण NCERT ने अध्यायों की भाषा को सरल और तथ्यपरक बनाने पर काम किया। ये खबर भी पढ़े…हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ नालंदा यूनिवर्सिटी पर भी बोले RSS नेता अपने भाषण में उन्होंने नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए बताया कि यह केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं थी। नालंदा में 76 स्किल-बेस्ड कोर्स पढ़ाए जाते थे। उनके अनुसार, नालंदा में 76 प्रकार के कौशल कोर्स पढ़ाए जाते थे, जिनमें— अर्बन प्लानिंग खेती की तकनीक शासन व्यवस्था मेकअप और आर्ट सीक्रेट एजेंट ट्रेनिंग मैकेनाइजेशन जैसे विषय शामिल थे।उन्होंने कहा कि भारत का यह प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक समाज के लिए उदाहरण बन सकता है। ये खबर भी पढ़े…हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला ये सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 का हुआ ऐलान भारत विकास की राह पर, लेकिन संतुलन जरूरी अंत में आंबेकर ने कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन दुनिया के कई देशों ने विकास के दौरान अपनी संस्कृति व पारिवारिक मूल्यों के साथ समझौता कर दिया था। उन्होंने सलाह दी कि भारत को इस दिशा में सावधान रहना होगा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास और ज्ञान पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वह समझ सके कि भारत कहाँ से गुजरा है और भविष्य में उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। FAQs Q1. क्या NCERT ने अकबर और टीपू सुल्तान को इतिहास की किताबों से हटा दिया है। नहीं, NCERT ने उन्हें किताबों से नहीं हटाया है। केवल उनके नाम के आगे लगे ‘महान’ शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया है ताकि इतिहास को अधिक तटस्थ और तथ्याधारित ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। Q2. इतिहास की किताबों में यह बदलाव कब से लागू होंगे? Q3. अब तक कक्षा 1 से 11 तक की अधिकांश किताबों में बदलाव किए जा चुके हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में संशोधन अगले सत्र से लागू होंगे। Q4. RSS नेता सुनील आंबेकर ने इस बदलाव को क्यों सकारात्मक बताया? उन्होंने कहा कि पुरानी किताबों में पक्षपातपूर्ण भाषा थी, जबकि नई किताबें तटस्थ दृष्टिकोण देती हैं। इस बदलाव के जरिए बच्चों को अकबर और टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक पात्रों के कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण मिलेगा।