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MP में महिला कांग्रेस के संगठन को मिलेगी मजबूती, नवंबर तक होंगे पदाधिकारियों के चयन

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरह ही मध्य प्रदेश में महिला कांग्रेस में भी संगठन सृजन अभियान के माध्यम से जिला अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। नवंबर तक सभी जिला इकाइयों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जाएगी। यह निर्णय मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भवन में आयोजित महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी में लिया गया। मध्य प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल के मुताबिक, बैठक में तय किया गया कि अखिल भारतीय महिला कांग्रेस और मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस मिलकर पर्यवेक्षक नियुक्त करेंगे, जो पूरे प्रदेश के जिलों का दौरा करेंगे। ये पर्यवेक्षक जिला स्तर पर महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करके उनकी राय के आधार पर जिला अध्यक्ष पद के लिए पैनल तैयार करेंगे। जन आंदोलन शुरू करेगी इसमें से सक्रिय और नेतृत्व क्षमता वाली महिला को जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर अंत तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि नवंबर के पहले सप्ताह में नए जिला अध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद महिला कांग्रेस राज्यभर में भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के विरोध में राज्यव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगी। इसमें महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, महिला अपराध, महिलाओं का लापता होना, महंगाई, लाड़ली बहनों के साथ तीन रुपये प्रतिमाह देने के नाम पर वादा खिलाफी और स्वास्थ्य, शिक्षा सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दे रहेंगे। नेतृत्व विकास को लेकर होगा प्रशिक्षण- महिला कांग्रेस एक संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इसमें नई जिला अध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों को संगठन प्रबंधन, नेतृत्व विकास और जनसंपर्क कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राज्यपाल के दौरे पर गरमाई सियासत, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस को दी खुली चुनौती

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका के जिलों के दौरे पर सवाल उठाए जाने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस को चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा कि राज्यपाल सर्वेसर्वा होते हैं, अच्छा है वे दौरा कर रहे हैं. रहा सवाल मुख्यमंत्री के दौरे का तो कांग्रेस नेता निकाल कर देख लें कि बीते दो सालों में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कितना दौरा किया. मुख्यमंत्री कहीं ज्यादा दौरे कर रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. बिरनपुर मामले में सुनवाई को लेकर कांग्रेस के बयान पर कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है. मामला न्यायालय में हैं, इस पर कांग्रेस कैसे टिप्पणी कर सकती है. न्यायालय जो भी तय करेगा वो मान्य होना चाहिए. वहीं ट्रिपल आईटी में छात्राओं की AI से बनाई गई अश्लील फोटो पर मंत्री ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यजनक है. ऐसी हरकतें न केवल शर्मनाक हैं, बल्कि हतोत्साहित करने वाली भी हैं. कॉलेज प्रबंधन ने आरोपी छात्र को निलंबित किया है. छात्र पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है. मैं इस मामले में शिक्षा मंत्री से बात करूंगा. इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. जिसने भी यह दुस्साहस किया, उसे बख्शा नहीं जाएगा. युवा पीढ़ी को सबक देने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी है. धान का एक-एक दाना खरीदने प्रतिबद्ध वहीं कांग्रेस ने 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस जब सरकार में थी, जो भी करती थी सब जायज. फसल की स्थिति और मौसम को देखकर ही खरीदी की तारीख तय होगी. अगर 1 नवंबर उपयुक्त हुआ तो उसी दिन से खरीदी, नहीं तो 15 नवंबर से. रिपोर्ट लेकर ही फैसला लिया जाएगा. सरकार अच्छी क्वालिटी का धान खरीदना चाहती है, ताकि भंडारण और रखरखाव बेहतर हो. राज्य सरकार एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है. सारे चमचे, घोड़े और गधे कांग्रेस में कांग्रेस में जिला अध्यक्ष बनने के लिए जमकर हो रही लॉबिंग पर श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस दिशाहीन और व्यक्तिवादी पार्टी है. दो साल हो गया कांग्रेस संगठन चुनाव नहीं करा सकी. अब होटलों में पार्टी चल रही है, लोग लॉबिंग कर रहे हैं. कांग्रेस जब भी चुनाव कराती है, विवाद हो जाता है. सारे चमचे, घोड़े और गधे कांग्रेस में पाए जाते हैं. कांग्रेस के नेता इसकी व्याख्या अच्छे से कर सकते हैं. जहां-जहां भूपेश के पैर पड़े, वहां सूपड़ा साफ वहीं कांग्रेस ने बिहार में विधानसभा चुनाव प्रचार में शामिल नहीं किए जाने पर भाजपा नेताओं को अयोग्य बताए जाने पर मंत्री ने कहा कि जब-जब संतों के पैर पड़ते है, तब वहां उद्धार हो जाता है. जहां-जहां भूपेश बघेल के पांव पड़े, वहां सूपड़ा साफ हो गया. राहुल गांधी ने भी कई जगह पदयात्रा की. जहां-जहां राहुल गांधी गए, वहां से साफ हो गए.

कांग्रेस का ग्राउंड गेम तेज: ज्यादा वोट वाले घरों में पहुंचेगा BLA, BJP के पन्ना प्रमुखों से सीधी टक्कर

भोपाल  एमपी के चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस अब वोटर लिस्ट सुधार को लेकर तेजी से काम कर रही है। बीजेपी के पन्ना प्रमुखों के मुकाबले कांग्रेस अब हर बूथ पर बीएलए तैनात कर रही है। 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने प्रदेशभर में मतदाता सूची की करेगी जाँच।  ऐसे में कांग्रेस अब ज्यादा नंबर वाले वोटर्स के घर जाएगी, जो भी नए नाम जुड़ेंगे-कटेंगे उन तक भी पहुंचेगी। कांग्रेस अब केवल प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि मतदाता सूची के हर पन्ने और हर नाम पर अपनी निगरानी रखने पर तेजी से काम करेगी। नाम जुड़वाने, कटवाने की ट्रेनिंग देंगे कांग्रेस सभी बीएलए को निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं जैसे फॉर्म-6 (नाम जोड़ना), फॉर्म-7 (नाम हटाना), फॉर्म-8 (सुधार) और फॉर्म-8A (स्थानांतरण) की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। BLO के सीधे संपर्क में होंगे कांग्रेस के BLA कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट (BLA) सीधे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)के संपर्क में रहेंगे। आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार बीएलओ घर-घर जाकर एनेक्सचर-C भरवाएंगे, जो मतदाता की पात्रता प्रमाणित करने का दस्तावेज होगा। कांग्रेस ने अपने बीएलए को यह जिम्मेदारी दी है कि वे इस सर्वे में शामिल होकर हर वोटर का विवरण सही तरीके से दर्ज करवाएं। हर विधानसभा में बनेगा कांग्रेस कंट्रोल रूम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में ‘मतदाता सूची नियंत्रण कक्ष’ बनाएगी। जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट और ऑफलाइन मतदाता सूची दोनों से डेटा एकत्र करेगा। इस कंट्रोल रूम से वोटर लिस्ट में छूटे नामों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कंट्रोल रूम पार्टी के हर बीएलए से फीडबैक लेगा। और स्थानीय स्तर पर शिकायतों का समाधान कराने पार्टी स्तर पर सूचित करेगा। कांग्रेस के समर्थक वोटर्स के काटे गए थे नाम कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले चुनावों में बड़ी संख्या में समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे पाए गए थे। इस बार कांग्रेस ने उस गलती को न दोहराने का संकल्प लिया है। SIR को लेकर कांग्रेस की तैयारी     हर मतदान केंद्र पर कम से कम एक प्रशिक्षित बीएलए की नियुक्ति।     मतदाता सूची के संशोधन और दावे-आपत्ति अवधि में सक्रिय भागीदारी।     पात्र युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों को पंजीकृत कराने का अभियान।     मृत मतदाताओं या स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटवाने के लिए साक्ष्य आधारित आपत्तियाँ।     महिला मतदाताओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम। एमपी के 5 करोड लोगों के हस्ताक्षर कराने चलेगा अभियान वोट चोर-गद्दी छोड़ कार्यक्रम के तहत एमपी में 5 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर कराने एक अभियान चलाया जाएगा। इस हस्ताक्षर अभियान के लिए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एमपी की सभी 230 विधानसभाओं के प्रभारी नियुक्त किए हैं।

NSUI शहर अध्यक्ष समेत 5 गिरफ्तार, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस लिख रही अपराध की पटकथा : उपमुख्यमंत्री शर्मा

जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस ने 5 लोगों को डकैती के प्रयास मामले में गिरफ्तार किया. आरोपियों में एनएसयूआई का शहर अध्यक्ष जितेंद्र दिनकर भी शामिल है. इनके पास से एक पिस्टल और पांच कारतूस बरामद किया गया है. इस मामले पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि जांजगीर ही नहीं, जहां भी अपराध हुए हैं, कांग्रेस की संलिप्तता मिली है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एक विधायक का रेत माफिया से वसूली का ऑडियो वायरल हुआ. एक विधायक बलौदाबाजार आगजनी कांड में सहभागी रहे. एक विधायक शराब घोटाला मामले में जेल में बंद हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अपराध की पटकथा लिख रही है. क्या है पूरा मामला ? दरअसल, घटना 5 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे की है. पेंड्री रोड के श्याम सुपर मार्किट निवासी राहुल अग्रवाल ने रविवार रात दूकान का शटर तोड़ने की आवाज सुनी. वह अपने पिता के साथ बाहर आने पर देखा की तीन नकाबपोश युवक शटर तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. शोर मचाने पर वह तीनों भागने की कोशिश करने लगे. इसकी सूचना पुलिस को दी गई. सूचना मिलने पर पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी गश्त पर निकली. कुछ दूर पर ही पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया. तलाशी लेने पर उनके पास से पिस्टल और पांच जिन्दा कारतूस, दो लोहे के सब्बल और बाइक बरामद किया गया. जांजगीर नगर पुलिस अक्षीक्षक योगिता खापर्डे ने बताया कि पुलिस ने मनीष कुमार बनवा, चैतन्य दिनकर, हितेश दिनकर, जितेंद्र दिनकर और तरुण सूर्यबंशी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के हत्थे चढ़े जितेंद्र दिनकर जांजगीर एनएसयूआई नगर अध्यक्ष है. पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जितेंद्र दिनकर से पिस्टल की खरीदी की है और कारतूस भी उपलब्ध कराया है. इस मामले मे धारा 331(4), 305(a), 310(4), 3(5), 312, 296, 351 BNS आर्म्स एक्ट 25 के तहत कार्रवाई की है और न्यायिक हिरासत मे भेज दिया है.

बिहार एसआईआर मामला: कांग्रेस का चुनाव आयोग पर तीखा हमला

 नई दिल्ली कांग्रेस ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर फिर से हमला बोलते हुए कहा कि मतदाता सूची से गैर नागरिकों को हटाने के लिए मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण की जरूरत पर बल दिया गया, लेकिन चुनाव आयोग में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह देशवासियों को बता सके कि बिहार में कितने गैर नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। कांग्रेस महासचिव और पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता की कमी है। जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी होती कि बिहार में कितने गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, तो उसकी पोल और भी ज्यादा खुल जाती। जयराम रमेश ने बताया कि बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार से फिर शुरू हो रही है। उन्होंने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख की तस्वीर भी सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया है। विश्लेषण में दावा किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप ने बड़े पैमाने पर लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंकाओं को कम किया है, लेकिन एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में सटीकता, समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। बिहार चुनाव की तारीखों का एलान विपक्ष बिहार में एसआईआर प्रक्रिया का तीखा विरोध कर रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ किया कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा और किसी भी अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। इस एलान के तहत 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और 14 नवंबर को मतगणना होगी।

पूर्व मंत्री भरत सिंह का निधन, कांग्रेस शोक में; अंतिम संस्कार आज

जयपुर हाड़ौती क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री भरत सिंह का सोमवार रात जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। शुरुआत में कोटा में इलाज चला, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर रैफर किया गया था। करीब एक महीने से उनका इलाज एसएमएस अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया और भरत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुद्दों पर डटे रहने वाले नेता भरत सिंह को मुद्दों पर अडिग रहने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके करीबी और कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष कुशल पाल सिंह पानाहेड़ा ने बताया कि भरत सिंह ने राजनीति में कभी लाभ-हानि की चिंता नहीं की। वे गांधीवादी विचारधारा को मानते थे और उनकी ईमानदारी की सराहना विपक्षी नेता भी किया करते थे। राजनीतिक सफर भरत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1950 को हुआ था। उन्होंने एमएस बड़ौदा यूनिवर्सिटी (गुजरात) से स्नातक की पढ़ाई की थी। वे 1993 में पहली बार खानपुर (झालावाड़) से विधायक बने। 1998 में लोकसभा चुनाव में वसुंधरा राजे से हार गए। 2003 में दीगोद (कोटा) से विधायक बने, जहां उन्होंने भाजपा के ललित किशोर चतुर्वेदी को हराया। 2008 में सांगोद से चुनाव जीते, 2013 में हारने के बाद पंचायत चुनाव लड़ा और वार्ड पंच बने। उनकी पत्नी मीना कुमारी उस समय सरपंच रहीं। 2018 में भरत सिंह एक बार फिर सांगोद से विधायक चुने गए। नहीं लड़ा 2023 का चुनाव 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राजनीति से खुद को अलग करने का फैसला लिया। उन्होंने साफ कहा था कि वे न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही परिवार के किसी सदस्य को टिकट दिलाएंगे। इसके बाद सांगोद से कांग्रेस ने भानु प्रताप सिंह को टिकट दिया। भरत सिंह तीन बार कुंदनपुर से सरपंच और दस साल तक सांगोद पंचायत समिति के प्रधान भी रहे। अंतिम संस्कार आज भरत सिंह का अंतिम संस्कार आज  उनके पैतृक गांव कुंदनपुर में किया जाएगा। गहलोत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जताया दुख भरत सिंह के निधन पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने दुख प्रकट किया है। गहलोत ने बयान जारी कर कहा-  पूर्व मंत्री  भरत सिंह कुंदनपुर के निधन का समाचार मिला। मैं कल ही SMS अस्पताल जाकर उनसे कुशलक्षेम पूछकर आया था। डॉक्टरों ने उनकी तबीयत में सुधार बताया था परन्तु आज ऐसा समाचार मेरे लिए व्यथित करने वाला है। भरत सिंह कुंदनपुर राजनीति एवं जनसेवा में बेबाकी एवं ईमानदारी की मिसाल थे। वो हाड़ौती क्षेत्र के कद्दावर नेता थे। मेरे उनके परिवार से संबंध उनके पिताजी के समय से थे जब मैं उनके साथ लोकसभा सांसद बना था। भरत सिंह कुंदनपुर मेरे साथ मंत्री भी रहे। मैं ईश्वर से श्री भरत सिंह जी की आत्मा को शांति एवं उनके परिजनों को हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं।

नेताम का कांग्रेस पर तंज बोले- भाजपा की रफ्तार रोकना किसी के बस की बात नहीं

रायपुर कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की दावेदारी को लेकर मंत्री रामविचार नेताम ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि सब घोड़े एक जगह जमा हो गए हैं. सभी घोड़े की स्थिति खराब है. कांग्रेस का कोई भी घोड़ा टिकने वाला नहीं है. भाजपा का रथ बहुत तेजी के आगे बढ़ रहा. जिसे रोकने का किसी में ना ही दुस्साहस है और ना ही क्षमता. धान खरीदी को लेकर मंत्री नेताम का बड़ा बयान छत्तीसगढ़ में जल्द ही धान खरीदी की शुरुआत होने वाली है. कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत होगी. सरकार किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी करेगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है. इसके बाद धान खरीदी की शुरुआत करेंगे. बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सहयोग केंद्र की शुरूआत मंत्री रामविचार नेताम ने आज फिर से ठाकरे परिसर में सहयोग केंद्र की शुरूआत को लेकर कहा कि पहले की सरकार में भी सहयोग केंद्र खोले गए थे. यहां बारी-बारी से मंत्रियों की ड्यूटी लगती है. कार्यकर्ता अपनी समस्याओं को रखते हैं. सहयोग के माध्यम से निराकरण किया जाता है.

कांग्रेस के परफॉर्मेंस का मास्टरमाइंड: अशोक गहलोत का जादू कहां-कहां चला?

जयपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य पर्यवेक्षक बनाया है। आगामी दिनों में गहलोत बिहार जाकर चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। ये पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी राज्य में मुख्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया हो। आइए जाते हैं अशोक गहलोत को बिहार से पहले किस-किस चुनावी राज्य में जिम्मेदारी दी गई और वहां कांग्रेस की प्रदर्शन कैसा रहा… अशोक गहलोत के साथ इन नेताओं को भी दी गई बिहार की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और लोकसभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षकनियुक्त किया है। अशोक गहलोत पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है। इससे पहले भी पार्टी ने उन्हें कई चुनावी राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी दी है। आइए जानते हैं अशोक गहलोत का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है… हरियाणा और महाराष्ट्र में सिमट गई कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत, अजय माकन और प्रताप सिंह बाजवा को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया था। गहलोत के तमाम प्रयासों के बावजूद सत्ताधारी दल भाजपा को कांग्रेस मात नहीं दे सकी। कांग्रेस को 90 में से केवल 37 सीटों पर जीत मिली। उधर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गहलोत के साथ जी परमेश्वर मुंबई और कोंकण जोन का पर्यवेक्षक बनाया गया था। पर्यवेक्षक होते हुए गहलोत अपना जादू नहीं दिखा सके। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सत्ता से बाहर है। गुजरात में भी नहीं चली अशोक गहलोत की रणनीति गुजरात विधानसभा चुनाव में भी अशोक गहलोत को पार्टी ने जिम्मेदारी दी। अशोक गहलोत सहित राजस्थान के कई नेताओं ने गुजरात में डेरा डाल रखा था। अशोक गहलोत ने कई विधानसभा क्षेत्रों में पैदल मार्च करके कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की। लेकिन शायद अशोक गहलोत की रणनीति काम नहीं आई और गुजरात में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में नहीं आ सकी। राजस्थान में भी करिश्मा नहीं दिखा सके गहलोत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है, लेकिन उनके नेतृत्व में हुए चुनाव में वे कभी जादू नहीं दिखा सके। गहलोत जब पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, तब वे विधायक नहीं थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके लिए जोधपुर की सरदारपुरा सीट को खाली किया गया, जहां हुए उपचुनाव में वे विधायक निर्वाचित हुए। तब से वे लगातार सरदारपुरा से विधायक बनते रहे हैं। राजस्थान में भी कभी कांग्रेस की सत्ता रिपीट नहीं करा सके अशोक गहलोत पहली बार 1998 से 2003 तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद गहलोत सरकार को रिपीट नहीं करा सके। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 57 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। वर्ष 2008 से 2013 तक गहलोत दूसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में भी वे कांग्रेस की सरकार को रिपीट कराने में कामयाब नहीं रहे। वर्ष 2018 से 2023 तक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन फिर वे सत्ता को बरकरार रखने में कामयाब नहीं हुए।

सट्टेबाजी पर छत्तीसगढ़ की बदनामी, बीजेपी-कांग्रेस ने एक-दूसरे को ठहराया जिम्मेदार

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रायपुर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने रिपोर्ट-2023 पेश किया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ ऑनलाइन जुआ-सट्टा मामले में देश में पहले स्थान पर है. प्रदेश में कुल 52 मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. आंकड़े सामने आने के बाद सियासत शुरू हो गई है. भाजपा नेता केदार गुप्ता ने इसका ठीकरा पिछली सरकार पर फोड़ा. वहीं इस बयान पर कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने भी पलटवार किया है. भूपेश सरकार में जमी ऑनलाइन सट्टा की जड़ें : भाजपा नेता केदार गुप्ता भाजपा नेता और प्रदेश प्रवक्ता केदार गुप्ता ने एनसीआरबी की रिपोर्ट में ऑनलाइन सट्टेबाजी में छत्तीसगढ़ देश में पहले नंबर आने पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के समय में ऑनलाइन जुआं-सट्टा की जड़े जमीं हुई थी. लेकिन जब से भाजपा सरकार बनी है, उसकी जड़ें उखाड़ रही है. यह भी बोले कि ये ग्राफ जल्द नीचे जाएगा. केंद्र सरकर इसे बंद करें : कांग्रेस नेता विनोद तिवारी इधर, भाजपा नेता केदार गुप्ता के बयान का कांग्रेस नेता और प्रदेश प्रवक्ता विनोद तिवारी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि जो ऑनलाइन सट्टा एप चल रहा है, वो सेंट्रल गवर्मेंट की अधीन है. केंद्र सरकार को इसे बंद कर देना चाहिए. भूपेश सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में 6 से 7 सौ लोगों पर कार्रवाई भी हुई. साथ ही उन्होंने ऑनलाइन सट्टा को बंद करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था. उसके बाद भी ये कारोबार खुलेआम चल रहा है. इसको केंद्र सरकार को बंद ही कर देना चाहिए. उससे कमाई ही क्यों कर रहे हैं.