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डॉ. मोहन यादव का संदेश: टिकाऊ कृषि के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती को दें प्राथमिकता

प्राकृतिक एवं जैविक खेती को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स पर हुआ कॉन्फ्रेंस का पहला सत्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारा प्रदेश कृषि उपज पर आधारित है। इसलिए सरकार का मूल लक्ष्य प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना और कृषि फसलों की तुलना में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाना है। हमें इन क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसर भी बनाने हैं। सभी कलेक्टर्स अपने-अपने‍ जिलों में किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें हरसंभव मदद भी मुहैया कराएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस-2025 के पहले सत्र 'कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे ग्रामीण युवा आने वाले समय में कृषि उद्यमी बनें, इसके लिए हमें मिल-जुलकर प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि खेती को जैविक खेती की ओर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, पर हमें यह चुनौती भी पार करनी ही होगी। मुख्यमंत्री ने कहा‍ कि  अन्न अर्थात मिलेट्स को प्रोत्साहन देकर इनकी उपज को लगातार बढ़ाना भी हमारा लक्ष्य है, हमें इस दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे। किसानों को परंपरागत खेती से शिफ्ट कर उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्य पालन जैसे आमदनी बढ़ाने वाले कार्यों की ओर लेकर जाना है। प्रदेश में केला, संतरा, टमाटर एवं अन्य उद्यानिकी की फसलें बड़ी मात्रा में होती हैं। हमें इनके स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण एवं बड़े बाजारों तक मार्केटिंग की व्यवस्था भी करनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों में उर्वरक की खपत सिर्फ वैज्ञानिक आधार पर ही होनी चाहिए। यदि नहीं हो रही है तो इस पर नियंत्रण जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में साप्ताहिक मार्केट, हाट बाज़ारों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपज का विक्रय सुनिश्चित करें। साथ ही किसानों को नकद फसलों की खेती के लिए समझाइश देकर प्रोत्साहित करें। इसके लिए अभियान चलाएं। उन्होंने कहा‍ कि सभी कलेक्टर जिलों में 100-100 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर उसका रिकार्ड रखें और उनकी प्राकृतिक खेती के लाभों का अध्ययन भी करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों अर्थात् बागवानी को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने गुना जिले में गुलाब की खेती किए जाने की प्रशंसा करते हुए कहा कि वहां के किसानों ने बड़ा ही प्रगतिशील कदम उठाया है। प्रदेश के सभी धार्मिक शहरों में भी गुलाब की खेती को बढ़ावा दिया जाये, जिससे गुलाब उत्पादन की खपत स्थानीय स्तर पर किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर कृषि उपज मंडी में सोयाबीन फसल की नीलामी रेट की सघन निगरानी भी रखें। भावान्तर योजना का करें प्रचार-प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावान्तर योजना का भी व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। इस योजना का सर्वाधिक लाभ किसानों को मिलना है और यह बात उन तक पहुंचनी भी चाहिए। भावान्तर योजना के समुचित क्रियान्वयन के लिये सभी कलेक्टर पूरी मेहनत और समर्पण से किसानों को इसका अधिकतम लाभ दिलाएं। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं सख्त अंकुश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पराली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा ‍कि प्रदेश में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाएं। इसके लिए सक्रिय नियंत्रण तंत्र विकसित करें और ऐसी घटनाओं पर विशेष फोकस कर निगरानी भी बढ़ाएं। कलेक्टर्स कृषि विभाग का सहयोग लेकर किसानों को पराली/नरवाई न जलाने की समझाइश दें। किसानों को पराली निष्पादन के दूसरे विकल्पों के बारे में बताया जाए, जिससे वे पराली जलाने की ओर प्रवृत्त ही न हों। कृषि उत्पादन आयुक्त ने दिया प्रेजेंटेशन कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स सत्र का संचालन कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक वर्णवाल ने किया और प्रेजेंटेशन दिया। इस सत्र में प्राकृतिक खेती के प्रचार, जलवायु अनुकूल फसलों, उद्यानिकी फसलों के उत्पादन, उत्पादकता केंद्रित क्लस्टर, सूक्ष्म सिंचाई, मत्स्य पालन के लिए केज कल्चर और सेलेक्टिव ब्रीडिंग, फसल अवशेष प्रबंधन, खाद एवं बीज व्यवस्था, सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना, दुग्ध उत्पादन और गौशाला प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त  वर्णवाल ने फसल अवशेष प्रबंधन (पराली निष्पादन नियंत्रण) को सरकार की विशेष प्राथमिकता बताते हुए इस प्रयोजन के लिए कलेक्टर्स को गांव-गांव कृषक संगोष्ठियों के आयोजन और हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं बेलर जैसे उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने को कहा। उन्होंने कहा कि जिलों में स्वीकृत कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। सत्र में रबी 2025-26 के लिए उर्वरक व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। सत्र में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं सहकारिता (मत्स्योद्योग) विभाग के सचिवों ने भी अपनी विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। पांच जिलों में हो रहा कृषि एवं उद्यानिकी पर बेहतरीन काम सत्र में प्रदेश के 5 जिलों के कलेक्टर्स ने अपने-अपने जिलों में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया। गुना कलेक्टर ने गुलाब क्लस्टर डेवलपमेंट के बारे में बताया। हरदा कलेक्टर ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रोत्साहन किए गए प्रयासों की जानकारी दी। शाजापुर कलेक्टर ने खाद वितरण के लिए टोकन प्रणाली विकसित करने के बारे में बताया। श्योपुर कलेक्टर ने फसल अवशेष प्रबंधन (पराली निष्पादन नियंत्रण) की बेहतर व्यवस्था की जानकारी दी। खंडवा कलेक्टर ने जिले में सफलतापूर्वक गौशाला संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र के अंत में जिलों के कलेक्टर्स एवं कमिश्नर्स ने प्रदेश की कृषि उत्पादन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव भी दिए। 

प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत अभियान को मध्यप्रदेश दे रहा मजबूती: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत अभियान को सफल बना रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले में 60 करोड़ के निर्माण कार्यों का वर्चुअली किया लोकार्पण और शिलान्यास भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नशामुक्त भारत अभियान के माध्यम से लोगों को नशे से दूर करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश में नशामुक्ति अभियान का क्रियान्वयन हो रहा है। प्रदेश के 19 धार्मिक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा की दुकानों और बार का संचालन प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जनजीवन में बाधा बनने वाले शराब दुकानों के अहाते बन्द कर दिए जाएंगे। मध्यप्रदेश नशामुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की रात्रि मुख्यमंत्री निवास से बड़वानी में जिले 60 करोड़ रुपये की लागत के निर्माण कार्यों का वर्चुयली उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 23 करोड़ लागत के दो विकास कार्य शामिल हैं। ग्राम पाटी में गोई नदी पर 19 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल और पाटी में 4 करोड़ की लागत से जनजातीय सीनियर उत्कृष्ट बालक छात्रावास का निर्माण हुआ है। साथ ही 37 करोड़ की लागत से सिलावाद-पाटी मार्ग के उन्नयन सहित 7 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिवपंथ सत्संग मेला बड़वानी के जनजातीय समुदाय का प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो गुरु शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक जागरुकता को बढ़ाने का प्रतीक है। शिवपंथ समुदाय की सहभागिता से नशामुक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। यह समुदाय प्रकृति का संरक्षण भी है। युवाओं और महिलाओं को जोड़कर जनजातीय क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान संचालित है जिसमें मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र के कई गुरुजन सत्संग और नशामुक्ति शिविर के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और समाज की सहभागिता से ऐसे कार्य भी संभव हो जाते हैं जिन्हें असंभव माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सार्थक जीवन के लिए तैयार करने में यह अभियान महत्वपूर्ण है। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सुरेखानंद जी महाराज और पहाड़ सिंह बापुजी सहित संतजन का अभिवादन किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह पटेल और श्री सुमेर सिंह सोलंकी के अलावा जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य, श्री अजय यादव, श्री प्रेम सिंह पटेल आदि उपस्थित थे।  

करवा चौथ से पहले सोने-चांदी के दामों में आग, जानिए आज का गोल्ड और सिल्वर रेट

मुंबई  करवा चौथ (Karwa Chauth) के महापर्व से पहले सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है. 7 अक्टूबर (मंगलवार) को यूपी की राजधानी लखनऊ से लेकर मेरठ तक सोने की चमक बढ़ी है. लखनऊ में आज सोना 1045 रुपए प्रति 10 ग्राम तक महंगा हुआ है. वहीं, वाराणसी और मेरठ में भी सोने के भाव जबरदस्त बढ़े हैं. चांदी की कीमत में भी आज 1000 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी देखी गई है. वाराणसी (Varanasi) के सर्राफा बाजार में 7 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1150 रुपए प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,22,070 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. वहीं, 6 अक्टूबर को इसका भाव 1,20,920 रुपए प्रति 10 ग्राम था. इसके अलावा आज लखनऊ में सोना 1045 रुपए के उछाल के बाद 1,23,670 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया. मेरठ में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,23,680 रुपए प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट गोल्ड का भाव भी बढ़ा मंगलवार को वाराणसी के सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने की कीमत 1150 रुपए प्रति 10 ग्राम की बड़ी तेजी आई, जिसके बाद इसकी कीमत 1,12,000 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. इसके पहले 6 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,10,850 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. वहीं, 18 कैरेट सोने की कीमत आज 940 रुपए उछलकर 91,670 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई. चांदी ने फिर बनाया रिकॉर्ड 7 अक्टूबर को चांदी की कीमत ने फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया. सर्राफा बाजार खुलते ही मंगलवार को चांदी की कीमत में 1000 रुपए प्रति किलो की तेजी आई, जिसके बाद उसका भाव 1,57,000 रुपए प्रति किलो हो गया. इसके पहले 6 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,56,000 रुपए प्रति किलो थी.  अभी जारी रहेगी तेजी वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री रवि सर्राफ ने बताया कि बीते कुछ दिनों से सोने-चांदी की कीमत लगातार बढ़ रही है. बाजार के ट्रेंड को देखकर उम्मीद है कि आगे भी इसकी कीमतों में तेजी का दौर बना रहेगा.  

18,215 वाहनों का चालान किया गया, अपर पुलिस महानिदेशक से लेकर थाना प्रभारियों ने की फुट पैट्रोलिंग

योगी सरकार की यूपी पुलिस ने साढ़े आठ लाख वाहनों को किया चेक, 9 हजार से अधिक वाहनों से हटाई काली फिल्म 22 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच 71,473 स्थानों की 24,457 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने वाहनों की चेकिंग की 18,215 वाहनों का चालान किया गया, अपर पुलिस महानिदेशक से लेकर थाना प्रभारियों ने की फुट पैट्रोलिंग  लखनऊ योगी सरकार के मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत महिलाओं और बेटियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए गाड़ियों की काली फिल्म हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। यह अभियान 22 सितंबर से प्रदेशभर में चलाया गया, जो वर्तमान में भी चल रहा है। वहीं 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक साढ़े आठ लाख से अधिक वाहनों की चेकिंग की गयी। इसके साथ ही उच्च अधिकारियों अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक, उप महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी द्वारा अपनी टीम के साथ फुट पैट्रोलिंग की गयी।  2,817 हूटर और 1,087 बत्तियां वाहनों से हटाई गईं मिशन शक्ति 5.0 अभियान की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों द्वारा सड़क पर गाड़ियों की जांच की गयी। इस दौरान गाड़ियों की काली फिल्म को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इस दौरान 71,473 स्थानों की 24,457 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा 8,50,182 वाहनों की चेकिंग की गयी। अब तक 9,488 काली फिल्में हटाई जा चुकी हैं। इसके अलावा 2,817 हूटर और 1,087 बत्तियां भी हटाई गई हैं। यह कदम सड़क पर अपराधों को रोकने और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, गलत स्थान पर पार्क किए गए वाहनों के खिलाफ 18,215 चालान भी किए गए हैं, ताकि ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके और सड़क पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके। महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से वाहन पर शासकीय और जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है और 14,504 ऐसे मामले सामने आए हैं। अभियान के दौरान 3,38,305 व्यक्तियों को चेतावनी दी गयी।  263 स्टंटबाजों को किया गया गिरफ्तार एडीजी ने बताया कि वाहन नियमों का उल्लंघन करने पर 1,93,829 वाहनों का चालान किया गया है, जबकि 3,654 वाहनों को सीज भी किया गया है। कुल 251 पंजीकृत अभियोगों के साथ-साथ 450 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। इसके अलावा स्टंटबाजों के लिखाफ भी कड़ी कार्रवाई की गयी। इस दौरान 55,832 स्थानों की 21,324 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा 5,26,184 वाहनों की चेकिंग की गयी। अभियान के दौरान 770 स्टंटबाजी के मुकदमे दर्ज किये गये जबकि 263 स्टंटबाजों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही 31,609 वाहनों का चालान और 1,388 वाहनों को सीज किया गया। वहीं, मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत पुलिस विभाग द्वारा फुट पैट्रोलिंग भी की गयी ताकि सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके। इस पहल से पुलिस विभाग ने महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए अपनी तैनाती सुनिश्चित की है। प्रदेश के 57,265 स्थानों पर फुट पैट्रोलिंग की गयी। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक, उप महानिरीक्षक द्वारा 239 स्थानों, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक द्वारा 1,670 स्थानों, अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी द्वारा 9,616 और थाना प्रभारी द्वारा अपनी टीम के साथ 45,837 स्थानों पर फुट पैट्रोलिंग की गयी। फुट पैट्रोलिंग के दौरान 7,44,482 व्यक्तियों की चेकिंग की गयी जबकि पीआरवी द्वारा 52,039 स्थानों की पैट्रोलिंग की गयी।   

किसानों में बढ़ी भावांतर योजना की रुचि, MP में 61,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन; 17 अक्टूबर तक खुला है मौका

भोपाल  सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल है। मंडियों में अभी दर चार से साढ़े चार हजार रुपये के बीच है। किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए सरकार ने भावांतर योजना लागू की है। इसमें समर्थन मूल्य से कम दर पर उपज बिकती है तो अंतर की राशि सरकार देगी। यह सुविधा योजना में पंजीकृत किसानों को मिलेगी। अभी तक इसके लिए 61 हजार 970 किसानों ने ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया है। भावांतर योजना के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन 17 अक्टूबर तक होगा। भावांतर की अवधि 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक निर्धारित की है। इस अवधि में पंजीकृत किसानों द्वारा मंडियों में उपज समर्थन मूल्य से कम पर बिकती है तो सरकार भावांतर देगी। योजना लागू करने का दायित्व जिला प्रशासन को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि जिस तरह धान और गेहूं का उचित मूल्य दिलाया गया, वैसे ही सोयाबीन उत्पादक किसानों की चिंता की गई है। धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए 4.69 लाख पंजीयन उधर, समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए अभी तक 4.69 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। यह 10 अक्टूबर तक होगा। पिछले वर्ष 7.84 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केवल पंजीकृत किसानों से ही उपार्जन किया जाएगा, इसलिए समय पर पंजीयन करा लें। 5328 रुपए प्रति क्विंटल है सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। प्रदेश सरकार किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस तरह धान और गेहूं पर किसानों को उनके परिश्रम की कीमत दिलवाने का कार्य किया गया है, उसी तरह सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी लाभ दिलवाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें और हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए। मात्र तीन दिन में ही 61,970 किसानों ने कराया पंजीयन भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। भावांतर की अवधि 24 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 15 जनवरी 2026 तक रहेगी। पंजीकृत कृषक और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से होगी। भावांतर की राशि पंजीयन के समय दर्ज किसान के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी। उलेखनीय है कि प्रदेश में सोयाबीन खरीफ भावांतर भुगतान योजना अंतर्गत किसानों का पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल पर 3 से 17 अक्टूबर तक होगा। पंजीयन PACS /CSC/ MP किसान ऐप के माध्यम से कराए जाएंगे। योजना अंतर्गत सोयाबीन विक्रय अवधि दिनांक 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक रहेगी। किस जिले में कितने पंजीयन प्रदेश में सोयाबीन फसल के उपार्जन के लिए इंदौर जिले के 12 हजार 207, शाजापुर जिले के 11 हजार 731, उज्जैन जिले के 8 हजार 221, राजगढ़ जिले के 5 हजार 468, आगर मालवा जिले के 3540, देवास जिले के 2894, सीहोर जिले के 2331, विदिशा जिले के 2207, बड़वानी जिले के 1543, हरदा जिले के 1318, रतलाम जिले के 1241, खरगौन जिले के 1207, मंदसौर जिले के 999, दमोह जिले के 992, धार जिले के 899, रायसेन जिले के 801, सागर जिले के 799, बैतूल जिले के 748, नीमच जिले के 461, गुना जिले के 421, खंडवा जिले के 368, नरसिंहपुर जिले के 319, अशोक नगर जिले के 269, झाबुआ जिले के 215,‍छिंदवाड़ा जिले के 199, नर्मदापुरम जिले के 132, भोपाल जिले के 102, बुरहानपुर जिले के 75, शिवपुरी जिले के 49, उमरिया जिले के 44, अनूपपुर जिले के 41, छतरपुर जिले के 27, ग्वालियर जिले के 22, श्योपुर जिले के 20, बालाघाट जिले के 17, अलीराजपुर जिले के 16 किसानों ने पंजीयन कराया है।

सपा पर हमलावर रहे सीएम, बोले- इनके चेहरे दोहरे, यह हर कार्य को वोटबैंक की दृष्टि से देखते हैं

सफाई कर्मचारी के साथ अप्रिय घटना पर 35-40 लाख देने की करेंगे व्यवस्था: सीएम योगी महर्षि वाल्मीकि प्रकट दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  बोले-आपकी सुरक्षा समाज की सुरक्षा, आपका सम्मान भगवान वाल्मीकि की विरासत का सम्मान महापुरुषों की परंपरा के भाग्य विधाता हैं महर्षि वाल्मीकिः सीएम योगी  स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विदेशियों से कहा-तुम्हारी पहचान पहनावे से बनती है, लेकिन हमारी चरित्र से राम ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का कभी उल्लंघन नहीं कियाः योगी सीएम की वाल्मीकि समाज से अपील- बच्चों को पढ़ाइए, स्कूल भेजिए, वे योग्य होंगे तो समाज में नेतृत्व प्रदान करेंगे सामाजिक न्याय के पुरोधाओं के स्मारक को तोड़ने की धमकी देने वालों से भाजपा ने कहा था कि यूपी की जनता तुम्हें तोड़कर रख देगीः मुख्यमंत्री   सपा पर हमलावर रहे सीएम,  बोले- इनके चेहरे दोहरे, यह हर कार्य को वोटबैंक की दृष्टि से देखते हैं समाजवादी पार्टी के गुंडे लालापुर के आश्रम पर कब्जा कर रहे थे, हमने कहा कि गुंडों का नाम नोट करो, इनके बाप-दादाओं ने जो प्रॉपर्टी जमा की है, उसे आश्रम के नाम पर करवा डालोः योगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाल्मीकि समाज के लोगों से कहा कि आपकी सुरक्षा समाज की सुरक्षा है। आपका सम्मान भगवान वाल्मीकि की विरासत का सम्मान है। सीएम ने इस दौरान उन्हें खुशखबरी भी दी और कहा कि अभी बड़ा कार्य करने जा रहे हैं। सफाई, संविदा कर्मचारी को अब आउटसोर्सिंग कंपनी नहीं, बल्कि सरकार का कॉरपोरेशन सीधे अकाउंट में पैसा देगा। स्वच्छता कर्मियों को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा का कवर भी देंगे। जब अकाउंट में कॉरपोरेशन से पैसा आएगा तो यह व्यवस्था करेंगे कि दुर्भाग्य से किसी सफाई कर्मचारी के साथ घटना-दुर्घटना हुई या वह आपदा की चपेट में आ गया तो बैंक से बात करेंगे कि बैंक के माध्यम से 35-40 लाख रुपये देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। यूपी के 80 हजार होमगार्ड को यह कवर दे दिया गया है। अब सफाई कर्मचारियों को इस व्यवस्था से जोड़ने जा रहे हैं।  सीएम योगी मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित महर्षि वाल्मीकि प्रकट दिवस समारोह में शामिल हुए। सीएम ने भगवान वाल्मीकि की जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। कार्यक्रम में लघु फिल्म भी दिखाई गई।  चरित्र से युक्त व्यक्ति ही लोककल्याण व राष्ट्र कल्याण का माध्यम बन सकता है सीएम योगी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारत के महापुरुषों की परंपरा के भाग्य विधाता हैं। तप और साधना से तपे हुए ऋषि को जब लेखनी चलानी थी, तब लोककल्याण व मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने और नई कृति की रचना के लिए उन्होंने हजारों वर्ष पहले देवर्षि नारद से प्रश्न किया कि चरित्र से युक्त कौन ऐसा व्यक्ति है, जिसके बारे में मैं कुछ लिख सकूं, क्योंकि महर्षि वाल्मीकि जानते थे कि चरित्र से युक्त व्यक्ति ही लोककल्याण व राष्ट्र कल्याण का माध्यम बन सकता है। स्वामी विवेकानंद जब शिकागो की धर्मसभा में गए तो उनकी वेशभूषा देख विदेशी हंस रहे थे। तब उन्होंने कहा कि तुम्हारी पहचान पहनावे से बनती है, लेकिन हमारे देश और हमारी पहचान चरित्र से बनती है। हमारे लिए चरित्र महान है।  भगवान वाल्मीकि का कृतज्ञ है मानव समाज सीएम योगी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण लिखते समय उन्होंने पूरी कथा को राम पर आधारित किया। उन्होंने यह भी बताया कि राम को क्यों आधार बनाया, क्योंकि राम ही साक्षात धर्म हैं। मानव समाज भगवान वाल्मीकि का कृतज्ञ है। जब भी किसी भारतीय के मन में संदेह पैदा होता है तो महर्षि वाल्मीकि ने हर स्थिति में जो आदर्श रखा, वह मर्यादा पुरुषोत्तम राम का था। उन्होंने राम के चरित्र को दिया, जो हर काल, देश, परिस्थिति में प्रासंगिक है। भाई-भाई, पिता-पुत्र, मां-बेटे, राजा-प्रजा में क्या रिश्ते होने चाहिए, उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम कहकर यह भाव भरा। राम ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का कभी उल्लंघन नहीं किया।  भारत के देवतुल्य ऋषियों की परंपरा ने सभी कालखंड में समाज का किया मार्गदर्शन  सीएम योगी ने कहा कि भगवान वाल्मीकि की फोटो लगाकर आज हर देव मंदिर में अखंड रामायण पाठ चल रहा है। सीएम ने अपील की कि महर्षि वाल्मीकि का चित्र हर भारतीय के घर में होना चाहिए। भारत का हर कथावाचक सबसे पहली वंदना भगवान वाल्मीकि की करते हैं। वह जिस पीठ पर बैठते हैं, वह सबसे पवित्र व्यास पीठ कही जाती है। भारत के देवतुल्य ऋषियों की परंपरा ने सभी कालखंड में समाज का मार्गदर्शन किया। रामायण कालखंड में महर्षि वाल्मीकि, महाभारत कालखंड में महर्षि वेदव्यास, मध्यकाल में सद्गुरु रविदास और देश जब आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तो बाबा साहेब समाज का मार्गदर्शन करते दिखाई देते थे। सभी की दृष्टि एक है। पीएम मोदी इसे एक भारत-श्रेष्ठ भारत, सबका साथ और सबका विकास कहते हैं। सीएम ने कहा कि रामराज्य वही है, जहां जाति, मजहब, संप्रदाय के नाम पर भेदभाव न हो। आज यही कार्य भाजपा की डबल इंजन सरकार कर रही है। वोटबैंक के नाम पर जाति का सहारा लेने वालों पर हमलावर रहे सीएम  मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग राम को गाली देते हैं, वे भगवान वाल्मीकि का अपमान करते हैं। भगवान वाल्मीकि का अपमान करने वाले भगवान राम का भी अपमान करते हैं। उन्होंने वोटबैंक के नाम पर जाति का सहारा लेने वालों पर हमला किया। सीएम ने कहा कि 2012 में जब सपा सरकार आई थी तो सामाजिक न्याय के पुरोधाओं के स्मारक को तोड़ने की धमकी दी थी, तब भाजपा ने कहा था कि इन स्मारकों को तोड़ने वालों को यूपी की जनता तोड़कर रख देगी। आज यह लोग प्रत्येक प्रेसवार्ता में बाबा साहेब का स्मरण करते हैं, लेकिन तब सपा के मुख्यमंत्री ने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से बाबा साहेब का नाम बदल दिया था। हमने फिर उसे बाबा साहेब के नाम पर रख दिया। लखनऊ का भाषा विश्वविद्यालय मान्यवर कांशीराम के नाम पर था, सपा ने उसे भी बदल दिया। सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का नाम भी बदल दिया। इनके दोहरे चेहरे हैं। यह हर कार्य को वोटबैंक की दृष्टि से देखते हैं।  लालापुर के आश्रम पर कब्जा कर रहे थे सपा के गुंडे सीएम ने कहा कि यह राम व कृष्ण का विरोध करते हैं। विपक्षी … Read more

मध्यप्रदेश में सिरप से हुईं मासूमों की मौतें, अब सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका के जरिए CBI जांच की मांग

भोपाल  मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले एसआईटी जांच के बाद अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और पूछताछ की मांग की गई है। अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि प्रवीण ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार विषैले सिरप बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं, उन्हें बंद किया जाए और उनके उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का इंतजाम किया जाए. साथ ही, देश में एक सख्त 'ड्रग रिकॉल पॉलिसी' बनाई जाए. दवाओं में प्रयुक्त खतरनाक रसायन डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं.बच्चों की मौत के मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर करके जांच कराई जाए, ताकि जांच में समन्वय बना रहे.याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की गलती का नहीं, बल्कि देश की ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की विफलता का है, जिसकी वजह से कई राज्यों में मासूमों की जान गई है. औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा प्रकरण के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   जब्त किए जाए मौजूदा कफ सिरफ का स्टॉक वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग/विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की गई है। जगह-जगह बैन किए गए मौजूदा कोल्ड्रिफ कफ सिरफ के सभी स्टॉक को जब्त करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि सभी FIR की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कफ सिरप के निर्माण, रेगुलेशन, टेस्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जांच और पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जाए। सबसे ज्यादा एमपी के छिंदवाड़ा में बच्चों की गई जान बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक दोनों राज्यों में कुल 18 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें से 16 मौतें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में और 2 राजस्थान के भरतपुर व सीकर में दर्ज की गई हैं।  जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बन रहा है।  जानिए अब तक क्या हुआ एक्शन? केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर तत्काल जांच और नकली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

जशपुर को सीएसआर फंड से बड़ी मदद, पहली बार 61 करोड़ मंजूर – विकास की नई ऊँचाइयों की ओर जिला

रायपुर : सीएसआर फंड से जशपुर को 61 करोड़ रूपए मिला पहली बार : अस्पताल और तीरंदाजी केंद्र और स्कूल भवनों का होगा निर्माण 6 करोड़ 19 लाख से होगा आठ स्कूलों भवनों का निर्माण दो साल में विकास की नई उंचाई छू रहा है जिला जशपुर  रायपुर पहली बार सीएसआर फंड से 61 करोड़ की राशि विकास कार्याे के लिए जशपुर जिले को आबंटित की गई है। इस राशि से जिले में स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और खेल के बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए उपयोग किया जा रहा है। लगभग दो साल पहले जब जशपुर के बगिया के लाल विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का पदभार सम्हाला था तो जिलेवासियों को पिछड़ेपन से मुक्ति की नई उम्मीद जागी थी। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले जिला प्रवास के दौरान सीएम विष्णुदेव साय ने जिलेवासियों को वायदा भी किया था कि जिले के विकास की ऐतिहासिक रोडमैप तैयार की जाएगी। अपने इस वायदे को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने तेजी से कदम बढ़ा रहे है। लगभग दो साल पहले जब जशपुर के बगिया के लाल विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का पदभार सम्हाला था तो जिलेवासियों को पिछड़ेपन से मुक्ति की नई उम्मीद जागी थी। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले जिला प्रवास के दौरान सीएम विष्णुदेव साय ने जिलेवासियों को वायदा भी किया था कि जिले के विकास की ऐतिहासिक रोडमैप तैयार की जाएगी। अपने इस वायदे को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने तेजी से कदम बढ़ा रहे है। 35 करोड़ से बन रहा है आधुनिक अस्पताल           35 करोड़ की लागत से जिला मुख्यालय जशपुर में सौ बिस्तर की क्षमता वाली अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन स्व. जगदेव राम उरांव स्मृति चिकित्सालय को संचालित करने की जिम्मेदारी वनवासी कल्याण आश्रम को दी गई है।  इस अस्पताल भवन के निर्माण का कार्य रायगढ़ रोड में कल्याण आश्रम अस्पताल के प्रांगण में तेजी से चल रहा है। स्वीकृत राशि मेें से 17 करोड़ का प्रावधान किया गया है। अगले साल 2026 तक इस भवन का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार 18 करोड़ की राशि इस आधुनिक अस्पताल में आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों और भौतिक संसाधन जुटाने के लिए किया जाएगा। इस अस्पाताल में मरीजों के लिए सीटीस्कैन, एमआरआई, आईसीयू, आईसीसीयू, डायलिसिस, आपातकालीन चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अस्पताल के लिए चिकित्सक, नर्सिंग और प्रशासनिक स्टाफ के लिए भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है। अस्पताल के चालू हो जाने से जिलेवासियों को उपचार के लिए अंबिकापुर, रांची, झारसुगड़ा, रायपुर जैसे दूरस्थ शहर की दौड़ लगाने से मुक्ति मिल सकेगी।  20 करोड़ से तैयार होगा तीरंदाजी केंद्र           जिले में तीरंदाजी केंद्र के निर्माण के लिए सीएसआर फंड से 20.53 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। एनटीपीसी के सीएसआर फंड से इस तीरंदाजी केंद्र के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने सन्ना में जमीन तय कर ली है। इस आवासीय तीरंदाजी केंद्र में खिलाड़ियों को आधुनिक संसाधनों के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का लक्ष्य दिवंगत कुमार दिलीप सिंह जूदेव के सपने का मूर्त रूप देते हुए पहाड़ी कोरवाओं के धर्नुविद्या को निखार कर राष्ट्रीय ओैर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं येाग्य बनाना है। वर्तमान में खनिज न्यास निधि के सहयोग से एकलव्य अकादमी का संचालन किया जा रहा है। इस अकादमी में तीरंदाजी के साथ ताईक्वांडो और तैराकी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सन्ना में तीरंदाजी केंद्र के शुरू हो जाने से जिले के खिलाड़ियों को आधुनिक संसाधनों से लैस बड़ी सुविधा मिल सकेगी, जिससे खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा की चमक बिखेरने का अवसर मिल  सकेगा।  आठ स्कूल भवन का होगा निर्माण            सीएसपीटीसीएल के सीएसआर फंड से जिले में 8 स्कूल भवनों के निर्माण के लिए 6 करोड़ 19 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें फरसाबहार ब्लाक में पंडरीपानी, गारीघाट, कंदईबहार, कांसाबेल ब्लाक में बांसबहार, कुनकुरी ब्लाक में गिनाबहार, लोधमा, बगीचा ब्लाक में टटकेला और दुलदुला में नया स्कूल भवन का निर्माण किया जाएगा। इन स्कूल भवनों के निर्माण से जिले के छात्रों को बेहतर सुविधा के साथ गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सकेगी।

कतर में भी चलेगा भारत का UPI, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बोले- \’द्विपक्षीय संबंधों की नई ऊंचाई\’

नई दिल्ली भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) का डंका दुनिया में बज रहा है. अब इसका इस्तेमाल करने वाले देशों की लिस्ट में कतर भी शामिल हो गया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने राजधानी दोहा के लुलु मॉल में यूपीआई सिस्टम लॉन्च किया. मतलब अब वहां आसानी से क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट किया जा सकता है. इस लॉन्च के मौके पर उन्होंने कहा कि यूपीआई न सिर्फ डिजिटल पेमेंट का एक तरीका है, बल्कि ये भारतीय इनोवेशन और तकनीक की ताकत का प्रतीक भी है.  भारत-कतर की बढ़ती साझेदारी का प्रतीक दो दिवसीय कतर दौरे के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वहां यूपीआई सिस्टम लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि कतर में UPI से पेमेंट भारत की टेक्नोलॉजी और दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी का उदाहरण है. इसके साथ ही ये दोनों देशों के बीच भरोसे को भी दर्शाता है. उन्होंने यूपीआई के बढ़ते दायरे के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भारत में जहां 85% डिजिटल पेमेंट इस सिस्टम के जरिए होते हैं, तो दुनियाभर में करीब 50% डिजिटल पेमेंट भी यूपीआई से हो रहे हैं.  कतर नेशनल बैंक (QNB) ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई के साथ साझेदारी में अपने मर्चेंट क्लाइंट्स के लिए पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनलों पर QR कोड-आधारित यूपीआई पेमेंट की सर्विस शुरू की है. कतर में LuLu आउटलेट्स पर अब भारतीय पेमेंट सिस्टम के जरिए लेन-देन स्वीकार किए जाने के साथ, भारत से आने वाले पर्यटक आसान और अधिक सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का आनंद कतर में भी ले सकते हैं, जिससे नकदी ले जाने या मुद्रा विनिमय का प्रबंधन करने की आवश्यकता कम हो जाती है. भारत दुनिया में सबसे तेज अर्थव्यवस्था लुलु रिटेल के ग्रुप डायरेक्टर मोहम्मद अल्ताफ ने कहा कि दुनिया की वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए, कतर और भारत के बीच संबंध बहुत खास हैं. कतर ने विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, इसके पास एक विश्व स्तरीय हवाई अड्डा और एक ओपन मार्केट भी है, जिसमें भारतीय कंपनियों का भी स्वागत है. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और भारत-कतर के बीच बहुत अच्छा तालमेल है. यह एक पारंपरिक, लेन-देन वाला व्यावसायिक संबंध है, और दोनों देश इसे आगे ले जाना चाहते हैं. द्विपक्षीय व्यापार संबंध बढ़ाने पर जोर एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोहा में यूपीआई लॉन्च करने के साथ ही केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कतर के वाणिज्य-उद्योग मंत्री महामहिम शेख फैसल बिन थानी बिन फैसल अल थानी के साथ एक बैठक भी की. इसमें आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग पर बातचीत की गई. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इससे जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए पीयूष गोयल ने बताया, 'दोनों पक्षों ने मजबूत द्विपक्षीय व्यापार के आधार पर भारत-कतर साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.' 

संगठनों का समर्थन सरकार के सुधार प्रयासों को मिल रहा बल

स्थितियों के सुधार के लिये किये जा रहे प्रयासों में सभी संगठन सरकार के साथ वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के सदस्यों-पदाधिकारियों के साथ औषधियों के उपयोग पर हुआ विमर्श केंद्र व राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें भोपाल  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राज्य कार्यालय में आहूत बैठक में वर्तमान परिस्थियों के परिपेक्ष्य में शिशुओ व बच्चों को चिकित्सकों द्वारा लिखे जा रहे तथा बाजार में उपलब्ध विभिन्न औषधियों विशेषकर संयोजन औषधियों (काम्बिनेशन मेडिसिन्स) के उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियों केंद्र व राज्य सरकार तथा विभिन्न चिकित्सा संगठनो यथा इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों तथा शिशु रोग विशेषज्ञों ने प्रदेश में हुई बच्चों की दुखद मृत्यु पर दुख व्यक्त किया। शिशु रोग विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार द्वारा स्थितियों के सुधार के किये जा रहे प्रयासो में सभी संगठन सरकार के साथ हैं। उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने सभी सुझावो को ध्यान से सुनते हुए शासकीय दिशा निर्देशो में आवश्यकतानुसार उन्हे शामिल किये जाने की बात कही। उन्होने छिंदवाडा की घटना पर दुख व्यक्त करते हुये तथा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इस घटना के सभी पहलुओ की जांच करवाई जा रही हैं और सभी दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी। साथ ही उन्होने यह भी कहा कि केंद्रीय व राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशो का पालन करवाने में इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ की मदद से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता हैं। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे संस्थाओ में शामिल तकनीकी विशेषज्ञ सुदूर इलाकों में मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं। प्रमुख सचिव  संदीप यादव ने बताया कि छिदवाडा में बच्चों की दुखद मृत्यु के सभी कारणों का गहन परीक्षण करवाया गया है। इसमें भोज्य पदार्थो, पेय जल के साथ साथ विभिन्न औषधियों की जांचे शामिल हैं। जैसा कि बच्चो के रीनल बायोप्सी रिर्पोट से ज्ञात हुआ है कि बच्चो की मृत्यु एक्यूट टयूबुलर नेक्रोसिस के कारण हुये एक्यूट रीनल फेल्योर के कारण हुई है जो किसी रासायनिक टाक्सीसिटी की ओर इशारा करती हैं। इसके बावजूद बच्चों में किसी बैक्टीरियल-वायरल-अन्य संक्रमणों के कारण एक्यूट रीनल फेल्योर की आशंकाओ की भी विस्तृत जांच करवाई गई। घटना में यह पाया गया कि विषाक्त रसायन कफ सीरप में उपस्थित था जिसका विक्रय अपना मेडिकल स्टोर, स्टेशन रोड, परासिया द्वारा किया जा रहा था। यह मेडिकल स्टोर मती ज्योति सोनी के नाम पर पंजीकृत था। यह भी पाया गया कि मेडिकल स्टोर में औषधियों के विक्रय हेतु कोई पंजीकृत फार्मासिस्ट भी उपलब्ध नहीं था इससे स्पष्ट हैं कि बिना किसी औषधि भण्डारण व वितरण के जानकारी वाले तकनीकी व्यक्ति के स्थान पर अनाधिकृत व तकनीकी तौर पर इसके लिये अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा औषधियों का भण्डारण व वितरण किया जा रहा था। दोषी पाये जाने से इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर इसे सील कर दिया गया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि यह पूरा परिसर डा प्रवीण सोनी के आधिपत्य में था तथा उनकी सहमति से यह अवैधानिक कार्य जारी था अत: उनके विरूद्ध भी विधिसम्मत कार्यवाही की जा रही हैं। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षो में जारी निर्देशो की वृहद जानकारी दी गयी। बताया गया कि भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा दिसम्बर 2023 में क्लोरफेनरामीन मैलिएट 2 एमजी + फेनिलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड 5 एमजी के संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) को वर्ष 2023 में ही 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त्त भारत शासन के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा अक्टूबर 2025 में पत्र जारी कर बच्चों में कफ सीरप के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक द्वारा चिंता व्यक्त करते हुये कहा गया कि औषधियों के काउंटर विक्रय को नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता हैं। शिडयूल एच ड्रग केवल चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी भी फार्मेसी में बनने वाली औषधियों के प्रत्येक बैच की जांच होनी आवश्यक है। डॉ. राकेश मिश्रा द्वारा 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चो में संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) के प्रतिबंध को पूर्ण तौर पर पालन करवाने पर बल दिया गया। इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. महेश माहेश्वरी द्वारा जानकारी दी गई कि संयोजन औषधि (काम्बिनेशन मेडिसिन) और अन्य औषधियों के तर्कसंगत प्रयोग हेतु इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स की राष्ट्रीय एवं राज्य शाखा द्वारा पूर्व से ही निर्देश जारी किये जा चुके हैं। समय-समय पर आवश्यकतानुसार इनमें संशोधन किया जाता रहा हैं। इन्होने भरोसा दिलाया कि यदि शासन अपने दिशा निर्देशो में संशोधन हेतु तकनीकी सहायता चाहेगा तो इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स इसके लिये सहर्ष तैयार हैं। उन्होने इस हेतु केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा जारी सर्कुलर्स का समर्धन किया तथा इसके क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन भी दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। शिशु रोग विशेषज्ञो में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से डॉ. शिखा मलिक, इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डा महेश माहेश्वरी, सचिव डॉ. दिनेश मेकले, डॉ. अम्बर कुमार, डॉ. भुपेश्वरी पटेल, गांधी चिकित्सा महाविद्वलय के डॉ. मंजूशा गुप्ता, डॉ. राकेश टिक्कस और निजी चिकित्सक डॉ. राकेश मिश्रा, राकेश सुखेजा, डॉ. श्रुति सरकार, डॉ. गुफरान अहमद, डॉ. राहुल खरे समेत बड़ी संख्या में शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।