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विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री

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रायपुर : दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है – राज्यपाल  डेका राम ने युद्ध में जीत हासिल इसीलिए की क्योंकि वे सत्य के साथ थे – मुख्यमंत्री  साय विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री रायपुर राजधानी रायपुर के डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी के विशाल मैदान में इस वर्ष भी परंपरा और आस्था के साथ भव्य दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया। 55 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह उत्सव इस बार और भी ऐतिहासिक रहा, जिसमें राज्यपाल  रमेन डेका, राज्य की प्रथम महिला मती रानी डेका काकोटी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय विशेष रूप से शामिल हुए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल   रमेन डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ आज नक्सलवाद से बाहर निकलते हुए शांति और विकास की ओर अग्रसर है। प्रदेश की जीडीपी वृद्धि और देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में जनता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतिम व्यक्ति का उत्थान ही वास्तविक विकास है और यही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की परिकल्पना भी थी। राज्यपाल ने विजयादशमी का संदेश स्पष्ट करते हुए कहा कि यह पर्व केवल रावण दहन का नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है। रावण चाहे कितना भी बलवान क्यों न रहा हो, उसके अहंकार का अंत हुआ और जीत सत्य की हुई। बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छाई हमेशा विजयी होती है। उन्होंने कहा कि हमें केवल मैदान में रावण का पुतला नहीं जलाना चाहिए, बल्कि अपने भीतर के रावण काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और घमंड—को भी समाप्त करना होगा। यही सही अर्थों में दशहरा पर्व का पालन होगा। गांधी जयंती का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दशहरा हमें बुराई का अंत करने की शिक्षा देता है और गांधी जयंती हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। जब ये दोनों विचार साथ आते हैं तो समाज में प्रेम, भाईचारा और शांति कायम होती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने भगवान राम, माता सीता और सनातन धर्म की जयकार के साथ सभा को विजयादशमी की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि डब्ल्यू.आर.एस.कालोनी दशहरा उत्सव समिति इस आयोजन को भव्य रूप से संपन्न करती आ रही है और यह उत्सव अब ऐतिहासिक स्वरूप ले चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण के पास मेघनाद और कुंभकरण जैसे शक्तिशाली योद्धा थे, जबकि राम के साथ साधारण वानर सेना थी। इसके बावजूद विजय राम की हुई क्योंकि वे सत्य के साथ थे। इस अवसर पर कृषि मंत्री  राम विचार नेताम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। स्वागत भाषण विधायक  पुरंदर मिश्रा ने और आभार प्रदर्शन आयोजन समिति के अध्यक्ष  जी. स्वामी ने किया। समारोह में 103 फीट ऊँचे रावण के पुतले का दहन इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। रंगीन आतिशबाजी और भव्य प्रस्तुति देखने हजारों लोगों की भीड़ मैदान में उमड़ी। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि,  सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। समिति की सदस्य मती सरस्वती मिश्रा ने प्रथम महिला रानी डेका काकोटी को विशेष स्मृति चिन्ह प्रदान किया।

इंदौर पुलिस का चेटबॉट लॉन्च, मुख्यमंत्री ने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर की शुरुआत

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर लांच किया इंदौर पुलिस का चेटबॉट इंदौर पुलिस ने बनाया एआई आधारित सायबर सेफ क्लिक चेटबॉट इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के अवसर पर नागरिकों की सुरक्षा और यातायात सुगमता के लिए इंदौर पुलिस द्वारा तैयार किये गए एआई बेस्ड चेटबॉट सेफ क्लिक को लांच किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर आधिकारिक रूप से नागरिकों के लिए यह सेवा प्रारम्भ की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर बचाव के लिए यह अत्याधुनिक तकनीक नागरिकों को सूचना देने और विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त करने में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। यह सेवा देने वाला मध्यप्रदेश में इंदौर पहला शहर है। अभी इंदौर पुलिस यातायात और सुरक्षा क्षेत्र में इस तकनीक का भी उपयोग करेगी।  आगे इस तकनीक को अन्य क्षेत्र में भी उपयोगी बनाया जाएगा। पुलिस कमिश्नर  संतोष सिंह ने कहा कि एआई आधारित यह चेटबॉट ओपन सोर्स से इनफार्मेशन प्राप्त करेगा। इस चेटबॉट में नागरिक बोलकर या टाइप कर सेवा ले सकेंगे। कार्यक्रम में सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त  दिलीप कुमार यादव, विधायकगण सर्व महेन्द्र हार्डिया, मती मालिनी गौड़,  मधु वर्मा तथा  गोलू शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष मती रीना मालवीय,  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा एवं  श्रवण चावड़ा  सहित अनेक जनप्रतिनिधि विशेष रूप से मौजूद रहे।

भारी बारिश की तैयारी: 3 और 4 अक्टूबर को 16 जिलों में पानी बरसने के आसार

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इंदौर  मध्यप्रदेश से विदा हो रहा मानसून जमकर बरस रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। इसके अलावा एक ट्रफ भी गुजर रही है और एक पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभावी हो रहा है। इसका असर 3 और 4 अक्टूबर से ज्यादा देखने को मिल सकता है। इस कारण प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, नर्मदापुरम, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं गुरुवार को भी प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश(Heavy Rain) का अलर्ट है। 3 अक्टूबर को इन जिलों में भारी बारिश मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अक्टूबर को एमपी के बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिले में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का अलर्ट है।   4 अक्टूबर को इन जिलों में भारी बारिश मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अक्टूबर को एमपी के हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में भारी बारिश(Heavy Rain)का यलो अलर्ट है। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं प्रदेश के बाकी जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का अलर्ट है। इन जिलों से विदा हुआ मानसून अब तक एमपी के 12 जिलों से मानसून की विदाई हो चुकी है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम शामिल हैं। वहीं राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा।   अक्टूबर में ऐसा रह सकता है मौसम का मिजाज अक्टूबर माह मौसम का संक्रमण काल कहलाता है, इसलिए इस माह में मौसम मिला जुला रहने की संभावना है। विंड पैटर्न में बार-बार बदलाव होगा। ऐसे में पूरे माह तापमान का उतार चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में सेहत के प्रति सावधानी बरतने की ज्यादा जरूरत होती है। क्योंकि यह मौसम का संक्रमणकाल होता है।

सरकार का स्मार्ट कदम: ई-कचरा और कबाड़ बेचकर 696 लाख वर्ग फुट क्लीन, ₹3296 Cr की कमाई

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नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से 3,296.71 करोड़ रुपए कमाए हैं, जबकि पिछले चार वर्षों में 696.27 लाख वर्ग फुट से अधिक ऑफिस स्पेस को साफ किया गया है और उपयोग में लाया गया है। राष्ट्रीय राजधानी के नेहरू पार्क में विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान से शासन और सार्वजनिक सेवाओं में स्पष्ट बदलाव आए हैं। 12 लाख से अधिक जगहों की हुई सफाई डॉ सिंह ने बताया कि अभियान के पिछले चरणों के दौरान 137.86 लाख से ज्यादा पुरानी फाइलों को हटाया गया है और देश भर में 12.04 लाख से अधिक जगहों की सफाई की गई है। केंद्रीय मंत्री ने इन परिणामों को प्राप्त करने में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) और अन्य विभागों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इस कार्यक्रम में श्रमदान गतिविधियों, एक पेड़ मां के नाम पहल के तहत वृक्षारोपण अभियान और पुरानी फाइलों की सफाई में भी भाग लिया। 'स्वतंत्र भारत में शासन की एक अनूठी सफलता' विशेष स्वच्छता अभियान को स्वतंत्र भारत में शासन की एक अनूठी सफलता की कहानी बताते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला कार्यान्वयन चरण स्वच्छता अभियानों को संस्थागत बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और सरकारी कार्यालयों में दक्षता में सुधार लाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि लाल किले से प्रधानमंत्री के आह्वान ने स्वच्छता को एक व्यवहारिक परिवर्तन में बदल दिया है जिसे देश भर के घरों और समुदायों ने अपनाया है। बांटी गयी सुरक्षा किट और मिठाइयां डॉ. सिंह ने अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाए रखने में सफाई कर्मियों की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए, सुरक्षा किट और मिठाइयां वितरित करके सफाई मित्रों को सम्मानित भी किया। मंत्री ने आगे कहा कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने कार्यान्वयन चरण के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य पहले ही अपलोड कर दिए हैं, जिनमें समीक्षा के लिए लगभग 6.9 लाख जन शिकायतें, 26.9 लाख से अधिक फिजिकल फाइलें और समीक्षा के लिए पहचानी गई 5.2 लाख से अधिक ई-फाइलें शामिल हैं।   एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 10 अक्टूबर को सुशासन और अभिलेख नामक एक प्रदर्शनी भी लगाएगा, जिसमें पूर्व विशेष अभियानों के दौरान प्राप्त ऐतिहासिक रूप से मूल्यवान अभिलेखों को प्रदर्शित किया जाएगा। विशेष अभियान 5.0 के अगले चरण में प्रवेश करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि यह स्वच्छता, पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, साथ ही महात्मा गांधी की नागरिक जिम्मेदारी और सामूहिक कार्रवाई की विरासत को आगे बढ़ाता है।

मध्य प्रदेश का बड़ा कदम: कॉलेजों में WhatsApp बंद, अब संवाद के लिए आएगा भारतीय एप ‘अरत्तई’

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ग्वालियर वॉट्सएप की जगह स्वदेशी 'अरत्तई' एप लेने जा रहा है। मध्य प्रदेश में संगीत एवं कला के एक मात्र शैक्षणिक संस्थान ग्वालियर स्थित राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध लगभग 170 कॉलेजों में यह बदलाव किया जा रहा है। इसके मूल में केंद्र सरकार का स्वदेशी अपनाने का आह्वान है। अब कॉलेज स्तर पर की जाने वाली सूचना के आदान प्रदान के लिए सिर्फ 'अरत्तई' एप का उपयोग किया जाएगा। यह निर्णय संस्थान के कुलसचिव अरुण चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद लिया है। अब संस्थान में होने वाले आधिकारिक सूचना व दस्तावेजों का आदान प्रदान, छात्रों के मार्गदर्शन के लिए ग्रुप बनाना यह सभी काम पूरी तरह से इसी एप पर होंगे। छात्रों से जुड़ी हर अपडेट को अरत्तई पर बने ग्रुप में ही साझा किया जाएगा इस लिहाज से भी छात्र इसका उपयोग शुरू करेंगे। प्रबंधन का कहना है कि किसी अन्य एप से दस्तावेजों का आदान प्रदान स्वीकार नहीं किया जाएगा।   क्या है 'अरत्तई' अरत्तई भारतीय मैसेजिंग एप है, जिसे जोहो कॉर्पोरेशन ने 2021 में लान्च किया था। अरत्तई एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है बातचीत या गपशप। यह वाट्सएप के भारतीय विकल्प के रूप में विकसित किया गया है। इसमें टेक्स्ट मैसेज, फोटो, वीडियो, दस्तावेज शेयरिंग, साथ ही वाइस और वीडियो कालिंग की सुविधा मिलती है। ग्रुप चैट, स्टिकर्स और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी विशेषताएं इसे सुरक्षित और उपयोगी बनाती हैं। सबसे खास बात, इसका डेटा भारत में ही स्टोर होता है, जिससे यूजर्स को अधिक प्राइवेसी और भरोसा मिलता है। अगले सप्ताह से यह चलन में आ जाएगा स्वदेशी अपनने के क्रम में विश्वविद्यालय यह बदलाव पूरे प्रदेश के स्तर पर करने जा रहा है। वॉट्सएप के उपयोग को पूरी तरह से बंद किया जा रहा है। अगले सप्ताह से यह चलन में आ जाएगा। – अरुण चौहान, कुलसचिव, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय।

मौसम विज्ञानियों ने चेताया: छत्तीसगढ़ में अगले हफ्ते भारी बारिश, बन सकता है नया रिकॉर्ड

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रायपुर देश के कई इलाकों से मानसून की विदाई शुरू हो गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस बार इसकी वापसी एक सप्ताह देर से होगी। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में 20 अक्टूबर तक बारिश का सिलसिला चलता रहेगा। बीते पांच वर्षों में मानसून आमतौर पर 12 अक्टूबर के आसपास विदा होता रहा है। इस बार लौटने में देरी से मौसम का मिजाज भी बदला-बदला रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 15 अक्टूबर से नार्थ ईस्ट मानसून सक्रिय होगा। इसके बाद ही धीरे-धीरे दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी होगी। बरसात की यह बढ़ी हुई अवधि धान की फसलों के लिए राहत मानी जा रही है। खेतों में नमी बने रहने से फसल अच्छी तरह पक सकेगी। हालांकि लगातार वर्षा से कटाई में देरी हो सकती है।   इस बार समय से पहले आया था मानसून छत्तीसगढ़ में 28 मई को बस्तर से मानसून की दस्तक होती है। पूरे देश में अब बारिश अंतिम दौर में है। मौसम विभाग के मुताबिक, छत्तीसगढ़ से अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक मानसून पूरी तरह से विदा हो जाता है। इस बार विदाई तक कई जिलों अच्छी बारिश हो सकती है। बीते पांच वर्षों के आंकड़े देखें तो 10 से 12 अक्टूबर तक मानूसन की वापसी होती है। हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की भी चेतावनी पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर बना चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के साथ सक्रिय है, जो अगले 12 घंटे में अवदाब और बाद में गहरा अवदाब बनकर तीन अक्टूबर की सुबह दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र तट पार कर सकता है। इसके असर से दो को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है। तीन को दक्षिण अंचल में भारी से अति भारी बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। चार को मध्य भाग में कहीं-कहीं भारी बारिश होगी।

मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए रेलवे में रोजगार: 1149 रिक्तियों के लिए आवेदन शुरू

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ग्वालियर रेलवे में नौकरी का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पूर्व मध्य रेलवे ने अप्रेंटिस के 1149 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात यह है कि इस भर्ती में न तो लिखित परीक्षा होगी और न ही इंटरव्यू। आवेदन की शुरुआत हो चुकी है। अंतिम तिथि 25 अक्टूबर रखी गई है। ओबीसी और जनरल को ₹100 फीस देनी होगी। वहीं एससी, एसटी, महिला, पीडब्ल्यूबीडी के निश्शुल्क रखा गया है। किन ट्रेड्स में भर्ती होगी फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, रेफ्रिजरेशन एंड एसी मैकेनिक, फार्जर एंड हीट ट्रीटर, कारपेंटर, इलेक्ट्रानिक्स मैकेनिक, पेंटरइलेक्ट्रीशियन, वायरमैन। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। साथ ही संबंधित ट्रेड में आइटीआइ डिग्री होना जरूरी है। आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 24 साल तय की गई है। वहीं ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को तीन साल की छूट, एससी, एसटी उम्मीदवारों को पांच साल की छूट और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को श्रेणी अनुसार 10 से 15 साल तक की आयु छूट दी जाएगी।   चयन प्रक्रिया इस भर्ती में किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं होगा। चयन पूरी तरह मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा। मेरिट लिस्ट उम्मीदवारों के 10वीं कक्षा और आईटीआई में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। स्टाइपेंड चयनित उम्मीदवारों को अप्रेंटिस अवधि के दौरान प्रतिमाह ₹7700 से ₹8050 तक का स्टाइपेंड दिया जाएगा।

हातोद से इंदौर तक ट्रैक्टर मार्च: किसानों की बड़ी आवाज़ ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के खिलाफ

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इंदौर इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित 48 किमी लंबे ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के खिलाफ किसानों का विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन किसी भी कीमत पर सड़क निर्माण के लिए नहीं देंगे। पहले चरण में कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद अब किसान सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। आठ अक्टूबर को हातोद से इंदौर के कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। इसमें एक हजार से अधिक ट्रैक्टर शामिल होंगे। किसान कलेक्ट्रेट का घेराव कर ज्ञापन सौंपेंगे और योजना को स्थगित करने की मांग करेंगे।   इस सड़क का निर्माण 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए किया जाना है, लेकिन स्थानीय किसान इसका विरोध कर रहे हैं। सड़क निर्माण के कारण कई किसानों की पूरी जमीन जा रही है और इसके बदले मिलने वाले मुआवजे में आसपास के दस किमी में कहीं भी जमीन नहीं मिल रही है। मुआवजा गाइडलाइन के अनुसार दोगुना दिया जाएगा, जबकि बाजार भाव पांच गुना तक पहुंच चुका है। किसान नेता बबलू जाधव और कैलाश सोनगरा का कहना है कि सरकार बिना किसी आकलन और सर्वे के योजना लागू कर देती है, जिससे प्रदेश के अन्नदाता के साथ अन्याय हो रहा है। इस विरोध को लेकर किसान अब ट्रैक्टर रैली निकालने का निर्णय ले चुके हैं, जिसमें इंदौर और उज्जैन जिले के सभी प्रभावित किसानों के अलावा अन्य किसान भी शामिल होंगे। इंदौर जिले के 20 गांव प्रभावित इस परियोजना से इंदौर की सांवेर और हातोद तहसीलों के करीब 20 गांव और उज्जैन जिले के आठ गांव प्रभावित हो रहे हैं। कुल 188 हेक्टेयर उपजाऊ जमीन इस सड़क में जाएगी। कहीं पूरी जमीन छिन रही है तो कहीं बीचों-बीच से सड़क गुजरेगी, जिससे किसान पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे। कांकरिया के किसान वीरेंद्र चौहान का कहना है कि सरकार द्वारा तय मुआवजा बाजार भाव से बेहद कम है। ऐसे में न तो जमीन के बदले जमीन मिल पाएगी और न ही किसान अपनी जीविका सुरक्षित रख पाएंगे। पहले से कई मार्ग, उन्हें करें चौड़ा यह सड़क इंदौर के पितृपर्वत से निकलकर उज्जैन बायपास चिंतामन गणेश तक जाएगी। सरकार इसे सिंहस्थ के लिए उपयोगी बता रही है, लेकिन किसान इसका विरोध कर रहे हैं। रतनखेड़ी के राहुल पटेल और मगरखेड़ी के लक्ष्मण सिंह का कहना है कि उज्जैन जाने के लिए पहले से कई मार्ग हैं, जिन्हें चौड़ा किया जाना चाहिए। इससे किसानों की जमीन भी बच जाएगी। गांव-गांव में जुटा रहे जनसमर्थन बीते रविवार को किसानों की बैठक रतनखेड़ी में आयोजित हुई थी। इसमें ट्रैक्टर रैली निकालने का निर्णय लिया गया। अब रैली की तैयारी को लेकर किसानों ने गांव-गांव संपर्क और जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। आठ अक्टूबर को सड़कों पर उतरने और अपनी जमीन बचाने के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। अन्य मांगें भी शामिल रैली में किसान ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का विरोध करने के साथ ही अपनी फसलों की समस्याओं को भी सामने रखेंगे। किसान नेता बबलू जाधव ने बताया कि किसान सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने, भावांतर योजना को स्थगित करने और प्याज के दाम बढ़ाने की मांग का ज्ञापन भी अधिकारियों को सौंपेंगे।

समाज में अनुशासन और सेवा की मिसाल: पीएम मोदी ने RSS की नींव और उद्देश्य बताया

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100वें स्थापना दिवस के मौके पर संघ की ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्रनिर्माण में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किेए। पीएम मोदी ने 'एक्स', पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आज से 100 साल पहले विजयादशमी के दिन ही समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। लंबे कालखंड के दौरान असंख्य स्वयंसेवकों ने इस संकल्प को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसे लेकर मैंने अपने विचारों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।" इस युग में संघ अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग पोस्ट करते हुए लिखा, 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना हुई थी। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनर्स्थापन था,जिसमें राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए,नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने मिल रहा है। मैं इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के संकल्प को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श, परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संघ की 100 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के भी जारी किए हैं। संघ के किनारे सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए- पीएम मोदी पीएम ने लिखा, जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए हैं। जैसे एक नदी जिन रास्तों से बहती हैं, उन क्षेत्रों को अपने जल से समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने इस देश के हर क्षेत्र, समाज के हर आयाम को स्पर्श किया है। जिस तरह एक नदी कई धाराओं में खुद को प्रकट करती है, संघ की यात्रा भी ऐसी ही है। संघ के अलग-अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं। शिक्षा, कृषि, समाज कल्याण, आदिवासी कल्याण,महिला सशक्तिकरण, समाज जीवन के ऐसे कई क्षेत्रों में संघ निरंतर कार्य करता रहा है। विविध क्षेत्र में काम करने वाले हर संगठन का उद्देश्य एक ही है, भाव एक ही है….राष्ट्र प्रथम संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला- पीएम मोदी अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण रास्ता चुना और इस चलने के लिए जो कार्यपद्धति चुनी वो थी नित्य-नियमित चलने वाली शाखाएं। संघ शाखा का मैदान, एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की अहम् से वयं की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं…व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी हैं। राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति यही संघ की सौ वर्षों की यात्रा का आधार बने। इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ा रहे हैं। संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया- पीएम मोदी अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में, संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया, स्वाभिमान जगाया। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है, जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, आदिवासी रीति-रिवाज, आदिवासी मूल्यों को सहेजने-संवारने में अपना सहयोग देता रहा है, अपना कर्तव्य निभा रहा है। आज सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम, आदिवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं।  

बेटियों की सुरक्षा फेल: मध्य प्रदेश में भ्रूण और शिशु हत्या के मामलों में देश में अव्वल, NCRB रिपोर्ट

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भोपाल भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक, भ्रूण हत्या रोकने के तमाम प्रयास के बाद भी मध्य प्रदेश की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। भ्रूण हत्या, शिशु हत्या और माता-पिता द्वारा बच्चों को छोड़ने के मामले में देश में अव्वल राज्य मध्य प्रदेश है। NCRB की वर्ष 2023 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में उक्त तीन प्रकृति के 196 मामले सामने आए हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र और तीसरे नंबर पर UP दूसरे नंबर पर 156 प्रकरणों के साथ महाराष्ट्र और तीसरे नंबर पर 112 प्रकरणों के साथ उत्तर प्रदेश है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भपात के कानूनी प्रविधानों को लेकर उचित जानकारी का अभाव और बच्चे के लिंग को लेकर सामाजिक दबाव इसकी बड़ी वजह है। एक समय था जब मध्य प्रदेश में शिशु लिंगानुपात 912 पर आ गया था। जानकारों ने इसकी वजह भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात को बताया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'लाड़ली लक्ष्मी' योजना प्रारंभ की। 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' सहित बेटियों के हित में कई योजनाएं प्रारंभ की गई, जिससे लोग उन्हें बोझ न मानें। इसके बाद भी प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 917 है। यानी, प्रति हजार बेटों पर 917 बेटियां ही पैदा हो रही हैं, जबकि प्राकृतिक तौर पर यह आंकड़ा 950 से ऊपर होना चाहिए। बच्चों की हत्या के सर्वाधिक मामले में MP को मिला ये स्थान छह वर्ष से कम उम्र के 28 बच्चों की हत्या NCRB की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रदेश में वर्ष 2023 में छह वर्ष से कम उम्र के 28 बच्चों की हत्या कर दी गई। हत्या के सर्वाधिक मामले में मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर रहा। हत्यारों ने 1832 लोगों की जान ले ली, जिसमें 706 मामलों में विवाद के कारण हत्या की गई। 121 प्रकरणों में हत्या का कारण प्रेम प्रसंग और 103 में संपत्ति का विवाद रहा है। प्रेम प्रसंग के चलते हत्या की सर्वाधिक 227 घटनाएं उत्तर प्रदेश, 144 गुजरात और 138 महाराष्ट्र में हुईं। मध्य प्रदेश में 30-45 आयु वर्ग के 666 लोगों की हत्या हुई। दुष्कर्म की घटनाओं में भी प्रदेश को मिला स्थान ए्ससी के साथ दुष्कर्म के 560 मामले, देश में तीसरे नंबर पर एसटी के विरुद्ध सर्वाधिक अपराध के मामले में प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर तो है ही अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाओं में भी प्रदेश तीसरे नंबर पर है। वर्ष 2023 में 560 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 176 में पीड़िता नाबालिग थीं।