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रोजगार की अलख जगाते गांधी सेवा आश्रम: 1278 परिवारों के जीवन में आया बदलाव

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मुरैना जौरा स्थित गांधी सेवा आश्रम में 53 साल पहले महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने 654 डकैतों ने बंदूकें डालकर आत्मसमर्पण किया था। यह आश्रम अब गांधीवादी विचारों की अलख ही नहीं जगा रहा, बल्कि मुरैना से लेकर दूसरे प्रांतों के गरीब परिवारों को रोजगार भी दे रहा है। चंबल से लेकर उत्तराखंड, बिहार और असम तक 1278 परिवारों को तीन दशक से भी ज्यादा समय से कुटीर उद्योगों से जोड़कर रोजी-रोटी मुहैया करवा रहा है। कहां-कहां मिला लोगों को रोजगार आश्रम जौरा से लेकर मुरैना और आसपास के क्षेत्रों में 1130 परिवारों को साढ़े तीन दशक से रोजगार दे रहा है। इनमें 325 परिवार सूत कताई व खादी की बुनाई का काम कर रहे हैं। 805 परिवार मधुमक्खी पालन से आजीविका चला रहे हैं। इनके अलावा रोजगार की यह मुहिम उत्तराखंड में 50 परिवारों का भरण पोषण कर रही है। उत्तराखंड में यह परिवार कालीन बुनाई व अगरबत्ती बनाने का काम करते हैं। असम के 50 परिवार साड़ी, चादर व साफी बनाने का काम करते हैं, वहीं बिहार में गांधी सेवा आश्रम से जुड़कर 48 परिवार दौरी (बांस की टोकरी) बनाने का काम करते हैं। एक चक्की से शुरू हुआ रोजगार का चक्का आश्रम में सबसे पहले आटा चक्की लगाई गई थी। रोजगार की यह चक्की ऐसी चली कि गांधी सेवा आश्रम में आज खादी बनाने से लेकर सरसों तेल, मधुमक्खी पालन से शहद, केंचुआ खाद, स्वदेशी साबुन आदि सामान बनाए जा रहे हैं। यहां बनने वाले उत्पाद खादी ग्रामोद्योग, मप्र की जेलों में, पुलिस महकमे को, पुणे के प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, उज्जैन के बाल आश्रम सहित कई जगहों पर सप्लाई होते हैं। जिनकी बंदूक उगलती थी आग, वो बना रहे केंचुआ खाद आश्रम में काम करने वाले पूर्व दस्यु बहादुर सिंह कुशवाह माधौसिंह-हरिविलास गैंग के सबसे भरोसेमंद सदस्य थे। यह पूर्व दस्यु अब यहां केंचुआ खाद बनाने का प्रशिक्षण देकर किसानों को खाद बनाना सिखा रहा है। इसी तरह पूर्व दस्यु सोनेराम भी आश्रम से जुड़कर बागवानी का काम कर रहे हैं। आश्रम प्रबंधक प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने बताया कि लोगों को गांधीवादी विचारों से जोड़ने के साथ गरीब परिवारों को कुटीर उद्योगों के जरिए रोजगार से भी जोड़ रहे हैं। आश्रम का प्रयास देश के अन्य राज्यों से भी धीरे-धीरे जुड़ रहा है। 27 सितंबर 1970 को बना था गांधी सेवा आश्रम गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव के प्रयासों से 14 अप्रैल 1972 को समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभावती देवी की मौजूदगी में गांधीजी की तस्वीर के सामने 654 डकैतों ने आत्मसमर्पण किया था। जौरा में जिस जगह पर डकैतों ने आत्मसमर्पण किया, वहां 27 सितंबर 1970 को गांधी सेवा आश्रम बना था।

शहडोल के फुटबॉल सितारे जर्मनी के लिए रवाना, सीएम मोहन यादव ने दी शुभकामनाएँ

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शहडोल शहडोल जिले के विचारपुर गांव जिसे मिनी ब्राज़ील कहा जाने लगा है वहां के पांच फुटबॉल खिलाड़ी और एक कोच जर्मनी रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मिले। यह खिलाड़ी और कोच जर्मन में 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक फुटबॉल खेल की बारीकियां सीखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहडोल जिले के ग्राम विचारपुर की 'मिनी ब्राजील' फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षण न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।   मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उनके प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विचारपुर की फुटबॉल टीम शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी प्रदेश की असाधारण खेल प्रतिभा का परिचायक हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अपने कौशल और समर्पण से देश और प्रदेश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन करें। विश्वस्तरीय प्रशिक्षण के इस विशेष अवसर के लिए विचारपुर से कुल पांच खिलाड़ी और एक महिला प्रशिक्षक का चयन किया गया है। इनमें लक्ष्मी सहीस (प्रशिक्षक, 31 वर्ष),सानिया कुशवाहा (खिलाड़ी, 14 वर्ष),सुहानी कोल (खिलाड़ी, 15 वर्ष),प्रीतम कुमार (खिलाड़ी, 14 वर्ष) वीरेंद्र बैगा (खिलाड़ी, 16 वर्ष),मनीष घसिया (खिलाड़ी, 16 वर्ष) के नाम शामिल हैं। प्रधानमंत्री से मिली वैश्विक पहचान विचारपुर की फुटबॉल टीम को यह पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 30 जुलाई 2023 को मन की बात कार्यक्रम में मिली थी। प्रधानमंत्री ने विचारपुर को ‘मिनी ब्राजील’ के रूप में उल्लेखित किया था। इसके बाद जर्मनी के प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब FC Ingolstadt 04 ने विचारपुर के पांच खिलाड़ियों और एक प्रशिक्षक को 4 से 12 अक्टूबर 2025 तक प्रशिक्षण का अवसर प्रदान किया गया है।

CM साय ने कहा- केंद्र की मदद से होगा राज्य का सर्वांगीण विकास, 3,462 करोड़ की राशि से खुलेगा नए अवसरों का मार्ग

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रायपुर  केंद्र सरकार ने राज्यों को कर हस्तांतरण की राशि जारी की है। इसमें छत्तीसगढ़ को 3,462 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सबसे ज्यादा 10,219 करोड़ रुपये बिहार को दिए गए, जबकि सबसे कम राशि 392 करोड़ रुपये गोवा को मिली है। मध्य प्रदेश को 7,976 करोड़ रुपये का हस्तांतरण किया गया है। इसपर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया है। सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि कर हस्तांतरण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को ₹3,462 करोड़ स्वीकृत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हार्दिक आभार। इस पावन अवसर पर, यह आवंटन वास्तव में मोदी सरकार की ओर से राज्य की जनता के लिए एक उल्लेखनीय उपहार है। यह महत्वपूर्ण राशि वित्तीय संसाधनों को और सुदृढ़ करेगी, विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करेगी और कल्याणकारी पहलों को बढ़ावा देगी। हमारी दोहरी इंजन वाली सरकार छत्तीसगढ़ में निरंतर प्रगति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य के विकास में इस पैसे का होगा अहम योगदान : तोखन साहू वहीं केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि डबल इंजन की सरकार है, जो हमने कहा था वही किया। राज्य के विकास में इस पैसे का अहम योगदान होगा। पहले GST कम किया गया, अब GST राशि वापस की गई है। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार किया है और हम विकास कर रहे हैं। यह सहयोग राज्य में विकास की गति को और तीव्र करेगा : ओपी चौधरी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राज्यों को अग्रिम कर अंशदान के रूप में ₹1,01,603 करोड़ जारी किये हैं। इसमें से छत्तीसगढ़ को ₹3,462 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। यह सहयोग राज्य में विकास की गति को और तीव्र करेगा, जनकल्याणकारी योजनाओं को सशक्त बनाएगा और पावन पर्व-त्योहारों के इस समय में नवआशा और समृद्धि का संचार करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आदरणीय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हृदय से आभार एंव अभिनंदन।

संभल में ध्वस्तीकरण अभियान: मदरसा और मैरिज पैलेस ढहाए गए, क्षेत्र में भारी पुलिस बल

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संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ एक बार फिर से बुलडोजर से कार्रवाई जारी है। कई एकड़ भूमि पर बने इस निर्माण में लोग मदरसा और बारात घर चला रहे थे। इसको लेकर कोई विरोध ना हो, इसके लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही माहौल तनावपूर्ण न हो, इसके लिए पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है, साथ ही लोगों को घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है। अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी इस मामले पर संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि जिले भर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। यह तालाब की जमीन है जिस पर एक बड़ा मैरिज पैलेस बना है। तहसीलदार ने 30 दिन पहले इसे गिराने का आदेश जारी किया था। इसके बाद कोई अपील दायर नहीं की गई इसलिए आज ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आगे कहा, 'कोर्ट में सभी पक्षों को सुना गया। उसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने आदेश जारी किया और हम उसी के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। सभी की राय है कि अगर यह अवैध रूप से बना है तो इसे गिरा दिया जाना चाहिए।' प्रशासन ने इसे खुद गिराने का फैसला किया डीएम के अलावा संभल के एसपी केके बिश्नोई ने बताया, 'संभल के असमोली थाने के अंतर्गत राय बुजुर्ग गांव में एक तालाब और खाद के गड्ढों के लिए जमीन है। उन्हें इसे गिराने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। 30 दिन की समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्होंने अभी तक इसे नहीं गिराया है। प्रशासन ने इसे खुद गिराने का फैसला किया है। यह अवैध निर्माण था। उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था। यह अवैध निर्माण मदरसे और बारात घर की तरह उपयोग में लिया जा रहा था और कई एकड़ जमीन पर फैला हुआ था।'

शॉकिंग दृश्य Bhopal दशहरा: आयोजकों की आंखों के सामने रावण पुतला जलाकर भागे युवक-युवतियां

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भोपाल भोपाल के बाग मुगालिया इलाके में दशहरे से पहले एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सुबह करीब 6 बजे कुछ अज्ञात युवक-युवती कार से मैदान में पहुंचे और नशे की हालत में रावण के पुतले को आग के हवाले कर फरार हो गए। इस घटना से स्थानीय लोगों और आयोजनकर्ताओं में हड़कंप मच गया, क्योंकि रावण दहन का कार्यक्रम शाम को भारी भीड़ के बीच होना था। घटना की जानकारी मिलते ही समिति सदस्यों ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक रावण का पुतला पूरी तरह जल चुका था। चश्मदीदों के अनुसार, युवकों की हरकतें संदिग्ध थीं और वे तुरंत मौके से भाग निकले। मिसरोद थाना प्रभारी संदीप पवार ने बताया कि आरोपित बिना नंबर की कार से आए थे, उनकी तलाश की जा रही है!  

बागेश्वर धाम से बड़ी खबर: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीआईपी मुलाकातों पर लगाया रोक

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छतरपुर बागेश्वर धाम गढ़ा में नवरात्र साधना के समापन पर बड़ा निर्णय लिया गया है। बागेश्वर महाराज के गुरु सन्यासी बाबा ने साधना के दौरान आदेश दिया कि अब बागेश्वर धाम पर आने वाले वीआईपी से मुलाकात नहीं की जाएगी। महाराज जी केवल उन श्रद्धालुओं से मिलेंगे जो सच्चे भक्त बनकर बिना किसी सिफारिश के धाम पर दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। नवरात्र की नौ दिवसीय साधना पूर्ण होने के बाद दशमी के दिन बागेश्वर महाराज ने बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली केन नदी में पहुंचकर व्रत का समापन किया। इस अवसर पर बनारस से आए आचार्यों द्वारा वेद मंत्रों के साथ व्रत पूर्ण कराया गया।   गरीबों की पीड़ा अनसुनी रह जाती है इसके पश्चात धाम पर आयोजित दिव्य दरबार में महाराज ने भक्तों को साधना का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि साधना के दौरान 11 लाख बार पंचमुखी हनुमान नाम का जप और माता रानी की आराधना कर उसे अपने आराध्य बागेश्वर बालाजी के चरणों में समर्पित किया। महाराज ने भक्तों को बताया कि साधना के दौरान उनके गुरु सन्यासी बाबा ने डांटते हुए कहा कि वीआईपी और वीवीआईपी मुलाकातों के कारण गरीब, असहाय और दूर-दराज से किराया उठाकर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की पीड़ा अनसुनी रह जाती है। यही भक्त निराश होकर लौटते हैं, गुरु ने आदेश दिया कि अब से बागेश्वर धाम पर प्रोटोकॉल और सिफारिश वाले वीआईपी और वीवीआईपी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यदि वे आते हैं तो उन्हें अलग से समय दिया जाएगा, लेकिन पहले अवसर गरीब, असहाय, मरीज और सच्चे श्रद्धालुओं को ही मिलेगा। महाराज ने कहा कि कुटिया में साधना के दौरान हमने प्रण लिया कि गुरु जी की आज्ञा अब कभी नहीं टाली जाएगी। दिव्य दरबार में सुनेंगे अर्जियां बागेश्वर महाराज ने कहा की कि अब पहले की भांति दिव्य दरबार में बागेश्वर बालाजी की आज्ञा से भक्तों की अर्जियां सुनी जाएंगी और पर्चे बनाए जाएंगे। साथ पूर्व की ही भांति शाम को मरीजों के दर्शन के समय श्रद्धालुओं को सिद्ध अभिमंत्रित भभूति भी प्रदान की जाएगी। महाराज ने कहा कि यह क्रम आगे भी जारी रहेगा और प्रत्येक गुरुवार को नई नियमावली के तहत भक्तों से मुलाकात कर मंदिर प्रांगण से ही सिद्ध भभूति का वितरण किया जाएगा।

चेक क्लियरिंग का समय घटा, अब बैंक में सिर्फ 24 घंटे में निपटेंगे लेन-देन

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भोपाल बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब बैंकों में चेक क्लियर होने के लिए ग्राहकों को दो से तीन दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत चेक एक ही दिन में क्लियर हो जाएगा। राजधानी में इसको लेकर प्रसन्नता है, उनका मानना है कि इसका लंबे समय से इंतजार था। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि तकनीकी सुधार और डिजिटलीकरण की बदौलत यह संभव हो पाया है। पहले चेक क्लियर होने में कई बार 48 से 72 घंटे तक का समय लग जाता था। इससे न केवल आम लोगों को परेशानी होती थी बल्कि छोटे और बड़े व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित होता था। अब इस बदलाव के बाद ग्राहक उसी दिन अपने खाते में पैसा आते हुए आसानी से देख सकेंगे।   व्यापारियों को मिलेगी अधिक सुविधा छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए यह कदम किसी राहत से कम नहीं है। व्यापारियों को अपने सप्लायर और ग्राहकों से भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई बार देरी होने से नकदी की समस्या खड़ी हो जाती थी। अब चेक उसी दिन क्लियर होने से उनका कैश फ्लो मजबूत होगा और कारोबार सुचारू रूप से चल सकेगा। भोपाल के कारोबारी भगत सिंह जाट ने बताया कि यह वाकई बहुत राहत देने वाला निर्णय है। पहले चेक क्लियर होने में समय लगता था और भुगतान अटक जाता था। अब हमें भरोसा रहेगा कि पैसा उसी दिन खाते में आ जाएगा। एक इवेंट मैनेजर ने बताया कि अब हमे आसानी से समय पर भुगतान मिल जाएगा। चेक देने वाले को भी पता होगा कि सेम डे में क्लियर होना है। निजी काम करने वाले लोकेश मौर्य ने कहा कि बच्चों की फीस या अन्य जरूरी खर्चों के लिए चेक क्लियर होने का इंतजार करना पड़ता था। अगर यह एक ही दिन में क्लियर हो जाएगा तो बहुत आसानी होगी। साथ ही किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा और धोखाधड़ी होने की संभावना कम हो जाएगी।

रायपुर की सात रंगीन रातें: रावण दहन के बड़े आयोजन, ड्रोन निगरानी के साथ

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रायपुर दशहरा और दुर्गा विसर्जन के मौके पर गुरुवार शाम को भारी भीड़ उमड़ेगी। शहर के छह से ज्यादा बड़े स्थलों पर रावण दहन और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा, जिस कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने शाम चार बजे से रात दो बजे तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू करने का निर्णय लिया है। वहीं प्रमुख स्थलों में ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जाएगी। सबसे बड़ा आयोजन डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में शहर का सबसे बड़ा रावण दहन कार्यक्रम डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में होगा। यहां लगभग 20 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है। इस आयोजन में राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। इसी तरह भाठागांव से मठपारा चौक तक का इलाका भी मुख्य आयोजन स्थल रहेगा। पुलिस का अनुमान है कि इन दोनों स्थानों पर ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा रहेगा।   अन्य स्थानों पर भी भीड़ शंकर नगर चौक, रांवाभाठा बीरगांव, बीटीआइ मैदान शंकर नगर, सप्रे शाला मैदान, समता कालोनी और दलदल सिवनी में भी बड़े पैमाने पर रावण दहन का आयोजन होगा। सभी जगहों पर भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक दोनों के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। यातायात में इस प्रकार किया है बदलाव ट्रैफिक पुलिस ने इन मार्गों पर डायवर्जन की व्यवस्था की है। जिन सड़कों से आयोजन स्थल जुड़ते हैं, वहां शाम 4 बजे के बाद केवल कार्यक्रम से जुड़े वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। भारी वाहनों का प्रवेश आयोजन समाप्त होने के एक घंटे बाद तक प्रतिबंधित रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने की तैयारी पुलिस का कहना है कि ओवरब्रिज के नीचे हर साल लंबा जाम लगता है। इस बार भीड़ को देखते हुए रावण दहन समाप्त होने के बाद भी ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। भनपुरी से आने वाले वाहनों को श्रीनगर और गुढ़ियारी की ओर डायवर्ट किया जाएगा, जबकि शहर से भनपुरी जाने वाले वाहन ओवरब्रिज से होकर जाएंगे। शहर में आने वाली गाड़ियों की होगी जांच 1000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। आईटीएमएस कैमरों से लगातार निगरानी रखी जाएगी। शहर में आने वाली गाड़ियों की जांच होगी, संदेह होने पर गाड़ियों की डिक्की तक खोली जाएगी। तीन सवारी, बिना नंबर प्लेट और रांग साइड चलने वाले चालकों पर कार्रवाई की जाएगी। यह सख्ती रात दो बजे तक जारी रहेगी। महिला पुलिस-क्राइम ब्रांच की टीम भी अलर्ट शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिला पुलिस को सादी वर्दी में तैनात किया गया है। पाकेटमारों, लूट और चोरी की घटनाओं पर रोक के लिए विशेष स्क्वाड बनाया गया है। चाकू लेकर घूमने वालों और उपद्रवियों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। क्राइम ब्रांच के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है।

RSS की राष्ट्र साधना के 100 वर्ष, नरेन्द्र मोदी की कलम से

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  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज विजयादशमी पर संगठन का शताब्दी समारोह मना रहा है। 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। 1 अक्टूबर को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) भी शामिल हुए थे। इस अवसर पर  RSS से जुड़ा 100 रुपये का स्पेशल सिक्का और RSS के योगदान को दर्शाने वाला स्मारक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। वहीं आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर पीएम नरेंद्र मोदी ने एक लेख लिखा है। तो चलिए पीएम की कलम से लिखे इस लेख को यहां पढते हैंः- प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। संघ प्रारंभ से ही राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है। संघ के लिए देश की प्राथमिकता ही उसकी अपनी प्राथमिकता रही। अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया. संघ ने हमेशा राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुना। पीएम मोदी ने आगे लिखा कि- ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनर्स्थापन था, जिसमें राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए,नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने मिल रहा है। मैं इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के संकल्प को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श… परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संघ की 100 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के भी जारी किए हैं। जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए हैं. जैसे एक नदी जिन रास्तों से बहती हैं, उन क्षेत्रों को अपने जल से समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने इस देश के हर क्षेत्र, समाज के हर आयाम को स्पर्श किया है। जिस तरह एक नदी कई धाराओं में खुद को प्रकट करती है, संघ की यात्रा भी ऐसी ही है। संघ के अलग-अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं। शिक्षा, कृषि, समाज कल्याण, आदिवासी कल्याण, महिला सशक्तिकरण, समाज जीवन के ऐसे कई क्षेत्रों में संघ निरंतर कार्य करता रहा है। विविध क्षेत्र में काम करने वाले हर संगठन का उद्देश्य एक ही है, भाव एक ही है… राष्ट्र प्रथम। संघ की शाखाएं… व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण रास्ता चुना और इस चलने के लिए जो कार्यपद्धति चुनी, वो थी नित्य-नियमित चलने वाली शाखाएं। संघ शाखा का मैदान, एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की अहम् से वयं की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं… व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी हैं। आजादी के बाद संघ को कुचलने का प्रयास किया गया राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति… यही संघ की 100 वर्षों की यात्रा का आधार बने। इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ा रहे हैं। संघ जब से अस्तित्व में आया, संघ के लिए देश की प्राथमिकता ही उसकी अपनी प्राथमिकता रही। आज़ादी की लड़ाई के समय परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी समेत अनेक कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। डॉक्टर साहब कई बार जेल तक गए। आजादी की लड़ाई में कितने ही स्वतंत्रता सेनानियों को संघ संरक्षण देता रहा। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करता रहा। आजादी के बाद भी संघ निरंतर राष्ट्र साधना में लगा रहा. इस यात्रा में संघ के खिलाफ साजिशें भी हुईं, संघ को कुचलने का प्रयास भी हुआ। ऋषितुल्य परम पूज्य गुरु जी को झूठे केस में फंसाया गया, लेकिन संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया, क्योंकि वो जानते हैं, हम समाज से अलग नहीं हैं, समाज हमसे ही तो बना है। समाज के साथ एकात्मता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आस्था ने संघ के स्वयंसेवकों को हर संकट में स्थित प्रज्ञ रखा है… समाज के प्रति संवेदनशील बनाए रखा है। खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना… ये हर स्वयंसेवक की पहचान प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है कि- प्रारंभ से संघ राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है। जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया, तब स्वयंसेवकों ने शरणार्थियों की सेवा की। हर आपदा में संघ के स्वयंसेवक अपने सीमित संसाधनों के साथ सबसे आगे खड़े रहते रहे। यह केवल राहत नहीं थी, यह राष्ट्र की आत्मा को संबल देने का कार्य था। खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना… ये हर स्वयंसेवक की पहचान है। आज भी प्राकृतिक आपदा में हर जगह स्वयंसेवक सबसे पहले पहुंचने वालों में से एक रहते हैं। संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, आदिवासी रीति-रिवाजों को सहेज रहा अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में, संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया। स्वाभिमान जगाया। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है, जो दुर्गम है. जहां पहुंचना सबसे कठिन है। संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, आदिवासी रीति-रिवाज, आदिवासी मूल्यों को सहेजने-संवारने में अपना सहयोग देता रहा है। अपना कर्तव्य निभा रहा है। आज सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम, आदिवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं। संघ का एक ही मंत्र- न हिन्दू पतितो भवेत् समाज में सदियों से घर कर चुकी जो बीमारियां हैं, जो ऊंच-नीच की भावना है, जो कुप्रथाएं हैं, ये हिन्दू समाज की बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। ये एक ऐसी गंभीर चिंता है, जिस पर संघ लगातार काम करता रहा है। डॉक्टर साहब से लेकर आज तक, संघ की हर महान विभूति ने, हर सर-संघचालक ने भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। परम पूज्य गुरु जी ने निरंतर “न हिन्दू … Read more

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शन पर जताई अपनी राय, बोले- नीतियों का निर्धारण अलग ढंग से होता है

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नई दिल्ली  विजयादशमी के कार्यक्रम में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को पड़ोसी देशों में हुईं अशांति की घटनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि जब सरकार लोगों और उनकी परेशानियों से दूर रहती है, तो उसके खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया है और कहा है कि इस तरीके से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ। हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन हुआ, जिसमें युवाओं ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। भागवत ने कहा, 'श्रीलंका में, बाद में बांग्लादेश में, बाद में नेपाल में। हमारे पड़ोसी देशों में हमने इसका अनुभव किया है। अब कभी कभी हो जाता है। प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता। उनकी जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनती, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष को इस प्रकार व्यक्त होना, किसी के लाभ की बात नहीं है।' उन्होंने कहा, '…अगर हम अभी तक का इतिहास देखेंगे तो जब से उथल पुथल वाली तथाकथित क्रांतियां आई हैं। किसी क्रांति ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया। राजा के खिलाफ फ्रांस की राज्य क्रांति हुई, उसकी परिणाम क्या हुआ? नेपोलियन बादशाह बन गया। वही राज्यतंत्र कायम है। इतनी सारी तथाकथित साम्यवादी क्रांतियां हुईं, सभी साम्यवादी देश आज पूंजीवादी तंत्र पर चल रहे हैं।' संघ प्रमुख ने कहा कि अगर देश में स्थिति खराब होती है, तो बाहर की ताकतें हावी होने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे हिंसक प्रदर्शनों से उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि अराजकता की स्थिति में देश की बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है। इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल पुथल हो रही है। ये हमारे ही जैसे हैं, ये हमसे दूर नहीं हैं। ये हमारे अपने है। उनमें इस प्रकार की अस्थिरता होना, वह आत्मीयता के संबंध के चलते चिंता का विषय है।' इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।