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भारत ने वर्ल्ड कप का आगाज़ जीत से किया, श्रीलंका को हराकर बढ़ाया आत्मविश्वास

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गुवाहाटी  आईसीसी वुमेंस वनडे वर्ल्ड कप का आगाज हो गया है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने मंगलवार को आईसीसी महिला विश्व कप के अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका को डकवर्थ-लुईस-स्टरन (DLS) पद्धति के तहत 59 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की.  दरअसल, दो बार बारिश के कारण मैच को 50 से घटाकर 47 ओवर का करना पड़ा था. डीएलएस द्वारा 271 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 45.4 ओवर में 211 रनों पर ऑल आउट हो गई, जिसमें दीप्ति ने 54 रन देकर 3 विकेट चटकाए. अमनजोत कौर (56 गेंदों पर 57 रन) और दीप्ति शर्मा (53 गेंदों पर 53 रन) की सातवें विकेट के लिए 103 रनों की शानदार साझेदारी ने भारत को मुश्किल स्थिति से उबारकर 47 ओवरों में 269/8 का मजबूत स्कोर खड़ा करने में मदद की. शुरुआत में लड़खड़ाई भारत की पारी पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. श्रीलंका की स्पिनर इनोका राणावीरा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 46 रन देकर चार विकेट चटकाए, जिसके चलते भारत 124/6 की मुश्किल स्थिति में पहुंच गया था. शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसे बड़े नाम जल्दी पवेलियन लौट गए. लेकिन इसके बाद अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा ने पारी को संभाला. दोनों ने सतर्क और आक्रामक बल्लेबाजी का मिश्रण पेश करते हुए 103 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिसने भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. अमनजोत ने अपनी 57 रनों की पारी में आक्रामकता दिखाई, जबकि दीप्ति ने संयम के साथ 53 रन बनाए. श्रीलंका 211 पर ढेर 271 रनों के डीएलएस लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत कप्तान चमारी अटापट्टू (43 रन) और निलाक्षिका सिल्वा (35 रन) ने संभाली, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. दीप्ति शर्मा ने झटके 3 विकेट दीप्ति शर्मा ने अपनी ऑफ-स्पिन से 3 विकेट झटके, जबकि स्नेह राणा (2/32) और श्री चरणी (2/37) ने भी दो-दो विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को 45.4 ओवरों में 211 रनों पर समेट दिया. भारत की क्षेत्ररक्षण और गेंदबाजी में चुस्ती ने श्रीलंका को दबाव में रखा, जिसके चलते वे लक्ष्य से काफी पीछे रह गए. श्रीलंका प्लेइंग इलेवन : चमारी अटापट्टू (कप्तान), हासिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, विशमी गुणरत्ने, कवीशा दिलहारी, नीलाक्षिका सिल्वा, अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), सुगंधिका कुमारी, अचिनी कुलसुरिया, उदेशिका प्रबोधनी, इनोका राणावीरा. भारत प्लेइंग इलेवन: स्मृति मंधाना, प्रतीका रावल, हरलीन देओल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, अमनजोत कौर, स्नेह राणा, क्रांति गौड़, श्री चरणी. बता दें कि इस वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया शानदार फॉर्म में है. टूर्नामेंट में कुल 28 मैच खेले जाने हैं. फाइनल मैच 2 नवंबर को होना है. भारतीय टीम अपनी पहली ट्रॉफी की तलाश में है. अबतक दो बार भारत वर्ल्डकप के फाइनल में पहुंची है, लेकिन उसे दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा है. लेकिन इस बार भारत ट्रॉफी की प्रबल दावेदार मानी जा रही है. भारत का अगला मैच 5 अक्टूबर को पाकिस्तान के साथ होना है.

प्रशासनिक सर्जरी: मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादले, 12 जिलों के कलेक्टर बदले गए

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भोपाल  मध्यप्रदेश में मंगलवार शाम को बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। सरकार ने 24 आईएएस (IAS) अफसरों के तबादले करते हुए 14 जिलों के कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें भिंड, पन्ना, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, डिंडौरी, रतलाम, मुरैना, निवाड़ी, सिंगरौली, अलीराजपुर, पांढुर्णा और सिवनी शामिल हैं। अपर कलेक्टर इंदौर और अपर कलेक्टर जबलपुर का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बड़े फेरबदल में सिंगरौली, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना और डिंडोरी के कलेक्टर हटा दिए गए हैं. सबसे अधिक चर्चा में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का तबादला रहा, जिन्हें भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद हटाया गया है. महत्वपूर्ण नियुक्तियों में, भोपाल नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण को छिंदवाड़ा का नया कलेक्टर बनाया गया है, जबकि श्रम आयुक्त रजनी सिंह अब नरसिंहपुर की कलेक्टर होंगी. गौरव बेनल को सिंगरौली कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह तबादला आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. पूरी लिस्ट देखें.. क्र. अधिकारी का नाम, बैच तथा वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना 1. श्री सुरेश कुमार (2010), कलेक्टर, जिला पन्ना वि.क.अ.-सह-आयुक्त, चम्बल संभाग, मुरैना 2. श्री शीलेन्द्र सिंह (2010), कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग 3. श्रीमती नेहा मारव्या सिंह (2011), कलेक्टर, जिला डिण्डोरी संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल 4. श्री संजीव श्रीवास्तव (2011), कलेक्टर, जिला भिण्ड अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग 5. श्रीमती ऊषा परमार (2011), अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल कलेक्टर, जिला पन्ना 6. श्री शिवराज सिंह वर्मा (2011), अपर सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल 7. श्री राजेश बाथम (2012), कलेक्टर, जिला रतलाम अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग 8. श्रीमती रजनी सिंह (2013), वि.क.अ.-सह-श्रम आयुक्त, मध्यप्रदेश, इंदौर कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर 9. श्री नीरज कुमार वशिष्ठ (2013), संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल कलेक्टर, जिला पांढुर्णा 10. श्रीमती शीतला पटले (2014), कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर कलेक्टर, जिला सिवनी 11. श्री अंकित अस्थाना (2014), कलेक्टर, जिला मुरैना उप सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 12. श्री लोकेश कुमार रामचन्द्र जांगिड (2014), कलेक्टर, निवाड़ी कलेक्टर, जिला मुरैना 13. श्री चन्द्रशेखर शुक्ला (2014), कलेक्टर, जिला सिंगरौली उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग 14. डॉ. अभय अरविन्द बेडेकर (2014), कलेक्टर, जिला आलीराजपुर अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल 15. श्री अजय देव शर्मा (2014), कलेक्टर, जिला पांढुर्णा उप सचिव, राजस्व विभाग तथा अतिरिक्त आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 16. श्रीमती नीतू माथुर (2014), अपर आयुक्त (राजस्व), रीवा संभाग, रीवा कलेक्टर, जिला आलीराजपुर 17. श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (2014), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला रायसेन कलेक्टर, जिला डिण्डोरी 18. श्रीमती जमुना भिडे (2014), सचिव, जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन, भोपाल कलेक्टर, जिला निवाड़ी 19. श्रीमती संस्कृति जैन (2015), कलेक्टर, जिला सिवनी आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 20. श्रीमती बिदिशा मुखर्जी (2015), अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 21. श्री किरोड़ी लाल मीना (2016), अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल कलेक्टर, जिला भिण्ड 22. श्री गौरव बैनल (2016), अपर कलेक्टर, जिला इंदौर कलेक्टर, जिला सिंगरौली 23. श्री हरेन्द्र नारायण (2016), आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा 24. सुश्री मिशा सिंह (2016), अपर कलेक्टर, जिला जबलपुर कलेक्टर, जिला रतलाम

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में अब आएगी आवाज! जानें क्या है AVAS और क्यों है ये जरूरी

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नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को पैदल यात्रियों और सड़क पर अन्य यूज़र्स के लिए और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें ऑकस्टिक व्हीकल अलर्ट सिस्टम (AVAS) की अनिवार्यता प्रस्तावित की गई है. तो आइये जानें क्या है ये सिस्टम और आम लोगों के लिए ये सिस्टम किस तरह से सुरक्षा प्रदान करेगा. क्या है प्रस्ताव? ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नियम के तहत, 1 अक्टूबर 2026 से लॉन्च होने वाले सभी नए पैसेंजर और माल-वाहन इलेक्ट्रिक वाहनों में AVAS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, जबकि पहले से उत्पादन में चल रहे मॉडल्स को 1 अक्टूबर 2027 तक इस नियम का पालन करना होगा. क्यों जरूरी है AVAS? AVAS, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खास तौर पर ज़रूरी है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक इंजन वाले वाहनों की तुलना में बहुत शांत होते हैं. इससे सड़क पर पैदल यात्रियों और दोपहिया चालक सहित सभी के लिए सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी. मैंडेट का दायरा MoRTH की अधिसूचना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से नए मॉडल और 1 अक्टूबर 2027 से मौजूदा मॉडल के लिए M और N कैटेगरी के इलेक्ट्रिफाइड वाहन AVAS के साथ उपलब्ध होंगे. यहाँ M कैटेगरी पैसेंजर व्हीकल और N कैटेगरी माल वाहक वाहनों के लिए है. इसका मतलब है कि इलेक्ट्रिक कार, बस, वैन और ट्रक सभी को AVAS के साथ अनिवार्य रूप से लैस करना होगा. हालांकि, मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और ई-रिक्शा इससे बाहर हैं.  कैसे काम करता है ये AVAS सिस्टम? यह सिस्टम वाहन के 20 किलोमीटर प्रति घंटे की कम स्पीड पर चलते समय आवाज उत्पन्न करता है, ताकि पैदल यात्री, साइकिल सवार और सड़क पर चलने वाले अन्य लोग वाहन के आने के बारे में जान सकें और सुरक्षित रहें. ये सिस्टम ऑटोमेटिकली 20 किमी/घंटा से कम की स्पीड पर और वाहन के रिवर्स करने के दौरान एक्टिव हो जाता है. वहीं हाई स्पीड में टायर और हवा की आवाज़ पर्याप्त होने के कारण यह सिस्टम बंद हो जाता है. क्या कहते हैं ग्लोबल एक्सपीरिएंस ग्लोबल रिपोर्ट्स भी यही बताते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन स्लो स्पीड में सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं. क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है. ऐसे में स्लो स्पीड में कार से बिल्कुल आवाज नहीं आती है, जिससे सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों या दोपहिया वाहन चालकों को इस बात का आभास भी नहीं होता है कि, कोई चार पहिया वाहन उनके आसपास या पीछे से आ रही है.  अमेरिकी परिवहन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीज़ल कारों की तुलना में पैदल यात्रियों के लिए 20 प्रतिशत अधिक और कम गति पर 50 प्रतिशत अधिक जोखिम पैदा करती हैं. AVAS पहले से ही अमेरिका, जापान और यूरोप में अनिवार्य है, और अब इसे भारत में भी अनिवार्य करने की तैयारी है. इन कारों में पहले से ही ये AVAS भारत में कुछ इलेक्ट्रिक वाहन पहले ही AVAS सिस्टम के साथ उपलब्ध हैं. जिसमें एमजी कॉमेट, टाटा कर्व ईवी, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक जैसे मॉडल शामिल हैं. इसके अलावा महिंद्रा द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए XEV 9e और BE 6 (पूर्व में BE 6e) भी इस तकनीक के साथ आते हैं, जो सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों की सुरक्षा तय करते हैं. अन्य प्रस्तावित बदलाव AVAS नियम के अलावा सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि ट्यूबलैस टायर वाले वाहनों, जैसे कार, क्वाड्रिसाइकिल और कुछ थ्री-व्हीलर में स्पेयर टायर की अनिवार्यता को हटा दिया जाए. जैसे ही यह नियम अंतिम रूप लेगा, कार मेकर्स को 2026 से नए मॉडल में AVAS लागू करना होगा, जबकि पहले से उत्पादन में चल रहे इलेक्ट्रिक वाहनों को 2027 तक इसका पालन करना अनिवार्य होगा.

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रतनपुर महामाया मंदिर में नवरात्रि पर की पूजा अर्चना

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रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रतनपुर महामाया मंदिर में नवरात्रि पर की पूजा अर्चनामुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर रतनपुर स्थित ऐतिहासिक महामाया मंदिर पहुँचकर मां महामाया का दर्शन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने मंदिर प्रांगण में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की और उन्हें नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।  इस अवसर पर विधायक  सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, जिला अध्यक्ष  दीपक सिंह ठाकुर, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह सहित महामाया ट्रस्ट के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

महानवमी 2025: इस मुहूर्त में करें कन्या पूजन, पूजा विधि और महत्त्व जानें

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1 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्र की महानवमी है और यह नवरात्र का आखिरी दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. यह दिन अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है. भक्त इस दिन कन्या पूजन करके शारदीय नवरात्र का पारण करते हैं. तो चलिए जानते हैं कि आज शारदीय नवरात्र पर कितने से कितने बजे तक कन्या पूजन का मुहूर्त रहेगा और साथ ही हवन का मुहूर्त कितने बजे रहेगा.  शारदीय नवरात्र महानवमी 2025 तिथि और हवन मुहूर्त आश्विन मास की नवमी तिथि की शुरुआत 30 अक्टूबर यानी कल शाम 6 बजकर 06 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 1 अक्टूबर यानी आज शाम 7 बजकर 01 मिनट पर होगा. महानवमी पर देवी दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है.  महानवमी की पूजा के बाद हवन करना भी शुभ माना जाता है, जो आज सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक करने का सबसे अच्छा मौका मिलेगा. इस समय हवन और कन्या पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है.  महानवमी 2025 कन्या पूजन मुहूर्त  आश्विन मास की महानवमी का पहला कन्या पूजन मुहूर्त आज सुबह 5 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, दूसरा मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट पर रहेगा. महानवमी पर कैसे करें कन्या पूजन? महानवमी पर कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें और उनका स्वागत करें. कन्याओं को आरामदायक स्थान पर बिठाकर उनके पैरों को दूध से धोएं और उनके माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं. कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा और उपहार दें. कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और मां भगवती की कृपा प्राप्त करें. महानवमी के दिन करें ये उपाय मां सिद्धिदात्री की पूजा में घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. मां सिद्धिदात्री को विभिन्न भोग जैसे मिश्री, गुड़, हरी सौंफ, केला, दही, देसी घी और पान का पत्ता अर्पित करें. इसके बाद देवी मां से प्रार्थना करें कि वे सभी ग्रहों को शांत करें और सुख-शांति प्रदान करें

1,21,103 बालिकाओं को प्रशिक्षित सरकारी चिकित्साकर्मियों से मिले स्वास्थ्य टिप्स

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मिशन शक्ति 5.0: बालिकाओं ने सरकारी अस्पतालों का भ्रमण कर सीखी स्वास्थ्य सुरक्षा की बारीकियां  प्रदेशभर के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालय और केजीबीवी की बालिकाओं ने किया भ्रमण 1,21,103 बालिकाओं को प्रशिक्षित सरकारी चिकित्साकर्मियों से मिले स्वास्थ्य टिप्स   स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के ओपीडी, फार्मेसी, टीकाकरण कक्ष और पैथोलॉजी लैब्स जैसी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को करीब से देखा – व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण, एनीमिया से बचाव और महामारी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी मिली महत्वपूर्ण जानकारी – सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रत्यक्ष अनुभव बालिकाओं को सशक्त बनाएगा: मोनिका रानी लखनऊ  उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के महत्वाकांक्षी मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत प्रदेशभर के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में बालिकाओं के लिए एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अनूठी पहल के तहत 1,21,103 छात्राओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला/सरकारी अस्पतालों का भ्रमण किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से प्रत्यक्ष परिचय कराना और स्वास्थ्य प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के विभिन्न विभागों जैसे ओपीडी, फार्मेसी, टीकाकरण कक्ष और पैथोलॉजी लैब का भ्रमण कर छात्राओं ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को करीब से देखा।  बता दें कि इस पहल को गतिशील बनाने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 20 सितंबर को शुभारम्भ किए गए मिशन शक्ति 5.0 ने केंद्रीय भूमिका निभाई। इसके बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में यह अभियान लगातार सक्रिय और प्रभावशाली बनाते हुए बालिकाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए कई गतिविधियों के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान कर रहा है। ऐसे मिला प्रत्यक्षा अनुभव बालिकाओं को पंजीकरण काउंटर पर जाकर अपना ओपीडी पर्चा बनवाने का अनुभव कराया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने का पहला कदम सीखने को मिला। इसके साथ ही छात्राओं ने बारी-बारी से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों से मुलाकात की और अपने सामान्य स्वास्थ्य प्रश्नों पर परामर्श लिया। यह अनुभव उनकी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने वाला तो रहा ही, संवाद कौशल और आत्मविश्वास को भी मजबूत करने वाला रहा।। रोग, जांच और स्वास्थ्य प्रक्रियाओं की मिली जानकारी कार्यक्रम में बालिकाओं को विभिन्न जाँचों जैसे रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा आदि की प्रक्रिया और महत्व के बारे में जानकारी दी गई। कई स्थानों पर छात्राओं को इन जाँचों के डेमो भी दिखाए गए। इसके अतिरिक्त, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण, एनीमिया से बचाव और महामारी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर हुईं बेटियां इस कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाएँ न केवल शिक्षित हुईं, बल्कि स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर हुईं। छात्राओं ने सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास बढ़ाया और समझा कि सही जानकारी और प्रत्यक्ष अनुभव से ही स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण लाभ लिया जा सकता है। इतना ही नहीं, मिशन शक्ति का यह चरण बालिकाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव का आधार बना।  मिशन शक्ति 5.0 ने बालिकाओं को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराया और उन्हें स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। यह पहल न केवल उनके विश्वास और आत्मसम्मान को बढ़ाती है, बल्कि समाज में सशक्त नारी की नींव भी मजबूत करती है। – मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे सेंटर पर 2 दिवसीय अफसर कॉन्फ्रेंस, विकास का रोडमैप होगा तैयार

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भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 7 और 8 अक्टबूर को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी, आईजी-डीआईजी के साथ पहली कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस कांफ्रेंस के आठ मुख्य बिंदु तय किए गए हैं। जिसके बार में मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी जानकारी देंगे। दो दिन की बैठक में तैयार होगा रोडमैप जानकारी के मुताबिक, सीएम डॉ मोहन यादव इस कांफ्रेंस में अपनी प्राथमिकताएं देंगे। जिसमें साल भर का रोडमैप तैयार किया जाएगा और पैमाने पर परफॉर्मेंस मॉनिटर की जाएगी। इस कॉफ्रेंस में नगरीय निकायों के कमिश्नर और जिला पंचायत सीईओ को बुलाया जाएगा। बैठक में सभी के साथ ग्रुप डिस्कशन होगा। वहीं, आईएएस अफसरा और पुलिस विभाग के आला-अफसरों का भी एक सत्र होगा। किस मुद्दे पर कौन से विभाग का अफसर बोलेगा नगरीय प्रशासन विभाग की पीएम आवास योजना, अमृत योजना और स्वच्छ भारत मिशन पर संजय दुबे जानकारी देंगे। गुड गवर्नेंस के राजस्व मामलों का निपटारा और डिजिटलाइजेशन, भूमि अधिग्रहण समेत कई अन्य मुद्दों पर संजय कुमार शुक्ला जानकारी देंगे। क्राउड मैनेजमेंट, रोड सेफ्टी, क्रिमिनल लॉ और एयर एंबुलेंस के मुद्दे पर शिवशेखर शुक्ला जानकारी देंगे। सिकल सेल, पोषण, अस्पताल के जुड़े मुद्दों पर संदीप यादव जानकारी देंगे। वहीं, स्किल डेवलपमेंट, एमएसएमई लोन स्कीम, उद्योगों को जमीन का आवंटन, पीएम गतिशक्ति, स्टार्टअप सहित दूसरे मामलों की जानकारी राघवेंद्र कुमार सिंह देंगे। खाद-बीज, नरवाई प्रबंध, प्राकृतिक खेती, सिंचाई की प्लानिंग, दूध उत्पादन सहित दूसरे मामलों की जानकारी अशोक वर्णवाल देंगे। एडमिशन और ड्रॉप आउट रेट, शिक्षा की गुणवत्ता समेत दूसरे मामलों की जानकारी देने का जिम्मा संजय गोयल पर है। पीएम जनमन, दजगुआ, पीएम आवास व स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा, आजीविका मिशन, पंचायती राज, ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, इको सेंसेटिव जोन समेत कई दूसरे मामलों की जानकारी दीपाली रस्तोगी देंगी। 

1 अक्टूबर से कूनो में चीता सफारी की शुरुआत, खुले जंगल में नजर आएंगे 16 चीते

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श्योपुर  श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज एक अक्टूबर पर्यटक चीतों का रोमांच देख सकेंगे। इसी दिन से नेशनल पार्क में चीता सफारी की शुरुआत हो जाएगी। कूनो पार्क में बाड़ों के अतिरिक्त खुले जंगल में 16 चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो और मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य में कुल 27 चीते हैं। जिनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। बता दें कि चीता पुनर्वास परियोजना के तहत 17 सितंबर 2022 को अपने जन्म दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाकर यहां छोड़े गए थे। वर्तमान में कूनो पार्क में 24 चीते हैं, जिसमें से आठ चीते और शावक बाड़े में हैं। शेष खुले जंगल में हैं जिनका दीदार पर्यटक कर सकेंगे। प्रदेश में चीतों के दूसरे रहवास मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य यहां से भेजे गए तीन चीते बाड़ों में हैं। पर्यटन विभाग पार्क खुलने के बाद यहां कूनो रिट्रीट के आयोजन की भी तैयारी कर रहा है, जिसमें पर्यटकों के लिए रहने व खान-पान सहित कई अतिरिक्त सुविधाएं होंगी। एक अक्टूबर से पर्यटक यहां पहुंचेंगे, इसलिए वन विभाग की ओर से कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर भी कूनो सफारी को हाइलाइट किया गया है। हेल्पडेस्क भी बनाई गई है, जिस पर चीतों को लेकर पर्यटकों की जिज्ञासा आ रही है। ऐसे कर सकते हैं बुकिंग कूनो नेशनल पार्क में चीतों समेत अन्य वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। छह लोगों के लिए कूनो में सफारी का शुल्क जिप्सी सहित 4,500 रुपये हैं, वहीं अगर आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो 1,200 रुपये ही लगेंगे। पार्क के अहेरा गेट और पीपलवाड़ी गेट से कूनो सफारी के लिए जा सकते हैं। इसी क्षेत्र में चीतों को छोड़ा गया है। उत्तम कुमार शर्मा (सीसीएफ व फील्ड डायरेक्टर कूनो पार्क) के अनुसार, वर्जन कूनो में चीतों को देखने के लिए पर्यटक एक अक्टूबर से आ सकते हैं। प्रबंधन की ओर से तैयारियां की गई हैं। शुल्क कितना होगा? पर्यटन विभाग सफारी के शुभारंभ के साथ ही पर्यटकों के लिए कुनो रिट्रीट का भी आयोजन कर रहा है, जहां आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. सफारी का एक निश्चित शुल्क भी है छह लोगों के लिए जिप्सी की सवारी का शुल्क ₹4,500 है, जबकि निजी वाहन से सफारी का शुल्क केवल ₹1,200 होगा. ऐसे करें ऑनलाइन बुकिंग पर्यटक वेबसाइट पर बुकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर जाना होगा. वन विभाग ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर कूनो सफारी को भी प्रदर्शित किया है. एक हेल्पडेस्क भी बनाया गया है. आप वहां से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.  सतपुड़ा के लिए इंतजार कोर जोन 10 अक्र्टूबर तक बंद रहेगा। तेज बारिश से मढ़ई, चूरना की सड़कें खराब हो गई हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया। ऐसे पहुंचें टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क (Tiger reserve in MP) पहुंचने नजदीकी एयरपोर्ट भोपाल, जबलपुर, बनारस, प्रयागराज, नागपुर हैं। रेलवे स्टेशन नर्मदापुरम, शहडोल, सिवनी, दमोह, मंडला फोर्ट, त्यौहारी, मड़वास, नागपुर हैं। ये जानवर देख सकते हैं बाघ, चीते (कूनो में), तेंदुआ, हाथी, बायसन, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, गौर, भालू, सांभर, चौसिंगा, चिंकारा के साथ ही विलुप्त प्रजाति के पक्षी भी। 10 टाइगर रिजर्व – संजय दुबरी, सीधी – पन्ना, पन्ना, छतरपुर – सतपुड़ा, नर्मदापुरम – कान्हा, मंडला-बालाघाट – बांधवगढ़, शहडोल – पेंच, सिवनी-छिंदवाड़ा – वीरांगना दुर्गावती, दमोह – डॉ. विष्णु वाकणकर (रातापानी), भोपाल सीहोर, रायसेन – माधव- शिवपुरी – नौरादेही- सागर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया जिले के लगभग 1536 वर्ग किमी में फैला है। पार्क प्रबंधन ने सफारी टिकट दर में 10% और गाइड चार्ज में 65% की बढ़ोत्तरी की है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर है। निजी वाहन से पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया है। कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला-बालाघाट जिले में लगभग 2,051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर और निकटतम रेलवे स्टेशन चिरईडोंगरी है। पेंच टाइगर रिजर्व कुछ हिस्सा महाराष्ट्र और कुछ मध्यप्रदेश के सिवनी, छिंदवाड़ा जिले से लगा है। यहां ब्लैक पैंथर आकर्षण का केंद्र होता है। हालांकि ये कभी-कभार ही दिखते हैं। प्रदेश के नेशनल पार्क -1- वन विहार, भोपाल -2- कूनो पालपुर, श्योपुर -3- माधव- शिवपुरी -4- कान्हा- मंडला से बालाघाट -5- बांधवगढ़ – उमरिया -6- सतपुड़ा – भोपाल -7- पेंच – सिवनी-छिंदवाड़ा -8- पन्ना – पन्ना -9- डायनासोर जीवाश्म पार्क – धार -10- रानी दुर्गावती- दमोह -11- संजय दुबरी- सीधी-सिंगरौली जंगल या टाइगर सफारी के लिए कैसे करें एडवांस बुकिंग इसके लिए आपको मध्य प्रदेश के वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://forest.mponline.gov.in/ पर जाना होगा या फिर आप अपने पसंदीदा टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क को चुनकर उसकी वेबसाइट पर एडवांस बुकिंग के लिए एप्लाई कर सकते हैं। 

क्या खतरे में है हमारी चाय? असम में क्लाइमेट चेंज की वजह से बागानों में मचा हाहाकार

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नईदिल्ली  असम के चाय बागानों में धूप की तपिश में काम करने वाली मजदूर कामिनी कुरमी सिर पर छाता बांध लेती हैं. इससे हाथ खाली रहते हैं. नाजुक पत्तियां तोड़ना आसान हो जाता है. लेकिन गर्मी इतनी तेज है कि सिर चकराने लगता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है. कामिनी जैसी सैकड़ों महिलाएं अपनी कुशल उंगलियों से चाय की फसल काटती हैं. मशीनें आम फसलों को जल्दी काट लेती हैं, लेकिन चाय के लिए हाथों की जरूरत पड़ती है. क्लाइमेट चेंज से मौसम की मार बढ़ रही है. इससे चाय की फसल सूख रही है.  असम और दार्जिलिंग जैसी मशहूर चाय का भविष्य खतरे में है. दुनिया का चाय व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर से ज्यादा का है. टी रिसर्च एसोसिएशन की वैज्ञानिक रूपंजली देब बरुआ कहती हैं कि तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव अब कभी-कभी की बात नहीं, बल्कि नई सामान्य स्थिति है. गर्मी और अनियमित बारिश से फसलें कम हो रही हैं.  भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है. लेकिन घरेलू खपत बढ़ने से निर्यात घट रहा है. पिछले साल उत्पादन 7.8% गिरकर 1.3 अरब किलोग्राम रह गया. खासकर असम में भारी नुकसान हुआ. इससे कीमतें 20% बढ़ गईं. औसतन 201.28 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई. 30 साल में चाय की कीमतें सालाना सिर्फ 4.8% बढ़ीं, जबकि गेहूं-चावल की 10%. 40 साल से चाय बागान में काम करने वाली मंजू कुरमी कहती हैं कि पहले 110 किलोग्राम पत्तियां तोड़ लेती थीं. लेकिन अब गर्मी बढ़ने से सिर्फ 60 किलोग्राम ही संभव है. गर्मी से मजदूर थक जाते हैं.  फैक्ट्रियों में पत्तियां सुखाने के दौरान हर 30 मिनट में ब्रेक लेना पड़ता है. पुतली लोहार, जो 12 साल से फैक्ट्री में काम कर रही हैं, कहती हैं कि हम दीवार पर लगे पंखों के नीचे ठंडक लेते हैं. फैक्ट्री में सूखी पत्तियों को बड़े ड्रम में कुचला जाता है. फिर महिलाएं कैप, मास्क और एप्रन पहनकर चेक करती हैं. असम की चाय का सबसे अच्छा हिस्सा दूसरी फ्लश है, जो खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर है. लेकिन गर्म लहरें इसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं. गर्मी और नमी जरूरी है, लेकिन लंबे सूखे और अचानक भारी बारिश बर्बाद कर देती हैं.  टिनसुकिया जिले के 82 साल पुराने बागान के मालिक मृतुनजय जालान कहते हैं कि ऐसे मौसम से कीट बढ़ते हैं. हमें सिंचाई करनी पड़ती है, जो पहले कम इस्तेमाल होती थी. टी रिसर्च के मुताबिक 1921 से 2024 तक बारिश 250 मिमी कम हुई. न्यूनतम तापमान 1.2 डिग्री बढ़ा. इस मॉनसून में बारिश औसत से 38% कम रही. कीटों से पत्तियां भूरी हो जाती हैं, छेद हो जाते हैं. इससे फसल का समय छोटा हो गया. वरिष्ठ चाय उत्पादक प्रभात बेजबोरुआ कहते हैं कि चाय की कीमतें अब अस्थिर हैं. इस साल सुधार हो रहा, लेकिन अगले साल कम उत्पादन से कीमतें बढ़ेंगी. चाय उद्योग पहले से कर्ज में डूबा है. लागत सालाना 8-9% बढ़ रही – मजदूरी और खाद महंगी. इंडियन टी एसोसिएशन के चेयरमैन हेमंत बंगुर कहते हैं कि पिछले साल सूखे से फसल घटी, तो पेड़ काटे, खाद गड्ढे बनाए और कीटनाशक इस्तेमाल बढ़ाया. इससे खर्च और बढ़ा.  असम में औपनिवेशिक काल के कई पेड़ 40-50 साल पुराने हो चुके. वे कम फलते हैं. मौसम सहन नहीं कर पाते. नए पौधे लगाने के लिए सरकारी मदद कम है. पिछले दशक में घरेलू खपत 23% बढ़कर 1.2 अरब किलोग्राम हो गई. उत्पादन सिर्फ 6.3% बढ़ा. 2024 में भारत का वैश्विक व्यापार हिस्सा 12% था.  निर्यात घट रहा, आयात दोगुना होकर 45.3 मिलियन किलोग्राम पहुंचा. कोलकाता के एक निर्यातक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भारत में कमी से वैश्विक सप्लाई टाइट हो सकती है. कीमतें बढ़ेंगी. केन्या और श्रीलंका में भी उत्पादन कम हो रहा. 

राजस्थान का नया शैक्षणिक कैलेंडर: 1 अप्रैल से शुरुआत, शिक्षकों को चिंता है तेज़ी से काम निपटाने की

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जयपुर   राजस्थान के शिक्षा महकमे ने आगामी शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूलों के अधिग्रहण से छात्रों की बाधित होने वाली पढ़ाई की भरपाई होगी. साथ ही सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा भी कर पाएंगे. हालांकि, शिक्षक इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि राजस्थान में 1 अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने की कवायत राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी इस तरह के प्रयोग किए गए हैं, जो फेल हुए हैं. मार्च तक परीक्षा और रिजल्ट : शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने बताया कि 1 अप्रैल से शुरू करने का संदर्भ ही यही है कि परीक्षा और रिजल्ट का काम मार्च तक पूरा करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है. इस सत्र में सितंबर खत्म होने को आ गया है, लेकिन अब तक छात्रों को किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं और यदि मार्च में सत्र खत्म होगा तो छात्रों तक किताबें पहुंचना भी एक चुनौती होगी. इसलिए सरकार की ये सोच राजस्थान की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी ये अनुभव किया जा चुका है, बावजूद इसके बार-बार प्रयोग करके शिक्षा विभाग को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. ये सरकार को बंद करना चाहिए. कम से कम इस विषय में शिक्षा से जुड़े हुए शिक्षक संगठनों से बातचीत करके कोई निर्णय करना चाहिए. तानाशाही तरीके से जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वो कभी भी शिक्षा के लिए फलदाई नहीं रहे और फिर सरकार को बाद में बदलाव करना पड़ता है. किसने क्या कहा, सुनिए. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में रखना होगा तारतम्य : हालांकि, शिक्षकों का एक धड़ा इस पहल का स्वागत भी कर रहा है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल या उससे भी पहले से एडमिशन शुरू कर देते हैं. जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई से प्रवेश उत्सव शुरू करते हैं. इससे सरकारी स्कूल पीछे रह जाते हैं और नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती. यदि सत्र 1 अप्रैल से सत्र शुरू होगा, तो सरकारी स्कूलों का नामांकन निश्चित रूप से बढ़ेगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में लगभग 35 से 40 दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण जो पढ़ाई के दिन कम हो रहे हैं, उनकी भरपाई भी होगी. हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि विभाग को इसके लिए विशेष तैयारी करनी होगी. सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं के टाइम टेबल को लेकर रहेगी. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं को पहले आयोजित करना जरूरी होगा. शिक्षा मंत्री का दावा- छात्रों और अभिभावकों को राहत : हालांकि, शिक्षा मंत्री इस प्रयोग से आश्वस्त हैं. मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये अभी प्रस्ताव है. अंतिम मोहर लगनी बाकी है, लेकिन यदि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है तो गरीब बच्चों को भी लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. निजी स्कूल फीस के मामले में कभी-कभी अनुचित तरीके अपनाते हैं. ऐसे में ये नई व्यवस्था अभिभावकों को भी राहत देगी. दिलावर ने ये भी स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई का टेस्ट लिया जाएगा. विभाग ये सुनिश्चित करेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनका कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में ही मिल जाए, ताकि परीक्षा में छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक शिक्षक घर-घर जाकर एडमिशन लेंगे, जिससे जुलाई में प्रवेश उत्सव की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, ड्रॉपआउट छात्रों को प्रोत्साहित कर उनका भी संबंधित कक्षा में दाखिला कराया जाएगा. शिक्षा विभाग की होगी बड़ी 'परीक्षा' : बहरहाल, 1 अप्रैल से सत्र शुरू होने से कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षाएं 31 मार्च तक खत्म कर रिजल्ट जारी करना होगा. अप्रैल के पहले सप्ताह में किताबें, वर्क बुक छात्रों तक पहुंचानी होगी, क्योंकि यदि सामग्री अप्रैल तक नहीं पहुंचती है तो ग्रीष्मावकाश में इसे छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा. वहीं, यदि इसे मूर्त रूप मिलता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों और उनके अभिभावकों को मिलेगा.