Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

25 करोड़ 28 लाख लोगों ने नवीनीकृत कॉरिडोर के लोकार्पण से 30 सितंबर तक किए काशी विश्वनाथ के दर्शन

यूपी की इकोनॉमी को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने दिया सवा लाख करोड़ का बूस्टअप डोज पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के मिशन से काशी ने बनाया कीर्तिमान 25 करोड़ 28 लाख लोगों ने नवीनीकृत कॉरिडोर के लोकार्पण से 30 सितंबर तक किए काशी विश्वनाथ के दर्शन दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकार्पण के बाद से नित नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा कॉरिडोर सुरक्षा का माहौल, बेहतर सुविधाएं और शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया ‘मोदी-योगी मॉडल’ से दौड़ रहा पूर्वांचल के विकास का चक्का,  मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बुलंदियों पर उत्तर प्रदेश का धार्मिक पर्यटन देशी विदेशी पर्यटकों के उत्साह से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर लोगों को मिल रहा रोजगार प्रति व्यक्ति औसतन 04 से 05 हजार रुपए तक खर्च के हिसाब से साढ़े तीन साल में प्रदेश को सवा लाख करोड़ की सौगात मुख्यमंत्री योगी के मिशन से काशी और आसपास के लाखों लोगों के लिए रोजगार की पैदा हुईं अपार संभावनाएं लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से श्री काशी विश्वनाथ धाम ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद से अब तक लगभग 25 करोड़ 28 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को अनुमानित सवा लाख करोड़ रुपये का बूस्टअप डोज मिला है। व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण ने न केवल काशी की छवि को बदला है, बल्कि पूरे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों में भी अप्रत्याशित वृद्धि की है। देश के विभिन्न प्रांतों से लेकर दुनिया के तमाम देशों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लगातार बढ़ते आगमन से स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों, ठेले वालों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के मॉडल ने यूपी की छवि को दी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण और एयरपोर्ट से लेकर गंगा घाट तक शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। धार्मिक पर्यटन के इस मॉडल ने यूपी की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। सिर्फ काशी नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति हो रही तेज संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर राजनाथ के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम में आने वाला पर्यटक औसतन 05 हजार रुपये से अधिक ही खर्च करता है। फिर भी न्यूनतम अनुमानित जीडीपी ग्रोथ के लिए यदि 04 हजार से 05 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के आंकड़े से जोड़ें तो इन साढ़े तीन वर्षों में करीब सवा लाख करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह प्रदेश की अर्थव्यवस्था में हुआ है। यह राशि न केवल काशी बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति को तेज कर रही है। यूपी में रिपलिंग इफेक्ट से पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि काशी विश्वनाथ महादेव के धाम पधारने वाले 70 प्रतिशत श्रद्धालु दक्षिण भारत से तथा लगभग 15 प्रतिशत श्रद्धालु अन्य राज्यों एवं जनपदों से होते हैं। यह श्रद्धालु काशी दर्शन के पश्चात् प्रायः विंध्यवासिनी धाम, तीर्थराज प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिष इत्यादि तीर्थों पर भी जाते हैं। इस प्रकार अर्थव्यवस्था में रिपलिंग इफेक्ट भी उत्पन्न होता है और पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि होती है। पूरे देश के लिए विकास का मॉडल बन गई है अपनी काशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से काशी और आसपास के क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी ने विकास की नई मिसाल पेश की है, वह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल का डेवलपमेंट तेज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य के विकास का सशक्त साधन बना रही है। अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल जैसे स्थलों का विकास भी तेज गति से किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अब पूरे प्रदेश में धार्मिक नगरों का विकास किया जा रहा है।

धार्मिक आस्था की मिसाल: 245 किमी की पदयात्रा कर मैहर में जुटे 5000 श्रद्धालु, आज होगा मुर्ति विसर्जन

मैहर  भक्ति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला जब कोतमा से माँ दुर्गा की ऐतिहासिक पदयात्रा मंगलवार को मैहर पहुँची। 245 किलोमीटर की कठिन यात्रा और 5000 से अधिक श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा के साथ यह भव्य यात्रा माँ शारदा के दरबार में समर्पित हुई। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा का रथ डेल्हा मोड़ पहुँचा, 'जय माँ शारदा' के जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा। डमरू, ढोल और शंखध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, डेल्हा सरपंच अभिषेक जायसवाल, समाजसेवी आदिनारायण शुक्ला समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने माँ के जयकारों के साथ यात्रा का स्वागत किया। विधायक चतुर्वेदी ने माँ दुर्गा की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर पुष्पवर्षा की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। माँ के चरणों में सबकी आस्था, सबकी भक्ति, यही है कोतमा से मैहर यात्रा की शक्ति।' यह यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि आस्था, अनुशासन और एकता का जीवंत प्रतीक भी है। माँ के जयकारों से गूंजता मैहर आज इस दिव्य यात्रा का साक्षी बन गौरवान्वित हो उठा है। तीन दशकों की अविरल परंपरा, 1987 में हुई थी शुरुआत यात्रा संयोजक हनुमान गर्ग ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा की शुरुआत सन् 1987 में महज 100 श्रद्धालुओं के जत्थे से हुई थी। तब से निरंतर यह कोतमा से माँ शारदा धाम, मैहर तक पैदल यात्रा का रूप ले चुकी है। इस वर्ष यह यात्रा 2 अक्टूबर को कोतमा बस स्टैंड परिसर से आरंभ होकर फुनगा, अनूपपुर, बुढ़ार, शहडोल, घुनघुटी, पाली, उमरिया, चंदिया और बरही होते हुए मैहर पहुँची। पाली नगर में माँ की यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। नगरवासियों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और श्रद्धालुओं के लिए चाय, नाश्ता और पेय पदार्थों की सेवा की। वहीं माँ बिरासिनी मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालुओं ने माँ से आशीर्वाद प्राप्त किया। माँ काली के रूप में सजे श्रद्धालु बने आकर्षण का केंद्र यात्रा के दौरान 8 से 10 श्रद्धालु माँ काली के रूप में सजे नृत्य करते हुए चल रहे थे। उनके भावनात्मक प्रदर्शन से यात्रा की भव्यता और भी बढ़ गई। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भक्तों के लिए भोजन, जल, विश्राम और चिकित्सा व्यवस्था की गई थी। स्थानीय नगरवासियों की सेवा भावना इस यात्रा की विशेष पहचान बनी। आज होगा विसर्जन, माँ शारदा के दरबार में सामूहिक भंडारा माँ की प्रतिमा का विसर्जन आल्हा-ऊदल के ऐतिहासिक तलैया में किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु माँ शारदा देवी मंदिर में दर्शन-पूजन कर सामूहिक भंडारा में सम्मिलित होंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की भव्य पदयात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा।

सस्ता इंटरनेट, डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज: पीएम मोदी ने किया IMC 2025 का शुभारंभ

नई दिल्ली भारत और एशिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी मेले के तौर पर पहचान रखने वाले इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 का आज आगाज हो गया है। आईएमसी 2025 का आयोजन 8 से 11 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस इवेंट का उद्घाटन करते हुए लोगों को संबोधित किया। मोदी बोले- 'तेजी से बदल रही है टेक्नोलॉजी' पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी टेक क्रांति में अहम योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि पहले फ्यूचर का मतलब अगला शतक या अगले 10-20 साल होते थे, लेकिन टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि अब हम कहते हैं, "द फ्यूचर इज हेयर एंड नाऊ।" चाय की कीमत से भी कम में डेटा पीएम मोदी ने भारत में सस्ते मोबाइल डेटा की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, "आज देश में 1 जीबी वायरलेस डेटा की कीमत एक कप चाय की कीमत से भी कम है। डेटा खपत की बात करें, तो भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इसका मतलब है कि डिजिटल कनेक्टिविटी अब कोई विलासिता या विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।" मोदी ने कहा,"मैंने प्रदर्शनी में लगे कुछ स्टॉल्स देखे जिसमें मुझे भविष्य की झलक दिखी। टेलीकॉम कनेक्टिविटी, 6जी टेक्नोलॉजी, एआई, साइबर सिक्योरिटी सेमीकंडक्टर्स, ड्रोन-स्पेस टेक्नोलॉजी, डीप-सी और ग्रीन-टेक आदि समेत अन्य टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में आने वाला समय बिलकुल ही अलग होने जा रहा है।" पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि 6जी टेक्नोलॉजी में भारत दुनिया को लीड करेगा। मोदी ने इंटरनेट स्पीड का महत्व बताते हुए कहा कि इंटरनेट स्पीड केवल नंबर और रैंकिंग के लिए ही नहीं होते, बल्कि अच्छी इंटरनेट स्पीड "इज ऑफ लिविंग" को भी बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा, "इंटरनेट स्पीड बढ़ने से कनेक्टिविटी और आसान हो जाती है। टेक्नोलॉजी ने आम नागरिकों को वो अधिकार दिलाने में सहायता की है जो पहले मिलना मुश्किल थे और इसमें टेलीकॉम सेक्टर ने बड़ी भूमिका निभाई है।" 2 लाख ग्राम पंचायतों में पहुंचा केबल इंटरनेट पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत नेट प्रोजेक्ट ने 2 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा है। मोदी ने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब (ATL) मिशन में 10,000 लैब्स के जरिए 75 लाख बच्चों को कटिंग-एज टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा चुका है। पीएम ने आगे कहा कि आज तकनीकी संस्थानों में 100 यूज्ड केस लैब्स की शुरूआत से इसका ग्राफ बढ़ने वाला है। एशिया का सबसे बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम, मीडिया और टेक्नोलॉजी इवेंट है। इस बार इसमें दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता, और टेक इनोवेटर्स हिस्सा लेंगे। चार दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशन, 6G, और फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर्स जैसे कई अहम विषयों पर प्रदर्शनी और चर्चा होगी। IMC 2025 में 150 से ज्यादा देशों के 1.5 लाख से अधिक विजिटर्स और 400 से ज्यादा कंपनियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में 800 से ज्यादा स्पीकर्स और 100 से अधिक सेशन होंगे, जिनमें जापान, कनाडा, ब्रिटेन, रूस, आयरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे। इस इवेंट को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आसमान में गूँजी ‘भारतीय वायुसेना’ की गूँज: 93वें स्थापना दिवस पर CDS व तीनों सेनाओं के प्रमुख हिंडन पहुंचे

गाजियाबाद वायुसेना दिवस पर मुख्य आयोजन गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर किया जाएगा। यह पहला अवसर है, जब वायुसेना इस आयोजन को दो हिस्सों में कर रही है। हिंडन एयरबेस पर वायुसैनिकों की परेड और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का उद्बोधन होगा। वायुसेना आज अपना 93वां स्थापना दिवस मना रही है। इस मौके पर बुधवार सुबह ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर वायुसेना को बधाई दी। मुर्मू ने लिखा, "वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई दी।" वहीं, पीएम मोदी ने कहा, "भारतीय वायुसेना वीरता, अनुशासन और सटीकता की प्रतीक है। उन्होंने हमारे आकाश की सुरक्षा में, अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी, महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। उनकी प्रतिबद्धता, व्यावसायिकता और अदम्य साहस पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है।" दूसरी तरफ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद सभी गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पहुंचे, जहां वायुसैनिकों की परेड का आयोजन हुआ। वायुसेना प्रमुख ने परेड का निरीक्षण किया और वायुसैनिकों से सलामी ली। इसके बाद उनका उद्बोधन होगा। गौरतलब है कि वायुसेना दिवस पर मुख्य आयोजन गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर किया जा रहा है। यह पहला अवसर है, जब वायुसेना इस आयोजन को दो हिस्सों में कर रही है। हिंडन एयरबेस पर वायुसैनिकों की परेड और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का उद्बोधन हो रहा है, जबकि लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के हवाई करतब का प्रदर्शन 9 नवंबर को गुवाहाटी में किया जाएगा। हिंडन पर इस बार मिग-21 भी खड़ा नजर आया। छह दशक की सेवा के बाद यह विमान पिछले ही दिनों वायुसेना से रिटायर हुआ है। हालांकि, इस दौरान राफेल और सुखोई-30 जैसे मारक एयरक्राफ्ट भी लोगों के मुख्य आकर्षण का विषय होंगे, जिन्होंने पाकिस्तान को मजा चखाने में अहम भूमिका निभाई। गुवाहाटी में फ्लाई पास्ट की ये है वजह इस साल वायुसेना दिवस पर हिंडन में फ्लाई पास्ट न होने की वजह राजधानी क्षेत्र का बढ़ता एयर ट्रैफिक है। फ्लाई पास्ट आयोजित करने की सूरत में अभ्यास के लिए भी कुछ दिन एयर ट्रैफिक बाधित करना पड़ता। इसके अलावा सघन आबादी क्षेत्र होने के कारण यहां बर्ड हिट का अंदेशा हमेशा बना रहता है। इसीलिए फ्लाई पास्ट को गुवाहाटी शिफ्ट किया गया है। गुवाहाटी का मौसम भी इन दिनों फ्लाई पास्ट के अनुकूल नहीं है, लिहाजा इसके लिए 9 नवंबर का दिन चुना गया है।  

बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अब रिजर्वेशन टिकट की कैंसिलेशन संभव, रेल मंत्री का ऐलान

नई दिल्ली  अब अगर आपकी यात्रा की तारीख बदल जाए तो टिकट रद्द करने और कैंसिलेशन चार्ज देने की टेंशन नहीं रहेगी. भारतीय रेलवे ने एक नया नियम लागू करने की घोषणा की है जिसके तहत यात्री अपनी कन्फर्म ट्रेन टिकट की तारीख बिना किसी रद्दीकरण शुल्क (cancellation fee) के बदल सकेंगे. यह सुविधा जनवरी 2026 से लागू होगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने बताया कि इस नई पॉलिसी का मकसद यात्रियों को ज्यादा लचीलापन और सुविधा देना है. फिलहाल अगर किसी को अपनी यात्रा स्थगित करनी होती है, तो टिकट रद्द करनी पड़ती है और उसका शुल्क भी देना पड़ता है. नई व्यवस्था से यह झंझट खत्म हो जाएगा और यात्री आसानी से अपनी यात्रा की तारीख बदल पाएंगे. कैसे काम करेगी नई सुविधा नई व्यवस्था के तहत यात्री अपनी टिकट की तारीख केवल तब बदल सकेंगे जब नई तारीख पर सीट उपलब्ध होगी. अगर नई टिकट का किराया पुरानी से ज्यादा होगा तो यात्री को किराये का अंतर देना होगा. लेकिन अगर किराया समान है या कम है, तो किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. रेलवे ने बताया कि इस सुविधा का लाभ सिर्फ उन्हीं टिकटों पर मिलेगा जो कन्फर्म होंगी. यानी वेटिंग या आरएसी टिकटों पर फिलहाल यह सुविधा लागू नहीं होगी. यात्रियों को क्या फायदा होगा यह कदम रेलवे के यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. पहले टिकट रद्द करने पर बेस फेयर का 25 से 50 प्रतिशत तक कैंसिलेशन चार्ज कट जाता था, लेकिन अब यात्री सिर्फ तारीख बदलवाकर बिना नुकसान के यात्रा कर सकेंगे. इस फैसले से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी योजनाएं अचानक बदल जाती हैं. चाहे ऑफिस मीटिंग आगे बढ़े या पारिवारिक वजह से यात्रा टल जाए, अब टिकट दोबारा खरीदने की जरूरत नहीं होगी. क्या है रेलवे का मकसद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि रेलवे यात्रियों को “ट्रैवल फ्रेंडली” अनुभव देने की दिशा में लगातार सुधार कर रहा है. डिजिटल टिकटिंग सिस्टम के विस्तार के साथ अब यात्रियों को ज्यादा नियंत्रण और सुविधा देने की कोशिश की जा रही है. रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद बुकिंग सिस्टम और आईआरसीटीसी (IRCTC) प्लेटफॉर्म में तकनीकी बदलाव किए जाएंगे ताकि यात्री आसानी से ऑनलाइन ही अपनी यात्रा की तारीख बदल सकें.  

राजधानी में जनजातीय गौरव दिवस को लेकर कार्यशाला का आयोजन: CM साय हुए शामिल

रायपुर राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज जनजातीय गौरव दिवस को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस वर्ष राज्य सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस को भव्य और ऐतिहासिक रूप से मनाने की व्यापक योजना बनाई है। पिछले वर्ष जशपुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम बेहद सफल रहा था, जिसकी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, जिससे देशभर में जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान मिला। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “हमारे जनजातीय समाज के अनेक वीर और गौरवशाली इतिहास हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिल पाया। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे सभी जननायकों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाया जाए।” उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष जनजातीय समाज के उत्थान के लिए विशेष बजट निर्धारित करती है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में सीधे लाभ मिल रहा है। साय ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर बोलते हुए कहा, “भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। उन्होंने आदिवासी समाज को एकजुट कर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की अलख जगाई थी। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है।” मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष जनजातीय गौरव दिवस के मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रपति जी 16 नवंबर तक विदेश दौरे पर हैं, इसलिए कार्यक्रम की तारीख को 1-2 दिन आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि वे स्वयं इस गौरवपूर्ण आयोजन में शामिल हो सकें।” कार्यशाला में जनजातीय विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, और विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, कला, और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष का आयोजन केवल एक दिवस तक सीमित न रह जाए, बल्कि पूरे राज्य में जनजातीय गौरव और विरासत का उत्सव बन सके।

विकास और पर्यावरण में संतुलन को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता का बनेगा प्रतीक

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेगा पीएम मित्र पार्क- मुख्यमंत्री योगी उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ योगी सरकार का हरियाली पर भी विशेष फोकस लखनऊ में बन रहे पीएम मित्र पार्क में 11% भूमि होगी हरियाली और फलदार वृक्षारोपण को समर्पित विकास और पर्यावरण में संतुलन को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता का बनेगा प्रतीक   प्रोजेक्ट के तहत ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और वाटर रिजर्वायर से होगा प्राकृतिक संतुलन 55% भूमि पर होगी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की स्थापना, 3 फीसदी भूमि पर बनेंगे रेसीडेंस पीएम मित्र पार्क के माध्यम से 1000 करोड़ से अधिक निवेश और एक लाख रोजगार का लक्ष्य   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार एक नए औद्योगिक युग की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य में प्रस्तावित पीएम मित्र (पीएम मित्र) पार्क न केवल उद्योगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक आदर्श उदाहरण बनेगा। सरकार की नीति “विकास के साथ पर्यावरण” को साकार करने की दिशा में यह पार्क एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी औद्योगिक विकास परियोजना में हरियाली और पारिस्थितिक संतुलन से कोई समझौता नहीं होगा। यही कारण है कि लखनऊ और हरदोई जिलों में प्रस्तावित पीएम मित्र पार्क का लेआउट प्लान पर्यावरणीय दृष्टि से पूरी तरह संतुलित रखा गया है। 11 फीसदी भूमि होगी ग्रीनरी को समर्पित ड्राफ्ट लेआउट प्लान के अनुसार, 55 फीसदी भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। वहीं, 3 फीसदी भूमि को रेसीडेंशियल उपयोग, 4 फीसदी इंस्टीट्यूशनल, 2 फीसदी ट्रांसपोर्ट हब, और 4 फीसदी यूटिलिटीज व एमेनिटीज के लिए आरक्षित किया गया है। सबसे खास बात यह है कि पूरे पार्क की 11 फीसदी भूमि ग्रीनरी और फ्रूट प्लांटेशन के लिए सुरक्षित रखी गई है, जिसमें ग्रीन एरिया, ग्रीन बेल्ट और बफर जोन विकसित किए जाएंगे। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षित रखेगा। इसके अलावा, 13 फीसदी क्षेत्र में नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जबकि 0.1 फीसदी हिस्से में मौजूदा सड़कों को सुदृढ़ किया जाएगा। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 2 फीसदी भूमि नाला और वाटर रिजर्वायर के लिए और 0.5 फीसदी भूमि रीक्रिएशनल उपयोग के लिए निर्धारित की गई है। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 1680 करोड़ रुपए सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1,680 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। यह पार्क कुल 100 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक रोजगार सृजन और 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। पार्क में पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री, ऊर्जा-संवेदनशील डिजाइन, वर्षा जल संचयन, सोलर पावर और ई-वेस्ट मैनेजमेंट जैसे प्रावधान भी शामिल किए जाएंगे। इस पहल के माध्यम से उत्तर प्रदेश न सिर्फ“भारत का ग्रोथ इंजन” बनेगा, बल्कि“ग्रीन स्टेट मॉडल” के रूप में भी विकसित होगा।   

उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बनेगी अयोध्या, योगी सरकार ने संवार दिया बृहस्पति कुंड परिसर

अयोध्या में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भव्य स्वागत  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बृहस्पति कुंड में दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों की मूर्तियों का करेंगी अनावरण  उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बनेगी अयोध्या, योगी सरकार ने संवार दिया बृहस्पति कुंड परिसर अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण की साक्षी बनी, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचीं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय मंत्री का गरिमामय स्वागत किया। स्वागत के दौरान वाद्ययंत्रों की पारंपरिक धुनों ने अयोध्या की सांस्कृतिक आत्मा को स्पंदित कर दिया। एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय मंत्री का काफिला सिविल लाइन्स स्थित होटल रेडिशन पहुंचा, जहां कुछ देर विश्राम के बाद वह अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हुईं। बृहस्पति कुंड में होगा सांस्कृतिक आयोजन निर्मला सीतारमण का यह दौरा टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन के लिए है। इस अवसर पर वह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संयुक्त रूप से दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों संत त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का अनावरण करेंगी। संगीत और भक्ति का संगम बनेगा बृहस्पति कुंड बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित की गई ये मूर्तियां भारतीय संगीत, भक्ति और कला परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं। इन संत संगीतज्ञों ने भक्ति संगीत को भारतीय संस्कृति का आत्मस्वर बनाया। अब उनकी मूर्तियों का अयोध्या की पावन भूमि पर स्थापित होना उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण है।

MP में कफ सिरप कांड: मौतों का आंकड़ा 21 पहुंचा, डिप्टी सीएम बोले – जांच जारी

छिंदवाड़ा  जहरीले कफ सिरप और दवाइयों ने मध्यप्रदेश के चार और मासूमों की जान ले ली। इन सभी की जान 24 घंटे के भीतर गई। इनमें छिंदवाड़ा जिले की दो साल की जायूशा यदुवंशी, डेढ़ साल की धानी डेहरिया, ढाई साल का वेदांत पंवार और वेदांश काकोडिय़ा शामिल हैं। दावा है कि इनमें से तीन बच्चों का इलाज परासिया के आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी ने किया था। जहरीली कोल्ड्रिफ सिरप लिखी गई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद ये बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती थे। काकोड़िया के मामले की जांच की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश अब तक 21 मासूमों को खो चुका है। इनमें 19 छिंदवाड़ा के हैं और दो बैतूल के हैं। इसमें से काकोड़िया की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।  बैतूल जिले के अधिकारी कफ सिरप को नहीं मान रहे मौतों का कारण बैतूल जिले के अधिकारी बच्चों की मौत जहरीली कफ सिरप से होना नहीं मान रहे, जबकि दोनों का इलाज परासिया के डॉ. सोनी ने ही किया था। इनके पास दवा के पर्चे भी मिल चुके हैं। अभी जहरीली सिरप व दवाओं का खतरा टला नहीं है। नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती पांच बच्चों की हालत नाजुक है। कुछ तो कोमा जैसी स्थिति में हैं। कुछ को लगातार डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। इस बीच बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। पांच बच्चों का इलाज नागपुर के अस्पतालों में चल रहा है. दो बच्चे सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH), दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और एक बच्चा एक निजी अस्पताल में भर्ती है. कई दिन से वेंटिलेटर पर थी धानी डहरिया तामिया के वार्ड 15 की डेढ़ वर्षीय धानी पुत्री नवीन डेहरिया कई दिन से वेंटिलेटर पर थी। सोमवार रात 11 बजे दम तोड़ दिया। किडनी फेल होने के बाद ब्रेन में गंभीर संक्रमण से जूझ रही थी। 10 लाख खर्च के बाद भी नहीं बचा वेदांत परासिया के रिधोरा के वेदांत की जान मंगलवार दोपहर गई। उसे सितंबर के पहले सप्ताह में डॉ. सोनी ने देखा था। 11 सितं. को रेफर किया था। उसे बचाने परिजन ने 10 लाख खर्च किए। दो साल की जायूशा ने भी तोड़ा दम जुन्नारदेव की दो वर्षीय जायूशा ने भी मंगलवार को एम्स नागपुर में दम तोड़ दिया। पिता राजेश ने बताया कि डॉ. सोनी ने कोल्ड्रिफ सिरप दी थी। इलाज में करीब 5 लाख रुपये खर्च किए। 3 साल के वेदांश की भी मौत लहगडुआ के 3 साल के वेदांश की तबीयत रविवार शाम बिगड़ी। टेस्ट में किडनीलिवर को नुकसान का पता चला। नागपुर में मंगलवार सुबह मौत हो गई। कौन सा सिरप दिया गया था, इसकी जांच की जा रही है। दवाओं की जांच हो, दो सप्ताह में जवाब मांगा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिवों को कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत को लेकर नोटिस जारी किया है। दवाओं की व्यापक जांच की जरूरत बताई। आयोग ने स्वत: संज्ञान भी लिया। दोनों किडनी फेल, बच्चा वेंटिलेटर पर बैतूल. आमला ब्लॉक में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से दो बच्चों की मौत के बाद अब टीकाबर्री गांव के साढ़े तीन साल के हर्ष यदुवंशी की हालत गंभीर है। किडनी फेल हो चुकी हैं। नागपुर के निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। परिजन के अनुसार एक माह पहले डॉ. सोनी से इलाज कराया था। सर्दी-खांसी के लिए दी गई दवा के बाद तबीयत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर नागपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने किडनी फेल होने की पुष्टि की। दिल्ली से जाएगी टीम दिल्ली से जाएगी टीम स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कफ सिरप की प्रयोगशाला जांच में डायथिलीन ग्लाइकॉल का खतरनाक रूप से उच्च स्तर पाया गया है, जो अत्यधिक जहरीला होता है। जांच के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली से एक विशेष टीम जल्द नागपुर जा सकती है। जिम्मेदारों पर एक्शन और जांच डिप्टी CM शुक्ला ने बताया कि मौतों के लिए जिम्मेदार सिरप तमिलनाडु स्थित एक कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी के मालिक, दवा देने वाले डॉक्टर और संबंधित खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई की गई है. सोमवार को, राज्य सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और FDA के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया और जांच के बीच राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला कर दिया. छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को कथित लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है और कोल्ड्रिफ के तमिलनाडु स्थित निर्माता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. घर-घर जाकर कोल्ड्रिफ बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश छिंदवाड़ा में लगभग 600 कफ सिरप की बोतलें मिली हैं, जिनमें से 443 बोतलें पहले ही बरामद की जा चुकी हैं. उन्होंने बताया कि मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर बची हुई बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें से कोई भी इस्तेमाल में न रहे. उनके अनुसार, सरकार इस घटना की गहन जांच कर रही है. नए ड्रग कंट्रोलर ने शुरू करवाई दवा की जांच औषधि प्रशासन कार्यालय ने प्रदेश में कफ सिरप की जांच शुरू कराई है। नवनियुत नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव ने बताया, मंगलवार को पदभार संभालने के बाद प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप और प्रतिबंधित कॉिबनेशन वाली दवाओं की जांच शुरू करा दी है। बिकते हुए पाए जाने पर तत्काल जत किए जाएंगे। विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बड़े मंच पर भारत-पाक ने मिलकर ट्रंप की इच्छा को ठुकराया, अमेरिका की चाल हुई विफल

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान को धमकी दे रहे थे. इस धमकी के खिलाफ अब भारत तालिबान के साथ खड़ा हो गया है. अफगानिस्तान को लेकर यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मोड़ दिखाता है. भारत ने तालिबान, पाकिस्तान, चीन और रूस के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस सौंपने की बात कही थी. यह फैसला उस समय आया है जब तालिबान शासित अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी इस हफ्ते भारत की ऐतिहासिक यात्रा पर आने वाले हैं. मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशन ऑन अफगानिस्तान’ की सातवीं बैठक में भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान सहित 10 देशों ने हिस्सा लिया. बेलारूस के प्रतिनिधि भी अतिथि के रूप में मौजूद रहे. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में किसी देश का नाम लिए बिना कहा गया, ‘प्रतिभागियों ने अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में किसी भी देश की ओर से सैन्य ढांचे की तैनाती के प्रयासों को अस्वीकार्य बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के खिलाफ है.’ यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप की योजना की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप और तालिबान भिड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मांग की थी कि तालिबान अमेरिका को बागराम एयरबेस वापस सौंप दे. यह वही बेस है, जहां से अमेरिका ने 2001 के बाद ‘वॉर ऑन टेरर’ यानी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध अभियान चलाया था. 18 सितंबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, ‘हमने वह बेस उन्हें मुफ्त में दे दिया, अब हम उसे वापस चाहते हैं.’ उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी लिखा था- ‘अगर अफगानिस्तान ने बाग्राम एयरबेस वापस नहीं किया तो नतीजे बुरे होंगे.’ तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ट्रंप की मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘अफगान किसी भी हाल में अपनी जमीन किसी और को नहीं देंगे. हम अगले 20 साल युद्ध लड़ने को तैयार हैं.’ मॉस्को फॉर्मेट वार्ता के नए संस्करण में, देशों के समूह ने अफगानिस्तान में समृद्धि और विकास लाने के तौर-तरीकों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। इन देशों ने अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों में सैन्य बुनियादी ढांचे तैनात करने के कुछ देशों के प्रयासों को 'अस्वीकार्य' बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हितों की पूर्ति नहीं करता है। तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने पहली बार मॉस्को फॉर्मेट वार्ता में भाग लिया। कुछ हफ्ते पहले, ट्रंप ने कहा था कि तालिबान को बगराम एयरबेस अमेरिका को सौंप देना चाहिए, क्योंकि इसे वॉशिंगटन ने स्थापित किया था।मॉस्को में हुई बातचीत में भाग लेने वाले देशों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। बयान में कहा गया, 'उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान को आतंकवाद को खत्म करने और इसे जल्द से जल्द जड़ से मिटाने के लिए ठोस कदम उठाने में मदद दी जानी चाहिए, ताकि काबूल की धरती का इस्तेमाल पड़ोसी देशों और अन्य जगहों की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में न हो।' इसमें कहा गया कि इन देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद अफगानिस्तान, क्षेत्र और व्यापक विश्व की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत, रूस और चीन के अलावा, इस बैठक में ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने भी भाग लिया। इन देशों ने इस क्षेत्र और इससे आगे के देशों के साथ अफगानिस्तान के आर्थिक संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। मुत्ताकी की यात्रा क्यों है खास भारत का इस मुद्दे पर तालिबान के साथ खड़ा होना कई मायनों में ऐतिहासिक है. मुत्ताकी पहली बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने उन्हें 9 से 16 अक्टूबर तक यात्रा की अनुमति दी है. क्योंकि मुत्ताकी UNSC की प्रतिबंधित सूची (Resolution 1988) में शामिल हैं, इसलिए उन्हें विशेष मंजूरी मिली है. बगराम क्यों चाहता है अमेरिका? काबुल से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित बाग्राम एयरबेस अफगानिस्तान का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है. इसमें दो बड़े रनवे हैं, जिसमें से एक 3.6 किमी और दूसरा 3 किमी लंबा. पहाड़ी इलाके के कारण अफगानिस्तान में बड़े विमानों की लैंडिंग मुश्किल होती है, ऐसे में बगराम एक रणनीतिक केंद्र माना जाता है.