Bhopal News: सुरों की महक में याद किए गए शिल्पी स्व. अनजान,रवीन्द्र भवन में संगीत संध्या
Late artist Anjan remembered in the fragrance of melodies musical evening at Ravindra Bhavan भोपाल। रवीन्द्र भवन स्थित अंजनी सभागार में रविवार की शाम सुर, ताल और भावनाओं की सुगंध से महक उठी। अवसर था प्रसिद्ध गीतकार स्व. अनजान जी के 95वें जन्मदिवस पर आयोजित संगीतमय संध्या का। आरके क्रिएशंस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश की लोकप्रिय गीत लेखन परंपरा को नई ऊर्जा के साथ याद किया गया। संध्या में स्व. अनजान के सुपुत्र और देश के ख्यात गीतकार समीर अनजान तथा लायन इंटरनेशनल के डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन हरिओम जटिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। गीत-संगीत से सजी इस स्मरण संध्या में भोपाल और आसपास के फनकारों ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को रस की अनुभूति कराई। मंच पर गायक कलाकार अनिल श्रीवास्तव, विपिन शर्मा, आदर्श जोशी, शक्ति दुबे, राधिका मिश्रा, अंशुल माथुर और संतोष तिवारी ने समीर अनजान के लिखे लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज़ देकर एक बार फिर श्रोताओं के मन में जीवंत कर दिया। इन गीतों की दी प्रस्तुति संगीत संध्या का आरंभ गायक विपिन शर्मा की प्रस्तुति ‘सांसों की जरूरत है जैसे जीने के लिए…’ और ‘सोचेंगे तुम्हे प्यार…’ से हुआ, जिसने सभागार में कोमल भावों का वातावरण रच दिया। इसके पश्चात राधिका मिश्रा ने ‘ऐसा समा न होता…’, ‘सलाम-ए-इश्क’ और ‘ऐसी दीवानगी…’ गीतों को सुरों की मधुरता के साथ प्रस्तुत कर बैठी श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम की मध्यम धारा में रूपा ने ‘इंतिहां हो गई…’ तथा ‘नौलखा रूपा…’ गीतों से संध्या को गहराई और मिठास दी। अनिल श्रीवास्तव की सशक्त और परिपक्व आवाज़ ने ‘ओ साथी रे…’, ‘रोते हुए आते हैं सब…’, ‘सारा ज़माना…’ और ‘अपनी तो जैसे तैसे…’ जैसे गीतों को नए रंगों से भर दिया। इसके साथ ही अन्य फनकारों ने ‘दुल्हे का सेहरा…’, ‘याद आ रहा है…’, ‘गोरी है कलाईयां…’ और ‘मेरी साँसों को जो महका रही है…’ जैसे अनजान और समीर के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से सभागार में संगीतमय लहर बहा दी।