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IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद

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IFFI Awards Japanese A Pale View of Hills enjoys IFFI fans गोवा। जापानी फिल्म निर्देशक कएई इशिकावा आज अपनी दूसरी फिल्म ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में मीडिया से रू-ब-रू हुए। इस फिल्म को इस वर्ष 56वें ​​भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई – इफ्फी), गोवा में ‘कंट्री फोकस: जापान’ के एक हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया। आईएफएफआई में आने वाले दर्शकों को समकालीन जापानी सिनेमा के विस्तृत परिदृश्य से परिचय कराने के लिए इसका प्रदर्शन किया गया। ‘कंट्री फोकस जापान की सिनेमाई विरासत को आकार देने वाले उभरते स्वरों और प्रसिद्ध फिल्मकारों, दोनों की रचनात्मक जीवंतता का जश्न मनाते हुए, ‘कंट्री फोकस: जापान’ शैलियों की एक असाधारण श्रृंखला को समेटे हुए है। इसमें स्मृति, पहचान और अपनेपन की खोज करने वाले अंतरंग नाटकों से लेकर ऐतिहासिक महाकाव्य, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, बच्चों की कहानियां और अमूर्त, गैर-रेखीय प्रयोग शामिल हैं, जो सिनेमाई रूप की सीमाओं को तोड़ते हुए उनका विस्तार करते हैं। निर्देशक इशिकावा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “यह मेरी पहली भारत यात्रा है और मैंने इस अनुभव का भरपूर आनंद लिया है। यह फिल्म नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक काज़ुओ इशिगुरो के 1982 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इस वर्ष, जापान में कई फिल्में इसी विषय पर बनी हैं, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुए 80 वर्ष हो रहे हैं। मैं भी हमेशा से इस विषय पर बोलना चाहता था, लेकिन मुझे सही भाषा ढूंढ़ने में दिक्कत हुई, क्योंकि मैंने उस दौर का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया था। जब मुझे यह उपन्यास मिला, तो यह विषय मेरे लिए और भी सुलभ हो गया और इसने मुझे इस कहानी को कहने का आत्मविश्वास दिया।” लेखिका पर आधारित इस फिल्म की कहानी एक युवा महत्वाकांक्षी जापानी-ब्रिटिश लेखिका पर आधारित है, जो अपनी माँ एत्सुको के नागासाकी में युद्ध के बाद के अनुभवों पर आधारित एक किताब लिखने का निश्चय करती है। अपनी बड़ी बेटी की आत्महत्या से अब भी त्रस्त, एत्सुको 1952 की यादें ताज़ा करना शुरू करती है, उस वक्त वो एक युवा गर्भवती माँ थी। उसकी यादें सचिको से उसकी मुलाकात पर केंद्रित हैं, जो अपनी बेटी मारिको के साथ विदेश में एक नया जीवन शुरू करने के लिए दृढ़ थी। मारिको कभी-कभी एक भयानक महिला से जुड़ी परेशान करने वाली यादों का ज़िक्र करती है। जैसे-जैसे लेखिका अपनी माँ के नागासाकी में बिताए वर्षों के अंशों और स्मृति चिन्हों को एक साथ जोड़ती है, उसे एत्सुको द्वारा साझा की गई यादों और उनके द्वारा प्रस्तुत वास्तविकता के बीच परेशान करने वाली विसंगतियां नज़र आने लगती हैं। महिलाओं के बारे निर्देशक इशिकावा ने बताया कि वो इस कहानी की ओर आकर्षित इसलिए हुए कि यह सिर्फ़ परमाणु बम के बारे में ही नहीं, बल्कि विभिन्न युगों की महिलाओं के बारे में भी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ख़ुद पटकथा लिखी और फ़िल्म का संपादन भी किया, क्योंकि वे संपादन को लेखन प्रक्रिया का अंतिम चरण मानते हैं। उन्होंने आगे बताया कि टीम को फिल्म के लिए सबसे उपयुक्त अंत तय करते समय तीन देशों – जापान, ब्रिटेन और पोलैंड – के दृष्टिकोणों में संतुलन बनाना था। हर एक ने एक अलग संवेदनशीलता पैदा की: ब्रिटिश निर्माता एक स्पष्ट और अधिक परिभाषित निष्कर्ष को प्राथमिकता देते थे; जबकि पोलिश निर्माताओं का मानना ​​था कि बहुत अधिक व्याख्या से फिल्म का प्रभाव कम हो जाएगा। जापानी दृष्टिकोण इन दोनों के कहीं बीच में था। उन्होंने बताया कि उन्हें इस सहयोगात्मक प्रक्रिया और व्यापक चर्चाओं का सचमुच आनंद आया, जिसने अंततः फिल्म को सही अंत तक पहुंचाया।https://www.youtube.com/embed/IM3wArsfda0 आईएफएफआई के बारे मेंhttps://www.youtube.com/embed/CspDNSAOrpw 1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया में सिनेमा का सबसे पुराना और सबसे बड़ा उत्सव है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी),  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी), गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई महाशक्ति के रूप में विकसित हुआ है—जहां पुनर्स्थापित क्लासिक फिल्में साहसिक प्रयोगों से मिलती हैं, और दिग्गज कलाकार नए कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। आईएफएफआई को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका विद्युत मिश्रण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक दर्शन, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्‍स फिल्म बाजार हैं जहां विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार तटीय वातावरण में आयोजित 56वें आईएफएफआई में भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और आवाज़ों की एक चमकदार श्रृंखला का संयोजन देखने को मिला।

IFFI Award: मूक फिल्म ‘मुरलीवाला’ की विशेष स्क्रीनिंग, जीवंत संगीत का अनुभव

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IFFI Awards Special screening of silent film Murliwala गोवा। आईएफएफआई के चौथे दिन सिने प्रेमियों के लिए समय-यात्रा अदभूत अनुभव रहा, जब बहाल की गई क्लासिक फिल्म  ‘मुरलीवाला’  का विशेष प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) और राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफएआई) ने राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत 18 क्लासिक फिल्मों को नया जीवन दिया है और इन्हें इस वर्ष के आईएफएफआई के लिए इंडियन पैनोरमा विशेष पैकेज के रूप में संजोया है। इस पैकेज में हिंदी, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला और मराठी की क्लासिक कृतियों को शामिल किया गया है, जो विविध  कलात्मक अभिव्यक्तियों को दर्शाती हैं। इन्हें सख्त अभिलेखीय मानकों के अनुसार  संरक्षित किया गया है और प्रत्येक फिल्म की मौलिक रचनात्मक दृष्टि को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा गया है। मुक युग का पुनर्सृजन एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने इस स्क्रीनिंग के उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ” विचार यह है कि आज की पीढ़ी के लिए मूक फिल्मों के अनुभव को पुनर्जीवित किया जाए, जहां संगीतकार अग्रिम पंक्ति में बैठकर दर्शकों के लिए लाइव संगीत प्रस्तुत करते थे। और प्रतिभाशाली राहुल जी के नेतृत्व में  मुझे यकीन है कि यह क्षण को उसी भावना और भव्यता के साथ जीवंत हो उठेगा जिसका यह हकदार है।” संगीतकार राहुल रानाडे ने कहा, “98 साल पहले बनी एक फिल्म का संगीत फिर से तैयार करना और उसका लाइव प्रदर्शन करना मेरे और मेरी पूरी टीम के लिए एक बड़े सम्मान और चुनौती की बात थी। आप बाबूराव जी द्वारा 1927 में बनाई गई फिल्म और उनके द्वारा रचे गए विशेष प्रभाव का अनुभव करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मैं और मेरी टीम इसके साथ न्याय कर पाएंगे।” गौरतलब है कि दिवंगत फिल्म निर्माता और कलाकार बाबूराव पेंटर द्वारा बनाई गई “मुरलीवाला” (1927),  जो भारत की बहुत कम बची हुई मूक फिल्मों में से एक है और एनएफएचएम की  सबसे दुर्लभ खजानो में से एक है। यह प्रदर्शन 1920 के दशक के फिल्म प्रस्तुती अनुभवों को पुनः जीवंत करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस स्क्रीनिंग में बाबूराव पेंटर की दोनों बेटियां भी शामिल हुईं। एक औपचारिक उत्सव वर्ष इस वर्ष का चयन (क्यूरेशन) गहरा ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह वी. शांताराम की 125 वर्षों की विरासत का सम्मान करता है और साथ ही गुरुदत्त, राज खोसला, ऋत्विक घटक, भूपेन हज़ारिका, पी. भानुमति, सलिल चौधरी और के. वैकुंठ की पथप्रदर्शक प्रतिभाओं को शताब्दी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। यह महोत्सव एनएफडीसी के 50 वर्षों का भी जश्न मना रहा है, जो आधुनिक भारतीय सिनेमा के परिदृश्य को आकार देने में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को मान्यता देता है। श्याम बेनेगल की  ‘सुसमन’ को दी गई विशेष श्रद्धांजलि  भारतीय कहानी कहने की कला पर इस दूरदर्शी फ़िल्म निर्माता के  अमिट प्रभाव को रेखांकित करती है। राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन नवंबर 2016 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया  राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन भारत के सबसे महत्वकांक्षी  और महत्वपूर्ण उपक्रमों में से एक है। इसका उद्देश्य भारत की सिनेमाई विरासत की रक्षा करना है— जिसमें कैमरा नेगेटिव और रिलीज़ प्रिंट से लेकर दुर्लभ अभिलेखीय खज़ानों तक, जो  अधिकार-धारकों, संग्रहकर्ताओं और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से प्राप्त किए गए है, उनका संरक्षण, संवर्धन , डिजिटलीकरण और पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना शामिल हैं। आईएफएफआई 2025 के लिए पुनर्स्थापित भारतीय फिल्में इस सावधानीपूर्वक प्रयास का प्रमाण हैं, जहां प्रत्येक फ्रेम को बड़ी मेहनत से पुनर्स्थापित किया गया है और सटीकता के साथ कलर-ग्रेड किया गया है, अक्सर फिल्म निर्माताओं, छायाकारों या उनके करीबी सहयोगियों के मार्गदर्शन में। महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण ऋत्विक घटक द्वारा पुनर्स्थापित ‘सुबर्णरेखा’ है, जिसे एनएफडीसी-एनएफएआई संग्रह में 35 मिमी मास्टर पॉजिटिव से  नया जीवन प्रदान किया गया है, जिसमें अंतिम कलर ग्रेडिंग छायाकार अविक मुखोपाध्याय की देखरेख में की गई है। मुजफ्फर अली की ‘उमराव जान’, जिसे  मूल निगेटिव के अपरिवर्तनीय रूप से खराब होने के बाद एक  संरक्षित 35 मिमी रिलीज प्रिंट से पुनर्स्थापित किया गया है, की ग्रेडिंग प्रक्रिया में अली का व्यक्तिगत प्रयावेक्षण शामिल रहा है,  यह सुनिश्चित करते हुए कि फिल्म की विशिष्ट रंगीन सुंदरता को ईमानदारी से बरकरार रखा जाए। इन पुनर्स्थापनों से भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकारों की विरासत को सम्मान मिलता है और यह सुनिश्चित होता है कि नई पीढ़ीया इन कृतियों में निहित  सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक आख्यानों से जुड़ी रहें। भारतीय पैनोरमा विशेष पैकेज के लिए चयनित पुनर्स्थापित फिल्मों की सूची अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें: आईएफएफआई वेबसाइट: https://www.iffigoa.org/ पीआईबी की आईएफएफआई माइक्रोसाइट: https://www.pib.gov.in/iffi/56/ पीआईबी आईएफएफआईवुड प्रसारण चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VaEiBaML2AU6gnzWOm3F X पोस्ट लिंक: https://x.com/PIB_Panaji/status/1991438887512850647?s=20 X हैंडल: @IFFIGoa, @PIB_India, @PIB_Panaji