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Aastha Pandey

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सरकारी बैंक की नौकरी का सुनहरा मौका: बैंक ऑफ बड़ौदा में 100 Specialist Officer पदों पर होगी भर्ती

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देश की जानी-मानी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग संस्था बैंक ऑफ बड़ौदा ने युवाओं के लिए एक शानदार अवसर पेश किया है। बैंक ने स्पेशल ऑफिसर के करीब 115 पदों पर भर्ती की घोषणा की है, जिसमें आईटी, लॉ, इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। अगर आप ऐसी नौकरी की तलाश में हैं, जो न सिर्फ आपके कौशल को पहचान दे बल्कि सुरक्षित करियर और बेहतर ग्रोथ का मौका भी प्रदान करे, तो यह भर्ती आपके लिए उपयुक्त साबित हो सकती है। उदेश्य- बैंक ऑफ बड़ौदा ने  स्पेलिस्ट ऑफिसर (SO) के लगभग 115 पदों के लिए भर्ती का ऐलान किया है। यह भर्ती बैंक के विभिन्न प्रोफेशनल और तकनीकी विभागों में है, जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर, लॉ ऑफिसर, आईटी ऑफिसर, एआई डेवलपर, डेटा साइंटिस्ट, सिविल इंजीनियर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। आवेदन की तारीख और प्रक्रिया योग्यता आवेदन शुल्क चयन प्रक्रिया चयन प्रक्रिया में संभवतः लिखित परीक्षा,  इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन शामिल होंगे। बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि उम्मीदवार न केवल शैक्षणिक रूप से सक्षम हों, बल्कि व्यावहारिक अनुभव और विशेषज्ञता भी रखते हों। क्यों यह भर्ती खास है?  FAQs Q1: क्या बैंक ऑफ बड़ौदा की SO भर्ती में सच में 115 पद हैं?हाँ, बैंक ऑफ बड़ौदा ने विशेषज्ञ अधिकारी के लगभग 115 पदों के लिए भर्ती की घोषणा की है, जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर, लॉ ऑफिसर, डेटा साइंटिस्ट आदि शामिल हैं। Q2: क्या मुझे इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस की डिग्री चाहिए?कुछ पदों (जैसे IT, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स) के लिए बीई / बीटेक (कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स,आईटी ) की डिग्री कम से कम 60% अंक के साथ जरूरी है। इसके अलावा, कुछ पदों पर Oracle Certified सर्टिफिकेट की भी मांग हो सकती है। Q3: आवेदन फीस कितनी है और आवेदन कैसे करना होगा?आवेदन फीस सामान्य वर्ग के लिए ₹850 है, जबकि आरक्षित उम्मीदवारों के लिए यह ₹175 है। उम्मीदवार बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “Careers” सेक्शन में भर्ती नोटिफिकेशन पढ़ें, रजिस्ट्रेशन करें, दस्तावेज़ अपलोड करके फीस जमा कर आवेदन सबमिट करें।

बिहार सरकारी नौकरियां 2025: विभिन्न विभागों में 5464 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

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पटना बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सरकार कौन बनाएगा, यह नवंबर में मतदाता तय करेंगे। फिलहाल, मौजूदा सरकार ने चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 5384 स्थायी नौकरियों और संविदा आधारित 80 पदों पर नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। बिहार कैबिनेट की बैठक में इन नौकरियों के लिए पद सृजन की सहमति हो गई है। विभाग किन पदों पर कैसे काम लेंगे, यह रूपरेखा बनी हुई है। अब इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए संबंधित आयोगों के पास रिक्तियों का विवरण भेजा जाना है। पहले ही कई विभागों के पास रिक्तियों का विवरण पहुंचा हुआ है। कुछ पदों को बढ़ाए जाने के कारण पहले से घोषित परीक्षाओं के लिए भी रिक्तियां बढ़ाई गई हैं। अब नव-सृजित इन पदों की फाइल भी बढ़ गई है। कृषि-वन-पशु से है वास्ता, तो यह पद देखें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों हेतु कुल 1491 अतिरिक्त पदों के सृजन की स्वीकृति मिली है। बिहार राज्य के अंतर्गत वन प्रमंडलों के पुनर्गठन के साथ विभाग को विभिन्न कोटि के कुल 927 पदों पर नियुक्ति करनी है। इसके लिए पद सृजन की स्वीकृति मिल गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में ही सचिवालय एवं संलग्न कार्यालय के सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न कोटि के कुल 78 अतिरिक्त पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है। इसके अलावा, संजय गांधी जैविक उद्यान पटना के सुचारु संचालन हेतु स्थायी स्थापना अंतर्गत विभिन्न कोटि के कुल 172 अतिरिक्त पदों के सृजन की स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र के संचालन के लिए विभिन्न कोटि के कुल 45 पदों को कैबिनेट ने स्वीकृत किया है। कृषि विभाग ने बिहार कृषि विभागीय आशुलिपिक संवर्ग के पूर्व स्वीकृत पद का समर्पण/ प्रत्यार्पण करते हुए 218 नए पद सृजन की स्वीकृति राज्य कैबिनेट से ली है। गव्य विकास निदेशालय अंतर्गत नौ जिलों में नए जिला गव्य विकास कार्यालय की स्थापना के फैसले के साथ इसके लिए विभिन्न कोटि के कुल 72 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। बिहार वानिकी महाविद्यालय एवं शोध संस्थान मुंगेर में आवश्यकता आधारित विभिन्न कोटि के 26 पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है। अनुसंधान-आपदा प्रबंधन में रुचि है तो यह पद साइबर इकाई को आर्थिक अपराध इकाई से अलग करने पर गठित हो रहे 'साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई' के संचालन हेतु विभिन्न कोटि के 23 नए पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इकाई के बाकी पद विभागीय स्थानांतरण से भरे जाएंगे। बिहार अग्निशमन सेवा नियमावली-2021 के नियम-4 (ख) में निहित प्रावधानों के तहत बिहार अग्निशमन सेवांतर्गत कनीय सेवा संवर्ग (अराजपत्रित, वर्दीधारी) के विभिन्न कोटि के 2075 अतिरिक्त पदों के सृजन पर बिहार कैबिनेट ने मुहर लगाई है। इसके अलावा, बिहार सचिवालय सेवा/बिहार सचिवालय आशुलिपिकीय सेवा/बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा तथा कार्यालय परिचारी/परिचारी (विशिष्ट) संवर्ग के तहत अग्निशमन सेवाओं के विभिन्न कोटि के 42 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिली है। कैबिनेट ने राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) में फ़ॉलोवर श्रेणी के अंतर्गत पूर्व से स्वीकृत 177 पदों के अतिरिक्त कुल 73 नए पदों के सृजन की स्वीकृति भी दी है। सामान्य अभिरुचि के लिए इन पदों पर रखें नजर संग्रहालय निदेशालय (मुख्यालय) तथा अन्य राजकीय संग्रहालयों को सुचारु रूप से चलाने हेतु न्यूनतम आवश्यकता धारित विभिन्न कोटि के कुल 139 नए पदों का सृजन किया गया है। उधर, निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद जिला न्यायाधीश कोटि से, उप निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद असैनिक न्यायाधीश (वरीय कोटि) से एवं सहायक निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि) कोटि से, यानी कुल 03 (तीन) पदों के सृजन की स्वीकृति भी मिली है।   संविदा के आधार पर यह नियुक्तियां घोषित मंत्रिपरिषद् ने जिन पदों को स्पष्ट रूप से संविदा आधारित बताया है, वहां रिटायर्ड कर्मियों के लिए ज्यादा संभावनाएं हैं। जैसे, शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित सरकारी विद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों/कार्यालयों की भूमि का सत्यापन, भूमि के विवरण का संकलन एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियों के क्रियान्वयन में सहयोग हेतु तीन वर्षों के लिए संविदा के आधार पर सेवानिवृत्त लिपिक के 40 पद एवं बेल्ट्रॉन से संविदा आधारित कंप्यूटर ऑपरेटर के 40 पद के सृजन की स्वीकृति मिली है। इसी तरह, बिहार राज्य के विधि विज्ञान प्रयोगशाला/क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं/जिला चलंत विधि विज्ञान इकाइयों के लिए रिक्त पदों के विरुद्ध निर्धारित मानक के आधार पर सहायक निदेशक (राजपत्रित) तथा वरीय वैज्ञानिक सहायक (अराजपत्रित) की सेवा अस्थायी रूप से संविदा के आधार पर लेने की भी स्वीकृति मिली है।

राजस्थान सरकार ने कफ सिरप की सप्लाई रोकी, पुनः परीक्षण की तैयारी

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जयपुर खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup से बच्चों की तबियत बिगड़ने के मामले में राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी सामने आए हैं। मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा में भी खांसी की सिरप को पीने से 6 बच्चों की मौत हो गई है। राजस्थान में ड्रग कंट्रोलर ने इस दवा के साथ अब सभी तरह की कफ सिरप की सप्लाई  पर तत्काल रोक लगा दी है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पाेरेशन के निदेशक जय सिंह का कहना है कि राजस्थान में फिलहाल सभी तरह की कफ सिरप की फिर से क्वालिटी चैकिंग (QC) करवाई जा रही है। तब तक के लिए इनकी सप्ताई को रोक दिया गया है।  गौरतलब है कि खांसी की यह दवा, कम्पनी द्वारा इस वर्ष के क्रयादेश के तहत जून, 2025 से आपूर्ति की जा रही है। इस सिरप को अब तक 1 लाख 64 हजार से अधिक मरीजों को दिया जा चुका है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि  28 सितम्बर से पहले उसे इस सिरप को लेकर एक भी शिकायत नहीं  मिली थी। लेकिन जानकारी के अनुसार सितंबर के दूसरे सप्ताह में बांसवाड़ा में करीब 7 बच्चे इस सिरप को लेकर गंभीर रूप से बीमार हुए जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा। आरएमएससीएल के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बांसवाड़ा जिले को इस दवा के 50 हजार डोज मिले थे। इनमें से 13 हजार चिकित्सा केंद्रों को वितरित किए गए थे और शेष 37 हजार डोज वेयरहाउस में सुरक्षित रखे गए हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब दवा का वितरण और उपयोग रोक दिया गया है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि जिले में जिस बैच की शिकायत मिली है, वह आपूर्ति यहां नहीं हुई थी, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे रोक दिया गया है। राजस्थान में  Dextromethorphan HBr Syrup की खरीद जून 2025 से हो रही है।  28 सितम्बर को दवा के संबंध में शिकायत होने के बाद सम्पूर्ण प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है। इस कमेटी में आरएमएससीएल के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), कार्यकारी निदेशक (लॉजिस्टिक) एवं मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है। यह कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने पर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। केंद्र की गाइडलाइन थी, यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं   स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार ने इस दवा के संबंध में 2 साल पहले एक गाइडलाइन जारी की थी कि यह दवा 4 साल से छोटे बच्चों के लिए नहीं है। प्रदेश में इस दवा से तबियत बिगड़ने के जितने भी मामले सामने आए हैं वे सभी बच्चे 4 साल से कम उम्र के हैं। आरएमएससीएल प्रबंधन ने बताया कि 28 सितम्बर, 2025 को औषधि Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml [440] के बैच नम्बर KL-25/147 की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भरतपुर व  29 सितम्बर,2025 को जिला सीकर से उक्त औषधि के बैच संख्या KL-25/148 के संबंध में आरएमएससीएल को शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि सिरप का मरीजों द्वारा उपयोग करने पर उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर, बेचैनी, बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही दवा के वितरण पर भी रोक आरएमएससीएल  ने  शिकायती बैच के साथ ही प्रभावी कदम उठाते हुए उक्त औषधि के संबंधित सप्लायर द्वारा क्रयादेश के तहत सप्लाई किये गए सभी बैचों पर तत्काल प्रभाव से उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही, एहतियात के तौर पर अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही खाँसी की इस दवा का वितरण भी आगामी आदेशों तक रोक दिया गया है तथा इसकी भी पुनः गुणवत्ता जाँच करवाई जा रही है। पुन: गुणवत्ता जाँच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।