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amit kumar

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Bhopal News: अस्थाई श्रमिकों को बोनस का भुगतान करने की अपील, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

temporary workers

Appeal to pay bonus to temporary workers letter written to Chief Minister भोपाल। सरकार मप्र प्रदेश के अस्थाई श्रमिकों को पिछले 20 वर्ष से बोनस भुगतान का भुगतान नहीं किया है. यह कहना है मप्र कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष का. अध्यक्ष ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि शासकीय अर्द्ध शासकीय विभागो, निगम मंडलों सहकारी संस्थाओं, परिषदों संघो में कार्यरत समस्त अस्थाई श्रमिकों को 30 नवंबर  तक बोनस भुगतान किया जाए. कर्मचारियों को भुगतान नहीं मिलने पर राज्य भर के श्रमिक, कर्मचारी मंच के बैनर तले आंदोलन करेंगे. ₹21000 से कम वेतन मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया है कि प्रदेश के शासकीय  अर्द्ध शासकीय  विभागों में लाखों अस्थाई श्रमिक वर्षों से कार्यरत हैं लेकिन, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद भी राज्य सरकार अस्थाई श्रमिकों को पिछले 20 वर्ष से बोनस भुगतान नहीं कर रही है. राज्य सरकार की यह अपेक्षा श्रमिकों के श्रम अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि श्रम अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि जिस भी संस्था में 20 से अधिक अस्थाई श्रमिक काम कर रहे हैं और ₹21000 से कम वेतन प्राप्त करते हैं. उन्हें बोनस राशि 7000 या 8. 33% जो राशि अधिक हो बोनस भुगतान के रूप में सरकार एवं संस्थाओं को भुगतान करना चाहिए. यह भुगतान वर्ष के 30 नवंबर तक आवश्यक रूप से किया जाना चाहिए लेकिन राज सरकार और संस्थानों उद्योग जगत श्रमिकों के बोनस अधिकार को संज्ञान में नहीं ले रहा है. इसलिए मध्य प्रदेश शासन श्रम विभाग ने भी स्पष्ट निर्देश जारी करें हैं कि श्रमिकों को 30 नवंबर तक बोनस भुगतान किया जाए मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच श्रमिक प्रकोष्ठ में निर्णय लिया है कि यदि वर्ष 2025 में प्रदेश के अस्थाई श्रमिकों को बोनस भुगतान नहीं किया गया है. 

MP Attendance Portal: अब से लगेगी चेहरे से हाजिरी, बायोमेट्रिक बंद

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MP Attendance Portal भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी 413 नगर निगमों व निकायों में एक नया उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। फिलहाल 124 निकायों में 11 हजार 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस एआई- बेस्ड प्रणाली से जुड़ चुके हैं। इस नए सिस्टम में कर्मचारियों की उपस्थिति केवल उनके चेहरे की पहचान (face recognition) और जियो-लोकेशन के द्वारा दर्ज होगी। बायोमेट्रिक अटेंडेंस को पूरी तरह बंद किया जा रहा है। ऐप का उपयोग नयी व्यवस्था के अनुसार, कर्मचारियों की उपस्थिति तभी मानी जाएगी जब वे अपने कार्यस्थल (work-place) पर हों। इसके लिए मोबाइल ऐप या डेस्कटॉप ऐप का उपयोग होगा, जिसमें जियो-लोकेशन और चेहरे की पहचान दोनों अनिवार्य होंगी। कर्मचारियों की उपस्थिति की पुष्टि उनके चेहरे के साथ-साथ आईरिस या माथे की पहचान पर आधारित होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय अंतर्गत संचालनालय में पहले ही 500 कर्मचारियों पर यह सिस्टम लागू हो चुका है। इसे राज्य-स्तरीय पोर्टल “MP Attendance Portal” से जोड़ा जाएगा। जल्द ही इसे ई-नगरपालिका 2.0 (E-Municipality 2.0) से भी लिंक किया जाएगा। इस बदलाव से कर्मचारियों की उपस्थिति सीधे उनके वेतन (salary) से जुड़ जाएगी। इससे कार्यप्रणाली (efficiency) में सुधार तथा लंबित कार्य में कमी आने की उम्मीद है। 55 हजार नियमित कर्मचारी नगरीय प्रशासन विभाग के कमिश्नर संकेत एस. भोंडवे ने बताया कि ये परिवर्तन कार्यक्षमता बढ़ाएगा और विभाग में आने वाली गड़बड़ियों को कम करेगा। वर्तमान में विभाग में लगभग 90 हजार संविदा (contractual) व नियमित (regulated) कर्मचारी और लगभग 50-55 हजार नियमित (regular) कर्मचारी कार्यरत हैं। संविदा कर्मचारियों की उपस्थिति ठेकेदार (contractor) के माध्यम से भेजी जाती थी, जो कई बार गड़बड़ी का कारण बनती थी। पिछले कुछ समय पहले बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू की गई थी, लेकिन कर्मचारियों ने इसका तोड़ निकाल लिया था। विभाग के अनुसार, लगभग 10-15 % कर्मचारी ऐसे हैं जो काम पर नहीं आते, लेकिन वेतन प्राप्त करते हैं। इसी कारण से अब इस नई, सख्त व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। क्यों यह बदलाव जरूरी है? उपस्थिति संबंधी गड़बड़ियों को रोकने के लिए। कर्मचारियों को सही समय पर कार्यस्थल पर सुनिश्चित करने के लिए। वेतन प्रक्रिया को उपस्थिति के साथ लिंक करने के लिए। विभागीय कार्यप्रणाली को पारदर्शी व जिम्मेदार बनाने के लिए। नए सिस्टम की मुख्य बातें दिसंबर 2025 से पूरी तरह लागू होगी। उपस्थिति केवल चेहरे की पहचान + जियो-लोकेशन के आधार पर मानी जाएगी। मोबाइल या डेस्कटॉप ऐप द्वारा कार्यस्थल पर ऐप चलाना अनिवार्य होगा। बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम पूरी तरह बंद हो जाएगा। उपस्थिति की जानकारी सीधे वेतन से जुड़ेगी। ई-नगरपालिका 2.0 से लिंकिंग भी जल्द होगी। संभावित चुनौतियाँ लॉगिन करने हेतु ऐप-सहायता और नेटवर्क-सुविधा सुनिश्चित करना। कार्यस्थलों का सटीक मैपिंग व जियो-फेंसिंग (geo-fencing) करना। उदाहरण के लिए, Bhopal Municipal Corporation में अभी तक कई वार्ड कार्यालयों की मैपिंग बाकी है। कर्मचारियों की तकनीकी जागरूकता व प्रशिक्षण। डेटा-सुरक्षा व गोपनीयता संबंधी चिंताएँ। ऐप / डिवाइस में समस्या आने पर बैकअप व्यवस्था। 5 FAQs (प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न) 1. प्रश्न: यह नई चेहरे-पहचान तथा जियो-लोकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली कब से लागू होगी? उत्तर: इस प्रणाली को दिसंबर 2025 से राज्य के सभी नगर निगमों और निकायों में लागू किया जाने वाला है। 2. प्रश्न: इस व्यवस्था में बायोमेट्रिक अटेंडेंस (उंगली का निशान) क्यों बंद किया जा रहा है? उत्तर: क्योंकि बायोमेट्रिक प्रणाली में कर्मचारियों द्वारा उपस्थिति में गड़बड़ी पाई गई है, जैसे बिना आने-काम का वेतन लेना। इस वजह से अधिक भरोसेमंद चेहरे-आधारित प्रणाली अपनाई जा रही है। 3. प्रश्न: इस नए सिस्टम में कर्मचारियों की उपस्थिति कैसे दर्ज होगी? उत्तर: मोबाइल ऐप या डेस्कटॉप-ऐप की मदद से, जिसमें चेहरे की पहचान (face recognition) और जियो-लोकेशन (geo-location) दोनों अनिवार्य होंगे, कर्मचारी कार्यस्थल पर उपस्थित रह कर अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। 4. प्रश्न: क्या कर्मचारियों को कार्यस्थल पर होकर ही ऐप से उपस्थिति दर्ज करनी होगी? उत्तर: हाँ। उपस्थिति तभी मानी जाएगी जब कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यस्थल पर हों और ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करें। बाहर होने या स्थान-भ्रमण के दौरान उपस्थिति मानी नहीं जाएगी। 5. प्रश्न: इस नए सिस्टम से क्या लाभ होंगे और क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं? उत्तर:……….. लाभ: उपस्थिति की पारदर्शिता बढ़ेगी। वेतन प्रक्रिया उपस्थिति से जुड़ेगी, जिससे मनमानी की संभावना कम होगी। विभागीय कार्य-प्रणाली में सुधार होगा। चुनौतियाँ: कार्यस्थलों का सटीक मैपिंग व ऐप-सहायता सुनिश्चित करना। तकनीकी परेशानियाँ जैसे नेटवर्क, ऐप त्रुटियाँ। कर्मचारियों को नए सिस्टम के हिसाब से प्रशिक्षित करना। डेटा-सुरक्षा व निजी जानकारी की रक्षा। मध्य प्रदेश द्वारा चेहरे-पहचान व जियो-लोकेशन आधारित नई उपस्थिति प्रणाली कर्मचारियों की कार्यस्थल पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का एक आधुनिक कदम है। हालांकि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी, व्यवस्थागत और मानव-प्रबंधन चुनौतियों से निपटना होगा। यदि सब कुछ सुचारू रूप से हुआ तो इस बदलाव से प्रशासनिक कार्यों में सुधार तथा उपस्थिति-घाटे पर अंकुश लगने की संभावना है।