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Aastha Pandey

Writer News & Blogger

दिमाग की परिपक्वता, 30s डेटिंग और असली रिश्तों की चुनौतियाँ

Relenshanship

कई बार लोग यह मानते हैं कि 25–26 की उम्र तक दिमाग पूरी तरह परिपक्व हो जाता है, लेकिन कैंब्रिज विश्वविद्यालय की एक रिसर्च इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। अध्ययन के अनुसार, मानव मस्तिष्क लगभग 32 साल की उम्र तक पूरी तरह मैच्योर नहीं होता। यही वजह है कि अपने 30s तक पहुँचने के बावजूद कई लोग रिश्तों में स्थिरता, समझ-बूझ और भावनात्मक संतुलन को लेकर संघर्ष करते दिखाई देते हैं। खासतौर पर डेटिंग के मामले में यह अधूरी परिपक्वता गलत फैसलों, जल्दी-बाज़ी में बने रिश्तों और अपेक्षाओं के टकराव का कारण बन सकती है। यह शोध बताता है कि उम्र बढ़ने और मानसिक परिपक्वता का सफर हमेशा एक जैसा नहीं होता, और रिश्तों में सफलता काफी हद तक दिमाग की तैयारियों पर निर्भर करती है। मस्तिष्क 32 तक परिपक्व क्यों नहीं होता और क्यों रिश्तों में 30s पुरुष अस्थिर दिखते । एक नई रिसर्च हाल ही में University of Cambridge की एक बड़ी रिसर्च में पाया गया है कि मानव मस्तिष्क जीवन भर एक समान नहीं रहता। वैसे जो हम सोचते थे — कि किशोरावस्था (teens) में खत्म हो जाती है — वो सही नहीं। अध्ययन में MRI‑scan के डेटा लिए गए — करीब 3,800 लोगों की उम्र 0 से 90 साल तक थी। इसके मुताबिक मानव जीवन में पाँच “दिमागी युग (brain‑epochs)” आते हैं: बचपन (birth–9), किशोरावस्था (9–32), व्यस्कता (32–66), प्रारंभिक बुढ़ापा (66–83), और बुढ़ापे का अगला चरण (83+)। यानी कि 32 साल की उम्र तक हमारे दिमाग के तार (neural wiring) पूरी तरह से स्थिर नहीं होते। 32 के बाद ही मस्तिष्क “पूर्ण वयस्कता (adult mode)” में आता है। नतीजा: जो व्यक्ति 30 के आसपास है — उससे हम उम्मीद कर सकते हैं कि उम्र कम है लेकिन दिमाग अभी “लोडिंग” में हो सकता है। ये खबर भी पढ़े…सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश क्यों अक्सर रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाता? कई महिलाएँ बताती हैं कि 30 वर्ष की उम्र का पुरुष डेटिंग में शुरुआती उत्साह तो दिखाता है — बातें होती हैं, प्यार‑मोहब्बत, बड़े सपने, “सीरियस” होने की बातें। लेकिन महीनों बाद अचानक बातें ठंडा हो जाती हैं, प्रतिक्रिया बंद हो जाती है, जब रिश्ते में असली जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, भावनात्मक जुड़ाव की बात आती है। ये खबर भी पढ़े…धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि: दिमाग अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ — “white‑matter connectivity” यानी दिमाग के तार ठीक से मजबूत नहीं हुए। “परिपक्वता (emotional maturity)” अभी पूरी तरह नहीं आई है — इसलिए संबंधों में समझ, भरोसा, स्थिरता की कमी रह जाती है। समाज और परवरिश की वजह से पुरुषों को “भावनाओं को दबाए रखना” सिखाया जाता है; खुल कर बात करना, संवेदनशीलता दिखाना उनके लिए कठिन हो सकता है। रीसनिंग कोच और रिश्तों पर सलाह देने वाले लोग भी कहते हैं कि कई बार पुरुष भावनात्मक रूप से “लोडिंग मोड” में ही रहते हैं — जबकि बहनियां रिश्ते से स्थिरता और भावनात्मक जुड़ाव चाहती हैं। इसलिए, कई महिलाओं का अनुभव ऐसा होता है कि पहली‑दूसरी डेट तो ठीक रहती है — लेकिन तीसरी‑चौथी डेट के बाद पुरुष गायब हो जाते हैं, बातचीत बंद कर देते हैं, या फिर commitment से भागने लगते हैं। ये खबर भी पढ़े…महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब कुछ असली अनुभव — 30s में रिश्तों की जद्दोजहद एक महिला कहती हैं कि तीन साल तक उन्होंने डेट किया — पर अंत में उन्हें सिर्फ “थोड़ी उत्सुकता” और “लंबी चुप्पी” मिली। दूसरी ओलivia कहती थीं कि 30s का पुरुष शायद परिपक्व लगे, पर बाद में अचानक गायब हो गया — बिना किसी सफाई के। एक तीसरी महिला बताती हैं कि शुरू में सब ठीक था, फिर वह कहने लगी कि मैं ड्रग्स नहीं लेती — और फिर रिश्ते से दूरी बन गई। कुछ पुरुष बिना किसी वजह “संभालना हमसे बेहतर नहीं” कहना शुरू कर देते हैं — जैसे उन्हें रिश्तों की जिम्मेदारी नहीं लेनी है। ये कहानियां इसलिए इतनी आम हो गई हैं क्योंकि — अब ‌वैज्ञानिक आधार भी मिल गया है — कि दिमाग 32 साल तक पूरी तरह mature नहीं होता, और emotional maturity में देरी हो सकती है। दिमाग की परिपक्वता शोध के अनुसार, बचपन में दिमाग सीखने, synapses (तारों) बनाने, pruning (अनावश्यक तार हटाने) का दौर होता है। किशोर व 20s में दिमाग तेजी से बदलता रहता है — नए neural connections बनते हैं, white‑matter बढ़ती है, लेकिन wiring पूरी तरह स्थिर नहीं होती। 32 के आसपास ही दिमाग मुख्यतः स्थिर होता है — इस उम्र के बाद neural wiring में बड़े बदलाव नहीं आते, और मस्तिष्क “adult mode” में आता है। भावनात्मक और सामाजिक परिपक्वता की देरी इसका मतलब यह नहीं कि 25‑30 की उम्र के लोग बेअक्ल या बुरे होते हैं। लेकिन दिमाग की wiring अधूरी होती है: ये लोग impulsive decisions ले सकते हैं। भावनाओं को व्यक्त करना या समझना उनके लिए आसान नहीं होता। रिश्तों में भरोसा, स्थिरता, समझ, संवेदनशीलता, जो जरूरी है – वो कमज़ोर हो सकती है।इस वजह से, कई महिलाएं महसूस करती हैं कि 30s के पुरुष “भावनात्मक रूप से अधूरे” से हैं, और commitment से भागते हैं। क्या मतलब है — “बचपन चलता 32 तक”? जिस उम्र में हम सोचते थे कि आदमी जवान हो गया -दिमाग का wiring उस उम्र तक mature नहीं होता।इसलिए यह जरूरी है कि हम रिश्तों में “उम्र” से ज़्यादा “परिपक्वता” पर ध्यान दें। अगर आप डेट कर रहे हैं, तो शुरुआत में ही यह समझ लें कि सिर्फ उम्र से तय नहीं होता कि व्यक्ति emotionally ready है या नहीं। समय, व्यवहार, consistency और संवाद देखना चाहिए। Q1: क्या सच में दिमाग 32 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता?हाँ – हालिया रिसर्च के अनुसार, दिमाग 5 अलग‑अलग developmental phases से गुजरता है। किशोरावस्था (adolescence) 9 साल से शुरू होती है और लगभग 32 साल तक चलती है। 32 के बाद ही brain wiring स्थिर होती है। Q2: 30s में होने वाली डेटिंग का ये मतलब है कि पुरुष immature है?हर 30 साल का पुरुष immature नहीं होता। लेकिन wiring की वजह से कई लोग emotional maturity late … Read more