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हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ

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नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों ऑस्‍ट्रेलिया के दौरे पर हैं, जहां तीन बड़े रक्षा समझौते किए गए हैं. भारत ने क्‍वाड (Quad) पर कैनबरा से अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को करारा जवाब दिया है. ट्रंप ने क्‍वाड में अमेरिकी भागीदारी पर उदासीनता को कई बार स्‍पष्‍ट रूप से जताया है. वहीं, भारत क्‍वाड के अन्‍य सदस्‍य देशों (ऑस्‍ट्रेलिया और जापान) के साथ ही इस जोन के अन्‍य महत्‍वपूर्ण देशों (जैसे दक्षिण कोरिया) के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है. बता दें कि हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक गत‍िविधियों पर लगाम लगाने के लिए Quad का गठन किया गया था. इसमें भारत के साथ ही अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. ट्रंड की नीतियों के चलते इसपर ग्रहण सा लगता दिख रहा था, जिसे भारत अब कूटनीतिक ईंधन देकर उसे एक सशक्‍त फोरम बनाने में जुटा है. अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की Indo-Pacific नीति और Quad के प्रति घटती रुचि के बीच भारत और ऑस्‍ट्रेलिया ने गुरुवार को अपने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में तीन महत्‍वपूर्ण समझौते किए. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके ऑस्‍ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्‍स के बीच कैनबरा में हुई प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान, पनडुब्‍बी खोज एवं बचाव सहयोग, और ज्‍वाइंट स्‍टाफ डायलॉग मेकेनिज्‍म की स्‍थापना से जुड़े तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा दोनों देशों ने एक संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने और दीर्घकालिक रक्षा एवं सुरक्षा ढांचा समझौता पर भी जल्‍द हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई. यह नया ढांचा वर्ष 2009 में हुए साझा सुरक्षा घोषणा पत्र की जगह लेगा. भारत लगातार मजबूत कर रहा रिश्‍ते राजनाथ सिंह की यह यात्रा 2014 में NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऑस्‍ट्रेलिया यात्रा है. यह ऐसे समय में हुई है, जब भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और नीति असंतुलन के बीच जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय साझेदारों के साथ अपने रक्षा संबंधों को सशक्‍त कर रहा है. मार्ल्‍स ने पहले कहा था कि चीन भारत और ऑस्‍ट्रेलिया दोनों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा है. बैठक में दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि Indo-Pacific क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले, स्थिर और समृद्ध माहौल को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है. दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही, उड़ान और निर्बाध व्यापार के महत्व को भी दोहराया. रणनीतिक तौर पर अहम भारत-जापान के हालिया सुरक्षा सहयोग समझौते के बाद यह बैठक Quad देशों (भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, अमेरिका और जापान) के बीच बढ़ते रक्षा तालमेल की दिशा में एक और अहम कदम मानी जा रही है. आने वाले महीने में होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्यास से पहले दोनों देशों ने समुद्री निगरानी और डोमेन अवेयरनेस पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई. राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमने भारत-ऑस्‍ट्रेलिया के रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की. हमने अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की महत्ता को दोहराया.’ उन्‍होंने आतंकवाद पर भारत की सख्‍त नीति दोहराते हुए कहा, ‘आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्‍यापार साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते.’ राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.

आर्कटिक में भारत के लिए नए अवसर, पुतिन की रणनीति से चीन पर शिकंजा कसा जाएगा

मॉस्को/ नईदिल्ली  वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में, रूस और भारत के बीच सदियों पुरानी दोस्ती एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की नींव भी रखेगी। यह समझौता नॉर्दर्न सी रूट (NSR) और संसाधन विकास पर केंद्रित होगा जो भारत को आर्कटिक परिषद में बड़ी भूमिका दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा, बल्कि चीन की बढ़ती आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं के बीच रूस के लिए एक रणनीतिक संतुलन भी साबित होगा। पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में छोटा यह मार्ग ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली की नॉर्दर्न सी रूट के विकास में संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है और संभावना है कि इस साल होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं। नॉर्दर्न सी रूट रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक महासागर से होकर गुजरता है और पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में करीब 40% छोटा है। इस मार्ग से यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और किफायती कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्कटिक शिपिंग में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। यह समूह रूस के विशेष आर्कटिक विकास प्रतिनिधि व्लादिमीर पानोव (Rosatom) और भारत के नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा की संयुक्त अध्यक्षता में काम कर रहा है। इस कार्य समूह की पहली बैठक अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में हुई, जिसमें आर्कटिक जहाज निर्माण परियोजनाओं में साझेदारी, भारतीय नाविकों को ध्रुवीय नौवहन प्रशिक्षण देने, और एनएसआर पर कार्गो शिपिंग सहयोग के लिए एक एमओयू तैयार करने पर चर्चा हुई। भारत को आर्कटिक काउंसिल में बड़ी भूमिका देना चाहता है रूस सूत्रों के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत को आर्कटिक काउंसिल में अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जाए। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को संतुलित करना चाहता है। आर्कटिक इलाका जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, जिससे रूस और भारत दोनों के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम बनता है। इसके साथ ही रूस इस बात पर भी जोर दे रहा है कि नॉर्दर्न सी रूट को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ा जाए। भारत ने इस बंदरगाह के संचालन की जिम्मेदारी अगले दस वर्षों के लिए हासिल की है। रूस इस बंदरगाह का इस्तेमाल भारतीय महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए करना चाहता है। पुतिन के आगामी भारत दौरे से उम्मीद की जा रही है कि भारत-रूस आर्कटिक सहयोग में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आर्कटिक: वैश्विक व्यापार का नया गेटवे आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे ठंडे और संसाधन-समृद्ध इलाकों में से एक है। यह आज जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहा है। इससे न केवल नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं, बल्कि तेल, गैस, दुर्लभ खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच भी आसान हो रही है। रूस आर्कटिक महासागर के 53 प्रतिशत तट को नियंत्रित करता है। वह इस क्षेत्र में अपनी प्रभुता कायम रखने के लिए सक्रिय है। 2024 में NSR से 37 मिलियन टन से अधिक माल ढोया गया, जो 2025 में और बढ़ने की उम्मीद है। भारत के लिए यह अवसर सुनहरा है। स्वेज कनाल या पनामा चैनल जैसे पारंपरिक मार्गों की तुलना में NSR एशिया और यूरोप के बीच यात्रा को 40 प्रतिशत छोटा कर देता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि व्यापारिक लागत भी घटेगी। रूसी स्रोतों के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान NSR के उपयोग पर ठोस कार्रवाई की योजना बनेगी। इसमें भारत को रूसी आइसब्रेकर बेड़े (जिसमें 40 आइसब्रेकर और 8 न्यूक्लियर-संचालित जहाज शामिल हैं) का सहयोग मिलेगा। यह कदम चीन की 'पोलर सिल्क रोड' महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए रूस की रणनीति का हिस्सा है। आर्कटिक में चीन की बढ़ती उपस्थिति रूस के लिए चुनौती बनी हुई है, और भारत का प्रवेश एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम करेगा। भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक भारत और रूस के बीच संबंध सोवियत काल से ही विशेष रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ का समर्थन हो या आज रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम, दोनों देशों की साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अटूट रही है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें रूसी तेल भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना। यूक्रेन संघर्ष के बावजूद, भारत ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बनाए रखी, जिसकी आलोचना अमेरिका ने की। लेकिन राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में वलदाई चर्चा क्लब में कहा, "भारत हमारे ऊर्जा वाहकों को अस्वीकार करे तो उसे 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमारी साझेदारी मजबूत है।" पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "प्रिय मित्र" और "बुद्धिमान नेता" कहा, जो देश की भलाई के बारे में सोचते हैं।

बड़े मंच पर भारत-पाक ने मिलकर ट्रंप की इच्छा को ठुकराया, अमेरिका की चाल हुई विफल

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान को धमकी दे रहे थे. इस धमकी के खिलाफ अब भारत तालिबान के साथ खड़ा हो गया है. अफगानिस्तान को लेकर यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मोड़ दिखाता है. भारत ने तालिबान, पाकिस्तान, चीन और रूस के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस सौंपने की बात कही थी. यह फैसला उस समय आया है जब तालिबान शासित अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी इस हफ्ते भारत की ऐतिहासिक यात्रा पर आने वाले हैं. मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशन ऑन अफगानिस्तान’ की सातवीं बैठक में भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान सहित 10 देशों ने हिस्सा लिया. बेलारूस के प्रतिनिधि भी अतिथि के रूप में मौजूद रहे. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में किसी देश का नाम लिए बिना कहा गया, ‘प्रतिभागियों ने अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में किसी भी देश की ओर से सैन्य ढांचे की तैनाती के प्रयासों को अस्वीकार्य बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के खिलाफ है.’ यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप की योजना की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप और तालिबान भिड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मांग की थी कि तालिबान अमेरिका को बागराम एयरबेस वापस सौंप दे. यह वही बेस है, जहां से अमेरिका ने 2001 के बाद ‘वॉर ऑन टेरर’ यानी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध अभियान चलाया था. 18 सितंबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, ‘हमने वह बेस उन्हें मुफ्त में दे दिया, अब हम उसे वापस चाहते हैं.’ उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी लिखा था- ‘अगर अफगानिस्तान ने बाग्राम एयरबेस वापस नहीं किया तो नतीजे बुरे होंगे.’ तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ट्रंप की मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘अफगान किसी भी हाल में अपनी जमीन किसी और को नहीं देंगे. हम अगले 20 साल युद्ध लड़ने को तैयार हैं.’ मॉस्को फॉर्मेट वार्ता के नए संस्करण में, देशों के समूह ने अफगानिस्तान में समृद्धि और विकास लाने के तौर-तरीकों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। इन देशों ने अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों में सैन्य बुनियादी ढांचे तैनात करने के कुछ देशों के प्रयासों को 'अस्वीकार्य' बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हितों की पूर्ति नहीं करता है। तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने पहली बार मॉस्को फॉर्मेट वार्ता में भाग लिया। कुछ हफ्ते पहले, ट्रंप ने कहा था कि तालिबान को बगराम एयरबेस अमेरिका को सौंप देना चाहिए, क्योंकि इसे वॉशिंगटन ने स्थापित किया था।मॉस्को में हुई बातचीत में भाग लेने वाले देशों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। बयान में कहा गया, 'उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान को आतंकवाद को खत्म करने और इसे जल्द से जल्द जड़ से मिटाने के लिए ठोस कदम उठाने में मदद दी जानी चाहिए, ताकि काबूल की धरती का इस्तेमाल पड़ोसी देशों और अन्य जगहों की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में न हो।' इसमें कहा गया कि इन देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद अफगानिस्तान, क्षेत्र और व्यापक विश्व की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत, रूस और चीन के अलावा, इस बैठक में ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने भी भाग लिया। इन देशों ने इस क्षेत्र और इससे आगे के देशों के साथ अफगानिस्तान के आर्थिक संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। मुत्ताकी की यात्रा क्यों है खास भारत का इस मुद्दे पर तालिबान के साथ खड़ा होना कई मायनों में ऐतिहासिक है. मुत्ताकी पहली बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने उन्हें 9 से 16 अक्टूबर तक यात्रा की अनुमति दी है. क्योंकि मुत्ताकी UNSC की प्रतिबंधित सूची (Resolution 1988) में शामिल हैं, इसलिए उन्हें विशेष मंजूरी मिली है. बगराम क्यों चाहता है अमेरिका? काबुल से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित बाग्राम एयरबेस अफगानिस्तान का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है. इसमें दो बड़े रनवे हैं, जिसमें से एक 3.6 किमी और दूसरा 3 किमी लंबा. पहाड़ी इलाके के कारण अफगानिस्तान में बड़े विमानों की लैंडिंग मुश्किल होती है, ऐसे में बगराम एक रणनीतिक केंद्र माना जाता है.  

WC में भारत की बेटियों का जलवा, ODI में पाकिस्तान पर लगातार 12वीं जीत, खेल भावना पर उठे सवाल

कोलंबो  आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के मैच नंबर-6 में रविवार (5 अक्टूबर) को भारत का सामना चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से हुआ. कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में भारत ने 88 रनों से शानदार जीत हासिल की. मुकाबले में पाकिस्तान को जीत के लिए 248 रनों का टारगेट मिला था, जिसका वो पीछा नहीं कर पाई. पाकिस्तानी टीम 43 ओवरों में 159 रनों पर सिमट गई. भारत की ओर से तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने तीन विकेट झटके और वो 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुनी गईं. दीप्ति शर्मा ने भी तीन और स्नेह राणा ने दो विकेट हासिल किए. पाकिस्तान पर भारतीय टीम ने वूमेन्स वनडे में लगातार 12वीं जीत हासिल की है. उसने अब तक एक भी वनडे मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ गंवाया नहीं है. मौजूदा वर्ल्ड कप में भारत की ये लगातार दूसरी जीत रही और वो अंकतालिका में पहले स्थान पर पहुंच गई है. भारतीय टीम ने अपने अभियान का शानदार आगाज करते हुए पहले मुकाबले में श्रीलंका को डीएलएस नियम के तहत 59 रनों से पराजित किया था. भारतीय टीम अब अपने अगले मुकाबले में 9 अक्टूबर को साउथ अफ्रीका का सामना करेगी. टारगेट का पीछा करते हुए पाकिस्तानी टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 6 रनों के स्कोर पर मुनीबा अली का विकेट गंवा दिया  मुनीबा 2 रनों के निजी स्कोर पर रन आउट हुईं. फिर उसने सदफ शमास (6 रन) और आलिया रियाज (2 रन) का विकेट भी सस्ते में खो दिया. 26 रनों पर तीन विकेट गिरने के बाद सिदरा अमीन और नतालिया परवेज ने चौथे विकेट के लिए 69 रन जोड़े. क्रांति गौड़ ने नतालिया को आउट करके इस पार्टनरशिप को तोड़ा. कप्तान फातिमा सना (2 रन) कुछ खास नहीं कर पाईं और उन्हें दीप्ति शर्मा ने अपनी फिरकी में फंसाया. पाकिस्तान के लिए सिदरा अमीन ने खेली अच्छी पारी पांच विकेट गिरने के बाद सिदरा अमीन और सिदरा नवाज ने मिलकर छठे विकेट के लिए 41 रन जोड़े. जरूरी रनरेट बढ़ता जा रहा था, इसी चलते पाकिस्तानी टीम बैक टू बैक ओवरों में सिदरा नवाज (14 रन) और रमीन शमीम (0 रन) के विकेट खो दिए. पाकिस्तान को फिर सिदरा अमीन के रूप में आठवां झटका लगा, जो शानदार बैटिंग कर रही थीं. सिदरा ने 106 गेंदों पर 81 रन बनाए, जिसमें 9 चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. यह वूमेन्स ओडीआई में भारत के खिलाफ किसी पाकिस्तानी बैटर का बेस्ट स्कोर रहा. सिदरा अमीन के आउट होने के बाद भारतीय टीम के लिए जीत औपचारिकता रह गई. भारतीय महिला टीम ने PAK प्लेयर्स से नहीं मिलाया हाथ स मुकाबले में नो हैंडशेक पॉलिसी देखने को मिली. टॉस के समय भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया. फिर मैच के बाद भी भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी प्लेयर्स संग हैंडशेक नहीं किया. इससे पहले एशिया कप 2025 में भारतीय मेन्स टीम ने ऐसा किया था. तब भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों ही मैचों में पाकिस्तान प्लेयर्स संग हैंडशेक नहीं किया था. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बोर्ड की ओर से खिलाड़ियों को पाकिस्तान टीम से हाथ मिलाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा था, 'पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है. खिलाड़ियों को हैंडशेक करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है. हमारा फोकस सिर्फ खेल पर है.' मोहसिन नकवी के हाथों नहीं ली एशिया कप ट्रॉफी यह मुद्दा सबसे पहले मेन्स एशिया कप के दौरान उभरा था, जब भारत और पाकिस्तान तीन बार आमने-सामने आए थे. उस समय भारतीय टीम ने मैच से पहले और उसके बाद हैंडशेक से परहेज किया थाा. पाकिस्तानी टीम के कोच माइक हेसन ने दावा किया था कि भारतीय टीम ने सुरक्षा और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसा किया. तनाव उस समय और बढ़ गया जब भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी के हाथों एशिया कप ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि पाकिस्तान के साथ खेल संबंध सिर्फ आईसीसी या न्यूट्रल वेन्यू पर होने वाले टूर्नामेंट्स तक सीमित रहेंगे. दोनों देशों के बीच आखिरी द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज 2012-13 में खेली गई थी. महिला वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान की टीम कोलंबो में ही ठहरी हुई है, जबकि भारत के मुकाबले गुवाहाटी और कोलंबो में हो रहे हैं. भारत ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका को 59 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की थी.

2030 तक तैनात होगी Mach 4.5 ब्रह्मोस मिसाइल, भारत-रूस मिलकर बढ़ाएंगे देश की रक्षा ताकत

नई दिल्ली भारत और रूस की रक्षा साझेदारी एक नए मुकाम पर पहुंच गई है. दोनों के बीच हुई 800 मिलियन डॉलर की ‘घातक’ डील अब दुनिया के हथियार बाजार में हलचल मचा रही है. दोनों देशों की ज्वाइंट प्रोजेक्ट ब्रह्मोस एयरोस्पेस अब ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को और भी घातक और तेज बनाने पर काम कर रही है. मौजूदा ब्रह्मोस की स्पीड जहां मैक-3 है, वहीं नए वेरिएंट को मैक-4.5 (Mach 4.5) की रफ्तार से उड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है. यह अपग्रेड आने वाले दशकों तक भारत को विश्व स्तर पर बढ़त दिलाने वाला साबित हो सकता है. बताया जा रहा है कि यह अपग्रेड मिसाइल के रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) को और शक्तिशाली बनाकर किया जाएगा. इससे इसकी मारक क्षमता 450 से 800 किलोमीटर तक बनी रहेगी. लेकिन रफ्तार दुश्मन के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को मात देने वाली होगी. यही नहीं इस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग भी और अधिक बढ़ने की उम्मीद है. रैमजेट इंजन होगा और ताकतवर इस प्रोजेक्ट में रूस के वैज्ञानिक और भारत की DRDO (Defence Research and Development Organisation) मिलकर काम कर रहे हैं. इसका फोकस नए हाई-टेम्परेचर अलॉय और स्पेशल फ्यूल पर है, ताकि इतनी तेज गति पर भी इंजन और एयरफ्रेम सही तरह से काम करता रहे. मौजूदा एयरफ्रेम रहेगा कारगर विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ब्रह्मोस का एयरफ्रेम इतना मजबूत है कि वह बिना बड़े बदलाव के मैक-4.5 की रफ्तार झेल सकता है. हालांकि इतनी रफ्तार पर तापमान और दबाव से निपटने के लिए नई सामग्री का इस्तेमाल करना होगा. 2030 तक होगा तैयार जानकारी के मुताबिक, अपग्रेडेड ब्रह्मोस का ग्राउंड टेस्ट अगले तीन साल में शुरू हो सकता है. इसके बाद उड़ान परीक्षण और इंटीग्रेशन किया जाएगा. अनुमान है कि यह नया वेरिएंट 2030 की शुरुआत तक तैनाती के लिए तैयार हो जाएगा. दुश्मनों के पास नहीं होगा जवाब मैक-4.5 स्पीड हासिल करने के बाद दुश्मन देशों के पास मिसाइल को इंटरसेप्ट करने का वक्त नहीं बचेगा. यह किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती होगी. साथ ही, इसकी हिट एनर्जी इतनी ज्यादा होगी कि यह अंडरग्राउंड बंकर, नौसैनिक जहाज और कमांड सेंटर्स तक को तबाह कर सकेगी. फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों ने खरीदा है. लेकिन नए वेरिएंट के आने के बाद अन्य देशों से भी बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है. यह भारत को हथियारों के वैश्विक बाजार में और मजबूत करेगा.  

अनन्त ऊर्जा के साथ आयुष गुप्ता ने शुरू किया वैश्विक शांति मिशन – हीलिंग फॉर वर्ल्ड पीस

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 भोपाल भारत से विश्व तक – एक समय, एक संकल्प और हज़ारों हीलर्स का विश्व शांति के लिए एकजुट होना – एक ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड। झीलों की नगरी भोपाल 5 अक्टूबर 2025 को मिंटो हॉल में एक ऐतिहासिक वैश्विक आंदोलन और विश्व रिकॉर्ड की मेज़बानी करने जा रहा है। “हीलिंग फॉर वर्ल्ड पीस” (HFWP) शीर्षक से यह पहल, अनन्त ऊर्जा के संस्थापक आयुष गुप्ता जी और आरविका गुप्ता जी द्वारा आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर हज़ारों और लाखों हीलर्स, ऊर्जा साधक, आध्यात्मिक नेता, बिज़नेस आइकॉन और सेलेब्रिटीज एक साथ जुटेंगे, सामूहिक ऊर्जा को विश्व शांति और समृद्धि के लिए समर्पित करेंगे। यह आंदोलन विश्वप्रसिद्ध रेकी ग्रैंडमास्टर, सेलिब्रिटी टैरो रीडर और इंटरनेशनल वेलनेस मेंटर आयुष गुप्ता जी के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जो नीम करोली बाबा के आशीर्वाद से संचालित है और वर्तमान समय के वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन, इज़रायल-फिलिस्तीन, टैरिफ वॉर, नेपाल संकट, व्यापारिक संघर्ष और मानवीय संकट आदि) की पृष्ठभूमि में शांति की अत्यावश्यकता को दर्शाता है। मुख्य आकर्षण     •    विश्व रिकॉर्ड प्रयास: विश्व शांति के लिए अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक हीलिंग एनर्जी सर्कल।     •    वैश्विक सहभागिता: भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, यूएई, नेपाल और अन्य देशों से हज़ारों हीलर्स की भागीदारी। रेकी, प्राणिक हीलिंग, योग, आयुर्वेद, ध्यान और साउंड हीलिंग जैसे विविध आयामों का संगम।     •    राजनीतिक गरिमा: भारत सरकार के मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला जी और अन्य देशों व वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति।     •    प्रसिद्ध उद्योगपति: श्री दिलीप सुर्यवंशी जी (मैनेजिंग डायरेक्टर, दिलीप बिल्डकॉन), श्री संजीव अग्रवाल जी (सीएमडी, सेज ग्रुप) और अन्य प्रतिष्ठित उद्योगपतियों का सहयोग।     •    अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि: दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल से अहमद इब्राहिम जी, डॉ. बी.यू. अब्दुल्ला जी सहित कई वैश्विक प्रतिनिधियों की उपस्थिति।     •    बॉलीवुड समर्थन: प्रसिद्ध फिल्मकार राकेश रोशन जी, गायक बृजेश शांडिल्य जी, अभिनेता बलराज स्याल जी, गौरव दुबे जी, रेवा़ काराउस और अन्य फिल्म जगत की हस्तियाँ इस वैश्विक आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।     •    सामुदायिक सहयोग: जापान से काओरी यानागी एवं शिंसुके कावाशिमा द्वारा सैकड़ों हीलर्स को ऑनलाइन जोड़ना, दुबई से अंक़ा (संस्थापक फ़ातिह और रोसा) द्वारा हीलर्स की भागीदारी, मध्य प्रदेश से मधुलिका बाजपेयी जी का हीलर्स को संगठित करना, फिफ्थवेद द्वारा सहयोग प्रबंधन आदि।     •    जन-सहभागिता: हज़ारों लोग भोपाल में और लाखों लोग ऑनलाइन जुड़ेंगे – इसे सच्चे अर्थों में एक वैश्विक आयोजन बनाएंगे। सहयोगी और भागीदार इस पहल को प्रतिष्ठित भागीदारों का मज़बूत सहयोग प्राप्त है – मध्य प्रदेश पर्यटन, दिलीप बिल्डकॉन, दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल, दुबई योगा फेडरेशन, एएनजीसी, आनन्द संस्थान, ताज लेकफ्रंट भोपाल, सेज यूनिवर्सिटी, बी.यू. अब्दुल्ला ग्रुप, एमपीटी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स और अन्य संस्थाएँ। यह सहभागिता न केवल मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मज़बूत करती है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर शांति और प्रगति का प्रतीक बनाती है। एकता का आह्वान आयुष गुप्ता जी ने कहा: “हीलिंग फॉर वर्ल्ड पीस केवल एक आयोजन नहीं है – यह मानवता के लिए एक आंदोलन है। जब हज़ारों हीलर्स और शांति समर्थक एक ही संकल्प के साथ अपनी ऊर्जा को समर्पित करते हैं, तो वह कंपन पूरी दुनिया को शांति की ओर मोड़ सकती है। यह ऐतिहासिक प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर होगा।” आयोजक सभी हीलर्स, इन्फ्लुएंसर्स, कॉरपोरेट्स, मीडिया प्रोफेशनल्स और विश्व नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे इस ऐतिहासिक प्रयास का हिस्सा बनें – चाहे भोपाल में प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सहभागिता के माध्यम से।

अहमदाबाद में टीम इंडिया का जलवा, वेस्टइंडीज पर 286 रनों की लीड के साथ बनाई पकड़

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अहमदाबाद  भारत-वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हो रहा है. आज (4 अक्टूबर) इस मुकाबले का तीसरा दिन है. वेस्टइंडीज की टीम अपनी दूसरी पारी में बैटिंग कर रही है. वेस्टइंडीज का स्कोर 20 रन को पार कर चुका है और उसके 2 विकेट गिरे है. मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट पर 448 रनों के स्कोर पर घोषित कर दी. भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 286 रनों की लीड मिली. वहीं वेस्टइंडीज की पहली पारी 162 रनों पर सिमट गई थी. वेस्टइंडीज की दूसरी पारी का स्कोरकार्ड बल्लेबाज विकेट रन जॉन कैम्पबेल कैच साई सुदर्शन, बोल्ड रवींद्र जडेजा 14 तेजनारायण चंद्रपॉल कैच नीतीश कुमार रेड्डी, बोल्ड मोहम्मद सिराज 8 एलिक अथानाज नाबाद   ब्रैंडन किंग नाबाद   विकेट पतन: 12-1 (तेजनारायण चंद्रपॉल, 7.2 ओवर) भारत की पहली पारी: राहुल-जुरेल-जडेजा के शतक भारत की पहली पारी में केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा ने शतकीय योगदान दिया. सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने 197 गेंदों का सामना करते हुए 100 रन बनाए, जिसमें 12 चौके शामिल रहे. ये राहुल का टेस्ट में 11वां शतक रहा. वहीं घर पर ये उनका दूसरा टेस्ट शतक था. ध्रुव जुरेल ने 15 चौके और तीन छक्के की मदद से 210 गेंदों पर 125 रन बनाए. जबकि जडेजा ने 6 चौके और 5 छक्के की मदद से 176 गेंदों पर नाबाद 104 रन बनाए. जुरेल के टेस्ट करियर का ये पहला और जडेजा के टेस्ट करियर छठा शतक रहा. वेस्टइंडीज की ओर से रोस्टन चेज ने दो विकेट चटकाए.

BCCI ने दिया अंतिम अल्टीमेटम, ट्रॉफी चोरी मामले में नकवी को हो सकती है जेल

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दुबई / नई दिल्ली भारत ने मैदान में पसीना बहाकर एशिया कप 2025 जीता, लेकिन ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमा बैठे हैं मोहसिन नकवी! एशियन क्रिकेट काउंसिल के चीफ पर सनसनीखेज़ आरोप है कि उन्होंने विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपने की बजाय उसे होटल ले जाकर ‘हथिया’ लिया. यह हरकत ना सिर्फ खेल भावना के खिलाफ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की साख पर भी सवाल खड़े कर रही है. बीसीसीआई इस बेशर्मी से तिलमिलाई हुई है और अब दुबई पुलिस में चोरी का मामला दर्ज करवाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सवाल अब ये खड़ा होता है कि क्या एशिया कप की ट्रॉफी अब खेल का सम्मान है या सियासी मोहरा बन चुका है जहां व्यक्तिगत अहम् एक दूसरे पर भारी पड़ रहा है. मोहसिन नकवी पर पुलिस केस! भारत के फाइनल जीते अब 72 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं और मोहसिन नकवी ने ना तो ट्रॉफी भारत को सौंपी है और ना ही उसको एशियन क्रिकेट काउंसिल के दफ़्तर भेजा है.  ACC की बैठक में ज़ोर-शोर से ये विवाद उठा और कई देशों के प्रतिनिधियों ने इसका विरोध भी किया पर मोहसिन नकवी अपनी ज़िद पर अड़े रहे और ट्राफ़ी उनके होटल के कमरे में पड़ी रही. अब बीसीसीआई ने सख़्त क़दम उठाने का मन बना लिया है और वो मोहसिन नकवी पर ट्रॉफी चोरी और जबरन क़ब्ज़ा की शिकायत लिखित रूप से दुबई पुलिस को करने का मन बना चुके हैं . सूत्रों की मानें तो बोर्ड ने मोहसिन नकवी के 72 घंटे का समय दिया है और इस दौरान वे ट्रॉफ़ी ACC के आफिस नहीं पहुँचाते तो अधिकारिक रूप से दुबई पुलिस में केस दर्ज कराया जाएगा और ऐसा होता है तो मोहसिन नकवी कीं गिरफ़्तारी होना तय है और उनको जेल भी जाना पड़ सकता है . मोहसिन नकवी दुबई छोड़कर कर ट्रॉफी के साथ पाकिस्तान ना भाग पाएँ इसके लिए भी बीसीसीआई यूएई में लगातार बात कर रही है. दुबई का क़ानून सख्त है दुबई में अपराध दर कम है और यहाँ के कानून हर तरह की आपराधिक गतिविधि पर सख्त सज़ा का प्रावधान करते हैं.एक कर्मचारी द्वारा नियोक्ता की संपत्ति चुराने पर भी 5 से 7 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है, और इस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. दुबई में चोरी या जबरन कब्ज़े के लिए सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है, और इसमें कम से कम 6 महीने की कैद से लेकर 3 साल तक की कैद के साथ जुर्माना शामिल हो सकता है. कुछ गंभीर चोरी के मामलों में 3 से 15 साल तक की कैद हो सकती है. यानि यूएई के क़ानून के हिसाब से जाए और मोहसिन नकवी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उनको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है.