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राज्य मंत्री लोधी बोले – मध्यप्रदेश को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप मे होगा स्थापित

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड का भोपाल में 11 से 13 अक्टूबर तक आयोजन   भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य 11 से 13 अक्टूबर 2025 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM) 2025 का आयोजन होगा। यह आयोजन घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बायर्स, सेलर्स, ट्रैवल एजेंट्स, फिल्म प्रतिनिधियों और पर्यटन जगत के सभी हितधारकों को एक ही मंच पर जोड़ेगा। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 27 देशों के 80 से अधिक विदेशी टूर ऑपरेटरों, 150 घरेलू टूर ऑपरेटरों, 355 सेलर्स, फिल्म जगत से जुड़े प्रतिनिधि और मीडिया सहित कुल 700 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। यह भारत का सबसे बड़ा राज्य-स्तरीय ट्रैवल मार्ट होगा, जो मध्यप्रदेश को “अतुल्य भारत का हृदय” के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि फिक्की की सहयोग से आयोजित होने वाला यह देश के सबसे बड़े राज्य-स्तरीय ट्रैवल मार्ट में से एक होगा। इससे हमारे प्रदेश के होटलियर, ट्रैवल और टूर ऑपरेटर, होमस्टे संचालक और पर्यटन हितग्राही जिन्हें सेलर्स कहा जाता है। उन्हें बायर्स कहे जाने वाले विदेश और देश के प्रमुख होटलियर, ट्रैवल और टूर ऑपरेटर से सम्पर्क में आयेगे। इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि साथ साथ पर्यटन क्षेत्र में आर्थिक उन्नति के द्वार खुलेंगे। पर्यटन के श्रेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेंगे। यह आयोजन पर्यटन, आतिथ्य, फिल्म, वेडिंग और MICE सेक्टर में निवेश, साझेदारी और सहयोग का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम के दौरान 3000 से अधिक बी-टू-बी मीटिंग्स आयोजित होंगी, जो अब तक मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में होने वाला सबसे बड़ा व्यावसायिक संवाद होगा। इसके साथ ही पर्यटन और फिल्म उद्योग से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस तथा राउंडटेबल सत्र भी होंगे, जिनमें राज्य सरकारों (G2G) और वेडिंग एवं कॉर्पोरेट आयोजकों (G2B) के साथ विषयगत चर्चा की जाएगी। इस आयोजन में पर्यटन मंत्रालय के साथ–साथ विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित होंगे। मध्यप्रदेश पर्यटन को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2025 के माध्यम से प्रदेश अपने समृद्ध पर्यटन उत्पादों — धरोहर, वन्य जीवन, ग्रामीण संस्कृति, हस्तशिल्प, खानपान और फिल्म पर्यटन — को एक ही मंच पर प्रदर्शित करेगा। यहां 120 से अधिक स्टॉल्स लगाए जाएंगे, जिसमें प्रदेश के हथकरघा एवं हस्तशिल्प के उत्पाद होंगे, गोंड आर्ट एवं चंदेरी साड़ी का लाइव डेमो होगा। हितधारकों के स्टॉल्स भी इसमें शामिल होंगे। निवेश संवर्धन, नई पर्यटन परियोजनाओं के समझौते और फिल्म नीति के अंतर्गत सहयोगात्मक घोषणाएं भी की जाएंगी। इस आयोजन में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सुप्रसिद्ध नृत्य संयोजक सुश्री मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में मध्यप्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करते लगभग 40 मिनट की समूह नृत्य प्रस्तुति एवं प्रदेश की सांगीतिक पहचान का प्रतीक मैहर बैंड द्वारा विशेष प्रस्तुति के साथ–साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं का परिचय कराने के लिए लोकनृत्य एवं जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक लोक संस्कृति इस आयोजन को और जीवंत बनाएंगे। मुख्यमंत्री के साथ निवेशकों की चर्चा और प्रमुख सत्र आयोजन के दौरान  मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ वन-टू-वन निवेशक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटन की संभावनाओं पर केंद्रित पैनल डिस्कशन भी होंगे, जिनमें दो प्रमुख सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। पहला सत्र “मध्यप्रदेश: हिडन जेम से ग्लोबल आइकन तक” राज्य की धरोहर, वन्य जीवन, इको-टूरिज्म और उत्सवों पर केंद्रित होगा। दूसरा सत्र “द फ्यूचर ऑफ द फिल्म सेक्टर इन मध्य प्रदेश : फ्रॉम रील टू रियल ग्रोथ” फिल्म निर्माण और फिल्म आधारित पर्यटन के अवसरों पर चर्चा के लिए समर्पित होगा। इन दोनों ही सत्रों में देश-विदेश के विशेषज्ञ, निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इंफ्लुएंसर मीट और फैम टूर MPTM 2025 के दौरान 9 अक्टूबर को इंफ्लुएंसर मीट आयोजित की जा रही है, जिसमें देश के इंफ्लुएंसर्स हिस्सा लेंगे। 14 फैम (FAM) ट्रिप्स आयोजित होंगी, जिनमें 200 से अधिक प्रतिनिधि मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन सर्किट में वन्यजीव, धरोहर, संस्कृति और अध्यात्म का अनुभव करेंगे। आगंतुकों के लिए भोपाल में कमला पार्क से इकबाल मैदान तक हेरिटेज वॉक, योगा व वेलनेस सत्र, वन विहार नेशनल पार्क में बर्ड वॉच और बोट क्लब पर कायकिंग व सेलिंग का आयोजन किया जाएगा। प्रमुख प्रतिभागी और उद्योग सहभागिता मार्ट में भारत और विदेश के पर्यटन उद्योग से जुड़े कई प्रमुख नाम हिस्सा लेंगे। इनमें डॉ. ज्योत्सना सूरी (सीएमडी, ललित ग्रुप), श्री परवीन चंदर (एक्जीक्युटिव वाइस प्रेसिडेंट, आईएचसीएल ग्रुप), श्री राजीव मेहरा (FAITH), श्री वेद खन्ना (प्रेसिडेंट, ADTOI), मनीष पुरी (प्रेसिडेंट सेल्स, एयर इंडिया), श्री अनिरुद्ध कंडपाल (को–फाउंडर एंड सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सेल्स एंड स्ट्रेटजिक डेवलपमेंट, पोस्ट कार्ड होटल्स), श्री रवि गोसाईं (प्रेसिडेंट, इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स), श्री राकेश कुमार राणा (हेड–होटल्स, पार्टनरशिप एंड एफिलिएट्स, यात्रा डॉट कॉम), डॉ. सुश्रुत सुधीर बाबुलकर (सेरेन्डिपिटी लेक्स एंड रिसॉर्ट्स, तामिया) जैसे प्रतिष्ठित उद्योगपति तथा IATO, FAITH, ADTOI, TAAI जैसी शीर्ष संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। फिल्म जगत से टेलीविजन और फिल्म प्रोड्यूसर सुश्री एकता कपूर, अभिनेत्री सुश्री सुनीता रजवार, प्रसिद्ध अभिनेता श्री गजराज राव व श्री रघुवीर यादव, फिल्म डायरेक्टर श्री विशाल फुरिया, फिल्म प्रोड्यूसर मोनीशा आडवाणी, स्पेनिश फिल्म प्रोड्यूसर अन्ना साउरा, लारा मोलिना (स्पेन फिल्म कमीशन की सदस्य), अभिनेता शिवांकित सिंह परिहार जैसे प्रतिष्ठित फिल्म व्यक्तित्व भी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। साथ ही, एमपी टूरिज्म, आईआरसीटीसी, इन्क्रेडिबल इंडिया और विभिन्न राज्य पर्यटन विभागों के पेवेलियन इस आयोजन का हिस्सा होंगे। मध्यप्रदेश के पर्यटन का प्रभाव और भविष्य मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2025 का उद्देश्य राज्य को पर्यटन, फिल्म, वेडिंग और जिम्मेदार पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक निवेश और साझेदारी का केंद्र बनाना है। इस आयोजन के माध्यम से राज्य की ब्रांड पहचान 27 अंतरराष्ट्रीय बाजारों कै साथ पूरे विश्व में पहुंचेगी। यह आयोजन पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं, निवेश और सहयोग के द्वार खोलेगा। एमपीटीएम 2025, मध्यप्रदेश की पहचान को “ग्लोबल आइकन इन टूरिज्म” के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

केन्द्रीय मंत्रि-मंडल ने मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों की रेलवे मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रि-मंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों के 18 जिलों में रेलवे की 4 मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मध्यप्रदेश को मिली इस सौगात के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार मानते हुए धन्यवाद किया है। पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार इन परियोजनाओं का उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श द्वारा मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना है। ये परियोजनाएं नागरिकों, वस्तुओं और सेवाओं को निर्बाध संपर्क प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेलवे लाइन क्षमता में बढ़ोत्‍तरी से गतिशीलता बढ़ेगी जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। मल्टी-ट्रेकिंग (पटरियों की संख्या बढ़ाना) से रेल परिचालन सुगम होगा और यात्रियों को सुविधा होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप इन परियोजनाओं से क्षेत्र के लोगों का व्यापक विकास होगा, वे आत्मनिर्भर बनेंगे और उनके लिए रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। केन्द्रीय मंत्रि-मंडल समिति ने मध्यप्रदेश में 237 किलोमीटर लंबी इटारसी-भोपाल-बीना चौथी लाइन को और गुजरात एवं मध्यप्रदेश के बीच 259 किलोमीटर लंबी बढ़ोदरा-रतलाम, तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में वर्धा-भुसावल के बीच 314 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन को तथा महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में 84 किलोमीटर लंबी गोंदिया-डोंगरगढ़ चौथी लाइन को मंजूरी दी गई है। कुल 24 हजार 634 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं 2030-31 तक पूरी होंगी। स्वीकृत मल्टी-ट्रेकिंग परियोजनाओं से लगभग 3 हजार 633 गांवों, जिनकी जनसंख्या लगभग 85 लाख 84 हजार है तथा 2 आकांक्षी जिलों विदिशा और राजनांदगांव तक संपर्क बढ़ेगा। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्यों के 18 जिलों में व्‍याप्‍त इन चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 894 किलोमीटर की वृद्धि होगी। मध्यप्रदेश में परियोजना खंड सांची, सतपुड़ा बाघ अभयारण्य, प्रागैतिहासिक मानव जीवन के प्रमाणों और प्राचीन शैल चित्रकला के लिए प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रय, हज़ारा जलप्रपात, नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान आदि प्रमुख स्थलों को भी रेल संपर्क प्रदान करेगा, जो देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। यह कोयला, कंटेनर, सीमेंट, फ्लाई ऐश, खाद्यान्न, इस्पात आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए भी आवश्यक मार्ग है। पटरियों की संख्या बढ़ाए जाने से प्रति वर्ष 78 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे के पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन देश के जलवायु लक्ष्यों और परिचालन लागत को कम करने, तेल आयात (28 करोड़ लीटर) में कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन 139 करोड़ किलोग्राम कम करने में मदद करेगा जो 6 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

मध्यप्रदेश में बनेगा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेन्टर

मध्यप्रदेश और फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के बीच हुआ एमओयू भोपाल मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेन्टर स्थापित करने के लिये कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश और स्पेन के फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के बीच एमओयू हुआ। यह केन्द्र न केवल नवाचार एवं स्मार्ट शहरी समाधानों को प्रोत्साहित करेगा बल्कि वैश्विक स्तर के आयोजनों और निवेश सम्मेलनों की मेजबानी का मंच भी बनेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इसी साल जुलाई में स्पेन प्रवास के दौरान संस्थान के पदाधिकारियों से चर्चा हुई थी और उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश आमंत्रित किया था। इस अवसर पर स्पेन के राजदूत श्री जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल तथा फीरा बार्सिलोना इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रिचर्ड जपाटेरो और संस्था के भारत प्रतिनिधि श्री मुकेश अरोरा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्पेन के राजदूत श्री जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल ने विस्तार से चर्चा की। यह एमओयू दोनों पक्षों के बीच सांस्कृतिक-व्यापारिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा और मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन, एक्जीबिशन और व्यापार संबंधी संवाद, निवेश सम्मेलनों के लिए विश्वस्तरीय अधोसंरचना विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस साझेदारी से वैश्विक निवेशकों ओर हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। मध्यप्रदेश का लक्ष्य वैश्विक केन्द्र के रूप में अपनी पहचान को और अधिक सशक्त बनाना है। विशेष रूप से स्मार्ट शहरी समाधान, प्रौद्योगिकी और व्यापार संबंधी प्रदर्शनियों के आयोजन के क्षेत्र में राज्य अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय मानकों और अवसरों के अनुरूप विकास कर सकेगा। यह एमओयू औद्योगिक और निवेश गतिविधियों के नये क्षितिजों को जोड़ने वाला साबित होगा इससे मध्यप्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। मध्यप्रदेश को वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संवाद मंचों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों का आयोजन करने वाले राज्य के रूप पहचान बनेगी। इस केन्द्र के माध्यम से दुनिया के शीर्ष उद्योगपति, निवेशक और कंपनियां भोपाल आयेंगी। मध्यप्रदेश वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा बनेगा और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और अवसरों का भी केन्द्र बिन्दु बनेगा। मध्यप्रदेश बनायेगा वैश्विक पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ना सिर्फ उद्योग, व्यापार वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति बेहद लाभकारी सिद्ध हुई है। मध्य प्रदेश आने वाले वर्षों में दिल्ली क्षेत्र के विकल्प की दृष्टि से भी आवश्यक अधोसंरचना का विकास कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इंदौर और भोपाल दो मेट्रापोलिटन क्षेत्र के बाद जबलपुर और ग्वालियर के मेट्रापोलिटन क्षेत्र के विकास की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेन के बार्सिलोना शहर में विकास की विशिष्ट प्लानिंग की गई है। वहां इस वर्ष की गई अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के साथ विरासत के संरक्षण का संदेश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है। स्पेन के बार्सिलोना जैसे शहर भी प्राचीन वैभव को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं। मध्यप्रदेश में भी प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा बताए मॉडल और बार्सिलोना के संदेश को अपनाया जा रहा है। स्पेन के राजदूत श्री पुजोल ने कहा कि अच्छी लीडरशिप और संगठन तथा प्रबंधन क्षमता से भारत और स्पेन मिलकर बेहतर कार्य करेंगे।  

वन्यजीव पर्यटन में सहयोग बढ़ाएंगे मध्यप्रदेश और असम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  चाय बागान में श्रमिकों और बहनों से किया आत्मीय संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असम प्रवास के दौरान रविवार को विश्व प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और चाय बागान का भ्रमण किया। उन्होंने बागान में चाय उत्पादन की प्रक्रिया का अवलोकन कर स्थानीय किसानों और श्रमिक बहनों से आत्मीय संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चाय उद्योग असम का गौरव और अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। परिश्रम, अपनत्व एवं सादगी की धरती असम और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार-उद्योग के साथ ईको-टूरिज्म, वन्य जीव पर्यटन की दिशा में भी परस्पर सहयोग, विश्वास और साझेदारी को बढ़ाने के लिए विशेष पहल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संरक्षण की मनमोहक झलक देखी एवं हाथियों को स्नेह से गन्ना खिलाकर दुलार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां वन्यजीवों के संरक्षण संवर्धन के लिये नवाचारों के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उद्यान भ्रमण के दौरान अजगर को प्राकृतिक आवास में छोड़ा। उल्लेखनीय है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे सहित पूर्वी हिमालयी जैव विविधता का केन्द्र है। इसे यूनेस्को द्वारा विश्व-धरोहर घोषित किया गया। यह उद्यान हाथियों, जंगली भैंसों, दलदली हिरणों और विभिन्न पक्षी प्रजातियों का आश्रय स्थल है। यह उद्यान वन्य जीवों की बड़ी संख्या के साथ वन्य जीव संरक्षण गतिविधियों के लिए भी विख्यात है।

मप्र में नियमों में बड़ा बदलाव: 60 साल बाद सरकारी अफसर ले सकेंगे महंगे तोहफे, विपक्ष ने उठाए सवाल

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भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार अपने 60 साल पुराने सिविल सेवा आचरण नियमों में बदलाव करने जा रही है. नए नियमों के तहत चपरासी से लेकर बड़े अफसर तक कोई भी कर्मचारी एक महीने की सैलरी के बराबर कीमत तक का उपहार स्वीकार कर सकेगा. साथ ही, अगर वे अपने घर के लिए कोई सामान खरीदते हैं, तो इसकी जानकारी सरकार को देने की जरूरत नहीं होगी. इस फैसले ने मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज कर दी है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच जमकर बयानबाजी शुरू हो गई है. भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बदलाव को भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है. उनका कहना है कि यह नियम सरकारी कर्मचारियों को भ्रष्टाचार का खुला लाइसेंस देगा. दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे सामान्य और सतत चलने वाली प्रक्रिया करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि यह बदलाव नियमों को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए किया जा रहा है. दरअसल, मध्य प्रदेश में सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के सख्त प्रावधानों को कुछ सरल करने की दिशा में सरकार ने कदम उठाए हैं. इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर तीन दौर की चर्चा हो चुकी है और नए नियमों का मसौदा (ड्राफ्ट) भी तैयार कर लिया गया है. सरकार की कोशिश है कि दीपावली से पहले इस मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी मिल जाए और इसे अधिसूचित (नोटिफाई) कर दिया जाए. इसके बाद 1965 के पुराने नियम 2025 में संशोधित नियमों में बदल जाएंगे. मप्र सिविल सेवा आचरण नियम नियमों में बड़ा बदलाव     मध्य प्रदेश सरकार 1965 के सिविल सेवा आचरण नियमों को 2025 में संशोधित कर सकती है। इस संशोधन के बाद सरकारी कर्मचारी महंगे गिफ्ट ले सकेंगे, और इसके लिए उन्हें सरकार को सूचना देने की आवश्यकता नहीं होगी। इस बदलाव से कर्मचारियों को अपना काम बिना किसी अड़चन के करने की सुविधा मिलेगी।     सरकार की कोशिश है कि इसे दिवाली से पहले कैबिनेट से मंजूरी मिल जाए और इसके बाद नोटिफाई भी कर दिया जाए। इसके बाद 1965 के आचरण नियमों को बदलकर 2025 के संशोधित आचरण नियम लागू किए जाएंगे। शासन का मानना है कि इन बदलावों से अनावश्यक कागजी कार्रवाई को खत्म किया जा सकेगा। परिवार की नौकरी पर सूचना देना जरूरी नहीं नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि कर्मचारी को अब अपने परिवार के किसी सदस्य के प्राइवेट नौकरी करने की जानकारी सरकार को नहीं देनी होगी। दिवाली से पहले लागू हो सकते हैं नियम सरकार की कोशिश है कि इन संशोधनों को दिवाली से पहले ही कैबिनेट से मंजूरी मिल जाए। इसके बाद 1965 के पुराने नियमों की जगह 2025 के संशोधित आचरण नियम लागू होंगे। गिफ्ट लेने के तीन विकल्प इस बदलाव के बाद, मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारी अपनी वेतन के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। इसके लिए तीन विकल्प रखे गए हैं:     10 दिन के वेतन के बराबर गिफ्ट     15 दिन के वेतन के बराबर गिफ्ट     एक महीने के वेतन के बराबर गिफ्ट यह विकल्प सिर्फ एक बार मंजूरी के साथ लागू होगा। पहले के नियमों के अनुसार, किसी भी उपहार को लेकर कर्मचारियों को सरकार को एक महीने के अंदर सूचना देनी होती थी। नए नियमों में यह बाध्यता खत्म कर दी गई है। सामान खरीदने के नियमों में बदलाव अब सरकारी कर्मचारियों को कोई भी महंगा सामान खरीदने पर सरकार को सूचना देने की आवश्यकता नहीं होगी, अगर वह सामान उनके मासिक वेतन के बराबर है। इससे पहले, किसी भी सामान की खरीदारी पर, कर्मचारियों को सरकार को एक महीने के भीतर सूचित करना पड़ता था। छुट्टी लेने के नियमों में बदलाव जानकारी के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारी आकस्मिक या मेडिकल अवकाश लेने के लिए सिर्फ एक संदेश या व्हाट्सएप के जरिए अनुमति ले सकते हैं। अन्य छुट्टियों (अर्जित या ऐच्छिक) के लिए उन्हें पहले अनुमति लेनी होगी।     पुराना नियम: किसी भी प्रकार के अवकाश (जैसे मेडिकल, आकस्मिक, अर्जित या एच्छिक) लेने से पहले सरकार को सूचित करना पड़ता था। ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग अगर कोई सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर रील या अन्य वीडियो बनाता है, तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, कर्मचारियों को हाउसिंग सोसाइटियों के अध्यक्ष या सदस्य बनने की अनुमति भी मिल सकती है, बिना किसी पूर्व स्वीकृति के। ये जानना जरूरी इस बदलाव के बाद, सरकारी कर्मचारी को अब अपने परिवार के सदस्य द्वारा किसी प्राइवेट संस्था या कंपनी में नौकरी करने की सूचना सरकार को नहीं देनी होगी।

मप्र में Coldrif सिरप प्रतिबंधित, CM का ऐलान – बच्चों की जान लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

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भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने Coldrif सिरप को पूरे प्रदेश में बैन कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि एमपी में इस सिरप की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी प्रदेश में बैन लगाया जा रहा है। छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन से हुई बच्चों की दर्दनाक मौत पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इसे पूरे प्रदेश में बैन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्राप्त हुई जांच रिपोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है और दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला इस सिरप निर्माण करने वाली फैक्ट्री तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की दुखद घटना के बाद एमपी सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच कराने का अनुरोध किया था। आज सुबह प्राप्त जांच रिपोर्ट में सिरप में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप के साथ इस कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स को भी बैन किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी दी कि स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई पहले से जारी थी और अब राज्य स्तर पर भी एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। छिंदवाड़ा में सिरप से गई मासूम बच्चों की जान बता दें कि सितंबर माह में छिंदवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों को सर्दी-खांसी के इलाज के लिए यही कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया। इसके बाद बच्चों में गंभीर लक्षण जैसे उल्टी, पेट दर्द, बेहोशी सहित कई लक्षण देखे गई। प्रारंभिक जांच में सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी का संदेह जताया गया, जो किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। अब तक इस घटना में 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य कई अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद जांच रिपोर्ट आने पर अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप बैन कर दिया गया है।

प्रशासनिक सर्जरी: मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादले, 12 जिलों के कलेक्टर बदले गए

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भोपाल  मध्यप्रदेश में मंगलवार शाम को बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। सरकार ने 24 आईएएस (IAS) अफसरों के तबादले करते हुए 14 जिलों के कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें भिंड, पन्ना, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, डिंडौरी, रतलाम, मुरैना, निवाड़ी, सिंगरौली, अलीराजपुर, पांढुर्णा और सिवनी शामिल हैं। अपर कलेक्टर इंदौर और अपर कलेक्टर जबलपुर का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बड़े फेरबदल में सिंगरौली, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना और डिंडोरी के कलेक्टर हटा दिए गए हैं. सबसे अधिक चर्चा में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का तबादला रहा, जिन्हें भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद हटाया गया है. महत्वपूर्ण नियुक्तियों में, भोपाल नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण को छिंदवाड़ा का नया कलेक्टर बनाया गया है, जबकि श्रम आयुक्त रजनी सिंह अब नरसिंहपुर की कलेक्टर होंगी. गौरव बेनल को सिंगरौली कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह तबादला आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. पूरी लिस्ट देखें.. क्र. अधिकारी का नाम, बैच तथा वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना 1. श्री सुरेश कुमार (2010), कलेक्टर, जिला पन्ना वि.क.अ.-सह-आयुक्त, चम्बल संभाग, मुरैना 2. श्री शीलेन्द्र सिंह (2010), कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग 3. श्रीमती नेहा मारव्या सिंह (2011), कलेक्टर, जिला डिण्डोरी संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल 4. श्री संजीव श्रीवास्तव (2011), कलेक्टर, जिला भिण्ड अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग 5. श्रीमती ऊषा परमार (2011), अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल कलेक्टर, जिला पन्ना 6. श्री शिवराज सिंह वर्मा (2011), अपर सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल 7. श्री राजेश बाथम (2012), कलेक्टर, जिला रतलाम अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग 8. श्रीमती रजनी सिंह (2013), वि.क.अ.-सह-श्रम आयुक्त, मध्यप्रदेश, इंदौर कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर 9. श्री नीरज कुमार वशिष्ठ (2013), संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल कलेक्टर, जिला पांढुर्णा 10. श्रीमती शीतला पटले (2014), कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर कलेक्टर, जिला सिवनी 11. श्री अंकित अस्थाना (2014), कलेक्टर, जिला मुरैना उप सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 12. श्री लोकेश कुमार रामचन्द्र जांगिड (2014), कलेक्टर, निवाड़ी कलेक्टर, जिला मुरैना 13. श्री चन्द्रशेखर शुक्ला (2014), कलेक्टर, जिला सिंगरौली उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग 14. डॉ. अभय अरविन्द बेडेकर (2014), कलेक्टर, जिला आलीराजपुर अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल 15. श्री अजय देव शर्मा (2014), कलेक्टर, जिला पांढुर्णा उप सचिव, राजस्व विभाग तथा अतिरिक्त आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 16. श्रीमती नीतू माथुर (2014), अपर आयुक्त (राजस्व), रीवा संभाग, रीवा कलेक्टर, जिला आलीराजपुर 17. श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (2014), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला रायसेन कलेक्टर, जिला डिण्डोरी 18. श्रीमती जमुना भिडे (2014), सचिव, जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन, भोपाल कलेक्टर, जिला निवाड़ी 19. श्रीमती संस्कृति जैन (2015), कलेक्टर, जिला सिवनी आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 20. श्रीमती बिदिशा मुखर्जी (2015), अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 21. श्री किरोड़ी लाल मीना (2016), अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल कलेक्टर, जिला भिण्ड 22. श्री गौरव बैनल (2016), अपर कलेक्टर, जिला इंदौर कलेक्टर, जिला सिंगरौली 23. श्री हरेन्द्र नारायण (2016), आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा 24. सुश्री मिशा सिंह (2016), अपर कलेक्टर, जिला जबलपुर कलेक्टर, जिला रतलाम

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का आगाज \”कांग्रेस का \’नव संकल्प\’: 2028 की रणभेरी मांडू से\”

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Congress\’s election preparations begin \”Congress\’s \’Nav Sankalp\’: The battle cry of 2028 from Mandu\” Congress Nav Sankalp from Mandu मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। कांग्रेस ने 2028 विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है — और इसकी शुरुआत हो रही है ऐतिहासिक नगरी मांडू से। 21 और 22 जुलाई को आयोजित \’नव संकल्प शिविर\’ कांग्रेस की गंभीरता, तैयारी और भविष्य की लड़ाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह महज एक शिविर नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण और विचारधारा की पुनर्स्थापना का एक मंच है। 12 सत्रों में बंटे इस शिविर में विधायकों को विचारधारा, विपक्ष की भूमिका, जन मुद्दों की समझ, और सोशल मीडिया रणनीति जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा। यह दिखाता है कि कांग्रेस अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाली पार्टी नहीं, बल्कि दिशा देने वाली ताकत बनना चाहती है। Congress Nav Sankalp from Mandu शिविर का सबसे अहम संदेश है — संगठन की मजबूती, विचारधारा की स्पष्टता और जनता से संवाद की नई शुरुआत। राहुल गांधी की वर्चुअल मौजूदगी और शीर्ष नेताओं — जैसे कमलनाथ, जीतू पटवारी, विवेक तन्खा, सुप्रिया श्रीनेत, अजय माकन — की सक्रिय भागीदारी इस बात को पुष्ट करती है कि कांग्रेस अब ‘नेताओं की भीड़’ नहीं, बल्कि ‘विचारधारा से जुड़ा कैडर’ बनाना चाहती है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने जहां एक ओर शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सरकार की असफलताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस के वैकल्पिक विज़न को भी सामने रखा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को “झूठ का पुलिंदा” कहना और प्रदेश में बढ़ते अपराध, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार पर तीखे सवाल खड़े करना कांग्रेस के तीखे तेवरों को दर्शाता है। Read more: क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव यह शिविर आने वाले वर्षों में कांग्रेस की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। अगर यह प्रशिक्षण और आत्ममंथन जमीन पर उतर पाया, तो मांडू कांग्रेस के लिए वही बन सकता है, जो कभी नव-भारत निर्माण के दौर में वर्धा और सेवाग्राम हुआ करते थे। कांग्रेस ने यह संकेत दे दिया है कि वह अब विपक्ष में बैठने के लिए नहीं, सत्ता में लौटने के लिए मैदान में है। अब देखना यह होगा कि मांडू से निकली यह संकल्पशक्ति 2028 तक कितना प्रभाव छोड़ती है।

भोपाल में \’शुद्धिकरण अभियान\’ की शुरुआत, अशोका गार्डन बना \’राम बाग\’ हमीदिया, हबीबगंज समेत कई नामों पर प्रस्ताव

hamidia and habibganj also renamed

ashoka garden now called ram bagh hamidia and habibganj also renamed भोपाल ! hamidia and habibganj also renamed मध्य प्रदेश की राजधानी इन दिनों एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। नगर निगम द्वारा शुरू किए गए \’शुद्धिकरण अभियान\’ के तहत अब शहर के प्रमुख स्थलों और इलाकों के नाम भारतीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप किए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह कदम गुलामी और विदेशी आक्रांताओं की छाया को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस कड़ी में पहला बड़ा बदलाव अशोका गार्डन को लेकर हुआ है। अब इस इलाके को \’राम बाग\’ के नाम से जाना जाएगा। मेयर इन काउंसिल (MIC) ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया है और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि, “भोपाल की पहचान राजा भोजपाल से जुड़ी हुई होनी चाहिए, न कि उन नामों से जो हमारी ऐतिहासिक चेतना को धूमिल करते हैं।” Read more: क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव हमीदिया, हबीबगंज समेत कई नामों पर प्रस्ताव hamidia and habibganj also renamedनिगम ने हमीदिया अस्पताल, हमीदिया कॉलेज और हबीबगंज जैसे इलाकों के नामों को बदलने की सिफारिश भी शासन को भेजी है। इन नामों को नवाबी काल और विदेशी प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। सूर्यवंशी ने स्पष्ट कहा कि, “हमीदुल्लाह खान जो कि भोपाल का अंतिम नवाब था, वह भारत की जगह पाकिस्तान में विलय चाहता था। ऐसे नाम अब भोपाल की संस्कृति के अनुकूल नहीं हैं।” राजनीति भी गर्माई, विपक्ष ने उठाए सवालजहां सत्ता पक्ष इसे “संस्कृति का सम्मान” और “गुलामी से मुक्ति” बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे \”राजनीतिक स्टंट\” करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नाम बदलने की राजनीति की जा रही है। नवीन पहचान की ओर बढ़ता भोपाल hamidia and habibganj also renamedशहर सरकार द्वारा पारित यह प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि भोपाल अब अपनी पहचान भारतीय परंपरा, संस्कृति और गौरवशाली अतीत के आधार पर दोबारा गढ़ने की ओर अग्रसर है। हालांकि, इस अभियान पर विचारधारा और राजनीतिक मतभेदों की छाया भी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।