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मध्य प्रदेश में मौसम ने बदली चाल: भारी बारिश खत्म, अब दक्षिणी हिस्सों में हल्की फुहारें

भोपाल  कोई मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय ना होने और मानसून के कमजोर होने से मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया है, जिससे मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि दक्षिणी जिलों में अगले तीन दिन तक हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक सिवनी में 73.4, शिवपुरी में 11, टीकमगढ़ में पांच, गुना में दो, दतिया में 1.3 मिमी वर्षा हुई।अबतक 12 जिलों से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है और अगले 72 घंटे के बाद प्रदेश के कई जिलों से मानसून विदा होने लगेगा। मध्य प्रदेश मौसम विभाग ताजा पूर्वानुमान     दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा अभी भी 20° उत्तर / 69° पूर्व, वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी,  शाहजहांपुर और 30° उत्तर / 81° पूर्व से होकर गुजर रही है। गुजरात के शेष भागों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और भागों तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों से आगामी 3-4 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।     पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर स्थित गहरा दबाव (चक्रवाती तूफान “शक्ति” का अवशेष) कमजोर होकर एक दबाव में परिवर्तित हो गया है और यह अक्षांश 19.0° उत्तर और देशांतर 60.5° पूर्व के पास निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में केंद्रित है। जो कि मसिराह (ओमान) से लगभग 250 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 370 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम, अल-गैदाह (यमन) से 950 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 950 किमी दक्षिण- पश्चिम, द्वारका से 970 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 990 किमी पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम में स्थित है। इसके पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर धीरे-धीरे दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ने और एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित होनेकी संभावना है।     पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर राजस्थान और उससे सटे हरियाणा के ऊपर एक प्रेरित निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। इससे संबंधित ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से 9.6 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है और ऊँचाई के साथ उत्तर-पश्चिम की ओर झुका हुआ है।उत्तर-पश्चिम राजस्थान और उससे सटे दक्षिण पंजाब के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ चक्रवातीय परिसंचरण अब उपरोक्त चक्रवाती परिसंचरण में विलीन हो गया है।एक ट्रफ रेखा, उत्तर तटीय ओडिशा से पूर्वी तेलंगाना तक (आंतरिक ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ होते हुए) समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नए वेदर एक्टिव होने से मानसून की वापसी में देरी हो रही थी और अब मानसून वापसी की परिस्थितियां अनुकूल है, ऐसे में 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। गुना में सबसे ज्यादा बारिश, शाजापुर सबसे सूखा जिला इस मानसून सीजन में गुना जिले में सबसे अधिक 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला और रायसेन में भी 62 इंच से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं श्योपुर और अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर, शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) प्रदेश के सबसे कम बारिश वाले जिले रहे।  1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

बारिश और ठंड का दौर जारी : जयपुर भीगा, सीकर में छाई ठंडक

जयपुर राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मंगलवार को भी जारी रहा। पूर्वी जिलों में बादल छाए रहे और कई जगह हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने 9 जिलों में अलर्ट जारी किया है। 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ और सूखा रहने की संभावना है। सोमवार को जयपुर, नागौर, हनुमानगढ़, सीकर समेत कई जिलों में 4 इंच तक तेज बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया और खरीफ की फसलें खराब हो गईं। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भारी गिरावट देखी गई। हनुमानगढ़ में दिन और रात के तापमान में सिर्फ 1 डिग्री का अंतर रहा। जयपुर में देर रात तक होती रही बारिश राजधानी जयपुर में सोमवार सुबह से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मंगलवार सुबह भी करीब 3 बजे तक बारिश का दौर चला। बीते 24 घंटों के दौरान जयपुर में  92MM बरसात रिकॉर्ड की गई। जयपुर में छापरवाड़ा बांध के पास 92MM बारिश दर्ज हुई। दिल्ली रोड पर चांदवास पर 53, जालसू, दूदू, मौजमाबाद में 27-27, जोबनेर में 40, बैराठ में 52, शाहपुरा में 56, फागी में 35, चौमूं में 26, सांगानेर में 29MM बारिश हुई है। बारिश से पारा भी लुढ़का बारिश की वजह से प्रदेश में पारे में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 12 डिग्री तक गिरा। सीकर सबसे ठंडा रहा, जहां दिन का तापमान 22.5°C दर्ज हुआ। जयपुर 25.1°C, पिलानी 24.7°C, अलवर 24°C, चूरू 24.1°C, बीकानेर 29.3°C, उदयपुर 29°C और झुंझुनूं 24.9°C तक सीमित रहा। अब 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।  

ओले और बारिश की चेतावनी: प्रदेश के मौसम ने ली करवट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानसून के विदा होने से पहले पूरब और पश्चिम दोनों संभागों में जोरदार बारिश देखने को मिली है। अब पश्चिमी विक्षोभ के असर से सोमवार को पश्चिमी यूपी में ओले भी गिरने वाले हैं। माैसम विभाग ने सोमवार के लिए पश्चिमी तराई के सहारनपुर, शामली, बिजनाैर समेत 15 जिलों में गरज चमक के साथ ओले गिरने की आशंका जताई है। वहीं पश्चिम के 13 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दाैरान 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की भी चेतावनी है। लगभग 38 जिलों में मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की भी आशंका है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से सोमवार को पश्चिमी यूपी के कई जिलों में भारी बारिश और गरज चमक के साथ ओले गिरने की चेतावनी है। बुधवार से पूर्वी और पश्चिमी यूपी में माैसम के शुष्क रहने के संकेत हैं। आज फिर बदल सकता है मौसम का मिजाज राजधानी में रविवार को दिन चढ़ने के साथ धूप खिली। पारा चढ़ने के साथ गर्मी भी बढ़ी। हवा में नमी ज्यादा होने के कारण दोपहर में तीखी धूप के साथ उमस बेकाबू होती गई। हालांकि सुबह और शाम के वक्त नमी से भरी ठंडी हवाओं के चलते ही गर्मी से थोड़ी राहत रही। रविवार को धूप की तेजी के चलते अधिकतम तापमान में करीब तीन डिग्री का उछाल दर्ज किया गया। माैसम विभाग का कहना है कि सोमवार को एक बार फिर राजधानी क्षेत्र में बादलों की सक्रियता बढ़ने के आसार हैं। इससे छिटपुट बूंदाबांदी की संभावना भी है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से सोमवार को लखनऊ में बादलों की आवाजाही के साथ बूंदाबांदी की परिस्थितियां बन सकती हैं। इससे गर्मी और उमस से राहत मिलेगी। विक्षोभी की तीव्रता ज्यादा रही तो मंगलवार को भी बादल और बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 2.9 डिग्री की उछाल के साथ 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान बिना किसी बदलाव के साथ 24.2 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड हुआ।  

बारिश का सिस्टम कमजोर, MP में 24 घंटे में गिरा पानी, मानसून लौटेगा

भोपाल   मध्य प्रदेश में पिछले 3 दिन से तेज बारिश का दौर चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले 3 दिन में हल्की बारिश का दौर रहेगा। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग ड्राई रहेगा। फिलहाल कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। रविवार को भोपाल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया।  भदभदा और कलियासोत डैम एक-एक गेट खोले  रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 10 से पूरे प्रदेश में मानसून की वापसी मौसम विभाग के अनुसार, अब तक ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम से मानसून विदा हो चुका है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। गुना में सबसे ज्यादा बारिश इस बार गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। 65.6 इंच बारिश दर्ज हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच और धार में 33.6 इंच पानी गिरा है।  एमपी में 24 घंटे के दौरान 21 जिलों में बारिश, रायसेन में 3.7 इंच बरस गया मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान 21 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। रायसेन में सबसे ज्यादा 3.7 इंच पानी गिर गया। भोपाल में ढाई इंच, बैतूल में 2 इंच, बालाघाट के मलाजखंड में 1.8 इंच, श्योपुर-शिवपुरी में 1.7 इंच, सिवनी में डेढ़ इंच, टीकमगढ़ में 1.2 इंच और नर्मदापुरम-दमोह में 1 इंच बारिश हुई। सागर, धार, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, गुना, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, देवास, राजगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर बना रहा। इतनी तेज बारिश की भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर रेंगती हुई चली गाड़ियां रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 1 जून से 5 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

दार्जिलिंग में प्राकृतिक आपदा: भूस्खलन में 18 मृत, राष्ट्रपति और पीएम ने जताया शोक

दार्जिलिंग उत्तर बंगाल में लगातार भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दार्जिलिंग जिले में हुए भूस्खलन और पुल टूटने की घटनाओं में अब तक 18 लोगों की मौत हो गई है और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। मौक का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक, मिरिक और सुखिया क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण कई लोग हताहत हुए हैं। इस हादसे के बाद दार्जिलिंग जिला पुलिस राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। वहीं कालिम्पोंग में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पीएम मोदी ने जनहानि पर जताया दुख प्रधानमंत्री मोदी ने दार्जिलिंग में पुल ढहने की घटना पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- दार्जिलिंग में एक पुल दुर्घटना में हुई जान-माल की हानि से अत्यंत दुःखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। हम प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रपति ने भी हादसे पर जताया दुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस हादसे पर दुख जताया है। एक्स पर राष्ट्रपति भवन की तरफ से किए पोस्ट में लिखा गया- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हुई दुखद जनहानि अत्यंत दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं। मैं बचाव एवं राहत कार्यों की सफलता की प्रार्थना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग में भारी बारिश के कारण हुई जान-माल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को वहां तैनात किया गया है और जरूरत पड़ने पर और जवानों को भेजा जाएगा। शाह ने कहा कि उन्होंने दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट से भी बात की और वहां की स्थिति का जायजा लिया। शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, दार्जिलिंग में भारी बारिश के कारण हुई दुखद जान-माल की हानि से गहरा दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर और टीमें भी वहां भेजी जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा, भाजपा कार्यकर्ता भी जरूरतमंद लोगों को आवश्यक सहायता दे रहे हैं। लोहे का पुल ढहा, आवाजाही हुई बाधित पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के कारण दुधिया में लोहे के पुल का एक हिस्सा ढह जाने के बाद सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग एसएच-12 सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। मिरिक-सुखियापोखरी रोड के पास भूस्खलन सबसे बड़ा भूस्खलन मिरिक-सुखियापोखरी रोड के पास हुआ, जिसने कई घर बहा दिए और वाहनों की आवाजाही बाधित कर दी। इससे आसपास के कई छोटे गांवों से संपर्क टूट गया। दार्जिलिंग उप-निबंधक रिचर्ड लेप्चा ने कहा कि सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य के फंसे होने की आशंका है। लगातार बारिश के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की मदद से राहत अभियान चल रहा है। कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। भाजपा सांसद ने घटना पर जताया दुख वहीं इस घटना पर भाजपा सांसद राजू बिस्ता ने दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश के कारण हुए भारी नुकसान के बारे में जानकर मुझे बेहद दुख हुआ है। मौतें हुई हैं, संपत्ति का नुकसान हुआ है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। मैं स्थिति का जायजा ले रहा हूं और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हूं। कार्यकर्ताओं को लोगों की मदद करने का दिया निर्देश- राजू एक्स पर अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा- हमने अपने भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों की मदद और सहायता के लिए जुटने का निर्देश पहले ही दे दिया है। हम अपने लोगों की मदद और सहायता के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। मैं अपने सभी गठबंधन सहयोगियों और क्षेत्र के अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से भी समन्वय स्थापित करने की अपील करता हूं ताकि हम जरूरतमंद लोगों तक समय पर मदद और सहायता पहुंचा सकें।   अनौपचारिक रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 11 तक पहुंची जिले के अधिकारियों के अनुसार, बिश्नुलाल गांव, वार्ड 3 लेक साइड और जसबीर गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस क्षेत्र से छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक व्यक्ति चाय बगान में मृत पाया गया। कई घर और चाय बगान के क्वार्टर मलबे में दब गए हैं। मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारी और लगातार बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। 'भूमि खिसकने और कई घर क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है।' उन्होंने यह भी कहा कि मिट्टी और मलबे में राहत कार्य करने के लिए मशीनरी और आपातकालीन वाहन पहुंचाना बेहद कठिन है। अभी तक अनौपचारिक रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 11 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल मलबे और मिट्टी के भारी परतों को हटाकर और लोगों को बचाने में जुटा है। सीएम ममता बनर्जी ने जताया दुख, टोल फ्री नंबर जारी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर दुख जताते हुए एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'मैं बहुत चिंतित हूं कि कल रात कुछ घंटों के भीतर अचानक भारी बारिश के कारण उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल दोनों के कई इलाके बाढ़ में डूब गए हैं, साथ ही बाहर से हमारे राज्य में अत्यधिक नदी का पानी आ गया है… राज्य मुख्यालय और जिलों में 24×7 नियंत्रण कक्ष हैं। कृपया मेरे नबान्न आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष से +91 33 2214 3526 और +91 33 2253 5185 पर संपर्क करें, जबकि टोल फ्री नंबर +91 86979 81070 और 1070 हैं।' 6 अक्तूबर तक अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी … Read more

लाहौल घाटी में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट: आज येलो, कल ऑरेंज, मौसम की ताज़ा खबर

शिमला हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू सहित जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में मौसम ने फिर करवट ली है। रविवार सुबह से जहां कुल्लू घाटी में झमाझम बारिश हो रही है वहीं, लाहौल घाटी में ताजा बर्फबारी होने से तापमान में भारी गिरावट आई है। लाहौल में यह इस सीजन की पहली बर्फबारी है। रोहतांग दर्रा, बारालाचा समेत पूरी लाहौल घाटी में में ताजा बर्फबारी हो रही है। वहीं, बर्फबारी से रोहतांग मार्ग बंद हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने रविवार को बारिश और ओलावृष्टि का येलो तथा सोमवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से आठ अक्तूबर तक प्रदेश में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। इस दाैरान उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ अरब सागर के साथ बंगाल की खाड़ी से उच्च नमी के संचार व अन्य अनुकूल स्थितियों के प्रभाव के साथ हिमाचल में प्रवेश कर रहा है। शनिवार को राजधानी शिमला सहित अधिकांश जिलों में मौसम साफ रहा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य में 8 अक्तूबर तक लगातार बारिश होने का पूर्वानुमान है। 5 से 7 अक्तूबर के दौरान बारिश की अधिक गतिविधि होने की संभावना है, जिसकी अधिकतम तीव्रता 6 अक्तूबर को होगी। कुछ स्थानों पर 5 से 7 अक्तूबर के दौरान गरज के साथ 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि होने की संभावना है। इस दौरान अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। 5 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश और 6 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 8 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 7 अक्तूबर को राज्य में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 9 अक्तूबर से पूरे प्रदेश में माैसम साफ बना रहने का पूर्वानुमान है। रविवार को ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी व लाहाैल-स्पीति में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 6 अक्तूबर को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सिरमौर और लाहौल-स्पीति में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश-बर्फबारी व ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, किन्नौर, हमीरपुर व ऊना के लिए येलो अलर्ट है। 7 अक्तूबर को ऊना, चंबा व कांगड़ा के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट है। शिमला जिले के लिए 5 से 7 अक्तूबर तक अंधड़ का अलर्ट है। आगामी दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की कमी आने और अधिकतम तापमान 5 से 9 डिग्री सेल्सियस कम हो सकता है। कहां कितना रहा न्यूनतम पारा शुक्रवार रात को शिमला में न्यूनतम तापमान 14.0, सुंदरनगर में 17.7, भुंतर में 15.0, कल्पा में 7.2, धर्मशाला में 16.6, ऊना में 18.2, नाहन में 19.0, सोलन में 16.3, मनाली में 10.9, कांगड़ा में 17.9, मंडी में 18.5, बिलासपुर में 20.9, हमीरपुर में 19.5, कुकुमसेरी में 6.6, नारकंडा में 10.7, भरमाैर में 12.6, रिकांगपिओ में 11.5 और ताबो में 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  

पूर्वी मध्यप्रदेश में मौसम बदला, आज तेज बारिश तो कल से चलेगा बूंदाबांदी का सिलसिला

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भोपाल  मध्य प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन अब भी बारिश का दौर जारी है. शुक्रवार को इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़, देवास, बैतूल, रतलाम, नरसिंहपुर, सागर, सतना, उमरिया, बालाघाट, टीकमगढ़, रीवा और सिंगरौली समेत कई जिलों में बारिश का दौर देखा गया. इस दौरान इंदौर में देर रात तेज बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति देखी गई. इसके अतिरिक्त सीधी में 9 घंटे में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया, तो वहीं सागर में 1.5 इंच और सतना में 1 इंच बारिश हुई. साथ ही सिंगरौली में दोपहर बाद तेज बारिश का दौर शुरू हुआ. इस दौरान सिंगरौली के बैढ़न समेत देवसर और सरई इलाके में भी बारिश हुई. दूसरी ओर मऊगंज के ग्रामीण इलाके में भी तेज बारिश से जलभराव की स्थिति देखी गई. मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, वर्तमान समय में देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन एक्टिव बना हुआ है. साथ ही दो साइक्लोनिक सर्कुलेश भी सक्रिय है, जिनमें से एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एमपी के पूर्वी हिस्से के ऊपर एक्टिव है. इसका असर अगले 48 घंटे तक प्रदेश में भारी बारिश के रूप में देखने को मिलेगा. डिप्रेशन, डीप डिप्रेशन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) के सक्रिय होने की वजह से पिछले 2 दिन से कई जिलों में तेज बारिश हुई। दशहरे के दिन भोपाल, बैतूल, दतिया, ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, छतरपुर, सागर, टीकमगढ़, बालाघाट में बारिश हुई। वहीं, शुक्रवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पानी गिरा। यह सिस्टम शनिवार को भी एक्टिव रह सकता है। इस वजह से मौसम विभाग ने चार जिलों में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। वहीं शुक्रवार शाम में इंदौर में तेज बारिश हुई। जिसके चलते कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। सीधी में 9 घंटे में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम अभी सक्रिय रह सकता है, इसलिए पूर्वी चार जिलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है। शुक्रवार को इंदौर में हुई मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में बिजली कटौती और जलभराव की समस्या भी सामने आई। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है, फिर भी सतर्कता जरूरी है। प्रदेश के 12 जिलों – ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम – से मानसून विदा हो चुका है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्सों से भी यह विदाई हो गई है। विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। 10 अक्टूबर तक विदा होगा मानसून प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम भी शामिल हैं। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। बता दें कि इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है।

ओडिशा में मौसम की मार: भूस्खलन और बारिश से जनजीवन ठप, सड़क और रेल दोनों प्रभावित

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गजपति ओडिशा में डीप डिप्रेशन के कारण भारी बारिश हुई, जिसने पूरे राज्य में जनजीवन को प्रभावित किया है. सड़कों पर पानी भरा, भूस्खलन हुए, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गुरुवार शाम को गहरे दबाव की स्थिति गंजम जिले के गोपालपुर तट के पास से गुजरी, जिसके बाद बारिश और तेज हो गई. मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है. भूस्खलन से नुकसान, कई सड़कें बंद गजपति जिले में भारी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ. पुलिस अधीक्षक जतिंद्र कुमार पांडा ने बताया कि आर. उदयगिरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई. वहीं, रायगढ़ ब्लॉक के पास पेकट गांव में 70 वर्षीय कार्तिक शबारा और उनके बेटे राजिब शबारा भूस्खलन में लापता हुए हैं,  रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन रायगढ़ को नुआगढ़ और आर. उदयगिरी से जोड़ने वाली सड़कें बंद हो गई हैं. इसके अलावा, महेंद्रगिरि पहाड़ियों पर फंसे 24 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है. नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्य और परिवहन मंत्री बिभूति भासन जेना को गजपति जिले में बचाव कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है. उन्होंने विशेष राहत आयुक्त को जिला प्रशासन को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने गजपति जिले के कलेक्टर से बात कर स्थिति की जानकारी ली. गजपति में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. रेल और सड़क यातायात प्रभावित भारी बारिश और भूस्खलन के कारण दक्षिण ओडिशा में रेल सेवाएं प्रभावित हुईं हैं. ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) के अनुसार, कोट्टावलसा-किरंदुल और कोरापुट-रायगढ़ रेल लाइनों पर पत्थर गिरने से ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं हैं. विशाखापत्तनम-किरंदुल नाइट एक्सप्रेस रद्द कर दी गई, जबकि किरंदुल-विशाखापत्तनम ट्रेन को कोरापुट तक शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है. संतरागाछी-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय भी बदल दिया गया. वहीं, कोरापुट जिले में एक पुल के डूबने से राष्ट्रीय राजमार्ग 326 पर यातायात ठप है, जो ओडिशा को आंध्र प्रदेश से जोड़ता है. बारिश से अभी नहीं राहत, मौसम विभाग का अलर्ट IMD ने सात जिलों – पुरी, गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट, कालाहांडी और कंधमाल के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. जहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश की आशंका है. वहीं, 16 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और बाकी सात जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है. IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि शुक्रवार सुबह तक कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी. मछुआरों को समुद्र में ना जाने की सलाह बता दें कि गोपालपुर में 73 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. मौसम विभाग ने मछुआरों को 3 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है. प्रशासन की तैयारी राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन टीमें और मशीनरी तैनात की हैं. बंदरगाहों पर 'स्थानीय सावधानी संकेत (LC-3)' लागू किया गया है, जो जहाजों के लिए चेतावनी प्रणाली है.

MP में बारिश का नया ट्रेंड: अगले 4 दिन रहेगा अलर्ट, अक्टूबर में मौसम में उतार-चढ़ाव

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भोपाल  वर्षाकाल का सीजन भले ही 30 सितंबर को खत्म हो गया हो, लेकिन चक्रवाती संरचना के कारण मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी है। मंगलवार को भोपाल समेत 10 जिलों में पानी गिरा। बैतूल में एक घंटे में आधा इंच से अधिक बारिश हुई। प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम देखने को मिलेगा। मौसम विभाग की मानें तो 4 अक्टूबर तक एमपी में तेज आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं इसके बाद तेज बारिश(Heavy Rain) हो सकती है। विदाई से पहले झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं, अब तक 12 जिलों से मानसून की विदाई हो चुकी है। 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून लौट जाएगा। इस बार सितंबर में भी बारिश का कोटा पूरा हो गया। औसत 45.2 इंच पानी गिरा, जो सामान्य बारिश 37.3 इंच के मुकाबले 7.8 इंच अधिक है। अब बात अक्टूबर महीने की। मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहेगा। ग्वालियर में पारा रिकॉर्ड 39 डिग्री तक पहुंच चुका है तो भोपाल, इंदौर, उज्जैन-जबलपुर में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ बारिश भी हुई है। भोपाल-ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश इससे पहले मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर-जबलपुर समेत 10 जिलों में बारिश हुई। बैतूल में डेढ़ इंच पानी गिर गया। बालाघाट के मलाजखंड में सवा इंच, दतिया में आधा इंच से ज्यादा और ग्वालियर में आधा इंच बारिश हुई। भोपाल, जबलपुर, सागर, डिंडौरी, मुरैना में भी बूंदाबांदी हुई। पन्ना में आकाशीय बिजली गिरने से चरवाहे रूप सिंह यादव (40) की मौत हो गई। वह बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे छिपा था। भाई बुध सिंह यादव ने बताया कि रूप सिंह एक हाथ से दिव्यांग था। उसने शादी नहीं की थी। भैंसों को चराकर अपना भरण-पोषण करता था। चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। 12 जिलों से विदा हो चुका मानसून अब तक प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम शामिल हैं। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की मानें तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है। बता दें कि इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। गुना में सबसे ज्यादा बारिश इस बार गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। यहां 65.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच और धार में 33.6 इंच पानी गिर चुका है। इंदौर संभाग की तस्वीर भी सुधरी इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश हुई थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। दूसरी ओर, उज्जैन जिले में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर पहले नंबर पर है। बैरागढ़ में कम, अरेरा हिल्स में इस बार शहर में मानसून आगमन के बाद जून और जुलाई माह में अच्छी बारिश(Heavy Rain) हुई थी, लेकिन अगस्त और सितंबर में कम बारिश हुई। पिछले 122 दिनों में शहर में बैरागढ़ में 1022.2 मिमी बारिश हुई है, हांलाकि अरेरा हिल्स में 1200 मिमी से अधिक बारिश हुई है। लेकिन शहर का कोटा बैरागढ़ में हुई बारिश के आधार पर भी है। इस लिहाज से इस साल सामान्य से 2 इंच कम बारिश इस बार सीजन में हुई है। पूरे मानसूनी सीजन में बारिश 1075.2 मिमी होना चाहिए। मप्र का तापमान: पांच शहरों का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पांच प्रमुख बड़े शहरों में भोपाल में 32.6°C डिग्री, इंदौर में 32.8°C डिग्री, ग्वालियर में 35.6°C डिग्री, उज्जैन में 31.0°C डिग्री और जबलपुर में 33°C डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। बारिश होने के के कारण कई शहरों में दिन के तापमान में थोड़ी कमी दर्ज की गई। पचमढ़ी में दिन का तापमान 25.4 डिग्री तक आ गया। पृथ्वीपुर में 37.0 डिग्री, ग्वालियर में 35.6 डिग्री, खजुराहो में 35.2 डिग्री, श्योपुर में 35.0 डिग्री और सतना में 33.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मंगलवार को प्रदेश में सबसे कम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया जबकि दिन का अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री सेल्सियस पृथ्वीपुर में दर्ज किया गया। मध्यप्रदेश का मानसून मीटर मध्यप्रदेश में इन दिनों कहीं-कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश की औसत वार्षिक बारिश 37.2 इंच है, जबकि इस सीजन में अब तक 45.1 इंच बारिश हो चुकी है। यह कुल लक्ष्य को पार कर चुका है यानी अबतक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। बता दें कि एमपी में अब तक 37.3 इंच पानी गिरना था। इसका मतलब है कि इस समय तक 7.8 इंच ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, पिछले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। मध्यप्रदेश के 41 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया शामिल हैं। कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा 150 प्रतिशत से भी ज्यादा हो चुका है, जबकि श्योपुर में 213 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मंगलवार को MP के बिछिया में 42.8 मिमी, ग्वालियर में 30.4 मिमी, मोहनगढ़ में 30.0 मिमी, रामनगर … Read more