Public Sootr

लहर खबरों की

amit kumar

Writer News & Blogger

MCU Bhopal: कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमोस्ट्रेशन

MCU Bhopal

MCU Bhopal Cartoon Shows Exhibitions and Live Demonstrations भोपाल। अखबार का धड़कता हुआ दिल पन्नों पर दिखने वाली छोटी सी काठी नहीं, बल्कि वह तेज़, तीक्ष्ण और कभी-कभी दर्दनाक दृष्टि है जो हँसी के बहाने समाज को आईने में दिखाती है। राजधानी के इस अनूठे कार्टून कार्यक्रम में पेंसिलों ने शब्दों से भी ज़्यादा कुछ कह दिया। लाइव स्केचिंग, प्रदर्शनी और चर्चाओं ने यह प्रमाणित किया कि कार्टून केवल चुटकला नहीं, सोचने का माध्यम भी है। मंच पर हर रेखा में सवाल थे और हर हँसी के पीछे एक गहरी सीख नजर आ रही थी। यह नज़ारा था शुक्रवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमॉन्सट्रेशन का। सोचने पर मजबूर हम रेखाओं से दिमाग की तरह की नसों पर हल्का सा खरोंच करते हैं हँसी आती है तो सोच भी जग जाती है। अखबार का दिल तब और जोर से धड़कता है जब कार्टून उसकी सूनी राहों में परोक्ष सच फेंक देते हैं। और मंच से देशभर के नामी कार्टूनिस्टों ने भी कुछ ऐसे ही तीखे-मीठे बयान दिए जो मीडिया के विद्यार्थियों को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर रहे थे। अभिन्न अंग है शब्द और शीर्षक अखबार का ढांचा खड़ा करते हैं, कार्टून किसी अखबार का धड़कता हुआ दिल है।” यह उद्गार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उद्घाटन सत्र में कहे। उन्होंने कहा कि कार्टूनिंग अखबार का एक अभिन्न अंग है और मीडिया के पाठ्यक्रमों में कार्टूनिंग जैसे विषयों को शामिल करना चाहिए। उनका मानना था कि कार्टून की कला तब तक रहेगी जब तक मानव जीवन रहेगा, क्योंकि शब्दों की सीमाओं के बाहर भी चित्र और रेखाएँ बहुत कुछ बोल जाती हैं। कार्यक्रम में प्रदर्शनी, लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन तथा कार्टून एप्रिशिएशन कार्यशाला से यह साबित हुआ कि कार्टून कला न केवल जीवित है, बल्कि बदलते मीडिया परिदृश्य और सोशल मीडिया की चुनौतियों के बीच नए आकार ले रही है। छात्रों के सवालों और कलाकारों के जवाबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह विधा अभी भी उस क्षमता से भरी है जो समाज को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। विज्ञापन हावी कार्टून की कला के बारे में कहा जाता है कि यह सिमटती जा रही है। हर तरह के मीडिया में कार्टून के लिए जगह सिमटती जा रही है, इस विषय पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट डा. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि मौजूदा वक्त में मीडिया में बहुत बदलाव आ गए हैं। कार्टून की कला में बहुत कमी आ रही है ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है, दरअसल कार्टून को लोग अब भी देखना चाहते हैं। आज मीडिया में विचार कम दिखते हैं, विज्ञापन हावी है और बाजार के अन्य कारकों का दबाव भी है, लेकिन इसके बावजूद कार्टून की कला लगातार अपनी जगह बनाए हुए है और नए आकार ले रही है। इसी बात पर सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने कहा कि कार्टून में ह्यूमर और व्यंग्य दोनों ही होते हैं। आज कार्टून सोशल मीडिया पर भी पसंद किए जा रहे हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग उन्हें फालो करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह के रिएक्शन आते हैं उससे हार्ड विषयों पर कार्टून बनाना मुश्किल भी होता जा रहा है। लेकिन कार्टून के कलाकार लगातार व्यंग्य और हास्य के साथ कार्टून बना रहे हैं। कार्टूनिंग की कला वरिष्ठ कार्टूनविद त्र्यम्बक शर्मा ने कहा कि आज सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों में ह्यूमर का स्वरूप बदल गया है। हमारी सोच भी बदलती जा रही है। हमारे जीवन में एआई का दखल बढ़ रहा है। इन सब का असर स्वाभाविक तौर पर कार्टूनिंग की कला पर पड़ रहा है। पत्रकारिता और मीडिया में कार्टून के विषयों पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट हरिमोहन ने कहा कि कार्टून जर्नलिज्म का शुद्धतम रूप है। इस विधा में ज्यादातर राजनैतिक विषयों पर ही कार्टून बनते हैं। कार्टूनिस्ट शिरीष श्रीवास्तव ने कहा कि ज्यादातर कार्टूनिस्टों के लिए राजनीति एक सदाबहार विषय होता है लेकिन समसामयिक आधार पर विषयों का चयन बदलता रहता है। गुणों का होना जरूरी मुंबई से इस अवसर पर आए वरिष्ठ कार्टून विशेषज्ञ प्रशांत कुलकर्णी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के नजरिये से हमें हर चीज ह्यूमर लगती है। चुनावी वक्त भी कार्टून निमार्ण के विषयों के लिहाज से बहुत अच्छा होता है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्टर इस्माइल लहरी ने कहा कि कार्टून के कलाकार की दृष्टि अलग होती है। उसका नजरिया जरा हटकर होता है। वह चीजों को एक अलग तरह से देखता है। और उसमें इन गुणों का होना जरूरी है। तभी कार्टून अच्छे और प्रभावशाली बन पाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून केवल चुटकला नहीं है। यह एक गंभीर विधा है। वरिष्ठ कार्टूनिस्ट गोविंद लाहोटी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के भीतर विचार हमेशा कौंधते रहते हैं। यह सतत चलने वाली एक प्रक्रिया है। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्टूनविद माधव जोशी ने कहा कि दरअसल कोई भी कलाकार दुनिया को अपनी कला से कुछ न कुछ देता है। कार्टून बनाने वाले हास्य और व्यंग्य के साथ आम जन को मीडिया के जरिये एक विषय देते हैं जिस पर वे सोच सकते हैं।सभी विशेषज्ञों ने कहा कि कार्टून कलाकार निर्जीव चीजों में भी प्राण डाल देते हैं। यह हंसने की नहीं सोचने की चीज है। हम सभी में एक कार्टूनिस्ट होता है। वे उन्हें सजीव बनाने का सार्मथ्य रखते हैं। लाइव स्केचिंग पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित हुए इस अनूठे कार्टून शो एवं लाइव स्केचिंग में देश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट देवेंद्र शर्मा, त्रयंबक शर्मा, प्रशांत कुलकर्णी, माधव जोशी, हरिमोहन वाजपेयी, चंद्रशेखर हाडा और अभिषेक तिवारी , इस्माइल लहरी और कुमार, हरिओम और शिरीष शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार शिफाली पांडे ने इस पहले सत्र का संचालन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों ने दोपहर दो बजे तक्षशिला और विक्रमशिला परिसर में दो ज्वलंत विषयों शहरी विकास यात्रा और भ्रष्टाचार पर लाइव स्केचिंग भी की। अपनी तरह के अनूठे कार्टून शो के इस पहले सीजन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अलग_अलग विषयों पर लाइव स्केच बनते हुए देखे तथा कलाकारों से संवाद भी किया। विस्तार से चर्चा कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कार्टून एप्रिशिएसन कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें वरिष्ठ कार्टून कलाकार प्रशांत कुलकर्णी ने सोशल कार्टूनिंग … Read more

MCU Bhopal: ‘भारत की भारतीय अवधारणा’ पर युवा संवाद, सनातन संस्कृति पर चर्चा

MCU Bhopal

MCU Bhopal Youth dialogue on ‘Indian concept of India भोपाल। सुपरिचित चिंतक डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारत की भारतीय अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा है कि राष्ट्र का अर्थ नेशन नहीं है। भारत में एक राजा और एक भाषा नहीं थी किंतु उत्तर से दक्षिण तक समाज अध्यात्म और संस्कृति के मूल्यों से एकरूप रहा है। इसने ही सनातन राष्ट्र का निर्माण किया। यह समाज राज्याश्रित नहीं था और स्वदेशी समाज था। हम और यह विश्व डॉ. वैद्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन विद्यार्थियों के अध्ययन मंडल व पत्रकारिता विभाग ने संयुक्त रूप से किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने की। डॉ. वैद्य की इस सिलसिले में हाल में एक पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ प्रकाशित हुई थी जिसका पिछले दिनों ही राजधानी में लोकार्पण हुआ था। डॉ.वैद्य ने कहा कि भारतीय समाज पूरी तरह आत्मनिर्भर था और यह आयात नहीं, निर्यात करता था। विश्व के व्यापार में हमारी लगभग दो तिहाई भागीदारी थी जितनी ब्रिटेन व अमेरिका की मिलाकर भी नहीं थी। राष्ट्र के घर-घर में उद्यम होता था। वैद्य ने कहा उद्योग में मातृशक्ति का अद्भुद योगदान होता था। हमारे घर संपदा निर्माण के केन्द्र थे। इसी वजह से गृहिणी को गृहलक्ष्मी कहा गया है। आपने कहा कि उत्पादन में प्रचुरता, वितरण में समानता और उपभोग में संयम-यही भारत का विचार है। डॉ. वैद्य ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक विविधता नहीं थी अपितु एक ही संस्कृति विविध रूपों में प्रकट होती है। आध्यात्मिकता ने भारत के विचार को गढ़ा है। हमने विश्व कल्याण की बात की है। उन्होंने पराभूत मानसिकता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2014 के बाद से भारत की बात को फिर से दुनिया में सुना जा रहा है। धर्म का व्यापक अर्थ द संडे गार्जियन ने अपने संपादकीय में लिखा था कि भारत फिर से स्वाधीन हुआ है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि धर्म भारतीय अवधारणा है जिसका कोई अंग्रेजी पर्याय नहीं है। भारत में धर्म का व्यापक अर्थ रहा है। समाज के उपकार के लिए उसको लौटाना धर्म माना गया। भारत धर्म पर चला। लोकसभा से लेकर हमारी तमाम बड़ी संस्थाओं के बोधवाक्य को धर्म से लिया गया। तिरंगे के बीच अशोक चक्र वास्तव में धर्मचक्र है जिसका प्रवर्तन राजा अशोक ने किया। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता भारतीय शब्द नहीं है। यह शब्द ईसाईयत के सत्ता में हस्तक्षेप के बाद सरकारों का चरित्र तय करने के लिए पश्चिम का गढ़ा गया शब्द है। 1976 में बिना किसी बहस के इसे भारतीय संविधान में शामिल कर लिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य को धर्म से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि भारत क्या है और इसे समझने के लिए हमारी दृष्टि क्या होनी चाहिए, यह डॉ. मनमोहन वैद्य के चिंतन व लेखन से स्पष्ट होता है। पत्रकारिता दुनिया को 360 डिग्री से देखने की कला है। यह दृष्टिकोण पत्रकारिता विश्वविद्यालय देता है। उन्होंने हम और यह विश्व की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें अल्लामा इकबाल के हम बुलबुले हैं इसको लेकर सर्वथा नया दृष्टिकोण दिया गया है। डॉ. वैद्य ने इसे आगे बढ़ाते हुए कहा कि बुलबुले बाग में संकट आने पर उड़ जाती हैं, पौधे जल जाते हैं किंतु बाग से डिगते नहीं हैं। हम सब इस बाग के पौधे हैं। कार्यक्रम का संचालन छात्र राजवर्धन सिंह ने किया। नाटक का मंचन आज भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय में 3 दिसंबर बुधवार को नाटक ‘फिल्म स्टार पाटोल बाबू’ का मंचन किया जाएगा। सृजन श्रृंखला की द्वितीय कड़ी के रूप में रंग माध्यम नाट्य संस्था की यह प्रस्तुति गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में दोपहर 3ः00 बजे होगी। नाटक का निर्देशन दिनेश नायर ने किया है।