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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को शरद पूर्णिमा की दी शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को पावन पर्व 'शरद पूर्णिमा' की बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्णिमा की दिव्य चांदनी सभी के जीवन में उल्लास, आरोग्यता और उन्नति की अमृत वर्षा करे। मुख्यमंत्री ने कामना करते हुए कहा कि मां लक्ष्मी जी की कृपा से पूनम की छटा में प्रत्येक घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का दीप सदा जलता रहे और प्रदेश का सर्व मंगल हो।  

शरद पूर्णिमा पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, मुख्य दरवाजे पर करना न भूलें ये जरूरी कार्य

 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा धरती के सबसे निकट होता है. शरद पूर्णिमा के व्रत की भी विशेष महिमा बताई गई है. कहते हैं कि इसी दिन धन की देवी मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था. ऐसा विश्वास है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. नारद पुराण के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी अपने श्रद्धालुओं को धन, वैभव, यश और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर देवी का स्वागत करना चाहिए. शरद पूर्णिमा की रात होती है बेहद खास शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में राधा और गोपियों संग अद्भुत महारास का आयोजन किया था. कहा जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग नृत्य करने के लिए अनेक रूप प्रकट किए थे. यह दिव्य रासलीला केवल नृत्य नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्वितीय प्रतीक भी मानी जाती है. मां लक्ष्मी का अवतरण शरद पूर्णिमा की रात ही समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. यही कारण है कि शरद पूर्णिमा का दिन लक्ष्मी पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है. कई जगहों पर इस दिन कुंवारी कन्याएं सूर्य और चंद्र देव की पूजा करती हैं. और उनसे आशीर्वाद लेती हैं. क्यों खुले आसमान के नीचे रखी जाती है खीर? शरद पूर्णिमा के दिन आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है. कहते हैं कि इस रात चंद्रमा की रोशनी से अमृत वर्षा होती है. इस खीर को खाने से अच्छी सेहत का वरदान और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है. इसलिए लोग शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की छाया में खीर रखते हैं और फिर उसे अगले दिन सुबह खाते हैं. कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में रखी खीर खाने से इंसान का भाग्योदय होता है और परिवार को रोग-बीमारियों से मुक्ति मिलती है.

5-6 अक्टूबर 2025 की शरद पूर्णिमा: जानें चांदनी रात में खीर बनाने की परंपरा और विज्ञान

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हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। इसके अलावा आपने देखा होगा कि इस दिन चांदनी रात में खीर रखी जाती है लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसके पीछे की वजह क्या है? वहीं इस साल लोगों में बड़ा सवाल है कि शरद पूर्णिमा 2025 कब है 5 अक्टूबर या 6 अक्टूबर कब है? क्योंकि आपने देखा कि नवरात्रि में भी व्रत पूरे 10 दिन रखे गए थे और 11वें दिन विजयदशमी मनाई गई थी। इसलिए शरद पूर्णिमा को लेकर भी कंफ्यूजन है। शास्त्रों के अनुसार तिथि और नक्षत्र मिलान से सही मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है। इस दिन व्रत, जागरण और लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। आइए जान लेते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा कब है और चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है? कब है शरद पूर्णिमा? इस बार शरद पूर्णिमा कब है ये जान लेते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी जो 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा के दिन रात की पूजा का महत्व होता है और चंद्र देवता की पूजा होती है तो इस वजह से शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक कारण मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व बरसता है और उसी वजह से खीर को रातभर चांदनी में रखने की परंपरा है। कहा जाता है कि चांदनी से युक्त खीर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रसाद माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद की पूजा की जाती है जिन्हें शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे खाने से स्किन संबंधी बीमारी दूर होती है और कई तरह के रोगों से छुटकारा मिलता है। ये माना जाता है कि शास्त्रों में वर्णन है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अमृत वर्षा करता है। उस अमृत से युक्त खीर का सेवन करने से तन-मन शुद्ध और रोगमुक्त होता है। माना जाता है कि यह खीर धन, सुख और मोक्ष प्रदान करती है। ये खीर शरीर को शुद्ध करती है और मन को शांत करती है। बता दें कि इस खीर को उसी रात नहीं बल्कि अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। चांदनी रात में रखी खीर खाने का वैज्ञानिक कारण आपने शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर खाने का धार्मिक कारण तो जान लिया है अब वैज्ञानिक कारण भी जान लेते हैं। बता दें कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट होता है और उसकी अल्ट्रावायलेट किरणे सीधे धरती पर पड़ती हैं। वो किरणें खीर में पड़ती है तो वो पौष्टिक और सेहत के लिए बहुत लाभकारी बन जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को खाने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और शरीर को ठंडक मिलती है। इसके अलावा ये खीर सुपाच्य होती है जो पित्त दोष और मानसिक तनाव से राहत देती है। कम लोगों को पता होगा कि चंद्रमा की रोशनी कैल्शियम को सक्रिय करती है, जिससे यह खीर और अधिक पौष्टिक बनती है।

6-7 अक्टूबर को होगी शरद पूर्णिमा: जानें शुभ समय, पूजा विधि और विशेष महत्व

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हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का त्योहार विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि साल में यह एकमात्र ऐसी रात होती है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है. यही कारण है कि इस रात को आसमान के नीचे खीर बनाकर रखने और अगले दिन प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा है, जिससे आरोग्यता और सुख-समृद्धि मिलती है. इस साल शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों के मन में संशय है कि यह 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी या 7 अक्टूबर को. आइए जानते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस त्योहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें. शरद पूर्णिमा 2025 तिथि? पंचांग के अनुसार, इस दिन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगी, वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगा. चूंकि पूर्णिमा तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर को हो रहा है और इस दिन चंद्रोदय भी हो रहा है, इसलिए शरद पूर्णिमा का व्रत और पूजन 06 अक्टूबर 2025, सोमवार को ही किया जाएगा. सोलह कलाओं वाला चंद्रमा और अमृत वर्षा का महत्व शरद पूर्णिमा को सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमा माना जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है.ये 16 कलाएं मनुष्य के जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे – मानसिक शांति, सौंदर्य, बल, ज्ञान, और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ी होती हैं. पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था.साथ ही, यह भी मान्यता है कि इस रात धन की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है.इसीलिए इसे ‘कोजागरी’ पूर्णिमा भी कहते हैं. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य महत्व: ज्योतिष और आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अत्यधिक शक्तिशाली होती हैं और उनमें विशेष औषधीय गुण आ जाते हैं. इस चांदनी में रखे गए दूध या चावल की खीर को ‘अमृत’ के समान माना जाता है. इस खीर को खाने से शरीर निरोगी रहता है, रोगों से मुक्ति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. शरद पूर्णिमा की पूजा विधि शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.घर और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें. घर के मंदिर या पूजा स्थान पर एक चौकी स्थापित करें. इस पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. धूप, दीप जलाएं और भगवान को पुष्प, फल, अक्षत, रोली और नैवेद्य अर्पित करें. मां लक्ष्मी को कमल का फूल, सफेद मिठाई और एकाक्षी नारियल अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है. रात के समय चावल की खीर बनाकर उसे एक मिट्टी या चांदी के पात्र में भरकर खुले आसमान के नीचे (छत या आंगन में) चंद्रमा की रोशनी में रखें. रात में जागकर मां लक्ष्मी और चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करें. इस दिन ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं. फिर अगली सुबह, स्नान आदि के बाद भगवान को उस खीर का भोग लगाएं और इसे प्रसाद स्वरूप पूरे परिवार के साथ ग्रहण करें. इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है.