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2047 तक कैसे साकार होगा विकसित यूपी का संकल्प, दृढ़ता से अपनी राय रख रहे यूपी के ग्रामीण युवा

– शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर युवाओं का फोकस, ग्रामीण क्षेत्रों से मिले करीब 21 लाख सुझाव – तकनीकी खेती, कोल्ड स्टोरेज, समर्थन मूल्य और डिजिटल किसान मंडियों के मिल रहे सुझाव – सुझाव देने के मामले में शहरियों के मुकाबले बहुत आगे हैं यूपी के ग्रामीण युवा  – शहरी क्षेत्रों से अबतक 6 लाख, ग्रामीण क्षेत्रों से मिले करीब 21 लाख सुझाव लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को 'विकसित यूपी' बनाने का जो अभियान शुरू किया है, वह अब एक जन आंदोलन बनता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान में ग्रामीण युवाओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया है। पहली बार गांवों से इतनी बड़ी संख्या में युवा प्रदेश के विकास के हर पहलू पर अपनी राय दे रहे हैं। सरकार के पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब 27 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 21 लाख सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और करीब 6 लाख शहरी क्षेत्रों से आए हैं। यानी, शहरों से कहीं अधिक सक्रिय हैं यूपी के गांवों के युवा, जो अपने सुझावों से ‘विकसित यूपी’ के ब्लूप्रिंट को आकार दे रहे हैं। गांवों से उठी विकास की नई आवाज़ गांवों के युवाओं का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गति तेज हुई है और वे इस परिवर्तन का हिस्सा बनना चाहते हैं। हरदोई के सौरभ सिंह कहते हैं कि अब गांवों में भी खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हर पंचायत में खेल मैदान और डिजिटल लाइब्रेरी जरूरी हैं। सीतापुर के योगेश कुमार का कहना है कि हर गांव तक इंटरनेट और अच्छी शिक्षा पहुंचे। तभी गांवों का युवा शहरों से मुकाबला कर सकेगा। जौनपुर की पूजा त्रिपाठी का कहना है कि गांवों में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और सुरक्षा के इंतजाम बेहतर हों। योगी सरकार ने जो शुरुआत की है, उसे आगे बढ़ाना चाहिए। महराजगंज के किसान युवक अमन चौधरी कहते हैं कि खेती में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है। हर ब्लॉक में कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल मंडी बने ताकि फसल का सही दाम मिले। वाराणसी के प्रवीण सिंह का सुझाव है कि युवाओं को स्टार्टअप्स के लिए आसान लोन और तकनीकी मार्गदर्शन मिले। अब गांवों में भी इनोवेशन की लहर है। शिक्षा और कृषि सबसे आगे, ग्रामीण युवाओं की प्राथमिकता साफ अभियान के तहत अब तक मिले 7.8 लाख सुझाव शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। ग्रामीण युवाओं ने स्कूलों में गुणवत्ता, डिजिटल सुविधाओं और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। आगरा के राकेश कुमार सोनी ने कहा है कि अगर अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो व्यवस्था खुद सुधर जाएगी। सरकारी स्कूलों को सबके लिए अनिवार्य किया जाए। कृषि क्षेत्र से 6 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनमें तकनीकी खेती, AI आधारित फसल प्रबंधन, ड्रिप इरिगेशन, कोल्ड स्टोरेज और किसान ड्रोन जैसे विषय प्रमुख हैं। अयोध्या के युवा किसान मनोज तिवारी का कहना है कि कृषि को स्मार्ट बनाना ही विकसित यूपी की असली पहचान होगी। खेल, स्वास्थ्य और इंटरनेट पर भी जोर कन्नौज के विवेक मिश्रा ने कहा है कि हर गांव में जिम और खेल प्रशिक्षण केंद्र बनें। ग्रामीण प्रतिभाओं को जिला स्तर तक प्लेटफॉर्म मिले। बस्ती के आकाश यादव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुझाव दिया कि हर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जोड़ा जाए। गोंडा की ममता वर्मा ने कहा है कि  महिलाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ें, तभी गांवों में आत्मनिर्भरता आएगी। युवाओं को योगी आदित्यनाथ में दिख रही नई आशा ग्रामीण युवाओं का विश्वास साफ झलकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में जो पारदर्शिता, सुशासन और विकास की गति दी है, वह उन्हें अपनी बात खुलकर रखने की हिम्मत देती है। लंदन में हाल ही में 'विकसित यूपी 2047' का लोगो लॉन्च हुआ, जहां एनआरआई समुदाय ने भी योगी के विज़न की सराहना की। यूके, दुबई और अमेरिका के प्रवासी भारतीयों ने भी इस अभियान में सुझाव भेजे हैं, जिससे ये पहल अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी है। युवाओं के सुझाव, सरकार के लिए दिशा सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के युवाओं से मिले इन सुझावों का अध्ययन कर सरकार उन्हें भविष्य की विकास नीतियों में शामिल करेगी। यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश का ग्रामीण युवा सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि 'नीति निर्माता' की भूमिका में नजर आ रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनभागीदारी आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को ‘विकसित भारत’ के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करेगी। आज का ग्रामीण युवा सिर्फ रोज़गार नहीं, 'सार्थक विकास' चाहता है। उसे योगी आदित्यनाथ में वह नेतृत्व दिख रहा है जो उसकी आकांक्षाओं को दिशा दे सके। गांव से निकली यह आवाज़ अब केवल सुझाव नहीं, बल्कि नए उत्तर प्रदेश की नींव का पत्थर बन चुकी है।

अवैध कब्जा और सुरक्षा संदेश: देश में दो बड़ी खबरें सुर्खियों में

सतना  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सतना में आयोजित एक कार्यक्रम में इशारों ही इशारों में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए अखंड भारत का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि कई सिंधी भाई यहां बैठे हैं। बेहत खुशी की बात है कि वे अविभाजित भारत में आए। परिस्थितियों ने हमें उस घर (पाकिस्तान) से यहां भेजा है क्योंकि वह घर और यह घर (भारत) अलग नहीं हैं। पूरा भारत एक घर है, लेकिन किसी ने हमारे घर का एक कमरा हटा दिया और उस पर कब्जा कर लिया है। मुझे इसे वापस लेना है। ऐसे में हमें अखंड भारत याद रखना होगा। सतना में बीटीआई ग्राउंड में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत सारे सिंधी भाई यहां बैठे हैं। मुझे बड़ा आनंद है कि वो पाकिस्तान नहीं गए। वो अविभाजित भारत आए। ये आदत नई पीढ़ी तक जानी चाहिए क्योंकि हमारा घर है। परिस्थितियों ने हमें उस घर से यहां भेजा है। वह घर और यह घर अलग नहीं है। इसके बाद आगे अपने संबोधन में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इशारों ही इशारों में बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पूरा भारतवर्ष एक घर है। लेकिन हमारे घर का एक कमरा, जिसमें मेरा टेबल, कुर्सी और कपड़ा आदि सामान रहता था उसे किसी ने कब्जा लिया। कल मुझे उसे वापस लेकर वहां फिर से अपना डेरा डालना है। हमें अविभाजित भारत याद रखना है। मोहन भागवत ने आगे कहा कि वैसे ही हमारी एक भाषा है। भारत में सबकी एक भाषा है और वह है हृदय भाषा… हमें तय कर लेना है कि भाषा-भूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन सभी हमें हमारा चाहिए। हमारी पंरपरा में यह जैसा है वैसा चाहिए। दुनिया का इतिहास बहुत पुराना है लेकिन किसी देश के पास इतना गौरवपूर्ण इतिहास नहीं है जितना भारत के पास है। हमारे महापुरुष आज भी हमारे आदर्श हैं। आज भी गुरुओं और गुरुपुत्रों के बलिदान को पूरे देश में माना जाता है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सतना जिले में रविवार को सिंधी समाज के आध्यात्मिक गुरु बाबा मेहरशाह के नवनिर्मित दरबार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि एक अंग्रेज ने टूटा हुआ दर्पण दिखाकर हमारे बीच फूट डाली थी जबकि हम सभी सनातनी हैं। अब हमें गुरुओं के दिखाए आध्यात्मिक दर्पण से खुद को देखना चाहिए।  

बच्चों की सुरक्षा के लिए यूपी में कफ सिरप की बिक्री बंद, एमपी घटना के बाद सख्ती

लखनऊ  मध्य प्रदेश समेत देश के कुछ राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत की खबरों के बाद उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। सहायक आयुक्त औषधि दिनेश कुमार तिवारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को चेतावनी जारी की है। जारी आदेश में सभी औषधि निरीक्षकों को सम्बंधित बैच की बिक्री रोकने के साथ ही उनके नमूने राज्य औषधि प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ योगी सरकार ने भी सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और रिपोर्ट आने तक उक्त कफ सिरप का प्रयोग पूर्णतः बंद रखा जाए। रविवार को सहायक औषधि आयुक्त के स्तर से जारी आदेश में कहा गया है कि मेसर्स स्रेशन फार्मक्यूटिकल द्वारा खास बैच के कोल्ड आरआईएफ़ सिरप में डाईएथिलीन ग्लाइकाल और एथेलिन ग्लाइकाल जैसे विषैले रसायनों की मौजूदगी की आशंका है। ये दोनों रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं और इनका सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। तिवारी ने अपने आदेश में सभी औषधि विक्रेताओं, सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि उक्त बैच के कफ सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग तत्काल रोका जाए। साथ ही दुकानों व अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक का नमूना जांच हेतु लखनऊ स्थित राज्य औषधि प्रयोगशाला में तत्काल भेजा जाए। उन्होंने औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि सभी स्थानों पर औषधि की उपलब्धता की जांच करें और नमूने एकत्र कर ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करें। निर्माण प्रयोगशालाओं को भी कफ सिरप में प्रयुक्त प्रोपलीन ग्लाइकाल के नमूनों की जांच करने को कहा गया है। अपने आदेश में तिवारी ने कहा कि लखनऊ प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी उत्पादकों और वितरकों पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

टॉस पर बवाल: टीम इंडिया के साथ अन्याय, रेफरी के फैसले से पाकिस्तान को मिली बढ़त

नई दिल्ली  इंडिया और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में खेले जा रहे वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 के लीग मैच के दौरान मैच रेफरी ने एक कांड कर दिया। इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच खेला जा रहा है, लेकिन इस हाई-वोल्टेज मैच में टॉस के दौरान एक बड़ा ब्लंडर हो गया, जिसे सुधारा नहीं जा सका। मैच रेफरी ने पाकिस्तान की टीम को टॉस जिता दिया और भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर कुछ कर भी नहीं पाईं। एक तरह से टीम इंडिया के साथ सरेआम धोखेबाजी हो गई। इसका वीडियो भी कैमरे में कैद हो चुका है। दरअसल, भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में टॉस फेंका। पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने कॉल किया और बोला – टेल्स…इसके बाद मैच रेफरी शांद्रे फ्रिट्ज और टॉस प्रेजेंटर मेल जोंस ने बोला- Heads is the Call और हेड्स आया। इस तरह जीत तो टॉस में भारत की होनी थी, लेकिन पाकिस्तान जीत दे गई और इसके बाद पाकिस्तान की कप्तान से सीधे सवाल पूछा गया कि वे क्या करना पसंद करेंगी तो सना ने भी देर करते हुए पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। वीडियो आप स्टार स्पोर्ट्स द्वारा शेयर की गई है। देख सकते हैं। इस तरह के ब्लंडर आमतौर पर क्रिकेट में होते नहीं हैं। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। अन्यथा वह आवाज उठा सकती थीं। हो सकता है कि शोर में या फिर किसी अन्य वजह से हरमनप्रीत कौर ने फातिमा सना का कॉल नहीं सुना हो, लेकिन मैच रेफरी और मैच प्रेजेंटर की ये जिम्मेदारी होती है कि वह बताए कि आखिर टॉस में क्या आया है। खैर मैच शुरू हो चुका है और इस पर आगे विवाद और भी बढ़ सकता है। फिलहाल के लिए भारतीय टीम बल्लेबाजी कर रही है, क्योंकि टॉस के बाद पाकिस्तान ने गेंदबाजी चुनी थी।  

दार्जिलिंग में प्राकृतिक आपदा: भूस्खलन में 18 मृत, राष्ट्रपति और पीएम ने जताया शोक

दार्जिलिंग उत्तर बंगाल में लगातार भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दार्जिलिंग जिले में हुए भूस्खलन और पुल टूटने की घटनाओं में अब तक 18 लोगों की मौत हो गई है और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। मौक का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक, मिरिक और सुखिया क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण कई लोग हताहत हुए हैं। इस हादसे के बाद दार्जिलिंग जिला पुलिस राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। वहीं कालिम्पोंग में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पीएम मोदी ने जनहानि पर जताया दुख प्रधानमंत्री मोदी ने दार्जिलिंग में पुल ढहने की घटना पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- दार्जिलिंग में एक पुल दुर्घटना में हुई जान-माल की हानि से अत्यंत दुःखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। हम प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रपति ने भी हादसे पर जताया दुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस हादसे पर दुख जताया है। एक्स पर राष्ट्रपति भवन की तरफ से किए पोस्ट में लिखा गया- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हुई दुखद जनहानि अत्यंत दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं। मैं बचाव एवं राहत कार्यों की सफलता की प्रार्थना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग में भारी बारिश के कारण हुई जान-माल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को वहां तैनात किया गया है और जरूरत पड़ने पर और जवानों को भेजा जाएगा। शाह ने कहा कि उन्होंने दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट से भी बात की और वहां की स्थिति का जायजा लिया। शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, दार्जिलिंग में भारी बारिश के कारण हुई दुखद जान-माल की हानि से गहरा दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर और टीमें भी वहां भेजी जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा, भाजपा कार्यकर्ता भी जरूरतमंद लोगों को आवश्यक सहायता दे रहे हैं। लोहे का पुल ढहा, आवाजाही हुई बाधित पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के कारण दुधिया में लोहे के पुल का एक हिस्सा ढह जाने के बाद सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग एसएच-12 सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। मिरिक-सुखियापोखरी रोड के पास भूस्खलन सबसे बड़ा भूस्खलन मिरिक-सुखियापोखरी रोड के पास हुआ, जिसने कई घर बहा दिए और वाहनों की आवाजाही बाधित कर दी। इससे आसपास के कई छोटे गांवों से संपर्क टूट गया। दार्जिलिंग उप-निबंधक रिचर्ड लेप्चा ने कहा कि सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य के फंसे होने की आशंका है। लगातार बारिश के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की मदद से राहत अभियान चल रहा है। कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। भाजपा सांसद ने घटना पर जताया दुख वहीं इस घटना पर भाजपा सांसद राजू बिस्ता ने दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश के कारण हुए भारी नुकसान के बारे में जानकर मुझे बेहद दुख हुआ है। मौतें हुई हैं, संपत्ति का नुकसान हुआ है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। मैं स्थिति का जायजा ले रहा हूं और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हूं। कार्यकर्ताओं को लोगों की मदद करने का दिया निर्देश- राजू एक्स पर अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा- हमने अपने भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों की मदद और सहायता के लिए जुटने का निर्देश पहले ही दे दिया है। हम अपने लोगों की मदद और सहायता के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। मैं अपने सभी गठबंधन सहयोगियों और क्षेत्र के अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से भी समन्वय स्थापित करने की अपील करता हूं ताकि हम जरूरतमंद लोगों तक समय पर मदद और सहायता पहुंचा सकें।   अनौपचारिक रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 11 तक पहुंची जिले के अधिकारियों के अनुसार, बिश्नुलाल गांव, वार्ड 3 लेक साइड और जसबीर गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस क्षेत्र से छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक व्यक्ति चाय बगान में मृत पाया गया। कई घर और चाय बगान के क्वार्टर मलबे में दब गए हैं। मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारी और लगातार बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। 'भूमि खिसकने और कई घर क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है।' उन्होंने यह भी कहा कि मिट्टी और मलबे में राहत कार्य करने के लिए मशीनरी और आपातकालीन वाहन पहुंचाना बेहद कठिन है। अभी तक अनौपचारिक रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 11 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल मलबे और मिट्टी के भारी परतों को हटाकर और लोगों को बचाने में जुटा है। सीएम ममता बनर्जी ने जताया दुख, टोल फ्री नंबर जारी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर दुख जताते हुए एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'मैं बहुत चिंतित हूं कि कल रात कुछ घंटों के भीतर अचानक भारी बारिश के कारण उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल दोनों के कई इलाके बाढ़ में डूब गए हैं, साथ ही बाहर से हमारे राज्य में अत्यधिक नदी का पानी आ गया है… राज्य मुख्यालय और जिलों में 24×7 नियंत्रण कक्ष हैं। कृपया मेरे नबान्न आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष से +91 33 2214 3526 और +91 33 2253 5185 पर संपर्क करें, जबकि टोल फ्री नंबर +91 86979 81070 और 1070 हैं।' 6 अक्तूबर तक अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी … Read more

क्रिकेट के मैदान पर ताबड़तोड़ धमाका, हरजस सिंह ने ऑस्ट्रेलिया में रचा नया रिकॉर्ड

सिडनी शनिवार का दिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। भारतीय मूल के युवा बल्लेबाज हरजस सिंह ने सीमित ओवरों के ग्रेड क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो इससे पहले किसी ने नहीं किया था। वेस्टर्न सबर्ब्स की ओर से सिडनी क्रिकेट क्लब के खिलाफ खेले गए मैच में हरजस ने मात्र 141 गेंदों पर 314 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस पारी में उन्होंने 35 छक्के और 12 चौकों की बरसात कर दी। ग्रेड क्रिकेट में लगाया तिहरा शतक यह उपलब्धि हरजस को क्रिकेट इतिहास के बेहद खास क्लब में ले आई है। वह ग्रेड-लेवल क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में तिहरा शतक बनाने वाले पहले क्रिकेटर बन गए। साथ ही वह न्यू साउथ वेल्स प्रीमियर फर्स्ट ग्रेड क्रिकेट (लंबे प्रारूप को मिलाकर) में तिहरा शतक लगाने वाले तीसरे क्रिकेटर बन गए। इससे पहले केवल दो खिलाड़ियों- फिल जैक्स (321 रन) और विक्टर ट्रम्पर (335 रन) ने ही तिहरा शतक लगाया था। भारत से जुड़ी जड़ें, ऑस्ट्रेलिया में उभरता सितारा सिडनी में जन्मे हरजस सिंह भारतीय मूल के हैं। उनके माता-पिता साल 2000 में चंडीगढ़ से सिडनी जाकर बस गए थे। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही झलकता था। हरजस ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2024 में भी शानदार प्रदर्शन किया था। भारत के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उन्होंने 64 गेंदों पर 55 रन बनाए थे, जो उस मैच में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सर्वाधिक स्कोर था। उनकी इस पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 253 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था। ऑस्ट्रेलिया ने 2024 अंडर-19 विश्व कप का खिताब भी जीता था। 'ये मेरे जीवन की सबसे बेहतरीन पारी थी' रिकॉर्ड तोड़ पारी के बाद हरजस सिंह ने फॉक्स क्रिकेट से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से मेरी अब तक की सबसे साफ़-सुथरी बल्लेबाज़ी थी। मैं इस पर बहुत गर्व महसूस कर रहा हूं क्योंकि ऑफ-सीजन में मैंने अपनी पावर हिटिंग पर काफी मेहनत की थी, और आज उसका नतीजा मिला। यह मेरे लिए बहुत खास दिन है।' उन्होंने आगे कहा, 'पिछले एक-दो सीजन में मैं मैदान के बाहर की चीजों पर ज्यादा ध्यान दे रहा था, लेकिन अब मैंने खुद को सिर्फ अपने खेल पर केंद्रित करना शुरू किया है, और इसका फायदा साफ दिख रहा है।'   ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं को मिला सितारा हरजस सिंह की यह तिहरी शतकीय पारी अब उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टीम के चयनकर्ताओं की नजरों में एक बड़ा दावेदार बना चुकी है। उनके साथी खिलाड़ी जैसे सैम कॉन्स्टास, ह्यूग वेबजेन, माहली बियर्डमैन और ओलिवर पीक पहले ही स्टेट टीमों या नेशनल लेवल पर पहुंच चुके हैं। सैम कॉन्स्टास तो टेस्ट डेब्यू भी कर चुके हैं। अब हरजस की यह विस्फोटक पारी न केवल उनके करियर को नई दिशा देगी, बल्कि यह संकेत भी दे रही है कि ऑस्ट्रेलिया के पास एक और भविष्य का सुपरस्टार तैयार हो चुका है।  

बार काउंसिल चुनाव का महंगा सफर: MP में अब 1.25 लाख फीस जमा करना होगी, रिफंड नहीं

जबलपुर मध्य प्रदेश के सवा लाख से अधिक वकीलों का पंजीयन करने वाली सर्वोच्च संस्था एमपी स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ना अब आसान नहीं रहा। देश के वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल आफ इंडिया ने एक आदेश के जरिए चुनाव नामांकन शुल्क में सीधे पांच गुना बढ़ोत्तरी कर दी है, जो कि वापस नहीं होगा। इससे प्रत्याशियों में खासा रोष है। इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठ रहे है। पहले एसबीसी का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन फीस महज 25 हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक लाख पच्चीस हजार रुपये कर दिया गया है। राशि की वापसी न होने का भी विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को एक आदेश जारी करके स्टेट बार काउंसिल के चुनावों के लिए सात सदस्यीय चुनाव समितियां गठित करके 31 जनवरी, 2026 तक सभी चुनाव कराने के निर्देश बीसीआई को दिए थे। इसी आदेश के बाद बीसीआई द्वारा स्टेट बार काउंसिल को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि लॉ ग्रेजुएट्स के नामांकन के लिए पहले फीस 16 हजार रुपये थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर 600 रुपये कर दिया। स्टेट बार काउंसिल की आय घटने के कारण अब स्टेट बार काउंसिल के पास चुनावी खर्च के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं बच रही। इसके लिए जरूरी है कि नामांकन की फीस 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख 25 हजार रुपये की जाए। मप्र स्टेट बार काउंसिल की मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल अगले माह पूरा होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जनवरी 2026 तक नई कार्यकारिणी के चुनाव कराए जाने हैं। वेकेशन में प्रत्याशियों ने शुरू किया जनसंपर्क आगामी कार्यकारिणी को लेकर चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने जहां नामांकन शुल्क बढ़ाये जाने पर रोष व्यक्त किया है तो वहीं अपनी जोर आजमाइश भी शुरू कर दी है। दशहरा पर्व पर पड़ी छुट्टियों पर अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों ने वकीलों के घरों में पहुंचकर जन संपर्क करना शुरू कर दिया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी मतदाताओं से अपने पक्ष में मत का प्रयोग करने की अपील की जा रहीं है। शुल्क बढ़ाया जाना अनुचित : सैनी एसबीसी के वाइस चेयरमेन आरके सिंह सैनी ने कहा है कि चुनाव में नामांकन शुल्क सीधे पांच गुना बढ़ाया जाना अनुचित है। इसकों लेकर एसबीसी ने बीसीआई को पत्र भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जल्द ही बीसीआई की सामान्य सभा की बैठक होने वाली है, जिसमें संभवत: शुल्क घटाने पर विचार विमर्श होगा।

प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों पर मान्यता संकट, छात्रों के लिए बड़ी चुनौती

भोपाल मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन कालेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन कालेजों ने न तो फैकल्टी नियुक्त की और न ही जरूरी सुविधाएं पूरी कीं। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में इन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंत्री और नेताओं के जिलों में ही कॉलेजों की खराब स्थिति     रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उनमें रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं।     एनएसयूआई का आरोप है कि इनमें से कई कॉलेज कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं।राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, लेकिन वे भी अपने जिलों के कॉलेजों की स्थिति सुधार नहीं पाए।   कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। एनएसयूआई ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन तक कर दिया है, जो नर्सिंग शिक्षा के साथ खिलवाड़ है। गरीब छात्राओं का भविष्य संकट में     एनएसयूआई ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी लापरवाही के कारण हजारों छात्राओं का भविष्य अधर में है। जो छात्राएं निजी कालेजों की ऊंची फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, वे अब प्रवेश से वंचित रह जाएंगी।     एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।     विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की मान्यता रुकी हुई है। इन कॉलेजों में करीब 1000 से ज्यादा सीटें हैं, जो अब खाली रह जाने का खतरा है।

सांसद अनुराग शर्मा की भागीदारी से भारत की उपस्थिति मजबूत होगी, 68वां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन

झांसी झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के अंतरराष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनुराग शर्मा कैरिबियन द्वीप राष्ट्र बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (सीपीसी) में भाग लेंगे। यह सम्मेलन5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक होगा। कैरिबियन द्वीप राष्ट्र बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक होगा। इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के 56 सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि एकजुट होंगे। इस सम्मेलन में संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने, सुशासन, समावेशी विकास और 21वीं सदी की उभरती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा है। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय 'द कॉमन वेल्थ व ग्लोबल पार्टनर है। सांसद अनुराग शर्मा का यह प्रतिनिधित्व ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रहा है जब वह सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में अपने तीन वर्षों के ऐतिहासिक और अत्यंत सफल कार्यकाल का समापन करने जा रहे हैं। उनका यह कार्यकाल संगठन के लिए एक नए युग का सूत्रपात करने वाला रहा है और इसे सीपीए के इतिहास में सर्वाधिक परिवर्तनकारी दौरों में से एक माना जा रहा है। विगत तीन वर्षों में, सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में संगठन में अभूतपूर्व संरचनात्मक और प्रशासनिक क्रांतियाँ आई हैं। सांसद शर्मा के अथक प्रयासों का परिणाम है कि सीपीए को ब्रिटेन में केवल एक ब्रिटिश चैरिटी के रूप में काम करने की पुरानी, सीमित व्यवस्था से बाहर निकालकर, एक विशाल, स्थायी और अंतरराष्ट्रीय संगठन (इंटरनल बॉडी) के रूप में कानूनी मान्यता दिलाई गई है।  

किम जोंग उन ने लगाया ब्रेस्ट इम्प्लांट बैन, महिलाओं पर सख्त कार्रवाई का आदेश

फियोंगयांग उत्तर कोरिया में अब ब्रेस्ट इम्प्लांट की सर्जरी पर भी रोक लगा दी गई है. यह देश पहले से ही रोजमर्रा की चीजों पर कड़े नियमों के लिए जाना जाता है, जैसे पश्चिमी कपड़े पहनना या हेयरस्टाइल. अब ब्रेस्ट इम्प्लांट और प्लास्टिक सर्जरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. यहां एक डॉक्टर और दो महिलाओं पर ब्रेस्ट सर्जरी कराने के आरोप में सार्वजनिक मुकदमा चल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन की सरकार अब ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए मोहल्लों में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि ऐसी महिलाओं की पहचान की जा सके जिन्होंने यह सर्जरी करवाई है. अगर किसी महिला ने किस भी तरह का कोई भी बदलाव करवाया, तो नेताओं को पुलिस में रिपोर्ट करना होगा.  गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही सरकार उत्तर कोरिया में ब्रेस्ट इम्प्लांट को गैर-समाजवादी काम (Non-socialist work) माना गया है और यह कानूनन मना है. हाल ही में एक डॉक्टर पर, जिसने छुपकर यह सर्जरी की थी, सार्वजनिक सुनवाई हुई. इसी तरह दो 20 साल की लड़कियों पर भी ब्रेस्ट सर्जरी करवाने का आरोप लगा. बताया गया कि दोनों अपने फिगर को बेहतर बनाना चाहती थीं. डॉक्टर ने अपने घर पर अवैध रूप से चीन से लाए गए सिलिकॉन का इस्तेमाल करके सर्जरी की थी. 20 साल की दोनों महिलाओं ने अपने शरीर का आकार बदलवाने के लिए यह ऑपरेशन कराया था. सरकार अब ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है और संदिग्ध महिलाओं की पहचान करने के लिए पड़ोस में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. 20 साल की लड़कियों ने कराई ब्रेस्ट सर्जरी  एक सूत्र के मुताबिक, सितंबर के बीच में दक्षिणी उत्तरी ह्वांगहे प्रांत के एक सूत्र ने बताया कि सितंबर के बीच में सारिवॉन जिले के सांस्कृतिक हॉल में एक डॉक्टर और उन महिलाओं का सार्वजनिक मुकदमा हुआ, जिन्होंने अवैध ब्रेस्ट सर्जरी करवाई थी. डॉक्टर पर आरोप था कि उसने अपने घर पर अवैध रूप से ब्रेस्ट सर्जरी की और इसके लिए चीन से तस्करी कर लाया गया सिलिकॉन इस्तेमाल किया. मुकदमे के दौरान डॉक्टर मंच पर सिर झुकाए खड़ा रहा, जबकि 20 साल की दोनों लड़कियां शर्म के कारण अपना चेहरा नहीं उठा सकीं.