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दिल्ली-NCR: पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ग्रीन पटाखों पर नई गाइडलाइन जारी

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नई दिल्ली  दुर्गा पूजा और नवरात्रि के बाद अब दिवाली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर इलाके में हरियाणा और पंजाब में जलने वाले पराली से प्रदूषण का खतरा बढ़ने लगा है. वहीं, दिवाली में जलने वाले पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर भी चिंता बनी हुई है. राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी, 2025 से पूरे वर्ष के लिए सभी प्रकार के पटाखों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध है. इसके साथ ही राजधानी में पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन हाल में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखा निर्माताओं को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली सीजन से पहले दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रीन पटाखों के निर्माण की अनुमति दे दी है, लेकिन एनसीआर क्षेत्र में उनकी बिक्री पर रोक लगा दी है. सीजेआई बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से वैध प्रमाणन वाले निर्माताओं को उत्पादन जारी रखने की अनुमति दी है, बशर्ते वे एक वचनबद्धता प्रस्तुत करें कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कोई बिक्री नहीं होगी. लेकिन इससे यह असमंजस बना हुआ है कि ग्रीन पटाखे के बनाने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन बिक्री नहीं होगी, तो फिर बनाने का क्या मतलब है? इसे लेकर ग्रीन पटाखों के निर्माता सवाल उठा रहे हैं. 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, टिकीं निगाहें सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार, निर्माताओं और विक्रेताओं सहित सभी हितधारकों से परामर्श करने और 8 अक्टूबर, 2025 को होने वाली अगली सुनवाई पर अदालत के समक्ष एक संतुलित नीति पेश करने का भी निर्देश दिया गया है. इससे अब लोगों की निगाहें आठ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है.   हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों पर केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था. एमसी मेहता मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने टिप्पणी की, “अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो उन्हें पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए…” उन्होंने कहा था कि जो भी नीति होनी चाहिए, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए. हम केवल दिल्ली के लिए नीति नहीं बना सकते क्योंकि वे देश के कुलीन नागरिक हैं. मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था, और वहां प्रदूषण बदतर था. इससे पहले नवंबर 2024 में, दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि ‘कोई भी धर्म ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता, जो प्रदूषण में योगदान दे या लोगों के स्वास्थ्य से समझौता करे. जानें दिल्ली सरकार का क्या है आदेश दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी, 2025 से पूरे वर्ष के लिए सभी प्रकार के पटाखों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और फोड़ने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश में आगे कहा गया है, “दिल्ली में, विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में, गंभीर वायु प्रदूषण होता है और पार्टिकुलेट मैटर सांद्रता (पीएम 2.5 और पीएम 10) जैसे प्रदूषकों का स्तर वायु गुणवत्ता के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19 की उप-धारा (1) के अंतर्गत संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित किया गया है.”   आदेश में कहा गया है कि त्योहारों के मौसम में पटाखे जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है. इसलिए, दिल्ली सरकार ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत 2020 से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अक्टूबर से जनवरी के महीनों के दौरान वायु गुणवत्ता में गिरावट की पिछली घटनाओं को देखते हुए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध है. इसके साथ ही पटाखों के फोड़ने (ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से वितरण सहित) और उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है.  

दमोह में सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग, 29 लोगों की फर्जी शिकायतें उजागर, कलेक्टर को भेजी रिपोर्ट

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दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत करने वाले 29 शिकायतकर्ताओं को जनपद सीईओ ने चिह्नित किया है। जिसकी सूची बनाकर कलेक्टर के पास भेजी गई है। अब इन लोगों की शिकायत का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत गलत पाई गई तो आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा यह योजन इसलिए शुरू की गई थी, ताकि आम लोगों को शासन की उस योजना का लाभ मिल सके, जिससे वह वंचित हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वह हितग्राही अपनी समस्याओं की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर सकता है। यह योजना सार्थक हुई लोगों को न्याय मिलना शुरू हो गया, लेकिन लोग इसका गलत इस्तेमाल करने लगे। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मांगी जानकारी दमोह कलेक्टर ने ब्लाक स्तर के अधिकारियों से जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने 29 लोगो की सूची बनाकर दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर को भेजी है। यह वे लोग हैं जो लगातार शिकायत करते हैं। जबकि उस योजना से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। 26 सितम्बर को दमोह कलेक्टर ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों को एक पत्र जारी किया था। जिसमें पूछा था आपके यहां सीएम हेल्पलाइन में यदि कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जो बार बार शिकायत करते हैं या फिर शिकायत दर्ज करना उन्होंने अपनी आदत बना ली है तो उनका नाम, फोन नंबर शिकायत के विवरण की जानकारी सहित दर्ज करे और उनकी सूची भेजे। जिसके बाद तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनका काम ही सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना है। उनके नाम ओर शिकायत की दर्ज संख्या सहित पूरी जानकारी भेजी गई है। ऐसी होती है ज्यादा शिकायत तेंदूखेड़ा ब्लाक में जो शिकायत दर्ज हैं उनमें अधिकाश लोग जिले या दूसरी जनपद से है। जिनकी शिकायतें जांच में गलत पाई गई है तो कुछ शिकायतो में लेनदेन करके मामलों का निराकरण हुआ है। शिकायत का जनहित या समाज हित से कोई वास्ता नहीं है। बल्कि निर्माण कार्य और पंचायत बंद या फिर सचिव, सरपंच की झूठी शिकायतों का हवाला दिया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद उनकी जानकारी एकत्रित की गई और सूची दमोह कलेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कलेक्ट्रेट से पत्र प्राप्त हुआ था। उसके बाद अप्रैल माह से सितम्बर तक की जानकारी एकत्रित की गई थी और 29 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की है जो लगातार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत करते है। इनकी शिकायतों में फर्जी मजदूर और निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी का हवाला दिया जाता है। पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी गई है आगे जो कार्रवाई होगी दमोह कलेक्टर करेंगे। 

बैंकिंग नियमों में बड़ा बदलाव: चेक क्लियरेंस अब होगा तेज़, शुरुआत दिल्ली-मुंबई-चेन्नई से

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नई दिल्ली बैंकिंग सिस्टम (Banking System) में 4 अक्तूबर 2025 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 4 अक्टूबर से फास्ट चेक क्लियरेंस सिस्टम (Fast Cheque Clearance System) लागू करने का फैसला किया है. इस नई व्यवस्था से चेक जमा कराने पर पैसे उसी दिन खातों में जमा हो सकेंगे, जिससे पहले की तरह 1–2 दिन इंतजार नहीं करना पड़ेगा.  RBI का बड़ा फैसला फिलहाल चेक क्लियरेंस में कुछ दिन का वक्त लग जाता है. जिसे बदलकर अब RBI नई व्यवस्था के तहत Continuous Cheque Clearing मोड पर ले आएगा. इसके तहत सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक जो भी चेक जमा होंगे, उनकी इमेज और डेटा तुरंत स्कैन करके क्लियरिंग हाउस को भेजी जाएगी. उसे शाम 7 बजे तक चेक कंफर्म करना होगा. अगर बैंक समय पर जवाब नहीं देता है, तो चेक को ऑटोमैटिक क्लियर मान लिया जाएगा.  नए नियम को 2 चरणों में लागू करने का प्लान: चरण- 1: 4 अक्टूबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक बैंक को शाम 7 बजे तक पुष्टि का समय रहेगा.  चरण- 2: 3 जनवरी 2026 से बैंक को चेक कंफर्म करने के लिए केवल 3 घंटे का समय मिलेगा. अगर सुबह 10 बजे चेक भेजा गया है, तो दोपहर 2 बजे तक इसे क्लियर करना पड़ेगा. जिससे क्लियरेंस और भी तेज हो जाएगी. यह नई व्यवस्था शुरुआत में बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई के क्लियरिंग ग्रिड पर लागू होगी, फिर देशभर में इस नियम को लागू किया जाएगा. इससे बैंकिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा और चेक भुगतान अनुभव कहीं अधिक सहज बन जाएगा.   ग्राहकों से ये अपील RBI ने बड़े अमाउंट के चेक के लिए Positive Pay System को अनिवार्य किया है. इसमें ग्राहक बैंक को चेक के महत्वपूर्ण विवरण पहले से बताते हैं, इससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और गलत चेक ऑटोमैटिक रूप क्लियर नहीं होंगे. इस परिवर्तन से ग्राहक और व्यवसाय दोनों को फायदा होगा. ग्राहकों को तेज भुगतान मिलेगा और लेन-देन की अनिश्चितता कम होगी. वहीं व्यवसायों का कैश फ्लो बेहतर मैनेज होगा. बैंकिंग प्रणाली की कार्यकुशलता और विश्वसनीयता बढ़ेगी.    यही नहीं, RBI ने ग्राहकों को यह सलाह दी है कि वे चेक भरते समय सावधानी बरतें, विवरण सही लिखें और खाते में पर्याप्त राशि रखें. इससे चेक की अस्वीकृति या देरी की समस्या कम होगी. 

इंदौर में शांति भंग करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख, पुलिस को दिए गए सख्त एक्शन के निर्देश

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इंदौर शहर का सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडने वालों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए वामपंथी समाजवादी दलों ने गांधी प्रतिमा पर दिया धरना, सराफा थाने पर किया प्रदर्शन इंदौर भाजपा और उससे जुड़े सांप्रदायिक संगठनों द्वारा शहर की फिजा को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है इसी कड़ी में एकलव्य सिंह गोड ने शीतला माता बाजार से मुस्लिम कर्मचारियों को निकाले जाने का फतवा जारी कर शहर के माहौल को बिगाड़ा है। इसको लेकर वामपंथी समाजवादी दल लगातार अभियान चला रहे हैं। गत दिनों इन दलों ने पुलिस आयुक्त को ज्ञापन देकर एकलव्य गोड के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग के बाद गांधी जयंती पर इन दलों और अन्य संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने गांधीपतिमा पर धरना दिया तथा सभा की।  उसके बाद कार्यकर्ता सराफा थाने पहुंचे और वहां पर करीब 1 घंटे तक प्रदर्शन कर एवं नारेबाजी के बाद में थाना प्रभारी और क्षेत्रीय सीएसपी को एकलव्य गोड के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व अरुण चौहान, रामस्वरूप मंत्री, रुद्रपाल यादव ,राहुल निहुरे, राजेंद्र यादव आदि ने किया।धरना प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,सीपीएम  व श्रम संगठनों और अन्य जन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लया। विरोध  सभा को सोहनलाल शिंदे ,रुद्रपाल यादव,  अरुण चौहान,  रामस्वरूप मंत्री,राजेंद्र यादव,  कैलाश लिंबोदिया, सीएल सरावत,   हरिओम सूर्यवंशी , विनीत तिवारी, राहुल निहोरे , अजीत केतकर, वास्कल एंथोनी, सफी शेख, परेश टोकेकर ,प्रमोद नामदेव, संदीप शर्मा  कविता सोलंकी ने संबोधित किया ।   सभा का संचालन  अरुण चौहान ने किया । इस मौके पर श्रम संगठन व जनसंगठन, सामाजिक संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हुए । जिनमे अभय नीमा, भारतीय सामाजिक न्याय संगठन से सलीम शेख, हर्ष मरमट, रमेश झाला, पूनम खंडेलवाल, हरि मरमट, प्रकाश पाठक व अन्य प्रमुख कार्यकर्ता शामिल रहे। तत्पश्चात सभी कार्यकर्ता जत्था बनाकर पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री  की प्रतिमा स्थल पर गए और उनके न्याय प्रिय व उनके द्वारा दिए गए जय जवान जय किसान के नारे को बुलंद कर उन्हें याद किया गया। इसके बाद सभी कार्यकर्ता सराफा पुलिस थाना पहुंचे और प्रदर्शन किया ।पुलिस थाना प्रभारी आर के लिटोरिया से मिलकर उनके क्षेत्र शीतला माता बाजार वर्ग विशेष के लोगों को कार्य से बंद करने भाजपा नेता एकलव्य सिंह गोड के बयान को शहर के माहौल को खराब करने का बताया और उन पर एफआईआर दर्ज किए जाने कि मांग की।   औकार्यक्रम में मुख्य रूप से भागीरथ कछवाय,यूसुफ खान, काशीराम नायक ,फादर पायस, और अन्य अनेक साथियों ने हिस्सा लिया।

अक्टूबर 7-8 को आयोजित होगी उच्चस्तरीय प्रशासनिक कांफ्रेंस, दिशा-निर्देश सार्वजनि

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 7 एवं 8 अक्टूबर 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में होने वाली कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस संबंधी दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। विषय संयोजक को प्रस्तुति के लिए अधिकतम 20 मिनट मिलेंगे और प्रत्येक क्षेत्र में राज्य सरकार की प्राथमिकताएं बतायी जायेंगी। राज्य सरकार के विजन के अनुरूप केन्द्र और राज्य सरकार की क्षेत्रीय प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों में सर्वश्रेष्ठ 5 और कमजोर 5 जिलों की समीक्षा की जायेगी। कांन्फ्रेंस में कलेक्टरों के सुझावों पर ध्यान केन्द्रित कर आने वाली विशिष्ट समस्याएं और मुद्दे तथा जिला स्तर पर उस क्षेत्र के साथ अन्य किसी क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए नवाचार पर चर्चा की जायेगी। मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय और योजना विभाग चुनिंदा कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और नवाचार तथा जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सार्वजनिक संवाद (जन संवाद) वीसी के माध्यम से इच्छित परिणाम प्राप्ति पर चर्चा होगी। जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर रोजगार सृजन, लोगों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक आसान पहुंच और पहलों के बारे में जागरूकता पर चर्चा होगी। सभी 8 सेक्टरों के लिए 75 मिनट का सत्र समय रखा गया है। कांफ्रेंस का उदघाटन सत्र 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे से 10:30 बजे तक सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा परिचय, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव  अनुराग जैन के संबोधन से होगा। सत्र में संयोजक कृषि उत्पादन आयुक्त, सदस्य कृषि/बागवानी/पशु चिकित्सा/सहकारी द्वारा कलेक्टर्स के बीच कृषि एवं संबद्ध विषयों पर चर्चा की जायेगी। दूसरे सत्र में प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य सदस्य सचिव डब्ल्यूपीसी, निदेशक एनएचएम कलेक्टर्स के बीच स्वास्थ्य एवं पोषण पर चर्चा केन्द्रित होगी। तीसरे सत्र में प्रमुख सचिव उद्योग, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, वित्त विभाग द्वारा कलेक्टर्स के बीच रोजगार, उद्योग और निवेश चर्चा पर रहेगा। चौथे सत्र में संयोजक अपर मुख्य सचिव-शहरी द्वारा शहरी विषयों पर चर्चा होगी और पांचवे सत्र के दौरान संयोजक अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव वित्त/ प्रमुख सचिव राजस्व/विधि द्वारा सुशासन पर चर्चा होगी। कॉन्फ्रेंस में 8 अक्टूबर की गतिविधियों के अंतर्गत सुबह 9:30 से 10:15 बजे तक मुख्य सचिव अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, आयुक्त जनसंपर्क द्वारा अपेक्षाओं के साथ विविध चर्चाएँ की जायेंगी। कॉन्फ्रेंस के छठवें सत्र में संयोजक प्रमुख सचिव-स्कूल शिक्षा, प्रमुख सचिव जनजाति कार्य चर्चा करेंगे। सातवें सत्र में प्रमुख सचिव पीएचई/प्रमुख सचिव जनजाति कलेक्टर्स के बीच रिसर्च और विकास एवं जनजातीय गतिविधियों पर चर्चा करेंगे। आठवें सत्र में नियम और कानून पर चर्चा होगी।  

नवरात्र पर इंदौरवासियों की धूम, 9 दिनों में 9 हजार से ज्यादा वाहनों की खरीद

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 इंदौर  नवरात्र के नौ दिनों में वाहन बाजार ने नई गति पकड़ी। प्रदेश भर में जहां कुल 67,507 वाहन बिके, वहीं अकेले इंदौर में 9,344 वाहनों की बिक्री दर्ज हुई। यह आंकड़ा प्रदेश की कुल बिक्री का करीब 14 प्रतिशत है, जो बताता है कि इंदौर वाहन खरीददारों का सबसे बड़ा केंद्र रहा। प्रदेश में बिके वाहनों का हर सातवां वाहन इंदौर में बिका। नौ दिनों में इंदौर में बिक गए 9344 वाहन नवरात्र के पहले दिन ही जीएसटी दरों में कटौती ने खरीददारों को बड़ी बचत दी। इसलिए नवरात्र में वाहनों की बिक्री खूब हुई। वाहन बिक्री में दोपहिया का दबदबा सबसे ज्यादा रहा। प्रदेश में 50,894 दोपहिया वाहन बिके, जिनमें से 6,025 इंदौर में खरीदे गए। इसी तरह प्रदेश में 12,097 कारों की बिक्री हुई, जिनमें से 2,562 कारें इंदौरवासियों ने खरीदीं। नवरात्र में ईवी वाहनों का क्रेज भी इस बार साफ दिखाई दिया। नवरात्र के दौरान पूरे प्रदेश में 6,806 इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जबकि अकेले इंदौर में 1,023 ईवी की बिक्री हुई। इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा वाहन विक्रेताओं का कहना है कि नवरात्र के पहले दिन यानी 21 सितंबर से जीएसटी दरों में मिली छूट ने ग्राहकों की खरीदारी को और बढ़ावा दिया। शो रूम पर सुबह से रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रही और बुकिंग में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला। दशहरा पर 700 कार बिकने का अनुमान नवरात्र के बाद दशहरा पर इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा। सुबह से लेकर देर रात तक शुभ मुहूर्त वाहनों की खरीदी होती रही। अनुमान के अनुसार दशहरे पर 700 कार और तीन हजार करीब दो पहिया वाहन बिकने का अनुमान है।

‘नो हैंडशेक पार्ट 4’: पाकिस्तान से टकराएंगी भारत की बेटियां, मैदान में दिखेगा दम

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नई दिल्ली भारत और पाक‍िस्तान के बीच महिला वर्ल्ड कप में 5 अक्टूबर को भ‍िड़ंत होनी है. लेकिन इस मुकाबले में दोनों ही टीमों के बीच मैदान पर माहौल कैसा रहेगा, क्या जो भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने एश‍िया कप के दौरान ऐसा किया? वही काम हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी करती दिखेगी. इस पर कई सवाल हैं. पुरुष टीम ने 3 बार एश‍िया कप के दौरान हैंडशेक नहीं किया, ऐसे में सवाल है? क्या महिला क्रिकेट टीम नो हैंडशेक पार्ट 4 को वर्ल्ड कप के दौरान कंटीन्यू करेगी.  यह भी पढ़ें: भारत के सख्त तेवर, सूर्या ही नहीं रव‍ि शास्त्री ने भी क‍िया PAK कप्तान सलमान आगा को इग्नोर..! टॉस के बाद नहीं की बात इस बार का एशिया कप 2025 का ऐसे समय में हुआ, जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं. पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद दोनों टीमें पहली बार क्रिकेट के मैदान में आमने-सामने उतरी थीं. लिहाजा मैदान पर भी उस तनाव की छाया साफ नजर आई. भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत से ही यह रणनीति बना ली थी कि पाकिस्तान से किसी तरह की औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी. मैच से पहले और बाद में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से परहेज किया. मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच किसी तरह की बातचीत भी नहीं हुई. क्रिकेट के जरिये भारत ने यह संदेश दिया कि वह पाकिस्तान से बेहद नाराज है और हालिया घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता. भारतीय खिलाड़ियों ने यह साफ कर दिया कि क्रिकेट में औपचारिकता निभाने के बावजूद वह पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्तों का दिखावा नहीं करेंगे. यह कदम पाकिस्तान को कड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश माना गया.  अब महिला टीम भी अपनाएगी यही रुख अब वही रवैया भारतीय महिला टीम में भी देखने को मिलेगा. महिला वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला रविवार को कोलंबो के न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा. मैच दोपहर तीन बजे शुरू होगा. इस मुकाबले में भी भारतीय महिला खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएंगी और औपचारिकता से दूरी बनाए रखेंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला पुरुष टीम के कदम से प्रेरित है और भारत का सामूहिक संदेश है कि पाकिस्तान के साथ सामान्य व्यवहार की कोई गुंजाइश नहीं है.  भारत की इस रणनीति को सिर्फ खेल तक सीमित नहीं माना जा रहा. यह कदम कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने वाला है. क्रिकेट हमेशा से दोनों देशों के रिश्तों का आईना माना गया है और इस बार भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हालात सामान्य होने तक क्रिकेट के मैदान पर भी सामान्य शिष्टाचार की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. BCCI ने भारत-पाक मैच पर क्या कहा? देवजीत सैकिया ने BCCI Stumped को हैंडशेक को लेकर कहा-  मैं कुछ भी पूर्वानुमान नहीं लगा सकता, लेकिन उस देश के साथ हमारा संबंध वैसा ही है, पिछले हफ्ते में कोई बदलाव नहीं हुआ है. भारत वह मैच पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में खेलेगा, और सभी क्रिकेट प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. मैं केवल यह सुनिश्चित कर सकता हूं कि जो कुछ भी एमसीसी (MCC) के क्रिकेट नियमों में लिखा है, वह किया जाएगा. हाथ मिलाने होंगे या गले मिलने होंगे, इसके बारे में मैं इस समय कुछ भी आश्वस्त नहीं कह सकता. 

PM आवास योजना 2025: कौन कर सकता है अब आवेदन और कैसे मिलेगा फायदा

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चंदौली आयुक्त, ग्राम्य विकास की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत चल रहे आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 में नए लाभार्थियों का डाटा कैप्चर करने के लिए समय-सीमा 14 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। यदि पात्र लाभार्थी किसी कारण से सर्वे में आने से छूट गए हो या सर्वे के समय घर पर उपलब्ध नहीं थे और वर्तमान में घर आ गए हो तो ऐसे लाभार्थियों का सर्वेक्षण कार्य (डाटा कैप्चर) 14 अक्टूबर तक सभी ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाएगा। आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 के लिए पोर्टल खोल दिया गया है। खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायतों के सर्वेयर के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग /बैठक कर छूटे हुए पात्र लाभार्थियों के सर्वेक्षण (डाटा कैप्चर) का कार्य आरंभ कराएं।

62 करोड़ लोगों ने देखा रामलीला का जादू: अयोध्या ने तोड़े हर रिकॉर्ड, डिजिटल दुनिया में बनी सबसे बड़ी रामलीला

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अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या ने एक बार फिर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष प्रयासों और मार्गदर्शन में अयोध्या की रामलीला आज विश्व की सबसे बड़ी और भव्य रामलीला बन चुकी है। डिजिटल क्रांति के दौर में यह आयोजन केवल भारत तक सीमित न रहकर विश्वव्यापी सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया है। इस वर्ष 50 से अधिक देशों में ऑनलाइन माध्यमों से प्रसारित हुई इस रामलीला को कुल 62 करोड़ से अधिक रामभक्तों ने देखा। भव्य मंचन और फिल्मी कलाकारों की भागीदारी दिल्ली और मुंबई से आए 250 से अधिक फिल्मी कलाकारों ने इस रामलीला को भव्य स्वरूप दिया। थ्री-डी तकनीक और आधुनिक मंच सज्जा ने इस धार्मिक आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। न केवल मंच पर बल्कि पर्दे पर भी यह आयोजन एक नया इतिहास रच रहा है। 10 करोड़ से अधिक खर्च सिर्फ लाइव प्रसारण पर रामलीला को अधिक से अधिक रामभक्तों तक पहुँचाने के लिए लाइव प्रसारण पर ही इस वर्ष 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया गया। यह प्रसारण आराधना टाटा प्ले, शेमारू मी, VI ऐप, एयरटेल, शेमारू भक्ति यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेजों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हुआ। अकेले शेमारू भक्ति यूट्यूब चैनल पर 8 करोड़ से अधिक लोगों ने इसे देखा। विभिन्न प्लेटफॉर्म पर दर्शक संख्या (लाइव) आराधना टाटा प्ले – 2 करोड़ शेमारू मी – 4 करोड़ VI ऐप – 5 करोड़ शेमारू भक्ति (यूट्यूब) – 8 करोड़ शेमारू भक्ति धाम (यूट्यूब) – 7 करोड़ फेसबुक पेज – 5 करोड़ अन्य यूट्यूब प्लेटफॉर्म – 5 करोड़ शेमारू आराधना टीवी – 7 करोड़ टाटा प्ले – 7 करोड़ Videocon – 5 करोड़ एयरटेल – 3 करोड़ डिश टीवी – 4 करोड़ लगातार बढ़ती लोकप्रियता गौरतलब है कि कोरोना काल से शुरू हुई अयोध्या की डिजिटल रामलीला ने हर वर्ष दर्शकों के नए कीर्तिमान बनाए हैं। 2020 – 16 करोड़ 2021 – 20 करोड़ 2022 – 25 करोड़ 2023 – 40 करोड़ 2024 – 41 करोड़ 2025 – 62 करोड़ (Google के आंकड़ों के अनुसार) योगी सरकार और संस्कृति मंत्रालय का योगदान इस सपने को साकार करने में उत्तर प्रदेश सरकार की अहम भूमिका रही। 2020 में जब रामलीला शुरू हुई थी, उस समय के पर्यटन व संस्कृति मंत्री नीलकंठ तिवारी ने इस भव्य आयोजन का शुभारंभ किया था, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे वैश्विक स्तर तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया। रामलीला समिति के संस्थापक सुभाष मलिक और शुभम मलिक ने इस आयोजन को डिजिटल क्रांति का प्रतीक बना दिया। अयोध्या बनी विश्व की सांस्कृतिक राजधानी रामनगरी अयोध्या में मंचित यह रामलीला अब केवल भारत की नहीं रही बल्कि पूरी दुनिया की रामलीला बन चुकी है। भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूएई, सऊदी अरब, क़तर, ओमान, बहरीन, कुवैत, मॉरीशस, फ़िजी, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, केन्या, नाइजीरिया, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड्स, रूस, कनाडा, अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देशों में करोड़ों रामभक्तों ने इसे देखा। वैश्विक स्तर पर रामभक्ति का संदेश अयोध्या की रामलीला ने साबित कर दिया कि श्रीराम की कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्व को जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु है। योगी सरकार के सहयोग और डिजिटल तकनीक के संगम ने रामलीला को विश्व स्तर पर पहुँचाकर भारतीय संस्कृति की अद्भुत ध्वजा फहराई है। अयोध्या की रामलीला में सितारों का चमका जादू, अद्भुत अभिनय से बना यादगार आयोजन श्रीराम की नगरी अयोध्या में आयोजित भव्य रामलीला इस वर्ष सितारों की जगमगाहट से और भी खास बन गई। बॉलीवुड और टीवी जगत के दिग्गज कलाकारों ने अपने अद्भुत अभिनय से इस आयोजन को यादगार बना दिया। प्रमुख भूमिकाओं में दिग्गज कलाकार मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री ने माता सीता की भूमिका निभाई। विंदू दारा सिंह ने अपनी दमदार अदाकारी से हनुमानजी का किरदार जीवंत कर दिया। खलनायकी अंदाज के लिए प्रसिद्ध शाहबाज खान ने रावण की भूमिका निभाई।वरिष्ठ अभिनेता अनिल धवन ने विभीषण का किरदार निभाया। हास्य अभिनेता सुनिल पाल ने नारदमुनि बनकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा मनोज तिवारी, रवि किशन, राकेश बेदी, रजा मुराद, अशरानी, अवतार गिल, रितु शिवपुरी, शीबा और अरुण बक्शी ने भी अपने-अपने किरदारों से रामलीला को और भव्यता प्रदान की। मिस यूनिवर्स का भी विशेष योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनी इस रामलीला में मिस यूनिवर्स 2024 और 2025 ने भी विशेष प्रस्तुति देकर इस आयोजन को नई ऊँचाइयाँ दीं। प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ष चिठ्ठी लिखकर अयोध्या की रामलीला समिति को अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएँ भेजते हैं। इस परंपरा ने इस आयोजन के महत्व और पवित्रता को और बढ़ा दिया हैं।

करूर हादसा और राजनीति: HC ने CBI जांच को नकारा, रैलियों में सुरक्षा नियमों को किया जोर

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चेन्नई  मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राजनीतिक रैलियों के लिए सख्त एसओपी का सुझाव दिया। साथ ही, कोर्ट ने अभिनेता-राजनेता विजय की करूर रैली में पिछले महीने हुई भगदड़ की सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया। करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। एम धंदापानी और एम जोतिरमन की पीठ ने भाजपा नेता उमा आनंदन की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर कार्यवाही करने से इनकार कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि यदि जांच ठीक से नहीं की जाती है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस अदालत को राजनीतिक अखाड़े की तरह न समझें। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़ित व्यक्ति इस अदालत में आते हैं, तो हम उन्हें बचाएंगे। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले वह करूर में 27 सितंबर की घटना की जांच को उसके वर्तमान प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ने दें। भाजपा नेता ने घटना की सीबीआई से जांच कराने के लिए हाई कोर्ट से निर्देश मांगा था और दावा किया था कि ये मौतें कथित सरकारी उदासीनता के कारण हुई हैं। हाई कोर्ट ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कुछ याचिकाओं में पीड़ितों के लिए घोषित मुआवजे में वृद्धि की मांग की गई थी। पीठ ने रैलियों या बैठकों के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने और राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट आयोजनों की अनुमति न देने के तमिलनाडु सरकार के सुझाव पर गौर किया। अदालत ने सुझाव दिया कि भविष्य में जब ऐसी राजनीतिक रैलियां या बैठकें निर्धारित स्थानों पर आयोजित की जाएं तो सरकार और राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां पेयजल और स्वच्छता की उचित व्यवस्था हो। पीठ ने यह भी कहा कि भगदड़ की संभावना को कम करने के लिए निकास मार्ग और पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। टीवीके पार्टी की रैली में हुई भगदड़ ने राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना को लेकर पुलिस ने पार्टी के राज्य महासचिव बूसी आनंद पर मामला दर्ज किया है। विजय ने इस दुखद घटना के पीछे साजिश का आरोप लगाया, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विरोधी दलों पर त्रासदियों का फायदा उठाकर चुनावी लाभ लेने का आरोप लगाया।