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अवकाश के दिन बिजली बिल भुगतान आसान: खुलेंगे विशेष भुगतान केन्द्र

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भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत 07 अक्टूबर (महर्षि वाल्मीकी जयंती), 21 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा), समस्त शनिवार (04, 11, 18 एवं 25 अक्टूबर) तथा समस्त रविवार (05, 12, 19 एवं 26 अक्टूबर)को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्य क्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्च दाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल ऐप से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

कृषि क्षेत्र को नई ताकत: मुख्यमंत्री ने मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना को सराहा

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के लिए हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रदेश के राजगढ़ जिले की 'मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना' क्षेत्र की समृद्घि और किसानों की खुशहाली का आधार बन रही है। इस अनूठी परियोजना से जहां हर खेत में पानी पहुंच रहा है, वहीं उद्योगों को पानी मिलने और पेयजल की उपलब्धता ने नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। इससे आम-जीवन सुखमय हो रहा है। "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर आधारित विश्व की अनूठी परियोजना यह परियोजना "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" प्रणाली पर आधारित विश्व की अनूठी सिंचाई परियोजना है, जो मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा को पूरा कर रही है। न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से अपितु विदेशों के प्रतिनिधि दल भी आकर इसका अध्ययन कर रहे हैं। परियोजना को जल-संसाधन प्रबंधन के लिए भारत सरकार का प्रतिष्ठित 'सीबीआईपी' पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रधानमंत्री की 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' की अवधारणा हुई फलीभूत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा दी. उनकी इस अवधारणा पर कार्य करते हुए हमारे इंजीनियर्स ने सिंचाई की अति आधुनिक तकनीकी "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर काम करना प्रारंभ किया और उसका सुपरिणाम है 'मोहनपुरा कुंडलिया सिंचाई परियोजना'। इस सिंचाई परियोजना के माध्यम से न केवल 80% पानी बांध से किसानों के खेतों तक पहुंचता है, अपितु ऊंचे खेतों पर भी पानी आसानी से पहुंच जाता है. इसमें लगा 'स्काडा' (SCADA) आधारित ऑटोमेशन यह तय करता है कि फसलों की आवश्यकता के अनुसार किस क्षेत्र में कितना पानी पहुंचाना है। यह विश्व की अपनी तरह की अनूठी परियोजना है और आधुनिक युग की आवश्यकता भी, जब पानी की एक-एक बूंद का उपयोग आवश्यक है। नेवज नदी पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध बनाकर शुरू की गई इस परियोजना से भूमिगत पाइप से सीधे खेत तक दबाव के साथ पहुंचाती है और ऊंचाई वाले खेत में भी पानी आसानी से पहुंचता है। इसके सेंसर और ऑटोमेशन से पानी का वितरण नियंत्रित होता है। यह क्रांतिकारी सोच थी, जिसने सूखाग्रस्त राजगढ़ जिले की किस्मत बदल दी। परियोजना के अंतर्गत 26 हजार किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है, इतनी लंबी प्रेशराइज्ड पाइप लाइन भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में एक मिसाल है। इसे जोड़ने के लिए 20 बड़े पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जो पानी को दबाव के साथ पाइप लाइन में भेजते हैं और पानी ऊंचे-नीचे खेतों तक आसानी से पहुंचता है। हर आउटलैट से लगभग एक से सवा हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। 'स्काडा' आधारित ऑटोमेशन सिस्टम द्वारा पूरी प्रणाली को कंप्यूटर और सेंसर्स से जोड़ा गया है, जिससे कंट्रोल रूम से तय किया जा सकता है कि किस क्षेत्र को कितना पानी पहुंचाना है। केन्द्रीकृत पंपिंग प्रणाली से हर साल लगभग 69 मिलियन यूनिट बिजली की बचत होती है। इसकी एक और विशेषता यह है कि इसमें 'ला-रा' नैटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें लगभग 1.5 लाख सेंसर्स और कंट्रोलर एक साथ जोड़े गए हैं, जो सौर ऊर्जा से चलते हैं। पंपिंग स्टेशर्न में लगे 'वैरिएबल फ्रीकवैन्सी ड्राइव्ज' फसलों की जरूरत और मौसम के अनुसार पानी का दबाव और मात्रा तय करते हैं। यह अत्यधिक आधुनिक सिंचाई प्रणाली आज पूरे विश्व के लिए पानी के इष्टतम उपयोग का अनूठा उदाहरण बन गई है।  

स्कॉलरशिप अलर्ट: सरकार दे रही है मासिक आर्थिक सहायता, अभी करें आवेदन

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कासगंज राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा की तिथि शासन स्तर से बढ़ा दी गई है। यह परीक्षा अब नौ अक्टूबर को होगी। इसके लिए आनलाइन आवेदन चार अक्टूबर तक किए जाएंगे। कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों को अभी से तैयारियां में जाने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृति योजना परीक्षा 2026-27 की लिखित परीक्षा जिले के सभी परीक्षा केंद्रों पर संपन्न होगी। परीक्षा की तिथि में परिवर्तन किया गया है। नौ अक्टूबर को परीक्षा का जिले में आयोजन होगा। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि चार अक्टूबर कर दी गई है। निर्धारित तिथि पर आनलाइन आवेदन किए जाएंगे। आवेदनों की जांच एवं संशोधन के लिए पांच से सात अक्टूबर तक तिथि का निर्धारण किया गया है। कक्षा सात की परीक्षा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीण करने वाले विद्यार्थी पात्र माने जाएंगे। एससी और एसटी के लिए पांच प्रतिशत की छूट होगी। राजकीय, शासकीय सहायता प्राप्त स्थानीय निकाय के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा आठ के परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। जिन अभिभावकों की वार्षिक आय तीन लाख 50 हजार से अधिक होगी उन्हें अपात्र माना जाएगा। इस योजना के तहत छात्रवृत्ति के रूप में एक हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उत्तीर्ण प्रतिभागी को दिए जाएंगे। बीएसए सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि परीक्षा के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिक से अधिक आवेदन कराएं जा रहे हैं। खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।

लाखों की लागत से बने सामुदायिक के शौचालयों में कई साल से लटक रहे ताले

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लाखों की लागत से बने सामुदायिक के शौचालयों में कई साल से लटक रहे ताले जनकपुर जनपद क्षेत्र मिली जानकारी के अनुसारभरतपुर में कई  सामुदायिक शौचालय अपूर्ण हैं क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्माण तो हुआ है, लेकिन संचालन और रखरखाव की कमी है,जिससे कई शौचालयअनुपयोगी हैंभ्रष्टाचार के कारण भी निर्माण कार्य बाधित हुआ है, जिसके चलते शौचालयों में ताले लगे हैं एमसीबी जिला का है जहां अविभाजित कोरिया जिला अंतर्गत जनपद क्षेत्र भरतपुर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुल 53 सामुदायिक शौचालय की स्वीकृति दिनांक 8 दिसम्बर 2020 को मिली थी। जहां प्रति सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की लागत 4 लाख 40 हजार रूपए थी। जिसमें 3 दुकान के साथ सामुदायिक शौचालय भी बनना था। जिसकी निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत थी। कागज़ों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर राशि ख़र्च कर दिया गया। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। क्षेत्र के  लोगों ने बताया कि जहां जनपद क्षेत्र भरतपुर अंतर्गत लगभग 50 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य आज भी अधूरा है क्योंकि किसी सामुदायिक शौचालय में पानी की सुविधा नहीं है क्योंकि किसी सामुदायिक शौचालय में पानी की टंकी नहीं लगाई गई। और बिना पानी के शौचालय का होना व्यर्थ है। जनकपुर,ककलेडी,मसर्रा,बेनीपुरा,चुटकी,तिलौली,चांटी, च्यूल, सेमरिया,जैंती,बरहोरी,फूलझर,कुवांरपुर,खमरौध , ,जुईली,घघरा , अक्तवार जैसे कई ग्राम पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य आज भी अधूरा है। इनका कहना है मुख्य कार्यपालन अधिकारी भरतपुर अजय सिंह राठौर का कहना है कि जांच करवाता हूं। निर्माण के समय जो सचिव ग्राम पंचायत पर पदस्थ थे उनसे जानकारी लेकर कार्य पूर्ण करवाने को कहा जाएगा।

चारधाम यात्रा का समापन करीब: गंगोत्री-यमुनोत्री बंद होने की तिथि पढ़ें तुरंत

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उत्तराखंड  उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की तिथियां पंचांग के अनुसार निर्धारित कर दी गई हैं। गंगोत्री धाम: 22 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए 22 अक्तूबर को बंद किए जाएंगे। कपाट अन्नकूट पर्व पर, सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में विधिविधान के साथ बंद होंगे।  कपाट बंद होने के बाद, मां गंगा की भोगमूर्ति को विग्रह डोली में आर्मी बैंड और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए रवाना किया जाएगा। डोली 22 अक्तूबर की रात्रि में मार्कडेंय मंदिर में विश्राम करेगी और अगले दिन, 23 अक्तूबर को दोपहर में मुखबा गांव पहुंचेगी, जहां गंगा मंदिर में मूर्ति स्थापित की जाएगी।  गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि कपाट बंद करने की तिथि और मूहूर्त नवरात्र के शुभ अवसर पर पंचांग के अनुसार निकाले गए हैं। यमुनोत्री धाम: भैयादूज पर 23 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज के शुभ अवसर पर 23 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरूषोत्तम उनियाल ने बताया कि कपाट बंद करने का मूहूर्त दो अक्तूबर को विजयदशमी के पर्व पर पंचांग के अनुसार निकाला जाएगा। इन तिथियों की घोषणा के साथ ही, प्रशासन और मंदिर समितियों ने यात्रा के अंतिम चरण की तैयारियों को तेज कर दिया है। लाखों तीर्थयात्रियों की आस्था के केंद्र दोनों धामों के कपाट बंद होने के बाद, अगले छह माह तक श्रद्धालु मां गंगा और मां यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थलों पर कर सकेंगे।  

SBI कार्ड से जुड़ा बड़ा बदलाव! 1 नवंबर 2025 से आएंगे Extra चार्ज, जानें पूरी डिटेल

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नई दिल्ली  भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने क्रेडिट कार्ड फीस स्ट्रक्चर और चार्ज में बड़ा बदलाव किया है। यह नया बदलाव 1 नवंबर 2025 से देशभर में लागू होगा। नया चार्ज केवल कुछ चयनित ट्रांजेक्शन्स पर लागू होगा, जैसे एजुकेशनल पेमेंट और वॉलेट लोड, और केवल उन ग्राहकों पर, जो SBI क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर पेमेंट करते हैं। एजुकेशन पेमेंट पर नया चार्ज अगर ग्राहक अपने SBI कार्ड से थर्ड पार्टी ऐप्स जैसे CRED, Cheq और MobiKwik का इस्तेमाल करके एजुकेशन से जुड़ी पेमेंट करता है, तो 1% का चार्ज लगेगा। उदाहरण के लिए, 1000 रुपये के पेमेंट पर 10 रुपये का चार्ज देना होगा। हालांकि, यदि पेमेंट सीधे स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी को किया जाता है, तो यह शुल्क नहीं लगेगा। वॉलेट लोड पर चार्ज SBI कार्ड से किसी भी वॉलेट में 1000 रुपये से अधिक राशि जमा करने पर 1% का चार्ज लागू होगा। बैंक ने बताया कि एजुकेशन पेमेंट चार्ज MCC कोड 8211, 8220, 8241, 8244, 8249, 8299 वाले थर्ड पार्टी मर्चेंट्स पर ही लागू होगा। SBI कार्ड के अन्य चार्ज   SBI कार्ड कई अन्य ट्रांजेक्शन्स पर भी शुल्क लेता है, हालांकि इनमें हाल ही में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्रमुख शुल्क इस प्रकार हैं: कैश पेमेंट चार्ज: 250 रुपये पेमेंट अप्रूवल चार्ज: 2% (कम से कम 500 रुपये) चेक पेमेंट शुल्क: 200 रुपये डोमेस्टिक ATM कैश एडवांस: 2.5% (न्यूनतम 500 रुपये) इंटरनेशनल ATM कैश एडवांस: 2.5% (न्यूनतम 500 रुपये) कार्ड बदलने का शुल्क: 100–250 रुपये, आरम कार्ड के लिए 1500 रुपये विदेश में इमरजेंसी कार्ड बदलना: वीजा के लिए न्यूनतम $175, मास्टरकार्ड के लिए $148 अतिरिक्त लेट पेमेंट चार्ज यदि न्यूनतम ड्यू अमाउंट (MAD) लगातार दो बिलिंग सर्किल तक तय तारीख तक नहीं भरा जाता है, तो 100 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा। यह शुल्क तब तक जारी रहेगा जब तक कि MAD का भुगतान नहीं किया जाता।  

गजराज की निगरानी अब होगी हाईटेक! गज रक्षक ऐप में सायरन, नोटिफिकेशन और ऑफलाइन मोड जैसी सुविधाएं

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उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ तो है ही, लेकिन पिछले कुछ सालों से ये हाथियों का भी गढ़ बन चुका है. हाथियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. हाथियों ने बांधवगढ़ को अपना स्थाई अड्डा बना लिया है. लगभग पूरे शहडोल संभाग में हाथियों की मूवमेंट देखने को मिलती है. साल भर वे धमाचौकड़ी मचाते नजर आते हैं. शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सभी जिले हाथियों से प्रभावित हैं. हाथियों के मूवमेंट के दौरान अक्सर ही हाथी-मानव द्वंद की स्थिति बनती है. ऐसे में हाथियों के हर एक मूवमेंट के बारे में जानकारी के लिए अब इनकी निगरानी भी हाईटेक होने जा रही है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है, गज रक्षक अब हाथियों से करेगा रक्षा. इस पहल से हाथी-मानव संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी. क्या है गज रक्षक ऐप? गज रक्षक ऐप, जैसा नाम वैसा काम. हाथियों से रक्षा के लिए ये ऐप तैयार किया गया है. वैसे तो इस ऐप की लॉन्चिंग विश्व बाघ दिवस 29 अगस्त को भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की गई थी. इस मोबाइल एप्लिकेशन को वन विभाग मध्य प्रदेश, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट और कल्पवैग कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है. बांधवगढ़ में 26 से 29 सितंबर तक इस ऐप की ट्रेनिंग वनकर्मियों को दी जा चुकी है. गज रक्षक ऐप के फायदे गज रक्षक ऐप के फायदों के बारे में बताते हुए बांधवगढ़ के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने कहा, "इस ऐप के माध्यम से हाथियों की रियल टाइम लोकेशन की जानकारी लगेगी. उनके मूवमेंट और व्यवहार की जानकारी भी ये ऐप उपलब्ध कराएगा. गांव के नजदीक हाथियों के आते ही इसके माध्यम से समय रहते अलर्ट मिल जाएगा, जिससे हाथी मानव द्वंद को रोकने में सहायता मिलेगी. इससे हाथियों की मॉनिटरिंग आसान होगी." मूवमेंट ट्रैक किया जा सकेगा खेतों में लगी फसल की जानकारी से लेकर हाथी जिन जगहों पर लगातार मूवमेंट करते हैं. उनके रोजमर्रा के स्थलों और विद्युत लाइन की जानकारी इकट्ठा करके रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी. जिससे हाथी-मानव द्वंद को कम किया जा सकेगा. इसके अलावा हाथियों की करेंट लोकेशन मिलते ही स्थानीय जनसमुदाय को व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देकर उन्हें सतर्क किया जा सकेगा. हाथियों के लिए हाईटेक ऐप गज रक्षक एक हाईटेक ऐप है, जिससे हाथियों की निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी. इसमें एसएमएस अलर्ट, वॉइस कॉल, पुश नोटिफिकेशन, सायरन, और ऑफलाइन मोड जैसी सुविधाएं भी दी गई है, जो हाथियों की निगरानी में बहुत कारगर साबित हो सकती हैं. ऐप से हाथियों पर निगरानी रखने वाला व्यक्ति उनकी यथास्थिति के बारे में जानकारी साझा करेगा. साथ ही हाथियों की फोटो खींचकर और करंट लोकेशन ऐप पर अपलोड करेगा. साथ ही बताएगा कि हाथी अकेला विचरण कर रहा है या फिर झुंड में है. यह जानकारी हाथियों की करंट लोकेशन से 10 किलोमीटर के दायरे में ऐप यूजर्स को मिल जाएगी. इससे हाथी-मानव द्वंद को कम करने और हाथियों के संरक्षण में सहयोग मिलेगा. बांधवगढ़ सहित अन्य जिलों के वन स्टाफ को ट्रेनिंग गज रक्षक ऐप को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ट्रेनिंग जारी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के कई जिलों के कर्मियों को ट्रेंड किया जा रहा है. खासकर उन इलाके के वनकर्मियों को जहां हाथियों का मूवमेंट अधिक रहता है. जैसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संजय दुबरी टाइगर रिजर्व, नॉर्थ शहडोल, साउथ शहडोल, अनुपपुर, सीधी, सिंगरौली, सतना, उमरिया, डिंडोरी के वन कर्मचारियों को इस ऐप की ट्रेनिंग दी जाएगी. बांधवगढ़ में कितने हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में काफी संख्या में हाथी है. वैसे तो यहां पहले भी हाथी आते थे, लेकिन अब हाथियों ने इसे अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है. साल 2018 में 40 हाथियों का एक झुंड आया था फिर वो वापस नहीं गया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में स्थायी रूप से रहने लगा है. इन हाथियों की संख्या अब लगभग 60 से 65 तक पहुंच गई है, जो लगातार बढ़ती ही जा रही है. फसलों के समय में ये हाथी ग्रामीण इलाकों में भी कभी-कभी मूव करते हैं. हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया एक्सपर्ट बताते हैं "हाथी या फिर कोई भी वन्य प्राणी हो, वह वहीं रुकेगा जहां उसे पीने के लिए पर्याप्त पानी, खाने को भोजन मिले और रहने को सुरक्षित आवास मिले. जहां ये सुविधाएं मौजूद होती है, जंगली जानवर अपना बसेरा बना लेते हैं. हाथियों के लिए ये तीनों ही चीजें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आसानी से मिल रही है. इसलिए हाथियों के लिए यह जगह फेवरेट हो गई है. इसके अलावा वे वहां सुरक्षित भी महसूस करते हैं. " हाथियों का गढ़ बना शहडोल शहडोल संभाग जो आदिवासी बाहुल्य है. इसमें शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सहित तीन जिले आते हैं. यहां जंगल बहुत घना है और प्राकृतिक संपदा से भरपूर है. यही वजह है कि इस इलाके में तरह-तरह के वन्य प्राणी और दुर्लभ पक्षी रहते हैं. फिलहाल ये तीनों जिले हाथियों के गढ़ बन चुके हैं. यहां साल भर हाथियों का मूवमेंट रहता है. ये जिले छत्तीसगढ़ राज्य से सटे हुए हैं. इस कारण वहां से भी हाथियों की मूवमेंट होती रहती है. 

इंदौर में मेट्रो ट्रायल रन जल्द, लेकिन यात्रियों को सफर के लिए 1 साल और इंतजार

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इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन अब तक 13 किलोमीटर का हो चुका है। कुल 17 किलोमीटर तक इसका ट्रायल रन रेडिसन चौराहे तक होगा। दीपावली के बाद यह ट्रायल किया जाएगा, लेकिन इसके संचालन में अभी समय लगेगा, क्योंकि मेट्रो के स्टेशन अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। अफसरों की प्राथमिकता चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा स्टेशन, सुखलिया ग्राम स्टेशन, विजय नगर और रेडिसन चौराहा स्टेशन बनाने की है। फरवरी तक इन स्टेशनों का काम समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगले साल तक मेट्रो का संचालन 17 किलोमीटर हिस्से में किया जा सके। यहां तक मेट्रो के चलने के बाद यात्रियों के लिए भी सुविधा होगी। सुपर काॅरिडोर की आईटी कंपनी व काॅलेजों में पढ़ने वाले विजय नगर व आसपास के हिस्सो में रहते हैं। घट गई यात्री, एक फेरे में दस-पंद्रह यात्री फिलहाल मेट्रो का संचालन छह किलोमीटर हिस्से में हो रह है, लेकिन मेट्रो कार्पोरेशन को इससे आय नहीं हो रही है, क्योंकि एक बार के फेरे में दस से पंद्रह यात्री ही सफर कर रहे हैं। इस कारण अब मेट्रो ट्रेन के संचालन में फेरबदल भी किया गया है। चार माह पहले जब इंदौर में मेट्रो का संचालन शुरू हुआ था तो अधिकतम 25 हजार तक एक दिन में यात्रियों ने सफर किया था, लेकिन अब यात्रियों की संख्या 50 से 100 तक सिमट गई है। इस कारण मेट्रो के संचालन की लागत भी नहीं निकल पा रही है, जबकि मेट्रो के संचालन और स्टेशन पर 300 से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाॅफ रखा गया है। दरअसल शहरवासी मेट्रो को देखने के लिए उसमे सफर कर रहे थे। अभी जिस हिस्से में मेट्रो का संचालन हो रहा है वहां न तो बसाहट है और न ही कोई औद्योगिक क्षेत्र। इस कारण वहां मेट्रो को वास्तविक यात्री नहीं मिल रहे है। अभी भी लोग जरुरत के बजाए शौकिया तौर पर मेट्रो के सफर का आनंद लेने जा रहे हैं। मेट्रो ट्रेन-फैक्ट फाइल इंदौर मेट्रो एयरपोर्ट, दो बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन को कवर करेगी। शहर के मध्य हिस्से के ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी। हर 30 मिनट के अंतर से मेट्रो ट्रेन चलेगी।शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। फिलहाल दस जगह स्टेशनों का काम चल रहा है। मेट्रो ट्रेन का संचालन  फिलहाल छह किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेन का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री संवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई है। जिसे यात्री पकड़ कर सफर कर सकते है। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आतंरिक रुप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।     

नुनहाई का अनोखा दुर्गा उत्सव: मां का श्रृंगार 10 करोड़ के आभूषणों से, विदाई 5 करोड़ के चांदी रथ में

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जबलपुर नुनहाई की दुर्गा प्रतिमा का 10 करोड़ के जेवर से श्रृंगार किया गया है. जिस रथ में माता की विदाई होती है, वह 350 किलो चांदी का बना है, जिसकी बाजार में कीमत 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है. जबलपुर के इस क्षेत्र में 157 सालों से दुर्गा उत्सव मनाया जा रहा है. नवरात्रि के दौरान सराफा का यह कारोबारी क्षेत्र 9 दिनों तक माता की भक्ति में डूब जाता है. 157 सालों से बैठा रहे दुर्गा प्रतिमा जबलपुर में दुर्गा उत्सव का इतिहास 150 साल से अधिक पुराना है. सराफा इलाके में रहने वाले विनीत सोनी नुनहाई दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष हैं. विनीत बताते हैं कि उनकी दुर्गा उत्सव समिति ने पहली बार मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना 1867 में की थी. तब से यह सिलसिला रुका नहीं है, बीते 157 साल से इसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की जा रही है. देवरानी-जेठानी माता की प्रतिमा जबलपुर के सराफा इलाके में 2 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होती हैं. एक सर्राफ की और दूसरी नुनहाई की. यह लगभग एक ही समय शुरू हुई थी. इन दोनों को ही नगर सेठानी कहा जाता है और दोनों में देवरानी-जेठानी का संबंध माना जाता है. इसकी वजह यह है कि सड़क के दोनों तरफ ये प्रतिमाएं बैठाई जा रही हैं. इन दोनों दुर्गा उत्सव की स्थापना लगभग 150 साल पहले ही हुई थी. बुंदेली शैली की प्रतिमा विनीत सोनी ने बताया "दुर्गा उत्सव में अलग-अलग किस्म की प्रतिमाएं रखी जाती हैं, लेकिन उनके नुनहाई वाली माता की प्रतिमा का स्वरूप कभी नहीं बदला. वे हमेशा ही बुंदेली शैली में ही बनाई गई. इस मूर्ति को भी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार बनता चला आ रहा है." 10 करोड़ के गहनों से श्रृंगार विनीत सोनी का कहना है कि माता के श्रृंगार में 1 किलो से ज्यादा सोने के गहने चढ़ाए जाते हैं. इसमें बुंदेली शैली के कई ऐसे आभूषण हैं जिनका चलन सालों पहले था. अब इन्हें कोई नहीं पहनता है, लेकिन हम आज भी उन्हीं आभूषणों से माता का श्रृंगार करते हैं. आज सोने के दाम 1 लाख रुपए तोला से ज्यादा है. ऐसी स्थिति में केवल माता का श्रृंगार ही 10 करोड़ रुपए से ज्यादा के जेवर से होता है. 5 करोड़ के रथ से मां की विदाई बात केवल श्रृंगार पर ही खत्म नहीं हो जाती. नुनहाई की माता की विदाई जिस रथ से होती है. उस रथ की कीमत 5 करोड़ रुपये है. इसे 350 किलो चांदी से बनाया गया है. आज चांदी 1 लाख 35 हजार रुपए किलो है, ऐसी स्थिति में इस रथ की कीमत 5 करोड़ रुपए हो जाती है. साल भर यह रथ सुरक्षा में रखा रहता है और अब इसे माता की विदाई के लिए तैयार किया जा रहा है. सुरक्षा में लगे 4 गनमैन यूं तो जिस स्थान पर इस पंडाल की स्थापना की जाती है. वह क्षेत्र सराफा में है. यहां सड़क छोटी है और आसानी से यहां से कोई भाग नहीं सकता, इसके बावजूद माता के पंडाल में सरकार की ओर से पूरे 9 दिन तक चार गनमैन तैनात रहते हैं. आस्था का केंद्र सराफा बाजार 9 दिनों तक लगभग बंद रहता है. दुकानदार दुकान खोलते जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर समय वे दुर्गा उत्सव की व्यवस्थाओं में ही लगे रहते हैं. इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की बेटियां दुर्गा उत्सव में अपने ससुराल से मायके आती हैं. जबलपुर शहर का आम आदमी भी भारी भीड़ के बावजूद यहां दर्शन करने जरूर आता है. रजनी राजपूत ने बताया "यह प्रतिमा बेहद सुंदर है और जिस भावना से इस क्षेत्र के लोग देवी प्रतिमा की स्थापना करते हैं. वह भावना सभी को प्रभावित करती है." बड़ी कृपा है माता की इस क्षेत्र के लोग माता को अपनी बेटी मानते हैं, और इन्हें कंधे पर उठाकर लाते हैं और विदाई भी ऐसी होती है कि देखने वालों की आंखों में आंसू आ जाते हैं. पूरी सड़क पर फूल बिछा दिए जाते हैं और आसपास के हर घर में ऊपर से फूलों की बरसात होती है. 9 दिनों का यह त्यौहार इस कारोबारी इलाके को भक्ति से भर देता है. विनीत सोनी कहते हैं "माता की ही कृपा है कि इस क्षेत्र में लोग खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं."  

अटल प्रगति पथ फिर अधर में: नाम बदला, सर्वे बदला, लेकिन काम अब भी ठप

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Atal Pragati Path once again in limbo: Name changed, survey changed, but work still stalled मुरैना। Atal Pragati Path once चंबल अंचल के मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों को उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ने वाला अटल प्रगति पथ (पूर्व में चंबल एक्सप्रेस-वे) अब तक सरकारी असमंजस में उलझा हुआ है। 2018 से लेकर 2025 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना का न तो कोई ठोस स्वरूप तय हो पाया है और न ही निर्माण का काम धरातल पर उतरा है। अब तक इस परियोजना का पाँच बार नाम और तीन बार अलाइनमेंट बदला जा चुका है। सर्वे भी बदला, समाधान नहीं मिला Atal Pragati Path onceमार्च 2023 तक तीसरे चरण का भूमि अधिग्रहण सर्वे लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौखिक रूप से सर्वे रद्द करने के निर्देश दे दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक उस सर्वे को लिखित रूप से रद्द नहीं किया गया, जिससे कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं। नया सर्वे भी अधर मेंचौथे सर्वे के आदेश 2022 के अंत में दिए गए थे, लेकिन वह कभी शुरू ही नहीं हो पाया। 03 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले बजट में इस परियोजना की नए सिरे से घोषणा की थी और इसे 299 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित किया गया। जबकि पूर्व प्रस्तावित लंबाई 404 किलोमीटर थी। किसानों की ज़मीन अधर में Atal Pragati Path onceमार्च 2023 के रिकार्ड के अनुसार, 214 गांवों के 26448 किसानों की लगभग 1965 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित की गई थी। लेकिन सर्वे के निरस्त होने और लिखित आदेश न आने के चलते किसान न तो ज़मीन का नामांतरण करा पा रहे हैं और न ही बिक्री-रजिस्ट्री हो पा रही है। घड़ियाल सेंक्चुरी बनी बड़ी बाधाएक्सप्रेस-वे का पहला अलाइनमेंट चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी से होकर गुजरता था, जिस कारण वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति जताई। दूसरा और तीसरा अलाइनमेंट भी बीहड़ों और निजी खेतों से होकर गुजरता था, जिसे लेकर भारी विरोध हुआ। चौथा सर्वे अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। प्रशासन ने दी स्थिति स्पष्टता\”मार्च 2023 में शासन से निर्देश मिलने के बाद से कोई नई दिशा नहीं आई है। परियोजना की स्थिति पूर्ववत है। जैसे ही आदेश मिलेगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।\”— सीबी प्रसाद, अपर कलेक्टर, मुरैना Atal Pragati Path once , जिसे कभी चंबल एक्सप्रेस-वे के नाम से शुरू किया गया था, अब तक सिर्फ कागजों और घोषणाओं का प्रोजेक्ट बनकर रह गया है। ज़मीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और प्रशासनिक अस्पष्टता इसकी सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। यदि मोहन सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती, तो यह प्रोजेक्ट भी एक अधूरी योजना बनकर इतिहास में दर्ज हो जाएगा।