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रोहित की अंतिम चाल ने खोली पुरानी बातें, गंभीर से जुड़ी विवादित बातें और द्रविड़ की भूमिका

मुंबई  भारत ने जब इस साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी जीती तो टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ नहीं बल्कि गौतम गंभीर थे. इसके बावजूद रोहित शर्मा उस जीत का क्रेडिट कोच गौतम गंभीर को नहीं बल्कि राहुल द्रविड़ को दिया. अब कुछ लोग इसे वनडे कप्तानी छीने जाने से जोड़कर देख रहे हैं. दरअसल, मंगलवार की रात मुंबई में सीएट क्रिकेट रेटिंग पुरस्कार समारोह हुआ. जिसमें रोहित शर्मा ने माना कि पूर्व कोच राहूल द्रविड़ के कार्यकाल में बनाई गए प्लान में चलने की वजह से भारतीय टीम को चैंपियंस ट्रॉफी जीतने में मदद मिली. रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में भारत ने 2023 वनडे विश्व कप फाइनल में मिली हार से उबरते हुए 2024 टी-20 विश्व कप जीता. इसके बाद भारतीय टीम ने 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीती. रोहित ने सीएट क्रिकेट रेटिंग पुरस्कार समारोह के दौरान कहा:     मुझे वह टीम पसंद है और उसके साथ खेलना भी. हम सभी इस सफर में कई साल से थे. यह एक या दो साल का काम नहीं था. बहुत सालों से काम चल रहा था. हम कई बार ट्रॉफी जीतने के बहुत करीब पहुंचे लेकिन जीत नहीं सके. तभी सभी ने तय किया कि हमें कुछ अलग करना होगा और इसे देखने के दो तरीके हैं. ‘राहुल भाई को चैंपियंस ट्रॉफी जीत का क्रेडिट’ चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के लिए एक स्मृति चिन्ह पाने वाले रोहित ने कहा, ‘उस चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों ने यह सोचा कि कैसे मैच जीते जाए और कैसे खुद को चुनौती दी जाए और आत्मसंतुष्ट न हों तथा किसी भी चीज को हल्के में न लें. जब हम टी-20 विश्व कप की तैयारी कर रहे थे तो मुझे और राहुल भाई को इस प्रक्रिया से काफी मदद मिली. हमने उसे चैंपियंस ट्रॉफी में भी बरकरार रखा. कप्तानी छीने जाने पर भी बोले रोहित शर्मा? आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय वनडे टीम की कमान रोहित नहीं बल्कि शुभमन गिल के पास होगी. रोहित ने कहा, ‘मुझे जब भी मौका मिला मैंने तीनों प्रारूपों में अच्छा खेलने की कोशिश की. मुझे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना पसंद है. वहां क्रिकेट खेलना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. वहां खेलने का काफी अनुभव है तो पता है कि कैसे खेलना है. 2023 WC हार पर फ‍िर छलका रोहित का दर्द…  रोहित ने कहा- 2023 में भले ही हम फाइनल में जीत नहीं पाए, लेकिन हमने टीम के रूप में एक लक्ष्य तय किया था और हर किसी ने उसे पूरा किया. हिटमैन ने आगे कहा कि उन्हें सभी तीनों फॉर्मेट में खुद को साबित करने पर गर्व है और उन्हें पता है कि आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे में उनसे क्या उम्मीद की जा रही है. इस दौरे से पहले ही उनसे वनडे कप्तानी छीन ली गई है. रोहित, जिन्हें अब टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में शुभमन गिल से बदल दिया गया है, विराट कोहली के साथ ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में टीम का हिस्सा होंगे. यह सीरीज 19 अक्टूबर से शुरू होगी. ऑस्ट्रेल‍िया के ख‍िलाफ खेलना मुझे पसंद : रोहित  रोहित ने कहा- मुझे पर्सनली सभी फॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन करने पर गर्व है.  ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर उन्होंने कहा- मुझे उनके खिलाफ खेलना पसंद है. मुझे ऑस्ट्रेलिया में खेलना अच्छा लगता है. वहां क्रिकेट खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और लोग वहां इस खेल से बहुत प्यार करते हैं. ऑस्ट्रेलिया हर बार हमारे लिए एक अलग चुनौती पेश करता है. मैं वहां कई बार जा चुका हूं और जानता हूं कि क्या उम्मीद करनी चाहिए. उम्मीद है कि हम वहां वही करेंगे जो भारतीय टीम को करना चाहिए और नतीजा अपने पक्ष में लाएंगे.    

\’अदृश्य ट्रॉफी\’ के पीछे की कहानी आई सामने, जानिए भारत की जीत के अनोखे सेलिब्रेशन का राज

नई दिल्ली  एश‍िया कप 2025 का फाइनल 28 स‍ितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया. जहां टीम इंड‍िया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर 9वीं बार यह ख‍िताब अपने नाम किया. लेकिन भारत को एश‍िया कप जीतने के बावजूद ट्रॉफी या मेडल नहीं म‍िला, जिसके बाद टीम ने अदृश्य ट्रॉफी के साथ मॉक सेल‍िब्रेशन किया.  आख‍िर इसका आइड‍िया किसका था. किसने भारतीय टीम को ऐसा करने की सलाह दी थी. इस बारे में द‍िलचस्प खुलासा टीम इंड‍िया के म‍िस्ट्री स्प‍िनर वरुण चक्रवर्ती ने किया.  स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने मंगलवार (7 अक्टूबर) को CEAT अवॉर्ड्स में खुलासा किया कि भारत की एशिया कप जीत के बाद की सेल‍िब्रेशन अदृश्य ट्रॉफी संग मॉक सेलिब्रेशन का प्लान‍िंग तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का आइडिया था. दरअसल, भारतीय टीम को एशिया कप ट्रॉफी नहीं दी गई क्योंकि खिलाड़ियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था. भारत ने ट्रॉफी किसी अन्य अधिकारी से लेने का अनुरोध किया था, लेकिन यह मंजूर नहीं हुआ. नतीजतन, टीम को न तो विजेता मेडल मिले और न ही ट्रॉफी. इसके बाद दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब प्रेजेंटेशन सेरेमनी असफल हो गई, लेकिन भारतीय खिलाड़ी मैदान पर ही सेल‍िब्रेशन मनाने से नहीं रुके. अधिकारियों के चले जाने के बाद टीम ने पोडियम पर जाकर अपनी खुशी जताई. कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ट्रॉफी उठाने का अंदाज अपनाया और रोहित शर्मा के टी20 वर्ल्ड कप सेलिब्रेशन को भी रिपीट किया.  ट्रॉफी का इंतजार किया और फ‍िर ऐसे हुआ सेलिब्रेशन  वरुण चक्रवर्ती ने CEAT अवॉर्ड समारोह में खुलासा किया कि इस सेल‍िब्रेशन का आइडिया अर्शदीप का था. वरुण ने कहा- वास्तव में यह आइडिया अर्शदीप का था. हम ट्रॉफी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन हम सब जानते हैं कि वह कैसे हुआ. उन्होंने हंसते हुए कहा- मैं वहीं खड़ा था, उम्मीद कर रहा था कि ट्रॉफी आएगी, हम सब इंतजार कर रहे थे. लेकिन मेरे पास जो एकमात्र कप था, वह केवल कॉफी का कप था.  इसी समारोह में मेन्स T20I बैटर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड पाने वाले संजू सैमसन ने भी वरुण की भावनाओं को र‍िपीट किया. उन्होंने माना कि बिना ट्रॉफी के जश्न मनाना अजीब लगा, लेकिन टीम की सकारात्मकता ने माहौल को शानदार बना दिया.  सैमसन ने कहा- थोड़ा अजीब जरूर लगा, बिना ट्रॉफी के सेल‍िब्रेशन करना, लेकिन हमारे ड्रेसिंग रूम में बहुत पॉजिटिव माहौल है, अगर हमारे पास कुछ नहीं है, तब भी हम सेल‍िब्रेशन करते हैं जैसे हमारे पास सब कुछ हो, और हमने वही किया.  टीम इंड‍िया ने जब ट्रॉफी के साथ शेयर की थी फोटो भारतीय टीम ने एश‍िया कप जीतने के बाद एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अधिकारियों पर हल्का तंज करते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर अपनी जीत की तस्वीरें पोस्ट कीं. जिसमें वास्तविक ट्रॉफी की जगह ट्रॉफी इमोजी का इस्तेमाल किया गया. 

सुनियोजित नगरीय विकास के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना आवश्यक : मुख्यमंत्री का निर्देश

नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बनाएं कार्ययोजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कमजोर वर्ग की आवास योजनाओं पर दें विशेष ध्यान मेट्रोपालिटन सिटी के विकास पर संबंधित कलेक्टर्स दें अपने सुझाव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में नगरीय क्षेत्र के मुद्दों पर हुई चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने विजन-2047 में आबादी के हिसाब से नगरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। उनकी मंशा के अनुरूप प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का विकास भी सुनियोजित तरीके से हो सके इसके लिये जिलों में भी वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर की पीएम स्वनिधि योजना और स्वच्छ वायु इन्डेक्स में उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी डेवलपमेंट के समय तैयार किये गये ईडब्ल्यूएस आवास आवंटन में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिये कि कलेक्टर्स इस पर शीघ्र निर्णय लेकर इनका शत-प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित कराएं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बने गीता भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन तैयार करने का निर्णय लिया है। यह भवन धार्मिक रूप से तैयार नहीं किये जा रहे हैं बल्कि इनका निर्माण आधुनिक टाउन हॉल के तौर पर किया जा रहा है। यह टाउन हॉल शहर की सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करें, साथ ही इनमें डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी हो। भवनों का निर्माण एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाये। धार्मिक स्थलों का तैयार हो मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सतना जिले में चित्रकूट के समग्र विकास के लिये कार्ययोजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर साडा (स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के साथ मिलकर चित्रकूट का विकास करें। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर समेत अनेक धार्मिक स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ नर्मदा परिक्रमा मार्ग का भी विकास किया जा रहा है। इन धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसलिये आवश्यक है कि इनका समग्र विकास निर्धारित समय में पूरा हो। टीडीआर में मुआवजा राशि का भुगतान जल्द हो शहरी क्षेत्रों में टीडीआर के तहत अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा दिया जा रहा है। इनमें शहरी क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि टीडीआर में अधिग्रहित भूमि के बदले संबंधित को मुआवजा राशि का भुगतान समय पर किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किये जाने पर जोर दिया। मेट्रोपालिटन सिटी का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में भोपाल इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र तैयार करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर्स प्लान तैयार करें कि कैसे रोजगार, औद्योगिकीकरण, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में मेट्रोपालिटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार बिजली,पानी और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिये हैं। मध्यप्रदेश विजन@2047 नगरीय विकास एवं आवास के अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे ने बताया‍कि वर्ष 2047 तक प्रत्येक नागरिक को सर्वसुविधा युक्त पक्का आवास और शहरों को मलिन बस्ती मुक्त किया जाना है। स्वच्छता के मामले में अपशिष्ट प्रबंधन, नवकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी का समावेश किया जाना है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन द्वारा सुरक्षित एवं सतत जल आपूर्ति और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 में 8 लाख 69 हजार 531 आवास तैयार किये जा चुके हैं। योजना में 76 हजार 300 से अधिक आवास पूर्ण किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स अधूरे पड़े आवासों को जल्द पूरा करें। प्रदेश में पीएमएवाय 2.0 में 10 लाख आवास तैयार किये जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेश के 100 प्रतिशत आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। निकायों को 7115 कचरा संग्रहण वाहन दिये गये हैं। क्लीन एयर प्रोग्राम में अच्छे काम के लिये इंदौर, जबलपुर और देवास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना में वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। कॉन्फ्रेंस में एयर क्वालिटी सुधार कार्यक्रम पर इंदौर कलेक्टर, पीएमएवाय पर ग्वालियर कलेक्टर और जल संवर्धन में श्रेष्ठ कार्य पर कलेक्टर खंडवा ने अपने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतियां दी।  

प्रशासनिक अफसरों के साथ जन हित पर मंथन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए अहम निर्देश

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रणाली की ओर बढ़ते कदम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस पहला दिन नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल  कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।  

फर्स्ट कजिन मैरिज पर ब्रिटेन में छिड़ी बहस, सामाजिक-धार्मिक और मेडिकल पहलुओं पर क्या हैं तर्क?

लंदन  ब्रिटेन में फर्स्ट कजिन से शादी करना अबतक कानूनी रूप से वैध है. फर्स्ट कजिन में चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई-बहन आते हैं. इस देश के नियमों के अनुसार यहां फर्स्ट कजिन आपस में विवाह कर सकते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में इस पर स्वास्थ्य जोखिमों, सांस्कृतिक परंपराओं और सार्वजनिक नीतियों को लेकर तेज विवाद चल रहा है. यह मुद्दा मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देश (पाकिस्तानी और बांग्लादेशी) समुदायों से जुड़ा है, जहां यह प्रथा पारंपरिक रूप से प्रचलित है. हाल ही में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने फर्स्ट कजिन के फायदे को बताते हुए अपनी वेबसाइट पर एक रिपोर्ट जारी की. नेशनल हेल्थ सर्विस की ये रिपोर्ट राजनीतिक और सांस्कृतिक विवादों में आ गई. जब विवाद बढ़ा तो ब्रिटिश सरकार ने चचेरे भाई-बहन के विवाह के संभावित लाभों को बताने वाली इस ऑनलाइन रिपोर्ट को चुपचाप हटा लिया. आइए सबसे पहले समझते हैं कि फर्स्ट कजिन होते कौन हैं? कौन होते हैं फर्स्ट कजिन फर्स्ट कजिन (First Cousin) वैसा रिश्तेदार होता है, जिनके माता-पिता और व्यक्ति के माता-पिता भाई-बहन होते हैं. आसान शब्दों में कहें तो  चाचा, चाची, मौसा, मौसी, मामा, मामी, फूफा या फूफी के बेटे-बेटियां फर्स्ट कजिन कहे जाते हैं. यानी किसी के माता या पिता के सगे भाई-बहन के जितने भी बच्चे हैं, वे सारे फर्स्ट कजिन (चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई-बहन) हैं. फर्स्ट कजिन का यह भी मतलब होता है कि जिनके बीच रिश्ता जोड़ा जा रहा है उनके ग्रैंडपेरेंट्स (दादा-दादी या नाना-नानी) एक ही हैं. यह परिवार में नजदीकी खून का रिश्ता होता है. फर्स्ट कजिन को अंग्रेजी में simply 'Cousin' भी कहा जाता है, और परिवार के विस्तार में यह सबसे आम cousin रिलेशन है.  ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में क्या था? फर्स्ट कजिन विवाद के फायदे बताने वाली ये रिपोर्ट नेशनल हेल्थ सर्विस के जिनोमिक्स एजुकेशन प्रोग्राम के तहत जारी की गई थी. इसका शीर्षक था 'क्या ब्रिटेन सरकार को चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए?'  फॉक्स न्यूज के अनुसार इस रिपोर्ट में फर्स्ट कजिन मैरिज के फायदे को बताते हुए कहा गया था कि इससे लोगों को परिवारों के विस्तार का फायदा मिलता है और आर्थिक लाभ भी होते हैं.  एनएचएस रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि वंशानुगत बीमारियों के बढ़ते जोखिम के कारण अंतर-पारिवारिक विवाह "लंबे समय से वैज्ञानिक चर्चा का विषय रहे हैं, रिपोर्ट के अनुसार यूके में फर्स्ट कजिन विवाह 1500 ईस्वी से ही वैध हैं, जब राजा हेनरी अष्टम ने अपनी पूर्व पत्नी की चचेरी बहन कैथरीन हॉवर्ड से विवाह किया था.  अमेरिका में भी चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर संघीय स्तर पर प्रतिबंध नहीं है, यहां 20 राज्यों में यह प्रथा अभी भी मान्य है.  डेली मेल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एनएचएस लेख में कहा गया था कि पहले फर्स्ट कजिन के विवाहों में आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होने का जोखिम "कम" होता है.  डेली मेल के अनुसार लेख में कहा गया है, "सामान्य आबादी में किसी बच्चे के आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होने की आशंका लगभग दो से तीन प्रतिशत होती है; फर्स्ट कजिन के बच्चों में यह बढ़कर चार से छह प्रतिशत हो जाती है. इसलिए पहले चचेरे भाई-बहनों के ज़्यादातर बच्चे स्वस्थ होते हैं." ब्रिटिश पीएम स्टॉर्मर ने क्या कहा है? ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने फर्स्ट कजिन मैरिज पर पॉजिटिव रुख अपनाया है. इस साल के शुरुआत में स्टॉर्मर ने कहा था कि वे इस प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाएंगे. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फर्स्ट कजिन विवाह से पैदा हुए बच्चों में सिकल सेल रोग और सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस जैसी बीमारियों का खतरा ज़्यादा होता है.  कीर स्टार्मर ने अपनी लेबर सरकार के सदस्यों के साथ मिलकर तर्क दिया है कि इस मामले में लोगों को जागरुक किया जाना चाहिए.  हालांकि ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने एनएचएस की इस रिपोर्ट को "चौंकाने वाला" बताया और माफी की मांग करते हुए कहा कि चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह "उच्च जोखिम वाला और असुरक्षित" होता है. लेकिन सांसद इकबाल मोहम्मद ने ऐसे विवाहों का बचाव करते हुए कहा कि ये कई परिवारों के लिए सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं.  सांसद इकबाल ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों को स्वीकार किया. लेकिन उन्होंने कहा कि कई परिवार ऐसे विवाहों को आपसी संबंध बनाने और वित्तीय सुरक्षा के लिए बढ़िया मानते हैं, उन्होंने ऐसे विवाहों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय आनुवांशिक जांच की सिफारिश की ताकि बीमारियों के खतरे से बचा जा सके. कंजरवेटिव सांसदों ने किया विरोध पिछले हफ्ते पहली बार प्रकाशित इस लेख की सांसद रिचर्ड होल्डन ने कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार पर "हानिकारक और दमनकारी सांस्कृतिक प्रथाओं के आगे घुटने टेकने" का आरोप लगाया था.  उन्होंने कहा, "कंजर्वेटिव भी चचेरे भाई-बहनों की शादी को समाप्त होते देखना चाहते हैं, लेकिन लेबर सरकार इन उचित मांगों के प्रति उदासीन है." सांसद रिचर्ड होल्डन फर्स्ट कजिन मैरिज को खत्म करने के लिए बिल लाने के पक्ष में है. इसी तरह कंजर्वेटिव सांसद क्लेयर कॉउटिन्हो ने एक्स पर कहा, "एनएचएस उम्र, बीएमआई और गर्भधारण के इतिहास के आधार पर आईवीएफ पर शर्तें लगाता है. एनएचएस आपको गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान या शराब न पीने के लिए बहुत कुछ कहता है. लेकिन एनएचएस चचेरे भाई-बहनों की शादी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहेगा." फर्स्ट कजिन मैरिज पर रोक के पक्ष में ब्रिटिश New YouGov के नए शोध से पता चलता है कि तीन-चौथाई ब्रिटिश नागरिक (77 प्रतिशत) कहते हैं कि चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह को लीगल नहीं बनाया जाना चाहिए, जबकि केवल 9 प्रतिशत का मानना ​​है कि कानून यथावत रहना चाहिए. चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर प्रतिबंध का सपोर्ट सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं.  फर्स्ट कजिन मैरिज के दुष्परिणाम हेल्थ एक्सपर्ट ने फर्स्ट कजिन मैरिज को अगली पीढ़ी के खतरनाक माना है. इससे आनुवंशिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है. क्योंकि नजदीकी रक्त संबंधों में समान जीन की संभावना अधिक होती है.  ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड स्टडी (2007-2025) के अनुसार फर्स्ट कजिन विवाह से बच्चों में जन्म दोष का जोखिम 2-3% से बढ़कर 4-6% हो जाता है. इनमें हृदय की बीमारियां, नर्वस सिस्टम की समस्याएं … Read more

सोने में निवेश करें आज, 2050 तक होगा कितना मुनाफा? जानिए विस्तार से

मुंबई  आज के रेट्स के हिसाब से देखें तो भारत में 24 कैरेट सोना करीब 1,23,100 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है. अलग-अलग शहरों में मामूली फर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल यही बाजार की औसत दर है.सोने की कीमतों में लगातार उछाल की कई वजहें हैं. सबसे पहले तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और यूरोप की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है. दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का समीकरण. जब डॉलर महंगा होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमत अपने आप ऊपर चली जाती है क्योंकि भारत ज्यादातर सोना आयात करता है.त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसके दाम और उछलते हैं. साथ ही, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं ताकि अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रख सकें. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमतों में इजाफा हो रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आप आज 1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो 2050 तक उसकी कीमत कितनी होगी? इसका सीधा जवाब तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पिछले 25 सालों के आंकड़ों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है.साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4,400 रुपये के आसपास था, जबकि आज वही लगभग 1,23,100 के आसपास पहुंच गया है. यानी 25 साल में करीब 25 गुना बढ़ोतरी हुई.अगर आने वाले 25 सालों तक सोना औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहा, तो 1,00,000 का सोना 2050 तक लगभग 11-12 लाख के आसपास हो सकता है. अगर वृद्धि दर 8% रही तो ये मूल्य करीब 7 लाख और अगर 12% रही तो 15 लाख से ऊपर पहुंच सकता है. एक किलो सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें नफा-नुकसान  सोना हमेशा से इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन माना गया है. इसका आकर्षण केवल इसकी कीमत में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं के समय यह एक भरोसेमंद साथी भी होता है. ऐसे में अगर आप आज एक किलो सोना खरीदते हैं, तो सवाल उठता है कि 2050 तक इसकी कीमत कितनी हो सकती है और निवेश से कितना लाभ या नुकसान हो सकता है. आइए, वर्तमान रेट और ऐतिहासिक ट्रेंड के आधार पर इसकी कीमतों का आंकलन करते हैं. वर्तमान सोने की कीमत  अक्टूबर 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 11,942 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. इसका मतलब है कि एक किलो यानि 1000 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,19,42,000 रुपये तक हो सकती है. यह दाम अलग-अलग शहरों और बाजारों में थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन तकरीबन यही मूल्य देखा गया है. 2050 तक सोने की कीमत एक साधारण गणना के आधार पर देखा जाए तो यदि सोने की कीमतों में वर्तमान दर से औसतन 8% वार्षिक बढ़ोतरी होती है, तो 2050 तक सोने की कीमत में लगभग 25 गुना वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि 2050 में एक किलो सोने की कीमत लगभग 30-35 करोड़ तक पहुंच सकती है. लेकिन अगर सोने की कीमतें 10% वार्षिक दर से बढ़े तो यह 45-50 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल ट्रेंड और औसत वृद्धि दर पर आधारित है. भविष्य में इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. नफा-नुकसान का आंकलन पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है. सोना इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में सुरक्षित होता है. सोने की कीमतें आमतौर पर इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती हैं, जिससे यह इन्फ्लेशन से सुरक्षा देता है. क्या हो सकता है नुकसान? एक किलो सोने को सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टोरेज और सुरक्षा की जरूरत होती है, जो इसके लिए एक्स्ट्रा खर्च का कारण बन सकता है. सोने को तुरंत नकदी में परिवर्तित करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, खासकर बड़े दाम में. ऐसे में इसके फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. 

बलूचिस्तान में आतंक का नया गठबंधन, लश्कर-ए-तैयबा और ISIS-K के संबंधों का खुलासा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सेना और आईएसआई लंबे समय से आतंकी गुटों को हथियार बनाकर क्षेत्रीय खेल खेल रही है. अब बलूचिस्तान में एक नया खतरा उभरा है – लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसके) का गठबंधन. आईएसआई की मदद से ये दोनों आतंकी संगठन मिलकर बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के कुछ गुटों पर हमला कर रहे हैं. आईएसके की मैगजीन 'यलगार' में भारत के कश्मीर में हमलों की योजना का जिक्र भी है. हाल ही में आईएसके के समन्वयक मीर शफीक मेंगल की एक फोटो सामने आई, जिसमें वे लश्कर के वरिष्ठ कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल दे रहे हैं. यह फोटो पाकिस्तान की आतंक प्रायोजित गतिविधियों को बेनकाब करती है.  हाल ही में लीक हुई फोटो में आईएसके के बलूचिस्तान समन्वयक मीर शफीक मेंगल लश्कर के नजीम-ए-आला (मुख्य कमांडर) राणा मोहम्मद अशफाक को पिस्तौल भेंट कर रहे हैं. यह तस्वीर आईएसआई की सीधी संरक्षण वाली साजिश को दिखाती है. राणा अशफाक लश्कर को पाकिस्तान भर में फैला रहा है – नए मर्कज (ट्रेनिंग सेंटर) खोल रहा है. दूसरे आतंकी गुटों से संपर्क बढ़ा रहा है.  मीर शफीक मेंगल पूर्व बलूचिस्तान के केयरटेकर मुख्यमंत्री नासिर मेंगल का बेटा है. वो आईएसआई का पुराना एजेंट है. 2010 से वो एक निजी किलर स्क्वॉड चला रहा है, जो बलूच राष्ट्रवादियों को मारता है. 2015 से वो आईएसके के लिए सुरक्षित घर, फंडिंग और हथियार मुहैया करा रहा है. पाकिस्तान की 2015 की जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) रिपोर्ट में भी उसका नाम आया है. आईएसके के कैंप: आईएसआई की फैक्ट्री 2018 तक आईएसआई ने आईएसके को फंडिंग और लॉजिस्टिक्स देकर बलूचिस्तान में दो मुख्य कैंप बनवाए – मस्तुंग और खुजदार जिले में. मेंगल इन कैंपों का इंचार्ज था. मस्तुंग कैंप बलूच विद्रोहियों पर हमलों के लिए, खुजदार अफगानिस्तान में क्रॉस-बॉर्डर मिशनों के लिए. आईएसआई के बीच से हथियार और पैसे आते थे. 2023 में अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया, तो आईएसआई ने आईएसके को नया रूप दिया. मस्तुंग कैंप बलूचों पर, खुजदार अफगानिस्तान पर फोकस. मेंगल का किलर स्क्वॉड आईएसआई के आदेश पर बलूच विद्रोहियों को मारता रहा. मेंगल की राजनीतिक पहुंच मजबूत है – 2023 की एक फोटो में वे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ दिखे. मार्च 2025 का हमला: गठबंधन का जन्म मार्च 2025 में बलूच लड़ाकों ने मस्तुंग कैंप पर बड़ा हमला किया, 30 आतंकी मारे गए. आईएसआई ने जवाब में लश्कर को बुलाया. जून 2025 में राणा अशफाक बलूचिस्तान पहुंचे. लश्कर के डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी ने 'जिरगा' (बैठक) बुलाई, जिसमें बलूच अलगाववादियों के खिलाफ जिहाद की कसम खाई. मेंगल और अशफाक की फोटो इस गठबंधन की पुष्टि करती है. विश्लेषकों का कहना है कि आईएसआई बलूच विद्रोहियों और अफगान तालिबान के उन गुटों पर हमला करवाना चाहता है, जो इस्लामाबाद के कंट्रोल में नहीं हैं. यह प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) का हिस्सा है. लश्कर की पुरानी जड़ें बलूचिस्तान में लश्कर बलूचिस्तान में नया नहीं. क्वेट्टा में 'मर्कज ताकवा' कैंप है, जिसकी कमान अफगान युद्ध के वेटरन मियां सकीब हुसैन के पास है। 2002-2009 में लश्कर ने यहां ट्रेनिंग कैंप चलाया। 2006 में इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल को यहीं हथियार ट्रेनिंग मिली. अब लगता है कि लश्कर आईएसके के साथ मिलकर बलूच विद्रोहियों पर हमले करेगा, जैसे अफगान जिहाद में अल-कायदा के साथ किया था. आईएसआई की निगरानी में यह गठबंधन पाकिस्तान के आतंक तंत्र को बदल रहा है – अलग विचारधारा वाले गुट एक हो रहे हैं, दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने के लिए. क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा यह गठबंधन अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और कश्मीर के लिए बड़ा खतरा है. पाकिस्तान आईएसके को 'दाएश' कहकर दुनिया को बेवकूफ बनाता है, लेकिन खुद इस्तेमाल कर रहा है. आईएसआई की यह साजिश 'प्लॉजिबल डिनायबिलिटी' (इनकार करने लायक) के तहत चल रही है. भारत और अफगानिस्तान को सतर्क रहना होगा. 

पाक में जाफर एक्सप्रेस पर फिर हमला, बलूच विद्रोहियों ने कहा- हमले थमेंगे नहीं

बलूचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाकर एक बार फिर विस्फोट किया गया। इसमें कई लोग घायल हो गए। क्वेटा की ओर जा रही इस ट्रेन पर सिंध-बलूचिस्तान सीमा के पास सुल्तानकोट क्षेत्र में एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (IED) से हमला किया गया। इसके कारण कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए। यह इस साल मार्च के बाद से जाफर एक्सप्रेस पर हुआ ताजा हमला है। बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने दावा किया गया कि ट्रेन में पाकिस्तानी सेना के जवान यात्रा कर रहे थे। समूह ने अपने बयान में कहा, "यह हमला तब किया गया जब पाकिस्तानी सेना के जवान ट्रेन में सवार थे। विस्फोट के परिणामस्वरूप कई सैनिक मारे गए और घायल हुए साथ ही ट्रेन के छह डिब्बे पटरी से उतर गए।" हालांकि, अभी तक किसी की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बलूच विद्रोहियों का दावा बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने अपने बयान में यह भी कहा कि "ऐसे हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक बलूचिस्तान की आजादी नहीं मिल जाती।" घटनास्थल पर बचाव दल और सुरक्षा बल पहुंच चुके हैं, और राहत कार्य चल रहा है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में घायल लोगों को दिखाया गया है, जो इस हमले की गंभीरता को दर्शाता है। जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर तक चलती है। इस साल कई बार निशाना बन चुकी है। मार्च में सबसे घातक हमला हुआ था, जब बोलन क्षेत्र में ट्रेन को हाइजैक कर लिया गया था, जिसमें 21 यात्रियों और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने 33 आतंकवादियों को मार गिराया था।

रोहित और विराट ने फिर जगाई वनडे की चमक, स्टेडियम फुल – टिकटों की हो रही मारामारी

मुंबई   शुभमन गिल और गौतम गंभीर भविष्य के लिए एक टीम बनाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं लाखों प्रशंसक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज़ देखने के लिए उत्सुक होंगे, यह देखने के लिए कि इतने लंबे ब्रेक के बाद कोहली और रोहित कैसा प्रदर्शन करते हैं. अब जब ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ के लिए चयन प्रक्रिया पर धूल जम गई है, तो निष्पक्ष होकर चीज़ों पर विचार करने का समय आ गया है. साफ़ है कि भारतीय क्रिकेट में बदलाव अपने अंतिम चरण में है. अजीत अगरकर की चयन समिति ने कुछ हद तक निर्ममता से अपना काम किया है, और हालाँकि इस जल्दबाज़ी पर सवाल उठाया जा सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए कप्तान के पास 2027 विश्व कप से पहले अपनी टीम बनाने के लिए पर्याप्त समय हो. जहाँ तक रोहित शर्मा और विराट कोहली की बात है, तो किसा को भी नहीं लगता कि वे दोनों ज़्यादा समय तक खेलेंगे अगर वे खेलना चाहते हैं, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना होगा, और यहीं पर समस्या खड़ी हो सकती है. यह स्पष्ट है कि उनसे ऐसा करने की उम्मीद की जाएगी, और यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों क्या करते हैं. 50 ओवर के प्रारूप में बहुत कम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के कारण, वे खुद को मैच के लिए कैसे तैयार रखते हैं, यही बड़ा सवाल है. ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ से कुछ जवाब मिल जाएँगे, क्योंकि दोनों ने आईपीएल के बाद से क्रिकेट नहीं खेला है.ऑस्ट्रेलिया में चेंजिंग रूम में कोहली और रोहित की मौजूदगी से गिल कैसे निपटते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा. हालाँकि खेल में चीज़ें कामयाब होती हैं, लेकिन यह किसी के लिए भी आसान नहीं हो सकता.यही एक और वजह है कि अगले कुछ महीने देखना दिलचस्प हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया दौरा धमाकोदार बन गया  कोहली और रोहित दोनों ने पहले भी संकेत दिए थे कि वे 2027 तक खेलना चाहते हैं उदाहरण के लिए, अभिषेक नायर ने भी यही कहा है, क्योंकि उन्होंने रोहित के साथ मिलकर काम किया है कोहली ने भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा कहा था हो सकता है कि वे इस मामले पर कोई सार्वजनिक घोषणा करने से पहले यह देखना चाहें कि ऑस्ट्रेलिया और उसके बाद चीज़ें कैसे आकार लेती हैं. इसके अलावा, उन्हें सीरीज़ दर सीरीज़ आंकना भी अनुचित होगा. किसी की भी सीरीज़ खराब हो सकती है. उदाहरण के लिए, सूर्यकुमार यादव का एशिया कप अच्छा नहीं रहा बल्कि, उन्हें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड (कुल 9 वनडे) के खिलाफ कई मैच खेलने चाहिए, तभी किसी नतीजे पर पहुँचा जा सकता है.अगर वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो किसी को भी संन्यास लेने के लिए कहने की कोई ज़रूरत नहीं है.जैसा कि मैंने पहले भी कई बार कहा है, संन्यास एक निजी फैसला होता है. हर मैच होगा बलॉकबस्टर  चयनकर्ता कप्तान ज़रूर बदल सकते हैं, और उन्होंने बदला भी है लेकिन खेलना है या नहीं, यह खिलाड़ी का फ़ैसला है. वे अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे, और अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह उनका फ़ैसला है कि वे खुद को चयन के लिए पेश करें या नहीं. दरअसल, रोहित ने ऑस्ट्रेलिया जाने का फ़ैसला इसलिए किया क्योंकि वह खेलना चाहते हैं. यह जानते हुए कि वह टीम की कप्तानी नहीं करेंगे, वह खेल को अलविदा कह सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसका मतलब है कि वह खेलना चाहते हैं और मानते हैं कि उनमें अभी भी खेलने की क्षमता है. क्या वह दो साल और खेल पाएंगे और 30 की उम्र के बाद सचिन तेंदुलकर जैसा प्रदर्शन कर पाएंगे, यह देखने के लिए हमें इंतज़ार करना होगा. अब इन दोनों के बीच खेला जाने वाला हर मैच ब्लॉकबस्टर साबित होगा. एक ऐसा फॉर्मेट जो विश्व कप से दो साल दूर होने के कारण अपनी अहमियत खो सकता था, अब सबसे ज़्यादा प्रतीक्षित मैच बन गया है. हर वनडे मैच दर्शकों के बीच देखा जाएगा और प्रसारणकर्ता भी खूब मौज-मस्ती करेंगे. उनकी मौजूदगी ने इस फॉर्मेट में नई जान फूंक दी है और यही अगले कुछ महीनों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है. आखिरकार, ऑस्ट्रेलिया में नतीजे ज़्यादा मायने नहीं रखेंगे लोग यही देखना चाहेंगे कि ये दोनों दिग्गज अपना काम कैसे करते हैं. क्या रोहित भारत को अच्छी शुरुआत दे पाएंगे और क्या वह शीर्ष क्रम में भी इसी आक्रामक रवैये के साथ खेलते रहेंगे? क्या कोहली हमेशा की तरह पारी को संभाले रखेंगे? खैर, जो भी हो, दिवाली हो या काली पूजा, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया मैच देखने में बीत जाएगी ये बात अब लाखों भारतीयों के लिए यह तय है.