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यूपी में एकजुट उत्सव की तैयारी, सभी जिलों में 7 अक्टूबर को होगी वाल्मीकि जयंती समारोह

लखनऊ  यूपी के सभी 75 जिले 7 अक्टूबर को एक साथ एक अद्भुत आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य भर में वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी. इस दिन पूरे प्रदेश में रामायण पाठ, भजन, कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दीप प्रज्ज्वलन जैसे आयोजन एक साथ होंगे. योगी सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्यक्रमों में न केवल सरकारी स्तर पर भागीदारी हो, बल्कि आम लोगों की सक्रिय उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह आयोजन समाज में समानता, सेवा और सद्भाव का संदेश लेकर आएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो. पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजन की तैयारी सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देश के अनुसार 7 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलों, तहसीलों और विकास खंडों में वाल्मीकि जयंती का आयोजन होगा. संस्कृति विभाग के सहयोग से देव मंदिरों और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों पर रामायण पाठ, भक्ति संगीत, भजन, कीर्तन, दीपदान और प्रवचन कराए जाएंगे. हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जो स्थानीय कलाकारों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्यक्रमों का संचालन करेगी. लालापुर (चित्रकूट) बनेगा आयोजन का केंद्रबिंदु महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर (चित्रकूट) में इस दिन सबसे बड़ा और भव्य आयोजन होगा. संस्कृति विभाग ने इसे राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का दर्जा दिया है. उप निदेशक (पर्यटन) आर.के. रावत को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से होगा. इसके बाद विराट महाराज और संस्कृत के छात्र-छात्राएं रामायण पाठ प्रस्तुत करेंगे. स्थानीय कलाकार दयाराम रैकवाड़ व उनकी टीम द्वारा भक्ति संगीत और वाल्मीकि रामायण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी. पूजन, हवन, लव-कुश प्रसंग और प्रवचन जैसे कार्यक्रम पूरे दिन चलेंगे. कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संस्कृति विभाग के अधिकारियों, और जनसामान्य की सक्रिय भागीदारी रहेगी. आयोजन के दौरान पूरे परिसर में स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. अन्य जिलों में भी रहेगी रौनक लालापुर के अलावा अयोध्या, श्रावस्ती, प्रयागराज, कानपुर (बिठूर), राजापुर, झांसी, वाराणसी, लखनऊ और गोरखपुर समेत सभी जिलों में आयोजन होंगे. हर जगह महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन पर आधारित प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी. अयोध्या में वाल्मीकि आश्रम पर विशेष पूजन के साथ दीपदान होगा, जबकि बिठूर के वाल्मीकि आश्रम में दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारी चल रही है. प्रयागराज और वाराणसी में विश्वविद्यालयों के साहित्य विभागों द्वारा ‘वाल्मीकि और रामायण का सांस्कृतिक प्रभाव’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की जाएगी. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं से जोड़ना है. जनसहभागिता पर विशेष जोर अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार ने इस आयोजन को पूरी तरह जनसहभागिता केंद्रित कार्यक्रम बनाया है. संस्कृति विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से इसका संचालन करेंगे. हर जिले में स्थानीय कलाकारों, भजन मंडलियों, कथा वाचकों और विद्यालयों को मंच प्रदान किया जा रहा है ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें. सीएम योगी ने कहा है कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में जनता की भागीदारी ही उनकी आत्मा है. महर्षि वाल्मीकि की जयंती को हम केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकमंगल के पर्व के रूप में मना रहे हैं. साफ-सफाई और सुरक्षा पर सीएम की सख्त निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी आयोजन स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो. संस्कृति विभाग को निर्देशित किया गया है कि आयोजन के दौरान सकारात्मक सामाजिक संदेश प्रसारित किए जाएं और वाल्मीकि जी के उपदेशों को आमजन तक पहुंचाया जाए. प्रत्येक स्थल पर पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवकों की मौजूदगी रहेगी. लखनऊ से लेकर सोनभद्र तक प्रशासन ने रविवार रात से ही सभी प्रमुख स्थलों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. स्थानीय कलाकारों को मिलेगा आध्यात्मिक मंच योगी सरकार की एक बड़ी पहल यह भी है कि हर जिले में स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों को मंच प्रदान किया जाएगा. संस्कृति परिषद और जिला प्रशासन की ओर से कलाकारों का चयन किया जा चुका है. इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण व कस्बाई प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी बढ़ाना है. लखनऊ में संस्कृति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि  पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि छोटे जिलों में बहुत प्रतिभाशाली कलाकार हैं, जिन्हें मंच नहीं मिल पाता. इस आयोजन से वे अपनी कला के माध्यम से समाज को जोड़ने का अवसर पाएंगे. हर जिले में नोडल अधिकारी की तैनाती संस्कृति विभाग ने सभी 75 जिलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी है. ये अधिकारी जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के साथ मिलकर कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे. जहां बड़े आयोजन होंगे, वहां विभागीय मंत्री और सांसद/विधायक भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. संस्कृति विभाग ने बताया कि इस आयोजन में किसी प्रकार की औपचारिकता नहीं रखी जाएगी बल्कि सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी.

रायपुर से रिपोर्ट: खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन, देश के लिए बना उदाहरण

रायपुर खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ राज्य ने हाल के वर्षों में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखकर राज्य ने खनिज प्रशासन में अनेक संरचनात्मक सुधार किए हैं, जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खनन राज्यों में सम्मिलित हो गया है। राज्य में विश्वस्तरीय लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, बाक्साइट, टिन अयस्क सहित नवीन अन्वेषणों से क्रिटिकल, स्ट्रैटेजिक तथा रेयर अर्थ मिनरल्स की उपलब्धता प्रमाणित हुई है, जिससे राज्य की वैश्विक पहचान सुदृढ़ हुई है। छत्तीसगढ़ का खनन क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जबकि देश के कुल खनिज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है। राज्य के खनिज राजस्व में 25 सालों में 34 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 14,592 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह उपलब्धि राज्य की सुदृढ़ खनिज नीति और सतत प्रशासनिक सुधारों का परिणाम है। वर्ष 2015 में संशोधित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत गठित खनिज नीलामी नियम 2015 के तहत अब तक राज्य में 60 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है। इनमें 15 लौह अयस्क, 14 बाक्साइट, 18 चूना पत्थर तथा 13 क्रिटिकल व स्ट्रैटेजिक खनिज ब्लॉक सम्मिलित हैं। साथ ही, 05 नए ब्लॉकों (02 चूना पत्थर, 01 लौह अयस्क, 01 स्वर्ण और 01 बेस मेटल ब्लॉक) की नीलामी प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है। संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ ने खनन अनुसंधान एवं अन्वेषण के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए आईआईटी मुंबई, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू संपादित किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गति प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के गाइडलाइन-2024 के अनुरूप राज्य में जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2025 अधिसूचित किए गए हैं। राज्य में अब तक 16,119 करोड़ रूपए का अंशदान प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत 1,05,653 कार्यों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 74,454 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वित्तीय स्वीकृति, निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु डीएमएफ पोर्टल 2.0 को क्रियान्वित किया गया है। खनिज विभाग द्वारा विकसित खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल ने राज्य के खनिज प्रशासन को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान किया है। यह प्रणाली सुरक्षित, बहुआयामी और उपयोगकर्ता-मित्र है, जो पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती है। यह पहल छत्तीसगढ़ को खनन प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सिद्धांतों के अनुरूप राज्य में रेत खदानों का आबंटन अब पूर्णतः ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इस हेतु एमएसटीसी के साथ एमओयू किया गया है। नई व्यवस्था में मानव हस्तक्षेप समाप्त कर संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाई गई है। गौण खनिज नियम, 2015 के अंतर्गत लागू की गई स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत खनन, पर्यावरण प्रबंधन, सुरक्षा उपाय और सतत विकास के मानकों पर खदानों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत 03 खदानों को 5-स्टार तथा 32 खदानों को 4-स्टार रेटिंग से सम्मानित किया गया है, जो वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार खनन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का कहना है कि खनिज संपदा केवल आर्थिक स्रोत नहीं, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है। छत्तीसगढ़ ने खनन क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटल पारदर्शिता और सतत विकास के समन्वित प्रयासों से एक आदर्श प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत किया है। राज्य की यह प्रगति न केवल आर्थिक सुदृढ़ता का संकेत है, बल्कि यह जनहित आधारित विकास की दिशा में एक स्थायी कदम भी है।      नसीम अहमद खान, उप संचालक 

सावधान! मच्छरों से फैल रहा है चिकनगुनिया, डेंगू की तरह अब फैलाव तेज

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में डेंगू के साथ ही चिकनगुनिया के रोगी बढ़ रहे हैं। अब तक डेंगू के 104 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, डेंगू से 4 गुना कम जांच होने के बावजूद चिकनगुनिया की पॉजिटिव दर डेंगू से दो प्रतिशत से अधिक रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक कुल 7971 लोगों की डेंगू की जांच हुई। इनमें से 104 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। डेंगू पॉजिटिव दर 1.31 प्रतिशत है। इसी तरह अब तक 2006 लोगों की चिकनगुनिया की जांच की गई है, जिसमें से 70 लोगों चिकनगुनिया से पीड़ित पाए गए। चिकनगुनिया की पॉजिटिव दर 3.49 प्रतिशत रही है। विशेषज्ञों के अनुसार राजधानी में डेंगू से अधिक चिकनगुनिया तेजी से पैर पसार रहा है। लक्षण दिखे तो कराएं जांच डॉक्टरों के अनुसार, किसी को बुखार के साथ सर्दी लगे और मांसपेशियों और आंखों के पीछे दर्द हो तो 24 घंटे में डेंगू की जांच करा लेना चाहिए। जेपी अस्पताल, हमीदिया, बीएमएचआरसी और एम्स के साथ ही सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त जांच की सुविधा है। सितंबर में सर्वाधिक डेंगू के मामले स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबसे अधिक डेंगू के मामले सितंबर में आए। जनवरी से अगस्त तक आठ महीने में कुल डेंगू के 68 मरीज आए थे। अकेले सितंबर माह में 36 से अधिक डेंगू के मरीज मिले हैं। वहीं, अगस्त माह तक भोपाल में डेंगू सेंसेटिव जोन की संख्या बहुत कम थी।   यहां हालात ज्यादा खराब टीटी नगर, बागसेवनियां, शाहजहांनाबाद और इब्राहिमपुरा में हालात अधिक खराब हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में डेंगू के मामले और बढ़ सकते हैं। ऐसे करें बचाव चिकनगुनिया एक तीव्र जोड़ों के दर्द का कारण बनता है जो हफ्तों या महीनों तक रह सकता है, इसलिए रोकथाम ही सबसे अच्छा उपाय है। आप मच्छरों के काटने से बचकर, अपने आस-पास सफाई रखकर, और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर अपना बचाव कर सकते हैं।

UP Scholarship Update: दिवाली तक मिल सकती है छात्रवृत्ति, तारीख और प्रक्रिया यहाँ देखें

लखनऊ समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2024-25 की दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नई समय-सारिणी जारी की है। जिन छात्रों को पिछली बार छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई थी, उन्हें अब 27 से 31 अक्टूबर तक दोबारा आवेदन का मौका मिलेगा। पात्र छात्रों के बैंक खातों में 28 नवंबर को छात्रवृत्ति की राशि भेजी जाएगी। समय सारिणी के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को 10 से 14 अक्टूबर तक मास्टर डाटा लाक करना होगा। इसके बाद 15 से 18 अक्टूबर के बीच विश्वविद्यालय या संबंध संस्था द्वारा मास्टर डाटा का सत्यापन किया जाएगा। 26 अक्टूबर तक जिला समाज कल्याण अधिकारी सीटों और शुल्क की जांच कर लाकिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे। छात्र 27 से 31 अक्टूबर तक आनलाइन आवेदन और रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। आवेदन पत्र का प्रिंट निकालकर संस्थान में एक नवंबर तक जमा करना अनिवार्य होगा। संस्थान द्वारा आनलाइन सत्यापन दो नवंबर तक किया जाएगा, जबकि विश्वविद्यालय या एजेंसी तीन से छह नवंबर तक डाटा की जांच करेगी। जिन छात्रों के आवेदन में कोई गलती रह जाएगी, उन्हें आठ से 11 नवंबर तक संशोधन का अवसर मिलेगा। संशोधित आवेदन 12 नवंबर तक संस्थान द्वारा अग्रसारित किए जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर तक जिला स्तर पर डेटा सत्यापन और विभागीय अधिकारियों द्वारा डिजिटल सिग्नेचर लाकिंग की जाएगी। विभाग ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और छात्रों से निर्धारित तिथियों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है ताकि कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए।

CPCB रिपोर्ट ने खोला सच: दिल्ली-NCR में ओजोन प्रदूषण सीमा पार, NGT चिंता में

नई दिल्ली केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की नवीनतम रिपोर्ट, जिसमें दिल्ली-एनसीआर समेत कई भारतीय राज्यों में ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन प्रदूषण के स्तर का विश्लेषण किया गया है, ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सीपीसीबी की रिपोर्ट में उजागर हुए खतरनाक ओज़ोन स्तरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सीपीसीबी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में 10 शहरों के 178 निगरानी केंद्रों पर ओज़ोन स्तरों का विश्लेषण किया गया। इसमें पता चला कि दिल्ली-एनसीआर के 57 निगरानी केंद्रों में से 25 में ओज़ोन प्रदूषण आठ घंटे की सीमा से अधिक पाया गया, जबकि 21 स्थानों पर गर्मियों के दौरान ओज़ोन प्रदूषण एक घंटे की सीमा से अधिक पाया गया। एनजीटी विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की एक रिपोर्ट पर आधारित एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बाद इस मामले की सुनवाई कर रहा है। 6 अगस्त, 2024 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट में कहा गया था कि सीएसई की रिपोर्ट में शहरी भारत में ओज़ोन प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि दिखाई गई है। दिल्ली-एनसीआर के अलावा, मुंबई के 45 में से 22 स्टेशनों पर ओजोन प्रदूषण का स्तर आठ घंटे की सीमा से अधिक पाया गया। दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के अलावा, सीपीसीबी ने ग्रेटर हैदराबाद में 14 निगरानी स्टेशनों, बेंगलुरु महानगर क्षेत्र में 11, चेन्नई महानगर क्षेत्र में सात, पुणे महानगर क्षेत्र में 12, ग्रेटर अहमदाबाद में 10 और ग्रेटर लखनऊ व ग्रेटर जयपुर में छह-छह निगरानी स्टेशनों का विश्लेषण किया। सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई महानगर क्षेत्र में ओज़ोन का स्तर अधिक पाया गया। यह मुख्य रूप से परिवहन, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक गतिविधियों से उत्सर्जित नाइट्रोजन ऑक्साइड के कारण था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओज़ोन मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश में वाहनों, उद्योगों और बिजली संयंत्रों से उत्सर्जित नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCS) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रस्ताव रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सीपीसीबी ने ओज़ोन और उसके कारकों को नियंत्रित करने के उपायों की सिफारिश करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रस्ताव रखा है। इसमें यह भी कहा गया है कि एक अन्य मामले में दायर एक रिपोर्ट में ओजोन और उसके कारणों को नियंत्रित करने के लिए एक अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है। सुनवाई के दौरान, सीपीसीबी ने अनुरोध किया कि इस मामले से संबंधित दो आवेदनों पर एक साथ सुनवाई की जाए। अनुरोध स्वीकार करते हुए, एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई 12 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। ओजोन प्रदूषण क्या है? ओज़ोन तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी एक गैस है। आकाश में ऊपर, यह हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास, यह एक प्रदूषक बन जाती है। यह किसी भी स्रोत से सीधे उत्सर्जित नहीं होती, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजली संयंत्रों द्वारा सूर्य के प्रकाश में उत्सर्जित नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCS) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनती है। यह गैस अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती है और हवा के माध्यम से लंबी दूरी तक फैल सकती है। यह शहरों और गांवों को प्रभावित करती है। ओजोन हॉटस्पॉट और उनके प्रभाव हर शहर में कुछ विशिष्ट क्षेत्र होते हैं जहां ओजोन का स्तर सबसे अधिक होता है। इन हॉटस्पॉट में प्रदूषण का प्रभाव अधिक गंभीर होता है। ओजोन श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और अस्थमा व ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को बढ़ाता है। यह बच्चों, बुज़ुर्गों और श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए खतरनाक है। यह फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है। ओजोन प्रदूषण के कारण ओजोन में वृद्धि मौसम और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करती है। गर्मी और सूरज की रोशनी इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज करती है। वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और ठोस ईंधन का उपयोग इसके मुख्य कारण हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अल्पसंख्यक स्कूलों का TET विवाद, याचिका में मांगी न्यायिक हस्तक्षेप

नई दिल्ली अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) के दायरे से बाहर रखना और वहां के शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से छूट देना बच्चों के योग्य शिक्षकों से शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। ये बात अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता से बाहर रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हस्तक्षेप अर्जी में कही गई है। अर्जीकर्ता खेम सिंह भाटी ने अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट के मामले में पक्ष रखने की इजाजत मांगते हुए कहा है कि टीईटी शिक्षा के अधिकार का अहम हिस्सा है इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को योग्य और सक्षम शिक्षक पढ़ाएं। शिक्षा के अधिकार में अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार शामिल है। इसीलिए अल्पसंख्यक स्कूलों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिया जाना बच्चों के साथ अन्याय है और उनके योग्य शिक्षकों से शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।   मामला बड़ी पीठ को भेजा सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से कक्षा आठ तक को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के गत एक सितंबर के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को फिलहाल इससे छूट देते हुए उनका मामला विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया था। दो न्यायाधीशों की पीठ ने अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई के दायरे से बाहर बताने वाले पांच न्यायाधीशों के प्रमति एजूकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में पूर्व में दिए फैसले पर सवाल उठाते हुए मामला बड़ी पीठ को भेज दिया था। तमिलनाडु सहित कई राज्यों के मामले लंबित हैं। इसमें चीफ जस्टिस को सुनवाई के लिए उचित पीठ गठित करनी है। इसी मामले में डॉक्टर खेम सिंह भाटी ने ये हस्तक्षेप अर्जी दाखिल की है। अर्जी में कहा गया है कि अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई के दायरे से बाहर रखने के प्रमति जजमेंट में कानून की सही व्यवस्था नहीं दी गई है। आरटीई कानून सभी बच्चों के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया था लेकिन प्रमति जजमेंट में अल्पसंख्यक स्कूलों को इसके दायरे से बाहर करने से ये उद्देश्य कमजोर होता है, क्योंकि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का योग्य शिक्षकों से शिक्षा पाने का अधिकार बाधित होता है। टीईटी शिक्षा के अधिकार का अहम हिस्सा कहा गया है कि अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन और प्रशासन के संविधान के अनुच्छेद 30 (1) में मिले अधिकार और प्रत्येक बच्चे को अनुच्छेद 21ए में मिले मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार के बीच एक संतुलित व्याख्या होनी चाहिए। ऐसी व्याख्या होनी चाहिए कि दो में से किसी का भी अधिकार पूर्ण रूप से समाप्त न हो। टीईटी शिक्षा के अधिकार का अहम हिस्सा है इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को योग्य और सक्षम शिक्षक पढ़ाएं। शिक्षा के अधिकार में अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार शामिल है इसीलिए अल्पसंख्यक स्कूलों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिया जाना बच्चों के साथ अन्याय है और उनके योग्य शिक्षकों से शिक्षा पाने के अधिकार का उल्लंघन है।  

नेपाल आपदा: भारी बारिश से हाहाकार, सैकड़ों यात्री फंसे और दर्जनों की मौत

नई दिल्ली पड़ोसी देश नेपाल में कुदरत का कहर देखने को मिला है। पूर्वी नेपाल के इलम में पिछले 24 घंटों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 42 लोगों की जान गई है। इसके साथ ही कई फ्लाइट को डायवर्ट किया गया है। दरअसल,रविवार सुबह तक सूर्योदय नगर पालिका में भूस्खलन में कम से कम 5 लोग, मंगसेबुंग नगर पालिका में 3 और इलम नगर पालिका में 6 लोगों की मौत की खबर है। इस आपका के बाद प्रशासन राहत के कामों में लग गया है।   बढ़ सकती है मृतकों की संख्या वहीं,एसएसपी पोखरेल ने समाचार एजेंसी एएनआई से फोन पर बातचीत में कहा कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। वर्तमान में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक हमारे पास केवल नुकसान और क्षति का प्रारंभिक विवरण है। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों के तीनों स्तरों (जिसमें नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस शामिल है) को तैनात किया गया है। भारी बारिश और आगे भी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इस बीच नदियां उफान पर हैं। काठमांडू घाटी के बाढ़ के मैदानों से निवासियों को निकालने के लिए उन्हें तैनात किया गया है। नदियों के किनारे तलाशी अभियान जारी सुरक्षा एजेंसियों ने शनिवार को घाटी से होकर गुजरने वाली सभी प्रमुख नदियों के किनारे बसी बस्तियों में तलाशी अभियान चलाया। एजेंसियों ने घर-घर में जाकर तलाशी ली, निवासियों को बाहर निकलने में मदद की और उनके सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की। इन नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने बागमती, हनुमंते, मनोहरा, धोबी खोला, बिष्णुमती, नक्खू और बल्खू नदियों में जलस्तर बढ़ने की जानकारी दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ सड़क किनारे के इलाकों तक पहुंच सकती है और बस्तियों में घुस सकती है। निवासियों और वाहन चालकों से बाढ़ के खतरे के कारण नदी के किनारे यात्रा करने से बचने का आग्रह किया गया है। 

भीषण सड़क त्रासदी: खंडवा में ट्रक ने ई-बाइक को कुचला, आग से झुलसे दो लोग

खंडवा राखड़ से भरे ट्रक ने फिर दो लोगों की जान ले ली। राखड़ से भरे ट्रक ने ई-बाइक को रौंद दिया। ई-बाइक सवार दोनों लोग ट्रक में दब गए इसके बाद ई-बाइक में आग लगने के कारण बाइक सवार दोनों लोग जिंदा जल गए। भीषण सड़क हादसा रविवार को इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाइवे पर मोरटक्का चौकी क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप के पास हुआ। हादसे के बाद मोरटक्का चौकी पुलिस ने आरोपित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया। हादसे के बाद सड़क पर लंबा जाम लग गया, पुलिस ने व्यवस्था संभाल जाम खुलवाया। भीषण सड़क हादसे ने दहला इलाका जिले के ओंकारेश्वर थाने अंतर्गत मोरटक्का पुलिस चौकी क्षेत्र में रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। जानकारी के अनुसार ट्रक संत सिंगाजी थर्मल पावर से राखड़ भरकर आ रहा था। तेज रफ्तार ट्रक ने ई-बाइक सवार बड़वाह निवासी 35 वर्षीय विनीत शर्मा जो खंडवा में सहायक कोषालय अधिकारी के पद पदस्थ थे व उनके मित्र 40 वर्षीय मोहसिन अली को अपनी चपेट ले लिया।   टक्कर के बाद पलटा ट्रक, बाइक सवार दबकर जिंदा जले ट्रक ने ई-बाइक को जोरदार टक्कर मारी इसके बाद ट्रक पलट गया। ट्रक के नीचे बाइक सहित सवार दो लोग भी दब गए। ई-बाइक में आग लग गई। जिससे बाइक सहित दोनों युवकों को बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। देखते-देखते दोनों लोग आग में जिंदा जल गए। सूचना मिलते ही पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा, ओंकारेश्वर तहसीलदार उदय मंडलोई और मोरटक्का चौकी प्रभारी लखन डावर पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और मशक्कत कर शवों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक दोनों पूरी तरह जल चुके थे। हादसे के बाद सड़क के दोनों ओर लंबा जाम लग गया, जिसे देर रात तक पुलिस जवानों ने कड़ी मेहनत से खुलवाया। भारी वाहनों पर राजनीति का दबाव स्थानीय लोगों ने इस दर्दनाक हादसे के पीछे प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों से देशगांव से इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगी हुई थी, लेकिन हाल ही में राजनीति दबाव में आकर खंडवा कलेक्टर ने इस मार्ग पर फिर से भारी वाहनों की अनुमति दे दी। नतीजतन, इस सड़क पर रोजाना ट्रकों और डंपरों की भरमार है और दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।   कीड़े-मकोड़ों की तरह जान गवां रहे लोग लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आमजन की जानें कीड़े-मकोड़ों की तरह जा रही हैं। हादसे से आक्रोशित लोगों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से मांग की है कि खंडवा-इंदौर इच्छापुर मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन तत्काल प्रतिबंधित किया जाए, अन्यथा आने वाले दिनों में और भी भयावह घटनाएं सामने आ सकती हैं।

मूर्ति विसर्जन पर तनाव: कटक में हिंसा, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अस्थायी प्रतिबंध

कटक  ओडिशा के कटक जिले से बड़ी खबर सामने आई है, जहां गणेश और अन्य मूर्तियों के विसर्जन के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हुई। विवाद बढ़ने और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के कारण राज्य सरकार ने सुरक्षा कड़ी करते हुए सोशल मीडिया और इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक यह रोक आज शाम सात बजे से अगले दिन शाम सात बजे तक लागू रहेगी। इसमें विशेष रूप से कट्टक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, कट्टक डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) और 42 मौजा इलाके शामिल हैं। सरकार ने बताया कि यह कदम गलत सूचनाओं, अफवाहों और भड़काऊ संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। इसके अलावा, स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई है, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि कटक में बढ़ती हिंसा चिंता का विषय है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। पटनायक ने कहा कि ओडिशा की परंपरा हमेशा से भाईचारे और सामूहिक सौहार्द की रही है, और सभी को इसे बनाए रखने में मदद करनी चाहिए। बीजेडी की ओर से जारी बयान में भी इस बात पर जोर दिया गया कि सभी पक्षों को संयम दिखाना चाहिए ताकि हालात और बिगड़े नहीं।

चार्जर से टूटा आतंकी नेटवर्क: मोहम्मद यूसुफ की इनसाइड स्टोरी सामने आई

जम्मू  जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) मोहम्मद यूसुफ कटारी ने 22 अप्रैल को पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों से चार बार मुलाकात की थी और उन्हें एक एंड्रॉइड फोन चार्जर दिया था। बाद में यह एक महत्वपूर्ण सबूत बना जिसके आधार पर उसे पकड़ लिया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। 26 वर्षीय कटारी को सितंबर के आखिरी हफ्ते में सुलेमान उर्फ ​​आसिफ, जिबरान और हमजा अफगानी को महत्वपूर्ण रसद सहायता प्रदान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ये तीनों आतंकवादी पहलगाम के रिसॉर्ट शहर में 26 लोगों, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अधिकारियों ने बताया कि कटारी ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह श्रीनगर शहर के बाहर जबरवान पहाड़ियों में चार बार इन तीनों से मिला था। हफ्तों की जांच के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। यह सफलता ऑपरेशन महादेव के स्थल से प्राप्त सामग्री के गहन फोरेंसिक विश्लेषण के बाद मिली है। ऑपरेशन महादेव जुलाई में शुरू किया गया एक आतंकवाद-रोधी अभियान था, जिसके परिणामस्वरूप श्रीनगर के बाहरी इलाके में जबरवान रेंज की तलहटी में पहलगाम नरसंहार में शामिल तीन आतंकवादी मारे गए थे। पुलिस ने आंशिक रूप से नष्ट हुए एंड्रॉइड मोबाइल फोन चार्जर की जांच के बाद कटारी पर ध्यान केंद्रित किया, जो ऑपरेशन के दौरान बरामद कई वस्तुओं में से एक था। श्रीनगर पुलिस ने आखिरकार चार्जर के असली मालिक का पता लगा लिया, जिसने फोन को एक डीलर को बेचने की पुष्टि की। यही वह जानकारी थी जिसने धीरे-धीरे पुलिस को कटारी तक पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि कटारी, जो कथित तौर पर ऊंचे इलाकों में खानाबदोश छात्रों को पढ़ाता था, आतंकवादी समूह के लिए एक प्रमुख स्रोत था। माना जाता है कि उसकी मदद से हमलावरों को चार्जर उपलब्ध कराया गया और दुर्गम इलाकों में उनका मार्गदर्शन किया गया। आतंकवादी सुलेमान उर्फ ​​आसिफ (पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड), जिबरान (अक्टूबर 2024 के सोनमर्ग सुरंग हमले से जुड़ा) और हमजा अफगानी 29 जुलाई को ऑपरेशन महादेव के तहत एक मुठभेड़ में मारे गए। हालांकि, अधिकारियों ने चल रही जांच का हवाला देते हुए और जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन इस गिरफ्तारी को कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यह मामला अंततः राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा जा सकता है, जो पहले से ही पहलगाम हमले की व्यापक साजिश की जांच कर रही है। एनआईए ने 22 अप्रैल के आतंकी हमले के सिलसिले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आतंकवादियों को कथित तौर पर रसद सहायता और आश्रय प्रदान करने का आरोप है।