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Niraj mishra

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Union Minister: अश्विनी वैष्णव ने की रेलवे बोर्ड वॉर रूम की समीक्षा, प्रयासों को सराहा- दी दीपावली की बाधईयां

Ashwini Vaishnav

Ashwini Vaishnav reviews Railway Board War Room Diwali greetings नई दिल्ली। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेलवे बोर्ड के वॉर रूम का दौरा कर त्योहारी सीजन के दौरान यात्रियों की आवाजाही की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने चौबीसों घंटे समर्पित भाव से कार्य कर रहे कर्मचारियों की प्रशंसा की और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का संचालन भारतीय रेलवे (आईआर) ने चालू त्यौहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती यात्रा मांग को पूरा करने के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित प्रबंध किए हैं। भारतीय रेल ने दिवाली पूजा और छठ पर्व के दौरान यात्रियों को सुगम, सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में चलाई गई 7,724 ट्रेनों की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। भारतीय रेलवे द्वारा त्यौहारों के दौरान यात्रियों को सुगम, सुरक्षित व आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तत्परता से कार्य किया जा रहा है। नियमित ट्रेनों के अतिरिक्त, बढ़ी हुई यात्रा मांग को पूरा करने हेतु भारतीय रेल ने 1 से 19 अक्टूबर, 2025 के बीच 3,960 विशेष ट्रेनों का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जिससे देशभर में यात्रियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकी है। 8,000 अतिरिक्त विशेष रेल भारतीय रेलवे की दिवाली और छठ पर्व के दौरान यात्री यातायात में अपेक्षित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए आने वाले दिनों में लगभग 8,000 अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों के संचालन की योजना है, ताकि यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा अनुभव प्राप्त हो सके। ये विशेष रेलगाड़ियां भारतीय रेलवे के सभी जोनों में संचालित की जा रही हैं, जिनमें उत्तर रेलवे (1,919 ट्रेनें), मध्य रेलवे (1,998 ट्रेनें) और पश्चिमी रेलवे (1,501 ट्रेनें) सबसे अधिक संख्या के साथ अग्रणी हैं। इसके अलावा, पूर्व मध्य रेलवे (1,217 ट्रेनें) और उत्तर पश्चिम रेलवे (1,217 ट्रेनें) सहित अन्य जोनों ने भी क्षेत्रीय यात्रा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त सेवाएं शुरू की हैं। कुल 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का जोनवार विवरण निम्नानुसार है:

मध्य प्रदेश में रेल विकास को मिली रफ्तार, रतलाम से चलने वाली राजधानी बनेगी सुपरफास्ट

रतलाम   केंद्र की मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश को दो बड़ी रेल परियोजनाओं की सौगात दी है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जहां कैबिनेट ने रेल मंत्रालय की 4 रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है. जहां प्रदेश को वडोदरा-रतलाम रेल लाइन और इटारसी-भोपाल-बीना रेल लाइन है. जिसके बाद एमपी की गुजरात से कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो वहीं इटारसी से बीना की दूरी कम होगी. मध्य प्रदेश की बढ़ेगी गुजरात से कनेक्टिविटी मध्य प्रदेश वासियों के लिए अब गुजरात का सफर आसान होगा. वे कम समय में यात्रा पूरी कर सकते हैं. साथ ही व्यापारिक कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी. जिससे प्रदेश की आर्थिक को बढ़ावा मिलेगा. ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि मध्य प्रदेश को वडोदरा-रतलाम रेल लाइन की सौगात मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी लाइन है. रतलाम से गुजरात के वड़ोदरा के बीच तूफान बन दौड़ेंगी ट्रेनें. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अब गुजरात से रतलाम तूफान की रफ्तार में राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें आएंगी. रेल लाइन के कर्व्स को ठीक किया गया है और साथ ही तकनीक को उन्नत बनाया गया है. तीसरी और चौथी लाइन से ट्रेनों को रफ्तार मिलेगी जिससे यात्रा का समय घटेगा. ट्रेनों की स्पीड में इजाफा होगा. राजधानी जैसी वीवीआईपी ट्रेन में सफर का आनंद बढ़ जाएगा. वडोदरा-रेतलाम रेल लाइन लंबा सेक्शन यह 259 किलोमीटर की लाइन होगी. यह काफी लंबा सेक्शन है. इसकी लागत ₹8,885 करोड़ है. यह पूरा सेक्शन गुजरात और मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है. इस नई रेल लाइन परियोजना से गुजरात के वडोदरा, पंचमहल और दाहोद जिलों को और मध्य प्रदेश के झाबुआ और रतलाम जिलों को फायदा होगा. रेल मंत्री ने कहा इस सेक्शन में काफी मुश्किलें हैं, क्योंकि वडोदरा-रतलाम रेल लाइन में काफी स्टीव कर्व हैं और जब भी कर्व पर गाड़ी चलती है तो उसकी स्पीड को कम करना पड़ता है. लिहाजा इस प्रोजेक्ट के माध्यम से इस कर्व को सीधा किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट से सरकार को होगा फायदा जिसके बाद गाड़ी की स्पीड को बढ़ाया जा सकता है. इसकी जरूरत भी है, क्योंकि यह दिल्ली से मुंबई का कॉरीडोर है. इस कॉरीडोर में कैपिसेट की काफी डिमांड आती है. रतलाम-वडोदरा को जोड़ने का यह काफी बड़ा प्रोजेक्ट है. इसमें बहुत बड़ा पर्यावरणीय फायदा भी है, क्योंकि 38 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड हर साल बचती है और साढ़े 7 करोड़ लीटर डीजल हर साल बचेगा. साथ ही लॉजिस्टिक कास्ट भी हर साल लगभग 856 करोड़ बचेगा. इटारसी-भोपाल-बीना रेल लाइन सौगात वहीं इसके बाद मध्य प्रदेश को दूसरी सौगात इटारसी-भोपाल-बीना रेल लाइन की मिली है. यह इटारसी-भोपाल-बीना के बीच चौथी रेल लाइन है. यह काफी लंबा और जरूरी सेक्शन है. रेल मंत्री ने कहा 237 किमी के इस प्रोजेक्ट से टूरिज्म कनेक्टिविटी बढ़ेगी. इस बीच उदयगिरी गुफाएं, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी को कनेक्ट करेगा. जिससे टूरिज्म और बढ़ेगा. इस रेल लाइन में बनेंगे 9 टनल वहीं 32 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड CO₂ बचेगा, जो 1.3 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है. इस रेल लाइन में 4 जरूरी ब्रिज, 39 मेजर ब्रिज और 151 माइनर ब्रिज होंगे. पहाड़ी क्षेत्र होने के चलते इस रेल लाइन में 9 टनल होंगे. इसके साथ ही 43 ओवर ब्रिज और 39 अंडर पास ब्रिज होंगे. 

बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव: नए रूट और स्टॉपेज के साथ बढ़ेगी ट्रेन की पहुंच

बिलासपुर बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22843/22844) का विस्तार कर दिया गया है। अब यह ट्रेन बक्सर स्टेशन तक जाएगी। 10 अक्टूबर से बिलासपुर से रवाना होने वाली 22843 बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर तक जाएगी। वहीं, 11 अक्टूबर से पटना से रवाना होने वाली 22844 पटना-बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर रेलवे स्टेशन से चलेगी। इन स्टेशनों पर होगा स्टॉपेज पटना-बक्सर के बीच छह स्टेशनों के यात्रियों को भी इस ट्रेन का लाभ मिलेगा। रेलवे ने दानापुर, बिहटा, आरा, बिहिया, रघुनाथपुर और डुमरांव स्टेशनों पर ट्रेन को वाणिज्यक ठहराव देने का निर्णय लिया है। रेलवे ने इन स्टेशनों पर ट्रेन के आगमन और प्रस्थान का समय भी जारी कर दिया है। इसके तहत बिलासपुर से यह ट्रेन 20:30 बजे छूटेगी। पटना 13:48 बजे, दानापुर 14:11 बजे, बिहटा 14:29 बजे, आरा 14:50 बजे, बिहिया 15:09 बजे, रघुनाथपुर 15:23 बजे, डुमरांव 15:38 बजे पहुंचेगी। इसके बाद बक्सर स्टेशन पर यह ट्रेन 16:10 बजे पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन बक्सर से 21:35 बजे रवाना होगी और पटना रात 12:03 बजे पहुंचेगी।  

रियासत काल की परंपरा: देर रात 901 ज्योति कलशों का विसर्जन, रेल ट्रैक पर रुक गई ट्रेनें

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डोंगरगढ़ शारदीय नवरात्र के समापन पर मां बम्लेश्वरी मंदिर से देर रात एक भव्य शोभायात्रा निकली। इस शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर ज्योति कलश लिए मां की जयकारों के साथ आगे बढ़ी। कुल 901 प्रज्वलित कलशों का महावीर तालाब में विसर्जन किया गया। यह अनूठा दृश्य देखने के लिए हजारों श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचे और तालाब किनारे आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। डोंगरगढ़ की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर भी मानी जाती है। विसर्जन यात्रा मंदिर से शुरू होकर छिन्नमस्तिका मंदिर होते हुए रेलवे ट्रैक पार कर मां शीतला मंदिर पहुंची। यहां मां शीतला और मां बम्लेश्वरी के माई ज्योत का मिलन करवाया गया, जो इस पूरे अनुष्ठान की विशेषता है। सबसे खास और अनोखी परंपरा यह है कि इस विसर्जन यात्रा के मार्ग में मुंबई–हावड़ा मुख्य रेलवे लाइन आती है। विसर्जन के दौरान रेल यातायात पूरी तरह थम जाता है। भारतीय रेलवे दोनों ओर से आने वाली गाड़ियों को रोक दिया जाता है। लगभग तीन से चार घंटे तक इस व्यस्त रेलखंड पर मेगा ब्लॉक रहता है। आस्था और परंपरा के इस संगम के आगे आज भी रेलों के पहिए रुक जाते हैं। इस परंपरा की नींव रियासत काल में रखी गई थी। रियासत काल से चली आ रही परंपरा खैरागढ़ के तत्कालीन शासक राजा लाल उमराव सिंह ने 21 अगस्त 1883 को ब्रिटिश सरकार और बंगाल-नागपुर रेलवे के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत रेल लाइन निर्माण के लिए जमीन और न्यायिक अधिकार सौंपे गए। इस समझौते के दस्तावेज (deeds) में डोंगरगढ़ का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि राजा लाल उमराव सिंह ने जमीन देने के साथ ही डोंगरगढ़ स्टेशन में रेलों के ठहराव और नवरात्र के समय ज्योति विसर्जन यात्रा के लिए रेल पटरियों पर ब्लॉक देने की शर्त भी रखी थी। इसी परंपरा का असर आज भी जीवित है, जब रेलवे नवरात्र की इस परंपरा के सम्मान में ट्रेनों को रोक देता है। डोंगरगढ़ की नवरात्रि का यह विसर्जन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और आस्था का ऐसा संगम है, जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को दशकों से अपनी ओर आकर्षित किया है।