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सख्त कानून और मिशन शक्ति के दम पर महिलाओं की सुरक्षा हुई बेहतर, देश में अब 17वें स्थान यूपी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से यूपी में महिला सुरक्षा मजबूत NCRB रिपोर्ट में दिख रहा योगी सरकार की सख्ती का असर, महिलाओं के खिलाफ अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 11% कम  सख्त कानून और मिशन शक्ति के दम पर महिलाओं की सुरक्षा हुई बेहतर, देश में अब 17वें स्थान यूपी – योगी सरकार की कड़ी कार्रवाई ने घटाए विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं के खिलाफ अपराध लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिलाओं के खिलाफ अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति और मिशन शक्ति अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन ने यूपी को महिलाओं की सुरक्षा के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर स्थिति में ला खड़ा किया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की क्राइम इन इंडिया 2023 रिपोर्ट में योगी सरकार की बेहतर कानून व्यवस्था और महिलाओं सुरक्षा को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम रही। वर्ष 2023 में महिलाओं से जुड़े 66,381 मामले दर्ज हुए, लेकिन प्रति लाख महिला आबादी पर अपराध दर केवल 58.6 रही, जो राष्ट्रीय औसत 66.2 से करीब 11 प्रतिशत कम है। इस आधार पर यूपी महिलाओं के खिलाफ अपराध दर में देशभर में 17वें स्थान पर है। विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में यूपी का बेहतरीन प्रदर्शन  वहीं प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला सम्मान भंग (शील भंग) से जुड़े मामलों में भी यूपी राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में रहा। देशभर में ऐसे मामलों की संख्या 83,891 रही और अपराध दर 12.4 रही। जबकि उत्तर प्रदेश में केवल 9,453 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 8.3 रही। इस श्रेणी में यूपी अन्य राज्यों की तुलना में 19वें स्थान पर है। वहीं दुष्कर्म (IPC 376) के मामलों में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति संतोषजनक रही। पूरे देश में ऐसे 29,670 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.4 रही। वहीं यूपी में 3,516 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 3.1 रही। इस आधार पर प्रदेश 22वें स्थान पर है, यानी राष्ट्रीय औसत से नीचे। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े POCSO एक्ट के मामलों में भी यूपी की तस्वीर बेहतर दिखी। देशभर में कुल 67,694 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 15.2 रही। वहीं उत्तर प्रदेश में 8,706 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 10.2 रही। इस श्रेणी में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। यदि कुल मिलाकर देखा जाए तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों में यूपी का क्राइम रेट 58.6 रहा, जबकि देश का औसत 66.2 था। इस लिहाज से यूपी कई बड़े राज्यों से बेहतर स्थिति में है। मिशन शक्ति, सख्त कानून व्यवस्था और कार्रवाई का दिख रहा असर महिला अपराध दर में आई कमी केवल पुलिस की सक्रियता का परिणाम नहीं है, बल्कि महिलाओं की शिकायत दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति और त्वरित कानूनी कार्रवाई का भी नतीजा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन शक्ति अभियान ने महिलाओं को आत्मविश्वास दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए खुलकर आगे आएं। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से न्याय सुनिश्चित हुआ है।

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन: संघ में कटुता नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि है विचार

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए संघ के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का जारी किया. पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में संघ के स्वयंसेवक रहे विजय कुमार मल्होत्रा के निधन का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी. पीएम मोदी ने संघ के शताब्दी वर्ष का गवाह बनने को गौरव का पल बताया और कहा कि आज जो सिक्का जारी हुआ है, उस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित हुई है. इस पर संघ का बोधवाक्य भी लिखा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक 1963 में 26 जनवरी की परेड में भी शामिल हुए थे और आन-बान-शान के साथ देशभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. इसकी झलक भी डाक टिकट में है. पीएम मोदी ने कहा कि स्वयंसेवक जिस तरह राष्ट्र निर्माण के काम में जुटे हुए हैं, उसकी झलक भी टिकट में है. उन्होंने स्मारक सिक्कों और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बधाई भी दी. पीएम मोदी ने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है. संघ के स्वयंसेवक समाज को समृद्ध करने में जुटे हैं. उन्होंने कहा कि यह अविरल तप का फल है, यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है. पीएम ने कहा कि आदिवासी कल्याण से लेकर विविध क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक काम कर रहे हैं. धाराएं बढ़ीं, लेकिन विरोधाभास नहीं. विचार एक ही है- राष्ट्र निर्माण. संघ ने राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की राह चुनी. इसके लिए शाखाएं शुरू हुईं. उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की वेदी हैं. इन शाखाओं में त्याग पनपता रहता है. पीएम ने कहा कि अहं से वयम तक की यात्रा शाखाओं में पूरी होती है. शाखा जैसी सरल जीवन पद्धति ही संघ के सौ वर्षों के सफर का आधार बने. उन्होंने कहा कि समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण की साधना से. संघ ने जिस कालखंड में जो चुनौती आई, उसमें संघ ने खुद को झोंक दिया. आजादी के आंदोलन में संघ का बहुत योगदान- पीएम मोदी पीएम मोदी ने आजादी के आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार की सक्रिय भागीदारी से लेकर हैदराबाद के निजाम और दादरा नगर हवेली तक, संघ का बहुत योगदान रहा. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी संघ को कुचलने का प्रयास हुआ. संघ को मुख्य धारा में नहीं आने देने के लिए अनगिनत साजिशें हुईं. पीएम मोदी ने कहा कि गुरु जी जब जेल से बाहर आए, तब उन्होंने बहुत सहजता से कहा था कि कभी कभी जीभ दांतों के बीच में आ जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ दिया करते. जीभ भी हमारी है, दांत भी. उन्होंने कहा कि जेल में तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, अत्याचार हुए लेकिन गुरु जी के मन में कोई भेद नहीं था. उनका व्यक्तित्व ऋषितुल्य था. पीएम मोदी ने कहा कि संघ पर चाहे प्रतिबंध लगे, लेकिन स्वयंसेवकों ने मन में कटुता को कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लोकतंत्र पर अडिग विश्वास ने मन में कटुता को जन्म नहीं लेने दिया. अनेक थपेड़े सहते हुए भी अडिग खड़ा है संघ- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि समाज के अनेक थपेड़े सहते हुए भी संघ विराट वृक्ष की तरह अडिग खड़ा है. उन्होंने कहा कि अभी एक स्वयंसेवक ने कितनी सुंदर प्रस्तुति दी- हमने देश को ही देव माना है और देह को ही दीप बनाकर जलना सीखा है. पीएम मोदी ने कहा कि शुरू से ही संघ राष्ट्रभक्ति का पर्याय रहा है. जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया, तब संघ के स्वयंसेवक शरणार्थियों की सेवा में अपने सीमित संसाधनों के साथ सबसे आगे खड़े थे. उन्होंने कहा कि 1956 में जब गुजरात में भुज में भूकंप आया था, तब भी स्वयंसेवक आगे थे. खुद कष्ट उठाकर दूसरों का दुख दूर करना, ये संघ के स्वयंसेवकों का परिचायक है. स्वयंसेवक कठिन घड़ी में सेना के साथ खड़े रहे. पीएम मोदी ने 1984 के सिख दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि तब अनेक सिख परिवार स्वयंसेवकों के घर आश्रय लिया था. उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम चित्रकूट गए, नानाजी देशमुख से मिले और संघ के स्वयंसेवकों के कार्य देख हैरान रह गए थे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी जब नागपुर गए, हैरान रह गए. आदिवासी परंपराएं सहेजने में संघ का बड़ा योगदान- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की आपदा हो या कोई और, संघ के स्वयंसेवक आज भी हर मुश्किल समय में सबसे आगे रहता है. उन्होंने कहा कि संघ ने दुर्गम इलाकों में भी उनकी संस्कृति, भाषा और कला के संरक्षण का कार्य किया. संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाई है. पीएम मोदी ने कहा कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों की सराहना करूंगा, जो आदिवासियों का जीवन बेहतर करने में जुटे हैं. संघ की स्थापना के समय चुनौतियां अलग थीं, आज अलग- पीएम पीएम मोदी ने छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को समाज के लिए बड़ी बीमारी बताया और संघ की ओर से समरसता के लिए उठाए गए कदम गिनाए. उन्होंने कहा कि सौ साल पहले जब संघ अस्तित्व में आया था, तब हमें सैकड़ों वर्षों की राजनीतिक गुलामी से मुक्ति पानी थी. अपनी संस्कृति की रक्षा करनी है. पीएम मोदी ने कहा कि सौ साल बाद आज जब भारत तेजी से विकसित होने की तरफ बढ़ रहा है, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, देश का एक बड़ा वर्ग गरीबी को पराजित कर आगे आ रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं के लिए नए-नए अवसर आ रहे हैं, तब आज की चुनौतियां अलग हैं और संघर्ष भी. दूसरे देशों पर हमारी आर्थिक निर्भरता एक साजिश है. डेमोग्राफिक बदलाव एक चुनौती है और हमारी सरकार इन चुनौतियों से तेजी से निपट रही है. पीएम ने कहा कि एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे यह कहते हुए खुशी है कि संघ ने इन चुनौतियों को … Read more

सीएम मोहन यादव ने किए मार्कंडेय मंदिर के दर्शन, भावांतर योजना पंजीयन 3 अक्टूबर से शुरू करने का निर्णय

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उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन के मार्कंडेय मंदिर में दर्शन, पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों के लिए घोषणा करते हुए बताया कि भावांतर योजना के तहत पंजीयन की तारीख 10 अक्टूबर से घटाकर 3 अक्टूबर कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने भावांतर योजना के तहत पंजीयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय किया है। जानकारी के मुताबिक 3 अक्टूबर 2025 से किसानों का पंजीयन शुरू होगा, जो 24 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।सरकार का कहना है कि इस योजना से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा और उन्हें बाजार की अस्थिरता से राहत मिलेगी। पंजीयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाएं। भावांतर योजना को लेकर किसान संगठनों ने भी संतोष जताया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से लाखों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में अलग-अलग गरबा पंडालों और माता मंदिरों में पूजा-अर्चना की और रात में वहीं विश्राम किया। बुधवार सुबह वे फिर से माता मंदिरों के दर्शन के लिए निकले। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, हमें गर्व है कि हम भी संघ से जुड़े रहे हैं। गुवाहाटी में निवेशकों से करेंगे मुलाकात मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में निवेशकों से मुलाकात होगी। वहीं, किसानों के संबंध में उन्होंने कहा, मुझे बताया गया कि फसल तैयार है, इसलिए भावांतर योजना के पंजीयन की तारीख आगे बढ़ाने के बजाय अब 3 अक्टूबर से ही शुरू कर रहे हैं। किसान 24 अक्टूबर से माल मंडियों में फसल विक्रय कर सकेंगे। सीएम ने यह भी कहा कि उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है, और यदि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी भाव में अंतर आता है तो वह अंतर सरकार किसानों को देगी।

गाजा मुद्दे पर पाकिस्तान की सफाई से नहीं थमा गुस्सा, ट्रंप के प्लान को समर्थन दे फंसे शहबाज

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इस्लामाबाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्री गाजा शांति योजना ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर हलचल मचा दी है। लेकिन इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इस योजना का खुला समर्थन उनके लिए मुसीबत बन गया है। उनके विरोधी कह रहे हैं कि शहबाज शरीफ ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। विपक्षी नेता और आम नागरिक उन्हें 'गद्दार' करार दे रहे हैं जिसने फिलिस्तीन के साथ धोखा किया है। मामला बिगड़ता देख शहबाज सरकार ने सफाई दी है कि ट्रंप की गाजा योजना में पाकिस्तान की सभी मागों को शामिल नहीं किया गया है। ट्रंप ने सोमवार को वाइट हाउस में अपनी गाजा योजना का ऐलान किया। ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद प्रस्तुत की गई इस योजना में गाजा में युद्ध तत्काल खत्म करने, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करने और गाजा के असैन्यीकरण का प्रस्ताव है। योजना में इजरायल को गाजा के आसपास सुरक्षा परिधि बनाने और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई का प्रावधान है, लेकिन कई आलोचकों का मानना है कि यह प्लान इजरायल के हितों को प्राथमिकता देता है और फिलिस्तीनियों की सहमति को नजरअंदाज करता है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खुलेआम तारीफ की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल शुरू से हमारे साथ थे। उन्होंने 100% समर्थन का बयान जारी किया है। वे कमाल के लोग हैं।" इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गाजा योजना का स्वागत करते हुए कहा कि “फिलिस्तीनी जनता और इजरायल के बीच स्थायी शांति ही क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास ला सकती है।” लेकिन उनके इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर कड़ी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। राजनीतिक दलों, विश्लेषकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने इसे "सरेंडर" करार देते हुए सरकार पर ऐतिहासिक रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया। 'मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया' पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने कहा कि मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना से पहले अब्राहम समझौते में शामिल होना पाकिस्तान के लिए “भारी भूल” होगी। मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के नेता अल्लामा राजा नासिर ने योजना को “त्रुटिपूर्ण और अन्यायी” बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनियों की राय को दरकिनार कर अमेरिकी और इजरायली हितों को आगे बढ़ाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान जैनब मजारी ने कहा, “फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान की जनता एकमत है। प्रधानमंत्री का यह कदम देश की ऐतिहासिक स्थिति से विश्वासघात है।” लेखिका फातिमा भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल से सामान्य संबंध स्थापित करना नैतिक और धार्मिक कर्तव्य से पलायन है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी जनता कभी दो-राष्ट्र नीति के सरेंडर को स्वीकार नहीं करेगी। केवल एक फिलिस्तीन है और वह इजरायल के कब्जे में है।” पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं की नाराजगी पत्रकार तलत हुसैन ने योजना की आलोचना करते हुए कहा, “कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं, गाजा में फिलिस्तीनी अथॉरिटी नहीं, हमास का सफाया- और नेतन्याहू हत्याओं के बाद शांति-दूत बन जाएंगे। यह सब ताजा खून की धरती पर ट्रंप का रियल एस्टेट सौदा है।” पत्रकार जर्रार खुहरो ने इसे “इजरायल को पाक-साफ करने और फिलिस्तीनियों के गुस्से को भटकाने की चाल” बताया। वहीं कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने शहबाज शरीफ़ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जनसंहार कर रहे जायोनी देश से शांति की बात करना शर्मनाक है। पाकिस्तान की जनता कभी इसे माफ नहीं करेगी।” सीनियर नेता जावेद हाशमी ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का रुख स्पष्ट था कि इजरायल “एक नाजायज देश” है। जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह खारिज करती है। उन्होंने लिखा, “66,000 शहीद फिलिस्तीनियों की लाशों पर खड़ी किसी भी तथाकथित शांति योजना की तारीफ करना दरअसल गुनहगारों के साथ खड़ा होना है।” पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने भी प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब इजरायल का इतिहास हर समझौते को तोड़ने का रहा है, तो उसे चरणबद्ध वापसी का भरोसा क्यों? गाजा में 20 लाख की आबादी के लिए केवल 600 ट्रक राहत क्यों?” पाक सरकार की सफाई पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित गाजा शांति योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह योजना पाकिस्तान द्वारा सुझाए गए सभी बदलावों को शामिल नहीं करती है। डार ने एक टीवी चैनल पर कहा कि वाशिंगटन द्वारा तैयार अंतिम मसौदा पाकिस्तान के 24 घंटे के भीतर सौंपे गए संशोधनों को नजरअंदाज करता है। डार ने कहा, "ट्रंप की टीम ने कुछ बिंदु साझा किए थे, और हमने 24 घंटे के भीतर अपने संशोधन सौंपने का वादा किया। लेकिन वाशिंगटन द्वारा तैयार दस्तावेज में हमारे सभी सुझावों को शामिल नहीं किया गया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की नीति फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट और अपरिवर्तित बनी हुई है। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के तहत फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार स्थापित की जाएगी, जिसकी निगरानी मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों से बनी एक पर्यवेक्षी संस्था करेगी। उन्होंने गाजा में युद्ध विराम और पूर्ण शांति लाने के प्रयासों के बारे में बात की, जिसमें पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आठ मुस्लिम देशों के नेताओं की तैयारी बैठक भी शामिल थी।

UGC का नोटिस: NIILM विश्वविद्यालय कैथल को घोषित किया गया डिफॉल्टर, छात्रों के लिए अपडेट

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नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) ने यू.जी.सी. अधिनियम, 1956 की धारा 13 के तहत अनिवार्य जानकारी जमा न करने और अपनी वैबसाइट पर सार्वजनिक जानकारी न देने के कारण कम से कम 54 राज्य स्तरीय निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर (चूककर्त्ता) घोषित किया है, जिसमें NIILM विश्वविद्यालय भी शामिल है। ई-मेल और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से भेजे गए कई स्मरणपत्रों (रिमाइंडर्स) का हवाला देते हुए यू.जी.सी. ने कहा कि विश्वविद्यालयों को निरीक्षण के लिए विस्तृत जानकारी, रजिस्ट्रार द्वारा विधिवत सत्यापित सहायक दस्तावेजों के साथ जमा करने का निर्देश दिया गया है। यू.जी.सी. सचिव मनीष जोशी ने कहा, "उन्हें भरे हुए प्रारूप और परिशिष्टों को होम पेज पर एक लिंक देकर अपनी वैबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि जानकारी छात्रों और आम जनता के लिए सुलभ हो सके। इसके बाद ई-मेल और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से कई स्मरणपत्र भेजे गए।" सार्वजनिक जानकारी देने से संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों को हितधारकों को जानकारी प्रदान करने के लिए एक वैबसाइट रखनी होगी, जो चालू हो।

बोर्ड मीटिंग में महिला का असामान्य विरोध, ट्रांसजेंडर छात्राओं के लिए बाथरूम फैसले पर मचा घमासान

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कैलिफोर्निया अमेरिका के स्कूल में बीते दिनों चल रही एक बोर्ड मीटिंग में एक महिला की वजह से हड़कंप मच गया। दरअसल महिला मीटिंग में बीच अचानक एक-एक कर अपने कपड़े उतारने लगी और सिर्फ बिकनी पहनकर अपना भाषण देने लगी। मामला कैलिफोर्निया का है। न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला की पहचान बेथ बॉर्न के रूप में हुई है, जो पहले भी इस तरह के विवाद खड़े कर चुकी है। दरअसल महिला जिले की उस नीति का विरोध कर रही थी, जिसके मुताबिक ट्रांसजेंडर छात्रों को उनकी पसंद के लॉकर रूम और वॉशरूम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी गई है। महिला मॉम्स फॉर लिबर्टी नाम की एक संस्था की अध्यक्ष है। यह वाकया बीते 18 सितंबर को हुआ जब वह डेविस जॉइंट यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की मीटिंग में भाग लेने पहुंची थी। कपड़े उतारने हुए महिला कहने लगी, “मैं डेविस यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट की एक अभिभावक हूं, और मैं आज यहां जूनियर हाई स्कूलों के लॉकर रूम के लिए आपकी नीतियों पर बात करने आई हूँ। एमर्सन, होम्स, हार्पर जूनियर हाई। अभी, हम अपने छात्रों को फिजिकल एजुकेशन की क्लासेस के लिए कपड़े उतारने के लिए कहते हैं। इसलिए मैं आपको बस यह बताने जा रही हूं कि जब मैं कपड़े उतारती हूं तो उन्हें कैसा लगता है।” महिला ने कहा है कि वह अपने कपड़े उतारकर यह दिखाना चाहती थीं कि मौजूदा नियमों के तहत लड़कियां कितनी असुरक्षित महसूस कर सकती हैं। जैसे ही उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए, बैठक में अफरा-तफरी मच गई और बोर्ड के सदस्यों ने बैठक स्थगित कर दी।

राजस्थान सरकार ने कफ सिरप की सप्लाई रोकी, पुनः परीक्षण की तैयारी

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जयपुर खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup से बच्चों की तबियत बिगड़ने के मामले में राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी सामने आए हैं। मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा में भी खांसी की सिरप को पीने से 6 बच्चों की मौत हो गई है। राजस्थान में ड्रग कंट्रोलर ने इस दवा के साथ अब सभी तरह की कफ सिरप की सप्लाई  पर तत्काल रोक लगा दी है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पाेरेशन के निदेशक जय सिंह का कहना है कि राजस्थान में फिलहाल सभी तरह की कफ सिरप की फिर से क्वालिटी चैकिंग (QC) करवाई जा रही है। तब तक के लिए इनकी सप्ताई को रोक दिया गया है।  गौरतलब है कि खांसी की यह दवा, कम्पनी द्वारा इस वर्ष के क्रयादेश के तहत जून, 2025 से आपूर्ति की जा रही है। इस सिरप को अब तक 1 लाख 64 हजार से अधिक मरीजों को दिया जा चुका है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि  28 सितम्बर से पहले उसे इस सिरप को लेकर एक भी शिकायत नहीं  मिली थी। लेकिन जानकारी के अनुसार सितंबर के दूसरे सप्ताह में बांसवाड़ा में करीब 7 बच्चे इस सिरप को लेकर गंभीर रूप से बीमार हुए जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा। आरएमएससीएल के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बांसवाड़ा जिले को इस दवा के 50 हजार डोज मिले थे। इनमें से 13 हजार चिकित्सा केंद्रों को वितरित किए गए थे और शेष 37 हजार डोज वेयरहाउस में सुरक्षित रखे गए हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब दवा का वितरण और उपयोग रोक दिया गया है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि जिले में जिस बैच की शिकायत मिली है, वह आपूर्ति यहां नहीं हुई थी, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे रोक दिया गया है। राजस्थान में  Dextromethorphan HBr Syrup की खरीद जून 2025 से हो रही है।  28 सितम्बर को दवा के संबंध में शिकायत होने के बाद सम्पूर्ण प्रकरण की जांच के लिए विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है। इस कमेटी में आरएमएससीएल के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण), कार्यकारी निदेशक (लॉजिस्टिक) एवं मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है। यह कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने पर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। केंद्र की गाइडलाइन थी, यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं   स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार ने इस दवा के संबंध में 2 साल पहले एक गाइडलाइन जारी की थी कि यह दवा 4 साल से छोटे बच्चों के लिए नहीं है। प्रदेश में इस दवा से तबियत बिगड़ने के जितने भी मामले सामने आए हैं वे सभी बच्चे 4 साल से कम उम्र के हैं। आरएमएससीएल प्रबंधन ने बताया कि 28 सितम्बर, 2025 को औषधि Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml [440] के बैच नम्बर KL-25/147 की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भरतपुर व  29 सितम्बर,2025 को जिला सीकर से उक्त औषधि के बैच संख्या KL-25/148 के संबंध में आरएमएससीएल को शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि सिरप का मरीजों द्वारा उपयोग करने पर उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर, बेचैनी, बेहोशी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही दवा के वितरण पर भी रोक आरएमएससीएल  ने  शिकायती बैच के साथ ही प्रभावी कदम उठाते हुए उक्त औषधि के संबंधित सप्लायर द्वारा क्रयादेश के तहत सप्लाई किये गए सभी बैचों पर तत्काल प्रभाव से उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही, एहतियात के तौर पर अन्य कम्पनी द्वारा आपूर्ति की जा रही खाँसी की इस दवा का वितरण भी आगामी आदेशों तक रोक दिया गया है तथा इसकी भी पुनः गुणवत्ता जाँच करवाई जा रही है। पुन: गुणवत्ता जाँच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।

ऊंटों की आवाजाही पर लगी पाबंदी खत्म, 11 साल से था निर्यात पर रोक

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जयपुर राजस्थान का राज्य पशु और रेगिस्तान का जहाज कहलाने वाले ऊंट के निर्यात पर भजनलाल सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया है। लगभग 11 साल पहले तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने ऊंट को राज्य पशु घोषित करते हुए इसके वध को निशेध करने व अन्य राज्यों में इसकी खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए  विधानसभा में "राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रजनन या प्रवासन का विनियमन) अधिनियम, 2015" पारित करवा करवाया था। अब मौजूदा सरकार ने ऊंटों की घटती आबादी को आधार बनाकर  अन्य राज्यों में अस्थायी प्रजनन या प्रवासन की अनुमति देने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला ऊंटों की गिरती संख्या और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सशर्त निर्यात और प्रवासन की अनुमति से जहां ऊंटपालकों को राहत मिलेगी, वहीं उनके संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। पशुपालन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने के लिए अब कुछ जरूरी प्रक्रियाओं और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। अधिसूचना के अनुसार:     पूर्व अनुमति आवश्यक:     राज्य से ऊंटों को बाहर ले जाने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी।     स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी:     पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा ऊंट का स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बिना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के ऊंट का परिवहन अवैध माना जाएगा।     अस्थायी प्रजनन व कृषि उपयोग हेतु अनुमति:     यदि ऊंट को अस्थायी प्रजनन या कृषि उद्देश्यों के लिए ले जाया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा और वापसी की तिथि भी निर्धारित करनी होगी।     निर्धारित समय में वापसी अनिवार्य:     यदि ऊंट अस्थायी रूप से राज्य से बाहर ले जाया गया है, तो उसे निर्धारित समयावधि में वापस लाना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर अनुमति स्वतः निरस्त हो जाएगी।     कृषि और शैक्षणिक प्रयोग के लिए विशेष अनुमति:     अधिनियम की धारा 15 के उपबंध (7) के तहत कृषि और शैक्षणिक प्रयोगों हेतु ऊंटों को ले जाने के लिए विशेष अनुमति दी जा सकेगी।     सही दस्तावेज और विवरण आवश्यक:     ऊंट का प्रयोग कहां, किस उद्देश्य से और कितने समय के लिए किया जा रहा है, इसका पूरा विवरण अनुमति पत्र में देना होगा।     नियम उल्लंघन पर सजा, 25 हजार तक जुर्माना     राज्य सरकार ने कहा – नियमों के उल्लंघन पर राजस्थान ऊंट (वध निषेध और अस्वीकृत प्रवास या नियमन) अधिनियम–2015 के तहत कार्रवाई होगी। इसमें ऊंट को मारने पर 7 साल तक की सजा है। अवैध परिवहन, तस्करी पर 6 माह से 3 साल तक की सजा और 3 हजार से 25 हजार तक जुर्माना देना होगा।

सोने के दाम 1 अक्टूबर को भी बढ़े, त्योहारी खरीदारी में ग्राहकों को राहत नहीं मिली

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नई दिल्ली सोने में गिरावट का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए आज भी राहत की खबर नहीं आई है। फेस्टिव सीजन में सोना नया रिकॉर्ड बना रहे है और यह आम लोगों के पहुंच से दूर होता जा रहै हे। अक्टूबर माह की शुरुआत में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। MCX पर सोना 1,17,500 रुपए प्रति 10 ग्राम जबकि चांदी की कीमत 1,43,640 रुपए प्रति किग्रा के आसपास है।  दिल्ली में सोना, चांदी के भाव नए शिखर पर राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोना 500 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1.20 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने का भाव सोमवार को 1,500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,500 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा था।  स्थानीय सर्राफा बाजार में 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही और यह 500 रुपए की तेजी के साथ 1,19,400 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले बाजार सत्र में इसकी कीमत 1,18,900 रुपए प्रति 10 ग्राम रही थी। इसके अलावा मंगलवार को चांदी की कीमत 500 रुपए बढ़कर 1,50,500 रुपए प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के नए शिखर पर पहुंच गई। सोमवार को यह 7,000 रुपए चढ़कर रिकॉर्ड 1,50,000 रुपए प्रति किलोग्राम रही थी।    

हर गांव में अनिवार्य रूप से लगेगा एक पंजीकरण शिविर, रामपुर, बिजनौर और हरदोई जिलों ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन

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योगी सरकार का किसानों के पंजीकरण पर जोर, सभी जनपदों में 50% कार्य पूर्ण योगी सरकार की सख्ती से किसानों का पंजीकरण तेज़ी से हो रहा पूरा हर गांव में अनिवार्य रूप से लगेगा एक पंजीकरण शिविर, रामपुर, बिजनौर और हरदोई जिलों ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी सरकार किसानों के पंजीकरण कार्य पर विशेष जोर दे रही है। प्रदेशभर में किसानों का पंजीकरण तेजी से कराया जा रहा है। अब तक उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में 50 प्रतिशत तक फॉर्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हो चुका है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 से पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त उन्हीं किसानों को मिलेगी जिन्होंने पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया होगा। ऐसे में योगी सरकार जल्द से जल्द प्रदेश भर के किसानों के रजिस्ट्रेशन प जोर दे रही है।  हर जिले में शिविर लगाने के निर्देश योगी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि पीएम किसान पोर्टल पर प्रत्येक किसान का विवरण अपडेट कराया जाए। इसके लिए 16 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रतिदिन शिविर लगाए जाएंगे। प्रत्येक गांव में कम से कम एक शिविर आयोजित करना अनिवार्य होगा। यहां पर किसानों को मौके पर पंजीकरण और विवरण अपडेट करने की सुविधा दी जाएगी। कई जिलों ने 55% से अधिक पंजीकरण कार्य पूरा किया प्रदेश में अब तक 50% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। इनमें कई जिले उल्लेखनीय प्रगति कर चुके है। रामपुर – 61.37% बिजनौर – 58.92% हरदोई – 58.31% श्रावस्ती – 58.01% पीलीभीत – 57.58% अंबेडकरनगर – 57.46% मुरादाबाद – 57.17% बरेली – 56.80% गाजियाबाद – 56.79% कौशाम्बी – 56.09% किसानों से की गई अपील योगी सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर अपना पंजीकरण कराएं ताकि किसी भी किसान को पीएम किसान सम्मान निधि की आगामी किस्त से वंचित न होना पड़े।