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Elections for the ABVP: Raghuraj elected as National President and Virendra re-elected

ABVP

Mumbai. The election procedure for the post of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) National President and National General Secretary was successfully completed today and the results were announced from the central office of ABVP in Mumbai. Prof. (Dr.) Raghuraj Kishore Tiwari (Madhya Pradesh) got elected as National President and Dr. Virendra Singh Solanki (Madhya Pradesh) is the re-elected ABVP National General Secretary for the year 2024-2025. Scheduled to be held While announcing the results of the election of ABVP’s National President and ABVP’s National General Secretary, the Election Officer and special invitee member to the National Executive Committee of ABVP, Prof. (Dr.) Masadi Bapurao, stated that both the office bearers will assume their responsibility during the 71st ABVP National Conference scheduled to be held on 28, 29 and 30 November in Dehradun, Uttarakhand. Prof. (Dr.) Raghuraj Kishore Tiwari hails originally from Rewa, Madhya Pradesh. He completed his education up to PhD in Agronomy from Jawaharlal Nehru Krishi Vishwavidyalaya (Agricultural University), Jabalpur. Presently, he is serving as a Professor in the Department of Agronomy at the Rewa campus of the same university. He has been associated with Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) since 1987. As a student activist, he served as the elected President of the Student Union of the College of Agriculture, Rewa, and also as the State Secretary of the Mahakaushal Prant. As a teacher, he was honoured with the University’s Best Teacher Award (2014) by the Indian Council of Agricultural Research (ICAR) and received the Distinguished Scientist Award (2016) from prestigious Tribhuvan University, Nepal. He has published over 125 research papers at national and international levels, authored three books on Agronomy, guided more than 50 minor research projects, and supervised three doctoral dissertations. As the Principal Investigator, he represented his university in a joint research project conducted at the International Rice Research Institute (IRRI), Philippines. He played a pivotal role as a member of the implementation committee of the National Education Policy in the state of Madhya Pradesh. Previously, he served as Mahakaushal Provincial President and National Vice President (2006-09). Currently, he is the Principal Advisor for Agricultural Student Activities (Agrivision) and a Special Invitee Member of the National Executive Council. He has been elected as the National President of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad for the year 2025-26. His residence is in Rewa. Dr. Virendra Singh Solanki hails originally from Indore, Madhya Pradesh. He completed his MBBS from Sri Aurobindo Institute of Medical Sciences (SAIMS), Indore and is pursuing a Doctor of Medicine with specialisation in Community Medicine at the same institute. He has been active in ABVP since 2014. Through ‘MeDeVision’ – an initiative of ABVP for allopathy students, he has provided national leadership to medical and dental students and has played a pivotal role in resolving their key concerns. He led a successful campaign at Devi Ahilya Vishwavidyalaya (DAVV), Indore, demanding the suspension of the Vice Chancellor on the charges of corruption and irregularities in examinations. He has successfully led the agitation in Madhya Pradesh for reimbursement of commercialisation-driven fee hikes in private medical colleges and, in 2018, spearheaded efforts to save the academic career of students of another private medical college which was shut down abruptly. Through a family-run clinic, he is providing the service of medical consultation and distribution of medicines to the deprived sections of our society at low costs. He has previously held responsibilities such as College President, Indore City Secretary, State In-charge of MeDeVision, Central Working Committee Member, MeDeVision National Convener and the National Secretary of ABVP. He has been re-elected as the National General Secretary for the year 2025-26. His residence is in Indore.

इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक पथ संचलन, हजारों स्वयंसेवक एकत्र

इंदौर  एक सदी पूर्व ‘संघे शक्ति कलियुगे’ मंत्र के साथ आरंभ हुई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गौरवशाली यात्रा के एक और प्रसंग का साक्षी आज इंदौर बन रहा है। संघ के एक लाख पचास हजार स्वयंसेवक राष्ट्र प्रथम का भाव लिए पूर्ण गणवेश में कदमताल करते निकल रहे हैं, अलग-अलग इलाकों में यह संचलन शाम तक जारी रहेगा। राष्ट्रवाद, अनुशासन एवं त्याग का अलख जगाते ये पथ संचलन इंदौर के चार जिलों के 34 नगरों से निकाले जा रहे हैं। एक संचलन 30 से 45 मिनट में तय मार्ग पूरा करेगा। समाज में उत्साह, उमंग और ऊर्जा भरने वाला घोष दल भी हर संचलन के साथ होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जहां शताब्दी वर्ष आयोजन हो रहा है वहीं घोष दल भी अपनी यात्रा के 98 वर्ष पूरे कर रहा है। हर संचलन के साथ घोष वादन करते दल भी हैं। संचलन में सह सरकार्यवाह अरुणकुमार के अतिरिक्त मध्य क्षेत्र के कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध, प्रांत प्रचारक राजमोहन, प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, प्रांत के सहकार्यवाह श्रीनाथ गुप्ता सहित कई बड़े पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। पथ संचलन से पहले उद्बोधन एवं शारीरिक प्रकट कार्यक्रम भी हुए। इसमें समाज के विशिष्टजन के साथ ही अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े लोग एवं मातृशक्तियां भी शामिल हुईं। राष्ट्र जागरण के लिए पढ़ाएंगे ये पांच सोपान     नागरिक अनुशासन में ट्रैफिक नियमों के साथ स्वच्छता, टैक्स चुकाना, अतिक्रमण नहीं करना, समय का पालन, सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण सहित 14 बिंदुओं की सीख देंगे।     घर में सभी जाति वर्ग के बंधुओं से समानता का व्यवहार, अपने घर में महापुरुषों के चित्र एवं उनकी विशेष पर्व में सहभागिता करना है।     प्रति वर्ष एक पौधा लगाना, जल पुनर्भरण करना, घर की डिजाइन ऐसी रखना कि प्रकाश एवं हवा अवरुद्ध न हो, डिस्पोजल, कागज का उपयोग न करना सहित 14 अन्य बिंदु।     स्वदेशी जीवनशैली : वेशभूषा में भारतीय संस्कार, पिज्जा बर्गर की बजाए ताजा भारतीय भोजन खाना, घर में मातृभाषा में संवाद सहित 12 अन्य बिंदु।     परिवार प्रबोधन : त्योहार भारतीय तिथि अनुसार मनाएं, दादा-दादी, नाना-नानी से आत्मीय संवाद सहित अन्य बिंदु।  

RSS की सराहना पर संजय दत्त को कांग्रेस नेता की फटकार – ‘नायक नहीं, नालायक है तू’

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मुंबई  बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100वीं वर्षगांठ पर साझा किए गए एक वीडियो ने सियासी हलचल मचा दी है। उस वीडियो में संजय दत्त आरएसएस की तारीफ करते हुए 100वीं वर्षगांठ पर शुभकामना दे रहे हैं। कांग्रेस को यह पसंद नहीं आया और देश की सबसे पुरानी पार्टी ने संजय दत्त को नालायक तक कह दिया। संजय दत्त ने 2 अक्टूबर के दिन अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, “संघ हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है, खासकर संकट और मुश्किल समय में।” इस बयान के बाद से ही सोशल मीडिया पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कांग्रेस का तीखा हमला कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने संजय दत्त पर बेहद कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “नायक नहीं, खलनायक है तू। अपने पिता का नालायक है तू।” आपको बता दें कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे। वह सांसद भी रहे। वहीं, उनकी बहन प्रिया दत्त भी कांग्रेस से जुड़ी हैं। संजय दत्त ने दोनों की विचारधारा के विपरीत जाकर RSS की प्रशंसा की है। सुरेंद्र राजपूत के बयान पर अब तक संजय दत्त की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आपको बता दें कि संजय दत्त पहले कई विवादों में घिरे थे। 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उन्हें गैरकानूनी हथियार रखने के आरोप में TADA कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में वे TADA के आरोपों से बरी हुए, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए और उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी।

मोहन भागवत के आगमन पर सतना-मैहर बने नो-फ्लाइंग जोन, सुरक्षा में जुटे 500 से ज्यादा जवान

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सतना/मैहर   मध्य प्रदेश के सतना और मैहर जिले में आज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के दो दिवसीय दौरे हैं, जिसे देखते हुए दोनों जिलो के कलेक्टरों ने पूरे इलाके को रेड जोन के साथ-साथ नो-फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया है। जारी आदेश के तहत 4 अक्टूबर शनिवार की सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक ड्रोन, पैराग्लाइडर और हॉट एयर बैलून उड़ाने तक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। आपको बता दें कि, संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 4 और 5 अक्टूबर को सतना और मैहर दौरे पर हैं। उनकी सुरक्षा के लिए जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दोनों जगहों पर करीब 500 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। इनमें सतना में 350 और मैहर में 150 जवान शामिल हैं। सुरक्षा की कमान 5 एडिशनल एसपी और 15 डीएसपी को सौंपी गई है। ऐसा रहेगा कार्यक्रम संघ प्रचार प्रमुख विनोद कुमार ने बताया कि वे 3 अक्टूबर को नागपुर से इतवारी–रीवा ट्रेन से रवाना होकर 4 अक्टूबर की सुबह मैहर पहुंचेंगे। यहां वे मां शारदा देवी के दर्शन करेंगे और फिर सतना आएंगे। 5 अक्टूबर को प्रवास के दूसरे दिन सुबह 10:30 बजे वे सिंधी कैंप स्थित बाबा मेहरशाह दरबार साहिब का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद सुबह 11 बजे बीटीआई मैदान में आयोजित विशाल सभा को संबोधित करेंगे। इस सभा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और आमजन शामिल होंगे। मोहन भागवत के दौरे को लेकर प्रशासन अलर्ट रीवा पुलिस जोन के साथ-साथ जबलपुर से भी अतिरिक्त फोर्स बुलाया गया है। सुरक्षा इंतजामों में कोई कमी न रहे, इसके लिए अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। भागवत के प्रवास के दौरान किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 5 मेडिकल टीम बनाई हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टर, फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ को शामिल किया गया है। ये टीमें पूरे प्रवास के दौरान अलग-अलग जगहों पर तैनात रहेंगी। बाबा मेहरशाह दरबार साहिब का लोकार्पण 5 अक्टूबर को प्रवास के दूसरे दिन सुबह 10:30 बजे वे सिंधी कैंप स्थित बाबा मेहरशाह दरबार साहिब का लोकार्पण करेंगे। यहां से सुबह 11 बजे बीटीआई मैदान में आयोजित विशाल सभा को संबोधित करेंगे। सभा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के साथ-साथ आम लोगों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन का अलर्ट जारी मोहन भावत के इस दो दिवसीय दौरे को लेकर सतना और मैहर के साथ साथ रीवा पुलिस जोन और जबलपुर तक से अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैयान की गई है। सुरक्षा इंतजामों में कोई कमी न रहे, इसके लिए अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भागवत के प्रवास के दौरान किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 5 मेडिकल टीमें बनाई हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टर, फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ को शामिल हैं। ये टीमें भागवत के पूरे प्रवास के दौरान हर जगह उनके आसपास ही तैनात रहेंगी। दूसरे दिन यानी 5 अक्टूबर को उनका दौरा सतना के सिंधी कैंप में स्थित बाबा मेहरशाह दरबार साहिब के उद्घाटन से शुरू होगा. ये दरबार साहिब सिख समुदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और इसका लोकार्पण सामाजिक एकता का संदेश देगा. इसके बाद भागवत बीटीआई ग्राउंड में एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे, जिसमें हजारों स्वयंसेवक और आम लोग मौजूद होंगे. सुरक्षा व्यवस्था सख्त सुरक्षा के लिए दोनों जगह पुलिस बल तैनात किया गया है. सतना के जिला कलेक्टर ने बताया कि सभी कार्यक्रमों पर निगरानी रखी जा रही है और ट्रैफिक व पार्किंग का भी पूरा ध्यान रखा गया है. मोहन भागवत के पिछले दौरे की तरह इस बार भी उनके भाषण सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकते हैं.

दिग्विजय सिंह का विवादित बयान: मुस्लिम आबादी पर टिप्पणी, RSS और FIR कार्रवाई पर निशाना

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झांसी  झांसी में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा- RSS दंगे भड़काती है। यह एक नॉन रजिस्टर्ड संस्था है। इनके लोग दंगा कराते हैं। फिर इनकी ओर से बयान आता है कि यह हमारा मेम्बर नहीं। जब संस्था का रजिस्ट्रेशन ही नहीं तो मेम्बर कहां से होगा?  सरकार चाहे तो कभी दंगे न हों। दंगे सरकार और अफसरों की नीयत पर निर्भर हैं। इसे रोकने के लिए समय रहते कदम उठाएं। बरेली बवाल पर उन्होंने कहा कि तौकीर रजा जैसे लोग हिंदुओं में भी हैं। ऐसे लोग भाषण देकर लोगों को उकसाते हैं। दिग्विजय शुक्रवार को दतिया के पीतांबरा पीठ दर्शन के बाद सर्किट हाउस पहुंचे थे। इसके बाद वे भोपाल रवाना हो गए। आरएसएस चंदा वूसली करती है। ये पैसा जाता कहां है। बैंक खाता कहां है? हर विजयादशमी और गुरु पूर्णिमा पर करोड़ों रुपए चंदे में आते हैं। जब संघ का अकाउंट नहीं है तो पैसा जाता कहां है। इनका एक ही एजेंडा है, हिदुओं को भड़काना और संविधान के खिलाफ लोगों को बचपन से तैयार करना। ये कभी आंदोलन प्रदर्शन नहीं करते, हमेशा कानाफूसी की राजनीति करते हैं। RSS के लोग कह रहे हैं कि मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही। उनकी संख्या बढ़ जाएगी, जो कि संभव ही नहीं है। क्योंकि, जितनी हिंदुओं की जनसंख्या घट रही है, उससे कहीं ज्यादा तेजी से मुसलमानों की जनसंख्या घट रही। 2001 और 2011 के बीच का जनसंख्या ग्राफ ये प्रमाणित करता है। अब 2021 की रिपोर्ट तो इन्होंने ही रोक कर रखी है। इसलिए वो बात सामने नहीं आईं। लेकिन RSS और सरकार मिलकर हिंदुओं को भ्रमित कर रहे हैं। अगर कोई 'आई लव मोहम्मद' कहता है और कोई आई लव रामजी, आई लव महादेव, आई लव कृष्ण भगवान, आई लव गांधीजी कहता है तो इसमें किसी को क्या दिक्कत? इसमें मुकदमा दर्ज करने की क्या जरूरत है। दंगे तो सरकार और सरकारी अफसरों की नीयत पर निर्भर हैं। अगर सरकार चाहे तो कभी दंगा नहीं हो सकता है। सरकार को ऐसे संवेदनशील मामलों में समय से कदम उठाने की जरूरत है। बरेली में मौलान तौकीर रजा पर कहा कि कुछ फितरती लोग अगर मुसलमानों में हैं तो हिंदुओं में भी हैं। ऐसे लोग भड़काऊ भाषण देने का काम करते हैं। संभल में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर अवैधानिक निर्माण है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी एक व्यक्ति के अपराध पर उसके परिवार को दंड देना कहीं से भी न्याय नहीं है। सरकार ने लिस्ट जारी की है। एक भी घुसपैठिए का नाम बता दें। किस पोलिंग बूथ पर कौन सा घुसपैठिया है। उसका नाम आ गया हो। घुसपैठिए की परिभाषा क्या है? जब केंद्र में 11 साल से भाजपा की सरकार है। तो घुसपैठिया नेपाल से आया या बांग्लादेश से? ये केवल भाजपा और अमित शाह की नजर में घुसपैठिए हैं। लेकिन घुसपैठिए का नाम तो बताना होगा। कोविड के समय RSS की ओर से कहा गया कि जनता को 7 करोड़ रुपए की मदद की है। मैंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस बारे में पत्र लिखा। उनसे पूछा कि नॉन रजिस्टर्ड संस्था कह रही है कि 7 करोड़ रुपए कलेक्ट करके खर्च किए हैं। तो आखिर कौन से अकाउंट से पेमेंट किया। इन पर तो मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलना चाहिए। नॉन रजिस्टर्ड संस्था ने बिना अकाउंट के 7 करोड़ रुपए कहां से खर्च कर दिए? मगर वित्त मंत्री जी का आज तक जवाब नहीं आया।  

नागपुर में RSS का वार्षिक विजयादशमी समारोह, शस्त्र पूजन के साक्षी बने भागवत और पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नागपुर के ऐतिहासिक रेशिमबाग मैदान में आज विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम न केवल संघ की परंपरागत शस्त्र पूजा और मार्च का प्रतीक बना, बल्कि संगठन के शताब्दी वर्ष की शुरुआत का भी ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पूर्ण गणवेश में मंच पर नजर आए। सुबह करीब साढ़े सात बजे शुरू हुए इस समारोह में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने सबसे पहले शस्त्र पूजा की, जो धर्म की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसके बाद योग प्रदर्शन, प्रात्यक्षिक, नियुद्ध, घोष और प्रदक्षिणा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मैदान को गुंजायमान कर दिया। शताब्दी वर्ष के कारण इस बार कार्यक्रम की भव्यता में तीन गुना वृद्धि हुई, जिसमें पूर्ण गणवेश में 21,000 से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। यह संख्या पिछले वर्षों से कहीं अधिक थी। मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बुधवार को ही नागपुर पहुंचे हैं। उन्होंने दीक्षाभूमि पर भी प्रार्थना की, जहां डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया था। कोविंद ने समारोह को संबोधित करते हुए संघ के योगदान की सराहना की और कहा कि यह आयोजन राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक मील का पत्थर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में एक लाख से ज्यादा ‘हिंदू सम्मेलनों’ समेत कई कार्यक्रमों की योजना बनायी है। इसकी शुरुआत दो अक्टूबर को यहां संगठन के मुख्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वार्षिक विजयादशमी संबोधन से हो गई। केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी।  

संघ के 100 वर्ष: समाज के सहयोग ने बनाया शताब्दी यात्रा को सशक्त और समर्पित

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को अभी सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. इस सौ वर्ष की यात्रा में कई लोग सहयोगी और सहभागी रहे हैं. यह यात्रा परिश्रम पूर्ण और कुछ संकटों से अवश्य घिरी रही, परंतु सामान्य जनों का समर्थन उसका सुखद पक्ष रहा. आज जब शताब्दी वर्ष में सोचते हैं तो ऐसे कई प्रसंग और लोगों का स्मरण आता है, जिन्होंने इस यात्रा की सफलता के लिए स्वयं सब कुछ समर्पित कर दिया. प्रारंभिक काल के वे युवा कार्यकर्ता एक योद्धा की तरह देश प्रेम से ओत-प्रोत होकर संघ कार्य हेतु देशभर में निकल पड़े. अप्पाजी जोशी जैसे गृहस्थ कार्यकर्ता हों या प्रचारक स्वरूप में दादाराव परमार्थ, बालासाहब व भाऊराव देवरस बंधु, यादवराव जोशी, एकनाथ रानडे आदि लोग डॉक्टर हेडगेवार जी के सान्निध्य में आकर संघ कार्य को राष्ट्र सेवा का जीवनव्रत मानकर जीवन पर्यन्त चलते रहे. संघ का कार्य लगातार समाज के समर्थन से ही आगे बढ़ता गया. संघ कार्य सामान्य जन की भावनाओं के अनुरूप होने के कारण शनैः शनैः इस कार्य की स्वीकार्यता समाज में बढ़ती चली गई. स्वामी विवेकानंद से एक बार उनके विदेश प्रवास में यह पूछा गया कि आपके देश में तो अधिकतम लोग अनपढ़ हैं, अंग्रेजी तो जानते ही नहीं हैं तो आपकी बड़ी-बड़ी बातें भारत के लोगों तक कैसे पहुंचेंगी? उन्होंने कहा कि जैसे चीटियों को शक्कर का पता लगाने के लिए अंग्रेजी सीखने की जरूरत नहीं है, वैसे ही मेरे भारत के लोग अपने आध्यात्मिक ज्ञान के चलते किसी भी कोने में चल रहे सात्विक कार्य को तुरंत समझ जाते हैं व वहीं वो चुपचाप पहुंच जाते हैं. इसलिए वे मेरी बात समझ जाएंगे. यह बात सत्य सिद्ध हुई. वैसे ही संघ के इस सात्विक कार्य को धीरे क्यों न हो, सामान्य जन से स्वीकार्यता व समर्थन लगातार मिल रहा है.   संघ कार्य के प्रारंभ से ही संपर्कित व नये-नये सामान्य परिवारों द्वारा संघ कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद व आश्रय प्राप्त होता रहा. स्वयंसेवकों के परिवार ही संघ कार्य संचालन के केंद्र रहे. सभी माता-भगिनियों के सहयोग से ही संघ कार्य को पूर्णता प्राप्त हुई. दत्तोपंत ठेंगड़ी या यशवंतराव केलकर, बालासाहेब देशपांडे तथा एकनाथ रानडे, दीनदयाल उपाध्याय या दादासाहेब आपटे जैसे लोगों ने संघ प्रेरणा से समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में संगठनों को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. ये सभी संगठन वर्तमान समय में व्यापक विस्तार के साथ-साथ उन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. समाज की बहनों के मध्य इसी राष्ट्र कार्य हेतु राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से मौसी जी केलकर से लेकर प्रमिलाताई मेढ़े जैसी मातृसमान हस्तियों की भूमिका इस यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. संघ द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय हित के कई विषयों को उठाया गया. उन सभी को समाज के विभिन्न लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ, जिनमें कई बार सार्वजनिक रूप से विरोधी दिखने वाले लोग भी शामिल रहे. संघ का यह भी प्रयास रहा कि व्यापक हिंदू हित के मुद्दों पर सभी का सहयोग प्राप्त किया जाए. राष्ट्र की एकात्मता, सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द तथा लोकतंत्र एवं धर्म-संस्कृति की रक्षा के कार्य में असंख्य स्वयंसेवकों ने अवर्णनीय कष्ट का सामना किया और सैकड़ों का बलिदान भी हुआ. इन सबमें समाज के संबल का हाथ हमेशा रहा है. 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में भ्रमित करते हुए कुछ हिंदुओं का मतांतरण करवाया गया. इस महत्वपूर्ण विषय पर हिंदू जागरण के क्रम में आयोजित लगभग पांच लाख की उपस्थिति वाले सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु तत्कालीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्णसिंह उपस्थित रहे. 1964 में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना में प्रसिद्ध संन्यासी स्वामी चिन्मयानंद, मास्टर तारा सिंह व जैन मुनी सुशील कुमार जी, बौद्ध भिक्षु कुशोक बकुला व नामधारी सिख सद्गुरु जगजीत सिंह इनकी प्रमुख सहभागिता रही. हिन्दू शास्त्रों में अस्पृश्यता का कोई स्थान नहीं है यह पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से श्री गुरूजी गोलवलकर की पहल पर उडुपी में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन में पूज्य धर्माचार्यों सहित सभी संतों-महंतों का आशीर्वाद व उपस्थिति रही. जैसे प्रयाग सम्मेलन में न हिंदुः पतितो भवेत् ( कोई हिन्दू पतित नहीं हो सकता) का प्रस्ताव स्वीकार हुआ था वैसे ही इस सम्मेलन का उद्घोष था- हिंदवः सोदराः सर्वे अर्थात सभी हिन्दू भारत माता के पुत्र हैं. इन सभी में तथा गौहत्या बंदी का विषय हो या राम जन्मभूमि अभियान, संतों का आशीर्वाद संघ स्वयंसेवकों को हमेशा प्राप्त होता रहा है.  स्वाधीनता के तुरंत पश्चात राजनीतिक कारणों से संघ कार्य पर तत्कालीन सरकार द्वारा जब प्रतिबंध लगाया गया, तब समाज के सामान्य जनों के साथ अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी संघ के पक्ष में खड़े होकर इस कार्य को संबल प्रदान किया. यही बात आपातकाल के संकट समय में भी अनुभव में आई. यही कारण है कि इतनी बाधाओं के पश्चात भी संघ कार्य अक्षुण्ण रूप से निरंतर आगे बढ़ रहा है. इन सभी परिस्थितियों में संघ कार्य एवं स्वयंसेवकों को संभालने का दायित्व हमारी माता-भगिनीयों ने बड़ी कुशलता से निभाया. यह सभी बातें संघ कार्य हेतु सर्वदा प्रेरणास्रोत बन गयी हैं. भविष्य में राष्ट्र की सेवा में समाज के सभी लोगों के सहयोग एवं सहभागिता के लिए संघ स्वयंसेवक शताब्दी वर्ष में घर-घर संपर्क के द्वारा विशेष प्रयास करेंगे. देशभर में बड़े शहरों से लेकर सुदूर गांवों के सभी जगहों तक तथा समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने का प्रमुख लक्ष्य रहेगा. समूचे सज्जन शक्ति के समन्वित प्रयासों द्वारा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आगामी यात्रा सुगम एवं सफल होगी.

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन: संघ में कटुता नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि है विचार

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए संघ के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का जारी किया. पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में संघ के स्वयंसेवक रहे विजय कुमार मल्होत्रा के निधन का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी. पीएम मोदी ने संघ के शताब्दी वर्ष का गवाह बनने को गौरव का पल बताया और कहा कि आज जो सिक्का जारी हुआ है, उस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित हुई है. इस पर संघ का बोधवाक्य भी लिखा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक 1963 में 26 जनवरी की परेड में भी शामिल हुए थे और आन-बान-शान के साथ देशभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. इसकी झलक भी डाक टिकट में है. पीएम मोदी ने कहा कि स्वयंसेवक जिस तरह राष्ट्र निर्माण के काम में जुटे हुए हैं, उसकी झलक भी टिकट में है. उन्होंने स्मारक सिक्कों और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बधाई भी दी. पीएम मोदी ने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है. संघ के स्वयंसेवक समाज को समृद्ध करने में जुटे हैं. उन्होंने कहा कि यह अविरल तप का फल है, यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है. पीएम ने कहा कि आदिवासी कल्याण से लेकर विविध क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक काम कर रहे हैं. धाराएं बढ़ीं, लेकिन विरोधाभास नहीं. विचार एक ही है- राष्ट्र निर्माण. संघ ने राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की राह चुनी. इसके लिए शाखाएं शुरू हुईं. उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की वेदी हैं. इन शाखाओं में त्याग पनपता रहता है. पीएम ने कहा कि अहं से वयम तक की यात्रा शाखाओं में पूरी होती है. शाखा जैसी सरल जीवन पद्धति ही संघ के सौ वर्षों के सफर का आधार बने. उन्होंने कहा कि समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण की साधना से. संघ ने जिस कालखंड में जो चुनौती आई, उसमें संघ ने खुद को झोंक दिया. आजादी के आंदोलन में संघ का बहुत योगदान- पीएम मोदी पीएम मोदी ने आजादी के आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार की सक्रिय भागीदारी से लेकर हैदराबाद के निजाम और दादरा नगर हवेली तक, संघ का बहुत योगदान रहा. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी संघ को कुचलने का प्रयास हुआ. संघ को मुख्य धारा में नहीं आने देने के लिए अनगिनत साजिशें हुईं. पीएम मोदी ने कहा कि गुरु जी जब जेल से बाहर आए, तब उन्होंने बहुत सहजता से कहा था कि कभी कभी जीभ दांतों के बीच में आ जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ दिया करते. जीभ भी हमारी है, दांत भी. उन्होंने कहा कि जेल में तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, अत्याचार हुए लेकिन गुरु जी के मन में कोई भेद नहीं था. उनका व्यक्तित्व ऋषितुल्य था. पीएम मोदी ने कहा कि संघ पर चाहे प्रतिबंध लगे, लेकिन स्वयंसेवकों ने मन में कटुता को कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लोकतंत्र पर अडिग विश्वास ने मन में कटुता को जन्म नहीं लेने दिया. अनेक थपेड़े सहते हुए भी अडिग खड़ा है संघ- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि समाज के अनेक थपेड़े सहते हुए भी संघ विराट वृक्ष की तरह अडिग खड़ा है. उन्होंने कहा कि अभी एक स्वयंसेवक ने कितनी सुंदर प्रस्तुति दी- हमने देश को ही देव माना है और देह को ही दीप बनाकर जलना सीखा है. पीएम मोदी ने कहा कि शुरू से ही संघ राष्ट्रभक्ति का पर्याय रहा है. जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया, तब संघ के स्वयंसेवक शरणार्थियों की सेवा में अपने सीमित संसाधनों के साथ सबसे आगे खड़े थे. उन्होंने कहा कि 1956 में जब गुजरात में भुज में भूकंप आया था, तब भी स्वयंसेवक आगे थे. खुद कष्ट उठाकर दूसरों का दुख दूर करना, ये संघ के स्वयंसेवकों का परिचायक है. स्वयंसेवक कठिन घड़ी में सेना के साथ खड़े रहे. पीएम मोदी ने 1984 के सिख दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि तब अनेक सिख परिवार स्वयंसेवकों के घर आश्रय लिया था. उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम चित्रकूट गए, नानाजी देशमुख से मिले और संघ के स्वयंसेवकों के कार्य देख हैरान रह गए थे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी जब नागपुर गए, हैरान रह गए. आदिवासी परंपराएं सहेजने में संघ का बड़ा योगदान- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की आपदा हो या कोई और, संघ के स्वयंसेवक आज भी हर मुश्किल समय में सबसे आगे रहता है. उन्होंने कहा कि संघ ने दुर्गम इलाकों में भी उनकी संस्कृति, भाषा और कला के संरक्षण का कार्य किया. संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाई है. पीएम मोदी ने कहा कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों की सराहना करूंगा, जो आदिवासियों का जीवन बेहतर करने में जुटे हैं. संघ की स्थापना के समय चुनौतियां अलग थीं, आज अलग- पीएम पीएम मोदी ने छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को समाज के लिए बड़ी बीमारी बताया और संघ की ओर से समरसता के लिए उठाए गए कदम गिनाए. उन्होंने कहा कि सौ साल पहले जब संघ अस्तित्व में आया था, तब हमें सैकड़ों वर्षों की राजनीतिक गुलामी से मुक्ति पानी थी. अपनी संस्कृति की रक्षा करनी है. पीएम मोदी ने कहा कि सौ साल बाद आज जब भारत तेजी से विकसित होने की तरफ बढ़ रहा है, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, देश का एक बड़ा वर्ग गरीबी को पराजित कर आगे आ रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं के लिए नए-नए अवसर आ रहे हैं, तब आज की चुनौतियां अलग हैं और संघर्ष भी. दूसरे देशों पर हमारी आर्थिक निर्भरता एक साजिश है. डेमोग्राफिक बदलाव एक चुनौती है और हमारी सरकार इन चुनौतियों से तेजी से निपट रही है. पीएम ने कहा कि एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे यह कहते हुए खुशी है कि संघ ने इन चुनौतियों को … Read more