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मतदाता सूची अपग्रेड में लापरवाही बरतने वाले चार बीएलओ को भोपाल कलेक्टर ने किया निलंबित

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भोपाल  मतदाता सूची अपग्रेड करने के काम में लापरवाही बरतने वाले चार बीएलओ को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निलंबित कर दिया है। गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने निलंबन का प्रस्ताव भेजा था। बीएलओ को पहले नोटिस दिए गए थे, लेकिन सही जवाब नहीं मिलने पर यह कार्रवाई की गई। अब अन्य बीएलओ पर भी कार्रवाई हो सकती है। एसडीएम ने 77 बीएलओ और 4 सुपरवाइजरों को नोटिस दिए थे। बीएलओ पर कार्रवाई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण-2025) के तहत भोपाल में भी पुनरीक्षण की कार्रवाई की जा रही है। जिसके अंतर्गत मतदाता सूची का अपडेशन नए तरीके से किया जा रहा है। जिसमें साल 2003 की मतदाता सूची से 2025 की मतदाता सूची का मिलान किया जा रहा है। जो मतदाता 2003 की मतदाता सूची में थे। वह और उनके परिवार स्वतः ही 2025 की मतदाता सूची में शामिल हो जाएंगे। अन्य मतदाताओं का भौतिक सत्यापन बीएलओ डोर टू-डोर सर्वे के जरिए करेंगे। इस संबंध में समस्त मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज दिखाने के बाद ही उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। इसी काम में बीएलओ पर कार्रवाई की गई है। इन्हें किया निलंबित मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत बीएलओ शेरसिंह सिकरवार, विवेकानंद मुखर्जी, शंभू सिंह रघुवंशी और रोशनी प्रजापति पर कार्रवाई हुई है। साथ ही कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी सिंह ने जिले के सभी बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजरों को निर्देशित किया है कि निर्वाचन कार्य में लापरवाही करने पर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पहले टेस्ट से पहले बड़ा अपडेट: बुमराह की छुट्टी पक्की, गिल ने बताया टीम में कौन होगा शामिल

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नई दिल्ली  एशिया कप फाइनल के 3 दिन बाद ही टीम इंडिया को वेस्टइंडीज के साथ टेस्ट मैच खेलना है. ये मुकाबला गुरुवार यानी 2 अक्तूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. लेकिन इस मैच से पहले सबसे बड़ा सवाल प्लेइंग इलेवन को लेकर है. जसप्रीत बुमराह की उपलब्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी बीच, भारत के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ में तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है.  बुमराह को टीम में शामिल किया गया है, लेकिन एशिया कप 2025 की जीत के तुरंत बाद टेस्ट क्रिकेट में उनकी सीधी वापसी पर सवाल उठ रहे हैं. प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिल से बुमराह के उपयोग पर सवाल किया गया. यह सीरीज़ भारत के लिए नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र की पहली घरेलू सीरीज़ है और पिछले साल न्यूज़ीलैंड से 3-0 की हार के बाद पहली टेस्ट सीरीज़ भी है. ऐसे में बुमराह की तेज़ी अहम मानी जा रही है. हालांकि गिल ने कहा कि बुमराह की भूमिका मैच दर मैच तय होगी.   बुमराह को लेकर क्या बोले गिल गिल ने कहा, 'हम मैच के हिसाब से फैसला करेंगे कि खेल कितनी लंबी चलती है और गेंदबाज़ कितने ओवर फेंकता है. कुछ भी पहले से तय नहीं है. एशिया कप में बुमराह सात में से पांच मैच खेले थे और कुल सात विकेट लिए थे. उन्होंने पावरप्ले में नियमित रूप से तीन ओवर फेंके और अपनी फिटनेस साबित की. भारत के असिस्टेंट कोच रायन टेन डोशेट ने भी कहा था कि एशिया कप ने बुमराह को टेस्ट के लिए अच्छी तैयारी दी है.' रायन ने कहा, 'उन्होंने टूर्नामेंट में लगभग 25-26 ओवर फेंके, जो टेस्ट से पहले workload management के लिहाज़ से सही है.' इंग्लैंड के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज़ में बुमराह सिर्फ तीन टेस्ट खेले थे और रोटेशन नीति की काफी आलोचना हुई थी. इस बार मैनेजमेंट का रुख बदला हुआ लगता है, हालांकि बुमराह को पहले टेस्ट से पहले वार्म-अप मैच से आराम दिया गया.   वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के लिहाज से अहम है सीरीज वेस्टइंडीज़ इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया से 3-0 की हार के बाद उतर रही है. दूसरी ओर भारत इंग्लैंड के खिलाफ 2-2 ड्रॉ से उभरा है और घरेलू मैदान पर क्लीन स्वीप कर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप अंक जुटाने पर ध्यान देगा. ऐसे में बुमराह की उपलब्धता और प्रदर्शन बेहद अहम होंगे. भारत के पास बुमराह के साथ मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और नितीश कुमार रेड्डी जैसे पेस विकल्प भी मौजूद हैं.

राज्यपाल पटेल ने राजभवन में किया कन्या-पूजन

राज्यपाल  पटेल ने राजभवन में किया कन्या-पूजन कन्याओं को उपहार प्रदान किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल महानवरात्रि पर्व पर राजभवन परिसर स्थित मंदिर में कन्या पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कन्याओं को तिलक लगाकर मिष्ठान और उपहार भेंट किए। राज्यपाल  पटेल ने माँ दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की। प्रदेश और देश के विकास और निवासियों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर राज्यपाल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी  अरविंद पुरोहित, नियंत्रक हाउसहोल्ड मती शिल्पी दिवाकर सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।                                             

फतेहपुर में आकाशीय बिजली का कहर, एक ही परिवार के पिता-पुत्र समेत 7 की मौत

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फतेहपुर  यूपी के फतेहपुर जिले में मंगलवार शाम को आकाशीय बिजली का कहर देखने को मिला. यहां सदर तहसील क्षेत्र के तीन अलग-अलग स्थानों में आकाशीय बिजली गिरने से पिता, पुत्र सहित 7 लोगों को मौत हो गई. इस घटना से पूरे इलाके में कोहराम मच गया. मृतक के  परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. सूचना पर पहुंची पुलिस व राजस्व विभाग की टीम ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन देते हुए सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिलहाल, आगे की कार्यवाही की जा रही है.  पहला मामला फतेहपुर के गाजीपुर थाना क्षेत्र का है. यहां 75 वर्षीय रिटायर्ड रेलकर्मी देशराज की आकाशीय बिजली गिरने से मौके पर ही मौत हो गई. देशराज सिमौर निवासी रिश्तेदार के घर मुंडन संस्कार से निमंत्रण खाकर वापस लौट रहे थे. लेकिन रास्ते में तेज बारिश देख एक बरगद के पेड़ के नीचे खड़े हो गए. इसी बीच देशराज के ऊपर आकाशीय बिजली गिर गई. सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने देशराज को मृत घोषित कर दिया.  दूसरा मामला असोथर थाना क्षेत्र के ग्राम सभा जरौली का है. यहां प्राथमिक विद्यालय के पीछे जंगल में जानवर चरा रहे दो युवकों की आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु हो गई. नीरज गुप्ता, कल्लू गुप्ता ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. वहीं, साथी विपिन रैदास को आनन-फानन नजदीकी सामुदायिक केंद्र में ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.    तीसरा मामला जिले के ललौली के दतौली गांव का है. यहां भेड़ पालक 36 वर्षीय रवी पाल अपने 14 वर्षीय बेटे ऋषभ के साथ दोपहर को भेड़ें चराने जंगल गया था. शाम करीब पांच बजे अचानक तेज बारिश शुरु हुई तो दोनों पास स्थित एक महुआ के पेड़ के नीचे खड़े होकर बचाव करने लगे. इसी दौरान आकाशीय बिजली उसी पेड़ पर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.    रात करीब नौ बजे जब रवी पाल की भेड़ें बिना मालिक के घर लौट आईं तो परिजन और ग्रामीण चिंतित हो उठे. खोजबीन के दौरान दोनों के शव पेड़ के नीचे पड़े मिले, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया. इसके अलावा सदर तहसील क्षेत्र के थरियांव थाना क्षेत्र के कोर्रासादात निवासी 40 वर्षीय सना बानो की भी आकाशीय बिजली गिरने से जान चली गई.  वहीं, खागा तहसील के किशनपुर थाने के अफजलपुर गांव निवासी 45 वर्षीय जागेशरन निषाद भी भैंस चराने के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा हो गया था. जहां अचानक आकाशीय बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस तरह आकाशीय बिजली से जिले में कुल 7 मौते हुईं.  मामले में अविनाश त्रिपाठी (एडीएम फतेहपुर) ने बताया कि राजस्व की टीम राहत कार्यों मे जुटी हुई है. पीड़ित परिजनों को तत्काल मदद दी जा रही है. 48 घंटे के अंदर जो मृतक व्यक्ति हैं उनके परिजनों को राहत राशि पहुंचा दी जाएगी. 

भीषण सड़क दुर्घटना में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की जान बची

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चिरमिरी छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी बुधवार को सड़क हादसे में बाल-बाल बचे. जन्मदिन के मौके पर वह आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चिरमिरी जा रहे थे. इसी दौरान उनकी कार एक ट्रक से जा भिड़ी. गनीमत रही कि कार में सवार मंत्री जायसवाल और जवान सुरक्षित रहे. जानकारी के मुताबिक, मंत्री जायसवाल अपने जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने चिरमिरी जा रहे थे. इसी दौरान चिरमिरी के छठ घाट स्थित मंगलम होटल के पास मंत्री की गाड़ी अचानक एक ट्रक से जा भिड़ी. हादसे में फॉर्च्यूनर कार क्षतिग्रस्त हो गई. तेज धमाके जैसी आवाज़ से कुछ क्षण के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन को मोड़ते वक्त अचानक सामने आए ट्रक से टक्कर हो गई. हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है. हालांकि मंत्री के सुरक्षित रहने की खबर से समर्थकों और प्रदेशवासियों ने राहत की सांस ली. मंत्री जायसवाल हादसे के बाद अपने निर्धारित दौरे पर आगे बढ़ गए.

संघ के 100 वर्ष: समाज के सहयोग ने बनाया शताब्दी यात्रा को सशक्त और समर्पित

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को अभी सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. इस सौ वर्ष की यात्रा में कई लोग सहयोगी और सहभागी रहे हैं. यह यात्रा परिश्रम पूर्ण और कुछ संकटों से अवश्य घिरी रही, परंतु सामान्य जनों का समर्थन उसका सुखद पक्ष रहा. आज जब शताब्दी वर्ष में सोचते हैं तो ऐसे कई प्रसंग और लोगों का स्मरण आता है, जिन्होंने इस यात्रा की सफलता के लिए स्वयं सब कुछ समर्पित कर दिया. प्रारंभिक काल के वे युवा कार्यकर्ता एक योद्धा की तरह देश प्रेम से ओत-प्रोत होकर संघ कार्य हेतु देशभर में निकल पड़े. अप्पाजी जोशी जैसे गृहस्थ कार्यकर्ता हों या प्रचारक स्वरूप में दादाराव परमार्थ, बालासाहब व भाऊराव देवरस बंधु, यादवराव जोशी, एकनाथ रानडे आदि लोग डॉक्टर हेडगेवार जी के सान्निध्य में आकर संघ कार्य को राष्ट्र सेवा का जीवनव्रत मानकर जीवन पर्यन्त चलते रहे. संघ का कार्य लगातार समाज के समर्थन से ही आगे बढ़ता गया. संघ कार्य सामान्य जन की भावनाओं के अनुरूप होने के कारण शनैः शनैः इस कार्य की स्वीकार्यता समाज में बढ़ती चली गई. स्वामी विवेकानंद से एक बार उनके विदेश प्रवास में यह पूछा गया कि आपके देश में तो अधिकतम लोग अनपढ़ हैं, अंग्रेजी तो जानते ही नहीं हैं तो आपकी बड़ी-बड़ी बातें भारत के लोगों तक कैसे पहुंचेंगी? उन्होंने कहा कि जैसे चीटियों को शक्कर का पता लगाने के लिए अंग्रेजी सीखने की जरूरत नहीं है, वैसे ही मेरे भारत के लोग अपने आध्यात्मिक ज्ञान के चलते किसी भी कोने में चल रहे सात्विक कार्य को तुरंत समझ जाते हैं व वहीं वो चुपचाप पहुंच जाते हैं. इसलिए वे मेरी बात समझ जाएंगे. यह बात सत्य सिद्ध हुई. वैसे ही संघ के इस सात्विक कार्य को धीरे क्यों न हो, सामान्य जन से स्वीकार्यता व समर्थन लगातार मिल रहा है.   संघ कार्य के प्रारंभ से ही संपर्कित व नये-नये सामान्य परिवारों द्वारा संघ कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद व आश्रय प्राप्त होता रहा. स्वयंसेवकों के परिवार ही संघ कार्य संचालन के केंद्र रहे. सभी माता-भगिनियों के सहयोग से ही संघ कार्य को पूर्णता प्राप्त हुई. दत्तोपंत ठेंगड़ी या यशवंतराव केलकर, बालासाहेब देशपांडे तथा एकनाथ रानडे, दीनदयाल उपाध्याय या दादासाहेब आपटे जैसे लोगों ने संघ प्रेरणा से समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में संगठनों को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. ये सभी संगठन वर्तमान समय में व्यापक विस्तार के साथ-साथ उन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. समाज की बहनों के मध्य इसी राष्ट्र कार्य हेतु राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से मौसी जी केलकर से लेकर प्रमिलाताई मेढ़े जैसी मातृसमान हस्तियों की भूमिका इस यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. संघ द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय हित के कई विषयों को उठाया गया. उन सभी को समाज के विभिन्न लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ, जिनमें कई बार सार्वजनिक रूप से विरोधी दिखने वाले लोग भी शामिल रहे. संघ का यह भी प्रयास रहा कि व्यापक हिंदू हित के मुद्दों पर सभी का सहयोग प्राप्त किया जाए. राष्ट्र की एकात्मता, सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द तथा लोकतंत्र एवं धर्म-संस्कृति की रक्षा के कार्य में असंख्य स्वयंसेवकों ने अवर्णनीय कष्ट का सामना किया और सैकड़ों का बलिदान भी हुआ. इन सबमें समाज के संबल का हाथ हमेशा रहा है. 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में भ्रमित करते हुए कुछ हिंदुओं का मतांतरण करवाया गया. इस महत्वपूर्ण विषय पर हिंदू जागरण के क्रम में आयोजित लगभग पांच लाख की उपस्थिति वाले सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु तत्कालीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्णसिंह उपस्थित रहे. 1964 में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना में प्रसिद्ध संन्यासी स्वामी चिन्मयानंद, मास्टर तारा सिंह व जैन मुनी सुशील कुमार जी, बौद्ध भिक्षु कुशोक बकुला व नामधारी सिख सद्गुरु जगजीत सिंह इनकी प्रमुख सहभागिता रही. हिन्दू शास्त्रों में अस्पृश्यता का कोई स्थान नहीं है यह पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से श्री गुरूजी गोलवलकर की पहल पर उडुपी में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन में पूज्य धर्माचार्यों सहित सभी संतों-महंतों का आशीर्वाद व उपस्थिति रही. जैसे प्रयाग सम्मेलन में न हिंदुः पतितो भवेत् ( कोई हिन्दू पतित नहीं हो सकता) का प्रस्ताव स्वीकार हुआ था वैसे ही इस सम्मेलन का उद्घोष था- हिंदवः सोदराः सर्वे अर्थात सभी हिन्दू भारत माता के पुत्र हैं. इन सभी में तथा गौहत्या बंदी का विषय हो या राम जन्मभूमि अभियान, संतों का आशीर्वाद संघ स्वयंसेवकों को हमेशा प्राप्त होता रहा है.  स्वाधीनता के तुरंत पश्चात राजनीतिक कारणों से संघ कार्य पर तत्कालीन सरकार द्वारा जब प्रतिबंध लगाया गया, तब समाज के सामान्य जनों के साथ अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी संघ के पक्ष में खड़े होकर इस कार्य को संबल प्रदान किया. यही बात आपातकाल के संकट समय में भी अनुभव में आई. यही कारण है कि इतनी बाधाओं के पश्चात भी संघ कार्य अक्षुण्ण रूप से निरंतर आगे बढ़ रहा है. इन सभी परिस्थितियों में संघ कार्य एवं स्वयंसेवकों को संभालने का दायित्व हमारी माता-भगिनीयों ने बड़ी कुशलता से निभाया. यह सभी बातें संघ कार्य हेतु सर्वदा प्रेरणास्रोत बन गयी हैं. भविष्य में राष्ट्र की सेवा में समाज के सभी लोगों के सहयोग एवं सहभागिता के लिए संघ स्वयंसेवक शताब्दी वर्ष में घर-घर संपर्क के द्वारा विशेष प्रयास करेंगे. देशभर में बड़े शहरों से लेकर सुदूर गांवों के सभी जगहों तक तथा समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने का प्रमुख लक्ष्य रहेगा. समूचे सज्जन शक्ति के समन्वित प्रयासों द्वारा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आगामी यात्रा सुगम एवं सफल होगी.

MP में बारिश का नया ट्रेंड: अगले 4 दिन रहेगा अलर्ट, अक्टूबर में मौसम में उतार-चढ़ाव

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भोपाल  वर्षाकाल का सीजन भले ही 30 सितंबर को खत्म हो गया हो, लेकिन चक्रवाती संरचना के कारण मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी है। मंगलवार को भोपाल समेत 10 जिलों में पानी गिरा। बैतूल में एक घंटे में आधा इंच से अधिक बारिश हुई। प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम देखने को मिलेगा। मौसम विभाग की मानें तो 4 अक्टूबर तक एमपी में तेज आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं इसके बाद तेज बारिश(Heavy Rain) हो सकती है। विदाई से पहले झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं, अब तक 12 जिलों से मानसून की विदाई हो चुकी है। 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून लौट जाएगा। इस बार सितंबर में भी बारिश का कोटा पूरा हो गया। औसत 45.2 इंच पानी गिरा, जो सामान्य बारिश 37.3 इंच के मुकाबले 7.8 इंच अधिक है। अब बात अक्टूबर महीने की। मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहेगा। ग्वालियर में पारा रिकॉर्ड 39 डिग्री तक पहुंच चुका है तो भोपाल, इंदौर, उज्जैन-जबलपुर में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ बारिश भी हुई है। भोपाल-ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश इससे पहले मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर-जबलपुर समेत 10 जिलों में बारिश हुई। बैतूल में डेढ़ इंच पानी गिर गया। बालाघाट के मलाजखंड में सवा इंच, दतिया में आधा इंच से ज्यादा और ग्वालियर में आधा इंच बारिश हुई। भोपाल, जबलपुर, सागर, डिंडौरी, मुरैना में भी बूंदाबांदी हुई। पन्ना में आकाशीय बिजली गिरने से चरवाहे रूप सिंह यादव (40) की मौत हो गई। वह बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे छिपा था। भाई बुध सिंह यादव ने बताया कि रूप सिंह एक हाथ से दिव्यांग था। उसने शादी नहीं की थी। भैंसों को चराकर अपना भरण-पोषण करता था। चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। 12 जिलों से विदा हो चुका मानसून अब तक प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम शामिल हैं। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की मानें तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है। बता दें कि इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। गुना में सबसे ज्यादा बारिश इस बार गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। यहां 65.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच और धार में 33.6 इंच पानी गिर चुका है। इंदौर संभाग की तस्वीर भी सुधरी इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश हुई थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। दूसरी ओर, उज्जैन जिले में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर पहले नंबर पर है। बैरागढ़ में कम, अरेरा हिल्स में इस बार शहर में मानसून आगमन के बाद जून और जुलाई माह में अच्छी बारिश(Heavy Rain) हुई थी, लेकिन अगस्त और सितंबर में कम बारिश हुई। पिछले 122 दिनों में शहर में बैरागढ़ में 1022.2 मिमी बारिश हुई है, हांलाकि अरेरा हिल्स में 1200 मिमी से अधिक बारिश हुई है। लेकिन शहर का कोटा बैरागढ़ में हुई बारिश के आधार पर भी है। इस लिहाज से इस साल सामान्य से 2 इंच कम बारिश इस बार सीजन में हुई है। पूरे मानसूनी सीजन में बारिश 1075.2 मिमी होना चाहिए। मप्र का तापमान: पांच शहरों का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पांच प्रमुख बड़े शहरों में भोपाल में 32.6°C डिग्री, इंदौर में 32.8°C डिग्री, ग्वालियर में 35.6°C डिग्री, उज्जैन में 31.0°C डिग्री और जबलपुर में 33°C डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। बारिश होने के के कारण कई शहरों में दिन के तापमान में थोड़ी कमी दर्ज की गई। पचमढ़ी में दिन का तापमान 25.4 डिग्री तक आ गया। पृथ्वीपुर में 37.0 डिग्री, ग्वालियर में 35.6 डिग्री, खजुराहो में 35.2 डिग्री, श्योपुर में 35.0 डिग्री और सतना में 33.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मंगलवार को प्रदेश में सबसे कम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया जबकि दिन का अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री सेल्सियस पृथ्वीपुर में दर्ज किया गया। मध्यप्रदेश का मानसून मीटर मध्यप्रदेश में इन दिनों कहीं-कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश की औसत वार्षिक बारिश 37.2 इंच है, जबकि इस सीजन में अब तक 45.1 इंच बारिश हो चुकी है। यह कुल लक्ष्य को पार कर चुका है यानी अबतक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। बता दें कि एमपी में अब तक 37.3 इंच पानी गिरना था। इसका मतलब है कि इस समय तक 7.8 इंच ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, पिछले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। मध्यप्रदेश के 41 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया शामिल हैं। कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा 150 प्रतिशत से भी ज्यादा हो चुका है, जबकि श्योपुर में 213 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मंगलवार को MP के बिछिया में 42.8 मिमी, ग्वालियर में 30.4 मिमी, मोहनगढ़ में 30.0 मिमी, रामनगर … Read more

नक्सलियों का विस्फोटक जखीरा मिला, सुरक्षा बलों ने बड़ी साजिश की नाकाम

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बीजापुर  जिले के थाना पामेड़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले FOB काउरगुट्टा इलाके में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। कोबरा 208 बटालियन द्वारा की गई सर्चिंग कार्रवाई के दौरान नक्सलियों का एक बड़ा डम्प बरामद किया गया। नक्सलियों ने यह विस्फोटक और अन्य सामग्री ग्राम कंचाल के जंगलों में गड्ढा खोदकर छिपा रखी थी, ताकि किसी बड़ी साजिश को अंजाम दिया जा सके। सुरक्षा बलों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से यह कोशिश समय रहते विफल कर दी गई। बरामद डम्प से नक्सलियों की हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले हथियार, विस्फोटक और रोजमर्रा की वस्तुएं मिली हैं। इनमें शामिल हैं –     विस्फोटक सामग्री : गन पाउडर, आरडीएक्स, बीजीएल सेल, बीजीएल राउंड, कार्डेक्स वायर, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, पटाखे, तीर बम (इम्प्रोवाइज्ड), इम्प्रोवाइज्ड ग्रेनेड, क्रिस्टल शुगर।     हथियार व धातु उपकरण : रायफल बैनट, आयरन चिम्टा, आयरन रॉड, आयरन कटर।     बिजली और वायरिंग उपकरण : बैटरी, लिथियम बैटरी, सोलर इन्वर्टर, स्पूल वायर, कॉपर वायर।     स्टोरेज व धातु सामग्री : स्टील कंटेनर, प्लास्टिक ड्रम, स्टील पाईप, आयरन फाइल, स्टील प्लेट (बड़ा-छोटा), स्टील तार।     वर्दी और कपड़े : माओवादी वर्दी, कोबरा पैटर्न की कॉम्बैट ड्रेस, पिट्ठू, लाल और हरे कपड़े, वेलक्रो। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को मिली सफलता कोबरा 208 बटालियन के जवानों ने जंगलों में गश्त के दौरान जब तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन में गड्ढा खोदकर छिपाई गई यह सामग्री मिली। बताया जा रहा है कि नक्सली इन विस्फोटकों और हथियारों का उपयोग सुरक्षाबलों पर बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए करने वाले थे। सुरक्षा बलों ने बरामद सभी सामग्री को कब्जे में ले लिया है और क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान जारी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व ने खोले गेट, 3 महीने बाद शुरू हुई सफारी, फील्ड डायरेक्टर ने किया शुभारंभ

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पन्ना   मध्यप्रदेश में वाइल्ड लाइफ के बीच रोमांचक पलों की सैर आज से शुरू हो गई है। अकेले सतपुड़ा और चूरणा को छोड़कर… एमपी के बाकी सभी टाइगर रिजर्व खुल चुके हैं। मानसून में छुट्टी पर रहे जंगलों की सैर करने का मजा आपको भी लेना है, तो बता दें कि यहां आने से पहले एडवांस बुकिंग जरूर करवा लें। नहीं तो आपको बेरंग लौटना पड़ सकता है। बता दें कि पहले ही दिन एमपी के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में हजारों की संख्या में टूरिस्ट पहुंचे हैं। सतपुड़ा के लिए अभी और इंतजार कोर जोन 10 अक्र्टूबर तक बंद रहेगा। तेज बारिश से मढ़ई, चूरना की सड़कें खराब हो गई हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया। अगले 15 दिन की बुकिंग फुल एमपी के 10 टाइगर रिजर्व (tiger reserve mp) में अक्टूबर के अगले 15 दिन बुकिंग लगभग फुल (Advance booking full) है। इन टाइगर रिजर्व में पहले ही दिन 7 हजार से ज्यादा टूरिस्ट ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं पुराने छह टाइगर रिजर्व में यह संख्या 5 हजार से भी ज्यादा है। दशहरा-दिवाली के अवकाश के कारण लोग अक्टूबर के पहले ही पखवाड़े की बुकिंग करवा चुके हैं। खासतौर पर बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के साथ ही पन्ना में भी पूरे महीने आपको टिकट नहीं मिलने वाली। सुबह रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर नरेश यादव ने विधिवत फीता काटकर और पर्यटकों का तिलक कर जिप्सियों को प्रवेश दिया। इसके साथ ही गेट आम पर्यटकों के लिए खोल दिए गए। बरसाती मौसम में सुरक्षा कारणों से रिजर्व का कोर ज़ोन बंद रखा जाता है। अब मौसम साफ होने के बाद पर्यटक यहां बाघ, तेंदुआ, चिंकारा और कई दुर्लभ पक्षियों का दीदार कर सकेंगे। हर साल मानसून सीजन के दौरान टाइगर रिजर्व का कोर ज़ोन बंद रहता है। अक्टूबर की शुरुआत से सैलानियों को एक बार फिर रोमांचक सफारी का मौका मिल रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व के सहायक क्षेत्र संचालक मोहित सूद ने बताया कि इस बार भी अच्छे पर्यटक सीजन की उम्मीद है। उन्होंने जानकारी दी कि टाइगर रिजर्व की बुकिंग फरवरी 2026 तक के लिए अभी से शुरू हो चुकी है। मोहित सूद ने आगे बताया कि टाइगर रिजर्व के सुंदर जंगल, यहां से निकलने वाली केन नदी और यहां पाए जाने वाले वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके साथ ही पीटीआर के बाघों की अठखेलियां देखने भी पर्यटक पन्ना टाइगर रिजर्व आते हैं। सहायक क्षेत्र संचालक ने यह भी बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बोरादोह नामक एक पॉइंट पर पर्यटकों के लिए वोटिंग की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को वोटिंग के दौरान ही बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के दीदार हो चुके हैं। वाइल्डलाइफ लवर्स को क्यों अट्रेक्ट कर रहा एमपी? बता दें कि मध्यप्रदेश टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 785 है, जो देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन हाल ही में वन विभाग ने यह कहते हुए चौंका दिया है कि यह संख्या बढ़ी है और वर्तमान में यहां 1000 के आसपास टाइगर हैं। सफारी की सैर और टाइगर का दीदार हुआ महंगा इस बार टूरिस्ट को जंगलों की सैर (tiger safari) और टाइगर के दीदार करना थोड़ा महंगा पड़ेगा। दरअसल विभाग ने 10% तक शुल्क बढ़ाया है। जिसके बाद 300 रुपए तक की अधिकतम वृद्धि देखने को मिली है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अभी भारतीय टूरिस्ट को प्रीमियम डे का शुल्क 3050 रुपए है, इसमें 10% की वृद्धि की जाए तो यह 3050 से बढ़कर 3355 हो जाएगा। जिप्सी का शुल्क तीन हजार रुपए और जी-वन गाइड का शुल्क 600 रुपए देना होता है, अब इसके लिए भी आपको 6650 रुपए चुकाने होंगे। वहीं यदि आप जी-टू गाइड लेते हैं, तो उसे 600 रुपए के बजाय 480 रुपए देते होते हैं। होटल भी नहीं खाली टूरिस्ट की भीड़ से आबाद हुए टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में सभी होटल एडवांस बुक हैं। ऐसे में आपका यहां बिना एडवांस बुकिंग के आना आपके लिए निराशा का सबब बन सकता है। जानें बुकिंग की क्या है स्थिति? -बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक से 15 अक्टूबर तक की बुकिंग फुल है। 147 वाहनों से करीब 800 टूरिस्ट सफारी करने को तैयार बैठे हैं। -पन्ना टाइगर रिजर्व में तीनों गेट की बुकिंग भी आज से 30 अक्टूबर तक फुल हो चुकी है। पहले दिन करीब 510 टूरिस्ट पार्क के अंदर जाने की अनुमति ले चुके हैं। – पेंच टाइगर रिजर्व में एक से 5 अक्टूबर तक एडवांस बुकिंग फुल हो चुकी है। एक दिन में करीब 500 टूरिस्ट के आने का अनुमान है। – कान्हा टाइगर रिजर्व में एक सप्ताह की बुकिंग फुल है। पहले दिन यहां 20 हजार टूरिस्ट पहुंचेंगे। वहीं यहां पर आज से 7 अक्टूबर तक वन्य संरक्षण सप्ताह भी शुरू हो गया है। – संजय टाइगर रिजर्व में भी इस सप्ताह की बुकिंग फुल हो चुकी हैं। यहां टूरिस्ट के लिए नौ वाहन हैं, जिनसे करीब 40 टूरिस्ट सफारी का मजा ले सकेंगे। कैसे पहुंचे? टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क (Tiger reserve in MP) पहुंचने नजदीकी एयरपोर्ट भोपाल, जबलपुर, बनारस, प्रयागराज, नागपुर हैं। रेलवे स्टेशन नर्मदापुरम, शहडोल, सिवनी, दमोह, मंडला फोर्ट, त्यौहारी, मड़वास, नागपुर हैं। वहीं आप बस या प्राइवेट टैक्सी के माध्यम से भी सड़क मार्ग से यहां पहुंच सकते हैं। ये जानवर देख सकते हैं बाघ, चीते (कूनो में), तेंदुआ, हाथी, बायसन, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, गौर, भालू, सांभर, चौसिंगा, चिंकारा के साथ ही विलुप्त प्रजाति के पक्षी भी। 10 टाइगर रिजर्व (tiger reserve mp) – संजय दुबरी, सीधी – पन्ना, पन्ना, छतरपुर – सतपुड़ा, नर्मदापुरम – कान्हा, मंडला-बालाघाट – बांधवगढ़, शहडोल – पेंच, सिवनी-छिंदवाड़ा – वीरांगना दुर्गावती, दमोह – डॉ. विष्णु वाकणकर (रातापानी), भोपाल सीहोर, रायसेन – माधव- शिवपुरी – नौरादेही- सागर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया जिले के लगभग 1536 वर्ग किमी में फैला है। पार्क प्रबंधन ने सफारी टिकट दर में 10% और गाइड चार्ज में 65% की बढ़ोत्तरी की है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर है। निजी वाहन से पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया है। कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला-बालाघाट जिले में लगभग 2,051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर और निकटतम रेलवे स्टेशन चिरईडोंगरी है। पेंच टाइगर रिजर्व कुछ … Read more

नवरात्र व्रत रख छात्राएं पहुंचीं देर से, शिक्षक की सजा पर बजरंग दल का हंगामा

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हाथरस  यूपी के हाथरस में सासनी ब्लाक के संविलियन विद्यालय समामई में छात्राओं ने नवरात्र व्रत व पूजा करने में देरी से स्कूल पहुंचने पर शिक्षक द्वारा मुर्गा बनाए जाने का आरोप लगाया है। सूचना पर पहुंचे बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने स्कूल में हंगामा काटा और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बच्चों का वीडियो वायरल होने पर कोतवाली सासनी पुलिस भी स्कूल पहुंच गई। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। वहीं, बीएसए ने प्रकरण की जांच खंड शिक्षा अधिकारी सासनी को सौंपी है। सासनी कोतवाली क्षेत्र के गांव समामई स्थित कंपोजिट विद्यालय की कुछ छात्राओं ने मंगलवार को आरोप लगाया कि शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार ने छात्राओं को क्लास रूम में मुर्गा बना दिया। वायरल वीडियो में छात्राओं का कहना था कि देरी से आने पर उनको मुर्गा बनाने के साथ डंडे भी लगाए गए। वीडियो में छात्रा का कहना है कि उन्होंने शिक्षक को व्रत के बारे में जानकारी नहीं दी। वहीं, घटना की जानकारी पर स्कूल पहुंचे बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। विद्यालय परिसर में जय श्री राम के नारे लगाए। विद्यालय में मौजूद अध्यापक से पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की नोकझोंक हो गई। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। इधर, हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। बजरंग दल का कहना है कि बुधवार को बीएसए से मिलकर शिकायत की जाएगी। मौके पर तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी और पुलिस भी पहुंच गई थी। दूसरी ओर शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि जो बच्चे आरोप लगा रहे हैं वो नियमित स्कूल नहीं आते और स्कूल का काम भी पूरा नहीं करते। जबकि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को समय समय पर सम्मानित किया जाता है। मुर्गा बनाने व पूजा न करने के जो आरोप लगाए गए हैं वो पूरी तरह निराधार हैं। हाथरस बीएसए स्वाती भारती ने बताया कि कंपोजिट विद्यालय समामई का प्रकरण संज्ञान में आया है। पूरे मामले की विस्तृत जांच किए जाने के निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी सासनी को दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया किसूचना मिलने पर पुलिस स्कूल पहुंची थी। फिलहाल किसी बच्चे के परिजनों ने कोई शिकायत नही की है। इंस्पेक्टर खुद वहाँ पहुँचे थे। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। बजरंग दल विभाग संयोजक हर्षित गौड़ ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने सूचना दी थी कि स्कूल में व्रत रखने पर बच्चियों को मुर्गा बनाया गया है। इसलिए पदाधिकारियो के साथ विद्यालय पहुंचा था। वहां बच्चियों ने मुर्गा बनाने के बारे में बताया है। शिक्षक अभद्र टिप्पणी करता है।