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पाकिस्तान सर क्रीक में सैन्य तैयारी कर रहा, भारत की सतर्कता बढ़ी – राजनाथ सिंह का बयान

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भुज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में कोई दुस्साहस किया, तो भारत इसका कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। राजनाथ सिंह ने कहा, "पाकिस्तान ने सर क्रीक में अपनी सैन्य ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाया है। अगर पाकिस्तान कोई गलत हरकत करता है, तो हम उसे एक मजबूत संदेश देंगे। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का रास्ता सर क्रीक से होकर जाता है।" गुजरात के भुज में एक सैन्य अड्डे पर सैनिकों को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने दशहरा के अवसर पर 'शस्त्र पूजा' करने से पहले यह बयान दिया। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी सर क्रीक क्षेत्र में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बार-बार बातचीत के प्रयास किए हैं, लेकिन पाकिस्तान की मंशा साफ नहीं है। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के 78 साल बाद भी सर क्रीक क्षेत्र में सीमा को लेकर विवाद बना हुआ है। भारत ने इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में खोट है।" सर क्रीक क्या है और इसका क्या महत्व है? सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच गुजरात के कच्छ क्षेत्र और सिंध प्रांत के बीच स्थित एक 96 किलोमीटर लंबी खाड़ी (estuary) है, जो अरब सागर में मिलती है। यह क्षेत्र दलदली और ज्वारीय प्रभावों वाला है, जहां पानी का स्तर ज्वार-भाटे के साथ बदलता रहता है। यह भारत-पाकिस्तान सीमा का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच एक विवादित क्षेत्र भी है। सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र अरब सागर के तटीय क्षेत्र में स्थित है, जो सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समुद्री व्यापार और नौसैनिक गतिविधियों के लिए रणनीतिक बिंदु है। इस क्षेत्र में नौसेना की गतिविधियों और समुद्री निगरानी के लिए यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है। सर क्रीक क्षेत्र में समुद्री संसाधन, जैसे मछली और संभावित तेल व गैस भंडार, मौजूद हो सकते हैं। यह क्षेत्र समुद्री आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के निर्धारण के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो मछली पकड़ने, खनन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक की सीमा को लेकर विवाद है। भारत का कहना है कि सीमा को खाड़ी के बीच से होकर गुजरना चाहिए, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि सीमा को भारत की ओर अधिक होना चाहिए। यह विवाद 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद से चला आ रहा है। भारत ने हमेशा इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की वकालत की है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से बार-बार उकसावे की कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गर्व रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की हालिया उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सेना ने सभी सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। उन्होंने कहा, "मुझे गर्व है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरा किया। हालांकि, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी जारी है।" राजनाथ सिंह ने यह भी खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक क्षेत्र तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की नाकाम कोशिश की थी। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने भारत की रक्षा प्रणाली को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया।"  

क्या ट्रंप ने पुतिन से शांति का ख्वाब खत्म कर दिया? यूक्रेन को लेकर खुला राज

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वाशिंगटन  ऐसा लगता है कि यूक्रेन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया काफी बदल गया है। पहली नजर में तो ऐसा लगता है कि उन्होंने पूरी तरह से इस आशावादी रुख को अपना लिया है कि कीव ‘‘पूरे यूक्रेन को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए लड़ने और जीतने की स्थिति में है’’। इसके साथ यह संदेश भी आया कि इसे साकार करने के लिए यूरोपीय देशों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। ट्रंप के अनुसार यूक्रेन की जीत “समय, धैर्य और यूरोप तथा विशेष रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के वित्तीय समर्थन” पर निर्भर करती है। अमेरिका की एकमात्र प्रतिबद्धता ‘‘नाटो को हथियार उपलब्ध कराना है ताकि नाटो उनके साथ जो चाहे कर सके।’’ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने संदेश के अंत में लिखा, ‘‘सभी को शुभकामनाएं!’’ यह शायद अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति शांति समझौते के अपने प्रयासों से पीछे हट रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि उन्होंने रूस के अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अलग समझौते का विचार छोड़ दिया है। लेकिन यहीं पर अच्छी खबर समाप्त हो जाती है और यहीं पर यूरोपीय नेतृत्व वाले गठबंधन को इस महाद्वीप को और अधिक अस्थिर वातावरण में सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करने की आवश्यकता होगी। नाटो हवाई क्षेत्र में रूसी घुसपैठ के कई सप्ताह बाद, ड्रोनों ने – जिनके रूस से जुड़े होने की अत्यधिक संभावना है – कोपेनहेगन हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में दो बार डेनमार्क के हवाई क्षेत्र को बाधित किया। ऐसा लगा जैसे कि यह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की द्वारा 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण में की गई भविष्यवाणी का पूर्वाभास था। पुतिन की लगातार उकसावे वाली गतिविधियां कीव के यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक खुली चुनौती हैं। इस गठबंधन के केंद्र में, यूरोपीय संघ ने निश्चित रूप से यह प्रदर्शित किया है कि वह इस चुनौती का सामना करने के लिए अपनी वाक्पटुता दिखाने को तैयार है। ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के संस्थानों ने अपने दृढ़ संकल्प के बारे में कभी कोई संदेह नहीं छोड़ा है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रामक युद्ध को ‘‘यूक्रेन के लिए एक न्यायसंगत और स्थायी शांति के साथ समाप्त करने की आवश्यकता है’’। यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल में अपने संबोधन में इसका जिक्र किया था। सबसे पहले, इच्छुक देशों का गठबंधन एक सुसंगत निकाय नहीं है। इसके सदस्यों में नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य, साथ ही ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। लेकिन अमेरिका इसमें शामिल नहीं है। फरवरी में आठ देशों, यूरोपीय संघ और नाटो से बढ़कर, अप्रैल में 33 और सितंबर में 39 सदस्य हो गए। कीव को सैन्य उपकरणों से सहायता देने वाले 57 सदस्यीय यूक्रेन रक्षा संपर्क समूह, जिसकी 30वीं बैठक सितंबर की शुरुआत में हुई थी, के साथ इसका संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी पूरी तरह साफ नहीं है कि यूरोपीय संघ और नाटो के नेता अपने संगठन के सभी सदस्यों की ओर से बोल रहे हैं या नहीं। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्यों में हंगरी और स्लोवाकिया ने रूस के विरुद्ध यूरोप की रक्षा के मामले में अस्पष्ट रुख अपनाया है। नाटो के यूरोपीय सदस्य अमेरिका के इस कदम से बेहद चिंतित हैं और यह चिंता गलत भी नहीं है कि अमेरिका ने नाटो को छोड़ दिया है। यूरोप को अपना धन बढ़ाने, अपनी सैन्य शक्ति विकसित करने तथा निर्णय लेने की ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जो टालमटोल में न फंसी हो, ताकि वह उस छद्म युद्ध को जीत सके जिसे क्रेमलिन ने यूक्रेन और उसके सहयोगियों पर थोपा है। ऐसा करने से यह सुनिश्चित हो जायेगा कि यूरोपीय देश रूस को यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध को पश्चिम के साथ पूर्ण सैन्य टकराव में बदलने से रोकने में बेहतर स्थिति में हैं।  

रियासत काल की परंपरा: देर रात 901 ज्योति कलशों का विसर्जन, रेल ट्रैक पर रुक गई ट्रेनें

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डोंगरगढ़ शारदीय नवरात्र के समापन पर मां बम्लेश्वरी मंदिर से देर रात एक भव्य शोभायात्रा निकली। इस शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर ज्योति कलश लिए मां की जयकारों के साथ आगे बढ़ी। कुल 901 प्रज्वलित कलशों का महावीर तालाब में विसर्जन किया गया। यह अनूठा दृश्य देखने के लिए हजारों श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचे और तालाब किनारे आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। डोंगरगढ़ की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर भी मानी जाती है। विसर्जन यात्रा मंदिर से शुरू होकर छिन्नमस्तिका मंदिर होते हुए रेलवे ट्रैक पार कर मां शीतला मंदिर पहुंची। यहां मां शीतला और मां बम्लेश्वरी के माई ज्योत का मिलन करवाया गया, जो इस पूरे अनुष्ठान की विशेषता है। सबसे खास और अनोखी परंपरा यह है कि इस विसर्जन यात्रा के मार्ग में मुंबई–हावड़ा मुख्य रेलवे लाइन आती है। विसर्जन के दौरान रेल यातायात पूरी तरह थम जाता है। भारतीय रेलवे दोनों ओर से आने वाली गाड़ियों को रोक दिया जाता है। लगभग तीन से चार घंटे तक इस व्यस्त रेलखंड पर मेगा ब्लॉक रहता है। आस्था और परंपरा के इस संगम के आगे आज भी रेलों के पहिए रुक जाते हैं। इस परंपरा की नींव रियासत काल में रखी गई थी। रियासत काल से चली आ रही परंपरा खैरागढ़ के तत्कालीन शासक राजा लाल उमराव सिंह ने 21 अगस्त 1883 को ब्रिटिश सरकार और बंगाल-नागपुर रेलवे के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत रेल लाइन निर्माण के लिए जमीन और न्यायिक अधिकार सौंपे गए। इस समझौते के दस्तावेज (deeds) में डोंगरगढ़ का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि राजा लाल उमराव सिंह ने जमीन देने के साथ ही डोंगरगढ़ स्टेशन में रेलों के ठहराव और नवरात्र के समय ज्योति विसर्जन यात्रा के लिए रेल पटरियों पर ब्लॉक देने की शर्त भी रखी थी। इसी परंपरा का असर आज भी जीवित है, जब रेलवे नवरात्र की इस परंपरा के सम्मान में ट्रेनों को रोक देता है। डोंगरगढ़ की नवरात्रि का यह विसर्जन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और आस्था का ऐसा संगम है, जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को दशकों से अपनी ओर आकर्षित किया है।

बारिश की खलल के बाद फिर शुरू हुआ मैच, राहुल-जायसवाल क्रीज पर

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नई दिल्ली  भारत बनाम वेस्टइंडीज दो मैच की टेस्ट सीरीज का पहला मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा है। टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम मात्र 162 के स्कोर पर ढेर हो गई। इसके जवाब में भारत ने केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल के दम पर सधी हुई शुरुआत की है। बात वेस्टइंडीज की पारी की करें तो, भारतीय गेंदबाजों का सामना वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पूरे दो सेशन भी नहीं कर पाए। मोहम्मद सिराज ने सबसे अधिक 4 विकेट चटकाए, वहीं जसप्रीत बुमराह को 3 तो कुलदीप यादव को 2 विकेट मिले। सिराज भारत में अपना पहला पंजा खोलने से चूक गए। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने बुरी तरह निराश किया। कोई भी बल्लेबाज 40 रन का आंकड़ा नहीं छू पाया। जस्टिन ग्रीव्स 32 रनों के साथ हाईएस्ट स्कोरर रहे। बारिश की खलल के बाद मैच फिर से शुरू केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल की जोड़ी फिर से मैदान पर उतर चुकी है। बारिश की खलल के बाद मैच फिर से शुरू हो गया है। राहुल 20 तो जायसवाल 13 रन बनाकर क्रीज पर हैं।

मतदाता सूची जारी: अंता क्षेत्र में अब 2.27 लाख से अधिक मतदाता दर्ज

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जयपुर/बारां आगामी उपचुनाव की तैयारी के तहत निर्वाचन विभाग राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार बुधवार को अंता विधानसभा क्षेत्र (193) की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया। इस अवसर पर जिला निर्वाचन अधिकारी रोहिताश्व सिंह तोमर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और मीडिया कर्मी उपस्थित रहे।  राजनीतिक दलों को सौंपी गई सूची की प्रति बैठक में निर्वाचन अधिकारियों ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रक्रिया की जानकारी दी। अंतिम प्रकाशन के तहत राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की प्रति हार्ड कॉपी में और सॉफ्ट कॉपी सीडी व पेनड्राइव में उपलब्ध करवाई गई। मीडिया की मौजूदगी में प्रतिनिधियों से प्राप्ति रसीद भी ली गई।   मतदाता संख्या में हुआ इजाफा जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रारूप प्रकाशन के समय अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,26,227 मतदाता दर्ज थे। इनमें 1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिला और 4 अन्य मतदाता शामिल थे। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया 3 से 17 सितंबर तक चली और 25 सितंबर तक सभी का निस्तारण कर दिया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर को जारी अंतिम मतदाता सूची में कुल 2,27,563 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें 1,16,405 पुरुष, 1,11,154 महिला और 4 अन्य मतदाता शामिल हैं।   निर्वाचन आयोग के निर्देशों से कराया अवगत बैठक में राजनीतिक दलों और मीडिया को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों से भी अवगत कराया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अंतिम प्रकाशन के साथ अब अंता क्षेत्र के मतदाता आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए तैयार हैं।

बागेश्वर धाम से बड़ी खबर: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीआईपी मुलाकातों पर लगाया रोक

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छतरपुर बागेश्वर धाम गढ़ा में नवरात्र साधना के समापन पर बड़ा निर्णय लिया गया है। बागेश्वर महाराज के गुरु सन्यासी बाबा ने साधना के दौरान आदेश दिया कि अब बागेश्वर धाम पर आने वाले वीआईपी से मुलाकात नहीं की जाएगी। महाराज जी केवल उन श्रद्धालुओं से मिलेंगे जो सच्चे भक्त बनकर बिना किसी सिफारिश के धाम पर दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। नवरात्र की नौ दिवसीय साधना पूर्ण होने के बाद दशमी के दिन बागेश्वर महाराज ने बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली केन नदी में पहुंचकर व्रत का समापन किया। इस अवसर पर बनारस से आए आचार्यों द्वारा वेद मंत्रों के साथ व्रत पूर्ण कराया गया।   गरीबों की पीड़ा अनसुनी रह जाती है इसके पश्चात धाम पर आयोजित दिव्य दरबार में महाराज ने भक्तों को साधना का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि साधना के दौरान 11 लाख बार पंचमुखी हनुमान नाम का जप और माता रानी की आराधना कर उसे अपने आराध्य बागेश्वर बालाजी के चरणों में समर्पित किया। महाराज ने भक्तों को बताया कि साधना के दौरान उनके गुरु सन्यासी बाबा ने डांटते हुए कहा कि वीआईपी और वीवीआईपी मुलाकातों के कारण गरीब, असहाय और दूर-दराज से किराया उठाकर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की पीड़ा अनसुनी रह जाती है। यही भक्त निराश होकर लौटते हैं, गुरु ने आदेश दिया कि अब से बागेश्वर धाम पर प्रोटोकॉल और सिफारिश वाले वीआईपी और वीवीआईपी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यदि वे आते हैं तो उन्हें अलग से समय दिया जाएगा, लेकिन पहले अवसर गरीब, असहाय, मरीज और सच्चे श्रद्धालुओं को ही मिलेगा। महाराज ने कहा कि कुटिया में साधना के दौरान हमने प्रण लिया कि गुरु जी की आज्ञा अब कभी नहीं टाली जाएगी। दिव्य दरबार में सुनेंगे अर्जियां बागेश्वर महाराज ने कहा की कि अब पहले की भांति दिव्य दरबार में बागेश्वर बालाजी की आज्ञा से भक्तों की अर्जियां सुनी जाएंगी और पर्चे बनाए जाएंगे। साथ पूर्व की ही भांति शाम को मरीजों के दर्शन के समय श्रद्धालुओं को सिद्ध अभिमंत्रित भभूति भी प्रदान की जाएगी। महाराज ने कहा कि यह क्रम आगे भी जारी रहेगा और प्रत्येक गुरुवार को नई नियमावली के तहत भक्तों से मुलाकात कर मंदिर प्रांगण से ही सिद्ध भभूति का वितरण किया जाएगा।

75KM प्रति घंटा की रफ्तार वाला तूफान! IMD का नया और अनोखा अलर्ट जारी

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नई दिल्ली  बंगाल की खाड़ी में बना मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है और तेजी से उत्तर-उत्तर पश्चिम की तरफ तट की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन में ये जानकारी दी है। IMD ने कहा है कि तूफान आज यानी गुरुवार (2 अक्टूबर) की रात तक ओडिशा और उससे सटे आंध्र प्रदेश के तटों को पार कर जाएगा। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने ये भी कहा है कि ये तूफान अगले दिन यानी 3 अक्टूबर तक कमजोर पड़ जाएगा और हवा की स्पीड घटकर 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे रह जाएगी लेकिन तूफान का असर कुछ दिनों तक जारी रहेगा। IMD ने कहा है कि इस मौसमी घटना के कारण अगले 5 दिनों तक आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में तेज हवा के झोंकों संग बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, ओडिशा,पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पूर्वी मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक तेज़ गरज के साथ बारिश हो सकती है और हवाओं का जोर रह सकता है। ओडिशा में भारी बारिश इस बीच, ओडिशा में गुरुवार की सुबह भी बारिश दर्ज की गई। IMD के मुताबिक ओडिशा में भारी बारिश हुई है। राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए चिन्हित संवेदनशील जिलों में कर्मियों और मशीनरी को तैनात किया है। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के सभी हिस्सों में मुख्य रूप से तटीय और दक्षिणी क्षेत्रों में बुधवार से ही भारी बारिश हो रही है। IMD ने आज राज्य के सभी 30 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आईएमडी ने बयान में कहा कि बुधवार को रात में बंगाल की खाड़ी में गहरे दबाव का क्षेत्र बना था जो 17 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से बढ़ रहा था लेकिन अब उसकी गति तेज हो गई है। बयान में कहा गया है कि निम्न दाब गुरुवार की सुबह 5 बज कर 30 मिनट पर गोपालपुर से लगभग 190 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व, कलिंगपट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 190 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व, पुरी (ओडिशा) से 230 किलोमीटर दक्षिण, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 250 किलोमीटर पूर्व और पारादीप (ओडिशा) से 310 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम में केंद्रित थी।" रात में ओडिशा को पार कर जाएगा तूफान आईएमडी ने बताया कि इस तूफान के दो अक्टूबर की रात तक ओडिशा को पार करके आंध्र प्रदेश से लगे हुए गोपालपुर और पारादीप तटों तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, गहरा दबाव एक ऐसी स्थिति है जो एक सुस्पष्ट निम्न दबाव के बाद और चक्रवाती तूफान से पहले आती है, जिसके बाद आमतौर पर भारी वर्षा और तेज हवाएं चलती हैं। IMD ने मछुआरों को तीन अक्टूबर तक ओडिशा तट के पास समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। 75 किलोमीटर प्रति घण्टे हो जाएगी स्पीड बुलेटिन में कहा गया है, "गहरे दबाव क्षेत्र के प्रभाव से मध्य बंगाल और उससे लगे उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एक अक्टूबर से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घण्टे से 60 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से तूफानी हवा चलने की संभावना है। दो अक्टूबर की दोपहर से तीन अक्टूबर की सुबह तक पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में यह रफ्तार धीरे-धीरे 55-65 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से बढ़कर 75 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति तक पहुंच जाएगी।" आईएमडी ने राज्य के सभी बंदरगाहों पर 'स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या-तीन' (एलसी-3) लगाने का भी सुझाव दिया है। एक अनोखी घटना के भी आसार IMD ने कहा है कि इसी अरब सागर में भी एक निम्न दाब का क्षेत्र बना है जो उत्तर-पूर्व की ओर द्वारका और गुजरात तट की तरफ बढ़ रहा है। इसके अलावा उत्तरी भारत के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसकी वजह से 4 से 8 अक्टूबर के दौरान उत्तर भारत में एक ऐतिहासिक मौसमी घटना होने की संभावना है। विभाग के मुताबिक, तीनों प्रणालियों के आपस में टकराने की संभावना है। यह एक बहुत ही अनोखी घटना होगी। इसकी वजह से पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो सकती है।

डॉ. यादव की विजयादशमी बधाई: मुख्यमंत्री ने साझा किया उत्सव का महत्व

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महापर्व विजयादशमी की प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह पावन पर्व हमें 'यतो धर्मस्ततो जयः' का स्मरण कराकर सदैव धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की अथाह प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए संकल्पित होने का आहवान किया है।  

एसिड रिफ्लक्स के पीछे ये 5 कारण हैं, आसान उपायों से करें राहत

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त्योहारों के समय में कुछ हैवी खा लेने या कई बार बिना कारण भी सीने में जलन होने लगती है। सीने में जलन या हार्टबर्न को एसिड रिफ्लक्स के रूप में भी जाना जाता है। इसमें अधपचा खाना गले या मुंह में लौटकर आने लगता है। इससे मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है। आइए जानते हैं, ऐसा क्यों होता है, इसकी पहचान और बचाव कैसे करें। क्यों बढ़ जाता है एसिड रिफ्लक्स का खतरा खाने में जरूरत से ज्यादा मसाले या मिर्च का इस्तेमाल एसिड रिफ्लक्स का कारण बन सकता है। इसके अलावा भी इसके कुछ कारण हो सकते हैं:     ओवरवेट होना या मोटापा     स्मोकिंग     प्रेग्नेंसी     कुछ खास दवाएं ये हैं लक्षण     सीने में जलन: पेट में मौजूद एसिड सीने में जलन पैदा करता है।     गले या मुंह का कड़वा स्वाद: सिर्फ एसिड ही नहीं कई बार अधपचा खाना भी वापस लौटकर आपके गले या मुंह में आ जाता है और कड़वेपन का एहसास होता है।     डकारें: खाना खाने के दौरान कई बार हवा भी अंदर चली जाती है। ऐसा होने से खाना पचने के दौरान गैस बनने लगती है। इससे डकारें आने लगती हैं।     सीने में दर्द: एसिड रिफ्लक्स का यह लक्षण हार्ट अटैक होने का संदेह पैदा करता है। लेकिन इन दोनों में अंतर किया जा सकता है।     गले में खराश या आवाज बदल जाना: पेट के एसिड की वजह से गले में खराश की समस्या भी हो सकती है। साथ ही यह आपके आवाज में भी बदलाव ला सकता है।     लगातार खांसी होना: एसिड रिफ्लक्स में ऐसा लगता है कि आपके गले में कुछ अटका हुआ है, लेकिन ऐसा ज्यादा म्युकस बनने की वजह से होता है। ऐसा होने से आप उसे बाहर निकालने की कोशिश करते हैं और आपको खांसी आती है। इन घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत यदि एसिड रिफ्लक्स की समस्या लगातार बनी हुई तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। कुछ घरेलू उपायों से भी इससे थोड़ी राहत पाई जा सकती है:-     दही: यह खाने की नली को आराम पहुंचाता है और यह पेट के लिए भी अच्छा माना जाता है।     केला: इसका अल्कलाइन गुण ज्यादा एसिड बनने से रोकता है।     दूध: इससे तत्काल के लिए सीने में जलन से राहत मिल सकती है।  

मालवा मिल और पाटनीपुरा चौराहा कनेक्शन आज से बहाल, शहरवासियों के लिए बड़ी राहत

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इंदौर छह माह के इंतजार के बाद मालवा मिल और पाटनीपुरा चौराहा के बीच निर्माणधीन ब्रिज अंतत: बनकर तैयार हो गया। गुरुवार को इसे लोकार्पित कर दिया जाएगा। ब्रिज से आवागमन शुरू होने से करीब सवा लाख लोगों को सीधा-सीधा लाभ मिलेगा। यह रास्ता बंद होने से वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ रहा था। 6 करोड़ की लागत से तैयार यह नया ब्रिज 30 मीटर चौड़ा और 21 मीटर लंबा है। 30 मार्च 2025 को ब्रिज निर्माण शुरू करते वक्त दावा किया गया था कि नया ब्रिज 100 दिन में तैयार हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कभी अतिक्रमणकारियों के न्यायालय पहुंचने की वजह से तो कभी ठेकेदार की लापरवाही के चलते निर्माण में देरी होती रही। इस दौरान एक दुर्घटना भी हुई जिसमें एक व्यक्ति को जान गंवानी पड़ा। उधर शहर के मौजूदा ब्रिज और फ्लाइओवर की हालत दिनों-दिन खराब होती जा रही है। रखरखाव के आभाव में कहीं गड्ढों से वाहन चालक परेशान हैं तो कहीं ब्रिज पर निकल आए सरियों की वजह से हादसों का भय वाहन चालकों को बना रहता है।   जाम से मिलेगी मुक्ति मालवा मिल चौराहा-पाटनीपुरा चौराहा के बीच बना ब्रिज करीब 100 वर्ष पुराना था और जीर्ण-शीर्ण हो गया था। यह ब्रिज सिर्फ 40 फीट चौड़ा था। इस कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती थी। सड़क चौड़ीकरण के दौरान भी इस ब्रिज को नया बनाने की मांग की जा रही थी। नया ब्रिज 30 मीटर चौड़ा होने की वजह से यहां जाम की स्थिति नहीं बनेगी। लगभग 17 वर्ष पुराने भंडारी ब्रिज का लोकार्पण 11 अगस्त 2008 को हुआ था। 1548 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह ब्रिज रखरखाव के अभाव में दम तोड़ने लगा है। कई जगह सरिए नजर आने लगे हैं। खास बात यह है कि इस ब्रिज पर दोनों ओर सात-सात फीट चौड़े फुटपाथ हैं। फुटपाथ सहित ब्रिज की चौड़ाई महज 18 मीटर है। इस वजह से इस ब्रिज पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है। ब्रिज के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन कभी कोई सुधार काम होते हुए नजर नहीं आता। लगातार शिकायतों के बाद अब नगर निगम फुटपाथ की चौड़ाई कम करने और ब्रिज पर सुधार कार्य करवाने की बात कर रहा है। आशंका इस बात की भी है कि समय रहते इस ब्रिज पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसकी हालत ज्यादा बिगड़ जाएगी। तीन इमली ब्रिज : हिचकोले खाते वाहन, कई-कई फीट चौड़े गड्ढे तीन इमली ब्रिज के निर्माण को एक दशक से भी कम समय हुआ है, लेकिन इसकी हालत खराब है। इसकी एक ओर की सड़क धंस रही है, लेकिन जिम्मेदारों के पास रखरखाव का समय नहीं है। कई फीट चौड़े गड्ढों की यजह से दुर्घटना का भय बना रहता है। इस ब्रिज पर 24 घंटे भारी वाहनों की आवाजाही होती है, बावजूद इसके न किसी को रखरखाव की चिंता है न यातायात व्यवस्था सुधारने की। तेजाजी नगर ब्रिज : गड्ढों से बड़े वाहन तक पलट जाते हैं इस ब्रिज के निर्माण को भी बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन ब्रिज पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं जो वाहन चालकों को डराते हैं। ये गड्ढे सिर्फ डराते ही नहीं बल्कि वाहनों को पलटाने तक में सक्षम हैं। पिछले दिनों ही गड्ढों की वजह से एक टैंकर पलट गया था। ब्रिज की विशेषता यह है कि इस ब्रिज के ठीक बीचो-बीच चौड़ी नालियां हैं। इन नालियों में वाहनों के पहिए फंस जाते हैं। छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो रोजाना होती ही हैं। रखरखाव के अभाव में यह ब्रिज भी दम तोड़ने लगा है।