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डॉ. यादव की विजयादशमी बधाई: मुख्यमंत्री ने साझा किया उत्सव का महत्व

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महापर्व विजयादशमी की प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह पावन पर्व हमें 'यतो धर्मस्ततो जयः' का स्मरण कराकर सदैव धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की अथाह प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए संकल्पित होने का आहवान किया है।  

आयुध पूजा विशेष: विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की मान्यता और महत्ता

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विजयादशमी का पर्व हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखता है. यह न केवल असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है, बल्कि इस दिन आयुध पूजा यानी अस्त्र-शस्त्र की पूजा का भी विधान है. पंचांग के अनुसार, इस साल विजयादशमी का पर्व 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा. आइए जानते हैं कि इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा क्यों की जाती है, इसका महत्व क्या है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है. क्या है आयुध पूजा और क्यों है इसका महत्व? आयुध पूजा को शस्त्र पूजा के नाम से भी जाना जाता है. यह पूजा विजयादशमी यानी दशहरे के दिन की जाती है. आयुध पूजा को दक्षिण भारत और कई अन्य स्थानों पर “शस्त्र पूजा” या “सरस्वती पूजन” भी कहा जाता है. परंपरा के अनुसार, देवी-देवताओं को पूजने के साथ-साथ इस दिन अस्त्र-शस्त्र, औजारों, मशीनों और वाहनों की भी विशेष पूजा की जाती है. विजय का प्रतीक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने इसी दिन रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी. इसके साथ ही, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के लिए जिन अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग किया था, वे भी पूजनीय हैं. विजयादशमी को विजय का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन शत्रु पर विजय प्राप्त करने और आत्मरक्षा में सहायक अस्त्र-शस्त्र की पूजा की जाती है. यह एक तरह से उन उपकरणों के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है जो हमें शक्ति और सुरक्षा प्रदान करते हैं. उपकरणों की पूजा आयुध पूजा का महत्व केवल अस्त्र-शस्त्र तक सीमित नहीं है. इसमें जीवन में हमें सफलता दिलाने वाले सभी कर्म के उपकरणों जैसे- विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, व्यापारी अपने तराजू-बहीखातों, कलाकार अपने औजारों और सैनिक अपने हथियारों की पूजा करते हैं. यह पूजा इस बात का स्मरण कराती है कि हमारे उपकरण ही हमारी आजीविका और सफलता का माध्यम हैं, और हमें उनका सम्मान और संरक्षण करना चाहिए. क्षत्रिय परंपरा ऐतिहासिक रूप से, यह दिन क्षत्रिय समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. प्राचीन काल में, राजा और योद्धा युद्ध पर जाने से पहले इस दिन अपने अस्त्र-शस्त्रों की साफ-सफाई, धार और पूजा करते थे ताकि वे युद्ध में सफलता प्राप्त कर सकें. यह परंपरा आज भी जारी है. विजयादशमी 2025: आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त     इस साल विजयादशमी का पर्व 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, और इसी दिन आयुध पूजा का विधान है.     दशमी तिथि आरंभ 1 अक्टूबर 2025, शाम 7 बजकर 01 मिनट से.     दशमी तिथि समाप्त 2 अक्टूबर 2025, शाम 7 बजकर 10 मिनट तक.     विजय मुहूर्त : 2 अक्टूबर 2025, दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से 2 बजकर 56 मिनट तक. शस्त्र पूजा शुभ मुहूर्त विजयादशमी के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समय हर कार्य में सफलता दिलाने वाला होता है. पंचांग के अनुसार, 2 अक्टूबर को आप दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से 2 बजकर 56 मिनट के बीच अपनी शस्त्र और उपकरणों की पूजा कर सकते हैं. यानी पूजा की कुल अवधि 47 मिनट तक रहेगी. कैसे करें आयुध पूजा? आयुध पूजा के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. सबसे पहले, जिन अस्त्र-शस्त्र या उपकरणों की पूजा करनी है, उन्हें अच्छी तरह साफ करें.पूजा स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर उन्हें रखें. अस्त्र-शस्त्रों पर गंगाजल छिड़कें, रोली, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं. उन्हें फूल (विशेषकर गेंदे के फूल), माला और वस्त्र अर्पित करें. इसके बाद मिठाई या नैवेद्य का भोग लगाएं. आखिर में, धूप-दीप जलाकर उनकी आरती करें और प्रार्थना करें कि वे सदैव आपकी रक्षा करें और आपके कर्म में सफलता दें.

राज्यपाल ने विजयादशमी पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विजयादशमी पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने शुभकामना संदेश में कहा है कि विजयादशमी हर्ष, उल्लास तथा विजय का पर्व है। यह अन्याय पर न्याय, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक और शौर्य की उपासक है। विजयादशमी त्यौहार भगवान श्रीराम की मर्यादा, आदर्श और त्याग से हम सबको जीवन में धैर्य, संयम और सदाचार का पालन कर चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और प्रदेश की खुशहाली की कामना की है।