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खाली पेट पानी पीने की आदत बदल सकती है आपकी सेहत

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क्या आपको पता सुबह उठ कर खाली पेट पानी पीने से कीतने फायदें होते हैं। आईए हम आपको बताते है। अगर आप भी इस आदत का पालन करते हैं तो आपको बता दें कि सुबह खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 4 से 5 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है। -सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए। -जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते। -सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं।  

जांच या जुगाड़? कफ सिरप मामले में सरकार की रिपोर्ट पर उठे सवाल कप

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जयपुर राजस्थान में कायसन फार्मा की कफ सिरप को लेकर सरकार की जांच रिपोर्ट ही सवालों में आ गई है। शुक्रवार को सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में कंपनी के झुंझुनु, भरतपुर और जयपुर से उठाए सैंपल्स को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद देर रात कंपनी की सभी 19 दवाओं के विरतण पर रोक लगा दी और दवाओं के मानक निर्धारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित भी कर दिया। जांच रिपोर्ट में जो सैंपल चैक किए गए उनमें दवा के साल्ट तय मानकों से या तो कम थे या ज्यादा थे। जांच रिपोर्ट में क्या? जयपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/148), कंपनी कायसन फार्मा:  इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल कंटेंट नहीं था(इनके होने से दवा एलकोहाल में बदल जाती है)। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.11 एमजी ही पाई गई। भरतपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/147), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 12.98 एमजी ही पाई गई। झुंझुनू का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/250), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। इसके अलावा डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.22 एमजी ही पाई गई।  इसी तरह कई सैंपल्स में साॅल्ट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। हालांकि इसके लिए जांच कमेटी ने स्टैंडर्ड प्रोसिजर के तहत दवा में तय मानकों से 95 से 105 प्रतिशत के सॉल्ट विरियेशन को कंज्यूमेबल माना है। विवाद बढ़ने के बाद सरकार इस मामले में बैकफुट पर आई। शाम को मंत्री ने अपने बयान में कंपनी को क्लीन चिट दी और रात होते-होते कहा कि कंपनी के सैंपल्स की फिर से जांच करवा लेंगे। सिरप को पीने से अब तक करीब 35 बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। वहीं 4 बच्चों की मौत भी हो चुकी है। जिनमें दो भरतपुर और दो बच्चे सीकर से हैं। हालांकि सरकार ने इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड लिया कि इन बच्चों को दवा सरकारी अस्पताल से नहीं लिखी गई। बड़ी संख्या में प्रेसक्रिप्शन होती है कफ सिरप की खरीद पिछले दिनों राजस्थान में आईसीएमआर की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि राजस्थान में बड़ी संख्या में लोग बिना चिकित्सकीय प्रेसक्रिप्शन के ही कफ सिरप खरीदते हैं। इसके लिए जयपुर में कफ सिरप खरीदने वालों का नाम पता दर्ज करने के आदेश भी औषधि नियंत्रक की तरफ से जारी किए गए थे। इसमें कफ सिरप की खरीद करने पर फोन नम्बर एड्रेस देना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। हानिकारक दवाओं पर अंकित होगी चेतावनी ऐसी दवाएं जो बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती हैं, उन दवाओं पर अब इस संबंध में आवश्यक जानकारी भी अंकित करवाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही, ऐसी दवाएं जो सीओपीडी जैसी बीमारी में उपचार के लिए काम आती हैं, उनकी खरीद एवं आपूर्ति को भी नियंत्रित किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में खांसी के उपचार के लिए वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाएगा।

अंधेरों के बाद रोशनी: रिहा चक्रबोर्ती ने पासपोर्ट पाकर लिखा नया अध्याय

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नई दिल्ली बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में हाल ही में दस्तावेज वापस करने की इजाजत देते हुए एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है. दरअसल, एक्टर के निधन के बाद जांच के चलते रिया चक्रवर्ती का पासपोर्ट जमा कर लिया था. वहीं, अब 5 साल बाद एक्ट्रेस को उनका पासपोर्ट वापस मिल गया है. जिसके बाद उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखा है. बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने अपने इंस्टाग्राम पर अपने कठिन वक्त और ‘अनगिनत संघर्षों’ को याद करते हुए कहा कि इस दौरान ‘धैर्य’ ही उनका एकमात्र पासपोर्ट था. एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा- ‘पिछले पांच वर्षों से धैर्य ही मेरा एकमात्र पासपोर्ट था. अनगिनत संघर्ष. अनंत आशा. आज, मेरे हाथ में फिर से मेरा पासपोर्ट है. अध्याय 2 के लिए तैयार!’ साल 2020 जून में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून, 2020 को अपने बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में हुई मौत के बाद रिया चक्रवर्ती सुर्खियों में थीं. उनके और सुशांत के बीच अफेयर की खबरें थीं. 8 सितंबर, 2020 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उन्हें सुशांत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में हिरासत में ले लिया था. हालांकि, उन्हें एनसीबी के पास अपना पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत मिल गई थी. वर्कफ्रंट की बात करें, तो रिया चक्रवर्ती को आखिरी बार रूमी जाफरी की फिल्म ‘चेहरे’ में नजर आई थीं. इस फिल्म में रिया चक्रवर्ती के अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन , इमरान हाशमी और अन्नू कपूर जैसे एक्टर्स भी थे.

हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं नियम पर ब्रेक, इंदौर कलेक्टर ने कहा – जागरूकता से बनेगा असर

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इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.  

JNU दुर्गा पूजा विवाद: ABVP संगठित होकर निकाली हिंदू स्वाभिमान नारी शक्ति रैली

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नई दिल्ली  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों द्वारा हिंदू स्वाभिमान नारी शक्ति यात्रा निकाली गई. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र-छात्राओं को बराक ढाबा से गंगा ढाबा तक यह स्वाभिमान यात्रा निकालनी थी, लेकिन उन्होंने जेएनयू कैंपस के मुख्य द्वार तक यह यात्रा निकाली. एबीवीपी के छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब तक वामपंथी छात्र-छात्राओं, जिन्होंने दो अक्टूबर को मां दुर्गा की पूजा के बाद निकाली गई शोभायात्रा में चप्पल दिखाई थी, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती तब तक प्रदर्शन करेंगे. साथ ही छात्र कैंपस बंद करने की भी मांग कर रहे हैं. गौरतलब है कि JNU में ABVP ने दो अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन शोभयात्रा निकाली थी. ABVP ने आरोप लगाया कि इस दौरान वामपंथी छात्रों ने उन पर पथराव किया और चप्पल दिखाए हैं. ABVP ने आरोप लगाया इस दौरान कई छात्र घायल भी हो गए थे. इस मामले को लेकर छात्र-छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की. दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र समूहों ने जेएनयू में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा पर हमला किया, जबकि वामपंथी संगठनों ने एबीवीपी पर राजनीतिक प्रचार के लिए रावण दहन कार्यक्रम के जरिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. इस मुद्दे पर जेएनयू प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. एबीवीपी ने एक बयान में कहा कि आइसा, एसएफआई और डीएसएफ समेत वामपंथी समूहों ने शाम करीब सात बजे साबरमती टी-पॉइंट के पास विसर्जन शोभायात्रा पर हमला किया. एबीवीपी ने दावा किया कि पथराव और दुर्व्यवहार में कई छात्र और छात्राएं घायल हो गए. धार्मिक आयोजन पर हमला एबीवीपी जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन पर हमला नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की उत्सव परंपरा और छात्रों की आस्था पर सीधा हमला है. एबीवीपी किसी भी कीमत पर इस तरह की आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करेगी. एबीवीपी के जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने आरोप लगाया कि दुर्गा विसर्जन जैसे पवित्र अनुष्ठान के दौरान पथराव और यहां तक कि छात्राओं पर हमला करना निंदनीय और शर्मनाक है. उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की. आइसा ने आरोपों को किया खारिज हालांकि, वाम दलों से संबद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और एबीवीपी पर राजनीतिक प्रचार के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. आइसा ने एक बयान में कहा कि एबीवीपी रावण दहन का आयोजन कर रही थी, जिसमें जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को रावण के रूप में चित्रित किया गया था. दोनों पर सीएए विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों की कथित साजिश के संबंध में मुकदमा चल रहा है. इस्लामोफोबिया का प्रदर्शन आइसा ने कहा कि यह इस्लामोफोबिया का एक नृशंस प्रदर्शन है, जिसमें राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण किया जा रहा है. आइसा ने एबीवीपी से पूछा कि उसने नाथूराम गोडसे, गुरमीत राम रहीम या 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपी नेताओं को (रावण के रूप में चित्रित करने के लिए) क्यों नहीं चुना.  

ऑस्ट्रेलिया दौरा 2025: शुभमन गिल को मिली वनडे कमान, रोहित और कोहली भी टीम में बरकरार

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नई दिल्ली भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती पर अक्टूबर-नवंबर में तीन वनडे और पांच टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं. इसके लिए आज भारतीय टीम की घोषणा हो गई है. शुभमन गिल को टेस्ट के बाद वनडे का भी कप्तान बनाया गया है. टीम सेलेक्शन के लिए अहमदाबाद में चयनकर्ताओं की मीटिंग हुई है. जिसमें टीम को लेकर मंथन किया गया. गिल ने वनडे कैप्टन के तौर पर रोहित शर्मा की जगह ली है. भारत की वनडे टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल. भारत की टी20 टीम: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल (उप-कप्तान), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (WK), वरुण चक्रवर्ती, जसप्रित बुमरा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, संजू सैमसन (WK), रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर. वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी शामिल किए जाने की संभावना है. ये दोनों दिग्गज टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं. ऐसे में दोनों सिर्फ एक फॉर्मेट में भारत के लिए खेलने के योग्य हैं. रोहित और विराट ने भारत के लिए आखिरी बार आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी में खेलते दिखे थे. तब भारत ने न्यूजीलैंड को मात देकर खिताब जीता था. विराट कोहली और रोहित शर्मा ने मिलकर ओडीआई क्रिकेट में 25 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं, जिसमें 83 शतक शामिल रहे. लेकिन अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ये दोनों महान बल्लेबाज 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे. इस मेगा टूर्नामेंट में अभी दो साल का वक्त बाकी है.  तब तक रोहित शर्मा की उम्र 40 पार कर जाएगी, जबकि विराट कोहली की उम्र भी 39 के करीब होगी. 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित की उम्र चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन किंग कोहली की फिटनेस बेहतरीन है. ऐसे में यह संभावना मजबूत है कि वह 2027 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा बन सकते हैं. भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे का फुल शेड्यूल 19 अक्टूबर: पहला वनडे, पर्थ 23 अक्टूबर: दूसरा वनडे, एडिलेड 25 अक्टूबर: तीसरा वनडे, सिडनी 29 अक्टूबर: पहला T20, कैनबरा 31 अक्टूबर: दूसरा T20, मेलबर्न 2 नवंबर: तीसरा T20, होबार्ट 6 नवंबर: चौथा T20, गोल्ड कोस्ट 8 नवंबर: पांचवां T20, ब्रिस्बेन

बस्तर में अमित शाह की मौजूदगी, मुरिया दरबार में स्थानीय नेताओं के साथ की चर्चा

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जगदलपुर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दशहरा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जदगलपुर पहुंच चुके हैं। यहां उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने बस्तर के लोगों से बातचीत की। इसके बाद गृहमंत्री ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। इसके बाद यहां से सीधे पास स्थित सिराहसारा भवन में मुरिया दरबार में मांझी, चालकी, गायता, पे से मिलकर उन्हें संभोधित कर रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री मूरिया दरबार, लाल बाग में प्रदर्शनी का अवलोकन, बस्तर दशहरा लोकोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री के साथ में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी पहुंचे हैं। बता दें कि बस्तर दशहरे की ऐतिहासिक परंपरा मुरिया दरबार इस बार और भी विशेष होने जा रहा है। शाह ऐसे दौर में बस्तर आ रहे हैं, जब माओवाद के खात्मे का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है और केंद्र व राज्य की डबल इंजन सरकार क्षेत्र की संस्कृति व परंपराओं को नई पहचान देने में जुटी है। दरबार में वे 80 परगनाओं से आए मांझी-मुखियाओं से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। यह पहला अवसर होगा जब कोई केंद्रीय गृहमंत्री इस पारंपरिक दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से आमने-सामने बातचीत करेगा। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे की यह परंपरा 145 वर्षों से जारी है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। शाह की मौजूदगी इसे ऐतिहासिक बना रही है। माओवाद पर सख्त संदेश, जनजातीय समाज को प्राथमिकता अमित शाह जब से माओवाद के खात्मे के लिए 30 मार्च 2026 तक की समयसीमा तय कर चुके हैं, तब से वे देश के इतिहास में सर्वाधिक बार बस्तर आने वाले गृहमंत्री बन गए हैं। बीते 22 महीनों में यह उनका छठा बस्तर दौरा होगा। हर बार उन्होंने माओवादियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि समर्पण ही एकमात्र रास्ता है, अन्यथा सुरक्षा बल सख्त जवाब देंगे। कई अवसरों पर वे माओवादियों को भाई कहकर भी संबोधित कर चुके हैं। बस्तर अब माओवाद मुक्त होने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में दशहरे के मौके पर शाह का प्रवास विशेष महत्व रखता है। इससे पहले 5 अप्रैल 2025 को वे दंतेवाड़ा में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ (मेला) में शामिल हुए थे और मंच से आदिवासी अस्मिता व संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। इस बार वे उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सनातन आस्था और आदिवासी परंपरा के अद्वितीय संगम बस्तर दशहरा का हिस्सा बनेंगे। मुरिया विद्रोह से जुड़ी है परंपरा 1876 से पहले बस्तर दशहरे के दौरान मांझी-मुखिया और ग्रामीण राजमहल में ठहरते थे और राजा का दरबार लगता था। उसी दौरान अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और जंगल पर जनजातीय अधिकारों पर अंकुश के विरोध में झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में मुरिया जनजाति ने ऐतिहासिक विद्रोह छेड़ा। 8 मार्च 1876 को सिरोंचा के डिप्टी कमिश्नर मैक जॉर्ज को आंदोलनकारियों के सामने झुकना पड़ा और राजस्व-प्रशासनिक सुधार लागू करने पड़े। यही विद्रोह जनजातीय एकता और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बना। इसके बाद से दशहरे के अवसर पर राजमहल के राजा दरबार की जगह झाड़ा सिरहा की गुड़ी में ‘मुरिया दरबार‘ लगने लगा। 1965 तक महाराजा स्व. प्रवीरचंद्र भंजदेव स्वयं इसकी अध्यक्षता करते रहे। बाद में यह परंपरा शासन-प्रशासन की उपस्थिति में जारी रही।

मप्र में Coldrif सिरप प्रतिबंधित, CM का ऐलान – बच्चों की जान लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

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भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने Coldrif सिरप को पूरे प्रदेश में बैन कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि एमपी में इस सिरप की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी प्रदेश में बैन लगाया जा रहा है। छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन से हुई बच्चों की दर्दनाक मौत पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इसे पूरे प्रदेश में बैन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्राप्त हुई जांच रिपोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है और दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला इस सिरप निर्माण करने वाली फैक्ट्री तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की दुखद घटना के बाद एमपी सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच कराने का अनुरोध किया था। आज सुबह प्राप्त जांच रिपोर्ट में सिरप में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप के साथ इस कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स को भी बैन किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी दी कि स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई पहले से जारी थी और अब राज्य स्तर पर भी एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। छिंदवाड़ा में सिरप से गई मासूम बच्चों की जान बता दें कि सितंबर माह में छिंदवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों को सर्दी-खांसी के इलाज के लिए यही कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया। इसके बाद बच्चों में गंभीर लक्षण जैसे उल्टी, पेट दर्द, बेहोशी सहित कई लक्षण देखे गई। प्रारंभिक जांच में सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी का संदेह जताया गया, जो किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। अब तक इस घटना में 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य कई अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद जांच रिपोर्ट आने पर अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप बैन कर दिया गया है।

कफ सिरप कांड ने मचाई सनसनी: 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु में बिक्री पर रोक, राजस्थान में बड़ा एक्शन

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जयपुर  कफ सिरप विवाद ने पूरे देश को हिला दिया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित सिरप 'कोल्ड्रिफ' की बिक्री पर रोक लगा दी है. वहीं, राजस्थान सरकार ने राज्य ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया और संबंधित कंपनी की दवाओं का वितरण रोक दिया है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं. राजस्थान में बड़ा एक्शन… राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया और राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है. साथ ही जयपुर की Kaysons Pharma कंपनी की दवाओं के वितरण पर भी रोक लगा दी गई है. इससे पहले विवादित सिरप बच्चों को देने के आरोप में डॉक्टर पलक कुलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू कुमार सोनी को भी निलंबित किया गया था. तमिलनाडु में 'कोल्ड्रिफ' सिरप पर बैन तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौतों के बाद लिया गया. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण कर सैंपल लिए हैं. इन्हें सरकारी लैब में टेस्ट के लिए भेजा गया है ताकि 'डाईएथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की जांच हो सके. '2 साल से कम बच्चों को ना दें कफ सिरप' केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवा ना लिखी जाए. DGHS की इस गाइडलाइन का मकसद संदिग्ध सिरप से बच्चों की जान बचाना है. राजस्थान में घर-घर अभियान राजस्थान सरकार ने शनिवार से पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है. आशा, एएनएम और सीएचओ आमजन को जागरूक करेंगे कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवा ना लें. बच्चों की पहुंच से दवाएं दूर रखने और दुष्प्रभाव पर तुरंत कदम उठाने की हिदायत दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना प्रोटोकॉल दवा लिखने या वितरित करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमोरफन युक्त दवा नहीं दी जाए. आमजन को समझाया जाए कि वे घर में रखी दवाओं का बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नहीं करें. दवा के सेवन के बाद किसी भी तरह का दुष्प्रभाव अथवा सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दौरे जैसे लक्षण नजर आएं तो नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104/108 या राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क किया जा सकता है. राजस्थान का सिरप सुरक्षित इस बीच राजस्थान सरकार ने लैब टेस्ट कराए हैं जिनमें यह पाया गया है कि विवादित सिरप के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, हालांकि जांच जारी रहेगी. महाराष्ट्र में कोडीन सिरप और ड्रग्स नष्ट ठाणे, पालघर और एमबीवीवी पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 26,935 लीटर कोडीन-आधारित कफ सिरप समेत 147 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं और ड्रग्स को नष्ट किया है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी से की गई.

दमोह में सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग, 29 लोगों की फर्जी शिकायतें उजागर, कलेक्टर को भेजी रिपोर्ट

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दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत करने वाले 29 शिकायतकर्ताओं को जनपद सीईओ ने चिह्नित किया है। जिसकी सूची बनाकर कलेक्टर के पास भेजी गई है। अब इन लोगों की शिकायत का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत गलत पाई गई तो आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा यह योजन इसलिए शुरू की गई थी, ताकि आम लोगों को शासन की उस योजना का लाभ मिल सके, जिससे वह वंचित हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वह हितग्राही अपनी समस्याओं की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर सकता है। यह योजना सार्थक हुई लोगों को न्याय मिलना शुरू हो गया, लेकिन लोग इसका गलत इस्तेमाल करने लगे। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मांगी जानकारी दमोह कलेक्टर ने ब्लाक स्तर के अधिकारियों से जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने 29 लोगो की सूची बनाकर दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर को भेजी है। यह वे लोग हैं जो लगातार शिकायत करते हैं। जबकि उस योजना से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। 26 सितम्बर को दमोह कलेक्टर ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों को एक पत्र जारी किया था। जिसमें पूछा था आपके यहां सीएम हेल्पलाइन में यदि कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जो बार बार शिकायत करते हैं या फिर शिकायत दर्ज करना उन्होंने अपनी आदत बना ली है तो उनका नाम, फोन नंबर शिकायत के विवरण की जानकारी सहित दर्ज करे और उनकी सूची भेजे। जिसके बाद तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनका काम ही सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना है। उनके नाम ओर शिकायत की दर्ज संख्या सहित पूरी जानकारी भेजी गई है। ऐसी होती है ज्यादा शिकायत तेंदूखेड़ा ब्लाक में जो शिकायत दर्ज हैं उनमें अधिकाश लोग जिले या दूसरी जनपद से है। जिनकी शिकायतें जांच में गलत पाई गई है तो कुछ शिकायतो में लेनदेन करके मामलों का निराकरण हुआ है। शिकायत का जनहित या समाज हित से कोई वास्ता नहीं है। बल्कि निर्माण कार्य और पंचायत बंद या फिर सचिव, सरपंच की झूठी शिकायतों का हवाला दिया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद उनकी जानकारी एकत्रित की गई और सूची दमोह कलेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कलेक्ट्रेट से पत्र प्राप्त हुआ था। उसके बाद अप्रैल माह से सितम्बर तक की जानकारी एकत्रित की गई थी और 29 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की है जो लगातार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत करते है। इनकी शिकायतों में फर्जी मजदूर और निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी का हवाला दिया जाता है। पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी गई है आगे जो कार्रवाई होगी दमोह कलेक्टर करेंगे।