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Aastha Pandey

Writer News & Blogger

धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया

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बॉलीवुड के अमर सितारे और हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र देओल अब हमारे बीच नहीं रहे। 24 नवंबर 2025 की सुबह, मुंबई स्थित अपने निवास पर 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके जाने की खबर फैलते ही पूरे देश में गहरा दुख छा गया—सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह शोक और भावुक संदेशों की बाढ़ आ गई। पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा थे, जिनकी मुस्कान, सादगी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें एक अनमोल कलाकार बनाया। धर्मेंद्र का जीवन और उनकी विरासत मृत्यु की खबर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल का 24 नवंबर 2025 की सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलने पर देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन जुहू, मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में किया गया, जहाँ अमिताभ बच्चन, सलमान खान, आमिर खान जैसे बड़े सितारे शामिल हुए। सादा शुरुआत धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के एक गाँव में हुआ था। उन्होंने एक बेहद सरल परिवार में पले-बढ़े। शुरुआती समय में उन्होंने नौकरी करते हुए ऑडिशन दिए। उनका पहला बड़ा ब्रेक 1960 की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से आया। कैरियर की ऊँचाइयाँ धर्मेंद्र ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया और छह दशकों का बड़ा करियर बनाया। उनकी फिट बॉडी और दमदार आवाज़ ने उन्हें “ही-मैन” का खिताब दिलाया। उनकी फिल्मों में रोमांस, कॉमेडी, एक्शन और ड्रामा सभी का शानदार मिश्रण था। शोले (1975) उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है, जहाँ उन्होंने वीरू का किरदार निभाया, जिसे आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है। उनकी और हेमा मालिनी की ऑन-स्क्रीन जोड़ी बेहद लोकप्रिय थी, और दोनों ने 1980 में शादी की। उनके दो बच्चे, ईशा देओल और आहाना देओल, भी बॉलीवुड में जाने जाते हैं। मानवता का चेहरा धर्मेंद्र न सिर्फ़ बड़े अभिनेता थे, बल्कि एक बहुत ही दयालु इंसान भी थे। उनके भीतर विनम्रता और अपनापन था। उनके इस अंदाज ने उन्हें सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि लोगों के दिल का हीरो बना दिया। एक वीडियो में हाल ही में उन्होंने कहा था, “नेकी की किताब से बड़ा कोई ग्रंथ नहीं।” राजनीति और दूसरा अध्याय धर्मेंद्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। वे 2004 से 2009 तक सांसद रहे।उनकी स्थिरता और प्रभाव ने उन्हें फिल्मों के अलावा पॉलिटिक्स में भी एक अहम चेहरा बना दिया। शोक और श्रद्धांजलि उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह “भारतीय सिनेमा का एक युग समाप्त होना” है।कई अन्य नेता, जैसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनकी सरलता, प्रतिभा और इंसानियत की तारीफ की। धर्मेंद्र की यादों का सफर शोले जैसी क्लासिक फिल्मों ने उन्हें फिल्मों के इतिहास में एक अमिट स्थान दिलाया। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री हेमा मालिनी के साथ बेहद लोकप्रिय थी, और उनका ये रिश्ता पर्दे के बाहर भी सच्चा रहा। उन्होंने अपने करियर में दिखाया कि असल हीरो केवल शक्ति नहीं, बल्कि सादगी और दिल से भी बनता है। उनके फैन्स और बॉलीवुड साथी उन्हें “ही-मैन” के अलावा “सपोर्टिव, इंसानियत वाला सितारा” भी याद करेंगे। धर्मेंद्र की सबसे मशहूर फिल्म कौन-सी है? शोले उनकी सबसे मशहूर फिल्मों में से एक है, जिसमें उन्होंने वीरू का यादगार किरदार निभाया। धर्मेंद्र कब और कहाँ का जन्मे थे? उनका जन्म पंजाब के एक गाँव में हुआ था और उन्होंने बेहद साधारण परिवार में पनाह पाई। धर्मेंद्र का निधन क्यों हुआ? रिपोर्ट्स के अनुसार वे कुछ समय से बीमार थे और मुंबई में घर पर ही उनका निधन हुआ। उन्होंने राजनीति में भी भूमिका निभाई थी? हां, वे 2004–2009 के बीच सांसद भी रहे। उनके आखिरी फिल्म कौन सी होगी?उनकी आखिरी फिल्म Ikkis है, जिसे उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ किया जाना प्रस्तावित है।

IRCTC Tour Package: सिर्फ इतने रुपए में करें हिमाचल की वादियों का दीदार

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सर्दियों की शुरुआत होते ही हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियाँ पर्यटकों को अपनी ओर खींचने लगती हैं। शिमला की ढलानों पर गिरती ओस, नारकंडा की बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ और हाटू मंदिर के पास फैली शांत प्राकृतिक सुंदरता—इन सबको करीब से देखने का मन हो तो अब जेब ढीली करने की ज़रूरत नहीं। भारतीय रेलवे पर्यटन निगम यानी IRCTC पर्यटकों के लिए एक ऐसा किफायती पैकेज लेकर आया है, जिससे विंटर ट्रिप का सपना बेहद कम बजट में पूरा किया जा सकता है। हिमाचल की ठंडी वादियों का सस्ता सफर IRCTC (भारतीय रेलवे पर्यटन निगम) ने उन लोगों के लिए एक शानदार और किफायती हिमाचल टूर पैकेज पेश किया है, जो ठंड के मौसम में पहाड़ों का नज़ारा लेना चाहते हैं। यह पैकेज “Queen of Shimla with Hatu Temple, Narkanda” (कोड NCH37) नाम से चल रहा है। इसमें 2 रात और 3 दिन की यात्रा शामिल है, जिसमे आप शिमला की खूबसूरती और आसपास के दर्शनीय मंदिर-स्थलों का आनंद ले सकते हैं। पैकेज का रूट और गतिविधियाँ यह टूर शिमला रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से शुरू होकर वहीँ समाप्त होता है। पैकेज में लोकल यात्राओं के लिए नॉन-एसी वाहन की सुविधा दी गई है। पहले दिन, यात्रियों को जाखू मंदिर और हनुमान मंदिर की यात्रा कराई जाती है और फिर होटल में आराम करने का समय मिलता है। दूसरे दिन, नाश्ते के बाद हाटू मंदिर (नारकंडा) के लिए ट्रिप होती है। वापसी में आप खूबसूरत कुफरी घूमने जाएंगे और शाम में मॉल रोड का मज़ा ले सकते हैं। तीसरे दिन, बौद्ध मठ पंथाघाटी का दर्शन किया जाता है और उसके बाद आपको शिमला स्टेशन छोड़ दिया जाएगा। पैकेज कीमत और श्रेणियाँ IRCTC ने दो श्रेणाएं बनाई हैं: Etios / Indigo / Desire जैसी कारों (4 यात्री तक): ₹ 12,890 प्रति व्यक्ति (डबल ऑक्यूपेंसी) Innova / Tavera / Xylo जैसी गाड़ियाँ (5-6 यात्री): ₹ 11,970 प्रति व्यक्ति (डबल ऑक्यूपेंसी) ध्यान दें, यह दरें क्रिसमस जैसे ब्लैक-आउट डेट्स (22 दिसंबर से 2 जनवरी) पर लागू नहीं होंगी। स्टे और सुविधाएं पर्यटकों को Regenta Place Mashobra या CK International (या समकक्ष) होटलों में ठहराया जाएगा। इस पैकेज में 2 नाश्ता + 2 डिनर, होटल में रहने की व्यवस्था, और ट्रैवल इंश्योरेंस शामिल है। लेकिन कुछ खर्चे इसमें शामिल नहीं हैं, जैसे कैमरा फीस, लंच, लाइट-एंड-साउंड शो टिकट, और निजी खर्च (जैसे टेलीफोन, लॉन्ड्री, टिप्स)। कैंसिलेशन पॉलिसीIRCTC ने तय किया है:15 दिन पहले रद्द करने पर: ₹250 प्रति व्यक्ति कटेगा8–14 दिन पहले: 25% चार्ज कटेगा4–7 दिन पहले: 50% चार्ज4 दिन से कम बचे हों तो 100% चार्ज कटेगा ये खबर भी पढ़े…भारत के अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन जहाँ आपका ड्रीम वेडिंग सच हो सकता है क्यों यह पैकेज खास है? यह पैकेज बहुत बजट-फ्रेंडली है, खासकर उन लोगों के लिए जो हिमाचल की ठंडी वादियों का अनुभव लेना चाहते हैं बिना बहुत अधिक खर्च किए।IRCTC जैसी प्रतिष्ठित संस्था की बुकिंग से सुरक्षा और विश्वसनीयता भी मिलती है।शिमला, हाटू मंदिर, कुफरी और मॉल रोड की सैर के साथ यह पैकेज ‘पहाड़ी सांस्कृतिक टच’ और नज़ारे देता है।यह ट्रिप सिर्फ सैर नहीं, बल्कि माइक्रो-एडवेंचर जैसा अनुभव देती है। FAQs Q1. यह IRCTC हिमाचल टूर पैकेज कौन-कौन सी जगहें कवर करता है?यह पैकेज शिमला रेलवे स्टेशन/बस स्टैंड से शुरू होता है। इसमें जाखू मंदिर, हनुमान मंदिर, हाटू मंदिर (नारकंडा) की यात्रा शामिल है। वापसी में आप कुफरी घूम सकते हैं और तीसरे दिन पंथाघाटी बौद्ध मठ का दर्शन होगा। Q2. पैकेज की कीमत क्या है और कौन-कौन सी सुविधा शामिल है?पैकेज की कीमत दो श्रेणाओं में है: Etios-type कार में ₹12,890 प्रति व्यक्ति और Innova-type में ₹11,970 प्रति व्यक्ति। पैकेज में 2 नाश्ता, 2 डिनर, होटल स्टे और ट्रैवल इंश्योरेंस शामिल है। Q3. अगर मैं पैकेज कैंसिल करना चाहूँ तो पॉलिसी कैसी है?अगर आप 15 दिन पहले रद्द करते हैं, तो ₹250 का चार्ज कटेगा। 8–14 दिन पहले रद्द करने पर 25%, 4–7 दिन पहले 50%, और 4 दिन से कम बचे होने पर पूरा 100% चार्ज किया जाएगा।

भारत के अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन जहाँ आपका ड्रीम वेडिंग सच हो सकता है

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आप अपनी शादी को सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि एक खास एहसास बनाना चाहते हैं, तो अब समय है भारत के उन अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन पर नज़र डालने का, जिनकी खूबसूरती दिल चुरा लेती है। अक्सर हम गोवा, जयपुर या उदयपुर जैसे लोकप्रिय वेन्यू ही सुनते आए हैं, लेकिन बदलते समय के साथ कपल्स अब ऐसी जगहों को तलाश रहे हैं जहाँ भीड़ कम हो, नेचर ज़्यादा हो और हर पल एक खूबसूरत याद बन जाए। देश के अलग-अलग कोनों में छिपे ये डेस्टिनेशन न सिर्फ शांति और सुकून देते हैं, बल्कि हर शादी को एक पर्सनल, रॉयल और ड्रीमी टच भी देते हैं। पहाड़ों की गोद में बसा कोई छोटा-सा हिलटॉप टाउन हो या फिर झीलों और जंगलों के बीच सजता कोई रिज़ॉर्ट—ये जगहें हर कपल को उसकी परफेक्ट फेयरी-टेल वेडिंग का एहसास दिलाती हैं। अगर आप भी अपनी शादी को अलग, यादगार और बिल्कुल फिल्मी अंदाज़ में प्लान करना चाहते हैं, तो ये अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन आपके लिए ही बने हैं। भारत के अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन क्यों हो रहे हैं फेमस? आज के कपल्स सिर्फ ग्लैमरस शादी नहीं चाहते, बल्कि एक ऐसी जगह चुनना चाहते हैं जहाँ उनकी कहानी और इमोशंस साफ दिखाई दें।उन्हें एक ऐसा ड्रीम वेडिंग डेस्टिनेशन चाहिए जहाँ शांति, सुंदरता और प्रामाणिकता तीनों एक साथ महसूस हों।ऐसी ही वजह से अब लोग गोवा और उदयपुर जैसी जगहों के बजाय कुछ नए और अनदेखे वेडिंग प्लेसेज़ की ओर जा रहे हैं। भारत के कई राज्यों की पर्यटन वेबसाइटों—जैसे Incredible India, Karnataka Tourism, Kerala Tourism और Uttarakhand Tourism—ने भी माना है कि कपल्स में “nature-based, cultural and intimate weddings” की मांग लगातार बढ़ रही है। अब आइए जानते हैं भारत के ऐसे 7 अंडररेटेड वेडिंग डेस्टिनेशन, जो किसी भी ड्रीम वेडिंग को खास बना सकते हैं। भारत के 7 अनदेखे और खूबसूरत वेडिंग डेस्टिनेशन कूर्ग को “इंडिया का स्कॉटलैंड” कहा जाता है और यह बात यहाँ आते ही सच लगती है।यहाँ की सुबह कोहरे से ढकी होती हैं और चारों तरफ कॉफी के हरे-भरे बागान नजर आते हैं।कूर्ग के बुटीक रिसॉर्ट्स कपल्स को ‘स्लो लग्ज़री’ का शांत अनुभव देते हैं।यह जगह earthy थीम वाली intimate wedding के लिए बिल्कुल परफेक्ट है।यहाँ की greenery और रिसॉर्ट्स का natural décor किसी भी शादी को बेहद soothing बना देते हैं। महाबलीपुरम UNESCO World Heritage Site है और समुद्र किनारे बसा यह शहर weddings के लिए एक ड्रीमी लोकेशन बन चुका है। यहाँ के प्राचीन पत्थर से बने मंदिर और सी- breeze शादी को एक royal yet simple look देते हैं। Incredible India की रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ बीच वेडिंग्स की डिमांड हर साल बढ़ रही है। कलात्मकता और शांति चाहने वाले कपल्स यहाँ शादी का सुंदर अनुभव पा सकते हैं। कंचनजंगा पर्वत की बर्फीली पृष्ठभूमि पेलिंग को बेहद अनोखा बनाती है। यह जगह उन कपल्स के लिए perfect है, जो spiritual और शांत wedding चाहते हैं। यहाँ सूर्योदय के समय फेरे लेना बेहद खूबसूरत और soulful अनुभव माना जाता है। कई कपल मठों में vows exchange करके अपनी शादी को और भी meaningful बनाते हैं। बेकल धीरे-धीरे केरल का नया वेडिंग हॉटस्पॉट बन रहा है।यहाँ का 300 साल पुराना बेकल फोर्ट और लंबी बैकवॉटर लाइन शादी की फोटोज को cinematic बनाती है।Kerala Tourism के अनुसार, बेकल के लग्जरी रिसॉर्ट्स अब वेडिंग पैकेज में आयुर्वेदिक स्पा, प्राइवेट जेट्टी एंट्री और cultural welcome शामिल कर रहे हैं।यहाँ शादी करना इतिहास और रोमांस दोनों को साथ लाने जैसा होता है। जोधपुर और नागौर के बीच स्थित खीमसर एक एक्सक्लूसिव और शांत वेडिंग डेस्टिनेशन है।यहाँ पर प्राचीन किला, रेगिस्तान की शाम और कैंडल लाइट डिनर शादी को एक royal frame में बदल देती है।राजस्थान के local folk musicians यहाँ के माहौल को soulful और traditional बना देते हैं।कम भीड़भाड़ की वजह से कपल्स को यहाँ intimate wedding का पूरा आनंद मिलता है। 6. गोकर्ण, कर्नाटक – Goa जैसा Beach, पर ज्यादा Peace अगर आपको beach wedding चाहिए, लेकिन गोवा की भीड़ नहीं चाहिए—तो गोकर्ण सबसे बेहतर जगह है।यहाँ के बीच शैक्स को मांडप में बदला जाता है और sunset के समय फेरे लेना बेहद dreamy लगता है।स्थानीय लोक गायक शादी में sustainable और cultural touch जोड़ते हैं। यहाँ की शांति शादी को बेहद personal और soulful बनाती है। ऋषिकेश, उत्तराखंड – Ganga किनारे Mindful Luxury Wedding ऋषिकेश अब adventure town से आगे बढ़कर “mindful luxury weddings” की नई पहचान बन चुका है। यहाँ गंगा किनारे बने ग्लास डेक रिसॉर्ट्स बेहद photogenic और peaceful हैं।कई कपल sunrise pheras लेना पसंद करते हैं, जिससे शादी एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है।Uttarakhand Tourism के अनुसार, ऋषिकेश में destination weddings की संख्या लगातार बढ़ रही है। क्यों बढ़ रहा है इन जगहों का क्रेज? कपल्स अब भारी-भरकम ग्लैमरस शादी के बजाय meaning और emotion चाहने लगे हैं।वे ऐसी जगह चाहते हैं जहाँ culture, sustainability और personal touch तीनों दिखाई दें।स्थानीय खाने, eco-friendly décor और nature-based वेडिंग्स की मांग इंडिया में तेजी से बढ़ रही है।ऐसी intimate और soulful weddings अब ट्रेंड नहीं, बल्कि नई पसंद बन चुकी हैं। ये खबर भी पढ़े…IRCTC का ख़ास कश्मीर टूर पैकेज: सिर्फ ₹35,550 में न्यू ईयर में स्वर्ग जैसा सफर FAQsQ1. भारत के अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन क्यों लोकप्रिय हो रहे हैं? कपल्स अब भीड़भाड़ वाली शादी के बजाय शांत, प्राकृतिक और भावनात्मक जगहें चुन रहे हैं।भारत के ये वेडिंग डेस्टिनेशन खूबसूरती के साथ-साथ personal experience भी देते हैं।इनकी uniqueness शादी को memorable बनाती है। Q2. क्या इन वेडिंग डेस्टिनेशनों में बजट में शादी प्लान की जा सकती है? हाँ, कई जगहों पर बजट से लेकर लग्जरी तक हर तरह के विकल्प मौजूद हैं।कूर्ग, पेलिंग और गोकर्ण जैसी जगहों पर खर्च कम आता है।यहाँ nature-based décor और छोटे गेस्ट लिस्ट से budget काफी manageable रहता है। Q3. सबसे शांत और peaceful वेडिंग लोकेशन कौन सी है? पेलिंग (सिक्किम) और ऋषिकेश (उत्तराखंड) सबसे शांत और soulful शादी के लिए perfect हैं।इन दोनों जगहों पर nature और spirituality मिलकर शादी को खास बना देते हैं।

IRCTC का ख़ास कश्मीर टूर पैकेज: सिर्फ ₹35,550 में न्यू ईयर में स्वर्ग जैसा सफर

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IRCTC ने नया ‘Mystical Kashmir New Year Special’ पैकेज लॉन्च किया है, जिसमें 5 रात और 6 दिन की शानदार यात्रा शामिल है। इस पैकेज के तहत आप श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसी कश्मीर की प्रमुख और खूबसूरत जगहों का आनंद ले सकते हैं। यह पैकेज विशेष रूप से नए साल के मौके के लिए तैयार किया गया है और पूरी तरह ऑल-इनक्लूसिव है, यानी इसमें फ़्लाइट, होटल, हाउसबोट, रोज़ाना का नाश्ता और डिनर, साइटसीइंग, ट्रांसफर और IRCTC गाइड शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इसकी शुरुआती कीमत सिर्फ ₹35,550 प्रति व्यक्ति है, जो इसे बजट‑फ्रेंडली और हर ट्रैवलर के लिए आसान बनाती है। अगर आप इस दिसंबर या नए साल पर कश्मीर की बर्फीली वादियों, शांत झीलों और हरी-भरी घाटियों में छुट्टियां बिताने का प्लान कर रहे हैं, तो यह पैकेज आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है। बिना किसी झंझट के आराम से यात्रा करना और कश्मीर की सुंदरता का आनंद लेना इस पैकेज की सबसे बड़ी खूबी है। IRCTC का कश्मीर टूर — एक ड्रीम ट्रिप IRCTC ने अपने टूरिज्म सेक्शन में एक शानदार न्यू ईयर‑पैकेज लॉन्च किया है जिसे कहा गया है “Mystical Kashmir New Year Special Tour”। इस पैकेज की अनोखी बात यह है कि यह सिर्फ़ मनोरम कश्मीर के चार प्रमुख और खूबसूरत स्थलों — श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम — को कवर करता है। पैकेज 5 रात और 6 दिन का है, यानी इस ट्रिप में आपको आराम करने का और नज़ारों का सुकून दोनों मिलेगा। यात्रा की तारीख और शुरुआत IRCTC ने इस पैकेज की प्रस्थान तिथि 29 दिसंबर 2025 तय की है, जिससे आप नए साल का स्वागत बर्फीली कश्मीर की वादियों में कर सकते हैं। यात्रा हैदराबाद से शुरू होती है — वहाँ से फ़्लाइट के ज़रिए श्रीनगर पहुँचा जाएगा।` पैकेज में क्या मिलेगा? यह पैकेज ऑल-इनक्लूसिव है, यानि अधिकांश जरूरी सुविधाएँ इसमें शामिल हैं:हैदराबाद ↔ श्रीनगर फ्लाइट 4 रात होटल में और 1 रात हाउसबोट पर ठहरने की व्यवस्था रोज़ाना नाश्ता (ब्रेकफास्ट) और डिनर ट्रांसफर और साइटसीइंग (Seat-in-coach बेसिस पर) IRCTC का टूर गाइड, सभी टोल, पार्किंग और ट्रैवेल टैक्स शामिल किराया (Fare Details) IRCTC ने अलग‑अलग ऑक्युपेंसी के लिए किराया तय किया है: ट्रिपल ऑक्युपेंसी: लगभग ₹35,500 प्रति व्यक्ति डबल ऑक्युपेंसी: लगभग ₹36,960 प्रति व्यक्ति सिंगल ऑक्यूपेंसी: लगभग ₹47,100 प्रति व्यक्ति बच्चों की दरें भी अलग हैं: 5‑11 साल, बेड के साथ: ₹30,050; बिना बेड: ₹27,450 2‑4 साल: ₹21,400 प्रति बच्चा क्यों ये पैकेज खास है? किफायती: सिर्फ़ ₹35,550 जैसा शुरुआती किराया बहुत ट्रैवल‑लवर्स के लिए बजट‑फ्रेंडली है।सुकून भरा सफर: हाउसबोट में रहने का अनुभव अलग ही होता है, और वह भी कश्मीर की झीलों में।प्राकृतिक सौंदर्य: बर्फीले पहाड़, हरी वादियाँ, शांत झीलें — पूरा पैकेज वादियों की जन्नत जैसा लाता है।पूरी योजना IRCTC की ओर से: यहां ट्रेन‑बुकिंग, होटल, ट्रांसफर और गाइडिंग सब IRCTC मैनेज करता है — आपकी ज़्यादा चिंता नहीं होगी। बुकिंग कैसे करें? IRCTC का यह कश्मीर पैकेज IRCTC Tourism की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आप वहां पर SHA11A पैकेज कोड देख सकते हैं — यह वही कोड है जिसे IRCTC ने दस्तावेजों में इस्तेमाल किया है। बुकिंग से पहले यह ज़रूर देख लें कि शामिल सुविधाएँ, रूम टाइप और यात्रा तिथियाँ आपकी उम्मीदों के मुताबिक़ हों। आधिकारिक वेबसाइट- https://irctctourism.com/pacakage_description?packageCode=SHA11A https://irctctourism.com/pacakage_description?packageCode=SHA11A… (packageCode=SHA11A) #IRCTCTourism #TravelWithIRCTC #VisitKashmir #ExploreKashmir FAQs Q1. IRCTC Kashmir Tour Package का प्रमुख आकर्षण क्या है?IRCTC का यह कश्मीर टूर पैकेज — Mystical Kashmir New Year Special — हसीन स्थलों जैसे श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम की यात्रा कराता है। इसमें फ्लाइट, होटल और हाउसबोट, साइटसीइंग और खाने-पीने की सुविधा शामिल है। Q2. इस IRCTC पैकेज की बुकिंग कब शुरू होती है और यात्रा कब होगी?यह यात्रा 29 दिसंबर 2025 को हैदराबाद से शुरू होगी। बुकिंग IRCTC Tourism की वेबसाइट पर उपलब्ध है। Q3. बच्चों के लिए IRCTC Kashmir Tour का किराया कितना है?5‑11 साल के बच्चों के लिए अगर बेड के साथ जाना हो तो किराया ₹30,050 है, और बिना बेड के ₹27,450। 2‑4 साल के बच्चों का किराया ₹21,400 है।

एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों पर भर्ती — जानिए पूरा प्रोसेस और योग्यता

Campus Placement

गुजरात के कृषि क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर आया है। राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAU) ने जूनागढ़, आनंद और नवसारी कृषि विश्वविद्यालयों में 158 एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों पर बड़ी भर्ती निकाली है। यह ऐसी भर्ती है जिसमें न सिर्फ कृषि क्षेत्र से जुड़े डिप्लोमा धारकों को प्राथमिकता मिलेगी बल्कि उन्हें सरकारी सेक्टर में स्थिर, सम्मानजनक और प्रगति से भरा करियर बनाने का मौका भी मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया 18 नवंबर से 12 दिसंबर तक चलेगी, और उम्मीदवारों को डिप्लोमा के साथ CCC कंप्यूटर कोर्स अनिवार्य रूप से पास करना होगा — या प्रोबेशन पीरियड में पूरा करना पड़ेगा। इस भर्ती में आकर्षण इसलिए भी है क्योंकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी है, वेतनमान मजबूत है और गुजरात जैसे कृषि-प्रमुख राज्य में काम करने का अवसर बेहद मूल्यवान माना जाता है। अगर आप तकनीक, खेतों और कृषि-संबंधित रिसर्च में रुचि रखते हैं, तो यह अवसर आपके लिए बिल्कुल मिस नहीं करने लायक है। उदेश्य राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAU) गुजरात ने 158 एग्रीकल्चरल असिस्टेंट के पदों के लिए बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है। यह भर्ती तीन कृषि विश्वविद्यालयों — जुनागढ़ (JAU), आनंद (AAU) और नवसारी (NAU) — में की जा रही है। आवेदन प्रक्रिया 18 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तारीख 12 दिसंबर 2025 है। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी क्यों यह मौका खास है यह भर्ती उन छात्रों के लिए बहुत अच्छी है जिन्होंने कृषि, बागवानी, कृषि इंजीनियरिंग, या खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में 2-3 साल का डिप्लोमा किया है और जो सरकारी सेक्टर में स्थिर नौकरी चाहते हैं। इसके साथ, कंप्यूटर स्किल भी जरूरी है: उम्मीदवार को DOEACC CCC परीक्षा पास होनी चाहिए या अगर अभी तक नहीं हुई है, तो प्रोबेशन पीरियड में पास करनी होगी। आयु सीमा 18 से 33 वर्ष है (सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों को छूट मिलेगी)। वेतन और नौकरी 1.पद के लिए शुरुआती वेतन ₹26,000 प्रतिमाह (fixed pay) निर्धारित किया गया है पहले पांच साल के लिए। 2.उसके बाद, नियमित वेतनमान ₹25,500 – ₹81,100 (Level-4) में होगा, जैसे जूनियर क्लास-3 तकनीकी स्टाफ। 3.यह नौकरी फुल-टाइम है और गुजरात में ही रहीगी — JAU, AAU और NAU विश्वविद्यालयों में। ये खबर भी पढ़े…10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च चयन प्रक्रिया 1.SAU भर्ती में लिखित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन शामिल हैं: 2.लिखित परीक्षा: यह OMR आधारित कंप्यूटर-रिस्पॉन्स टेस्ट (CBRT) होगा। 3.पार्ट A: रीजनिंग, डेटा इंटरप्रिटेशन, क्वांटिटेटिव (60 अंक) 1.पार्ट B: विषय-संबंधित (150 अंक) 4.कुल अंक: 210, और प्रत्येक गलत जवाब पर –0.25 अंक की कटौती होगी। 5.उसके बाद डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन (मूल दस्तावेजों का जाँच) किया जाएगा। आवेदन कैसे करें आवेदन ऑनलाइन मोड में ही करना होगा। आप JAU, AAU या NAU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। “Advt. No. 04/2025” वाला नोटिफिकेशन खोलें और उस फॉर्म को भरो। स्वयं का नाम, जन्मतिथि, कैटेगरी, शिक्षा और अन्य जानकारियाँ सही-सही भरें। अपना फोटो, सिग्नेचर, डिप्लोमा, आयु प्रमाण आदि दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें। आवेदन फीस ऑनलाइन भुगतान करें (नीचे देखिए)। सबमिट करने के बाद, उसका प्रिंट आउट ले लें और भविष्य के लिए सुरक्षित रखें, क्योंकि एक बार सबमिट करने के बाद सुधार नहीं हो सकेगा। ये खबर भी पढ़े…RO ARO Mains Exam 2026 ने घोषित की आरओ-एआरओ मेंस परीक्षा की तारीखें आवेदन शुल्क 1. सामान्य (Unreserved): ₹1,000 + बैंक चार्ज 2. आरक्षित (SC / ST / SEBC / EWS): ₹250 + बैंक चार्ज 3. PwBD उम्मीदवारों के लिए भी शुल्क ₹250 है। 4. पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) के लिए कोई शुल्क नहीं है। ये खबर भी पढ़े…टालमटोल की आदत कैसे छोड़ें: आसान Time Management Techniques जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए SAU भर्ती की योग्यता विस्तार से डिप्लोमा: 2 या 3 साल का, कृषि-संबंधित किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या बोर्ड से। कंप्यूटर कोर्स: DOEACC CCC परीक्षा पास होना चाहिए, या अगर अभी तक पास नहीं हुआ, तो उसे प्रोबेशन पीरियड में पूरा करना अनिवार्य है। नागरिकता: उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना चाहिए।The Sootr आम वर्ग के लिए 18–33 साल, और आरक्षित व विशेष श्रेणियों में छूट मिलेगी। यह अवसर क्यों सोचना चाहिए? यह SAU भर्ती उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो कृषि शिक्षा में डिप्लोमा लेकर टेक्निकल जॉब करना चाहते हैं और ग्रामीण-कृषि क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। सरकारी नौकरी होने की वजह से अच्छी सुरक्षा, वेतन और आगे प्रमोशन का मौका है। इसके अलावा, SAU तीन बड़े कृषि विश्वविद्यालयों में काम करने का मौका देता है — यह मतलब है कि आप केवल एक ही जगह नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय-लेवल की नौकरी के अनुभव के साथ अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं। FAQs Q1: SAU गुजरात में एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों की कुल संख्या कितनी है?SAU (गुजरात) में तीन कृषि विश्वविद्यालयों (JAU, AAU, NAU) के लिए कुल 158 एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों के लिए भर्ती निकाली गई है। Q2: SAU भर्ती के लिए किस शैक्षणिक योग्यता की जरूरत है?उम्मीदवार के पास 2 या 3 साल का डिप्लोमा कृषि-संबंधित विषयों में होना चाहिए (जैसे कृषि, बागवानी, कृषि इंजीनियरिंग, खाद्य प्रौद्योगिकी वगैरह)। इसके साथ, DOEACC CCC कंप्यूटर परीक्षा पास होनी चाहिए, या प्रोबेशन पीरियड के दौरान इसे पूरा करना अनिवार्य है। Q3: SAU भर्ती में चयन कैसे होगा?चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (OMR-CBRT) और डॉक्युमेंट सत्यापन शामिल है। परीक्षा दो हिस्सों में होगी — पार्ट A (रीजनिंग, डेटा इंटरप्रिटेशन, संख्यात्मक योग्यता) और पार्ट B (विषय-संबंधित प्रश्न)। हर गलत जवाब पर 0.25 अंक की कटौती होगी।

New labor codes implemented: श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक बदलाव

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भारत में 21 नवंबर 2025 से चार नए लेबर कोड लागू हुए — न्यूनतम सैलरी , सोशल सिक्योरिटी , गिग वर्कर्स को कानूनी पहचान। नई दिल्ली, जेएनएन। सरकार ने देश के सभी लेबर और एम्प्लाइज के लिए एक बड़ा फैसला करते हुए शुक्रवार से चार नए लेबर कोड लागू किए हैं।  पहले के 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को अब 4 लेबर कोड में बदला गया है। नए नियमों का मकसद हर कामगार को समय पर और ओवरटाइम वेतन, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को बराबर मौका और सैलरी, सोशल सिक्योरिटी, फ्री हेल्थ चेकअप देना है। नए कानून से कर्मचारी को 5 की जगह उदेश्य भारत सरकार ने 21 नवंबर 2025 को चार नई श्रम संहिताएँ (लेबर कोड) लागू कर दी हैं। ये कोड पुराने और बिखरे हुए 29 श्रम कानूनों को एक सरल, आधुनिक और एकीकृत ढाँचे में बदलते हैं। इन बदलावों को सरकार ने “श्रमिक-केंद्रित सबसे बड़े सुधारों में से एक” करार दिया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देशभर में लागू होने पर हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि ये परिवर्तन न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कामगारों की गरिमा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे ऐतिहासिक दिन बताया है। उन्होंने कहा: “Shramev Jayate!” — आज इस सुधार के साथ भारत की मजदूर नीति एक नए युग में प्रवेश कर रही है। ये खबर भी पढ़े…Launch of the book ‘Modi’s Mission’: एक विचार की कहानी नए कोड: क्या-क्या बदल रहा है? चार लेबर कोड – एक नई नींव वेज कोड (Code on Wages, 2019): न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी, समय पर भुगतान अनिवार्य। औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code, 2020): श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को व्यवस्थित करने के नए नियम सामाजिक सुरक्षा कोड (Code on Social Security, 2020): गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवर मिलेगा। OSHWC कोड (Occupational Safety, Health & Working Conditions, 2020): काम-गारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वार्षिक चेकअप जैसे प्रावधान शामिल हैं। श्रमिकों को मिलेंगे ये फायदे अपॉइंटमेंट लेटर: हर श्रमिक को नियुक्ति-पत्र अनिवार्य मिलेगा, जिसमें पोस्ट, वेतन और सुरक्षा सुविधाओं का जिक्र होगा।  फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी: अब स्थायी कर्मचारियों के बराबर लाभ — छुट्टियां, मेडिकल, सामाजिक सुरक्षा आदि। ग्रेच्युटी पाने के लिए सिर्फ एक साल की सेवा होगी जरूरी। 1.न्यूनतम वेतन: सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू होगा। 2.ओवरटाइम: तय समय के बाद अतिरिक्त घंटे काम करने पर दोगुना भुगतान देना होगा। 3.स्वास्थ्य सुरक्षा: 40 वर्ष से ऊपर के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक हेल्थ चेकअप। 4.महिला कामगारों के अधिकार: समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, और रात की पाली में काम करने की अनुमति (सुरक्षा के साथ और उनकी सहमति पर)। 4.गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: पहली बार कानूनी परिभाषा; एग्रीगेटर कंपनियों को 1-2% सालाना कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। 5.लचीला लाइसेंसिंग और नियम: नियोक्ताओं के लिए पैन-इंडिया लाइसेंस, एकल पंजीकरण, एकल सालाना रिटर्न जैसी व्यवस्थाएँ। ये खबर भी पढ़े…IED Practice: CISF को विस्फोट कवच में तीसरा स्थान, शीर्ष तीन में पहुंचने वाला एकमात्र CAPF वास्तविकता और चुनौतियाँ ट्रेड यूनियनों ने कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है। वे कहती हैं कि छंटनी (रिट्रेंचमेंट) के नियम अस्पष्ट हैं और केंद्र-राज्य स्तर पर मनमानी हो सकती है। कुछ छोटे व्यवसायों को डर है कि ओवरटाइम दोगुना देने और बेसिक वेतन बढ़ाने से उनकी लागत बहुत बढ़ेगी। सभी राज्यों ने अभी तक नए कोड के लिए नियम नहीं तैयार किए हैं। उदाहरण के लिए, PIB की रिपोर्ट के अनुसार 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने मसौदा नियम जारी किए, लेकिन कुछ अभी पीछे हैं। क्यों है यह सुधार इतना महत्वपूर्ण? यह कदम इसलिए भी बड़ा है क्योंकि लगभग 29 पुराने कानून (1930-1950 के दशक के) को नई, साफ़ और आधुनिक व्यवस्था से बदल रहा है। गिग-इकॉनॉमी, प्लेटफॉर्म काम, छोटे उद्योग और असंगठित श्रमिक – ये सभी अब पहले से अधिक संरक्षित होंगे। सरकार का कहना है कि यह भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और भविष्य-तैयार राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये खबर भी पढ़े…IFFI Award 2025: 20 नवंबर से शुरू, अभिनेता रजनीकांत को 50 साल के कैरियर पर सम्मान निष्कर्ष इन चार नए लेबर कोड्स के लागू होने से भारत के श्रमिकों को बचपन की पुरानी अपेक्षाएँ अब हकीकत में बदलने का मौका मिलेगा। नियुक्ति पत्र से रोज़गार की गारंटी होगी, न्यूनतम वेतन का अधिकार मिलेगा, और गिग वर्कर्स जैसी अस्थिर श्रेणियाँ अब सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में आएंगी। यह पूरी दिशा “श्रमिक-पहचान, सम्मान और सुरक्षा” की ओर इंगित करती है। हालाँकि, चुनौतियाँ भी हैं – पूरी नीतियों को लागू करना, राज्यों को नियम बनाना, और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करना। ये कदम तभी सफल होंगे जब केंद्र और राज्य मिलकर पारदर्शी और जवाबदेह क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। FAQs प्रश्न 1: नई श्रम संहिताओं का मुख्य उद्देश्य क्या है? नई चार लेबर कोड्स का मकसद पुराने, बिखरे और जटिल श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाना है। इनको लागू करके सरकार श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना चाहती है। प्रश्न 2: क्या गिग वर्कर्स (जैसे फूड डिलीवरी, प्लेटफॉर्म कर्मचारी) इन नए कोड्स के तहत आ जाते हैं? हाँ। नए कोड्स में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की कानूनी पहचान दी गई है। उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना (PF, बीमा, पेंशन आदि) का दायरा मिलेगा। एग्रीगेटर कंपनियों को उनके लिए सालाना 1-2% कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में जमा करना होगा। प्रश्न 3: महिला श्रमिकों के लिए नए कोड्स में क्या-क्या बदलाव हैं? महिला श्रमिकों को समान वेतन (equal pay for equal work) का अधिकार मिला है। साथ ही, उन्हें रात की पाली में काम करने की अनुमति है, बशर्ते सुरक्षा उपाय हों और उनकी सहमति हो। मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह तक बढ़ाया गया है और शिकायत निवारण समितियों में महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है।

इतिहास की किताबों में बदलाव: अकबर-टीपू के आगे ‘महान’ हटाया, RSS नेता का दावा

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महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आयोजित ऑरेंज सिटी लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इतिहास की किताबों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि NCERT ने इतिहास को अधिक संतुलित और तथ्याधारित स्वरूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। उनके अनुसार, अब नई इतिहास पुस्तकों में अकबर और टीपू सुल्तान के आगे ‘महान’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इतिहास का मूल्यांकन अब घटनाओं और प्रमाणों के आधार पर किया जा रहा है। NCERT ने किए 11वीं तक के सिलेबस में चेंज अपने संबोधन में आंबेकर ने बताया कि NCERT ने कुल 15 किताबों में से 11 कक्षाओं की किताबों में इम्पोर्टेन्ट अमेंडमेंटस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में भी बदलाव अगले साल लागू किए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि किताबों से किसी का नाम हटाया नहीं गया है। “हमारे इतिहास के कठोर सच भी बच्चों को जानने चाहिए” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि इतिहास में कौन-सी घटनाएं लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनीं, और किन कारणों से समाज को संघर्ष करना पड़ा। इसलिए किसी चरित्र को हटाने के बजाय उनके कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण जरूरी है। ये खबर भी पढ़े…भारत के ‘आधार’ की तर्ज पर ब्रिटेन लाएगा नया ID कार्ड सिस्टम, क्या है पीएम स्टारमर का प्लान? क्यों हटाया गया ‘महान’ शब्द? आंबेकर का कहना था कि ‘महान’ शब्द किसी ऐतिहासिक चरित्र को एकतरफा रूप से महिमामंडित कर देता है, जबकि इतिहास का उद्देश्य संतुलित दृष्टिकोण देना है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास बहुत बड़ा है और इसे दुनिया को देने से पहले हमें स्वयं उस ज्ञान को समझने की आवश्यकता है।पुरानी किताबों की भाषा पर उठे थे सवाल कई इतिहासकार और शिक्षाविद लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि इतिहास पुस्तकों में इस्तेमाल शब्दों को तटस्थ बनाया जाए। इसी कारण NCERT ने अध्यायों की भाषा को सरल और तथ्यपरक बनाने पर काम किया। ये खबर भी पढ़े…हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ नालंदा यूनिवर्सिटी पर भी बोले RSS नेता अपने भाषण में उन्होंने नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए बताया कि यह केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं थी। नालंदा में 76 स्किल-बेस्ड कोर्स पढ़ाए जाते थे। उनके अनुसार, नालंदा में 76 प्रकार के कौशल कोर्स पढ़ाए जाते थे, जिनमें— अर्बन प्लानिंग खेती की तकनीक शासन व्यवस्था मेकअप और आर्ट सीक्रेट एजेंट ट्रेनिंग मैकेनाइजेशन जैसे विषय शामिल थे।उन्होंने कहा कि भारत का यह प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक समाज के लिए उदाहरण बन सकता है। ये खबर भी पढ़े…हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला ये सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 का हुआ ऐलान भारत विकास की राह पर, लेकिन संतुलन जरूरी अंत में आंबेकर ने कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन दुनिया के कई देशों ने विकास के दौरान अपनी संस्कृति व पारिवारिक मूल्यों के साथ समझौता कर दिया था। उन्होंने सलाह दी कि भारत को इस दिशा में सावधान रहना होगा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास और ज्ञान पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वह समझ सके कि भारत कहाँ से गुजरा है और भविष्य में उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। FAQs Q1. क्या NCERT ने अकबर और टीपू सुल्तान को इतिहास की किताबों से हटा दिया है। नहीं, NCERT ने उन्हें किताबों से नहीं हटाया है। केवल उनके नाम के आगे लगे ‘महान’ शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया है ताकि इतिहास को अधिक तटस्थ और तथ्याधारित ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। Q2. इतिहास की किताबों में यह बदलाव कब से लागू होंगे? Q3. अब तक कक्षा 1 से 11 तक की अधिकांश किताबों में बदलाव किए जा चुके हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में संशोधन अगले सत्र से लागू होंगे। Q4. RSS नेता सुनील आंबेकर ने इस बदलाव को क्यों सकारात्मक बताया? उन्होंने कहा कि पुरानी किताबों में पक्षपातपूर्ण भाषा थी, जबकि नई किताबें तटस्थ दृष्टिकोण देती हैं। इस बदलाव के जरिए बच्चों को अकबर और टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक पात्रों के कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण मिलेगा।

Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी

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CBSE ने 10वीं कक्षा के लिए बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत अब बोर्ड परीक्षा दो सत्रों में होगी। नए मॉडल में पहला सत्र सभी छात्रों के लिए अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा सत्र केवल सुधार, पुनः प्रयास या बेहतर स्कोर पाने का विकल्प देगा। खास बात यह है कि दूसरे सत्र में छात्र अधिकतम तीन विषयों की ही परीक्षा दे पाएंगे, जिससे अनावश्यक दबाव कम करने और स्कोर सुधारने का मौका मिलेगा। इस नई परीक्षा संरचना का उद्देश्य छात्रों को एक लचीला, तनाव-मुक्त और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण देना है। वहीं 12वीं के लिए फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी—यानी एक ही मुख्य परीक्षा सत्र। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्रों की प्रवेश परीक्षाओं और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया में एक समान टाइमलाइन की आवश्यकता होती है। 10वीं में दो-सेशन परीक्षा का ढांचा पहले सत्र और दूसरे सत्र की विशेषताएं ये खबर भी पढ़े…IMD Recruitment 2025: भारत मौसम विज्ञान विभाग में 136 प्रोजेक्ट स्टाफ पदों पर भर्ती, करें अप्लाई परिणाम, सुधार और मार्कशीट ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड 12वीं की परीक्षा में ब बदलाव नहीं 12वीं की परीक्षा व्यवस्था अभी एक-सत्र वाली ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्र अक्सर JEE Main, NEET जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं और उन्हें उसी सत्र में परिणाम चाहिए। छात्रों-अभिभावकों के लिए सुझाव ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय क्यों आया यह नया मॉडल? FAQs Q1. क्या मैं दूसरे सत्र में सभी विषयों को दोबारा दे सकता हूँ?नहीं। 10वीं में दूसरे सत्र में केवल अधिकतम तीन विषयों के लिए चयन कर सकते हैं। उन विषयों में ही सुधार संभव है जिनका बाह्य मूल्यांकन 50 % या उससे ज्यादा है। Q2. अगर पहले सत्र में तीन से ज़्यादा विषयों में फेल हो गया तो क्या होगा?यदि छात्र तीन या अधिक विषयों में पहले सत्र में अनुपस्थित रहा या फेल हुआ हो, तो उसे दूसरे सत्र में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलेगा। उसे अगले वर्ष मुख्य परीक्षा में शामिल होना होगा (Essential Repeat)। Q3. क्या 12वीं के छात्रों को भी दूसरा सत्र मिलेगा?इस समय 12वीं के लिए एक-सत्र मॉडल ही जारी रहेगा। दूसरा सत्र फिलहाल नहीं होगा क्योंकि 12वीं के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े होते हैं।

उत्तराखंड में UKMSSB ने निकाली नर्सिंग अधिकारी भर्ती: 587 पदों के लिए 2025 में अवसर

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उत्तराखंड मेडिकल सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (UKMSSB) ने 2025 में बड़ी भर्ती का ऐलान किया है, जिसके तहत कुल 587 नर्सिंग ऑफिसर (Nursing Officer) पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक शानदार अवसर है। आवेदन प्रक्रिया 27 नवंबर 2025 से शुरू होकर 17 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह लिखित परीक्षा के आधार पर होगी, जिसमें उम्मीदवारों की नर्सिंग से संबंधित ज्ञान, दक्षता और व्यवहारिक समझ का आकलन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को वेतन स्तर-7 के अनुसार ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रतिमाह का आकर्षक वेतनमान प्राप्त होगा, जो इस पद को और भी प्रतिष्ठित बनाता है। इन पदों के लिए आवेदकों के पास ब्रिटिश नर्सिंग काउंसिल, भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) या संबंधित राज्य नर्सिंग परिषद से मान्यता प्राप्त डिग्री/डिप्लोमा होना आवश्यक है। UKMSSB की यह भर्ती नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक सरकारी नौकरी का मौका प्रदान करती है। उदेश्य उत्तराखंड मेडिकल सेवा चयन बोर्ड (UKMSSB) ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2025 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती में कुल 587 रिक्तियां हैं, जिसमें पुरुष और महिला दोनों नर्सिंग अधिकारी के पद शामिल हैं। यह भर्ती राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, हल्द्वानी में है। वेतन और ग्रेड चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-7 पगार संरचना के अंतर्गत वेतन मिलेगा, जो ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रतिमाह के बीच है। इसका मतलब यह है कि यह नौकरी नर्सिंग पेशेवरों के लिए आकर्षक स्थिरता और भविष्य की संभावनाओं वाला सरकारी पद ह पदों का विभाजन नर्सिंग अधिकारी (महिला) – डिप्लोमा धारक: 336 पद नर्सिंग अधिकारी (महिला) – डिग्री धारक: 144 पद नर्सिंग अधिकारी (पुरुष) – डिप्लोमा धारक: 75 पद नर्सिंग अधिकारी (पुरुष) – डिग्री धारक: 32 पद समुदायवार आरक्षण भी है: SC, ST, OBC, EWS और सामान्य वर्ग के लिए अलग-अलग स्थान आरक्षित हैं। कुल मिलाकर 118 SC, 21 ST, 82 OBC, 58 EWS और 308 सामान्य (अनारक्षित) पद हैं। शैक्षणिक योग्यता B.Sc (Hons) Nursing, या B.Sc Nursing, या Post-Basic B.Sc Nursing, या GNM (General Nursing & Midwifery) डिप्लोमा। इसके अलावा, उम्मीदवारों को नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण होना चाहिए (भारतीय या राज्य नर्सिंग-काउंसिल)। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि हिंदी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना भी जरूरी है। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 42 वर्ष, जैसा कि अधिसूचना में दिया गया है। विशेष वर्ग (आरक्षित श्रेणियों) को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में दो पेपर हो सकते हैं: नर्सिंग विषय (100 अंकों) सामान्य हिंदी, सामान्य ज्ञान, सामान्य अध्ययन (100 अंकों) — हालांकि कुछ स्रोत स्पष्ट रूप से यह विवरण नहीं दे रहे हैं। परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग की जानकारी भी दी गई है: गलत उत्तर पर एक-चौथाई अंक काटे जाएंगे। इसके बाद, सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज़ सत्यापन और मेडिकल परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। कैसे आवेदन करें — स्टेप-बाय-स्टेप फॉर्म जमा करने के बाद कॉन्फ़र्मेशन पेज डाउनलोड/प्रिंट करना न भूलें। UKMSSB की आधिकारिक वेबसाइट (ukmssb.org) पर जाएँ। “Recruitment” सेक्शन में “Nursing Officer Recruitment 2025” लिंक चुनें। “Apply Online” बटन क्लिक करें — यह 27 नवंबर 2025 से सक्रिय होगा। पंजीकरण के लिए अपना ई-मेल और मोबाइल नंबर दर्ज करें, और ओटीपी के ज़रिए वेरिफाई करें। अपना शैक्षणिक, व्यक्तिगत और कैटेगरी विवरण सावधानी से भरें। सभी ज़रूरी दस्तावेज (जैसे Marksheet, पंजीकरण प्रमाणपत्र) स्कैन करके अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करें (यदि लागू हो)। FAQs Q1. UKMSSB नर्सिंग अधिकारी भर्ती 2025 में आवेदन करने के लिए कौन-सी शैक्षणिक योग्यता चाहिए?उत्तर: उम्मीदवार के पास B.Sc Nursing (General / Hons) या Post-Basic B.Sc Nursing या GNM डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ-साथ नर्सिंग काउंसिल (भारतीय नर्सिंग परिषद या राज्य नर्सिंग परिषद) में पंजीकरण अनिवार्य है। Q2. आवेदन के लिए अंतिम तिथि कब है और आवेदन कैसे करना होगा?आवेदन ऑनलाइन किया जाना है और प्रक्रिया 27 नवंबर 2025 से शुरू होगी। उम्मीदवार 17 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। Q3. चयन प्रक्रिया क्या है और लिखित परीक्षा के बाद क्या कदम होंगे?चयन पूरी तरह लिखित परीक्षा पर आधारित है। उसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन किया जाएगा। मेरिट लिस्ट केवल लिखित परीक्षा के अंक के आधार पर तैयार की जाएगी।

टालमटोल की आदत कैसे छोड़ें: आसान Time Management Techniques जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

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क्या आप भी पढ़ाई या किसी जरूरी काम को बार-बार बाद में करने की सोचकर छोड़ देते हैं? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं, क्योंकि आज की तेज़ लाइफ में टालमटोल की आदत हर उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। कई बार हम काम को इसलिए शुरू नहीं करते क्योंकि वह हमें कठिन लगता है, तो कभी इसलिए क्योंकि दिमाग एक बड़ा टास्क सोचकर डर जाता है। धीरे-धीरे यही आदत हमारी पढ़ाई, काम और प्रोडक्टिविटी को नुकसान पहुँचाती है।तो आइए जानें कि कैसे छोटी-छोटी टेक्निक्स आपकी बड़ी मुश्किल को आसान बना सकती हैं। टालमटोल की आदत क्यों होती है? हम में से कई लोग अक्सर पढ़ाई या किसी जरूरी काम को कल पर टाल देते हैं, और फिर वही आदत धीरे-धीरे हमारे रूटीन का हिस्सा बन जाती है। मैं खुद भी यह आदत लेकर संघर्ष करता था, और सोचता था कि शायद मेरे जैसे और भी होंगे। रिसर्च बताती है कि लोग अक्सर किसी काम के बड़े या मुश्किल दिखने के कारण उसे टालने लगते हैं। एक स्टडी के अनुसार, लगभग 20–25% युवा रोज़ाना टालमटोल की समस्या का सामना करते हैं (American Psychological Association Research)। इसीलिए, यह समझना ज़रूरी है कि सही तकनीकें अपनाकर इस आदत को आसानी से बदला जा सकता है। टाइम मैनेजमेंट के Easy और Effective तरीके नीचे दिए गए सभी तरीके ऐसे हैं, जिन्हें स्टूडेंट्स और वर्किंग लोग आसानी से अपना सकते हैं। मैंने पहली बार यह तकनीक एक स्टडी में पढ़ी, जहाँ बताया गया कि दिमाग छोटे टास्क जल्दी स्वीकार करता है।इसमें आप बस पांच मिनट तक काम शुरू करते हैं और फिर आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं।आप महसूस करेंगे कि शुरुआत करने के बाद काम पहले जैसा भारी नहीं लगता।यह तकनीक टालमटोल तोड़ने का सबसे आसान और पहला कदम माना जाता है।बड़े टास्क को छोटे हिस्सों में करने से मन हल्का और फोकस बेहतर होता है। टाइम मैनेजमेंट की दुनिया में यह तकनीक सबसे लोकप्रिय मानी जाती है।इसमें 25 मिनट पढ़ाई या काम और 5 मिनट का छोटा ब्रेक शामिल होता है।चार राउंड पूरे करने के बाद 15–20 मिनट का बड़ा ब्रेक लिया जाता है।यह तकनीक दिमाग को फ्रेश रखती है और फोकस को लंबे समय तक बनाए रखती है।कई रिसर्च बताती हैं कि छोटे ब्रेक लेने से मानसिक थकान कम हो जाती है। ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड कुछ लोगों को पढ़ाई के दौरान बैकग्राउंड म्यूजिक से बेहतर फोकस मिलता है।आप धीमी पियानो धुन, लो-फाई म्यूजिक या ध्यान वाला म्यूजिक चुन सकते हैं।साइकोलॉजी रिसर्च में बताया गया है कि सही आवाज़ें दिमाग को शांत बनाती हैं।साउंड ट्रिगर आपके दिमाग को संकेत देती है कि अब काम शुरू करने का समय है।यह तरीका उन छात्रों के लिए अच्छा है जिन्हें शुरू करने में दिक्कत होती है। ये खबर भी पढ़े…प्रधानमंत्री (PM) का पर्सनल सेक्रेटरी कैसे चुना जाता है – जाने पूरी डिटैल्स यह तकनीक आपको सीमित समय में काम खत्म करने का अभ्यास सिखाती है।आप 30 मिनट, 45 मिनट या जितना सही लगे, उतना समय सेट कर सकते हैं।समय पूरा होने पर छोटा ब्रेक लें और फिर दोबारा सेट करें।इससे दिमाग टाइम-लिमिट का आदी हो जाता है और आलस कम होता है।टास्क का स्ट्रक्चर साफ होने से टालमटोल जल्दी कम होने लगता है। ये खबर भी पढ़े…Lekhpal Recruitment : PET रिजल्ट जारी होते ही 7,994 पदों पर होगी सीधी भर्ती यह तरीका दिमाग में जमा भारी आइडियाज को हल्का बनाने में मदद करता है।स्टूडेंट्स के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी मानी जाती है।बस एक कागज लें और बिना सोचे सभी आइडियाज या स्टेप्स लिख दें।लिखने से काम स्पष्ट दिखने लगता है और डर कम हो जाता है।बहुत सी स्टडीज बताती हैं कि लिखने से दिमाग सक्रिय हो जाता है। कई बार समस्या यह होती है कि हम खुद को समय तय नहीं करते।डिजिटल कैलेंडर या रिमाइंडर ऐप्स इस स्थिति में बेहद उपयोगी होते हैं।आप अपने सभी टास्क और डेडलाइंस पहले से सेट कर सकते हैं।जब समय आता है, नोटिफिकेशन आपको काम शुरू करने के लिए तैयार करता है।इससे रूटीन मजबूत बनता है और टालमटोल खुद-ब-खुद कम होने लगता है। यह तरीका बड़े कामों को छोटे, मैनेजेबल ब्लॉक्स में बदल देता है।आप एक घंटे का ब्लॉक बनाएँ और पूरा समय ध्यान से काम करें।ब्लॉक पूरा होने पर खुद को छोटा इनाम दें, जैसे 5 मिनट आराम।इससे मोटिवेशन बढ़ता है और बड़ा काम छोटा लगता है।लंबे समय तक पढ़ाई करने वालों के लिए यह तरीका बेहद प्रभावी है। कई लोग डर के कारण काम शुरू ही नहीं कर पाते।इस तकनीक में आप काम का सिर्फ 5-सेकंड वाला छोटा हिस्सा कल्पना करते हैं।जैसे अगर 10 पेज लिखने हैं, तो बस पहला वाक्य सोचें।इससे दिमाग को लगेगा कि काम आसान है और शुरुआत सहज हो जाएगी।यह तरीका छोटे कदमों से बड़े कामों तक पहुँचने में मदद करता है। निष्कर्ष टालमटोल की आदत कोई बड़ी समस्या नहीं, बस सही तकनीक की कमी होती है।इन सभी टाइम मैनेजमेंट तरीकों को धीरे-धीरे अपनाकर आप अपनी पढ़ाई सुधार सकते हैं।रूटीन, मनःस्थिति और फोकस बदलने से टालमटोल अपने आप खत्म होने लगता है।हर तकनीक दिमाग को नया तरीका देती है और काम आसान बनाती है।नियमित अभ्यास से आपकी प्रोडक्टिविटी तेजी से बढ़ती दिखाई देगी। FAQs टालमटोल खत्म करने के लिए छोटे-छोटे स्टेप्स से शुरुआत करें।5 मिनट रूल, पॉमोडोरो और साउंड ट्रिगर जैसी तकनीकें तुरंत असर देती हैं।नियमित रूटीन और समय सीमाएँ दिमाग को अनुशासित बनाती हैं। सबसे आसान तरीका पॉमोडोरो तकनीक और 5-मिनट रूल माने जाते हैं।इनसे काम छोटा हो जाता है और मन तुरंत शुरू करने लगता है।स्टूडेंट्स और वर्किंग लोग दोनों इसे आसानी से अपना सकते हैं। साउंड ट्रिगर म्यूजिक, ब्लॉक टाइम और स्क्रैच पेपर बहुत मदद करते हैं।कमरा शांत रखें और मोबाइल नोटिफिकेशन बंद कर दें।स्पष्ट टाइमटेबल दिमाग को फोकस करने में जल्दी मदद करता है। American Psychological Association – Research on Procrastination University of Cambridge – Productivity Psychology Studies University of Cambridge – Productivity Psychology Studies Harvard Business Review – Time Management Techniques