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बस्तर में अमित शाह की मौजूदगी, मुरिया दरबार में स्थानीय नेताओं के साथ की चर्चा

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जगदलपुर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दशहरा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जदगलपुर पहुंच चुके हैं। यहां उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने बस्तर के लोगों से बातचीत की। इसके बाद गृहमंत्री ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। इसके बाद यहां से सीधे पास स्थित सिराहसारा भवन में मुरिया दरबार में मांझी, चालकी, गायता, पे से मिलकर उन्हें संभोधित कर रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री मूरिया दरबार, लाल बाग में प्रदर्शनी का अवलोकन, बस्तर दशहरा लोकोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री के साथ में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी पहुंचे हैं। बता दें कि बस्तर दशहरे की ऐतिहासिक परंपरा मुरिया दरबार इस बार और भी विशेष होने जा रहा है। शाह ऐसे दौर में बस्तर आ रहे हैं, जब माओवाद के खात्मे का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है और केंद्र व राज्य की डबल इंजन सरकार क्षेत्र की संस्कृति व परंपराओं को नई पहचान देने में जुटी है। दरबार में वे 80 परगनाओं से आए मांझी-मुखियाओं से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। यह पहला अवसर होगा जब कोई केंद्रीय गृहमंत्री इस पारंपरिक दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से आमने-सामने बातचीत करेगा। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे की यह परंपरा 145 वर्षों से जारी है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। शाह की मौजूदगी इसे ऐतिहासिक बना रही है। माओवाद पर सख्त संदेश, जनजातीय समाज को प्राथमिकता अमित शाह जब से माओवाद के खात्मे के लिए 30 मार्च 2026 तक की समयसीमा तय कर चुके हैं, तब से वे देश के इतिहास में सर्वाधिक बार बस्तर आने वाले गृहमंत्री बन गए हैं। बीते 22 महीनों में यह उनका छठा बस्तर दौरा होगा। हर बार उन्होंने माओवादियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि समर्पण ही एकमात्र रास्ता है, अन्यथा सुरक्षा बल सख्त जवाब देंगे। कई अवसरों पर वे माओवादियों को भाई कहकर भी संबोधित कर चुके हैं। बस्तर अब माओवाद मुक्त होने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में दशहरे के मौके पर शाह का प्रवास विशेष महत्व रखता है। इससे पहले 5 अप्रैल 2025 को वे दंतेवाड़ा में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ (मेला) में शामिल हुए थे और मंच से आदिवासी अस्मिता व संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। इस बार वे उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सनातन आस्था और आदिवासी परंपरा के अद्वितीय संगम बस्तर दशहरा का हिस्सा बनेंगे। मुरिया विद्रोह से जुड़ी है परंपरा 1876 से पहले बस्तर दशहरे के दौरान मांझी-मुखिया और ग्रामीण राजमहल में ठहरते थे और राजा का दरबार लगता था। उसी दौरान अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और जंगल पर जनजातीय अधिकारों पर अंकुश के विरोध में झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में मुरिया जनजाति ने ऐतिहासिक विद्रोह छेड़ा। 8 मार्च 1876 को सिरोंचा के डिप्टी कमिश्नर मैक जॉर्ज को आंदोलनकारियों के सामने झुकना पड़ा और राजस्व-प्रशासनिक सुधार लागू करने पड़े। यही विद्रोह जनजातीय एकता और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बना। इसके बाद से दशहरे के अवसर पर राजमहल के राजा दरबार की जगह झाड़ा सिरहा की गुड़ी में ‘मुरिया दरबार‘ लगने लगा। 1965 तक महाराजा स्व. प्रवीरचंद्र भंजदेव स्वयं इसकी अध्यक्षता करते रहे। बाद में यह परंपरा शासन-प्रशासन की उपस्थिति में जारी रही।

ऑस्ट्रेलिया दौरा 2025: शुभमन गिल को मिली वनडे कमान, रोहित और कोहली भी टीम में बरकरार

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नई दिल्ली भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती पर अक्टूबर-नवंबर में तीन वनडे और पांच टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं. इसके लिए आज भारतीय टीम की घोषणा हो गई है. शुभमन गिल को टेस्ट के बाद वनडे का भी कप्तान बनाया गया है. टीम सेलेक्शन के लिए अहमदाबाद में चयनकर्ताओं की मीटिंग हुई है. जिसमें टीम को लेकर मंथन किया गया. गिल ने वनडे कैप्टन के तौर पर रोहित शर्मा की जगह ली है. भारत की वनडे टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल. भारत की टी20 टीम: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल (उप-कप्तान), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (WK), वरुण चक्रवर्ती, जसप्रित बुमरा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, संजू सैमसन (WK), रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर. वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी शामिल किए जाने की संभावना है. ये दोनों दिग्गज टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं. ऐसे में दोनों सिर्फ एक फॉर्मेट में भारत के लिए खेलने के योग्य हैं. रोहित और विराट ने भारत के लिए आखिरी बार आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी में खेलते दिखे थे. तब भारत ने न्यूजीलैंड को मात देकर खिताब जीता था. विराट कोहली और रोहित शर्मा ने मिलकर ओडीआई क्रिकेट में 25 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं, जिसमें 83 शतक शामिल रहे. लेकिन अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ये दोनों महान बल्लेबाज 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे. इस मेगा टूर्नामेंट में अभी दो साल का वक्त बाकी है.  तब तक रोहित शर्मा की उम्र 40 पार कर जाएगी, जबकि विराट कोहली की उम्र भी 39 के करीब होगी. 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित की उम्र चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन किंग कोहली की फिटनेस बेहतरीन है. ऐसे में यह संभावना मजबूत है कि वह 2027 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा बन सकते हैं. भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे का फुल शेड्यूल 19 अक्टूबर: पहला वनडे, पर्थ 23 अक्टूबर: दूसरा वनडे, एडिलेड 25 अक्टूबर: तीसरा वनडे, सिडनी 29 अक्टूबर: पहला T20, कैनबरा 31 अक्टूबर: दूसरा T20, मेलबर्न 2 नवंबर: तीसरा T20, होबार्ट 6 नवंबर: चौथा T20, गोल्ड कोस्ट 8 नवंबर: पांचवां T20, ब्रिस्बेन

मप्र में Coldrif सिरप प्रतिबंधित, CM का ऐलान – बच्चों की जान लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

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भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने Coldrif सिरप को पूरे प्रदेश में बैन कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि एमपी में इस सिरप की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी प्रदेश में बैन लगाया जा रहा है। छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन से हुई बच्चों की दर्दनाक मौत पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इसे पूरे प्रदेश में बैन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्राप्त हुई जांच रिपोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है और दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला इस सिरप निर्माण करने वाली फैक्ट्री तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की दुखद घटना के बाद एमपी सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच कराने का अनुरोध किया था। आज सुबह प्राप्त जांच रिपोर्ट में सिरप में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप के साथ इस कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स को भी बैन किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जानकारी दी कि स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई पहले से जारी थी और अब राज्य स्तर पर भी एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। छिंदवाड़ा में सिरप से गई मासूम बच्चों की जान बता दें कि सितंबर माह में छिंदवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों को सर्दी-खांसी के इलाज के लिए यही कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया। इसके बाद बच्चों में गंभीर लक्षण जैसे उल्टी, पेट दर्द, बेहोशी सहित कई लक्षण देखे गई। प्रारंभिक जांच में सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी का संदेह जताया गया, जो किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। अब तक इस घटना में 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य कई अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद जांच रिपोर्ट आने पर अब मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप बैन कर दिया गया है।

कफ सिरप कांड ने मचाई सनसनी: 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु में बिक्री पर रोक, राजस्थान में बड़ा एक्शन

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जयपुर  कफ सिरप विवाद ने पूरे देश को हिला दिया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित सिरप 'कोल्ड्रिफ' की बिक्री पर रोक लगा दी है. वहीं, राजस्थान सरकार ने राज्य ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया और संबंधित कंपनी की दवाओं का वितरण रोक दिया है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं. राजस्थान में बड़ा एक्शन… राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया और राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है. साथ ही जयपुर की Kaysons Pharma कंपनी की दवाओं के वितरण पर भी रोक लगा दी गई है. इससे पहले विवादित सिरप बच्चों को देने के आरोप में डॉक्टर पलक कुलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू कुमार सोनी को भी निलंबित किया गया था. तमिलनाडु में 'कोल्ड्रिफ' सिरप पर बैन तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौतों के बाद लिया गया. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण कर सैंपल लिए हैं. इन्हें सरकारी लैब में टेस्ट के लिए भेजा गया है ताकि 'डाईएथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की जांच हो सके. '2 साल से कम बच्चों को ना दें कफ सिरप' केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवा ना लिखी जाए. DGHS की इस गाइडलाइन का मकसद संदिग्ध सिरप से बच्चों की जान बचाना है. राजस्थान में घर-घर अभियान राजस्थान सरकार ने शनिवार से पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है. आशा, एएनएम और सीएचओ आमजन को जागरूक करेंगे कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवा ना लें. बच्चों की पहुंच से दवाएं दूर रखने और दुष्प्रभाव पर तुरंत कदम उठाने की हिदायत दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना प्रोटोकॉल दवा लिखने या वितरित करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमोरफन युक्त दवा नहीं दी जाए. आमजन को समझाया जाए कि वे घर में रखी दवाओं का बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नहीं करें. दवा के सेवन के बाद किसी भी तरह का दुष्प्रभाव अथवा सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दौरे जैसे लक्षण नजर आएं तो नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104/108 या राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क किया जा सकता है. राजस्थान का सिरप सुरक्षित इस बीच राजस्थान सरकार ने लैब टेस्ट कराए हैं जिनमें यह पाया गया है कि विवादित सिरप के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, हालांकि जांच जारी रहेगी. महाराष्ट्र में कोडीन सिरप और ड्रग्स नष्ट ठाणे, पालघर और एमबीवीवी पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 26,935 लीटर कोडीन-आधारित कफ सिरप समेत 147 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं और ड्रग्स को नष्ट किया है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी से की गई.

दमोह में सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग, 29 लोगों की फर्जी शिकायतें उजागर, कलेक्टर को भेजी रिपोर्ट

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दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक अंतर्गत सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायत करने वाले 29 शिकायतकर्ताओं को जनपद सीईओ ने चिह्नित किया है। जिसकी सूची बनाकर कलेक्टर के पास भेजी गई है। अब इन लोगों की शिकायत का सत्यापन कराया जाएगा और यदि शिकायत गलत पाई गई तो आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा यह योजन इसलिए शुरू की गई थी, ताकि आम लोगों को शासन की उस योजना का लाभ मिल सके, जिससे वह वंचित हैं। यदि अधिकारी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वह हितग्राही अपनी समस्याओं की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर सकता है। यह योजना सार्थक हुई लोगों को न्याय मिलना शुरू हो गया, लेकिन लोग इसका गलत इस्तेमाल करने लगे। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लिया और झूठी शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मांगी जानकारी दमोह कलेक्टर ने ब्लाक स्तर के अधिकारियों से जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने 29 लोगो की सूची बनाकर दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर को भेजी है। यह वे लोग हैं जो लगातार शिकायत करते हैं। जबकि उस योजना से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। 26 सितम्बर को दमोह कलेक्टर ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों को एक पत्र जारी किया था। जिसमें पूछा था आपके यहां सीएम हेल्पलाइन में यदि कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जो बार बार शिकायत करते हैं या फिर शिकायत दर्ज करना उन्होंने अपनी आदत बना ली है तो उनका नाम, फोन नंबर शिकायत के विवरण की जानकारी सहित दर्ज करे और उनकी सूची भेजे। जिसके बाद तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनका काम ही सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करना है। उनके नाम ओर शिकायत की दर्ज संख्या सहित पूरी जानकारी भेजी गई है। ऐसी होती है ज्यादा शिकायत तेंदूखेड़ा ब्लाक में जो शिकायत दर्ज हैं उनमें अधिकाश लोग जिले या दूसरी जनपद से है। जिनकी शिकायतें जांच में गलत पाई गई है तो कुछ शिकायतो में लेनदेन करके मामलों का निराकरण हुआ है। शिकायत का जनहित या समाज हित से कोई वास्ता नहीं है। बल्कि निर्माण कार्य और पंचायत बंद या फिर सचिव, सरपंच की झूठी शिकायतों का हवाला दिया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद उनकी जानकारी एकत्रित की गई और सूची दमोह कलेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कलेक्ट्रेट से पत्र प्राप्त हुआ था। उसके बाद अप्रैल माह से सितम्बर तक की जानकारी एकत्रित की गई थी और 29 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की है जो लगातार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत करते है। इनकी शिकायतों में फर्जी मजदूर और निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी का हवाला दिया जाता है। पत्र के माध्यम से जानकारी भेजी गई है आगे जो कार्रवाई होगी दमोह कलेक्टर करेंगे। 

जल संकट से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, चेकडैम, तालाब, ब्लास्टकूप और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर

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एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण को बनाएं जनांदोलन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) के कार्यों की समीक्षा की  जल संकट से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, चेकडैम, तालाब, ब्लास्टकूप और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर    जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने जताई गहरी चिंता, कहा- चेकडैम, तालाब निर्माण और ब्लास्टकूप राष्ट्रीय आवश्यकता है    बोले मुख्यमंत्री- 6,448 चेकडैमों से 1.28 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और भूजल रिचार्ज बढ़ा    मुख्यमंत्री ने कहा- 1 अप्रैल से 15 जून तक कुम्हारों को तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की छूट दी जाए  – बोले मुख्यमंत्री- 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करें   मुख्यमंत्री ने कहा- वर्ष 2017 में 82 अतिदोहित क्षेत्र घटकर 2024 में 50, क्रिटिकल क्षेत्र 47 से घटकर 45   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि जल संकट आज हमारी सामूहिक चिंता का विषय बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप वर्षा जल को रोककर धीरे-धीरे उसे भूमि में समाहित होने देते हैं। यह केवल स्थानीय प्राथमिकता नहीं है बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है। चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप केवल पानी रोकने की व्यवस्था नहीं बल्कि समेकित जल प्रबन्धन है, जो बड़े बांधों की तुलना में यह काफी किफायती है। उन्होंने निर्देशित किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर जनांदोलन बनाते हुए चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराएं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश विभिन्न भागों स्थानीय/बरसाती नदी/ नालों में विभाग द्वारा अद्यतन 6,448 चेकडैमों का निर्माण किया जा चुका है। प्रत्येक चेकडैम से औसतन 20 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता विकसित होती है। इस प्रकार निर्मित चेकडैमों से कुल 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित हुई है और हर साल 10 हजार हेक्टेयर मीटर से अधिक भूजल रिचार्ज हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से अन्नदाता किसान वर्ष में दो से तीन फसल लेने में सक्षम हुए हैं।   मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा जल संचयन और ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार कदम उठा रही है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक 1,002 चेकडैमों की डी-सिल्टिंग और मरम्मत कर उनकी क्षमता में वृद्धि की गई है। इसी तरह प्रदेश के 1 से 5 हेक्टेयर के 16,610 तालाबों में से 1,343 का पुनर्विकास और जीर्णोद्धार किया गया है, वहीं वर्ष 2017-2025 तक 6192 ब्लास्टकूप के माध्यम से 18576 हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित हुई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बरसात से पहले यानी 1 अप्रैल से 15 जून तक कुम्हारों को तालाब से मुफ्त मिट्टी निकालने की छूट दी जाए, ताकि तालाब रिचार्ज के लिए तैयार हो सकें। बरसात के बाद इन्हें मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन के लिए उपयोग में लाकर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं।   रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए यह कदम निर्णायक साबित होगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 तक प्रदेश में 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे। सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं, जो संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में और तेजी लाकर आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास होना चाहिए।   उन्होंने कहा कि जैसे "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान ने वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप दिया है, वैसे ही चेकडैम और तालाब निर्माण भी सामूहिक प्रयासों से बड़े स्तर पर संचालित किया जाए। यह न केवल जल संकट से निपटने में सहायक होगा, बल्कि प्रदेश की कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।   मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में तालाबों, ब्लास्टकूपों और चेकडैमों की फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन कराएं। साथ ही जनता को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण और भूजल रिचार्जिंग को लेकर प्रदेश सरकार का संकल्प अटल है और इसे समाज की भागीदारी से एक सफल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी बोले वाटर कंजर्वेशन की हो समुचित व्यवस्था, इससे डार्क जोन वाले क्षेत्रों में होगा सुधार

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नलकूपों से पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनाएं वैज्ञानिक पद्धति – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार व आधुनिकीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में दिए दिशा-निर्देश  मुख्यमंत्री योगी बोले वाटर कंजर्वेशन की हो समुचित व्यवस्था, इससे डार्क जोन वाले क्षेत्रों में होगा सुधार  भूगर्भीय जल स्तर को बनाए रखने में वाटर कंजर्वेशन महत्वपूर्ण- मुख्यमंत्री – रिजर्व वायर को डिसिल्ट कर उसे पुनर्जीवित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को मिले सिंचाई की सुविधा  सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नलकूपों का प्राथमिकता के आधार पर जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जाए- मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नलकूपों से पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए और वाटर कंजर्वेशन की समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि वर्षा का मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त है। इससे भूगर्भीय जल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी और डार्क जोन वाले क्षेत्रों में सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बाण सागर, मध्य गंगा जैसी प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा कर उसमें कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के सशक्त क्रियान्वयन से ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने तराई क्षेत्र के किसानों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हुए कहा कि रिजर्व वायर को डिसिल्ट कर उसे पुनर्जीवित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके। साथ ही, कटान रोकने के लिए सिल्ट का उपयोग करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नलकूपों का प्राथमिकता के आधार पर जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जाए। इससे सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, किसानों की लागत घटेगी और उन्हें आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नलकूपों के आधुनिकीकरण व जीर्णोद्धार के कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता न किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नलकूपों के आधुनिकीकरण और जल संरक्षण की इन पहलों से आने वाले समय में राज्य का कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।

राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामेश्वर डूडी का निधन, बीकानेर में शोक की लहर

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जयपुर पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बीकानेर से सांसद रहे रामेश्वर डूडी का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। डूडी को 2 साल पहले उनका ब्रेन आया था। इसके बाद वे लंबे समय तक कोमा में रहे। डॉक्टरों के अनुसार डूडी के ब्रेन की मिडलाइन में 17MM का डैमेज हो गया था। बता दें कि रामेश्वर डूडी साल 2013 से 18 तक बतौर नोखा विधायक वे राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। उनकी गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में थी। फिलहाल नोखा विधानसभा से उनकी पत्नी सुशीला डूडी विधायक हैं। डूडी ने अपने राजनीतिक जीवन में एक विधानसभा चुनाव और एक बार लोकसभा चुनाव जीता। बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत काफी बिगड़ गई थी। कांग्रेस के कई बड़े नेता उनके मिलने उनके पैत्रक आवास पर पहुंचे भी थे। रामेश्वर डूडी मूलत: नोखा के रायसर गांव के रहने वाले थे।  पश्चिमी राजस्थान के किसानों की बुलंद आवाज रामेश्वर डूडी रहे। राजनीतिक जीवन में पंचायत समिति प्रधान, जिला प्रमुख, विधायक और सांसद के साथ विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। बीकानेर में आज दोपहर करीब एक बजे जाट बगीची में अंत्येष्टि होगी। पूर्व सीएम अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा आज डूडी के पैत्रक आवास बीकानेर भी जाएंगे। गहलोत ने निधन पर जताया शोक पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने डूडी के निधन पर शोक जाताया है। उन्होंने कहा- पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बीकानेर से सांसद रहे रामेश्वर डूडी का निधन बेहद दुखद है। करीब 2 साल तक बीमार रहने के बाद इतनी अल्पायु में उनका जाना हमेशा खलता रहेगा। यह मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर एक आघात है। रामेश्वर डूडी ने अपनी हर भूमिका का निर्वहन अच्छे से किया। वो मेरे साथ सांसद, विधायक और हमारे नेता प्रतिपक्ष रहे। किसान वर्ग के लिए वो हमेशा काम करते रहे। मुझे याद है कि दौरा पड़ने से कुछ दिन पूर्व ही वो मेरे से मिलने आए थे और हमारे बीच लम्बी बातचीत हुई थी। हमने उनके इलाज के लिए बेहतर से बेहतर प्रबंध किए। एक सक्रिय जीवन जीने वाले डूडी जी का ऐसे बीमार होना हम सबके मन को कचोटता था।  मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति एवं परिजनों को हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बीकानेर से सांसद रहे श्री रामेश्वर डूडी का निधन बेहद दुखद है। करीब 2 साल तक बीमार रहने के बाद इतनी अल्पायु में उनका जाना हमेशा खलता रहेगा। यह मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर एक आघात है। डोटासरा ने भी संवेदना प्रकट की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी डूडी के निधन पर संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा- राजस्थान के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं किसान नेता रामेश्वर डूडी के निधन की ख़बर अत्यंत दु:खद है। उनके परिवार एवं प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। लंबे समय से अस्वस्थ डूडी  का निधन समाज, राजस्थान की राजनीति और कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। वो एक सच्चे किसान हितैषी थे, जिनके संघर्ष से प्रदेश में किसानों के कर्ज माफ हुए। उन्होंने सामाजिक एवं जन सेवा में रहते सदैव आमजन और दलित-पिछड़ों की आवाज़ को बुलंद किया। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं दु:ख की मुश्किल घड़ी में डूडी परिवार को संबल प्रदान करें। जूली बोले- शोषितों की लड़ाई को समर्पित रहे डूडी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी रामेश्वर डूडी के निधन पर शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा- पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह हम सभी कांग्रेस परिवारजनों और पूरे राजस्थान के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं शोकाकुल परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। उनका पूरा जीवन किसानों, मजदूरों, शोषित-वंचित और पीड़ित वर्ग की आवाज़ बुलंद करने और उनके हक व अधिकारों की लड़ाई लड़ने को समर्पित रहा। जिला प्रमुख, विधायक और सांसद के रूप में उनकी नि:स्वार्थ सेवा और संघर्ष हमेशा स्मरणीय रहेगा l ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान, शोक संतप्त परिवारजनों और समर्थकों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।     पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री रामेश्वर डूडी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह हम सभी कांग्रेस परिवारजनों और पूरे राजस्थान के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं शोकाकुल परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। मुख्यमंत्री ने जताया दुख मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर दुख जताते हुए लिखा,  राजस्थान विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने परमधाम में स्थान दें व शोकाकुल परिवारजनों को यह वज्रपात सहन करने की शक्ति प्रदान करें।  

धमाकेदार जीत के बावजूद टॉप-2 से बाहर भारत, इस टीम ने दिखाई अपनी ताकत

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अहमदाबाद शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए पहले मुकाबले में पारी और 140 रनों से हराकर दो मैच की सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई। इस जीत से भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में फायदा मिला है। डब्ल्यूटीसी पॉइंट्स टेबल में भारत का जीत का प्रतिशत तो बढ़ा है, मगर पोजिशन में किसी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। वेस्टइंडीज पर मिली यह धमाकेदार जीत भी भारत को WTC पॉइंट्स टेबल के टॉप-2 में जगह नहीं दिला पाई। टीम इंडिया अभी भी तीसरे पायदान पर है। वहीं श्रीलंका दूसरे तो ऑस्ट्रेलिया पहले पायदान पर है। ऑस्ट्रेलिया का फिलहाल राज बरकरार है क्योंकि कंगारू ना तो कोई मैच हारे हैं और ना ही उनका कोई मैच ड्रॉ हुआ है। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस टेस्ट मैच से पहले भारत का जीत का प्रतिशत 46.67 का था जो अब बढ़कर 55.56 का हो गया है। वहीं वेस्टइंडीज की टीम इस चक्र में अभी भी पहली जीत को तरस रही है। वेस्टइंडीज ने अभी तक 4 मैच खेले हैं और सभी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। बात ऑस्ट्रेलिया की करें तो उनके खाते 100 प्रतिशत अंक है, वहीं श्रीलंका के खाते में 66.67 प्रतिशत अंक है। कैसा रहा IND vs WI मैच? टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम को भारत ने दो सेशन के अंदर मात्र 162 पर ढेर कर दिया। मोहम्मद सिराज ने इस दौरान 4 तो जसप्रीत बुमराह ने तीन विकेट चटकाई। इसके बाद बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया ने 5 विकेट के नुकसान पर 448 रन बोर्ड पर लगाकर पारी घोषित कर दी और 286 रनों की बढ़त हासिल की। भारत के लिए केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा ने शतक जड़े। जडेजा अंत तक नाबाद रहे, वहीं कप्तान शुभमन गिल ने अर्धशतकीय पारी खेली। तीसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले भारत ने पारी घोषित कर दी थी जिससे उनकी मंशा साफ हो गई थी कि वह मैच को चौथे दिन तक नहीं ले जाना चाहते। गेंदबाजों ने ऐसा करके भी दिखाया। एक बार फिर वेस्टइंडीज को भारत ने दो सेशन के अंदर 146 रनों पर समेट मैच को पारी और 140 रनों से अपने नाम किया।  

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा: प्रेम के पोस्टर ठीक, कट्टरता और हिंसा की सोच अस्वीकार्य

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उज्जैन  पूरे देश में आई लव मोहम्मद के पोस्टरों को लेकर विवाद हो रहा है. कई शहरों में यह पोस्टर लगाए गए थे, जिन पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं. मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रशासन ने इन पोस्टरों को हटाने की सख्त कार्रवाई भी की. इसी मुद्दे पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने बड़ा बयान दिया है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आई लव मोहम्मद कहना गलत नहीं है, जैसे आई लव महाकाल कहना भी बुरा नहीं है. लेकिन जो लोग सर तन से जुदा करने की धमकी देते हैं, वह कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को हिंदू त्योहारों या परंपराओं पर निशाना बनाने का हक नहीं है. आई लव मोहम्मद कहना गलत नहीं अपने बयान में धीरेंद्र शास्त्री ने पाक अधिकृत कश्मीर का भी जिक्र किया और कहा कि हम पाक अधिकृत अपनी जमीन लेकर रहेंगे. साथ ही उन्होंने आगे कहा कि यह सही समय है और पाकिस्तान में चल रहे हालात को देखते हुए भगवान से बुद्धि देने की प्रार्थना करनी चाहिए. आई लव महाकाल कहना भी बुरा नहीं शास्त्री ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान में शांति की प्रार्थना हनुमान जी से कर रहे हैं. साथ ही पाकिस्तान को संदेश दिया कि अगर देश संभल नहीं रहा है तो भारत में घर वापसी कर लो. उन्होंने हिंदुओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि पीछे से दिए जा रहे बयानों और धमकियों को गंभीरता से लेना होगा. धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान धार्मिक सद्भाव, राजनीतिक बयानबाजी और सीमाई मुद्दों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है.