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amit kumar

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Launch of the book ‘Modi’s Mission’: एक विचार की कहानी

Modi's Mission

Launch of the book ‘Modi’s Mission’ The Story of an Idea मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, विचारों और कार्यशैली पर आधारित पुस्तक ‘मोदी का मिशन’ का आज लोकार्पण किया गया। इसके लिए मुंबई के राजभवन में भव्य लोकार्पण समारोह  आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उपस्थित हुए। आत्मनिर्भर भारत का विचार प्रसिद्ध वकील और लेखक बर्जिस देसाई की यह पुस्तक मोदी के जीवन को “एक विचार की कहानी” के रूप में प्रस्तुत करती है जो राष्ट्रीय पुनर्जागरण और आत्मनिर्भर भारत का विचार है। लेखक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को विकसित भारत के पुनरुद्धार के उद्देश्य से मिशन के रूप में वर्णित करते हैं। अनुच्छेद 370 को निरस्त देसाई ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दृढ़ संकल्प और उद्देश्य के माध्यम से शुरुआती पूर्वाग्रहों और झूठे आख्यानों पर विजय प्राप्त की।  यह पुस्तक अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने, जीएसटी के कार्यान्वयन, विमुद्रीकरण और पारदर्शी शासन की दिशा में प्रयासों सहित प्रमुख नीतिगत निर्णयों का विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करती है। भारतीयों का सम्मान बढ़ाया राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर कहा कि “जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना रास्ता स्वयं बनाता है, वह वास्तव में महान होता है, और मोदी जी ने ठीक वैसा ही किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि मोदी जी ने कई जटिल राष्ट्रीय मुद्दों को शांतिपूर्वक और बिना किसी विवाद के सुलझाया है, और उनके नेतृत्व ने दुनिया भर में भारत और भारतीयों का सम्मान बढ़ाया है। 2047 तक भारत मजबूत अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ‘मोदी का मिशन’ पुस्तक मोदी जी के जीवन और दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत करती है, यह दर्शाती है कि उन्होंने अपने मिशन को कैसे परिभाषित किया और उसे प्राप्त करने के लिए कैसे अडिग रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की नींव रखी है, गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाया है। उन्होंने  कहा कि “जहाँ 20वीं सदी महात्मा गांधी की थी, वहीं 21वीं सदी नरेंद्र मोदी की है।” ईमानदार शब्द चित्रण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘मोदी मिशन’ पुस्तक मोदी जी पर लिखी गई अन्य पुस्तकों से अलग है, क्योंकि यह उनकी उपलब्धियों और मूल्यों का ईमानदार शब्द चित्रण प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाओं के इस दौर में, यह पुस्तक साहस और निष्ठा के साथ सच्चाई को प्रस्तुत करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए इस पुस्तक की प्रेरक कहानियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। रूपा पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित, ‘मोदी मिशन’ पुस्तक मोदी जी की यात्रा, चुनौतियों और भारत के विकास में उनके योगदान का गहन वृत्तांत प्रस्तुत करती है।

Prime Minister Doctorl Research Fellowship: जानिए पूरी जानकारी, योग्यता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

Research Fellowship

प्रधानमंत्री डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप भारत सरकार की एक प्रतिष्ठित योजना है, लाखों युआओं को इससे लाभ मिलता है। ये फेलोशिप उद्योग-उन्मुख शोध को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत देशभर में हर साल 100 शोधार्थियों को फेलोशिप दी जाती है। यह स्कीम युवा पीएचडी शोधकर्ताओं को उद्योग के साथ साझेदारी में काम करने का अवसर प्रदान करती है। अगर आप भी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं और रिसर्च में फिल्ड बेहतरीन होना चाहते हैं , तो आपके के लिए ये बेहतर मौका है। प्रधानमंत्री डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप योजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक प्रतिष्ठित पहल है। इसे साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (SERB) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के सहयोग से लागू किया जाता है। इस फेलोशिप का उद्देश्य उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी बनाकर देश में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। योजना का उद्देश्य योजना का उद्देश्य युवा भारतीय पीएचडी शोधार्थियों को उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में शोध करने के लिए प्रोत्साहित करना। उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ाना। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कृषि और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक शोध को गति देना। फेलोशिप की मुख्य विशेषताएं चयनित फेलो को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेंटरशिप और एक्सपोज़र मिलता है।इंडस्ट्री और अकादमिक गाइड दोनों की निगरानी में शोध कार्य होता है।हर साल 100 नए स्कॉलर्स को फेलोशिप दी जाती है।कुल फेलोशिप राशि का आधा हिस्सा सरकार और आधा हिस्सा इंडस्ट्री पार्टनर देता है।फेलोशिप की अधिकतम अवधि चार वर्ष होती है। फेलोशिप के लाभ चयनित स्कॉलर्स को JRF/SRF की राशि से दोगुनी स्कॉलरशिप मिलती है। रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए इंडस्ट्री पार्टनर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलता है। फेलो को इंडस्ट्री में काम करने और व्यावहारिक अनुभव पाने का मौका मिलता है। पात्रता मानदंड आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए। किसी मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालय या शोध संस्थान में पूर्णकालिक पीएचडी स्कॉलर होना चाहिए। आवेदन तिथि तक पीएचडी में रजिस्ट्रेशन 14 महीने से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। आवेदक के पास एक वैध इंडस्ट्री पार्टनर होना जरूरी है। शोध विषय नवीन, व्यावहारिक और औद्योगिक रूप से उपयोगी होना चाहिए। चयन के बाद कोई अन्य फेलोशिप नहीं ली जा सकती। आवेदन प्रक्रिया स्टेप 1: www.primeministerfellowshipscheme.in चयन मानदंड (Selection Parameters) प्रस्तावित रिसर्च प्रोजेक्ट वैज्ञानिक दृष्टि से मजबूत और नवाचार से भरपूर होना चाहिए। शोध कार्य में वाणिज्यिक उपयोग की संभावना (Commercial Potential) होनी चाहिए। आवेदक, अकादमिक गाइड और इंडस्ट्री मेंटर का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेज़ (Documents Required) हाल की पासपोर्ट साइज फोटो पीएचडी नामांकन व रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन व पोस्ट-ग्रेजुएशन मार्कशीट संस्थान और कंपनी की प्रोफाइल सुपरवाइजर व इंडस्ट्री मेंटर का बायोडाटा अंडरटेकिंग लेटर्स और रिसर्च सिंॉप्सिस FAQs Q1. प्रधानमंत्री डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप क्या है? A1. यह भारत सरकार की एक स्कीम है जो पीएचडी शोधार्थियों को उद्योग-संबंधित शोध के लिए वित्तीय सहायता देती है। Q2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? A2. उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी बनाना और शोध को व्यावहारिक रूप देना। Q3. इस योजना को कौन लागू करता है? A3. इस स्कीम को SERB (Science & Engineering Research Board) और FICCI मिलकर लागू करते हैं। Q4. फेलोशिप की अवधि कितनी होती है? A4. अधिकतम चार वर्ष तक फेलोशिप दी जाती है। Q5. आवेदन कैसे करें? A5. छात्र www.primeministerfellowshipscheme.in

BSF: भारतीय श्वान राष्ट्र सेवा में आगे, मानव और पशु के बीच अटूट संबंध

Indian dogs

BSF Indian dogs at the forefront of national service Delhi. भारत के इतिहास, संस्कृति और पुराणों में श्वानों को सदैव एक विशिष्ट और सम्माननीय स्थान प्राप्त रहा है। भारतीय मूल की श्वान-नस्लें अपने अद्वितीय साहस, निष्ठा और कार्यकुशलता के लिए जानी जाती रही हैं। राजसी दरबारों से लेकर रणभूमि तक इनकी उपस्थिति, भारत की गौरवशाली सैन्य और सांस्कृतिक परंपरा में मानव एवं पशु के बीच अटूट संबंध का प्रतीक रही है। स्वदेशी नस्लों को पहचान इस ऐतिहासिक परंपरा को एक नई दिशा तब प्राप्त हुई जब जनवरी 2018में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF)के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र (NTCD)का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय नस्लों के श्वानों को सुरक्षा बलों में प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका यह दूरदर्शी मार्गदर्शन, स्वदेशी नस्लों को पहचान दिलाने, उन्हें प्रशिक्षित करने तथा उन्हें परिचालन भूमिकाओं में सम्मिलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। सशक्त चेतना को जन्म प्रधानमंत्री की इस सोच को और बल प्रदान करते हुए, उन्होंने 30 अगस्त 2020को अपने ‘मन की बात’ में भारतीय नस्लों के श्वानों को अपनाने और प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। यह अपील ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना से ओतप्रोत थी, जिसने संपूर्ण देश में स्वदेशी गर्व, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक सशक्त चेतना को जन्म दिया। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से अनुप्राणित होकर, बीएसएफ ने दो प्रमुख भारतीय नस्लों — रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड — को बल में सम्मिलित कर एक ऐतिहासिक पहल की। इन भारतीय श्वान-नस्लों की प्रमुख विशेषताएं हैं — उच्च फुर्ती, सहनशक्ति, अनुकूलनशीलता, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं न्यूनतम देखभाल की आवश्यकता। ये गुण इन्हें भारत के विविध भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी बनाते हैं। संख्या में निरंतर वृद्धि बीएसएफ, न केवल इन श्वानों को टेकनपुर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित कर रहा है, बल्कि इनके प्रजनन का कार्य भी सक्रिय रूप से कर रहा है। यह पहल अब सहायक K9 प्रशिक्षण केंद्रों और क्षेत्रीय इकाइयों तक विस्तारित हो चुकी है, जिससे भारतीय नस्लों के श्वानों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में, 150 से अधिक भारतीय नस्लों के श्वान देश के विभिन्न सामरिक एवं संवेदनशील क्षेत्रों में — जैसे कि पश्चिमी व पूर्वी सीमाएं, तथा नक्सल विरोधी अभियान — में तैनात किए जा चुके हैं। इनकी प्रभावशाली कार्यक्षमता ने स्वदेशी नस्लों को सुरक्षा बलों की परिचालन संरचना में एक सुदृढ़ स्थान प्रदान किया है। इस पहल की सफलता का प्रमाण वर्ष 2024 के अखिल भारतीय पुलिस ड्यूटी मीट (लखनऊ) में मिला, जहाँ बीएसएफ की “रिया“, एक मुधोल हाउंड, ने सर्वश्रेष्ठ ट्रैकर ट्रेड श्वान एवं ‘डॉग ऑफ द मीट’दोनों खिताब अर्जित किए। यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय नस्ल के श्वान ने 116 विदेशी नस्लों को पराजित कर यह उपलब्धि प्राप्त की — यह भारतीय श्वानों की उत्कृष्टता, अनुशासन एवं क्षमताओं का जीवंत प्रमाण है। राष्ट्रीय एकता दिवस परेड इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए, आगामी राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में, जो एकता नगर, गुजरात में आयोजित होगी, केवल भारतीय नस्लों के श्वानों की एक मार्चिंग टुकड़ी बीएसएफ का प्रतिनिधित्व करेगी। इस अवसर पर एक विशेष श्वान प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें सामरिक कुशलताओं और परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा — यह आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत की K9 शक्ति का प्रतीक होगा। भारत की परंपरा भारतीय नस्लों के श्वानों का बीएसएफ में समावेश, प्रशिक्षण, प्रजनन एवं तैनाती, भारत की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी विरासत एवं राष्ट्रीय गौरव के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह पहल न केवल भारत की परंपरागत नस्लों को पुनर्जीवित करती है, अपितु यह भी प्रमाणित करती है कि भारत आत्मविश्वास, शक्ति और गरिमा के साथ अपने पथ पर अग्रसर है — और इस मार्ग में भारतीय श्वान राष्ट्र सेवा में अग्रिम पंक्ति में हैं।

PM Modi: आईएनएस विक्रांत पर सशस्त्र बलों के साथ दिवाली समारोह

PM Modi

PM Modi Diwali celebrations with armed forces on board INS Vikrant नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीपावली पर्व के मौके पर आईएनएस विक्रांत सशस्त्र बलों के कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का यह दिन अद्भुत है, यह क्षण यादगार है, यह दृश्य अद्भुत है। आज मेरे एक ओर अथाह समुद्र है, तो दूसरी ओर मां भारती के वीर सिपाहियों का अथाह सामर्थ्‍य है। आज मेरे एक ओर अनंत क्षितिज है, अनंत आकाश है, तो दूसरी ओर अनंत शक्तियों को समेटे यह विशाल, विराट आईएनएस विक्रांत है। समुद्र के पानी पर सूर्य की किरणों की यह चमक एक तरह से वीर जवानों द्वारा जलाए दीपावली के दीये हैं। यह हमारी अलौकिक दीप मालाएं हैं, मेरा सौभाग्य कि इस बार मैं नौसेना के आप सब वीर जवानों के बीच यह दिवाली का पावन पर्व मना रहा हूं।  ऑपरेशन सिंदूर की बात प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आईएनएस विक्रांत पर बिताई कल की रात, इस अनुभव को शब्दों में कहना कठिन है। मैं देख रहा था, जो उमंग-उत्साह से आप भरे हुए थे और जब मैंने देखा कि आपने स्‍वरचित गीत गाए कल और शायद आपने गीतों में जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन किया, शायद कोई कवि इस अनुभूति को प्रकट नहीं कर पाएगा, जो युद्ध के मैदान में खड़ा जवान कर पाता है। एक तरफ मैं देख रहा था, सैन्‍य शक्ति को।  इस पल को जी लूं मोदी ने कहा कि यह बड़े-बड़े शिप, हवा से भी तेज गति से चलने वाले हवाई जहाज, यह पनडुब्बियां, यह अपनी जगह पर है। लेकिन जो जज्बा आप में है न, वो उसको भी जानदार बना देता है। यह शिप भले ही लोहे के हों, लेकिन जब आप उस पर सवार होते हैं न, तब वो जांबाज जीवित सैन्‍य बन जाता है। मैं कल से आपके बीच हूं, एक-एक पल मैंने कुछ न कुछ सीखा है, कुछ न कुछ जाना है। जब दिल्ली से निकला था, तो मन करता था कि मैं भी इस पल को जी लूं।  धड़कन को महसूस किया पीएम ने कहा कि आप लोगों का परिश्रम, आप लोगों की तपस्या, आप लोगों की साधना, आप लोगों का समर्पण, यह इतनी ऊंचाई पर है, इतनी ऊंचाई पर है कि मैं उसे जी नहीं पाया। लेकिन जान जरूर पाया हूं, जान सका हूं। मैं अंदाजा लगा सकता हूं कि इसे जीना कितना कठिन होगा। लेकिन जब आपसे निकट रहकर के आप की सांस को अनुभव कर रहा था, आपकी धड़कन को महसूस कर रहा था, आपकी आंखों की वो चमक को देख पा रहा था, तब मैं रात जब सोया, कल थोड़ा जल्दी सोया, जो कभी सोता नहीं हूं। शायद जल्‍दी सोने का कारण भी यह होगा कि आपको जब कल दिनभर देखा, तो भीतर जो संतोष का भाव था, वो नींद मेरी नहीं, संतोष की नींद थी।  दिवाली कई मायनों में खास पीएम मोदी ने कहा कि समुद्र की गहरी रात और सुबह का सूर्योदय, मेरी दिवाली कई मायनों में खास बन गई है और इसलिए आपके बीच फिर एक बार दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं! आपको भी शुभकामनाएं और आईएनएस विक्रांत की इस वीर भूमि से कोटि-कोटि देशवासियों को भी दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। पीएम ने सभी के परिवारजनों को दीपावली की शुभकामनाएं दी!

Union Minister: अश्विनी वैष्णव ने की रेलवे बोर्ड वॉर रूम की समीक्षा, प्रयासों को सराहा- दी दीपावली की बाधईयां

Ashwini Vaishnav

Ashwini Vaishnav reviews Railway Board War Room Diwali greetings नई दिल्ली। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेलवे बोर्ड के वॉर रूम का दौरा कर त्योहारी सीजन के दौरान यात्रियों की आवाजाही की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने चौबीसों घंटे समर्पित भाव से कार्य कर रहे कर्मचारियों की प्रशंसा की और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का संचालन भारतीय रेलवे (आईआर) ने चालू त्यौहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती यात्रा मांग को पूरा करने के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित प्रबंध किए हैं। भारतीय रेल ने दिवाली पूजा और छठ पर्व के दौरान यात्रियों को सुगम, सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में चलाई गई 7,724 ट्रेनों की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। भारतीय रेलवे द्वारा त्यौहारों के दौरान यात्रियों को सुगम, सुरक्षित व आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तत्परता से कार्य किया जा रहा है। नियमित ट्रेनों के अतिरिक्त, बढ़ी हुई यात्रा मांग को पूरा करने हेतु भारतीय रेल ने 1 से 19 अक्टूबर, 2025 के बीच 3,960 विशेष ट्रेनों का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जिससे देशभर में यात्रियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकी है। 8,000 अतिरिक्त विशेष रेल भारतीय रेलवे की दिवाली और छठ पर्व के दौरान यात्री यातायात में अपेक्षित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए आने वाले दिनों में लगभग 8,000 अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों के संचालन की योजना है, ताकि यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा अनुभव प्राप्त हो सके। ये विशेष रेलगाड़ियां भारतीय रेलवे के सभी जोनों में संचालित की जा रही हैं, जिनमें उत्तर रेलवे (1,919 ट्रेनें), मध्य रेलवे (1,998 ट्रेनें) और पश्चिमी रेलवे (1,501 ट्रेनें) सबसे अधिक संख्या के साथ अग्रणी हैं। इसके अलावा, पूर्व मध्य रेलवे (1,217 ट्रेनें) और उत्तर पश्चिम रेलवे (1,217 ट्रेनें) सहित अन्य जोनों ने भी क्षेत्रीय यात्रा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त सेवाएं शुरू की हैं। कुल 12,011 विशेष रेलगाड़ियों का जोनवार विवरण निम्नानुसार है:

DRI: राजस्व खुफिया निदेशालय का न्हावा शेवा बंदरगाह पर “ऑपरेशन फायर ट्रेल”, ₹4.82 करोड़ मूल्य के 46,640 के पटाखे ज़ब्त

DRI

Operation Fire Trail 46,640 firecrackers worth ₹4.82 crore seized राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने  “ऑपरेशन फायर ट्रेल” अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। डीआरआई ने भारत में चीनी मूल के पटाखों  के अवैध आयात से जुड़े परिष्कृत तस्करी के प्रयास का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। लंबे कंटेनर को पकड़ा इस अभियान के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर चीन से आए और आईसीडी अंकलेश्वर जाने वाले 40 फुट लंबे कंटेनर को पकड़ा, जिसमें “लेगिंग्स” होने का दावा किया गया था। विस्तृत जाँच में पता चला कि आगे की तरफ कपड़ों की ऊपरी परत के पीछे 46,640 पटाखे/विस्फोटक छिपाए गए थे।  ₹4.82 करोड़ मूल्य की पूरी खेप जब्त कर ली गई। बाद में की गई तलाशी में तस्करी गिरोह की कार्यप्रणाली उजागर करने वाले आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद हुए और इसके पीछे एक प्रमुख व्यक्ति को गुजरात के वेरावल से गिरफ्तार किया गया। नेटवर्क ध्वस्त विदेश व्यापार नीति के आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण के तहत पटाखों का आयात ‘प्रतिबंधित’ है और इसके लिए विस्फोटक नियम, 2008 के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) दोनों से वैध लाइसेंस की आवश्यकता होती है। ऐसे खतरनाक सामान का अवैध आयात सार्वजनिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण बंदरगाह अवसंरचना और व्यापक शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स श्रृंखला के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। डीआरआई ऐसे संगठित तस्करी नेटवर्क का पता लगाकर और उन्हें ध्वस्त करके, खतरनाक तस्करी से जनता की रक्षा करने और देश के व्यापार एवं सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता को बनाए रखने के अपने मिशन में दृढ़ है।

Delhi: ‘भगोड़ों का प्रत्यर्पण-चुनौतियाँ और रणनीतियाँ’ विषय पर सीबीआई सम्मेलन संपन्न

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Achievement Conference on ‘Extradition of Fugitives – Challenges and Strategies’ The Economist सीबीआई द्वारा 16 और 17 सितंबर 2025 को भारत मंडपम में ‘भगोड़ों का प्रत्यर्पण-चुनौतियाँ और रणनीतियाँ’ विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 16 अक्टूबर 2025 को किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने विदेशों से वांछित भगोड़ों को भारत में न्याय के कटघरे में लाने के लिए सभी एजेंसियों के सम्मिलित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से सभी प्रत्यर्पण अनुरोधों को विदेशी अधिकारियों को अग्रेषित करने से पहले उनकी जाँच के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ की आवश्यकता पर बल दिया। इससे पहले जुलाई 2025 में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विदेशों से वांछित भगोड़ों को वापस लाने के लिए समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया था। इस संबंध में, सीबीआई को समयबद्ध तरीके से उचित कानूनी और राजनयिक माध्यमों से भगोड़ों को वापस लाने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक सम्मेलन का समन्वय और आयोजन करने का कार्य सौंपा गया था। भारत वापस लाने के प्रयास दो दिनों के दौरान, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों सहित 45 राज्य और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 200 से अधिक अधिकारियों ने चर्चा में भाग लिया और वांछित भगोड़ों को ट्रैक करने और उन्हें भारत वापस लाने के प्रयासों में समन्वय करने के कानूनी और व्यावहारिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, ईडी, एनसीबी, एफआईयू, एनआईए, एनटीआरओ, डीआरआई, सीबीडीटी, मुंबई पुलिस, इंटरपोल और सीबीआई सहित विभिन्न एजेंसियों के 25 पैनलिस्टों ने विदेशों से सहयोग प्राप्त करने के लिए उपलब्ध चैनलों के प्रभावी उपयोग, भगोड़े अपराधियों का पता लगाने में प्रौद्योगिकी का उपयोग, इन भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और भगोड़ों के वित्तीय निशान के विश्लेषण सहित मुद्दों पर प्रस्तुतियाँ दीं। EGMONT और ARIN-AP जैसे प्लेटफार्मों और नेटवर्कों का उपयोग नार्को, आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराधियों और वित्तीय अपराधियों पर विशेष ध्यान दिया गया। एक सत्र में, भगोड़ों के धन प्रवाह को लक्षित करने और भगोड़ों व उनकी संपत्तियों का पता लगाने के लिए धन शोधन रोधी ढाँचे का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। अपराधियों के अवैध धन का पता लगाने के लिए EGMONT और ARIN-AP जैसे प्लेटफार्मों और नेटवर्कों का उपयोग कैसे किया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों को नए इंटरपोल सिल्वर नोटिस, जो अपराधियों की अवैध संपत्तियों को लक्षित करता है, का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया। डेटाबेस साझा करने की आवश्यकता एनआईए के महानिदेशक सदानंद दाते ने नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों पर चर्चा की, जिसमें अनुपस्थिति में मुकदमे पर ध्यान केंद्रित किया गया और बताया गया कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल फरार अपराधियों के खिलाफ कैसे किया जा सकता है। सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद ने वांछित अपराधियों के खिलाफ हमारे प्रयासों में और अधिक तालमेल लाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के एक साथ आने और अपने डेटाबेस साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की और इस बात पर ज़ोर दिया कि दो दिवसीय सम्मेलन में हुई चर्चाएँ हमारी भविष्य की रणनीति का रोडमैप तैयार करेंगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे दस्तावेज़ीकरण में सुधार की आवश्यकता है ताकि सहायता के हमारे अनुरोध अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जाँच का सामना कर सकें। उन्होंने वांछित भगोड़ों को भारत वापस लाने के लिए गृह विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों और पहलों के बारे में भी विस्तार से बताया। इस अवसर पर, सीबीआई के 35 अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) और सराहनीय सेवा के लिए पदक (एमएसएम) से सम्मानित किया गया है। इस कार्यक्रम का समापन आपराधिक मामलों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को और अधिक कुशल एवं प्रभावी बनाने की पुनः पुष्टि के साथ हुआ।

Bihar Election: निर्वाचन आयोग की बैठक, सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल

Election Commission

Bihar Election Commission meeting New Delhi. निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नक्दी, शराब और नशीले पदार्थों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक की. आयोग ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में चुनाव आसूचना संबंधी बहू-विभागीय समिति (एमडीसीईआई) की बैठक आयोजित की। व्यापक रोडमैप तैयार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनावों के दौरान सक्रिय और निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।  यह बैठक चुनावों में नकदी और अन्य प्रलोभनों के प्रभावों से निपटने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। बैठक में सीबीडीटी, सीबीआईसी, ईडी, डीआरआई, सीईआईबी, एफआईयू-आईएनडी, आरबीआई, आईबीए, एनसीबी, आरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, एसएसबी, बीसीएएस, एएआई, डाक विभाग सहित प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, राज्य पुलिस नोडल अधिकारी (एसपीएनओ) और बिहार के सीईओ भी वर्चुअल रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर समन्वय पर बल विभिन्न एजेंसियों ने आयोग को अपनी तैयारियों, प्रलोभन मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए उपायों और प्रस्तावित कदमों के बारे में जानकारी दी। चुनावों को दूषित करने के लिए धन और अन्य प्रलोभनों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने से संबंधित विस्तृत विषयों पर जानकारी दी गई। आयोग ने निर्देश दिया कि प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच आर्थिक अपराधों की खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और सहयोग होना चाहिए। आयोग ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर प्रवर्तन एजेंसियों में समन्वय पर बल दिया। आयोग ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे निर्वाचन क्षेत्रों का मानचित्रण करें ताकि अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से तस्करी के सामान, ड्रग्स, शराब और नकदी (नकली मुद्रा सहित) की आवाजाही पर रोक लगाई जा सके। आयोग ने बिहार में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

CBI: पंजाब पुलिस के डीआईजी रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार

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CBI arrests DIG of Punjab Police in bribery case पंजाब । केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने 2009 बैच के एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी, जो वर्तमान में रोपड़ रेंज, पंजाब में डीआईजी के पद पर तैनात हैं, को एक निजी व्यक्ति के साथ ₹8 लाख की रिश्वतखोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया है। अधिकारी कथित तौर पर शिकायतकर्ता से मासिक अवैध भुगतान की भी मांग कर रहा था। सीबीआई ने 16.10.2025 को आरोपी लोक सेवक और उसके सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अधिकारी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी को “निपटाने” और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके व्यवसाय के खिलाफ आगे कोई बलपूर्वक या प्रतिकूल पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी, अपने बिचौलिए के माध्यम से ₹8 लाख की रिश्वत और मासिक अवैध रिश्वत की मांग की थी। रंगे हाथों पकड़ लिया सीबीआई ने जाल बिछाया और चंडीगढ़ के सेक्टर 21 में डीआईजी की ओर से शिकायतकर्ता से ₹8 लाख की मांग और स्वीकार करते हुए एक निजी व्यक्ति को रंगे हाथों पकड़ लिया। जालसाज़ी की कार्यवाही के दौरान, लोक सेवक को एक नियंत्रित कॉल की गई, जिस पर उसने भुगतान स्वीकार किया और बिचौलिए और शिकायतकर्ता को अपने कार्यालय आने का निर्देश दिया। इसके बाद, सीबीआई टीम ने लोक सेवक को उसके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया और चंडीगढ़ में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पंजाब और चंडीगढ़ में लोक सेवक से जुड़े विभिन्न परिसरों की तलाशी के दौरान, सीबीआई ने भारी मात्रा में नकदी और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की, जिनमें शामिल हैं: •लगभग ₹5 करोड़ नकद (और गिनती जारी है)•लगभग 1.5 किलोग्राम वजन के आभूषण•पंजाब में अचल संपत्तियों और परिसंपत्तियों से संबंधित दस्तावेज़•दो लग्ज़री वाहनों (मर्सिडीज और ऑडी) की चाबियाँ•22 लग्ज़री घड़ियाँ•लॉकर की चाबियाँ•40 लीटर आयातित शराब की बोतलें•आग्नेयास्त्र – 1 डबल बैरल बंदूक, 1 पिस्तौल, 1 रिवॉल्वर, 1 एयरगन, गोला-बारूद सहितबिचौलिए से बरामदगी:-••21 लाख नकददोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें 17.10.2025 को निर्दिष्ट अदालत में पेश किया जाएगा।तलाशी और आगे की जाँच जारी है।

VP Resignation पर राकेश टिकैत का तीखा वार: \”धनखड़ को इस्तीफा नहीं दिया गया, दिलवाया गया\”

rakesh tikait's sharp attack on vp resignation

Rakesh Tikait\’s sharp attack on VP Resignation: \”Dhankhar was not given resignation, he was made to resign\” नई दिल्ली ! भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान दिया है। टिकैत का कहना है कि यह स्वेच्छा से दिया गया इस्तीफा नहीं, बल्कि \’पूंजीपतियों की सरकार\’ द्वारा लिया गया त्यागपत्र है। उन्होंने दावा किया कि जो भी सरकार के विरुद्ध, गांव-गरीब और किसान की बात करेगा, उसे व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा। मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा — “धनखड़ हमेशा गांव, गरीब और किसान की बात करते थे। ऐसी बात करने वाले इस सरकार में टिक नहीं सकते। इस सरकार में पूंजीपतियों की चलेगी, न कि किसानों की।” उन्होंने आगे कहा कि इस्तीफे से पहले कोई भी मेडिकल कारण या स्पष्ट राजनीतिक स्थिति सामने नहीं आई। “यह सीधा संकेत है कि सरकार अब पूरी तरह पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है। राजनीतिक दलों और संवैधानिक पदों पर भी अब नियंत्रण कर लिया गया है।” टिकैत ने भाजपा पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा — “अब जो 50 साल से कम उम्र के लोग पार्टी में समझौते करेंगे, उन्हें दुष्यंत चौटाला बना दिया जाएगा, और जो उससे ऊपर होंगे, उन्हें सतपाल मलिक या फिर जगदीप धनखड़ जैसा बना दिया जाएगा।” \”अबकी बार ढोल किसी और के दरवाजे पर बजेगा\”इस लाइन के जरिए टिकैत ने आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अबकी बार परिणाम सत्ता पक्ष के अनुकूल नहीं होंगे। \”गांव तक के लोग कह रहे हैं कि इस्तीफा लिया गया है। यानी जनता सब समझ रही है।\” क्या यह लोकतंत्र बनाम कॉरपोरेट का संघर्ष है?टिकैत के इस बयान को केवल एक किसान नेता की टिप्पणी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक असंतोष की आवाज के रूप में देखा जा रहा है। यह उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, जो सत्ता में किसानों और ग्रामीण भारत की भागीदारी कम होने पर सवाल उठा रही है।