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भारत की संवेदनाएँ फिलीपींस के साथ: PM मोदी ने प्राकृतिक आपदा पर जताया समर्थन

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फिलीपींस  फिलीपींस के सेंट्रल द्वीप प्रांत सेबू में मंगलवार रात एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.9 मापी गई। इस भूकंप के कारण कम से कम 69 लोगों की मौत हुई और लगभग 150 लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद क्षेत्र में चार और झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 5 या उससे अधिक थी।भूकंप की केंद्रित स्थिति सेबू द्वीप के उत्तरी सिरे, बोगो शहर के पास थी, जो लगभग 90,000 लोगों का घर है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई भवन ढह गए और विद्युत आपूर्ति बाधित हुई। सेबू प्रांत की सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में "आपदा की स्थिति" घोषित की है और जनता से आपातकालीन सहायता में सहयोग करने की अपील की है। गवर्नर पामेला बारिकुआत्रो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, "हम अभी भी नुकसान का आकलन कर रहे हैं, लेकिन स्थिति सोची गई से अधिक गंभीर हो सकती है। हमने राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क किया है और राहत सामग्री तथा मदद का अनुरोध किया है।" उन्होंने बताया कि कई घरों और अस्पतालों को नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन मेडिकल टीमों को घायल लोगों के इलाज के लिए तैनात किया गया है।    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुःख जताया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "फिलिपींस में भूकंप से हुई जनहानि और व्यापक नुकसान के बारे में जानकर अत्यंत दुःख हुआ। मेरी प्रार्थनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं और घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। इस कठिन समय में भारत फिलीपींस के साथ खड़ा है।"इस भूकंप के कारण कई सड़कों और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की चेतावनी दी है।    

DA Hike: आज हो सकता है ऐलान, दशहरा-दीवाली से पहले बढ़ेगी केंद्रीय कर्मियों की सैलरी

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नई दिल्ली दिवाली-दशहरा से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को कैबिनेट ने महंगाई भत्ता में (DA Hike) 3 फीसदी की बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने बुधवार को केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया. इसके साथ ही अब कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है. यह बढ़ोतरी 1 जुलाई, 2025 से प्रभावी माना जाएगा.  जनवरी में कितनी हुई थी DA-DR बढ़ोतरी? इससे पहले, केंद्रीय कैबिनेट ने 1 जनवरी, 2025 से महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी की थी, जिससे लगभग 1.15 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी खुश हुए थे. इस बढ़ोतरी के बाद, महंगाई भत्ता, बेसिक सैलरी के 53% से बढ़कर 55% हो गया था. ये बढ़ोतरी 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर तय फॉर्मूले के अनुसार की गई थी. बता दें क‍ि महंगाई भत्ते और महंगाई राहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई से बचाने और उनकी जीवन-यापन लागत को समायोजित करने के लिए दिया जाता है. कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर का बकाया दिवाली से ठीक पहले अक्टूबर के वेतन के साथ दिया जाएगा. इसका मतलब है कि कर्मचारियों की सैलरी में तगड़ी बढ़ोतरी होगी. इससे कर्मचारी और पेंशनर्स त्‍योहारों पर जमकर खरीदारी करेंगे.यह बढ़ोतरी सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स पर भी लागू होगी. 2025 का दूसरा बड़ा हाइक दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (DA Hike) और महंगाई राहत (DR Hike) में बढ़ोतरी का बड़ा ऐलान किया जा चुका है. यह इस साल का दूसरा महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी है. बता दें सरकार की ओर से साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन किया जाता है.  कितनी बढ़ेगी सैलरी?  अगर किसी की बेसिक सैलरी ₹30,000 है तो कर्मचारी को प्रति माह ₹900 अतिरिक्त मिलेंगे, जबकि ₹40,000 वेतन वाले कर्मचारी को ₹1,200 अतिरिक्त मिलेंगे. तीन महीनों में, बकाया राशि कुल ₹2,700 से ₹3,600 होगी. यह त्‍योहारों के समय में एक बड़ी राहत होगी. CPI-IW आंकड़े पर निर्भर करता है डीए बढ़ोतरी औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति के रुझानों के आधार पर, महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को वर्ष में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है. हालांकि ऐलान अक्सर देर से होती हैं, लेकिन बकाया राशि इस देरी की भरपाई कर देती है. यह संशोधन सातवें वेतन आयोग के तहत अंतिम होने की उम्मीद है. जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू हो सकता है.  कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 55% है. इसमें करीब 3% की बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है, जिसके बाद DA बढ़कर 58% हो जाएगा. ये बढ़ोतरी जुलाई 2025 से लागू मानी जाएगी. यानी कर्मचरियों को उनकी बेसिक सैलरी का 58% महंगाई भत्ते के तौर पर दिया जाएगा.  जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 60,000 रुपये है, उन्‍हें अभी महंगाई भत्ते के तौर पर 33,000 रुपये मिलता है. 3% की बढ़ोतरी के बाद उन्‍हें महंगाई भत्ते के रूप में 34,800 रुपये मिलेगा. यानी उनकी ग्रॉस सैलरी में 1,800 रुपये बढ़ जाएंगे.  करोड़ों कर्मचारियों को लाभ  कैबिनेट के इस फैसले के बाद महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का तोहफा सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा. इससे 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों या पूर्व कर्मचारियों को लाभ मिलेगा.  65 लाख पेंशनभोगियों को भी मिलेगा फायदा जानकारी के अनुसार महंगाई भत्ते में इस वृद्धि से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और तकरीबन 65 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। बता दें दोनों लंबे समय से इसके बढ़ने का इंतजार कर रहे थे। अब महानवमी पर केंद्र सरकार के इस ऐलान ने केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी दी है। कब लागू होंगी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें जानकारी के अनुसार सातवें वेतन आयोग का अंतिम DA समायोजित होगा, क्योंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू होने वाली हैं। केंद्रीय कर्मचारियों को अब आठवें वेतन आयोग के गठन का इंतजार है। बता दें केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों ने इस मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की है। यूनियन पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप कर आठवें वेतन आयोग के जल्द गठन की मांग की है।

जुबीन गर्ग मौत केस: दो आरोपियों की गिरफ्तारी, दिल्ली से गुवाहटी लाया गया

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गुवाहटी  पॉपलुर सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले में दो बड़ी गिरफ्तारी हुई है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को बताया कि नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत और गायक जुबीन गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा को कामरूप मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अधिकारी ने बताया कि दोनों को सिंगापुर में गायक की मौत के सिलसिले में गिरफ्तार कर दिल्ली से गुवाहाटी लाया गया. महंत को सिंगापुर से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया, जबकि शर्मा को गुरुग्राम के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया. अधिकारी ने बताया कि शर्मा का पता लगाया और यह बात सामने निकलकर आई कि वह दिल्ली और राजस्थान जा रहा था. गुवाहाटी हवाई अड्डे पर उतरने के बाद, दोनों को कामरूप के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आवास पर ले जाया गया, क्योंकि दुर्गा पूजा के कारण अदालतें बंद थीं. अधिकारी के अनुसार, अदालत ने उन्हें 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया. दोनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आवास से सीआईडी ​​कार्यालय ले जाया गया. इस बीच, जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग, जो दिवंगत गायक के तेरहवीं के अनुष्ठान के लिए जोरहाट में हैं, ने संवाददाताओं से कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि दोनों को असम लाया गया है, क्योंकि 'हम सभी यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि उनके अंतिम क्षणों में उनके साथ क्या हुआ था'. गरिमा ने कहा कि उन्हें जांच टीम पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि अब उन्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि सिंगापुर में असल में क्या हुआ था. इससे पहले असम सरकार ने सिंगर की मौत की जांच के लिए विशेष पुलिस महानिदेशक एमपी गुप्ता के नेतृत्व में 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले कहा था कि महंत और शर्मा के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से एक 'लुकआउट नोटिस' जारी किया गया है, जिसमें उन्हें 6 अक्टूबर तक सीआईडी ​​​​के सामने पेश होने के लिए कहा गया है. शुरुआती रिपोर्ट्स में सिंगर की मौत की वजह समुद्र में डूबने से बताई जा रही है. बीती 19 सितंबर को जुबीन गर्ग की सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग करने गए थे. सिंगर सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में बतौर ब्रांड एंबेसडर शिरकत करने पहुंचे थे और इवेंट से एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गई थी. 

संघ के 100 वर्ष: समाज के सहयोग ने बनाया शताब्दी यात्रा को सशक्त और समर्पित

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को अभी सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. इस सौ वर्ष की यात्रा में कई लोग सहयोगी और सहभागी रहे हैं. यह यात्रा परिश्रम पूर्ण और कुछ संकटों से अवश्य घिरी रही, परंतु सामान्य जनों का समर्थन उसका सुखद पक्ष रहा. आज जब शताब्दी वर्ष में सोचते हैं तो ऐसे कई प्रसंग और लोगों का स्मरण आता है, जिन्होंने इस यात्रा की सफलता के लिए स्वयं सब कुछ समर्पित कर दिया. प्रारंभिक काल के वे युवा कार्यकर्ता एक योद्धा की तरह देश प्रेम से ओत-प्रोत होकर संघ कार्य हेतु देशभर में निकल पड़े. अप्पाजी जोशी जैसे गृहस्थ कार्यकर्ता हों या प्रचारक स्वरूप में दादाराव परमार्थ, बालासाहब व भाऊराव देवरस बंधु, यादवराव जोशी, एकनाथ रानडे आदि लोग डॉक्टर हेडगेवार जी के सान्निध्य में आकर संघ कार्य को राष्ट्र सेवा का जीवनव्रत मानकर जीवन पर्यन्त चलते रहे. संघ का कार्य लगातार समाज के समर्थन से ही आगे बढ़ता गया. संघ कार्य सामान्य जन की भावनाओं के अनुरूप होने के कारण शनैः शनैः इस कार्य की स्वीकार्यता समाज में बढ़ती चली गई. स्वामी विवेकानंद से एक बार उनके विदेश प्रवास में यह पूछा गया कि आपके देश में तो अधिकतम लोग अनपढ़ हैं, अंग्रेजी तो जानते ही नहीं हैं तो आपकी बड़ी-बड़ी बातें भारत के लोगों तक कैसे पहुंचेंगी? उन्होंने कहा कि जैसे चीटियों को शक्कर का पता लगाने के लिए अंग्रेजी सीखने की जरूरत नहीं है, वैसे ही मेरे भारत के लोग अपने आध्यात्मिक ज्ञान के चलते किसी भी कोने में चल रहे सात्विक कार्य को तुरंत समझ जाते हैं व वहीं वो चुपचाप पहुंच जाते हैं. इसलिए वे मेरी बात समझ जाएंगे. यह बात सत्य सिद्ध हुई. वैसे ही संघ के इस सात्विक कार्य को धीरे क्यों न हो, सामान्य जन से स्वीकार्यता व समर्थन लगातार मिल रहा है.   संघ कार्य के प्रारंभ से ही संपर्कित व नये-नये सामान्य परिवारों द्वारा संघ कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद व आश्रय प्राप्त होता रहा. स्वयंसेवकों के परिवार ही संघ कार्य संचालन के केंद्र रहे. सभी माता-भगिनियों के सहयोग से ही संघ कार्य को पूर्णता प्राप्त हुई. दत्तोपंत ठेंगड़ी या यशवंतराव केलकर, बालासाहेब देशपांडे तथा एकनाथ रानडे, दीनदयाल उपाध्याय या दादासाहेब आपटे जैसे लोगों ने संघ प्रेरणा से समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में संगठनों को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. ये सभी संगठन वर्तमान समय में व्यापक विस्तार के साथ-साथ उन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. समाज की बहनों के मध्य इसी राष्ट्र कार्य हेतु राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से मौसी जी केलकर से लेकर प्रमिलाताई मेढ़े जैसी मातृसमान हस्तियों की भूमिका इस यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. संघ द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय हित के कई विषयों को उठाया गया. उन सभी को समाज के विभिन्न लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ, जिनमें कई बार सार्वजनिक रूप से विरोधी दिखने वाले लोग भी शामिल रहे. संघ का यह भी प्रयास रहा कि व्यापक हिंदू हित के मुद्दों पर सभी का सहयोग प्राप्त किया जाए. राष्ट्र की एकात्मता, सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द तथा लोकतंत्र एवं धर्म-संस्कृति की रक्षा के कार्य में असंख्य स्वयंसेवकों ने अवर्णनीय कष्ट का सामना किया और सैकड़ों का बलिदान भी हुआ. इन सबमें समाज के संबल का हाथ हमेशा रहा है. 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में भ्रमित करते हुए कुछ हिंदुओं का मतांतरण करवाया गया. इस महत्वपूर्ण विषय पर हिंदू जागरण के क्रम में आयोजित लगभग पांच लाख की उपस्थिति वाले सम्मेलन की अध्यक्षता करने हेतु तत्कालीन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्णसिंह उपस्थित रहे. 1964 में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना में प्रसिद्ध संन्यासी स्वामी चिन्मयानंद, मास्टर तारा सिंह व जैन मुनी सुशील कुमार जी, बौद्ध भिक्षु कुशोक बकुला व नामधारी सिख सद्गुरु जगजीत सिंह इनकी प्रमुख सहभागिता रही. हिन्दू शास्त्रों में अस्पृश्यता का कोई स्थान नहीं है यह पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से श्री गुरूजी गोलवलकर की पहल पर उडुपी में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन में पूज्य धर्माचार्यों सहित सभी संतों-महंतों का आशीर्वाद व उपस्थिति रही. जैसे प्रयाग सम्मेलन में न हिंदुः पतितो भवेत् ( कोई हिन्दू पतित नहीं हो सकता) का प्रस्ताव स्वीकार हुआ था वैसे ही इस सम्मेलन का उद्घोष था- हिंदवः सोदराः सर्वे अर्थात सभी हिन्दू भारत माता के पुत्र हैं. इन सभी में तथा गौहत्या बंदी का विषय हो या राम जन्मभूमि अभियान, संतों का आशीर्वाद संघ स्वयंसेवकों को हमेशा प्राप्त होता रहा है.  स्वाधीनता के तुरंत पश्चात राजनीतिक कारणों से संघ कार्य पर तत्कालीन सरकार द्वारा जब प्रतिबंध लगाया गया, तब समाज के सामान्य जनों के साथ अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी संघ के पक्ष में खड़े होकर इस कार्य को संबल प्रदान किया. यही बात आपातकाल के संकट समय में भी अनुभव में आई. यही कारण है कि इतनी बाधाओं के पश्चात भी संघ कार्य अक्षुण्ण रूप से निरंतर आगे बढ़ रहा है. इन सभी परिस्थितियों में संघ कार्य एवं स्वयंसेवकों को संभालने का दायित्व हमारी माता-भगिनीयों ने बड़ी कुशलता से निभाया. यह सभी बातें संघ कार्य हेतु सर्वदा प्रेरणास्रोत बन गयी हैं. भविष्य में राष्ट्र की सेवा में समाज के सभी लोगों के सहयोग एवं सहभागिता के लिए संघ स्वयंसेवक शताब्दी वर्ष में घर-घर संपर्क के द्वारा विशेष प्रयास करेंगे. देशभर में बड़े शहरों से लेकर सुदूर गांवों के सभी जगहों तक तथा समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने का प्रमुख लक्ष्य रहेगा. समूचे सज्जन शक्ति के समन्वित प्रयासों द्वारा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आगामी यात्रा सुगम एवं सफल होगी.

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन: संघ में कटुता नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि है विचार

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए संघ के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का जारी किया. पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में संघ के स्वयंसेवक रहे विजय कुमार मल्होत्रा के निधन का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी. पीएम मोदी ने संघ के शताब्दी वर्ष का गवाह बनने को गौरव का पल बताया और कहा कि आज जो सिक्का जारी हुआ है, उस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित हुई है. इस पर संघ का बोधवाक्य भी लिखा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक 1963 में 26 जनवरी की परेड में भी शामिल हुए थे और आन-बान-शान के साथ देशभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. इसकी झलक भी डाक टिकट में है. पीएम मोदी ने कहा कि स्वयंसेवक जिस तरह राष्ट्र निर्माण के काम में जुटे हुए हैं, उसकी झलक भी टिकट में है. उन्होंने स्मारक सिक्कों और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बधाई भी दी. पीएम मोदी ने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है. संघ के स्वयंसेवक समाज को समृद्ध करने में जुटे हैं. उन्होंने कहा कि यह अविरल तप का फल है, यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है. पीएम ने कहा कि आदिवासी कल्याण से लेकर विविध क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक काम कर रहे हैं. धाराएं बढ़ीं, लेकिन विरोधाभास नहीं. विचार एक ही है- राष्ट्र निर्माण. संघ ने राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की राह चुनी. इसके लिए शाखाएं शुरू हुईं. उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की वेदी हैं. इन शाखाओं में त्याग पनपता रहता है. पीएम ने कहा कि अहं से वयम तक की यात्रा शाखाओं में पूरी होती है. शाखा जैसी सरल जीवन पद्धति ही संघ के सौ वर्षों के सफर का आधार बने. उन्होंने कहा कि समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण की साधना से. संघ ने जिस कालखंड में जो चुनौती आई, उसमें संघ ने खुद को झोंक दिया. आजादी के आंदोलन में संघ का बहुत योगदान- पीएम मोदी पीएम मोदी ने आजादी के आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार की सक्रिय भागीदारी से लेकर हैदराबाद के निजाम और दादरा नगर हवेली तक, संघ का बहुत योगदान रहा. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी संघ को कुचलने का प्रयास हुआ. संघ को मुख्य धारा में नहीं आने देने के लिए अनगिनत साजिशें हुईं. पीएम मोदी ने कहा कि गुरु जी जब जेल से बाहर आए, तब उन्होंने बहुत सहजता से कहा था कि कभी कभी जीभ दांतों के बीच में आ जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ दिया करते. जीभ भी हमारी है, दांत भी. उन्होंने कहा कि जेल में तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, अत्याचार हुए लेकिन गुरु जी के मन में कोई भेद नहीं था. उनका व्यक्तित्व ऋषितुल्य था. पीएम मोदी ने कहा कि संघ पर चाहे प्रतिबंध लगे, लेकिन स्वयंसेवकों ने मन में कटुता को कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लोकतंत्र पर अडिग विश्वास ने मन में कटुता को जन्म नहीं लेने दिया. अनेक थपेड़े सहते हुए भी अडिग खड़ा है संघ- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि समाज के अनेक थपेड़े सहते हुए भी संघ विराट वृक्ष की तरह अडिग खड़ा है. उन्होंने कहा कि अभी एक स्वयंसेवक ने कितनी सुंदर प्रस्तुति दी- हमने देश को ही देव माना है और देह को ही दीप बनाकर जलना सीखा है. पीएम मोदी ने कहा कि शुरू से ही संघ राष्ट्रभक्ति का पर्याय रहा है. जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया, तब संघ के स्वयंसेवक शरणार्थियों की सेवा में अपने सीमित संसाधनों के साथ सबसे आगे खड़े थे. उन्होंने कहा कि 1956 में जब गुजरात में भुज में भूकंप आया था, तब भी स्वयंसेवक आगे थे. खुद कष्ट उठाकर दूसरों का दुख दूर करना, ये संघ के स्वयंसेवकों का परिचायक है. स्वयंसेवक कठिन घड़ी में सेना के साथ खड़े रहे. पीएम मोदी ने 1984 के सिख दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि तब अनेक सिख परिवार स्वयंसेवकों के घर आश्रय लिया था. उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम चित्रकूट गए, नानाजी देशमुख से मिले और संघ के स्वयंसेवकों के कार्य देख हैरान रह गए थे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी जब नागपुर गए, हैरान रह गए. आदिवासी परंपराएं सहेजने में संघ का बड़ा योगदान- पीएम पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की आपदा हो या कोई और, संघ के स्वयंसेवक आज भी हर मुश्किल समय में सबसे आगे रहता है. उन्होंने कहा कि संघ ने दुर्गम इलाकों में भी उनकी संस्कृति, भाषा और कला के संरक्षण का कार्य किया. संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाई है. पीएम मोदी ने कहा कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों की सराहना करूंगा, जो आदिवासियों का जीवन बेहतर करने में जुटे हैं. संघ की स्थापना के समय चुनौतियां अलग थीं, आज अलग- पीएम पीएम मोदी ने छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को समाज के लिए बड़ी बीमारी बताया और संघ की ओर से समरसता के लिए उठाए गए कदम गिनाए. उन्होंने कहा कि सौ साल पहले जब संघ अस्तित्व में आया था, तब हमें सैकड़ों वर्षों की राजनीतिक गुलामी से मुक्ति पानी थी. अपनी संस्कृति की रक्षा करनी है. पीएम मोदी ने कहा कि सौ साल बाद आज जब भारत तेजी से विकसित होने की तरफ बढ़ रहा है, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, देश का एक बड़ा वर्ग गरीबी को पराजित कर आगे आ रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं के लिए नए-नए अवसर आ रहे हैं, तब आज की चुनौतियां अलग हैं और संघर्ष भी. दूसरे देशों पर हमारी आर्थिक निर्भरता एक साजिश है. डेमोग्राफिक बदलाव एक चुनौती है और हमारी सरकार इन चुनौतियों से तेजी से निपट रही है. पीएम ने कहा कि एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे यह कहते हुए खुशी है कि संघ ने इन चुनौतियों को … Read more

गाजा मुद्दे पर पाकिस्तान की सफाई से नहीं थमा गुस्सा, ट्रंप के प्लान को समर्थन दे फंसे शहबाज

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इस्लामाबाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्री गाजा शांति योजना ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर हलचल मचा दी है। लेकिन इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इस योजना का खुला समर्थन उनके लिए मुसीबत बन गया है। उनके विरोधी कह रहे हैं कि शहबाज शरीफ ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। विपक्षी नेता और आम नागरिक उन्हें 'गद्दार' करार दे रहे हैं जिसने फिलिस्तीन के साथ धोखा किया है। मामला बिगड़ता देख शहबाज सरकार ने सफाई दी है कि ट्रंप की गाजा योजना में पाकिस्तान की सभी मागों को शामिल नहीं किया गया है। ट्रंप ने सोमवार को वाइट हाउस में अपनी गाजा योजना का ऐलान किया। ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद प्रस्तुत की गई इस योजना में गाजा में युद्ध तत्काल खत्म करने, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करने और गाजा के असैन्यीकरण का प्रस्ताव है। योजना में इजरायल को गाजा के आसपास सुरक्षा परिधि बनाने और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई का प्रावधान है, लेकिन कई आलोचकों का मानना है कि यह प्लान इजरायल के हितों को प्राथमिकता देता है और फिलिस्तीनियों की सहमति को नजरअंदाज करता है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खुलेआम तारीफ की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल शुरू से हमारे साथ थे। उन्होंने 100% समर्थन का बयान जारी किया है। वे कमाल के लोग हैं।" इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गाजा योजना का स्वागत करते हुए कहा कि “फिलिस्तीनी जनता और इजरायल के बीच स्थायी शांति ही क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास ला सकती है।” लेकिन उनके इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर कड़ी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। राजनीतिक दलों, विश्लेषकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने इसे "सरेंडर" करार देते हुए सरकार पर ऐतिहासिक रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया। 'मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया' पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने कहा कि मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना से पहले अब्राहम समझौते में शामिल होना पाकिस्तान के लिए “भारी भूल” होगी। मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के नेता अल्लामा राजा नासिर ने योजना को “त्रुटिपूर्ण और अन्यायी” बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनियों की राय को दरकिनार कर अमेरिकी और इजरायली हितों को आगे बढ़ाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान जैनब मजारी ने कहा, “फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान की जनता एकमत है। प्रधानमंत्री का यह कदम देश की ऐतिहासिक स्थिति से विश्वासघात है।” लेखिका फातिमा भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल से सामान्य संबंध स्थापित करना नैतिक और धार्मिक कर्तव्य से पलायन है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी जनता कभी दो-राष्ट्र नीति के सरेंडर को स्वीकार नहीं करेगी। केवल एक फिलिस्तीन है और वह इजरायल के कब्जे में है।” पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं की नाराजगी पत्रकार तलत हुसैन ने योजना की आलोचना करते हुए कहा, “कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं, गाजा में फिलिस्तीनी अथॉरिटी नहीं, हमास का सफाया- और नेतन्याहू हत्याओं के बाद शांति-दूत बन जाएंगे। यह सब ताजा खून की धरती पर ट्रंप का रियल एस्टेट सौदा है।” पत्रकार जर्रार खुहरो ने इसे “इजरायल को पाक-साफ करने और फिलिस्तीनियों के गुस्से को भटकाने की चाल” बताया। वहीं कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने शहबाज शरीफ़ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जनसंहार कर रहे जायोनी देश से शांति की बात करना शर्मनाक है। पाकिस्तान की जनता कभी इसे माफ नहीं करेगी।” सीनियर नेता जावेद हाशमी ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का रुख स्पष्ट था कि इजरायल “एक नाजायज देश” है। जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह खारिज करती है। उन्होंने लिखा, “66,000 शहीद फिलिस्तीनियों की लाशों पर खड़ी किसी भी तथाकथित शांति योजना की तारीफ करना दरअसल गुनहगारों के साथ खड़ा होना है।” पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने भी प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब इजरायल का इतिहास हर समझौते को तोड़ने का रहा है, तो उसे चरणबद्ध वापसी का भरोसा क्यों? गाजा में 20 लाख की आबादी के लिए केवल 600 ट्रक राहत क्यों?” पाक सरकार की सफाई पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित गाजा शांति योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह योजना पाकिस्तान द्वारा सुझाए गए सभी बदलावों को शामिल नहीं करती है। डार ने एक टीवी चैनल पर कहा कि वाशिंगटन द्वारा तैयार अंतिम मसौदा पाकिस्तान के 24 घंटे के भीतर सौंपे गए संशोधनों को नजरअंदाज करता है। डार ने कहा, "ट्रंप की टीम ने कुछ बिंदु साझा किए थे, और हमने 24 घंटे के भीतर अपने संशोधन सौंपने का वादा किया। लेकिन वाशिंगटन द्वारा तैयार दस्तावेज में हमारे सभी सुझावों को शामिल नहीं किया गया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की नीति फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट और अपरिवर्तित बनी हुई है। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के तहत फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार स्थापित की जाएगी, जिसकी निगरानी मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों से बनी एक पर्यवेक्षी संस्था करेगी। उन्होंने गाजा में युद्ध विराम और पूर्ण शांति लाने के प्रयासों के बारे में बात की, जिसमें पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आठ मुस्लिम देशों के नेताओं की तैयारी बैठक भी शामिल थी।

बोर्ड मीटिंग में महिला का असामान्य विरोध, ट्रांसजेंडर छात्राओं के लिए बाथरूम फैसले पर मचा घमासान

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कैलिफोर्निया अमेरिका के स्कूल में बीते दिनों चल रही एक बोर्ड मीटिंग में एक महिला की वजह से हड़कंप मच गया। दरअसल महिला मीटिंग में बीच अचानक एक-एक कर अपने कपड़े उतारने लगी और सिर्फ बिकनी पहनकर अपना भाषण देने लगी। मामला कैलिफोर्निया का है। न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला की पहचान बेथ बॉर्न के रूप में हुई है, जो पहले भी इस तरह के विवाद खड़े कर चुकी है। दरअसल महिला जिले की उस नीति का विरोध कर रही थी, जिसके मुताबिक ट्रांसजेंडर छात्रों को उनकी पसंद के लॉकर रूम और वॉशरूम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी गई है। महिला मॉम्स फॉर लिबर्टी नाम की एक संस्था की अध्यक्ष है। यह वाकया बीते 18 सितंबर को हुआ जब वह डेविस जॉइंट यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की मीटिंग में भाग लेने पहुंची थी। कपड़े उतारने हुए महिला कहने लगी, “मैं डेविस यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट की एक अभिभावक हूं, और मैं आज यहां जूनियर हाई स्कूलों के लॉकर रूम के लिए आपकी नीतियों पर बात करने आई हूँ। एमर्सन, होम्स, हार्पर जूनियर हाई। अभी, हम अपने छात्रों को फिजिकल एजुकेशन की क्लासेस के लिए कपड़े उतारने के लिए कहते हैं। इसलिए मैं आपको बस यह बताने जा रही हूं कि जब मैं कपड़े उतारती हूं तो उन्हें कैसा लगता है।” महिला ने कहा है कि वह अपने कपड़े उतारकर यह दिखाना चाहती थीं कि मौजूदा नियमों के तहत लड़कियां कितनी असुरक्षित महसूस कर सकती हैं। जैसे ही उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए, बैठक में अफरा-तफरी मच गई और बोर्ड के सदस्यों ने बैठक स्थगित कर दी।

फिलीपींस में भूकंप का कहर, 6.9 तीव्रता के झटकों से 60 लोगों की मौत, भारी नुकसान

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मनीला फिलीपींस में  6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाई. इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई इमारतें ढह गईं और 60 लोगों की मौत हो गई. एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये जानकारी दी है. भूकंप के केंद्र और प्रभावित क्षेत्रों का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में भारी नुकसान और हताहतों की पुष्टि हुई है. अधिकारी ने बताया कि स्थानीय समयानुसार दोपहर बाद कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस हुए, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों-ऑफिस से बाहर निकल आए. भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि कई इमारतें, खासकर पुरानी संरचनाएं, पूरी तरह ढह गईं. इससे कई लोग मलबे में दब गए.  बढ़ सकती है मृतकों की संख्या फिलीपींस के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव टीमें दिन-रात काम कर रही हैं. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं. जबकि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया है, जहां चिकित्सा टीमें उनकी देखभाल में जुटी हैं. बचाव एवं राहत कार्य शुरू एक वरिष्ठ आपदा प्रबंधन अधिकारी ने कहा, '6.9 तीव्रता का भूकंप बेहद शक्तिशाली था. कई इमारतें ढह गईं और 60 लोगों की जान चली गई. हम प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों को तेज कर रहे हैं.' उन्होंने ये भी बताया कि बिजली और संचार सेवाएं कुछ क्षेत्रों में बाधित हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां आ रही हैं. हमेशा बना रहता है भूकंप का खतरा फिलीपींस में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां बार-बार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का कारण बनती हैं. हाल के सालों में फिलीपींस में कई बड़े भूकंपों आए हैं, जिनमें 2013 का बोहोल भूकंप (7.2 तीव्रता) शामिल है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे.

UPI, गैस सिलेंडर और ट्रेन टिकट… आज से लागू हुए ये नए नियम, जानें क्या बदला

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नई दिल्ली सितंबर महीना खत्म हो चुका है और अक्टूबर 2025 की शुरुआत हो गई है. ये नया महीना भी शुरू होने के साथ ही कई बड़े बदलाव (Rule Change From 1st October) लेकर आया है, जो पहले दिन यानी 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो रहे हैं. इसमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा करके ऑयल कंपनियों ने ग्राहकों को झटका दिया है, तो दूसरी ओर UPI से जुड़ा नियम भी बदला है. इन बदलावों का असर हर घर हर जेब पर देखने को मिलने वाला है. आइए ऐसे ही पांच बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानते हैं…  बदलावों के साथ अक्टूबर का आगाज  हर महीने की शुरुआत कई छोटे-बड़े बदलावों के साथ होती है और इनमें फाइनेंशियल चेंज भी शामिल होते हैं. अक्टूबर के महीने ने भी ऐसा ही आगाज किया है और पहली तारीख से ही सीधे आम आदमी से लेकर यूपीआई यूजर और भारतीय रेल से सफर करने यात्रियों के लिए बहुत कुछ बदला है. त्योहारी सीजन में जहां LPG Price में बढ़ोतरी से ग्राहकों को झटका लगा है. तो इंडियन रेलवे ने ट्रेन टिकट की ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ा नियम भी बदल दिया है , जिससे रेल यात्री प्रभावित होने वाले हैं. पहला बदलाव: LPG सिलेंडर हो गया महंगा 1 अक्टूबर से होने वाले बदलावों में लोगों की सबसे ज्यादा निगाह एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में होने वाले बदलाव पर रहती है, क्योंकि ये सीधे रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. बता दें कि बीते कुछ महीनों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की थी, लेकिन अक्टूबर के पहले दिन इनमें इजाफा किया गया है और ये दिल्ली से मुंबई तक महंगा हो गया है.  IOCL की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली में एक सिलेंडर की कीमत में 15 रुपये की बढ़ोतरी की गई है और ये 1580 रुपये के बजाय 1595 रुपये का मिलेगा. वहीं कोलकाता में कीमत 1684 रुपये से बढ़कर 1700 रुपये हो गई है. मुंबई में अब तक 1531 रुपये का मिलने वाला 19KG Cylinder अब 1547 रुपये का, जबकि चेन्नई में ये 1738 रुपये से बढ़ाकर 1754 रुपये कर दिया गया है. हालांकि, इस बार भी 14 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत नहीं बदली है.  दूसरा बदलाव: हवाई सफर हो सकता है महंगा अक्टूबर के पहले दिन दूसरा बदलाव हवाई यात्रियों से जुड़ा हुआ है, क्योंकि बीते सितंबर महीने में हवाई ईंधन में हुई कटौती के बाद अब फेस्टिव सीजन में कंपनियों ने ATF Price में जोरदार इजाफा किया है. 1 अक्टूबर 2025 से नए रेट देखें, तो दिल्ली में इसकी कीमत 90,713.52 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 93,766.02 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है. कोलकाता में ये 93,886.18 रुपये के बजाय अब 96,816.58 रुपये, मुंबई में 84,832.83 रुपये की जगह नई कीमत 87,714.39 रुपये प्रति किलोलीटर और चेन्नई में ये 94,151.96 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर अब 97,302.14 रुपये हो गई है. बता दें कि एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में इजाफा होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत में बढ़ोतरी होगी, जिससे वे फ्लाइट टिकट की कीमतों में इजाफा कर सकती हैं.  तीसरा बदलाव: सिर्फ ऐसे यात्रियों को ऑनलाइन टिकट तीसरा बदलाव रेल यात्रियों के लिए लागू होने जा रहा है. दरअसल, रेल टिकट बुकिंग में धांधली रोकने के उद्देश्य से इंडियन रेलवे ने 1 अक्टूबर 2025 से नियमों में बदलाव का ऐलान किया था, जो आज से लागू हो सकता है. इसके तहत रिजर्वेशन खुलने के बाद पहले 15 मिनट में सिर्फ ऐसे लोग ही ऑनलाइन टिकट बुक कर पाएंगे, जिनका आधार (Aadhaar) वेरिफिकेशन हो चुका है. IRCTC वेबसाइट या ऐप दोनों पर ये नियम लागू होगा. फिलहाल, यह नियम तत्काल बुकिंग पर लागू है. जबकि, कंप्यूटरीकृत PRS काउंटर से टिकट लेने वालों के लिए किसी भी तरह का कोई चेंज नहीं किया गया है.   चौथा बदलाव: UPI से जुड़ा ये रूल चेंज  यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस या UPI यूजर्स के लिए भी अक्टूबर की शुरुआत बड़े बदलाव के साथ हो रही है. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने बीते 29 जुलाई के एक सर्कुलर में इस बात की जानकारी शेयर की थी कि सबसे ज्‍यादा यूज किए जाने वाले यूपीआई फीचर्स में से पीयर टू पीयर (P2P) कलेक्ट ट्रांजैक्शन को हटाने जा रहा है और ये 1 अक्टूबर 2025 से लागू होने वाला है. यूजर्स सिक्‍योरिटी को मजबूत कर फाइनेंशियल फ्रॉड रोकने के कदम के तौर पर ये फीचर यूपीआई ऐप्‍स से हटाया जा रहा है.  पांचवां बदलाव: बैंकों में बंपर छुट्टियां अक्टूबर महीने में त्योहारों की भरमार है और ऐसे में अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो पहले भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी October Bank Holiday List देखकर ही घर से निकलें, कहीं ऐसा न हो कि आप बैंक पहुंचे और वहां ताला लटका हुआ नजर आए. दरअसल, महीने की शुरुआत दुर्गा पूजा की छुट्टी से होगी और फिर पूरे महीने में महात्मा गांधी जयंती, दशहरा, लक्ष्मी पूजा, महार्षि बाल्मिकी जयंती, करवा चौथ, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज और छठ पूजा समेत कुल 21 छुट्टियां पड़ रही हैं. इनमें दूसरे और चौथे शनिवार के साथ ही रविवार का साप्ताहिक अवकाश भी शामिल है. हालांकि, ये Bank Holiday अलग-अलग राज्यों और शहरों में अलग-अलग हो सकते हैं. 

अमेरिका-ताइवान चिप साझेदारी पर खिंची रेखा, ताइवान ने 50-50 फॉर्मूले को ठुकराया

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न्यूयॉर्क ताइवान ने अमेरिका के साथ चिप प्रोडक्शन को लेकर 50 फीसदी हिस्सेदारी के समझौते पर असहमति जताई है. यह ऐलान बुधवार को ताइवान के शीर्ष टैरिफ वार्ताकार ने घर लौटने के बाद हुआ है. अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने सुझाव दिया था कि चिप निर्माण में 50-50 का विभाजन हो, जिसका ज्यादातर हिस्सा मौजूदा वक्त में ताइवान में बनता है. ताइवान की उप-प्रीमियर चेंग ली-चियुन ने साफ किया है कि उनकी टीम ने ऐसी किसी भी शर्त पर न तो चर्चा की और न ही वे सहमति देंगे. अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने वीकेंड में यूएस टेलीविजन नेटवर्क न्यूज़ नेशन को बताया था कि वॉशिंगटन का प्रस्ताव चिप बनाने में 50-50 का विभाजन होगा.  ताइवान की उप-प्रीमियर चेंग ली-चियुन ने वापस देश लौटने पर पत्रकारों को बताया कि उन्होंने वार्ता के दौरान अमेरिका द्वारा सुझाए गए 50-50 के विचार पर चर्चा नहीं की थी. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम ऐसी शर्तों पर सहमत नहीं होगी. TSMC का निवेश और टैरिफ छूट की उम्मीद ताइवान दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिपमेकर टीएसएमसी (TSMC) का हब है. टीएसएमसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप्लीकेशन्स की मजबूत मांग की वजह से तेजी से आगे बढ़ रही है. टीएसएमसी मौजूदा वक्त में अमेरिका के एरिजोना स्टेट में चिप कारखाने बनाने के लिए $165 बिलियन का इन्वेस्टमेंट कर रही है.  हालांकि, कंपनी का ज्यादातर प्रोडक्शन ताइवान में ही रहेगा. ताइवान की सरकार ने पिछले महीने उम्मीद जताई थी कि टैरिफ वार्ता में 'कुछ प्रगति' हासिल होने के बाद अमेरिका से ज्यादा अनुकूल टैरिफ दर मिलेगी. कृषि खरीद और राजनयिक मुलाकात… ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई ने मंगलवार को ताइपे में संसद में कहा था कि चेंग ने टैरिफ मुद्दों पर अमेरिका के साथ कई बार बातचीत की है. चेंग ने एयरपोर्ट पर कहा कि विस्तृत चर्चा हुई है, जिससे कुछ प्रगति हुई है. इस बीच, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने मंगलवार देर रात यूएस कृषि विभाग के अंडर सेक्रेटरी फॉर ट्रेड एंड फॉरेन एग्रीकल्चरल अफेयर्स ल्यूक जे. लिंडबर्ग से मुलाकात की. लाइ ने कहा कि सितंबर में अमेरिका का दौरा करने वाले ताइवान के कृषि प्रतिनिधिमंडल ने अगले चार वर्षों में $10 बिलियन के अमेरिकी कृषि सामान खरीदने की योजना बनाई है, जिसमें सोयाबीन, गेहूं, मक्का और बीफ शामिल हैं.