Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

बच्चों की सुरक्षा पर सवाल: WHO रिपोर्ट में सामने आया कफ सिरप का deadly असर

नई दिल्ली   भारत में कफ सिरप पीने के कारण 5 साल से कम उम्र के 17 बच्चों की मौत के मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विस्तृत जानकारी जारी की है। WHO ने मौतों का कारण सिरप में खतरनाक रूप से अधिक मात्रा में मौजूद टॉक्सिक केमिकल को बताया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में दवा टेस्टिंग और उत्पादन में गंभीर चूकें पाई गई हैं। मौत का कारण: 500 गुना ज्यादा ज़हर बच्चों की मौत का मुख्य कारण कफ सिरप में मौजूद ज़हरीला केमिकल डाइएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol – DEG) था। खतरे का स्तर: यह ज़हरीला केमिकल सिरप में मानक सीमा से लगभग 500 गुना ज्यादा पाया गया था। नुकसान: स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि DEG एक गंभीर जहर है, जो बच्चों में किडनी फेल्योर, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स (तंत्रिका संबंधी समस्याएँ) और अंततः मौत का कारण बन सकता है। सबसे पहले Coldrif सिरप में यह ज़हरीला केमिकल मिला था, जिसके बाद इसे बैन कर दिया गया। अब, Respifresh और RELIFE सिरप में भी यही ज़हरीला केमिकल पाया गया है। क्यों हुई भारत में कफ सिरप से मौतें? WHO ने अपनी रिपोर्ट में भारत में दवा उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को मौतों का बड़ा कारण बताया है।  टेस्टिंग में कमी: WHO ने कहा कि भारत में दवा के लिए ज़रूरी टेस्ट में कमी है। कानूनी चूक: कानून के मुताबिक, दवा के हर बैच का टेस्ट करना ज़रूरी है, लेकिन हाल ही में फैक्ट्री चेक में यह नियम अनदेखा पाया गया। Sresan Pharmaceutical (Coldrif सिरप) की फैक्ट्री बंद कर दी गई है और पुलिस मैनस्लॉटर (गैर इरादतन हत्या) की जाँच कर रही है। Shape Pharma और Rednex Pharmaceuticals की भी सिरप में मानक कमी पाई गई है और उन्हें उत्पादन तथा बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है। वैश्विक स्तर पर चिंता WHO ने स्पष्ट किया है कि ये तीनों सिरप मुख्य रूप से केवल भारत में बेचे गए, और अभी तक इनका कोई आधिकारिक निर्यात (Export) नहीं हुआ है। हालांकि, WHO ने चेतावनी दी है कि कुछ सिरप अनौपचारिक रूप से (illegally) विदेशों में भी जा सकते हैं। यह घटना भारत के दवा उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है। भारत दुनिया में दवा बनाने में तीसरे नंबर पर है और अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 40% जेनरिक दवाइयाँ और कई अफ्रीकी देशों की 90% दवा भारत से आती है। इस घटना ने देश और दुनिया में दवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  

भारत का सख्त इशारा! राजनाथ और आर्मी चीफ मुनीर के बयान से पाकिस्तान की सेना हो गई चौकस

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में 8 अक्टूबर 2025 को सुरक्षा घेरे  के बीच रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर में 272वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी सेना को हर वक्त तैयार रहने, फिटनेस बनाए रखने और किसी भी हमले का “त्वरित और आक्रामक” जवाब देने का आदेश दिया। पाकिस्तानी मीडिया समा टीवी के अनुसार, यह बैठक भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा दशहरे पर दी गई सख्त चेतावनी के बाद हुई। आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना हर स्थिति के लिए सक्षम है और कश्मीर और गाजा मुद्दों पर पाकिस्तान की समर्थन नीति को दोहराया। भारत की चेतावनी  2 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज में कहा कि सर क्रीक पर पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का जवाब निर्णायक और इतना कड़ा होगा कि यह पाकिस्तान का इतिहास और भूगोल बदल सकता है। इसके बाद 3 अक्टूबर को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी पाकिस्तान को चेताया कि अगर आतंकवाद को पोसा-पाला गया तो उसका नामो-निशान मिट सकता है।   पाकिस्तानी रुख और तैयारी  आसिम मुनीर ने कॉन्फ्रेंस में फौज को अनुशासन बनाए रखने, शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देने और हर समय तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने पाकिस्तानी सेना की क्षमता को भी दोहराया और कश्मीर के साथ-साथ गाजा में मानवीय सहायता की भी बात की। बैठक में पाक-सऊदी डिफेंस डील की सराहना भी की गई। भारत की कड़ी चेतावनी और पाकिस्तानी सेना की तैयारी से क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव बढ़ा है। दोनों देशों की सैन्य सतर्कता अब चरम पर है, जिससे किसी भी छोटे विवाद का बड़ा सैन्य मोड़ लेने का खतरा बना हुआ है।

भारत में ऊर्जा क्रांति! पीएम मोदी ने प्राइवेट सेक्टर को परमाणु क्षेत्र में प्रवेश का दिया संकेत

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि भारत अपना परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोल रहा है, और इसे भारत-यूके संबंधों को मजबूत करने का एक स्वर्णिम मौका बताया। मुंबई में आयोजित भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है कि हम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल रहे हैं। इससे भारत-ब्रिटेन के सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के कई अवसर सृजित होंगे। मैं आपको भारत की इस विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित करता हूं। बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। हम अगली पीढ़ी के आधुनिक भौतिक बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में हम तेज कदम उठा रहे हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आइये, भारत और ब्रिटेन मिलकर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट मानक स्थापित करें। अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलावों पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे व सुधारों पर केंद्रित नीतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार हो रहे हैं। अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार करने की आसानी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विकास को गति देने वाले हालिया टैक्स सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ताजा जीएसटी सुधारों से मध्यम वर्ग और एमएसएमई क्षेत्र की प्रगति को नई रफ्तार मिलेगी, साथ ही सभी के लिए अवसरों का दायरा विस्तृत होगा। पीएम मोदी ने आगे कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों और सौर ऊर्जा उपकरणों पर करों में कटौती कर आम जनता को बड़ी राहत प्रदान की है। एयर कंडीशनर, टेलीविजन व डिशवॉशर जैसे सामानों पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह, मॉनिटर व प्रोजेक्टर पर भी जीएसटी को 18 प्रतिशत पर संशोधित किया गया। इन बदलावों से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को प्रोत्साहन प्राप्त होगा और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलेगी। इसके अलावा सौर पैनल व फोटोवोल्टिक सेल जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर कर को 12 प्रतिशत से घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस छूट से आवासीय व औद्योगिक उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए स्थापना खर्च में कमी आएगी, जिससे सतत व किफायती ऊर्जा विकल्पों तक पहुंच आसान हो जाएगी।  

प्यार या प्रोफेशन? अमेरिकी राजनयिक का चीनी महिला के साथ अफेयर बना कारण बर्खास्तगी

वाशिंगटन  अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने देश के एक राजनयिक को एक चीनी महिला से कथित रोमांटिक संबंध रखने के कारण बर्खास्त कर दिया है। महिला पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध होने का आरोप है। इस मामले को हाल में लागू किए गए उस प्रतिबंध के तहत पहली कार्रवाई माना जा रहा है, जिसमें अमेरिकी कर्मियों के चीनी नागरिकों से ऐसे व्यक्तिगत संबंध पर रोक लगाई गई थी। ‘एसोसिएटेड प्रेस' की पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइड्न के कार्यकाल के अंतिम दिनों में यह प्रतिबंध लगाया गया था। इसके तहत चीन में तैनात अमेरिकी सरकारी कर्मियों, उनके परिजनों और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त संविदा कर्मचारियों को किसी भी चीनी नागरिक के साथ रोमांटिक या यौन संबंध रखने से मना किया गया था।   विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि संबंधित राजनयिक को बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा मामले की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। पिगॉट ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री रुबियो के नेतृत्व में हम उन कर्मचारियों के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति बनाए रखेंगे, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हुए पाए जाएंगे।'' बयान में संबंधित राजनयिक का नाम उजागर नहीं किया गया, लेकिन एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता जेम्स ओ'कीफ द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए गुप्त वीडियो में राजनयिक और उसकी चीनी महिला मित्र नजर आए।    

विशेष अनुमति के बाद भारत पहुंचे तालिबानी विदेश मंत्री: आमिर मुत्तकी की 4 साल बाद की पहली यात्रा

अफगानिस्तान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी गुरुवार को छह दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यह यात्रा खास इसलिए है क्योंकि तालिबान शासन के चार साल बाद किसी वरिष्ठ अफगान मंत्री की भारत में यह पहली उच्चस्तरीय आधिकारिक यात्रा है। पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के सत्ता से हटने और तालिबान द्वारा शासन संभालने के बाद से अब तक भारत और तालिबान के बीच सीधा संवाद सीमित था। मुत्तकी की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नया कूटनीतिक अध्याय जोड़ सकती है।   जयशंकर और  डोभाल से  वार्ता तय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुत्तकी की व्यापक वार्ता तय है। बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद विरोधी कदमों पर चर्चा होने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा- “अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी का नयी दिल्ली आगमन पर हार्दिक स्वागत है। हम द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनके साथ चर्चा को लेकर उत्सुक हैं।” सूत्रों के अनुसार, मुत्तकी के कार्यक्रमों में दारुल उलूम देवबंद की यात्रा और आगरा में ताजमहल का दौरा भी शामिल है। यह कदम भारत और अफगानिस्तान के सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को नए सिरे से उजागर करने का संकेत माना जा रहा है।   संयुक्त राष्ट्र से लेनी पड़ी विशेष अनुमति  मुत्तकी की यह यात्रा पहले सितंबर में तय थी, लेकिन यूएनएससी के यात्रा प्रतिबंधों के कारण रद्द करनी पड़ी थी। अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने 30 सितंबर को 9 से 16 अक्टूबर तक के लिए अस्थायी छूट दी, जिससे उनका भारत दौरा संभव हो सका। यूएन ने तालिबान के सभी वरिष्ठ नेताओं पर यात्रा और आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनके लिए विदेश यात्राओं हेतु विशेष अनुमति आवश्यक होती है। भारत ने अब तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यावहारिक संवाद जारी रखा है।15 मई को विदेश मंत्री जयशंकर और मुत्तकी के बीच फोन पर पहली बातचीत हुई थी जो तालिबान शासन के बाद भारत-अफगानिस्तान के बीच सबसे उच्च स्तर का संपर्क माना गया। भारत का पक्ष भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि: अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए और काबुल में एक समावेशी सरकार का गठन होना चाहिए, जो सभी जातीय और धार्मिक समूहों को प्रतिनिधित्व दे। अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने जनवरी में भारत को “एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक शक्ति”बताते हुए सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई थी। काबुल की सरकार अब भारत के साथ शिक्षा, व्यापार और मानवतावादी परियोजनाओं पर सहयोग चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और तालिबान के बीच सावधानीपूर्वक लेकिन सकारात्मक संवाद की शुरुआत है।भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देते हुए अफगानिस्तान में स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम बढ़ा रहा है।  

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले: देश की तरक्की के लिए जरूरी है ‘एक देश, एक चुनाव’ और स्वदेशी को बढ़ावा

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित पीएचडीसीसीआई (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के 120वें वार्षिक सत्र में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की वैश्विक भूमिका, कृषि क्षेत्र की मजबूती और चुनावी प्रणाली में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने भारत के 'विश्वसनीय वैश्विक भागीदार' के रूप में उभरने पर चर्चा करते हुए 'एक देश, एक चुनाव' की आवश्यकता का जिक्र किया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को एक बार फिर से विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, और इसके लिए संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जरूरी है।  उन्होंने चुनाव सुधारों पर जोर देते हुए कहा, 'एक देश, एक चुनाव' होना चाहिए। पूरे देश में हर पांच साल में एक ही बार चुनाव हो। सांसद और विधायक दोनों के चुनाव एक साथ हों, और मतदाता एक ही वोटिंग मशीन पर दोनों को वोट दे सकें।" उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, "जनता का पैसा और समय दोनों बर्बाद होते हैं। अगर एक बार में चुनाव होंगे तो देश को फायदा होगा।" उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा, "जो भारत में बना है, उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्वदेशी को सभी को अपनाना चाहिए। जब हम स्वदेशी की बात करते हैं, तो गुणवत्ता की बात आती है। हम चाहते हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।" अपने संबोधन में उन्होंने कृषि उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण पर भी फोकस किया। उन्होंने कहा कि भारत गेहूं और चावल के उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन दालों के उत्पादन में अभी भी पीछे है। हमें दाल और ऑयल सीड्स के उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए हाइब्रिड बीजों पर काम हो रहा है और इसमें सफलता भी मिल रही है। उन्होंने बताया कि उत्पादन को बढ़ाना है, लेकिन लागत को घटाना है। साथ ही, फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने खासतौर पर सोयाबीन और दलहन मिशन पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। अंत में, शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का भारत वह नहीं है, जहां एक समय पर प्रधानमंत्री लोगों से व्रत रखने की अपील करते थे, बल्कि आज करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। यह भारत की बदली हुई तस्वीर है। कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

चीन ने Rare Earths को हथियार बनाया, अमेरिका के लिए जोखिम बढ़ा – जानें पूरा हाल!

बेजिंग  चीन ने गुरुवार को रेयर अर्थ्स (दुर्लभ खनिज तत्वों) और उनसे जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लागू करने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब इस महीने के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब विदेशी कंपनियों को उन वस्तुओं के निर्यात के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी, जिनमें चीन से प्राप्त रेयर अर्थ तत्वों की थोड़ी भी मात्रा शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि रेयर अर्थ्स की माइनिंग (खनन), स्मेल्टिंग (गलन), रीसाइक्लिंग और मैग्नेट निर्माण से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर भी परमिट प्रणाली लागू की जाएगी। दुनिया में रेयर अर्थ्स के उत्पादन में चीन का दबदबा है। यह वैश्विक रेयर अर्थ्स खनन का लगभग 70 प्रतिशत और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है। ये खनिज जेट इंजन, रडार सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों, कंप्यूटरों और मोबाइल फोन जैसे उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। रेयर अर्थ्स को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। जैसे-जैसे अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाए हैं, बीजिंग ने भी इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण को और सख्त कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि नए नियंत्रण “राष्ट्रीय सुरक्षा की बेहतर रक्षा” के लिए लगाए जा रहे हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि चीन से प्राप्त रेयर अर्थ्स या तकनीक का इस्तेमाल “संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों” में न हो।   मंत्रालय ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी कंपनियां और व्यक्ति चीन से रेयर अर्थ्स तकनीक को सैन्य या अन्य संवेदनशील उपयोगों के लिए बाहर भेज रहे हैं, जिससे “राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान” पहुंचा है।रेयर अर्थ्स की आपूर्ति पर चीन की सख्ती से अमेरिका और अन्य देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को झटका लग सकता है। इन खनिजों के बिना इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, गाड़ियों और रक्षा उपकरणों का निर्माण प्रभावित हो सकता है। एशिया ग्रुप के विशेषज्ञ जॉर्ज चेन के अनुसार, “रेयर अर्थ्स आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच वार्ता का अहम हिस्सा बने रहेंगे। दोनों देश स्थिरता चाहते हैं, लेकिन असली सौदा अगले साल ही हो पाएगा।” यह कदम उस समय उठाया गया है जब ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) फोरम के दौरान तय है। माना जा रहा है कि चीन का यह फैसला वार्ता से पहले दबाव की रणनीति का हिस्सा है।इससे पहले अप्रैल में चीन ने सात रेयर अर्थ तत्वों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था, जब ट्रम्प प्रशासन ने चीन सहित कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।हालांकि, जून में बीजिंग ने कुछ निर्यात परमिट जारी किए और प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया था।विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक रूप से भी अहम है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए आपूर्ति संकट गहरा सकता है और वैश्विक तकनीकी उद्योग पर असर पड़ सकता है।

गाजा पीस प्लान पर मोदी का सशक्त संदेश, इजरायली प्रधानमंत्री को भी किया सम्मानित

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर हुए समझौते का गुरुवार को स्वागत किया। इस समझौते के तहत इजरायल और हमास ने गाजा में लड़ाई रोकने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व का प्रतिबिंब बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं। यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व का भी प्रतिबिंब है। हमें उम्मीद है कि बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचने से उन्हें राहत मिलेगी तथा स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा।” इजरायल और हमास ने लड़ाई रोकने पर सहमति दी। कुछ बंधकों और कैदियों की रिहाई होगी। इजरायल अपनी सेनाओं को निर्धारित रेखा तक वापस लेगा। यह समझौता दो साल से जारी विनाशकारी युद्ध में सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। ट्रंप का संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह पहला कदम है जो मजबूत, स्थायी और अनंतकालीन शांति की दिशा में बढ़ाता है। उन्होंने सभी मध्यस्थ देशों कतर, मिस्र और तुर्की का धन्यवाद किया और इसे अरब, मुस्लिम दुनिया, इज़रायल और अमेरिका के लिए एक महान दिन बताया।ट्रंप ने कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते से सभी पक्षों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाएगा और शांति निर्माताओं का आशीर्वाद मिलेगा।  

IND-UK संबंधों में नया अध्याय: ₹3,884 करोड़ की मिसाइल डील पर हस्ताक्षर, PM मोदी की CEO फोरम में घोषणा

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने गुरुवार को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूती देने की प्रतिबद्धता एक बार फिर दोहराई. दोनों नेताओं ने मुंबई में कई नए समझौते किए जिनका मकसद आर्थिक संबंधों को गहरा करना, शिक्षा में साझेदारी बढ़ाना और रक्षा व समुद्री सहयोग को मजबूत करना है. प्रधानमंत्री स्टारमर बुधवार को मुंबई पहुंचे थे. आज राजभवन में दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पीएम मोदी और स्टारमर ने भारत–यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के शीघ्र अनुमोदन की उम्मीद भी जाहिर की. अमेरिका के साथ भारत के व्‍यापारिक रिश्‍तों में आए तनाव के बाद ब्रिटेन व्‍यापारिक दृष्टिकोण से इंडिया के लिए बहुत अहम हो गया है. कीर स्टारमर के इस दौरे के दौरान व्यापार और निवेश से संबंधित कुछ बड़े कदम भी दोनों देशों ने उठाए हैं. कीर स्‍टारमर के इस दौरे के दौरान व्यापार और निवेश से संबंधित कुछ बड़े कदम भी दोनों देशों ने उठाए हैं. भारत-यूके सीईओ फोरम की पुनर्गठित बैठक का आयोजन किया गया. संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (JETCO) को फिर से सक्रिय भी किया गया है. यह समिति भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लागू करने में मदद करेगी और दोनों देशों में नौकरी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी. इसके अलावा दोनों देशों ने क्लाइमेट टेक्नोलॉजी स्टार्टअप फंड में नया संयुक्त निवेश किया गया. यह पहल ब्रिटेन सरकार और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच हुए समझौते (MoU) के तहत की गई है. इसका उद्देश्य जलवायु तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में नए और इनोवेटिव उद्यमियों को सहयोग देना है. JETCO व्‍यापार समझौते में निभाएगा अहम भूमिका आज सुबह दोनों देशों ने JETCO को पुनर्स्थापित करने के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर किए. दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्‍स पर एक पोस्‍ट में लिखा, “JETCO को फिर से सक्रिय करने के लिए हस्ताक्षर करना एक बड़ा कदम है. यह हमारे रणनीतिक साझेदारी के ढांचे को मजबूत करेगा, भारत-यूके CETA के कार्यान्वयन को बढ़ावा देगा और दोनों देशों के व्यापार को नए स्तर तक ले जाएगा.” पीएम मोदी और ब्रिट‍िश पीएम की मौजूदगी में 3,884 करोड़ की मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री क‍ीर स्टार्मर की मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने 468 मिलियन डॉलर (करीब 3,884 करोड़ रुपये) की डिफेंस डील पर सहमत‍ि जताई है. इस समझौते के तहत ब्रिटेन इंडियन आर्मी को हल्के वजन वाली मल्टीरोल मिसाइलें (Lightweight Multirole Missiles) सप्लाई करेगा. थेल्‍स की कंपनी इन मिसाइलों का निर्माण करेगी. रॉयटर्स की‍ रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने इसे अपने डिफेंस इंडस्‍ट्री और भारत के साथ गहराते सामरिक रिश्तों के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है. यह मिसाइलें ब्रिटिश कंपनी थेल्स (Thales) द्वारा उत्तरी आयरलैंड में बनाई जाएंगी. ब्रिट‍िश सरकार का कहना है कि इस सौदे से करीब 700 ब्रिटिश नौकरियां सुरक्षित रहेंगी, जो फिलहाल यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने वाले इसी संयंत्र में कार्यरत हैं. ब्रिटिश सरकार ने अपने बयान में कहा, यह डील भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्लेक्स वेपंस पार्टनरशिप की दिशा में बड़ा कदम है, जिस पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं. भारत के लिए यह डील क्यों महत्वपूर्ण     भारत के पास पहले से ही कई तरह की मिसाइलें हैं, लेकिन आधुनिक, हल्की और मल्‍टीरोल मिसाइलें इंडियन आर्मी को तुरंत जवाब देने में मदद करेंगी. ये मिसाइलें समुद्र और जमीन दोनों जगहों पर इस्तेमाल की जा सकती हैं, जिससे रणनीतिक फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.     ब्रिटेन के साथ यह डील टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर का रास्ता खोलती है. इससे भारत को उन्नत मिसाइल तकनीक सीखने और संभवतः देश में स्थानीय निर्माण करने का अवसर मिलेगा. ब्रिटेन में इस सौदे से 700 नौकरियां सुरक्षित होंगी, और भारत के लिए भी यह रक्षा उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ाने का संकेत है. दोहरी साझेदारी पर जोर मुंबई में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों की भी समीक्षा की. कुछ महीनों पहले हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद अब दोनों देश रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर भी फोकस कर रहे हैं. ब्रिटेन ने यह भी घोषणा की कि भारत के साथ नौसैनिक जहाज़ों के लिए इलेक्ट्रिक इंजन तकनीक पर भी एक नया समझौता हुआ है. इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक मूल्य 250 मिलियन पाउंड बताया गया है. ट्रंप टैरिफ की काट है भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भारत पर अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करेगा. इससे भारत को ब्रिटेन के सर्विस सेक्टर में अहम जगह मिलेगी. इससे भारतीय टेक कंपनियों को राहत मिलेगी, जो फिलहाल ट्रंप टैरिफ की मार झेल रही है. समझौते से भारत का टेक्‍सटाइल निर्यात भी ब्रिटेन को बढ जाएगा. भारत पर बांग्‍लादेश और वियतनाम के मुकाबले ज्‍यादा टैरिफ होने से अमेरिका को इंडिया से होने वाला टेक्‍सटाइल एक्‍सपोर्ट सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुआ है. अगले साल जुलाई तक लागू होने वाली भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील को अपने निर्यात में विविधता लाने में भी मदद करेगी. अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारत का 40 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा. इसकी भरपाई भारत अन्‍य बाजारों से करने में जुटा है और ब्रिटेन का साथ इसमें काफी अहम है.

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में EC का रुख सख्त: नाम हटाने का दावा है तो प्रमाण दें

नई दिल्ली बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. याच‍िकाकर्ताओं की ओर से दावे क‍िए गए क‍ि एसआईआर में बहुत सारे मुस्‍ल‍िमों के नाम वोटर ल‍िस्‍ट से हटा द‍िए गए. इस पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब द‍िया गया है. आयोग ने कहा क‍ि वे कह रहे हैं कि बहुत सारे मुस्लिमों के नाम हटाए गए हैं लेकिन जब आपके पास डेटा ही नहीं है, तो आपको कैसे पता? आप डेटा तो दीजिए. ज‍िस मह‍िला का नाम हटाने की बात आप कह रहे हैं, वो तो वोटर ल‍िस्‍ट में दर्ज है. एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में इस वक्‍त जोरदार बहस .  या‍च‍िकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर समेत कई वकील पेश हुए. जबक‍ि चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने दलील रखी. द्व‍िवेदी ने कहा, एडीआर समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से हलफनामे में किए गए वोट काटे जाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं. गलत कहानी गढ़ी जा रही है. जिस महिला का नाम काटने का दावा किया जा रहा है. उसका मसौदा सूची और अंतिम सूची में भी नाम है. ECI के तरफ से कोर्ट को बताया गया कि गलत कहानी गढ़ी गई है कि यह व्यक्ति ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में था और बाद में उसका नाम हटा दिया गया. ECI के वकील ने कहा कि अदालत में एक व्यक्ति द्वारा दायर किया गया हलफनामा, जिसमें दावा किया गया है कि उसका नाम ड्राफ्ट रोल के बाद हटाया गया, ये गलत है. ECI ने कहा कि उस व्यक्ति द्वारा दिया गया बूथ नंबर ही गलत है, जिससे साबित होता है कि उसका दावा झूठा है. वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक तर्क यह था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम थे, लेकिन अचानक उनके नाम सूची से गायब हो गए. मुझे अब तक तीन हलफनामे मिले हैं. हमने इसकी जांच की है. यह हलफनामा पूरी तरह से झूठा है. कृपया पैरा एक देखें कि उन्होंने कहा है कि मैं बिहार का निवासी हूं और ड्राफ्ट मतदाता सूची में था. वह वहां नहीं थे. हकीकत ये है उन्होंने मतदाता गणना फॉर्म जमा नहीं किया था. यह झूठ है. फिर उन्होंने मतदाता पहचान पत्र संख्या दी, दिया गया मतदान केंद्र 52 है, लेकिन वास्तविक संख्या 653 है. लेकिन वह नाम भी एक महिला का है, उनका नहीं. वह ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं थे. उन्‍होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब हो गए थे, गलत है, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने नामांकन फॉर्म नहीं भरा था. द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति वोटर लिस्ट के पार्ट 63 में था, न कि पार्ट 52 में, और यह सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता ने पुरानी जनवरी की लिस्ट का उल्लेख किया है. राकेश द्विवेदी ने दो मिनट का समय मांगा और फिर याचिकाकर्ताओं के आरोपों को चुनौती देते हुए आगे अपनी बात रखी. ECI का पक्ष:— “वे कह रहे हैं कि बहुत सारे मुस्लिमों के नाम हटाए गए हैं — लेकिन जब आपके पास डेटा ही नहीं है, तो आपको कैसे पता?” “मैं इस अदालत से आदेश चाहता हूं कि जिन लोगों को अपना नाम जोड़वाना है, वे अगले 5 दिनों में आवेदन करें, क्योंकि उसके बाद दरवाजे बंद हो जाएंगे.” “यह हलफनामा 6 तारीख का है — अगर उसे अपना नाम शामिल करवाना था, तो उसे आवेदन करना चाहिए था.” अदालत ने कहा:— “पहले सही जानकारी दी जानी चाहिए — गलत जानकारी हमें भी स्वीकार्य नहीं है.” ECI ने आगे कहा:— “यह किसी व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, ADR ने यह दस्तावेज अदालत में रखे हैं. संगठन को अदालत में कुछ भी पेश करने से पहले उसकी सच्चाई सुनिश्चित करनी चाहिए.” अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा:—“आपको ज़िम्मेदारी लेनी होगी.” वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा:– “अदालत लीगल सर्विस अथॉरिटी को निर्देश दे सकती है कि जाकर जांच करे कि क्या उस व्यक्ति ने वास्तव में हलफनामा दाखिल किया है.” अदालत ने कहा: “लेकिन दी गई जानकारी गलत है.” प्रशांत भूषण ने जवाब दिया:—“वे ऐसा कह रहे हैं, अदालत लीगल सर्विस अथॉरिटी से जांच करवा सकती है.” अदालत ने टिप्पणी की:— “हम इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता अभी कैसे जानें? हम जांच एजेंसी नहीं हैं! वे दिखा रहे हैं कि तथ्य गलत हैं.” वकील प्रशांत भूषण ने कहा: “वे केवल एक दावा कर रहे हैं, ये तथ्य नहीं हैं.” अदालत ने कहा: “देखना यह है कि क्या उस व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट रोल में था या नहीं — अगर नहीं था तो आप ऐसा हलफनामा कैसे दे सकते हैं?” जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि —आपसे संपर्क करने वाले सभी लोग लीगल सर्विस अथॉरिटी से संपर्क क्यों नहीं कर सकते? मुफ़्त कानूनी सलाह भी दी जा सकती है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि— वे कहते हैं कि या तो हमारा नाम ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया था, फिर फॉर्म 6 भरा और फिर भी नाम फाइनल रोल में नहीं था और दूसरे कहते हैं कि उनके नाम हटा दिए गए हैं और उन्हें कभी नोटिस ही नहीं मिला. अदालत की बड़ी महत्वपूर्ण टिप्पणी:– “अगर आप (याचिकाकर्ता) अदालत के सामने यह कहते कि आपकी अपील पर अब तक फैसला नहीं हुआ है, तो हम आपके साथ होते — लेकिन मामला ऐसा नहीं है.” प्रशांत भूषण ने कहा कि— आइए हम चुनाव आयोग द्वारा अपनाए गए दिशानिर्देशों को देखें. इसमें बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है. उनके पास सब कुछ कंप्यूटराइज्ड रूप में है. लेकिन अभी भी इस बारे में कोई डेटा नहीं है कि ड्राफ्ट सूची से किसे बाहर रखा गया है और इसलिए हम हर चीज़ की जाँच और पता लगाने में सैकड़ों घंटे लगा रहे हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि पहले भूषण हलफनामा दाखिल करें फिर अदालत हमारा पक्ष सुने. एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि— धारा 23(3) के अनुसार, 17 अक्टूबर को, यानी आज से 9 दिन बाद रोल फ्रीज हो जाएँगे. मुझे यह क्यों बताना चाहिए कि मैं कब तक अपील दायर कर सकती हूँ. जस्टिस बागची ने कहा कि— अपील सिर्फ़ यह कहकर की जा सकती है कि मेरा नाम हटा दिया गया है और कोई आधार नहीं … Read more