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रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: भारत में एस-400 बनेंगे, 10 रूसी कवच से सेना हुई सशक्त

नई दिल्ली पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवाया. इस रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने भारतीय सेना को अपना कायल बना दिया है. एस-400 ने ऑपरेशन सिंदूर में न केवल दुश्मन पर हमले में अपनी ताकत दिखाई, बल्कि पाकिस्तान की हवाई हमले की क्षमता को भी पंगु कर दिया था. यहीं वजह से भारत अब रूस से 5 और एस-400 खरीदने की तैयारी कर रहा है. भारत ने रूस के साथ 2018 में ही पांच एस-400 सिस्टम के लिए 5.43 अरब डॉलर की डील की थी. इसके तहत अगले साल के अंत तक दो S-400 की सप्लाई होनी है. इसके साथ ही अब पांच और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर बातचीत चल रही है. रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी इसके लेकर इस हफ्ते रूसी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं. इस मुलाकात में इस रूसी रक्षा कवच को मिलकर बनाने पर चर्चा किया जाएगा. माना जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली वार्षिक शिखर वार्ता से पहले इस सौदे को हरी झंडी मिल सकती है. भारत में भी बनेंगे S-400 हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, भारत और रूस के बीच अतिरिक्त पांच सिस्टम की कीमत पर सहमति बन चुकी है. दोनों देश के बीच अब इस पर बातचीत चल रही है कि इनमें से तीन सिस्टम सीधे खरीदे जाएंगे और बाकी के दो S-400 टेक्नॉलजी ट्रांसफर के तहत निर्मित होंगे. यह सौदा सरकार-से-सरकार के बीच होगा और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल सुविधाएं भारतीय प्राइवेट सेक्टर की मदद से स्थापित की जाएंगी. Su-30 में लगेगा घातक हथियार वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रूस की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेने पर विचार की बात कही थी. हालांकि सरकार ने अब तक न Su-57 और न अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को लेकर कोई निर्णय लिया है. उधर खबर है कि भारत रूस से 200 KM से अधिक रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइल आरवीवी-बीडी (R-37) भी हासिल करना चाहता है, जिससे Su-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता बढ़ाई जा सके. पाकिस्तान पहले ही चीन निर्मित 200 किमी रेंज वाली PL-15 मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है और इसे ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारत के खिलाफ भी तैनात किया था. R-37 मिसाइल को Su-30 एमकेआई में एकीकृत करने के लिए उसके ऑनबोर्ड रडार को अपग्रेड करना होगा. S-400 का ऑपरेशन सिंदूर में कमाल बता दें कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जबरदस्त क्षमता साबित की थी. पाकिस्तान ने 7 मई के हमले के बाद आदमपुर और भुज एयरबेस पर तैनात एस-400 को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया. इसके बाद 10 मई तक पाकिस्तान को अपने सभी एयर एसेट्स को भारतीय सीमा से 300 किमी दूर ले जाना पड़ा और मुश्किल से ही कोई विमान उड़ान भर सका. एस-400 की लंबी दूरी की मिसाइलों ने पाकिस्तान के एक विमान को पंजाब में 314 किमी की दूरी पर मार गिराया था और उत्तर में एफ-16 व जेएफ-17 लड़ाकू विमानों को भी ढेर किया था.  

इटली में दुखद हादसा, 20 से 34 साल के 4 भारतीयों की मौत

मटेरा दक्षिणी इटली के मटेरा शहर में एक सड़क दुर्घटना में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। रोम स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को यह जानकारी दी। इटली की समाचार एजेंसी एएनएसए ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित सात सीटों वाली रेनॉल्ट सीनिक कार में छह अन्य लोगों के साथ सवार थे। उनकी कार शनिवार को एग्री घाटी के मटेरा शहर के स्कैनजानो जोनिको नगरपालिका क्षेत्र में एक ट्रक से टकरा गई। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों की पहचान 34 वर्षीय कुमार मनोज, 33 वर्षीय सिंह सुरजीत, 31 वर्षीय सिंह हरविंदर और 20 वर्षीय सिंह जसकरण के रूप में की गयी है। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीय दूतावास दक्षिणी इटली के मटेरा में एक सड़क दुर्घटना में चार भारतीय नागरिकों की दुखद मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करता है।'' भारतीय दूतावास ने कहा, ‘‘हम विवरण प्राप्त करने के लिए स्थानीय इतालवी अधिकारियों के संपर्क में हैं। दूतावास संबंधित परिवारों को हर संभव कांसुलर सहायता प्रदान करेगा।'' एएनएसए ने बताया कि पांच घायलों को पोलिकोरो (माटेरा) के अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जबकि छठे और गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को पोटेंजा के सैन कार्लो अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।  

बिहार और सात राज्यों में चुनावी महाकुम्भ, वोटिंग की पूरी जानकारी

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनावों के अलावा जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मिजोरम व राजस्थान सहित सात राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव आयोजित करने की घोषणा की है। आयोग ने इन विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव की तिथियों का भी ऐलान कर दिया है। इन सभी सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग और 14 नवंबर को मतों की गिनती होगी। जम्मू-कश्मीर की दो सीटें बडगाम और नगरोटा में भी चुनाव होगा। ये दोनों सीटें पिछले एक साल से रिक्त पड़ी हैं। बडगाम उमर अब्दुल्ला के इस्तीफे के कारण खाली हुई, जबकि नगरोटा देवेंद्र राणा के निधन से। नगरोटा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला तय है। इसके अलावा पंजाब की तरनतरण, झारखंड की घाटशिला तथा राजस्थान की अंता विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव आयोजित होंगे। उधर, तेलंगाना की जयंती हिल्स, मिजोरम की दम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा में भी चुनाव संपन्न होंगे।  

मेडिसिन का नोबेल 2025 तीन वैज्ञानिकों को, ब्रंकॉ, रैम्सडेल और साकागुची को मिली वैश्विक पहचान

 नईदिल्ली  नोबेल पुरस्कार की घोषणा ने दुनिया को एक बार फिर चमत्कार से रूबरू करा दिया. 2025 का नोबेल पुरस्कार फिजियोलॉजी या मेडिसिन (चिकित्सा) में अमेरिका की मैरी ई. ब्रंकॉ, अमेरिका के फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन सकागुची को दिया गया है. यह पुरस्कार उनकी 'पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस' (शरीर के बाहरी हिस्सों में इम्यून सिस्टम की सहनशीलता) से जुड़ी खोजों के लिए है. यह खोज शरीर की रक्षा प्रणाली को समझने में क्रांति लाई है, जो ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, टाइप-1 डायबिटीज और ल्यूपस के इलाज का रास्ता खोलेगी. स्टॉकहोम के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने सोमवार को घोषणा की. इम्यून टॉलरेंस क्या है? शरीर की रक्षा प्रणाली का रहस्य हमारा शरीर इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) से हमेशा खतरे से लड़ता है – जैसे वायरस या बैक्टीरिया से. लेकिन कभी-कभी यह सिस्टम गलती से अपने ही अंगों पर हमला कर देता है, जिसे ऑटोइम्यून बीमारी कहते हैं. पुराने वैज्ञानिकों को लगता था कि इम्यून सेल्स (रोगाणु से लड़ने वाली कोशिकाएं) शरीर के अंदर ही 'सहिष्णु' (टॉलरेंट) बन जाती हैं, जिसे सेंट्रल इम्यून टॉलरेंस कहते हैं. लेकिन विजेताओं ने दिखाया कि शरीर के बाहरी हिस्सों (पेरिफेरल) में भी एक खास तंत्र काम करता है, जो इम्यून सिस्टम को नियंत्रित रखता है. इससे शरीर के अंग सुरक्षित रहते हैं. यह खोज 1990 के दशक से शुरू हुई. विजेताओं ने पाया कि 'रेगुलेटरी टी सेल्स' (Tregs) नामक कोशिकाएं इम्यून सिस्टम को ब्रेक लगाती हैं. अगर ये कोशिकाएं कमजोर हों, तो शरीर के अंगों पर हमला होता है. यह खोज कैंसर, ट्रांसप्लांट और एलर्जी के इलाज में भी मदद करेगी. तीन वैज्ञानिकों की टीम वर्क शिमोन सकागुची (जापान) शिमोन सकागुची को रेगुलेटरी टी सेल्स की खोज के लिए जाना जाता है. 1995 में उन्होंने दिखाया कि CD4+ CD25+ कोशिकाएं इम्यून सिस्टम को दबाती हैं. यह कोशिकाएं शरीर को अपने ही ऊतकों से लड़ने से रोकती हैं. सकागुची की खोज से पता चला कि Tregs इम्यून टॉलरेंस बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाती हैं. उनके काम ने ऑटोइम्यून रोगों की समझ बदल दी. आज Tregs को इंजीनियर करके दवाएं बन रही हैं. मैरी ई. ब्रंकॉ और फ्रेड राम्सडेल (अमेरिका) मैरी ब्रंकॉ और फ्रेड राम्सडेल ने फॉक्सपी3 (FOXP3) जीन की खोज की, जो Tregs कोशिकाओं का 'मास्टर स्विच' है. 2001 में उन्होंने पाया कि FOXP3 में म्यूटेशन से IPEX सिंड्रोम होता है – एक दुर्लभ बीमारी जहां बच्चे का इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर पर हमला करता है. इससे बाल रोग, डायबिटीज और आंतों की समस्या होती है. उनके काम ने साबित किया कि FOXP3 Tregs कोशिकाओं को सक्रिय रखता है. यह खोज पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस को समझने में मील का पत्थर साबित हुई. तीनों ने मिलकर दिखाया कि सेंट्रल टॉलरेंस के अलावा पेरिफेरल टॉलरेंस भी जरूरी है. उनकी खोजें अब दवाओं में इस्तेमाल हो रही हैं, जैसे ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए Tregs थेरेपी.

सुप्रीम कोर्ट में CJI पर हमला: वकील ने जूता फेंका, पुलिस ने किया गिरफ्तार

नई दिल्ली चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई के सामने कोर्ट में आज एक वकील ने हंगामा करने की कोशिश की. आरोप है कि वकील ने CJI की तरफ जूता फेंकने का प्रयास भी किया. घटना के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी वकील को हिरासत में ले लिया. इस बीच, पूरे घटनाक्रम के दौरान जस्टिस गवई शांत बने रहे और कोर्ट में सुनवाई यथावत जारी रही. उन्होंने कहा कि इन चीजों से "मुझे फर्क नहीं पड़ता." बताया जा रहा है कि वकील डेस्क के पास गया और जूता निकालकर जज की तरफ फेंकने की कोशिश की लेकिन कोर्ट में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने समय रहते हस्तक्षेप किया और वकील को बाहर ले गए. बाहर जाते समय वकील यह कहते सुना गया, "सनातन का अपमान नहीं सहेंगे." CJI इस घटना से प्रभावित नहीं हुए और कोर्ट में मौजूद अन्य वकीलों से कहा कि अपने तर्क जारी रखें. उन्होंने कहा, “इस सब पर ध्यान मत दें. हम प्रभावित नहीं हैं. ये बातें मुझे प्रभावित नहीं करतीं." मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सीजेआई पर क्यों की गई जूता फेंकने की कोशिश? घटना पर एक वकील ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि आज की जो घटना है, वह बहुत ही दुखद है. एक कोर्ट में, वो भी वकील ने अगर असॉल्ट करने का प्रयास किया है, तो हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. देखिए, हमारे बार के वो मेंबर हैं. अभी हमने जांच किया और पता चला कि वो 2011 के मेंबर हैं." वकील ने कार्रवाई की मांग की वकील ने अपने बयान में कहा, "यह बहुत ही दुखद घटना है. इसलिए हम कह सकते हैं कि जो पता चला है, वह लॉर्ड विष्णु के मैटर्स में आया कमेंट था, हॉनरेबल CJI के उसी पर ही उन्होंने ऐसा प्रयास (वकील ने जूता फेंकने का प्रयास) किया है. यह बहुत ही दुखद घटना है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और अगर यह घटना सच है, तो एक्शन होना चाहिए."

पुलिस की सूझबूझ से खुला राज़, मोबाइल चार्जर ने दिलाई पहलगाम हमले के सहयोगी तक पहुंच

श्रीनगर  कश्मीर घाटी के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे की साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक ऐसे ओवरग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया है, जिसने आतंकियों से चार बार मुलाकात की थी. उनको रसद सहायता उपलब्ध कराई थी. उनको मोबाइल फोन चार्जर दिया था. 26 साल के इस आरोपी का नाम मोहम्मद यूसुफ कटारी है, जो कि पेशे से शिक्षक है. केंद्रीय जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोहम्मद यूसुफ कटारी ने पूछताछ में कबूल किया है कि वो पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों सुलेमान उर्फ आसिफ, जिबरान और हमजा अफगानी से चार बार मिला था. यही नहीं उसने उन्हें एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन चार्जर भी दिया था, जो बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुआ. उसी के जरिए पुलिस उस तक पहुंच पाई है. दरअसल, जुलाई में शुरू किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान श्रीनगर के बाहरी इलाके जबरवान पहाड़ियों की तलहटी में तीनों आतंकियों का खात्मा हुआ था. घटनास्थल से पुलिस को जो सामग्री मिली, उसमें एक आंशिक रूप से जला हुआ मोबाइल चार्जर भी था. यही मामूली सा सबूत पुलिस को उस नेटवर्क तक ले गया, जो पहलगाम हमले की साजिश का हिस्सा था. फोरेंसिक जांच में मोबाइल चार्जर के सीरियल नंबर और कनेक्टिविटी डेटा से पुलिस को अहम सुराग मिले. श्रीनगर पुलिस ने जब इसकी ट्रेसिंग की, तो चार्जर के असली मालिक का पता चल गया. उसने इसे एक डीलर को बेचा था. वहीं से कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ते हुए जांच टीम मोहम्मद यूसुफ कटारी तक पहुंच गई. उसको सितंबर के आखिरी हफ्ते में गिरफ्तार किया गया था.  एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ऊंचे इलाकों में रहने वाले खानाबदोश छात्रों को पढ़ाने का काम करता था, लेकिन पर्दे के पीछे आतंकियों को गाइड करने और उनके लिए सामान जुटाने जैसी जिम्मेदारी निभाता था. बताया जा रहा है कि उसने न सिर्फ मोबाइल फोन चार्जर उपलब्ध कराया, बल्कि पहलगाम के हमलावरों को पहाड़ी रास्तों से गुजरने में मदद भी की थी. मोहम्मद यूसुफ कटारी सुलेमान उर्फ आसिफ, जिबरान और हमजा अफगानी जैसे बड़े आतंकियों के संपर्क में था. सुलेमान पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था. जिबरान अक्टूबर 2024 में सोनमर्ग सुरंग हमले में शामिल था. हमजा अफगानी कई छोटे आतंकी ऑपरेशनों में शामिल रहा था. तीनों को 29 जुलाई को 'ऑपरेशन महादेव' के तहत मुठभेड़ में मार गिराया गया था.

एक आईफोन की कीमत ज़िंदगी पर भारी, 17 साल का लड़का अब डायलिसिस का मोहताज

बीजिंग  सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर अजीबोगरीब खबरें सामने आती हैं लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो इंसान को भीतर तक झकझोर देती हैं. ऐसा ही एक मामला चीन से सामने आया था जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. टेक्नोलॉजी के जुनून और महंगे गैजेट्स की चाहत इंसान को किस हद तक ले जा सकती है इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 17 साल के किशोर ने सिर्फ आईफोन और आईपैड खरीदने के लिए अपनी एक किडनी बेच दी थी. यह खबर जब सामने आई तो दुनिया भर के अखबारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी मच गई. आज यह घटना एक चेतावनी की तरह देखी जाती है कि शौक और दिखावे की चाह किस तरह जिंदगी को बर्बाद कर सकती है. 17 साल पहले आईफोन के लिए बेची किडनी, अब भुगत रहा अंजाम चीन का रहने वाला यह किशोर, जिसका नाम मीडिया रिपोर्ट्स में वांग शांगकुन बताया गया है, साल 2011 में उस समय सुर्खियों में आया जब उसने ब्लैक मार्केट के जरिए अपनी किडनी बेच दी. उस वक्त उसकी उम्र महज 17 साल थी और उसे नवीनतम तकनीक की भूख थी. वह अपने दोस्तों की तरह आईफोन 4 और आईपैड 2 का मालिक बनना चाहता था. आर्थिक तंगी की वजह से उसके परिवार की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि ये महंगे गैजेट्स खरीद सके. ऐसे में किशोर ने गलत रास्ता अपनाया और अपनी किडनी बेचकर करीब 22,000 युआन (लगभग कुछ हजार डॉलर) हासिल किए. बिस्तर तक सीमित रह गई जिंदगी किडनी बेचने के बाद उसने अपने मनपसंद गैजेट्स तो खरीद लिए लेकिन उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अवैध और अस्वच्छ माहौल में हुई इस सर्जरी ने उसकी बाकी की जिंदगी को दर्द और परेशानी से भर दिया. कहा जाता है कि अब उसकी दूसरी किडनी भी ठीक से काम नहीं कर रही और वह डायलिसिस पर निर्भर है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, उसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह आजकल लगभग बिस्तर पर ही सीमित हो गया है.

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आतंक कनाडा तक, तीन स्थानों पर फायरिंग की जिम्मेदारी ली

ओटावा कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी का दावा किया है. कनाडा में रविवार देर रात तीन अलग-अलग जगहों पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर ली है. गैंग की तरफ से किए गए पोस्ट में लिखा गया है कि "2 नंबर के धंधे" यानी अवैध कारोबार करने वालों से वसूली की जाती है, मेहनत करने वालों से नहीं. बिश्नोई गैंग की तरफ से पुर्तगाल में रहने वाले फतेह पुर्तगाल ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी ली. उसने सोशल मीडिया पर फायरिंग का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एक शूटर अत्याधुनिक हथियार से फायरिंग करता नजर आ रहा है. वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. कनाडाई पुलिस ने फिलहाल घटनास्थलों को सील कर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, फायरिंग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पुलिस ने इसे संगठित अपराध से जुड़ी बड़ी साजिश के तौर पर देखा है. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कनाडा की सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन घोषित किया था. इसके बाद से ही गैंग सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर अपनी "मौजूदगी" दिखाने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया पर बिश्नोई गैंग ने क्या दावा किया? सोशल मीडिया पर खुद को 'फतेह पुर्तगाल बताने वाले शख्स ने पोस्ट में बताया कि जिन तीन जगहों पर फायरिंग हुई वे हैं – Theshi Enterprise (1254, 110 Ave), House No. 2817 (144 St) और 13049, 76 Ave Unit No.104. दावा करने वाले व्यक्ति ने कहा कि ये सभी स्थान 'नवी तेसी' नामक व्यक्ति के स्वामित्व में हैं, जिसने कथित रूप से "लॉरेंस बिश्नोई गैंग" का नाम लेकर कलाकारों से अवैध वसूली की थी. गैंग के लोगों को परेशान किए जाने का दावा पोस्ट में लिखा गया कि, "हम मेहनत करने वालों से दुश्मनी नहीं रखते, लेकिन जो लोग हमारे लोगों को परेशान करते हैं या गलत तरीके से पैसा वसूलते हैं, हम उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं." उसने यह भी चेतावनी दी कि "अगर किसी ने गलत खबर फैलाई, तो उससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी."

पलक झपकते ही जानें अपनी सेहत, सिर्फ AI चश्मे के साथ!

पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक खास डिवाइस बनाया है, जिसे 'ब्लिंकवाइज' कहते हैं। यह डिवाइस साधारण चश्मे पर लगने से ही काम करने लगता है और एआई की मदद से हेल्थ मॉनिटर करता है। छोटे-छोटे गैजेट्स में शामिल होता एआई भविष्‍य में बहुत बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल होने की उम्‍मीद है। बदलाव की इस बयार में पीछे ना रहें। इस क्षेत्र के बारे में और जानने के लिए NBT Upskill AI से करियर ग्रोथ वर्कशॉप में रजिस्टर करें। 'ब्लिंकवाइज' पलक झपकने के तरीके को देखकर हेल्थ की जानकारी देता है। यह तकनीक ड्राइविंग, ऑफिस वर्क और रोजमर्रा की जिंदगी में थकान, मानसिक दबाव और आंखों की समस्याओं का पता लगाने में मदद कर सकती है। जैसे ही चश्‍मा पहना व्‍यक्‍त‍ि अपनी पलक झपकाएगा, यह बता देगा कि उसकी हेल्थ कैसी है। उसे कोई थकान या मेंटल प्रेशर तो नहीं। ऐसे लेता है हेल्थ अपडेट हम दिन में हजारों बार पलक झपकते हैं। हर पलक झपकना हमारे शरीर और दिमाग की स्थिति के बारे में बताता है। यह थकान, फोकस की कमी या आंखों के सूखेपन जैसी समस्याओं का संकेत देता है। इसे ब्लिंक डायनामिक्स कहते हैं। इसमें पलक झपकने की अवधि, पूरी तरह बंद होना या आधा बंद होना और पलक खुलने-बंद होने का समय की जानकारी होती है। इसे एक छोटे से उदाहरण से समझें- अगर पलकें लंबे समय तक बंद रहती हैं तो यह नींद या थकान का संकेत हो सकता है, जो सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। जबकि बार-बार पलक झपकना आंखों के सूखेपन की बीमारी का लक्षण हो सकता है। हाई-स्पीड कैमरे से ज्यादा तेज पहले पलक झपकने की जानकारी लेने के लिए हाई-स्पीड कैमरे की जरूरत पड़ती थी, जो केवल लैब में इस्तेमाल हो सकते थे। लेकिन ब्लिंकवाइज को चश्मे पर आसानी से लगाया जा सकता है। यह रेडियो सिग्नल्स का इस्तेमाल करके पलक की छोटी-छोटी गतिविधियों को पकड़ता है। यह तकनीक कैमरे से ज्यादा तेज है, क्योंकि कैमरे हर सेकंड 30-60 फ्रेम ही रिकॉर्ड करते हैं, जबकि ब्लिंकवाइज ऐसा हजारों बार कर सकता है। नहीं चाहिए अलग से कोई डिवाइस यह डिवाइस सारी जानकारी को चश्मे पर ही प्रोसेस करता है। इसके लिए किस फोन या क्लाउड सर्वर की जरूरत नहीं होती है। यह एक छोटे से चिप पर काम करता है, जो डाक टिकट से भी छोटा है। यह हल्का है, जिसमें बैटरी लंबे समय तक चलती है। मुमकिन है कि भविष्य में यह तकनीक स्मार्ट चश्मा में उपयोग हो। इस AI डिवाइस में ऊर्जा की खपत भी ज्यादा नहीं है। इस तकनीक को आम लोगों के ल‍िए कब तक लाया जाएगा, अभी जानकारी नहीं है।

शुभांशु शुक्ला की नई जिम्मेदारी, छात्रों को विकसित भारत के निर्माता बनाएंगे

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचने वाले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को केंद्र सरकार के 'विकसित भारत बिल्डाथॉन' का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। यह कार्यक्रम देशभर के स्कूलों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। देश का सबसे बड़ा स्कूल हैकाथॉन 'विकसित भारत बिल्डाथॉन' शिक्षा मंत्रालय और अटल इनोवेशन मिशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा स्कूल हैकाथॉन है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को जोड़ा जा रहा है। इस पहल के तहत 1.5 लाख स्कूलों के एक करोड़ से अधिक छात्र मिलकर नए विचारों, डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करेंगे। चार मुख्य थीम पर काम करेंगे छात्र विद्यार्थियों को चार राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रोजेक्ट बनाने होंगे। इसमें आत्मनिर्भर भारत- स्वावलंबी तकनीक और समाधान विकसित करना,  स्वदेशी- देशी विचारों और नवाचारों को बढ़ावा देना। वोकल फॉर लोकल- स्थानीय उत्पादों, कला और संसाधनों को प्रोत्साहन देना। समृद्धि – सतत विकास और समृद्धि के मार्ग बनाना शामिल है। क्या है कार्यक्रम की रूपरेखा? यह बिल्डाथॉन 23 सितंबर को लॉन्च हुआ था। इसमें पंजीकरण की अंतिम तिथि- 6 अक्तूबर, वहीं इसका लाइव बिल्डाथॉन 13 अक्तूबर को होगा। वहीं विजेताओं की घोषणा दिसंबर महीने में की जाएगी इस दौरान छात्र टीमों में मिलकर अपने विचारों को मूर्त रूप देंगे और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करेंगे। शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, 39 वर्षीय भारतीय वायुसेना अधिकारी और टेस्ट पायलट हैं। उन्होंने हाल ही में एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। यह मिशन इसरो, नासा और एक्सिओम स्पेस के सहयोग से संपन्न हुआ। इस यात्रा के साथ वे आईएसएस तक पहुंचने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने। शिक्षा मंत्रालय के साथ हुई चर्चा शनिवार को शुभांशु शुक्ला ने स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार से मुलाकात की। दोनों के बीच 'विकसित भारत बिल्डाथॉन' की रूपरेखा और उद्देश्य पर बातचीत हुई। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से जुड़ी है, जिसमें विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने की बात कही गई है ताकि वे भविष्य के 'विकसित भारत' के निर्माता बन सकें।