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टूरिज्म को मिलेगा जोरदार बढ़ावा, रीवा से शुरू होंगी देश के महानगरों के लिए फ्लाइट्स

रीवा मध्य प्रदेश के साथ विंध्य क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश की जनता को दीवाली से पहले एक और बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। अब रीवा एयरपोर्ट से रीवा भोपाल के साथ-साथ रीवा से इंदौर के लिए इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट प्रतिदिन शुरू होने जा रही है। इनकी मदद से विंध्य के यात्री अब भारत के महानगरों का सफर आसानी से तय कर सकेंगे। इसके लिए इंडिगो कंपनी रीवा सहित नवी मुंबई में अपना सब स्टेशन शुरू करने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार संभवत अक्टूबर माह के अंत में कनेक्टिंग इंडिगो फ्लाइट की शुरुआत रीवा से हो जाएगी। हवाई यातायात का विंटर शेड्यूल 26 अक्टूबर 2025 से 28 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। इस विंटर शेड्यूल में रीवा से दिल्ली व मुंबई फ्लाइट का भी जिक्र किया गया है। 8 अक्टूबर के बाद नई उड़ान नवी मुंबई के लिए प्रारंभ होगी। इसके साथ ही इंदौर से कनेक्टिंग फ्लाइट रीवा से जाने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। यहां के लिए रहेगी कनेक्टिंग फ्लाइट बता दें कि ऐसे 12 शहर हैं जिन्हें कनेक्टिंग फ्लाइट रीवा से इंदौर जाने वाले यात्रियों को मिलेगी। इससे रीवा जल्द ही देश के सभी प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग से जुड़ जाएगा। रीवा के लोगों के लिए रीवा-पुणे, रीवा-हैदराबाद, रीवा-बैंगलोर, रीवा-गोवा, दिल्ली और मुंबई जाना बेहद सुलभ और आसान हो जाएगा। फ्लाइट शुरू होने से बढ़ेगा निवेश इस संदर्भ में जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश के डेप्युटी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि रीवा इंदौर के बीच शुरू होने वाली इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट से जहां विंध्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर रीवा को मेडिकल हब बनाए जाने का सपना भी साकार हो सकेगा। विंध्यवासियों के लिए यह एक सौगात है। टूरिज्म इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट इन कनेक्टिंग फ्लाइट के चालू होने से रीवा में टूरिज्म इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा। विंध्य क्षेत्र के रीवा में घूमने के लिए कई प्राकृतिक जगहें,जिनमें झरना, नदी शामिल है। इसके साथ ही व्हाइट टाइगर सफारी, कई प्राचीन मंदिर है। फ्लाइट शुरू होने से बाहरी लोगों को यहां पहुंचना आसान हो जाएगा। बता दें अभी तक रीवा एयरपोर्ट से फ्लाइट ओला कंपनी का एक ही विमान भोपाल के लिए उड़ान भरता था। इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट शुरू हो जाने से आप रीवा से इंदौर सहित अन्य महानगरों से रीवा सीधे जुड़ सकेंगे।

मिशन शक्ति 5.0: अभियान से महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसहभागिता में देखने को मिली उल्लेखनीय वृद्धि

एंटी रोमिया स्क्वायड ने 1 लाख से अधिक मंदिर, बाजार, मॉल, पार्कों और भीड़ भाड़ वाले स्थानों की गहन जांच की 37 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा, सकुशल संपन्न हुआ नवरात्रि पर्व    लखनऊ, प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के साथ सुरक्षा का माहौल उपलब्ध कराने के लिए मिशन शक्ति 5.0 अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्र के पहले दिन मिशन शक्ति 5.0 अभियान की शुरुआत की, जो अभी भी पूरे प्रदेश में चल रहा है। इसी के तहत यूपी पुलिस प्रशासन ने अभूतपूर्व अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और जनसहभागिता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। एंटी रोमियो स्क्वायड ने करीब 10 लोग लोगों की जांच, ढाई हजार अभियोग किये गये पंजीकृत मिशन शक्ति अभियान की नोडल ऑफिसर एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एन्टी रोमियो स्क्वायड ने सार्वजनिक स्थलों, मंदिरों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता बढ़ाई। इस दौरान 1,08,292  मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की गहन जांच की गई। अभियान में 9,77,269 व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गई। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिलाओं के प्रति अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए कुल 2,542 अभियोग  पंजीकृत किए गए। वहीं, असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 3,972 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 3,13,924 लोगों को चेतावनी दी गई और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। प्रदेश भर में 53,237 निरोधात्मक कार्रवाइयां  की गयीं। ऐसे में एन्टी रोमियो स्क्वायड द्वारा यह अभियान न केवल नवरात्रि के दौरान सुरक्षा का प्रतीक बना, बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश देने में भी सफल रहा। 37 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा प्रदेश भर में नवरात्रि पर्व के अवसर पर 55,377 पंडालों की स्थापना की गई। सभी पंडालों का पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने निरीक्षण किया, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कमी न रहे। इस दौरान 4,947 रामलीला व मेला स्थलों का भी भ्रमण किया गया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। योगी सरकार की सख्त निगरानी के चलते सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए। एन्टी रोमियो स्क्वाड, पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त मुस्तैदी ने सुनिश्चित किया कि महिलाओं और बालिकाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नवरात्रि के दौरान मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कुल 37,337 अधिकारी एवं कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। इनमें 411 राजपत्रित अधिकारी, 7,999 निरीक्षक/उपनिरीक्षक, 22,547 मुख्य आरक्षी /आरक्षी और 6,380 होमगार्ड/पीआरडी/ एसपीओ आदि शामिल थे, जिन्होंने निरंतर गश्त और निगरानी कर सुरक्षा का वातावरण बनाए रखा। इस सघन तैनाती से पूरे प्रदेश में नवरात्रि और रामलीला पर्व शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए। श्रद्धालु परिवारों ने न केवल त्योहार का आनंद लिया, बल्कि महिलाओं ने भी निर्भीक होकर मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। पूरे प्रदेश में डेढ़ करोड़ से अधिक वितरित किये गये फोल्डर, पंफलेट और पेस्टिंग स्टीकर अभियान की नोडल ऑफिसर ने बताया कि नवरात्र में 39,911 मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिला चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें 20,54,308 लोगों ने प्रतिभाग किया। इसमें 13,53,903 महिला और 7,00,405 पुरुष शामिल हैं। वहीं महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन मुख्यालय द्वारा योगी सरकार की योजनाओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किये जा रहे सराहनीय कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 1,56,91,080 फोल्डर, पंफलेट और पेस्टिंग स्टीकर वितरित किये गये।

गुर्जर-ब्राह्मण विवाद: भाजपा नेत्री पर हमला, पहले भी ब्राह्मण को पीटा गया था

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एकबार फिर दबंगई का मामला सामने आया है। इसबार दबंगों ने भाजपा नेत्री से मारपीट की है। बाल पकड़कर सड़क पर खसीटा भी है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। एक अन्य ब्राह्मण परिवार को पीटा था दरअसल घटना सुखीसेवनिया थाना क्षेत्र के ओमकारा सेवनिया की सिद्ध कॉलोनी की है। दबंग गुर्जर परिवार ब्राह्मण समाज के लोगों को मंदिर जाने से रोकता है। इससे 3 दिन पहले भी एक अन्य ब्राह्मण परिवार को गुर्जर परिवार ने पीटा था। बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा दबंगों ने बिलखिरिया मंडल BJP की महामंत्री शकुन शर्मा के साथ जमकर मारपीट की है। परिवार की महिला पीड़ित का बाल पकड़कर सड़क पर घसीटते हुए नजर आ रहे हैं। बताया जाता है कि शिव मंदिर में कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। किसी पक्ष द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराने की जानकारी नहीं है।

IMD अलर्ट: भोपाल-इंदौर मार्ग के जिलों में बारिश की संभावना

भोपाल अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं वर्षा हो रही है। इसी क्रम में शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक उमरिया में 15, रीवा में नौ, भोपाल में छह, सतना में चार, बैतूल एवं दतिया में तीन और सीधी में एक मिलीमीटर वर्षा हुई। प्रदेश में सबसे अधिक 34 डिग्री सेल्सियस तापमान श्योपुर में दर्ज किया गया। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक रविवार को भी रीवा, शहडोल, जबलपुर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। हालांकि एक सप्ताह बाद मानसून के वापस लौटने की भी संभावना बन रही है। कब होगा मौसम साफ मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि वर्तमान में गहरा कम दबाव का क्षेत्र उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे लगे पश्चिमी झारखंड, दक्षिणी बिहार एवं दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश पर बना है। इसके रविवार तक बिहार में पहुंचने की संभावना है। इस मौसम प्रणाली से लेकर विदर्भ तक एक द्रोणिका बनी हुई है। अरब सागर में बना गहरा अवदाब चक्रवाती तूफान शक्ति में परिवर्तित हो गया है। यह पश्चिम-मध्य अरब सागर की तरफ बढ़ रहा है। इन मौसम प्रणालियों के असर से प्रदेश में कहीं-कहीं वर्षा हो रही है। इस तरह की स्थिति तीन-चार दिन तक बनी रह सकती है। उसके बाद मौसम के साफ होने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि अरब सागर में बना तूफान काफी दूर जा रहा है। उधर, गहरा कम दबाव का क्षेत्र भी बिहार की तरफ बढ़ रहा है। इस वजह से अब धीरे-धीरे वर्षा की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि अभी तीन-चार दिन तक बादल बने रहने और कहीं-कहीं हल्की वर्षा भी हो सकती है। 10 अक्टूबर के आसपास राजस्थान में एक प्रति चक्रवात के बनने के संकेत मिले हैं। इस वजह से 10 अक्टूबर से दक्षिण-पश्चिम मानसून के वापस लौटने की भी संभावना बन रही है। इंदौर में 24 घंटे में चार इंच से अधिक वर्षा उधर पिछले 24 घंटों के दौरान शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक इंदौर में 114.6 (4.48 इंच), सीधी में 68.2, रीवा में 40, सतना में 27, जबलपुर में 19.8, उज्जैन में 10.6 मिमी. वर्षा हुई।

इंदौर में बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं नियम की आदेश अवधि खत्म

इंदौर इंदौर जिले में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता का आदेश अब समाप्त हो गया है। यह आदेश 30 जुलाई को जारी किया गया था और एक अगस्त से 29 सितंबर के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसे आगे नहीं बढ़ाया गया है। नए कलेक्टर ने इस आदेश को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसके चलते अब प्रशासन हेलमेट पहनने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर देगा। पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वालों को ईंधन देने की सख्ती अब समाप्त हो गई है। पहले, जब यह आदेश लागू था, तो पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वाले चालकों की कतारें लग गई थीं। लोग हेलमेट मांगकर या खरीदकर ईंधन लेने आते थे। इस आदेश का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि सड़क हादसों में सिर में चोट लगने से मृत्यु का मुख्य कारण बनता है। सुप्रीम कोर्ट की समिति ने दिया था सुझाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने 29 जुलाई को इंदौर में आयोजित एक बैठक में हेलमेट की अनिवार्यता की बात की थी। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने पेट्रोल पंप संचालकों के लिए आदेश जारी किया था कि वे हेलमेट न पहनने वाले चालकों को ईंधन न दें। इस आदेश के बाद कई पंपों पर कार्रवाई की गई और बगैर हेलमेट के पेट्रोल देने पर पांच पंपों को सील किया गया था। हालांकि अब प्रशासन ने इस सख्ती को समाप्त कर दिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत लोगों को हेलमेट पहनने के लाभ और इसका महत्व बताया जाएगा। हेलमेट को लेकर विवाद भी हुए सरकारी आदेश की अवधि के दौरान हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर कुछ विवाद भी हुए हैं। चंदन नगर क्षेत्र में लक्की पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पेट्रोल न देने पर एक युवक ने पंप कर्मचारी के साथ मारपीट की थी। इसी तरह छोटा बांगड़दा क्षेत्र में भी एक युवक ने कर्मचारियों से हाथापाई की और माचिस की जलती हुई तीली फेंकी थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस में शिकायतें दर्ज की गई थीं। सरकारी कार्यालयों में भी की गई थी सख्ती सरकारी कार्यालयों में भी हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर सख्ती की गई थी। कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में हेलमेट पहनकर आने वाले कर्मचारियों को गुलाब के फूल दिए जाते थे, जबकि बिना हेलमेट आने वालों को कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता था। हालांकि, अब इस सख्ती को भी समाप्त कर दिया गया है। इस प्रकार, इंदौर में हेलमेट की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और हेलमेट पहनने को अपनी आदत बना लें। इस बदलाव के साथ यह देखना होगा कि क्या लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे या फिर प्रशासन को फिर से सख्ती बरतने की आवश्यकता पड़ेगी। सड़क पर सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है। जागरुक किया जाएगा     पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भरवाने के लिए हेलमेट होने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। सभी पंपों पर अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। – शिवम वर्मा, कलेक्टर

इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक पथ संचलन, हजारों स्वयंसेवक एकत्र

इंदौर  एक सदी पूर्व ‘संघे शक्ति कलियुगे’ मंत्र के साथ आरंभ हुई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गौरवशाली यात्रा के एक और प्रसंग का साक्षी आज इंदौर बन रहा है। संघ के एक लाख पचास हजार स्वयंसेवक राष्ट्र प्रथम का भाव लिए पूर्ण गणवेश में कदमताल करते निकल रहे हैं, अलग-अलग इलाकों में यह संचलन शाम तक जारी रहेगा। राष्ट्रवाद, अनुशासन एवं त्याग का अलख जगाते ये पथ संचलन इंदौर के चार जिलों के 34 नगरों से निकाले जा रहे हैं। एक संचलन 30 से 45 मिनट में तय मार्ग पूरा करेगा। समाज में उत्साह, उमंग और ऊर्जा भरने वाला घोष दल भी हर संचलन के साथ होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जहां शताब्दी वर्ष आयोजन हो रहा है वहीं घोष दल भी अपनी यात्रा के 98 वर्ष पूरे कर रहा है। हर संचलन के साथ घोष वादन करते दल भी हैं। संचलन में सह सरकार्यवाह अरुणकुमार के अतिरिक्त मध्य क्षेत्र के कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध, प्रांत प्रचारक राजमोहन, प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, प्रांत के सहकार्यवाह श्रीनाथ गुप्ता सहित कई बड़े पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। पथ संचलन से पहले उद्बोधन एवं शारीरिक प्रकट कार्यक्रम भी हुए। इसमें समाज के विशिष्टजन के साथ ही अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े लोग एवं मातृशक्तियां भी शामिल हुईं। राष्ट्र जागरण के लिए पढ़ाएंगे ये पांच सोपान     नागरिक अनुशासन में ट्रैफिक नियमों के साथ स्वच्छता, टैक्स चुकाना, अतिक्रमण नहीं करना, समय का पालन, सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण सहित 14 बिंदुओं की सीख देंगे।     घर में सभी जाति वर्ग के बंधुओं से समानता का व्यवहार, अपने घर में महापुरुषों के चित्र एवं उनकी विशेष पर्व में सहभागिता करना है।     प्रति वर्ष एक पौधा लगाना, जल पुनर्भरण करना, घर की डिजाइन ऐसी रखना कि प्रकाश एवं हवा अवरुद्ध न हो, डिस्पोजल, कागज का उपयोग न करना सहित 14 अन्य बिंदु।     स्वदेशी जीवनशैली : वेशभूषा में भारतीय संस्कार, पिज्जा बर्गर की बजाए ताजा भारतीय भोजन खाना, घर में मातृभाषा में संवाद सहित 12 अन्य बिंदु।     परिवार प्रबोधन : त्योहार भारतीय तिथि अनुसार मनाएं, दादा-दादी, नाना-नानी से आत्मीय संवाद सहित अन्य बिंदु।  

छिंदवाड़ा हादसा: डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, दवा कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

छिंदवाड़ा किडनी खराब होने से बच्चों की मौत के मामले में श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स और डॉक्टर प्रवीण सोनी पर हत्या का मुकदमा पुलिस ​ने दर्ज किया है। छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र राजपाल चौक से डॉक्टर प्रवीण सोनी को देर रात एसपी की स्पेशल टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडेय ने बताया कि परासिया बीएमओ डॉक्टर अंकित सहलाम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ​एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की ‘एडल्ट्रेशन ऑफ ड्रग’ (दवाओं में मिलावट) और ‘हत्या की कोटि में आने वाले अपराधिक मानव वध’ जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इन धाराओं में अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। छिंदवाड़ा जिले में एक कफ सिरप त्रासदी ने हड़कंप मचा दिया है। संदिग्ध कफ सिरप के सेवन से अब तक 14 मासूम बच्चों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक 10 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। प्रयोगशाला रिपोर्ट में सिरप में हानिकारक रसायन पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से दो कफ सिरप पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगा दिया है और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ज़हरीले कफ सिरप का मामला: मध्य प्रदेश में डॉक्टर गिरफ़्तार, दवा कंपनी पर एफआईआर

भोपाल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कथित तौर पर कफ सिरप पीने की वजह से एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार अब ऐक्शन मोड में है। 'कोल्डरिफ' कफ सिरप को बैन किए जाने के बाद छिंदवाड़ा जिले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि मारे गए अधिकतर बच्चों को इसी डॉक्टर ने वह कफ सिरप लिखी थी। परासिया में सरकारी डॉक्टर प्रवीण सोनी पर आरोप है कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर रहे थे और उन्होंने निजी क्लिनिक में यह दवा लिखी थी। राज्य सरकार ने दवा कंपनी के खिलाफ भी मकुदमा दर्ज कराया है। बाल रोग विशेषज्ञ प्रवीण सोनी परासिया में सरकारी डॉक्टर हैं। आरोप है कि वह यहां एक निजी क्लिनिक भी चला रहे थे। बताया जा रहा है कि जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें से अधिकतर को सर्दी-खांसी जैसी शिकायतों के बाद डॉ. प्रवीण सोनी के क्लिनिक में लाया गया था और उन्होंने अन्य दवाओं के साथ 'कोल्डरिफ' लेने की सलाह दी थी। दवा में एक खतरनाक रसायन की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने इसे पूरे राज्य में बैन कर दिया है। परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अंकित सहलाम की शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर सोनी और कोल्डरिफ कफ सिरप को बनाने वाली कंपनी 'श्रीसन फार्मास्युटिकल्स' के खिलाफ केस दर्ज कराया है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट की धारा 27(ए) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 और 276 के तहत केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि दवा के नमूनों में 48.6 प्रतिशत 'डाईथिलीन ग्लाइकॉल' पाया गया, जो एक जहरीला रसायन है। मध्यप्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा में जिन 14 बच्चों की मौत हुई है उन्हें शुरुआत में सर्दी-खांसी और बुखार जैसे साधारण लक्षण थे। आरोप है कि कफ सिरप लेने के बाद बच्चों की किडनी फेल हो गई और उनकी मौत हो गई। 6 बच्चों का अब भी इलाज चल रहा है। मृतकों में सबसे अधिक 11 परासिया उपमंडल के हैं। दो छिंदवाड़ा शहर के और एक चौरई तहसील के थे। बैन के साथ CM का आदेश- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कोल्डरिफ को बैन करने का आदेश देते हुए सख्त ऐक्शन की बात कही। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।'  

बार काउंसिल चुनाव का महंगा सफर: MP में अब 1.25 लाख फीस जमा करना होगी, रिफंड नहीं

जबलपुर मध्य प्रदेश के सवा लाख से अधिक वकीलों का पंजीयन करने वाली सर्वोच्च संस्था एमपी स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ना अब आसान नहीं रहा। देश के वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल आफ इंडिया ने एक आदेश के जरिए चुनाव नामांकन शुल्क में सीधे पांच गुना बढ़ोत्तरी कर दी है, जो कि वापस नहीं होगा। इससे प्रत्याशियों में खासा रोष है। इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठ रहे है। पहले एसबीसी का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन फीस महज 25 हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक लाख पच्चीस हजार रुपये कर दिया गया है। राशि की वापसी न होने का भी विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को एक आदेश जारी करके स्टेट बार काउंसिल के चुनावों के लिए सात सदस्यीय चुनाव समितियां गठित करके 31 जनवरी, 2026 तक सभी चुनाव कराने के निर्देश बीसीआई को दिए थे। इसी आदेश के बाद बीसीआई द्वारा स्टेट बार काउंसिल को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि लॉ ग्रेजुएट्स के नामांकन के लिए पहले फीस 16 हजार रुपये थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर 600 रुपये कर दिया। स्टेट बार काउंसिल की आय घटने के कारण अब स्टेट बार काउंसिल के पास चुनावी खर्च के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं बच रही। इसके लिए जरूरी है कि नामांकन की फीस 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख 25 हजार रुपये की जाए। मप्र स्टेट बार काउंसिल की मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल अगले माह पूरा होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जनवरी 2026 तक नई कार्यकारिणी के चुनाव कराए जाने हैं। वेकेशन में प्रत्याशियों ने शुरू किया जनसंपर्क आगामी कार्यकारिणी को लेकर चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने जहां नामांकन शुल्क बढ़ाये जाने पर रोष व्यक्त किया है तो वहीं अपनी जोर आजमाइश भी शुरू कर दी है। दशहरा पर्व पर पड़ी छुट्टियों पर अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों ने वकीलों के घरों में पहुंचकर जन संपर्क करना शुरू कर दिया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी मतदाताओं से अपने पक्ष में मत का प्रयोग करने की अपील की जा रहीं है। शुल्क बढ़ाया जाना अनुचित : सैनी एसबीसी के वाइस चेयरमेन आरके सिंह सैनी ने कहा है कि चुनाव में नामांकन शुल्क सीधे पांच गुना बढ़ाया जाना अनुचित है। इसकों लेकर एसबीसी ने बीसीआई को पत्र भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जल्द ही बीसीआई की सामान्य सभा की बैठक होने वाली है, जिसमें संभवत: शुल्क घटाने पर विचार विमर्श होगा।

प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों पर मान्यता संकट, छात्रों के लिए बड़ी चुनौती

भोपाल मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन कालेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन कालेजों ने न तो फैकल्टी नियुक्त की और न ही जरूरी सुविधाएं पूरी कीं। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में इन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंत्री और नेताओं के जिलों में ही कॉलेजों की खराब स्थिति     रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उनमें रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं।     एनएसयूआई का आरोप है कि इनमें से कई कॉलेज कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं।राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, लेकिन वे भी अपने जिलों के कॉलेजों की स्थिति सुधार नहीं पाए।   कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। एनएसयूआई ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन तक कर दिया है, जो नर्सिंग शिक्षा के साथ खिलवाड़ है। गरीब छात्राओं का भविष्य संकट में     एनएसयूआई ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी लापरवाही के कारण हजारों छात्राओं का भविष्य अधर में है। जो छात्राएं निजी कालेजों की ऊंची फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, वे अब प्रवेश से वंचित रह जाएंगी।     एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।     विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की मान्यता रुकी हुई है। इन कॉलेजों में करीब 1000 से ज्यादा सीटें हैं, जो अब खाली रह जाने का खतरा है।