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चीन ने Rare Earths को हथियार बनाया, अमेरिका के लिए जोखिम बढ़ा – जानें पूरा हाल!

बेजिंग 
चीन ने गुरुवार को रेयर अर्थ्स (दुर्लभ खनिज तत्वों) और उनसे जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लागू करने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब इस महीने के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब विदेशी कंपनियों को उन वस्तुओं के निर्यात के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी, जिनमें चीन से प्राप्त रेयर अर्थ तत्वों की थोड़ी भी मात्रा शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि रेयर अर्थ्स की माइनिंग (खनन), स्मेल्टिंग (गलन), रीसाइक्लिंग और मैग्नेट निर्माण से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर भी परमिट प्रणाली लागू की जाएगी।

दुनिया में रेयर अर्थ्स के उत्पादन में चीन का दबदबा है। यह वैश्विक रेयर अर्थ्स खनन का लगभग 70 प्रतिशत और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है। ये खनिज जेट इंजन, रडार सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों, कंप्यूटरों और मोबाइल फोन जैसे उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। रेयर अर्थ्स को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। जैसे-जैसे अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाए हैं, बीजिंग ने भी इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण को और सख्त कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि नए नियंत्रण “राष्ट्रीय सुरक्षा की बेहतर रक्षा” के लिए लगाए जा रहे हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि चीन से प्राप्त रेयर अर्थ्स या तकनीक का इस्तेमाल “संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों” में न हो।
 
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी कंपनियां और व्यक्ति चीन से रेयर अर्थ्स तकनीक को सैन्य या अन्य संवेदनशील उपयोगों के लिए बाहर भेज रहे हैं, जिससे “राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान” पहुंचा है।रेयर अर्थ्स की आपूर्ति पर चीन की सख्ती से अमेरिका और अन्य देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को झटका लग सकता है। इन खनिजों के बिना इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, गाड़ियों और रक्षा उपकरणों का निर्माण प्रभावित हो सकता है। एशिया ग्रुप के विशेषज्ञ जॉर्ज चेन के अनुसार, “रेयर अर्थ्स आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच वार्ता का अहम हिस्सा बने रहेंगे। दोनों देश स्थिरता चाहते हैं, लेकिन असली सौदा अगले साल ही हो पाएगा।”

यह कदम उस समय उठाया गया है जब ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) फोरम के दौरान तय है। माना जा रहा है कि चीन का यह फैसला वार्ता से पहले दबाव की रणनीति का हिस्सा है।इससे पहले अप्रैल में चीन ने सात रेयर अर्थ तत्वों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था, जब ट्रम्प प्रशासन ने चीन सहित कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।हालांकि, जून में बीजिंग ने कुछ निर्यात परमिट जारी किए और प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया था।विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक रूप से भी अहम है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए आपूर्ति संकट गहरा सकता है और वैश्विक तकनीकी उद्योग पर असर पड़ सकता है।

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