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Aastha Pandey

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Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी

CBSC BOARD

CBSE ने 10वीं कक्षा के लिए बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत अब बोर्ड परीक्षा दो सत्रों में होगी। नए मॉडल में पहला सत्र सभी छात्रों के लिए अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा सत्र केवल सुधार, पुनः प्रयास या बेहतर स्कोर पाने का विकल्प देगा। खास बात यह है कि दूसरे सत्र में छात्र अधिकतम तीन विषयों की ही परीक्षा दे पाएंगे, जिससे अनावश्यक दबाव कम करने और स्कोर सुधारने का मौका मिलेगा।

इस नई परीक्षा संरचना का उद्देश्य छात्रों को एक लचीला, तनाव-मुक्त और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण देना है। वहीं 12वीं के लिए फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी—यानी एक ही मुख्य परीक्षा सत्र। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्रों की प्रवेश परीक्षाओं और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया में एक समान टाइमलाइन की आवश्यकता होती है।

10वीं में दो-सेशन परीक्षा का ढांचा

पहले सत्र और दूसरे सत्र की विशेषताएं

  • पहले सत्र (Phase 1) सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा।
  • दूसरे सत्र (Phase 2) में छात्र अधिकतम तीन विषयों का चयन कर सकते हैं।
  • दूसरे सत्र में केवल उन्हीं विषयों में सुधार या पुनः प्रयास संभव होगा जिनमें बाह्य मूल्यांकन (external assessment) 50 % या उससे अधिक है।
  • जैसे-मान लीजिए छात्र पहले सत्र में पाँच या छह पेपर दे चुका है, तो सारे पेपर दूसरे सत्र में दोबारा देने का अवसर नहीं मिलेगा।

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परिणाम, सुधार और मार्कशीट

  • पहले सत्र का रिजल्ट अप्रैल माह तक जारी होगा।
  • दूसरे सत्र के परिणाम जून तक जारी होंगे।
  • मार्कशीट में वह अंक दर्ज होंगे जो दोनों सत्रों में से उच्चतम होंगे (Best Score)। उदाहरण के लिए, यदि Maths में पहले सत्र में 60 अंक आए और दूसरे में 55, तो 60 अंक दर्ज होंगे।
  • यदि छात्र पहले सत्र में तीन या अधिक विषयों से फेल हुआ हो, तो उसे दूसरे सत्र में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलेगा और उसे अगली वर्ष मुख्य परीक्षा में बैठना होगा।

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12वीं की परीक्षा में ब बदलाव नहीं

12वीं की परीक्षा व्यवस्था अभी एक-सत्र वाली ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्र अक्सर JEE Main, NEET जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं और उन्हें उसी सत्र में परिणाम चाहिए।

छात्रों-अभिभावकों के लिए सुझाव

  • पहले सत्र को मुख्य परीक्षा की तरह तैयार करें। दूसरे सत्र को सुधार का अवसर समझें न कि मुख्य परीक्षा जैसा विकल्प।
  • अगर पहले सत्र में किसी विषय में कमजोर रहें, तो उसमें दूसरे सत्र में सुधार करना संभव है लेकिन तीन विषयों तक ही
  • परीक्षा की पूरी पाठ्य-सामग्री दोनों सत्रों में समान होगी — सिलेबस कम नहीं होगा।
  • परिणाम आने के बाद दूसरे सत्र में आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए समय पर सूचना देखें।
  • स्कूल-प्रिंसिपल्स और अध्यापकों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें जैसे समय-सीमा, परीक्षा-निर्देश आदि।

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क्यों आया यह नया मॉडल?

  • तनाव करने के लिए: एक ही साल में दो मौके मिलेंगे, एक साल बंदर-बांट इंतजार नहीं करना होगा।
  • बेहतर प्रदर्शन का अवसर: यदि पहले सत्र में कमजोर हुआ, तो दूसरा मौका मिलेगा।
  • पारदर्शिता और लचीलापन: “सप्लीमेंट्री” मॉडल से हटकर सुधार की व्यवस्था लाया गया है।
  • प्रमुख बिंदु सार में
  • 10वीं: दो सत्र — पहला अनिवार्य, दूसरा विकल्पात्मक।
  • दूसरे सत्र में अधिकतम 3 विषयों का चयन संभव।
  • 12वीं: एक-सत्र मॉडल जारी।
  • मार्कशीट में बेहतर अंक दर्ज होंगे।
  • पहले सत्र में 3 या अधिक विषयों में फेल होने पर दूसरी सत्र में बैठने का मौका नहीं मिलेगा।
  • समय-सीमा, आवेदन प्रक्रिया, स्कूल-कार्यक्षमता आदि पर स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं।

FAQs

Q1. क्या मैं दूसरे सत्र में सभी विषयों को दोबारा दे सकता हूँ?
नहीं। 10वीं में दूसरे सत्र में केवल अधिकतम तीन विषयों के लिए चयन कर सकते हैं। उन विषयों में ही सुधार संभव है जिनका बाह्य मूल्यांकन 50 % या उससे ज्यादा है।

Q2. अगर पहले सत्र में तीन से ज़्यादा विषयों में फेल हो गया तो क्या होगा?
यदि छात्र तीन या अधिक विषयों में पहले सत्र में अनुपस्थित रहा या फेल हुआ हो, तो उसे दूसरे सत्र में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलेगा। उसे अगले वर्ष मुख्य परीक्षा में शामिल होना होगा (Essential Repeat)।

Q3. क्या 12वीं के छात्रों को भी दूसरा सत्र मिलेगा?
इस समय 12वीं के लिए एक-सत्र मॉडल ही जारी रहेगा। दूसरा सत्र फिलहाल नहीं होगा क्योंकि 12वीं के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े होते हैं।

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