जानलेवा कोडिन कफ सिरप कांड में ईडी का अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन सामने आया है। सूत्रों के अनुसार करीब 1000 करोड़ रुपये के अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके बाद यूपी सरकार ने मामले की गंभीरता देखते हुए एसआईटी गठित कर दी। शुक्रवार सुबह सात बजे झारखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात में 25 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की गई।
अब तक 32 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 18 अक्टूबर को सोनभद्र से एक ट्रक भी पकड़ा गया था। मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल फरार बताया जा रहा है, उसके पिता गिरफ्तार हैं। रांची स्थित शैली ट्रेडर्स और तुपुदाना गोदाम से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। ईडी को आगे और बड़े खुलासों की उम्मीद है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश भर में फैल चुके अवैध कफ सिरप (illegal cough syrup) रैकेट पर बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने शुक्रवार की सुबह करीब 7:30 बजे उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है और इसे जांच का सबसे बड़ा चरण माना जा रहा है।
यह अंतर-राज्यीय नेटवर्क नकली या बिना लाइसेंस वाले कोडीन युक्त कफ सिरप (codeine cough syrup) को बड़ी मात्रा में खरीदकर, बैंकों और फर्जी कागजी रसीदों के जरिए अवैध रूप से बेच रहा था। इसके बदले करोड़ों रुपये की कमाई की गई — जिसकी राशि करीब ₹1000 करोड़ आंकी जा रही है।
कैसे हुआ खुलासा
इस मामले की शुरुआत अलग-अलग जिलों में दर्ज 30 से अधिक FIRs और पुलिस, FSDA तथा अन्य एजेंसियों के छापों के बाद हुई। इन एफआईआरों में यह सामने आया कि कोडीन आधारित दवाओं को बिना लाइसेंस, नकली रसीदों और फर्जी ढांचे का उपयोग कर अवैध रूप से स्टोर, ट्रांसपोर्ट और बेच दिया जा रहा था। ईडी ने इन सभी सबूतों के आधार पर ECIR दर्ज कर दी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की।
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कहां-कहां छापेमारी हुई
ईडी की टीम ने निम्न प्रमुख जिलों और शहरों में छापा मारा:
लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
इन स्थलों पर व्यापारिक गोदामों, ऑफिसों और चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल के परिसरों में दस्तावेज, मोबाइल और डिजिटल सामग्री जब्त की गई है, जो अवैध कारोबार के वित्तीय लेन-देन को उजागर कर सकते हैं।
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आरोपी और गिरफ्तारीें
अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें व्यापारी, एजेंट और नेटवर्क के अन्य सदस्य शामिल हैं। सबसे बड़ा आरोपी शुभम जायसवाल अभी फरार है और उसे पकड़ने के लिए इनाम घोषित किया गया है। उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
पुलिस की जांच के मुताबिक, नेटवर्क कोडीन सिरप को बड़े पैमाने पर बांग्लादेश और नेपाल तक भी तस्करी कर रहा था, जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर बहुत बड़ी समस्या खड़ी हुई है।
क्या है कोडीन वाला कफ सिरप
कोडीन एक नियंत्रित दवा होती है, जिसका डाक्टरी उपयोग दर्द कम करने या खांसी को शांत करने में होता है; लेकिन उसे नैक्रोटिक (नशीला) रूप में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। नशीले रूप में यह लत और स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है, जिस कारण यह प्रतिबंधित दवाओं की श्रेणी में आता है।
आगे क्या हो सकता है
ईडी ने कहा है कि यह जांच अभी भी चल रही है। बैंक रिकॉर्ड, GST विवरण, लेन-देन दस्तावेज और रसीदों की जांच जारी है। इससे नेटवर्क की वित्तीय जड़ें और रूट सामने आएंगे और और भी आरोपियों को तलब किया जा सकता है।
FAQs –
- कफ सिरप कांड क्या है?
कफ सिरप कांड एक अवैध नेटवर्क है जिसमें कोडीन युक्त कफ सिरप को लाइसेंस और रिकॉर्ड के बिना खरीदा-बेचा, ट्रांसपोर्ट और नेटवर्क के जरिए फैलाया गया। इसके खिलाफ पुलिस और ईडी ने व्यापक छापेमारी और आरोपियों पर मामले दर्ज किए हैं।
- ईडी की छापेमारी क्यों हुई?
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की, क्योंकि यह अवैध कारोबार बड़ी वित्तीय कमाई और हवाला/फर्जी रसीदों से जुड़ा हुआ पाया गया। इसी वजह से 3 राज्यों में 25 स्थानों पर छापेमारी की गई।
- मुख्य आरोपी कौन है और उसकी स्थिति क्या है?
मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अभी फरार है और उस पर पुलिस इनाम भी घोषित कर चुकी है। उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और अन्य कई सदस्य पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच अभी जारी है।













