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बिहार में सरकारी नौकरी की बड़ी खबर: 4654 पदों पर भर्ती, आवेदन की तारीख सामने

पटना बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने वर्ष 2025 में 4654 पदों के लिए भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती के तहत उम्मीदवारों का चयन विभिन्न महत्वपूर्ण पदों के लिए किया जाएगा, जिनमें जूनियर इंजीनियर (Junior Engineers), होस्टल मैनेजर (Hostel Manager), कार्य निरीक्षक (Work Inspector), और दन्त स्वास्थ्य विज्ञानी (Dental Health Specialist) शामिल हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। 2747 पदों पर भर्ती बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विषयों में जूनियर इंजीनियरों के 2747 रिक्त पदों के लिए BTSC JE भर्ती अधिसूचना 2025 आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर पदों के लिए कुल 2747 रिक्तियां उपलब्ध हैं, जिनमें सिविल विभाग के लिए 2591, मैकेनिकल विभाग के लिए 70, और इलेक्ट्रिकल विभाग के लिए 86 रिक्तियां शामिल हैं। बीटीएससी जेई के लिए ऑनलाइन आवेदन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.btsc.bihar.gov.in पर 15 अक्तूबर 2025 से शुरू होंगे, और उम्मीदवारों को अपने आवेदन 15 नवंबर 2025 तक जमा करने होंगे। BTSC JE (Electrical) Notification 2025 BTSC JE (Mechanical) Notification 2025 BTSC JE (Civil) Notification 2025 कार्य निरीक्षक के 1,114 पदों पर भर्ती बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में 1,114 कार्य निरीक्षक (कार्य सहायक) पदों पर भर्ती के संबंध में अधिसूचना जारी की है। फिलहाल केवल रिक्तियों की कुल संख्या और पंजीकरण तिथियां घोषित की गई हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 10 अक्तूबर 2025 से 10 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार BTSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। छात्रावास प्रबंधक की 91 नौकरियां बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में छात्रावास प्रबंधक (Hostel Manager) के 91 पदों पर भर्ती के संबंध में संक्षिप्त अधिसूचना जारी की है। बीटीएससी छात्रावास प्रबंधक भर्ती 2025 के लिए विस्तृत अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार 10 अक्तूबर 2025 से www.btsc.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और आवेदन 10 नवंबर 2025 से पहले जमा करना होगा। दन्त स्वास्थ्य विज्ञानी के 702 पद बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग, पटना ने दन्त स्वास्थ्य विज्ञानी के पदों पर भी भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती के लिए उम्मीदवार 10 अक्तूबर से आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट btsc.bihar.gov.in के माध्यम से 10 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान का लक्ष्य कुल 702 रिक्त पदों को भरना है। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा सहित विस्तृत पात्रता मानदंड विस्तृत अधिसूचना में किए जाएंगे।

कांग्रेस के परफॉर्मेंस का मास्टरमाइंड: अशोक गहलोत का जादू कहां-कहां चला?

जयपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य पर्यवेक्षक बनाया है। आगामी दिनों में गहलोत बिहार जाकर चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। ये पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी राज्य में मुख्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया हो। आइए जाते हैं अशोक गहलोत को बिहार से पहले किस-किस चुनावी राज्य में जिम्मेदारी दी गई और वहां कांग्रेस की प्रदर्शन कैसा रहा… अशोक गहलोत के साथ इन नेताओं को भी दी गई बिहार की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और लोकसभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षकनियुक्त किया है। अशोक गहलोत पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है। इससे पहले भी पार्टी ने उन्हें कई चुनावी राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी दी है। आइए जानते हैं अशोक गहलोत का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है… हरियाणा और महाराष्ट्र में सिमट गई कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत, अजय माकन और प्रताप सिंह बाजवा को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया था। गहलोत के तमाम प्रयासों के बावजूद सत्ताधारी दल भाजपा को कांग्रेस मात नहीं दे सकी। कांग्रेस को 90 में से केवल 37 सीटों पर जीत मिली। उधर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गहलोत के साथ जी परमेश्वर मुंबई और कोंकण जोन का पर्यवेक्षक बनाया गया था। पर्यवेक्षक होते हुए गहलोत अपना जादू नहीं दिखा सके। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सत्ता से बाहर है। गुजरात में भी नहीं चली अशोक गहलोत की रणनीति गुजरात विधानसभा चुनाव में भी अशोक गहलोत को पार्टी ने जिम्मेदारी दी। अशोक गहलोत सहित राजस्थान के कई नेताओं ने गुजरात में डेरा डाल रखा था। अशोक गहलोत ने कई विधानसभा क्षेत्रों में पैदल मार्च करके कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की। लेकिन शायद अशोक गहलोत की रणनीति काम नहीं आई और गुजरात में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में नहीं आ सकी। राजस्थान में भी करिश्मा नहीं दिखा सके गहलोत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है, लेकिन उनके नेतृत्व में हुए चुनाव में वे कभी जादू नहीं दिखा सके। गहलोत जब पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, तब वे विधायक नहीं थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके लिए जोधपुर की सरदारपुरा सीट को खाली किया गया, जहां हुए उपचुनाव में वे विधायक निर्वाचित हुए। तब से वे लगातार सरदारपुरा से विधायक बनते रहे हैं। राजस्थान में भी कभी कांग्रेस की सत्ता रिपीट नहीं करा सके अशोक गहलोत पहली बार 1998 से 2003 तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद गहलोत सरकार को रिपीट नहीं करा सके। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 57 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। वर्ष 2008 से 2013 तक गहलोत दूसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में भी वे कांग्रेस की सरकार को रिपीट कराने में कामयाब नहीं रहे। वर्ष 2018 से 2023 तक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन फिर वे सत्ता को बरकरार रखने में कामयाब नहीं हुए।

बिहार सरकारी नौकरियां 2025: विभिन्न विभागों में 5464 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

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पटना बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सरकार कौन बनाएगा, यह नवंबर में मतदाता तय करेंगे। फिलहाल, मौजूदा सरकार ने चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 5384 स्थायी नौकरियों और संविदा आधारित 80 पदों पर नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। बिहार कैबिनेट की बैठक में इन नौकरियों के लिए पद सृजन की सहमति हो गई है। विभाग किन पदों पर कैसे काम लेंगे, यह रूपरेखा बनी हुई है। अब इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए संबंधित आयोगों के पास रिक्तियों का विवरण भेजा जाना है। पहले ही कई विभागों के पास रिक्तियों का विवरण पहुंचा हुआ है। कुछ पदों को बढ़ाए जाने के कारण पहले से घोषित परीक्षाओं के लिए भी रिक्तियां बढ़ाई गई हैं। अब नव-सृजित इन पदों की फाइल भी बढ़ गई है। कृषि-वन-पशु से है वास्ता, तो यह पद देखें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों हेतु कुल 1491 अतिरिक्त पदों के सृजन की स्वीकृति मिली है। बिहार राज्य के अंतर्गत वन प्रमंडलों के पुनर्गठन के साथ विभाग को विभिन्न कोटि के कुल 927 पदों पर नियुक्ति करनी है। इसके लिए पद सृजन की स्वीकृति मिल गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में ही सचिवालय एवं संलग्न कार्यालय के सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न कोटि के कुल 78 अतिरिक्त पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है। इसके अलावा, संजय गांधी जैविक उद्यान पटना के सुचारु संचालन हेतु स्थायी स्थापना अंतर्गत विभिन्न कोटि के कुल 172 अतिरिक्त पदों के सृजन की स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र के संचालन के लिए विभिन्न कोटि के कुल 45 पदों को कैबिनेट ने स्वीकृत किया है। कृषि विभाग ने बिहार कृषि विभागीय आशुलिपिक संवर्ग के पूर्व स्वीकृत पद का समर्पण/ प्रत्यार्पण करते हुए 218 नए पद सृजन की स्वीकृति राज्य कैबिनेट से ली है। गव्य विकास निदेशालय अंतर्गत नौ जिलों में नए जिला गव्य विकास कार्यालय की स्थापना के फैसले के साथ इसके लिए विभिन्न कोटि के कुल 72 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। बिहार वानिकी महाविद्यालय एवं शोध संस्थान मुंगेर में आवश्यकता आधारित विभिन्न कोटि के 26 पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है। अनुसंधान-आपदा प्रबंधन में रुचि है तो यह पद साइबर इकाई को आर्थिक अपराध इकाई से अलग करने पर गठित हो रहे 'साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई' के संचालन हेतु विभिन्न कोटि के 23 नए पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इकाई के बाकी पद विभागीय स्थानांतरण से भरे जाएंगे। बिहार अग्निशमन सेवा नियमावली-2021 के नियम-4 (ख) में निहित प्रावधानों के तहत बिहार अग्निशमन सेवांतर्गत कनीय सेवा संवर्ग (अराजपत्रित, वर्दीधारी) के विभिन्न कोटि के 2075 अतिरिक्त पदों के सृजन पर बिहार कैबिनेट ने मुहर लगाई है। इसके अलावा, बिहार सचिवालय सेवा/बिहार सचिवालय आशुलिपिकीय सेवा/बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा तथा कार्यालय परिचारी/परिचारी (विशिष्ट) संवर्ग के तहत अग्निशमन सेवाओं के विभिन्न कोटि के 42 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिली है। कैबिनेट ने राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) में फ़ॉलोवर श्रेणी के अंतर्गत पूर्व से स्वीकृत 177 पदों के अतिरिक्त कुल 73 नए पदों के सृजन की स्वीकृति भी दी है। सामान्य अभिरुचि के लिए इन पदों पर रखें नजर संग्रहालय निदेशालय (मुख्यालय) तथा अन्य राजकीय संग्रहालयों को सुचारु रूप से चलाने हेतु न्यूनतम आवश्यकता धारित विभिन्न कोटि के कुल 139 नए पदों का सृजन किया गया है। उधर, निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद जिला न्यायाधीश कोटि से, उप निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद असैनिक न्यायाधीश (वरीय कोटि) से एवं सहायक निबंधक (कोर्ट एवं केस मैनेजमेंट) का 01 (एक) पद असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि) कोटि से, यानी कुल 03 (तीन) पदों के सृजन की स्वीकृति भी मिली है।   संविदा के आधार पर यह नियुक्तियां घोषित मंत्रिपरिषद् ने जिन पदों को स्पष्ट रूप से संविदा आधारित बताया है, वहां रिटायर्ड कर्मियों के लिए ज्यादा संभावनाएं हैं। जैसे, शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित सरकारी विद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों/कार्यालयों की भूमि का सत्यापन, भूमि के विवरण का संकलन एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियों के क्रियान्वयन में सहयोग हेतु तीन वर्षों के लिए संविदा के आधार पर सेवानिवृत्त लिपिक के 40 पद एवं बेल्ट्रॉन से संविदा आधारित कंप्यूटर ऑपरेटर के 40 पद के सृजन की स्वीकृति मिली है। इसी तरह, बिहार राज्य के विधि विज्ञान प्रयोगशाला/क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं/जिला चलंत विधि विज्ञान इकाइयों के लिए रिक्त पदों के विरुद्ध निर्धारित मानक के आधार पर सहायक निदेशक (राजपत्रित) तथा वरीय वैज्ञानिक सहायक (अराजपत्रित) की सेवा अस्थायी रूप से संविदा के आधार पर लेने की भी स्वीकृति मिली है।

BJP का नया प्लान: बिहार में लागू होगा गुजरात मॉडल, कई नेताओं की टिकट पर संकट

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पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी से निबटना है. जनता के बीच लंबे समय से जीत रहे विधायकों और मंत्रियों को लेकर बेहद नाराजगी है. इस चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने जा रही है. गुजरात की तरह बिहार में भी मौजूदा कई मंत्रियों और विधायकों का टिकट काटा जायेगा. ऐसे करीब 30 विधायकों की सूची तैयार की गयी है, जिन्हें पार्टी इस बार बेटिकट कर सकती है. वोटरों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था. नीतीश कुमार की कम सीटें आने के बाद भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहा है. भाजपा के पास अभी 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री हैं. कई सीटों पर इस बार स्थानीय विधायक के प्रति विरोधी लहर पहले के मुकाबले मजबूत है. भाजपा ऐसे विधायकों की जगह नये चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है. वैसे जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. बिहार में भाजपा एक वरीय नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की योजनाओं के कारण जनता में पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय विधायकों से जनता नाराज है. मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है. गुजरात की तरह कई कद्दावर नेता होंगे बेटिकट पार्टी का जनाधार बढ़ाने और एंटी इनकंबेंसी को साधने के लिए अमित शाह लगातार बिहार की टीम के साथ विचार मंथन कर रहे हैं. उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा बिहार में भी गुजरात मॉडल लागू कर सकती है. भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में इसपर गंभीरता से विचार-विर्मश हुआ है. भाजपा ने 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव किया था. उसी तर्ज पर बिहार में भी एक व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. लगातार सातवीं बार गुजरात जीतने के लिए भाजपा ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया था. साथ ही अपने 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काट दिया था, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल थे. बिहार में भी भाजपा इसी रास्ते सत्ता में वापसी का प्लान बना रही है.