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CM साय शामिल हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यशाला में, भूजल संकट पर किया विचार

रायपुर राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में गुरुवार को आयोजित जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जल संरक्षण आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सुजलाम भारत अभियान के माध्यम से जल संसाधन, संरक्षण और एकत्रीकरण की दिशा में सार्थक कार्य हो रहे हैं। यह अभियान केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बनना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस कार्यशाला से जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए विचार और अनुभव साझा होंगे, जिससे यह कार्यक्रम आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भी जल संरक्षण और पुनर्भरण (रीचार्ज) के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। पिछले वर्ष जब प्रदेश के कई डैम और जलाशयों का स्तर चिंताजनक रूप से घट गया था, तब सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए टैंकरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित की थी। CM साय ने आगे बताया कि इस वर्ष भगवान की कृपा से समय पर और पर्याप्त बारिश हुई, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर सुधरा है। उन्होंने कहा कि जल का दोहन लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में अब यह समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वह जल संरक्षण को केवल नारा नहीं, बल्कि आंदोलन का स्वरूप दे। मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हमें गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।” कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, जल संरक्षण कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने जल संरक्षण के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे जल संरक्षण अभियानों की प्रगति की समीक्षा भी की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाए। जल संरक्षण के मुद्दे पर बोलने के साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सल गतिविधियों पर लगातार नियंत्रण पाया जा रहा है। हाल ही में 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संकल्प है कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण अंत किया जाए। इस दिशा में राज्य और केंद्र मिलकर ठोस कदम उठा रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

करवाचौथ पर सोने की कीमत में राहत, आज का रेट जानें और समझदारी से करें खरीदारी

नई दिल्ली रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद आज गोल्‍ड और सिल्‍वर के दाम में गिरावट देखी जा रही है. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने और चांदी का दाम कम हुआ है, जिसका असर सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिलेगा. ग्‍लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों द्वारा ऊंची कीमतों पर मुनाफावसूली के कारण गोल्‍ड और सिल्‍वर के दाम में गिरावट आई है.  वहीं कल तक सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड हाई पर कारोबार कर रहे थे. चांदी कल 1.50 लाख रुपये के पार पहुंच गई थी, तो वहीं गोल्‍ड का रेट 1 लाख 23 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार जा पहुंचा था. हालांकि आज इन दोनों मेटल की कीमत गिरी है.  मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर आज सोना 5 दिसंबर वायदा बाजार के लिए 337 रुपये कम होकर 122872 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. वहीं 5 दिसंबर वायदा के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 875 रुपये कम होकर 148980 रुपये पर कारोबार कर रही है. आज सोने का हाई लेवल 123200 रुपये प्रत‍ि 10 ग्राम है, जबकि निचला स्‍तर 122111 रुपये प्रति 10 ग्राम है. सिल्‍वर प्राइस का आज हाई लेवल 149450 रुपये और निचला स्‍तर 143900 रुपये प्रति किलो है.  कल रिकॉर्ड हाई पर था सोना एमसीएक्‍स पर सोना गुरुवार को करीब 2000 रुपये चढ़कर 123450 रुपये पर पहुंच गया था, जबकि चांदी में 3000 रुपये प्रति किलो से भी ज्‍यादा तेजी देखी गई थी और यह 150282 रुपये प्रति किलो पहुंच गया था. वहीं सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी के भाव में तेजी देखी जा रही है.  IBJA पर 24 कैरेट सोना 1,22,570 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,22,079 रुपये और 18 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 91,928 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी की बात करें तो आईबीजेए पर सिल्‍वर प्राइस 154100 रुपये प्रति किलो पर है.  आपके शहर में गोल्‍ड प्राइस      आज दिल्‍ली में 10 ग्राम गोल्‍ड का रेट ₹1,24,300 है.      अहमदाबाद में 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्‍ड प्राइस ₹1,24,200 है.      चेन्‍नई में 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्‍ड प्राइस ₹1,24,370 है.      पटना में 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्‍ड प्राइस ₹1,24,200 है.      लखनऊ में 24 कैरेट 10 ग्राम ग्रोल्‍ड प्राइस आज ₹1,24,300 है.  कीमतों में बढ़ोतरी क्‍यों हो रही है?  इस साल सोने की कीमतों ने शानदार रिटर्न दिया है. 2025 में अब तक घरेलू हाजिर सोना 50% से ज्‍यादा उछल चुका है, जिसे कई वैश्विक कारकों का सपोर्ट मिला है. मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कमजोर डॉलर, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, और गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में लगातार निवेश के कारण सोना और चांदी में तेजी देखी जा रही है.

सीएम ने लाभार्थियों को योजनाओं से लाभान्वित कर किया प्रोत्साहित

झांसी में सीएम योगी ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के लाभार्थियों को दिए चेक सीएम योगी ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रदान किया टूल किट सीएम ने लाभार्थियों को योजनाओं से लाभान्वित कर किया प्रोत्साहित सीएम योगी ने नव निर्मित कन्वेंशन सेंटर का भी किया लोकार्पण झांसी जनपद के दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को योजना के चेक प्रदान किए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत टूलकिट का वितरण किया। सीएम ने इस अवसर पर लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया। इसी के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने नव निर्मित कन्वेंशन सेंटर का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के अंतर्गत हृदयेश पाल को आइसक्रीम विनिर्माण के लिए, संतोष कुमार को टेंट हाउस के लिए, प्रतीक को फोटो फ्रेमिंग और पूजन सामग्री निर्माण के लिए, पवन गौहर को डीजे साउंड सिस्टम के लिए, रीना सोनी को ब्यूटी पार्लर के लिए और रोहित कुशवाहा को फ्लावर डेकोरेशन का काम शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से चेक प्रदान किए। इसके अलावा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को सीएम ने टूल किट प्रदान किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुशबू साहू, आशा देवी, ज्योति, मोनू श्रीवास, समित कुशवाहा और सोनिया कुशवाहा को योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के व्यवसाय से संबंधित टूल किट प्रदान किया। इस मौके पर स्थानीय जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।

किसानों को राहत, बेघरों को सौगात: MSP पर दाल खरीदी की योजना लाए शिवराज सिंह

जबलपुर  देश के किसानों के लिए खुशखबरी है. दिवाली से पहले उन्हें बड़ा तोहफा मिलने वाला है. दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत दलहन को मिनिमम सपोर्ट प्राइज पर खरीदा जाएगा. यह कहना है केंद्र सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का. उन्होंने बताया, ''भारत दालों के मामले में अभी भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है और हमें विदेशों से दाल का आयात करना पड़ता है. भले ही हम दाल के दुनिया में सबसे बड़े उत्पादक देश हैं लेकिन हमारी जरूरतें भी ज्यादा हैं.'' 11 अक्टूबर को दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का ऐलान शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि, ''वे किसानों की दाल का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदने को तैयार हैं.'' दिल्ली स्थित पूसा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को "दलहन आत्मनिर्भरता मिशन" ऐलान करेंगे. 47 हजार करोड़ रुपये की दाल को विदेशों में इंपोर्ट किया जाएगा. इससे देश के लगभग 2 करोड़ किसानों को फायदा होगा. शिवराज सिंह चौहान ने बताया दलहन प्लान के बारे में  वहीं प्रधानमंत्री आवास से वंचित लोगों के लिए शिवराज सिंह चौहान ने एक खुशखबरी दी है. उन्होंने कहा, जल्द ही नया सर्वे होगा और जिन लोगों के नाम प्रधानमंत्री आवास से छूट गए हैं उन्हें भी प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा.'' मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को जबलपुर पहुंचे थे. समर्थन मूल्य में दलहन खरीदी शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि, ''भारत दलहन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देश भी हम ही हैं और दुनिया के सबसे बड़े आयातक देश भी हम ही हैं. मतलब भारत के लोग सबसे ज्यादा दाल का इस्तेमाल करते हैं.'' शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि, ''किसानों के लिए ऐसी स्कीम बनाई जा रही हैं जिसमें पूरी दलहन की फसल को सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद सके. इससे किसान ज्यादा से ज्यादा दालों की फसलों का उत्पादन करेंगे और हमारी विदेश से निर्भरता कम होगी.'' भारत में सबसे ज्यादा अरहर की दाल उत्पादित होती है, लेकिन इसके बावजूद हमें दक्षिण अफ्रीका से दाल का आयात करना पड़ता है. तब जाकर हमारी घरेलू जरूरत पूरी हो पाती है. शिवराज सिंह का कहना है, ''वे पहले लगातार जबलपुर आते थे लेकिन इस बार उनका दौरा लंबे अंतराल बाद हुआ है. वह भी मध्य प्रदेश के लोगों से मिलना जुलना चाहते हैं, लेकिन अब उनकी मजबूरियां हैं.'' शिवराज सिंह चौहान जबलपुर से होते हुए गोटेगांव गए जहां उन्होंने मंत्री प्रहलाद पटेल से मुलाकात की. प्रधानमंत्री आवास को लेकर घोषणा शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि, ''पिछले सवा साल में मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 19 लाख लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता दी गई है. लेकिन इसके बावजूद लोगों का कहना है कि उनके नाम प्रधानमंत्री आवास की सूची में शामिल नहीं हुए हैं. इसलिए सरकार ने एक बार फिर से सर्वे करवाया है इस सर्वे में छूटे हुए लोगों के नाम जोड़े गए हैं. इन सभी का एक बार वेरीफिकेशन होगा और यदि वेरिफिकेशन में लोग पात्र पाए जाएंगे तो इन्हें नए सिरे से प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा.''  

सुरक्षा को चेतावनी: पाकिस्तान में जैश की कथित महिला सुसाइड बॉम्बर योजना, जांच जारी

इस्लामाबाद  पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. संगठन ने पहली बार महिलाओं का एक अलग विंग बनाया है, जिसका नाम 'जमात-उल-मोमिनात' रखा गया है. ये ऐलान JeM के सरगना और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित मौलाना मसूद अजहर के नाम से जारी एक पत्र के जरिए किया गया. भर्ती 8 अक्टूबर 2025 से बहावलपुर के मर्कज उस्मान-ओ-अली में शुरू हो चुकी है. 'जमात-उल-मोमिनात' क्या है? महिलाओं की ब्रिगेड JeM का ये नया विंग पूरी तरह महिलाओं पर आधारित है. JeM के प्रोपगैंडा प्लेटफॉर्म अल-कलाम मीडिया द्वारा जारी पत्र के मुताबिक, इसका नाम 'जमात-उल-मोमिनात' है. भर्ती 8 अक्टूबर से शुरू हुई. इस ब्रिगेड का नेतृत्व सादिया अजहर कर रही हैं. सादिया मसूद अजहर की बहन हैं. उनके पति यूसुफ अजहर को 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' में मार दिया गया था.ये ऑपरेशन भारतीय सेना ने JeM के मुख्यालय मर्कज सुब्हानल्लाह पर चलाया था. JeM के केंद्रों में पढ़ने वाली आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं और कमांडरों की पत्नियों को भर्ती किया जा रहा है. ये केंद्र बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मंसहरा में हैं. संगठन महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें अपनी ऑपरेशनल टीम में शामिल करेगा. क्यों बदला फैसला? पुरानी सोच छोड़ी JeM जैसे देवबंदी विचारधारा वाले संगठन पहले महिलाओं को हथियारबंद जिहाद या लड़ाई में हिस्सा लेने से रोकते थे. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद ये सोच बदल गई. मसूद अजहर और उनके भाई तल्हा अल-सैफ ने मिलकर महिलाओं को शामिल करने का फैसला लिया. इससे JeM की ताकत बढ़ेगी. दुनिया के अन्य संगठनों की तरह? दुनिया में ISIS, बोको हराम, हमास और LTTE जैसे आतंकी ग्रुप्स ने महिलाओं को सुसाइड बॉम्बर के रूप में इस्तेमाल किया है. लेकिन JeM, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे पाकिस्तानी संगठन इससे दूर रहे. अब सूत्रों का मानना है कि JeM भी भविष्य में महिला सुसाइड बॉम्बर ट्रेन कर इस्तेमाल करेगा. ये बदलाव JeM की नई रणनीति का संकेत है. भारत के लिए क्या मतलब? खतरे की घंटी ये कदम भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. JeM पहले से कश्मीर में कई हमलों का जिम्मेदार है. महिलाओं की ब्रिगेड से आतंकी गतिविधियां और छिपकर हमले आसान हो जाएंगे. महिलाओं को बॉर्डर क्रॉसिंग या शहरों में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत को अपनी इंटेलिजेंस और बॉर्डर सिक्योरिटी को और मजबूत करना होगा. JeM का ये नया विंग आतंकवाद की पुरानी रणनीति को चुनौती देता है. मसूद अजहर की बहन के नेतृत्व में भर्ती शुरू होना चिंता की बात है. भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर JeM पर दबाव बनाना चाहिए. 

मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने किया सम्मान, खिलाड़ियों ने जताया आभार

सीएम योगी के सम्मान से बढ़ा खिलाड़ियों का हौसला   पदक विजेता बेटियों ने कहा– अब देश के लिए जीतेंगे मेडल  मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ से सम्मान पाकर खिले खिलाड़ियों के चेहरे  मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने किया सम्मान, खिलाड़ियों ने जताया आभार  योगी सरकार की खेल नीति से बदल रहा माहौल, बेटियाँ बोलीं– अब हमारी बारी है झांसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी की धरती पर न केवल खेलों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प दोहराया, बल्कि अपनी प्रेरणादायक उपस्थिति से युवा खिलाड़ियों के सपनों को पंख भी लगा दिए। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के 36वें क्षेत्रीय खेलकूद समारोह के समापन अवसर पर सीएम योगी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों को को सम्मानित किया। इन खिलाड़ियों के चेहरे पर चमकते आत्मविश्वास और आंखों में जगमगाते सपनों ने साबित कर दिया कि योगी सरकार का खेल को बढ़ावा देने की नीति न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत कर रहा है, बल्कि युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय पटल पर चमकाने का मंत्र भी दे रहा है। रुद्रिका सिंह, तारा देवी इंटर कॉलेज की होनहार छात्रा हैं, जिन्हें इस साल खेलो इंडिया में मेडल जीतने के लिए सम्मानित किया गया। रुद्रिका ने उत्साह से कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेल का ऐसा अच्छा माहौल बनाया है कि हर सपना साकार लगता है। आगे मैं और मेहनत करूंगी, जिससे देश के लिए खेलने का मौका मिले और मैं अपने देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकूं।  इसी समारोह में संध्या राजपूत, महाराजा अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की तेजतर्रार धाविका ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी 3000 मीटर और 1500 मीटर दौड़ की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आया। पिछले साल एसडीएफआई के अंडर 14 प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे सम्मानित किया, मैं बहुत खुश हूं। यहां खेल का अच्छा माहौल है, आगे देश के लिए मेडल जीतना चाहती हूं।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाली शीलू यादव, सरस्वती विद्या मंदिर की वेस्ट खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मैं साउथ कोरिया में मेडल जीती हूं। मैं एक अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट हूं। यहां झांसी में सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ती हूं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां सम्मानित किया है। मैं बहुत खुश हूं, आगे देश के लिए और मेडल जीतना चाहती हूं। काशी प्रांत की ओवरऑल चैंपियनशिप विजेता पल्लवी सिंह ने कहा कि इस सम्मान से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। वह केवल पदक ही नहीं बांटते हैं, बल्कि युवाओं के हौसले को भी मजबूत करते हैं।

ओबीसी कोटे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई नवंबर में, सरकार ने फिर समय मांगा

भोपाल   एक बार फिर मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण दिए जाने के मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई टाल दी गई है. पहले इस मुद्दे पर 8 अक्टूबर से नियमित सुनवाई होने वाली थी लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. MP सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई को 9 अक्टूबर से  किए जाने का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था. लेकिन एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से इस सुनवाई के लिए वक्त मांगा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही नोटिस जारी कर चुका है. वहीं कांग्रेस इस मामले में लगातार सरकार की मंशा पर सवाल उठाती आयी है. शुरू होते ही मांग ली तारीख सुनवाई के लिए सुबह 10.30 बजे जैसे ही बेंच शुरू हुई, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसमें समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी कुछ मुद्दों पर आपस में चर्चा करना है, इसलिए छुट्टियों के बाद इसमें समय दे सकें। अनारक्षित पक्ष ने कहा कि बेहतर होगा इसे खत्म किया जाए। इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से कहा गया कि इसे सुना जाए। इस पर मेहता ने कहा कि आगे बढ़ा दिया जाए। अब इस तारीख को होगी सुनवाई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जज के सामने ओबीसी आरक्षण के मामले में और वक्त देने की मांग रखते हुए कहा कि "इसमें कई तकनीकी पक्ष हैं, जिनको समझने के लिए थोड़े और वक्त की जरूरत है. वहीं अब इस मामले की सुनवाई अगले महीने (नवंबर) के पहले हफ्ते में होगी." ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा फाइनल हियरिंग होगी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस पर कहा कि ठीक है, अभी छुट्टियां लग जाएंगी तो आप बताइए क्या संभावित समय बताएं। मेहता ने कहा कि नवंबर पहले या दूसरे सप्ताह में। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरे सप्ताह नवंबर रख रहे हैं लेकिन यह फाइनल हियरिंग होगी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में केस वापस करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। दो मिनट की सुनवाई में डेट आगे बढ़ गई। ओबीसी कमेटी ने कहा कि हाईकोर्ट के स्टे हटा दीजिए इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी के अधिवक्ता वरूण ठाकुर ने कहा कि कम से कम हाईकोर्ट के स्टे को हटा दीजिए, एक्ट कहीं भी चैलेंज नहीं है। स्टे हटा दीजिए ताकि एक्ट के तहत भर्ती हो सके। लेकिन इस पर बेंच ने कोई जवाब नहीं दिया। 87 और 13 फीसदी का मामला उलझा मध्यप्रदेश की सियासत में कहा जाता है कि OBC समुदाय जिसके साथ रहेगा सत्ता की चाबी उसके पास रहेगी. यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों पिछड़ा वर्ग का हितैषी बनने की कोशिश करती हैं. विपक्ष का आरोप है सरकार गुमराह कर रही है, और सरकार कहती है — हम तो OBC के साथ हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ऐसे आरोपों को सिरे नकारते हैं. वे कहते हैं कि हमारी सरकार का रुख साफ है. हम ओबीसी को 27℅ आरक्षण देने के स्टैंड पर हम कायम हैं.  मध्यप्रदेश में OBC की आबादी 50 फीसदी से अधिक है, लेकिन ओबीसी वर्ग 27% आरक्षण के पेंच में उलझ गया है.यही आरक्षण युवाओं की गले की फांस बनता जा रहा है.दरअसल मध्यप्रदेश में हो रही भर्ती परीक्षाओं में 87:13 का फॉर्मूला लागू है, इसके तहत 87% रिजल्ट जारी हो रहे हैं जबकि 13% रिजल्ट होल्ड पर हैं आलम ये है कि कई युवा सरकारी नौकरी की राह देखते-देखते ओवर एज हो चुके हैं तो कुछ ने पढ़ाई ही छोड़ दी है. एमपी हाईकोर्ट जाएगा या नहीं यह तय नहीं यह केस अब हाईकोर्ट में वापस जाएगा या नहीं यह तय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर गुरुवार को कोई बात नहीं हुई। इसके पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्यों ना केस को हाईकोर्ट भेज दें, क्योंकि आरक्षण स्थानीय मुद्दे, टोपोग्राफी, जनसंख्या इन सभी से जुड़ा होता है और यह हाईकोर्ट बेहतर समझ सकता है। इस पर बात आई थी कि हाईकोर्ट ने कई याचिकाओं में स्टे दे दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम स्टे वेकेट करके इसे रिवर्ट कर देते हैं। इस पर अनारक्षित पक्ष को आपत्ति थी क्योंकि स्टे हटने का मतलब था कि मप्र में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण (27 percent OBC reservation case) लागू हो जाएगा। पांच मिनट की सुनवाई के बाद तय हुआ कि इस मुद्दे को प्रैक्टिकली देखा जाएगा और 9 अक्टूबर को सुनेंगे, लेकिन फिर सरकार ने समय मांग लिया। सरकार लगातार समय मांग रही है मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में लगातार समय मांग रही है। यह मामला साल 2019 से चल रहा है। पहले हाईकोर्ट ने इसमें ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण (27 percent OBC reservation) देने पर रोक लगाई और फिर इसमें सुनवाई की जगह शासन ने ट्रांसफर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी। इसके बाद इन्हें खारिज किया गया और हाईकोर्ट फिर भेजा गया लेकिन फिर वहां से सुप्रीम कोर्ट में दूसरी ट्रांसफर याचिकाएं लगाई गई। हाईकोर्ट में हर बार शासन ने यह कहा कि एपेक्स कोर्ट में केस है, इसलिए सुनवाई नहीं हो सकती है। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना गया और सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से कहा कि सरकार 6 साल से सो रही थी, अब अंतरिम राहत नहीं देंगे अंतिम फैसला देंगे। लेकिन 8 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अचानक कहा कि क्यों ना इसे हाईकोर्ट भेज दिया। लेकिन 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट भेजने पर कोई चर्चा नहीं हुई। ओबीसी कमेटी के आरोप: चुनाव के कारण राजनीति हुई ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा था कि स्टे वेकेट करते हुए केस हाईकोर्ट को रिमांड करेंगे। आज (9 अक्टूबर)  सुनवाई के दौरान उम्मीद थी कि स्टे हटकर हाईकोर्ट में केस जाएगा, लेकिन सुबह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताजी ने मेंशन लेकर मामले की फाइनल सुनवाई का निवेदन किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानते हुए दूसरे सप्ताह नवंबर में रखा गया है, फाइनल सुनवाई के लिए कहा है। अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि … Read more

टैरिफ हटने से फार्मा शेयरों को बड़ा फायदा, अमेरिकी फैसले से बढ़ी उम्मीदें

वाशिंगटन अमेरिका से गुरुवार को एक गुड न्यूज आई है. तमाम रिपोर्ट्स में ऐसा संकेत दिया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फार्मा प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ ऐलान से जेनेरिक दवाओं को दूर रख सकते हैं. US में बिकने वाली ज्यादातर दवाओं पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर महीनों की बहस के बाद, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह विदेशी देशों से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर शुल्क लगाने की योजना नहीं बना रहा है. बता दें ये भारत के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि देश से भारी मात्रा में ऐसे दवाओं का निर्यात अमेरिका को किया जाता है. इसके साथ ही इन रिपोर्ट्स के बाद फार्मा स्टॉक्स भी फोकस में हैं.  जेनेरिक दवाओं रह सकती हैं टैरिफ से दूर! वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए हैं कि ट्रंप प्रशासन आने वाले हफ्तों में फार्मा टैरिफ को लेकर अपने रुख में बदलाव कर सकता है. इसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ से अलग रख सकता है. बता दें कि ट्रंप द्वारा ब्रांडेड और पेटेंटेड विदेशी फार्मा प्रोडक्ट्स 100% टैरिफ लगाए जाने के ऐलान के बाद से ही जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ को लेकर काफी आशंकाएं और अटकलें चल रही हैं. रिपोर्ट के बाद शेयर बाजार में कारोबार के दौरान फार्मा स्टॉक्स में हरियाली भी देखने को मिल रही है.  भारत को कहा जाता है ‘दुनिया की फार्मेसी’ आईक्यूवीआईए (IQVIA) नामक वैश्विक चिकित्सा डेटा एनालिटिक्स कंपनी के अनुसार, अमेरिका में फार्मेसियों में बेची जाने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से 47 प्रतिशत दवाएं भारत से आती हैं। अमेरिका के घरेलू निर्माता करीब 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि बाकी हिस्सा अन्य देशों से आता है। जिसमें भारत की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। यही वजह है कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। वाइट हाउस का यू-टर्न वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा चल रही दवाओं पर टैरिफ जांच के दायरे को सीमित करता है। अप्रैल में शुरू हुई इस जांच में पहले कहा गया था कि “जेनेरिक और नॉन-जेनेरिक दोनों प्रकार की तैयार दवाओं” के साथ-साथ दवा निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल (ड्रग इंग्रेडिएंट्स) को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। लेकिन वाइट हाउस के भीतर इस पर भारी खींचतान देखने को मिली। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) गुट के कठोरपंथी सदस्य चाहते थे कि दवा निर्माण को वापस अमेरिका में लाया जाए और इसके लिए विदेशी दवाओं पर भारी टैरिफ लगाया जाए। उनका तर्क था कि यह “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा मामला है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप की घरेलू नीति परिषद के कुछ सदस्य इस फैसले के खिलाफ थे। उन्होंने दलील दी कि यदि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया गया, तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी और दवाओं की कमी भी हो सकती है। साथ ही, जेनेरिक दवाओं का उत्पादन भारत जैसे देशों में इतना सस्ता है कि भारी टैरिफ लगाने के बाद भी अमेरिकी उत्पादन आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा। ट्रंप की ‘टैरिफ पॉलिसी’ पर फिर सवाल ट्रंप प्रशासन पहले भी अपने टैरिफ युद्धों के कारण आलोचनाओं में रहा है। चीन पर लगाए गए टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर सोयाबीन की खरीद बंद कर दी, जिससे अमेरिकी किसान बुरी तरह प्रभावित हुए। अब अमेरिकी सरकार को किसानों की मदद के लिए 16 अरब डॉलर की सब्सिडी देनी पड़ रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन सब्सिडियों का असली बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ता पर ही पड़ेगा। एक किसान ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “सरकार हमसे पैसा वसूल रही है और वही पैसा हमें वापस दे रही है।” ऐसे में, ट्रंप प्रशासन ने शायद यह महसूस किया कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाकर जनता को एक और “कड़वी दवा” नहीं दी जा सकती। भारतीय दवाओं से अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को मिली भारी बचत अनुमानों के अनुसार, साल 2022 में भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को करीब 219 अरब डॉलर की बचत कराई। पिछले एक दशक में यह बचत 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय कंपनियों की अहम भूमिका टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में सिप्ला, सन फार्मास्युटिकल्स और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अवसाद, अल्सर और नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर जैसी प्रमुख बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं में आधे से अधिक प्रिस्क्रिप्शन सप्लाई किए। इनमें मेटफॉर्मिन (डायबिटीज), एटोरवास्टेटिन (कोलेस्ट्रॉल), लोसार्टन (ब्लड प्रेशर), और आम एंटीबायोटिक्स (एमॉक्सिसिलिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन) जैसी दवाएं शामिल हैं, जो अमेरिकी मरीजों के इलाज में रोजाना उपयोग की जाती हैं।

योगी सरकार ने किया साहसी बेटियों का सम्मान, समाज में गूँजा संदेश हर बालिका को मिले जीवन का अधिकार

मिशन शक्ति 5.0: बेटियों ने ठुकराया बाल विवाह, चुना शिक्षा और आत्मनिर्भरता का रास्ता  बाल विवाह को ना कार्यक्रम के जरिए योगी सरकार का 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प योगी सरकार ने किया साहसी बेटियों का सम्मान, समाज में गूँजा संदेश हर बालिका को मिले जीवन का अधिकार  योगी सरकार ने पेश की मिसाल, राष्ट्रीय औसत से नीचे यूपी में बाल विवाह  नाटक, गोष्ठी और संवाद के जरिए योगी सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ चलाया सामूहिक चेतना का अभियान  कानून और सामाजिक जागरूकता के साथ आगे बढ़ा मिशन शक्ति, बदल रही है समाज की सोच लखनऊ  मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत योगी सरकार ने बाल विवाह की कुप्रथा के खिलाफ ऐतिहासिक अभियान छेड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3 से 11 अक्टूबर) के थीम पर "बाल विवाह को ना" कार्यक्रम के माध्यम से सभी जिलों में एक साथ आयोजित कार्यक्रमों ने बालिकाओं और महिलाओं ने कुप्रथाओं के बंधनों से मुक्त करने का संकल्प दोहराया।  इस अभियान ने न केवल बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जन-जागरूकता फैलाई, बल्कि उन साहसी बालिकाओं को सम्मानित कर समाज को नई दिशा भी दिखाई, जिन्होंने दबावों के बावजूद विवाह ठुकराकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के दृष्टिकोण से यह प्रयास प्रदेश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान में प्रदेशभर के सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों और पंचायतों में सामुदायिक संवाद, गोष्ठियां, नाटक, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और व्याख्यान आयोजित किए गए। विशेषज्ञों, अध्यापकों, समाजसेवियों और बालिकाओं ने खुलकर बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक दुष्प्रभावों पर चर्चा की। बाल विवाह से बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, करियर की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। नाबालिग आयु में गर्भधारण मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बढ़ाता है, जबकि किशोरावस्था में मातृत्व शारीरिक-मानसिक समस्याएं पैदा करता है। घरेलू हिंसा और शोषण का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कुप्रथा समाज की आर्थिक-सामाजिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक पहलू रहा उन साहसी बालिकाओं का सम्मान, जिन्होंने सामाजिक दबावों का डटकर मुकाबला किया। इन बालिकाओं ने परिवार और समाज की अपेक्षाओं को तोड़कर किताबों का दामन थामा, स्वाभिमान को चुना। हर बालिका को अपने भविष्य का निर्णय खुद लेने का हक है।  उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान का दिख रहा सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बाल विवाह का औसत 15.8 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 से काफी नीचे है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर है, लेकिन विगत पांच वर्षों में योगी सरकार के प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय कमी आई है। विभाग ने अब तक 2000 से अधिक संभावित बाल विवाह रोककर सैकड़ों बालिकाओं को बचाया है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत यह अभियान सरकार की 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने की संकल्पना को साकार कर रहा है। समाज को आईना दिखा रहा योगी सरकार का अभियान भारत सरकार के बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत विवाह कराना या उसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। प्रदेश में जिला प्रोबेशन अधिकारियों को प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त कर कानूनी क्रियान्वयन मजबूत किया गया है। लेकिन कानून के साथ-साथ परिवार स्तर पर मानसिकता परिवर्तन जरूरी है। मिशन शक्ति 5.0 ने इसी दिशा में काम किया, जहां पिता-भाइयों को भी बालिकाओं के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। योगी सरकार का यह अभियान नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस कार्यक्रम ने बालिकाओं को न केवल संकल्प दिलाया, बल्कि समाज को आईना भी दिखाया।  महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जोहरी ने कहा, "बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के अधिकारों का घोर उल्लंघन है। सरकार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण से बालिकाओं को मजबूत बना रही है। आज बालिकाओं का साहस ही नया उत्तर प्रदेश गढ़ेगा। सामूहिक प्रयास से ही इस कुप्रथा का अंत संभव है।"

खीरी डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल बोलीं, सीएम योगी के मार्गदर्शन में सुनवाई से समाधान तक की नीति पर किया जा रहा काम

आईजीआरएस रैंकिंग में लखीमपुर खीरी ने मारी बाजी, बलरामपुर ने हासिल किया दूसरा स्थान    सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश भर में बुनियाद सुविधाओं का हो रहा विस्तार, हर वर्ग का हो रहा उत्थान   आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में डीएम लखीमपुर खीरी ने पहला, बलरामपुर ने दूसरा और बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया खीरी डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल बोलीं, सीएम योगी के मार्गदर्शन में सुनवाई से समाधान तक की नीति पर किया जा रहा काम   लखनऊ योगी सरकार ने पिछले साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश के सर्वांगीण विकास मेें नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेशवासियों के खुशहाल जीवन के लिए कई निर्णय लिये गये, जो पूरे देश में मॉडल बनकर उभरे। इन फैसलों को देश के कई अन्य राज्यों ने अपने यहां लागू भी किया, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व को दर्शाते हैं। इसी क्रम में सीएम योगी के सपनों काे साकार करने में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। आईजीआरएस से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है।आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में प्रदेशभर में लखीमपुर खीरी ने पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि बलरामपुर ने दूसरा और बरेली  ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  खीरी ने रैंकिंग की रिपोर्ट में सर्वाधिक 134 अंक प्राप्त कर प्रदेश भर में हासिल किया पहला स्थान आईजीआरएस द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट के अनुसार लखीमपुर खीरी ने मानक पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 134 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप लखीमपुर खीरी में विकास कार्यों समेत जनसुनवाई की शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि लखीमपुर खीरी की सितंबर माह की जनसुनवाई निस्तारण दर 95.71 प्रतिशत है, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक है।  जिले में सुनवाई से समाधान तक की नीति पर किया जा रहा काम लखीमपुर खीरी जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में रोजाना प्राथमिकता के आधार पर जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है। साथ ही समस्या के समयबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए मॉनीटरिंग भी की जाती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिले में सुनवाई से समाधान तक की नीति पर काम किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि लखीमपुर खीरी ने आईजीआरएस की सितंबर माह की रैंकिंग में पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जनसुनवाई में आए हर शिकायतकर्ता की समस्या के निस्तारण के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों की जवाबदेही तय की गई है। इससे न केवल शिकायतों की संख्या घटी बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन पर और मजबूत हुआ है। बलरामपुर ने दूसरा, बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया, टॉप फाइव जिलों में अंबेडकरनगर, सोनभद्र ने बनायी जगह बलरामपुर जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। साथ ही आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। उनकी समस्या के निस्तारण के संतुष्टीपूर्ण फीडबैक पर ही आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। ऐसे में आईजीआरएस की सितंबर माह की रिपोर्ट में बलरामपुर दूसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप आगे भी लगातार प्रयास रहेगा कि आम जनमानस की शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के अाधार पर किया जाए। बलरामपुर ने मानक पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 133 अंक प्राप्त किये हैं, जिसकी निस्तारण दर 95 प्रतिशत है। इसी तरह बरेली ने भी 133 अंक हासिल कर तीसरा, अंबेडकरनगर ने 132 अंक प्राप्त कर चौथा और सोनभद्र ने 131 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया है। वहीं टॉप टेन जिलों में हाथरस, श्रावस्ती, हमीरपुर, पीलीभीत और बस्ती ने जगह बनायी है।