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लहर खबरों की

Aastha Pandey

Writer News & Blogger

ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली

Pakistan

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भले ही नया नहीं है, लेकिन ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनियन डिबेट में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। यह बहस भारत-पाक नीति पर होने वाली थी, जिसमें दोनों देशों के वक्ताओं को अपने पक्ष रखने थे। भारत से एडवोकेट जे साई दीपक, एक्टिविस्ट मनु खजूरिया और पंडित सतीश के शर्मा शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही जानकारी मिली कि पाकिस्तानी पक्ष बहस में आने से पीछे हट गया है। 🇮🇳 क्या हुआ — असली मामला एक बहुप्रतीक्षित डिबेट थी — ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन में, जिस विषय पर बहस होनी थी: “This House Believes India’s Policy Towards Pakistan Is a Populist Strategy Sold as Security Policy”पाकिस्तान की तरफ से वक्ता रहने वाले थे: पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व सेना जनरल ज़ुबैर महमूद हयात और ब्रिटेन में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद फैसल — ये पहले ही लंदन पहुंचे हुए थे। भारत की ओर से मूल वक्ता थे: पूर्व सेना प्रमुख M.M. Naravane (सेवानिवृत्त), पूर्व कानून मंत्री व सांसद सुब्रमनियन स्वामी, और पूर्व राज्य मंत्री व नेता सचिन पायलट — लेकिन ये तीनों आखिरी समय पर उपलब्ध नहीं रहे। भारत-पक्ष की ओर से J Sai Deepak थे, जिनके अनुसार उन्होंने पहले से तैयारियों की पुष्टि कर रखी थी। बाद में, नियत वक्ताओं के न होने पर उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे अन्य व्यक्तियों — Manu Khajuria व Satish K Sharma — को विकल्प के रूप में शामिल कराया। ये खबर भी पढ़े…UIDAI: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर बंद, पोर्टल पर दी गई यह सुविधा भी 🛑 विवाद कैसे शुरू हुआ डिबेट से ठीक कुछ घंटे पहले ही आयोजकों यानी Oxford Union के अध्यक्ष Moosa Harraj (जो पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री के बेटे बताए गए हैं) ने J Sai Deepak को कह दिया कि पाकिस्तान की टीम लंदन नहीं पहुंची है — इसलिए डिबेट रद्द करनी पड़ी। लेकिन इसके ठीक बाद यह जानकारी मिली कि पाकिस्तान की टीम असल में लंदन में थी और होटल में रुकी थी — यानी उनकी अनुपस्थिति के दावे में गड़बड़ी थी। भारत की ओर से यह वादा था कि अगर समय रहते स्पीकर उपलब्ध न हो सके, तो दूसरा पैनल भेजा जाएगा — लेकिन आयोजकों ने वो प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इस वजह से British-based भारतीय नागरिक (Manu Khajuria, Satish K Sharma) की अनुमति देने में भी आनाकानी हुई ये खबर भी पढ़े…IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद 🇵🇰 पाकिस्तान का दावा और भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान हायर कमीशन लंदन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि “भारतीय वक्ताओं ने आखिरी समय पर बहस से पीछे हटने का फैसला किया”। इस दावे ने पाकिस्तान को वॉकओवर जीत का हवाला दिया। इसके जवाब में J Sai Deepak ने कहा कि भारत की टीम तैयार थी, और बहस रद्द होना असल में पाकिस्तान की टीम की अनुपस्थिति व आयोजन प्रबंधन की असफलता का परिणाम था। उन्होंने ईमेल और कॉल-लॉग्स सार्वजनिक कर दिए। Deepak ने कहा: “अगर पाकिस्तान वालों में हिम्मत है, तो अब वे सीधे भाजपा, मीडिया या सोशल-मीडिया के मंच की बजाय वही मंच चुनें जहाँ मुद्दे पर खुलकर बहस हो सके।” कुछ दक्षिण एशियाई और ब्रिटिश मीडिया तथा आकलनकर्ता भी इस पूरे नाटक को “स्टंट” या “ड्रामा” कह रहे हैं — उनका कहना है कि शुरुआत से ही यह बहस एक असली बहस नहीं थी, बल्कि एक प्रचार-प्रयोग था। ये खबर भी पढ़े…Assam Anti Polygamy Bill 2025: बहुविवाह पर सख़्त रोक: असम में बिल को मंजूरी 🎯 इस घटना का मतलब क्या है यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, जहाँ अकादमिक मंचों और डिबेट सोसायटीज़ की प्रतिष्ठा होती है, वे भी राजनीतिक एजेंडा, दावे और प्रचार के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच अब सिर्फ बॉर्डर या नीति का विवाद नहीं है; बहस की तक़ाज़ा, सार्वजनिक बाहस और छवि-प्रबंधन की जंग भी अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच गई है। जो देश या पक्ष खुलकर बहस से भागता दिखे — उसकी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आती है। इस मामले में, पाकिस्तान की ओर से पहले दावे, फिर उनके असत्य साबित होने से, बहस के महत्व और तर्क-वाद की जगह प्रचार की प्राथमिकता उजागर हुई। FAQs Q1: यह डिबेट आखिर किन राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच तय थी?इस डिबेट में पाकिस्तान की ओर थे पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व जनरल जुबैर महमूद हयात और यूके में पाकिस्तानी राजदूत मोहम्मद फैसल। वहीं भारत की ओर मूल वक्ता थे पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे, पूर्व मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी और सचिन पायलट। बाद में जब ये तीनों उपलब्ध नहीं हुए, तो भारत-पक्ष ने अन्य वक्ताओं (Manu Khajuria, Satish K Sharma) को प्रस्तावित किया। Q2: डिबेट रद्द क्यों हुई — पाकिस्तान के न पहुँचने की वजह से या भारत के हटने की वजह से?भारत-पक्ष का कहना है कि डिबेट रद्द इसलिए हुई क्योंकि पाकिस्तान की टीम आखिरी समय में उपस्थित नहीं हुई; आयोजक द्वारा सूचना दी गई थी कि पाकिस्तानी वक्ता लंदन में नहीं पहुँचे। वहीं पाकिस्तान हाई कमीशन का दावा था कि भारत के वक्ता पीछे हट गए। लेकिन J Sai Deepak ने दोनों दावों को असत्य साबित किया — उन्होंने कॉल-लॉग्स व ईमेल सबूत दिखाए। Q3: क्या इस घटना का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब विश्वसनीय बहस नहीं होती?हां — यह घटना एक उदाहरण है कि कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल सच्ची बहस की बजाय पब्लिक ट्रंपेटिंग व प्रचार के लिए किया जाता है। जहाँ पर तैयारी, भरोसा, और तर्क-वाद की बजाय, आखिरी समय की रणनीतियाँ, बदलाव और कथित ‘वॉकओवर’ की चाल होती है। इस तरह के मामलों में विश्वसनीयता और निष्पक्षता हमेशा नहीं रहती।

श्रीमद् भगवद् गीता का रहस्य और सार: आसान भाषा में समझें

BHAGAVAT

श्रीमद् भगवद् गीता का रहस्य क्या है? गीता का सार, अध्यायों का महत्व, रोज़ कौन सा अध्याय पढ़ें और मुक्ति का मार्ग—सबकुछ आसान, बोलचाल की हिंदी में समझें। यह लेख शिक्षा-प्रधान, विश्वसनीय और सरल भाषा में तैयार किया गया है। गीता का रहस्य: आखिर श्रीकृष्ण क्या कहना चाहते थे? श्रीमद् भगवद् गीता सिर्फ 700 श्लोकों की पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला एक आध्यात्मिक विज्ञान है। महाभारत के युद्ध के बीच अर्जुन मोह और भ्रम में थे। सामने अपने ही रिश्तेदार थे, इसलिए उनका मन युद्ध करने को तैयार नहीं था। तभी श्रीकृष्ण ने समय रोककर अर्जुन को वह ज्ञान दिया, जिसे हम आज “भगवद् गीता” कहते हैं। इस ज्ञान का उद्देश्य सिर्फ युद्ध कराना नहीं, बल्कि मनुष्य को “कर्तव्य, विवेक और आत्मा” का असली अर्थ समझाना था। कई आध्यात्मिक आचार्यों के अनुसार, गीता का मूल सार दो शब्दों में समझा जा सकता है— “पैकिंग और माल” जिसका अर्थ है— शरीर पैकिंग है और आत्मा असली माल है। जो आत्मा को पहचान लेता है, वही जीवन का असली रहस्य जान लेता है। कथा की तरह समझें: क्यों अर्जुन को युद्ध के लिए कहा गया? अर्जुन एक क्षत्रिय थे और उनका जीवन-धर्म युद्धभूमि से भागना नहीं था। लेकिन मोह के कारण वे कर्तव्य भूल चुके थे। श्रीकृष्ण जानते थे कि यह मोह थोड़ी ही देर का है। इसलिए उन्होंने अर्जुन को झकझोरकर कहा— “तुम सिर्फ अपने धर्म का पालन करो, अहंकार और मोह छोड़ दो।” कृष्ण ने अर्जुन को यह नहीं कहा कि – “सबको मार डालो” बल्कि कहा— “कर्तव्य करो, पर अहंकार मत करो।” यही कर्मयोग का मूल है। कृष्ण का ‘अंतरआशय’: जो समझना सबसे कठिन है कृष्ण स्वयं कहते हैं कि गीता का गहराई वाला अर्थ हर कोई नहीं समझ सकता।उनका कहना था कि— 1000 में से 1 इंसान गीता का स्थूल अर्थ समझ सकता है। ऐसे 1000 में से 1 ही सूक्ष्म अर्थ समझता है। और ऐसे ही कई स्तरों को पार करने के बादएक व्यक्ति कृष्ण का असली “अंतरआशय” समझ पाता है। यही कारण है कि गीता पर हजारों टीकाएँ लिखी गईं, लेकिन असली मर्म बहुत कम लोग समझ पाते हैं। ‘पैकिंग और माल’ का असली मतलब क्या है? इस दुनिया में हर इंसान को हम उसके शरीर के आधार पर पहचानते हैं।किसी का शरीर सुंदर है, किसी का छोटा है, कोई बूढ़ा है, कोई जवान। पर असली सत्य यह है— शरीर बदलता है, आत्मा नहीं बदलती। यह वैसा ही है जैसे बाजार में अलग-अलग पैकिंग होती है, लेकिन अंदर का माल एक जैसा शुद्ध हो सकता है। कृष्ण कहते हैं— “अपने अंदर के माल को पहचानो, वही मैं हूँ, वही तुम हो।” जब कोई इस सत्य को समझ लेता है, उसका जीवन बदल जाता है। गीता रोज़ क्यों पढ़नी चाहिए? भारतीय परंपरा में कहा जाता है कि— उपनिषद गाय हैं और गीता उनका दुग्ध है। यानी उपनिषद का सार गीता में ही मिलता है। गीता को समझने के चार चरण बताए गए है पठन/श्रवण – पहले सिर्फ शब्द समझ आते हैं मनन – फिर मतलब समझ आने लगता है निदिध्यासन – समझ को जीवन में उतारने की प्रक्रिया अनुभव – जब ज्ञान जीवन का हिस्सा बन जाता है इसीलिए गीता को बार-बार पढ़ना आवश्यक माना गया है। कौन सा अध्याय रोज़ पढ़ना चाहिए? हालाँकि पूरी गीता ज्ञान का खजाना है, लेकिन कुछ अध्याय खास रूप से दैनिक पठन के लिए जरूरी माने गए हैं। इसमें पूरी गीता का सार दिया गया है। 78 श्लोकों वाला यह अध्याय जीवन के व्यावहारिक मार्ग पर सबसे ज्यादा प्रकाश डालता है। रोज़ थोड़ी मात्रा में पढ़ना भी बहुत उपयोगी माना जाता है। अध्याय 5 – कर्मयोग का सरलतम वर्णन कर्म और मन के संबंध को समझाता है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर हर जीव में समान रूप से रहते हैं। यह अध्याय जाति-भेद, छुआ-छूत और भेदभाव खत्म करने का संदेश देता है। अध्याय 15 – आत्मा का ज्ञान इसमें बताया गया है कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है। यह अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ भी कहलाता है। अध्याय 14 – प्रकृति के तीन गुण सत्व, रज और तम – इन तीन गुणों से मनुष्य का स्वभाव कैसे बनता है, यह समझाया गया है। किस अध्याय से मुक्ति का मार्ग बताया गया है? अध्याय 16 और 18 – मोक्ष का ज्ञान इन अध्यायों में बताया गया है कि—कौन से गुण मनुष्य को बांधते हैं कौन से गुण मनुष्य को मुक्त करते हैं जीवन और मृत्यु के बाद आत्मा किस दिशा में जाती है अध्याय 8 – अंतिम समय का विज्ञान मृत्यु के समय व्यक्ति जो सोचता है, उसकी आत्मा वहीं पहुंचती है। इसलिए इस अध्याय को मरते हुए व्यक्ति को सुनाना लाभकारी माना जाता है। यह अध्याय “अक्षर ब्रह्म योग” भी कहलाता है। गागर में सागर: गीता का सार 12 सरल वाक्यों में 1. शरीर अस्थायी है, आत्मा अमर है।2. मनुष्य को अपने कर्तव्य से कभी नहीं भागना चाहिए।3. कर्म करो, फल की चिंता मत करो।4. मोह और डर मनुष्य को कमजोर बनाते हैं।5. ज्ञान और विवेक जीवन की असली शक्ति हैं।6. हर जीव में भगवान समान रूप से मौजूद हैं।7. मन को जीतने वाला संसार को जीत लेता है।8. सही विवेक मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है।9 लोभ, क्रोध, अहंकार से दूरी जरूरी है।10 जीवन में संतुलन सबसे बड़ी साधना है।11. भक्त, ज्ञानी और कर्मयोगी—सब ईश्वर तक पहुँच सकते हैं।12. आत्मा को पहचानना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है। FAQs नहीं। गीता का ज्ञान सार्वभौमिक है और हर धर्म व हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। हाँ। गीता आपको सही निर्णय, मानसिक शांति और जीवन का उद्देश्य समझाती है। मूल गीता दार्शनिक है, लेकिन सरल भाषा में टीकाएँ उपलब्ध हैं, जिन्हें हर कोई समझ सकता है। अध्याय 12 (भक्ति योग) सबसे सरल और सहज माना जाता है। हाँ, रोज़ कुछ श्लोक पढ़ना भी मन को शांत और मजबूत बनाता है।

MP Police: 30 करोड़ रूपए का एमडी जप्त, पुलिस ने किया भंडाफोड़

MP Police

MP Police MD worth Rs 30 crore seized police busted racket भोपाल, 28 नवंबर 2025। अवैध मादक पदार्थो के कारोबार में लिप्‍त तस्‍करों द्वारा अपनाए जा रहे नये-नये हथकंडे मध्‍यप्रदेश पुलिस की नारकोटिक्‍स विंग की सजगता की वजह से नाकाम साबित हो रहे है। नारकोटिक्‍स प्रकोष्‍ठ नीमच ने आज 28 नवंबर को ग्राम लसूड़िया, हस्तमुरार थाना रामपुरा, जिला नीमच में खेत पर बने मकान पर दबिश देकर एमडी बनाने के कारखाने का भंडा फोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से अवैध मादक पदार्थ एमडी 2 किलो 700 ग्राम ठोस एवं 16 किलो लिक्विड अवस्था में तथा करीब 70 किलो से अधिक एमडी बनाने के केमीकल तथा अन्य सामग्री भी जप्त की है। जप्त मादक पदार्थ एमडी तथा एमडी बनाने की सामग्री की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 30 करोड़ से अधिक है। मुहिम “नशे पर प्रहार” अवैध मादक पदार्थों की तस्‍करी पर कड़ाई से अंकुश लगाने के मकसद से पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देश पर मध्‍यप्रदेश पुलिस की नारकोटिक्‍स विंग द्वारा प्रदेशव्‍यापी विशेष मुहिम “नशे पर प्रहार” चलाया जा रहा है। इसी मुहिम के तहत अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्‍स के.पी. वेंकाटेश्वर राव के मार्गदर्शन में तथा उप पुलिस महानिरीक्षक नारकोटिक्स महेश चंद जैन के नेतृत्व में नारकोटिक्‍स विंग को यह सफलता मिली है। मोटर साइकिल, मोबाइल फोन भी जप्त अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक के.पी. वेंकाटेश्वर राव ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना पर नारकोटिक्‍स विंग ने कार्यवाही करते हुए, ग्राम लसूड़िया, हस्तमुरार थाना रामपुरा, जिला नीमच में खेत पर बने मकान पर दबिश देकर तीन आरोपी निरंजन दायमा, निवासी खेड़ी, थाना मनासा , अर्जुन गरासिया तथा रमेश गरासिया, निवासी लसूड़िया, थाना रामपुरा को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्‍जे से अवैध मादक पदार्थ एमडी 2 किलो 700 ग्राम ठोस एवं 16 किलो लिक्विड अवस्था में तथा करीब 70 किलो से अधिक एमडी बनाने के केमीकल तथा अन्य सामग्री तीन मोटर साइकिल, तीन मोबाइल फोन भी जप्त किए। एमडी, केमीकल, अन्‍य सामग्री सहिम सहित पुलिस ने लगभग 30 करोड़ रूपये की सामग्री जब्‍त की है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्‍ट के तहत प्रकरण कायम कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। नारकोटिक्स विंग के निरीक्षक राकेश चौधरी, निरीक्षक भारत सिंह चावड़ा, निरीक्षक हरीश सोलंकी, निरीक्षक तेजेन्द्र सिंह सेंगर तथा निरीक्षक मलय महंत एवं नारकोटिक्स इंदौर व नीमच टीम का सराहनीय योगदान रहा। साथ ही कार्रवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक, नीमच अंकित जायसवाल एवं जिला पुलिस बल नीमच का भी इस कार्रवाई में सराहनीय योगदान रहा।

Art & Culture: मानव संग्रहालय, “पंजाब की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत पर विशेष प्रदर्शनी”

Art & Culture

Art & Culture Museum of Manav Special Exhibition on Traditional Cultural Heritage of Punjab भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय विभिन्न भारतीय समुदायों की लोक–संस्कृति, पारम्परिक तकनीक और जीवन–शैली को प्रदर्शित करने हेतु एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थान के रूप में जाना जाता है। इसी श्रृंखला के अंतर्गत संग्रहालय में आगामी दिनों में पंजाब की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। विशेषताओं से परिचय संग्रहालय में इस प्रदर्शनी का उद्घाटन आज 29 नवंबर को शाम 4 बजे भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी सरबजीत सिंह द्वारा किया जायेगाI यह कार्यक्रम संग्रहालय के आवृति प्रांगण में संपन्न होगा, जिसका उद्देश्य दर्शकों को पंजाब के ग्रामीण जीवन, कृषि–आधारित अर्थव्यवस्था, धार्मिक–आध्यात्मिक परंपराओं तथा सामाजिक–सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित कराना है। मुख्य विशेषताएँ सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए बताया कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता का व्यापक परिचय कराना,पारम्परिक ज्ञान–प्रणालियों और जीवन–शैली को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना,स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना,एवं पंजाब की कृषि, संस्कृति और सामाजिक संरचना को व्यापक रूप से प्रदर्शित करना।

India Queen: मलेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व, विजेता बनीं जागृति

India Queen

Central India Queen Representing India in Malaysia Jagriti became the winner भोपाल। शहर की सेंट्रल इंडिया क्वीन विजेता रहीं डॉ. जागृति अग्रवाल ने हाल ही में मलेशिया में संपन्न हुए मिसेज क्लासिक यूनिवर्स कॉम्पिटीशन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस कॉम्पिटीशन में डॉ. जागृति एलीट कैटेगरी में विजेता बनने वालीं पहली भारतीय महिला बनीं। यह जानकारी शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ. जागृति अग्रवाल और पेजेंट इंडिया प्रमुख फराह अनवर ने दी। डॉ. जागृति अग्रवाल ने इस दौरान बताया कि यह कॉम्पिटीशन 17 से 23 नवंबर तक हुआ। इसमें 30 से अधिक देशों से 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। फराह अनवर ने कहा कि डॉ. जागृति अग्रवाल की यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय नारी की शक्ति, संकल्प और सौंदर्य के संगम की वह मिसाल है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा देती है। उन्हें मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों की अनेक महिलाओं को अपने सपनों के रास्ते पर आगे बढ़ने का साहस देता रहेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जागृति छह अलग-अलग क्राउन अपने नाम कर चुकी हैं, लेकिन यह जीत उनके करियर का अब तक का सबसे प्रतिष्ठित टाइटल साबित हुआ है। इस अवसर पर चीन में आयोजित सुपर मॉडल यूनिवर्स प्रतियोगिता में टॉप छह में स्थान प्राप्त कर देश का नाम रोशन करने वाली याशिका साटनकर भी उपस्थित रहीं। दोस्त से मिली प्रेरणा डॉ. जागृति बताती हैं कि दिसंबर 2024 में उनकी एक दोस्त से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने फैशन की दुनिया में कदम बढ़ाया। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका यह कदम उन्हें ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में इतनी जल्दी विशिष्ट पहचान दिलाएगा। लेकिन उनकी कड़ी मेहनत, जिद् और जुनून से यह संभव हो पाया है। जागृति ने बताया कि इस ब्यूटी कॉम्पिटीशन के लिए उन्होंने अपने शरीर और व्यक्तित्व दोनों में व्यापक परिवर्तन लाया और अपनी जीवनशैली को अनुशासित किया। कॉम्पिटीशन की तैयारी के दौरान बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन पर उन्होंने सबसे अधिक फोकस किया। एक ब्रेन ट्रेनर के रूप में कार्यरत् जागृति जानती थीं कि मानसिक दृढ़ता और भावनात्मक संतुलन ही उन्हें मंच पर अलग पहचान देगा। इस कठिन यात्रा में मेरे परिवार और पति ने हर कदम पर मेरा समर्थन किया और वही ऊर्जा मेरी ताकत बनकर उभरी। जागृति ने बताया कि इस कॉम्पिटीशन के लिए आन्सी नाइडू ने नेशनल कॉस्ट्यूम और विनिंग गाउन डिजाइन किया। अल्पा रावल ने एलीगेंट कॉक्टेल लुक तैयार किया। ज्योति परिहार ने डे-टू-डे लुक में भारतीयता का खूबसूरत स्पर्श दिया और जूबी ने मेकअप और ग्रूमिंग की जिम्मेदारी संभाली। विश्व मंच पर प्रदर्शन कॉम्पिटीशन के सांस्कृतिक राउंड में जागृति ने भारतीय परंपराओं की सौंधी महक और हमारी धरोहर की गरिमा को विश्व मंच पर उतारकर सबका दिल जीत लिया। उन्होंने विशेषतौर पर भारतीय परिधान चुना और भारतीय संस्कृति को दर्शाती एक खूबसूरत ब्राइडल ड्रेस में जब वे जजों के सामने पहुंचीं, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। जागृति ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक खिताब जीत लेना नहीं है, बल्कि उन महिलाओं के लिए नई राह खोलना है, जो उम्र, वजन या रंग जैसी सामाजिक धारणाओं के कारण स्वयं को सीमित समझती हैं। उन्होंने कहा, मैं चाहती हूं कि महिलाएं यह जानें कि किसी भी मुकाम को पाने के लिए उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है।

Nagar Nigam Bhopal: अमले ने हटाए अतिक्रमण, D-Mart, चूना भट्टी से सामान जप्त

Nagar Nigam Bhopal

Municipal Corporation Bhopal Staff removed encroachments seized goods from D-Mart and lime kiln भोपाल। नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमणों एवं अवैध निर्माणों को हटाने की कार्यवाही निरंतर जारी है। इसी तारतम्य में निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के दलों ने सीएम हेल्प लाईन, कॉल सेंटर व अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निराकरण तथा निगम की नियमित कार्यवाही के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमण कर लगाये गये ठेले, गुमठियां, सब्जी आदि की दुकानें सहित अन्य प्रकार के अतिक्रमणों को हटाने के साथ ही अवैध रूप से बनाये गये शेड, चबूतरे, छप्पर, झुग्गी, पक्का जीना, मुर्गे के पिंजरे आदि को भी हटाने की कार्यवाही की और ठेले, तखत, काउंटर, तराजू, लाईट, स्टैण्ड, पल्लियां, टेबिल, स्टूल आदि सहित अन्य प्रकार का सामान जप्त किया। क्षेत्रों में अतिक्रमण निगम आयुक्त संस्कृति जैन के निर्देश पर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के दलों ने शुक्रवार को कोलार विषाल मेगा मार्ट, निर्मलादेवी गेट, ललिता नगर, डीमार्ट, चूना भट्टी, सर्वधर्म कालोनी, जे.के. हास्पिटल, साकेत नगर, एम्स गेट नं0-3, रानी कमलापति रेल्वे स्टेषन, 11 नम्बर सांई बोर्ड, बाबा नगर, एम.पी. नगर जोन-1 एक्सिस बैंक, न्यू मार्केट नो-व्हीकल जोन, काटजू हास्पिटल, ,रंगमहल, न्यू मार्केट संट्रल बैंक, जवाहर चौक सरस्वती नगर, कमला पार्क, खजूरी पिलिया गांव, अयोध्या बायपास, खजूरी रोड, अषोका गार्डन मण्डी, अषोका गार्डन, रेल्वे स्टेषन प्लेटफार्म नं0-1, जहांगीराबाद मेन रोड, हमीदिया रोड, हमीदिया अस्पताल गेट, काले दरवाजा, बैरागढ़ चंचल चौराहा, गांधीनगर बस स्टेण्ड आदि क्षेत्रों में अतिक्रमणों को हटाने की कार्यवाही करते हुए सड़कों, फुटपाथों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से लगाये गये ठेले, गुमठियां, काउंटर, पान पार्लर, सब्जी आदि की दुकानें हटाई। टेबिल, काउंटर, तराजू खजूरी रोड क्षेत्र में वार्ड कार्यालय के पास अवैध रूप से बनाया गया 01 शेड व 01 चबूतरा, अयोध्या नगर में घर के सामने अवैध रूप से लगाई जाली, रेल्वे स्टेशन प्लेटफार्म क्र. 01 की ओर अवैध रूप से बना छप्पर एवं 01 झुग्गी, अशोका गार्डन क्षेत्र से 01 अवैध रूप से बना छप्पर तथा अशोका गार्डन पानी की टंकी के पीछे अवैध रूप से बनाया गया पक्का जीना तोड़ने की कार्यवाही की। निगम अमले ने कार्यवाही के दौरान 05 ठेले, 01 तखत, 10 पल्लियां, 07 स्टैण्ड, 03 टेबिल, 01 काउंटर, 01 तराजू सहित अन्य प्रकार का सामान जप्त किया।

MP Police: वाहन चोरो पर लगातार कार्रवाई, 44 मोटरसाइकिलें बरामद

MP Police

MP Police Continuous action against vehicle thieves 44 motorcycles recovered भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस ने विभिन्न जिलों में सतत निगरानी और प्रभावी अन्वेषण के माध्यम से विगत एक सप्‍ताह में वाहन चोर गिरोहों का पर्दाफाश करते हुए चोरी की कुल 44 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। साथ ही पुलिस ने शातिर चोरों को भी गिरफ्तार किया है। यह अभियान प्रदेशभर में वाहन चोरी पर सख्त नियंत्रण और अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की दिशा में पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गिरोह का भंडाफोड़ छिंदवाड़ा जिले की कुण्डीपुरा पुलिस ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए चार आरोपी संतोष खरपूसे, प्रमोद पुरी गोस्वामी, गगन नेवारे और सुधांशु भूषण को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने छिंदवाड़ा व बालाघाट जिलों से 20 मोटरसाइकिलें (4 बुलेट) चोरी करने की बात स्वीकार की। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने एक खंडहरनुमा कमरे से लगभग 17 लाख रूपए मूल्य की मोटरसाइकिलें बरामद की है। 11 मोटरसाइकिलें बरामद गुना की जिले में चलाए जा रहे सघन वाहन चैकिंग अभियान के दौरान कोतवाली पुलिस ने भुल्लनपुरा रोड पर लाखन कुशवाह और सोनू राठौर को चोरी की मोटरसाइकिल सहित पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने अलग-अलग स्‍थानों से 11 मोटरसाइकिलें चोरी करना स्वीकार किया। जिनकी कीमत लगभग 5 लाख 50 हजार रूपए है। इसी प्रकार उज्‍जैन के नीलगंगा पुलिस ने चोरी हुई 1 बुलेट, सागर के थाना खुरई पुलिस ने 4 मोटरसाइकिलें, कटनी में कोतवाली पुलिस 6 मोटरसाइकिल और एनकेजे पुलिस ने 1 मोटरसाइकिल तथा शाजापुर में शुजालपुर मंडी थाना पुलिस ने 1 मोटरसाइकिल बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस प्रकार पुलिस ने कुल 13 मोटरसाइकिलें बरामद की है। सुरक्षा एवं विश्वास की भावना पुलिस की इन कार्रवाईयों ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की संपत्ति सुरक्षा, अपराध पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत है। तकनीकी संसाधनों, निगरानी तंत्र और तत्पर फील्ड टीमों के समन्वय से पुलिस ने वाहन चोरी जैसे अपराधों पर निर्णायक अंकुश लगाया है। यह सतत और संगठित कार्रवाई न केवल अपराधियों के मनोबल को तोड़ रही है, बल्कि आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को भी सुदृढ़ कर रही है।

IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद

IFFI Awards

IFFI Awards Japanese A Pale View of Hills enjoys IFFI fans गोवा। जापानी फिल्म निर्देशक कएई इशिकावा आज अपनी दूसरी फिल्म ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में मीडिया से रू-ब-रू हुए। इस फिल्म को इस वर्ष 56वें ​​भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई – इफ्फी), गोवा में ‘कंट्री फोकस: जापान’ के एक हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया। आईएफएफआई में आने वाले दर्शकों को समकालीन जापानी सिनेमा के विस्तृत परिदृश्य से परिचय कराने के लिए इसका प्रदर्शन किया गया। ‘कंट्री फोकस जापान की सिनेमाई विरासत को आकार देने वाले उभरते स्वरों और प्रसिद्ध फिल्मकारों, दोनों की रचनात्मक जीवंतता का जश्न मनाते हुए, ‘कंट्री फोकस: जापान’ शैलियों की एक असाधारण श्रृंखला को समेटे हुए है। इसमें स्मृति, पहचान और अपनेपन की खोज करने वाले अंतरंग नाटकों से लेकर ऐतिहासिक महाकाव्य, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, बच्चों की कहानियां और अमूर्त, गैर-रेखीय प्रयोग शामिल हैं, जो सिनेमाई रूप की सीमाओं को तोड़ते हुए उनका विस्तार करते हैं। निर्देशक इशिकावा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “यह मेरी पहली भारत यात्रा है और मैंने इस अनुभव का भरपूर आनंद लिया है। यह फिल्म नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक काज़ुओ इशिगुरो के 1982 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इस वर्ष, जापान में कई फिल्में इसी विषय पर बनी हैं, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुए 80 वर्ष हो रहे हैं। मैं भी हमेशा से इस विषय पर बोलना चाहता था, लेकिन मुझे सही भाषा ढूंढ़ने में दिक्कत हुई, क्योंकि मैंने उस दौर का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया था। जब मुझे यह उपन्यास मिला, तो यह विषय मेरे लिए और भी सुलभ हो गया और इसने मुझे इस कहानी को कहने का आत्मविश्वास दिया।” लेखिका पर आधारित इस फिल्म की कहानी एक युवा महत्वाकांक्षी जापानी-ब्रिटिश लेखिका पर आधारित है, जो अपनी माँ एत्सुको के नागासाकी में युद्ध के बाद के अनुभवों पर आधारित एक किताब लिखने का निश्चय करती है। अपनी बड़ी बेटी की आत्महत्या से अब भी त्रस्त, एत्सुको 1952 की यादें ताज़ा करना शुरू करती है, उस वक्त वो एक युवा गर्भवती माँ थी। उसकी यादें सचिको से उसकी मुलाकात पर केंद्रित हैं, जो अपनी बेटी मारिको के साथ विदेश में एक नया जीवन शुरू करने के लिए दृढ़ थी। मारिको कभी-कभी एक भयानक महिला से जुड़ी परेशान करने वाली यादों का ज़िक्र करती है। जैसे-जैसे लेखिका अपनी माँ के नागासाकी में बिताए वर्षों के अंशों और स्मृति चिन्हों को एक साथ जोड़ती है, उसे एत्सुको द्वारा साझा की गई यादों और उनके द्वारा प्रस्तुत वास्तविकता के बीच परेशान करने वाली विसंगतियां नज़र आने लगती हैं। महिलाओं के बारे निर्देशक इशिकावा ने बताया कि वो इस कहानी की ओर आकर्षित इसलिए हुए कि यह सिर्फ़ परमाणु बम के बारे में ही नहीं, बल्कि विभिन्न युगों की महिलाओं के बारे में भी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ख़ुद पटकथा लिखी और फ़िल्म का संपादन भी किया, क्योंकि वे संपादन को लेखन प्रक्रिया का अंतिम चरण मानते हैं। उन्होंने आगे बताया कि टीम को फिल्म के लिए सबसे उपयुक्त अंत तय करते समय तीन देशों – जापान, ब्रिटेन और पोलैंड – के दृष्टिकोणों में संतुलन बनाना था। हर एक ने एक अलग संवेदनशीलता पैदा की: ब्रिटिश निर्माता एक स्पष्ट और अधिक परिभाषित निष्कर्ष को प्राथमिकता देते थे; जबकि पोलिश निर्माताओं का मानना ​​था कि बहुत अधिक व्याख्या से फिल्म का प्रभाव कम हो जाएगा। जापानी दृष्टिकोण इन दोनों के कहीं बीच में था। उन्होंने बताया कि उन्हें इस सहयोगात्मक प्रक्रिया और व्यापक चर्चाओं का सचमुच आनंद आया, जिसने अंततः फिल्म को सही अंत तक पहुंचाया।https://www.youtube.com/embed/IM3wArsfda0 आईएफएफआई के बारे मेंhttps://www.youtube.com/embed/CspDNSAOrpw 1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया में सिनेमा का सबसे पुराना और सबसे बड़ा उत्सव है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी),  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी), गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई महाशक्ति के रूप में विकसित हुआ है—जहां पुनर्स्थापित क्लासिक फिल्में साहसिक प्रयोगों से मिलती हैं, और दिग्गज कलाकार नए कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। आईएफएफआई को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका विद्युत मिश्रण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक दर्शन, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्‍स फिल्म बाजार हैं जहां विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार तटीय वातावरण में आयोजित 56वें आईएफएफआई में भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और आवाज़ों की एक चमकदार श्रृंखला का संयोजन देखने को मिला।